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परीक्षा के समय समाज और परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी

परीक्षा के समय समाज और परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी  वाराणसी परीक्षा केवल प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका के बीच घटित होने वाली एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं है। यह एक ऐसा समय होता है जब किसी विद्यार्थी का मन, उसका आत्मविश्वास, उसका पारिवारिक परिवेश और पूरा सामाजिक वातावरण—सब मिलकर उसके भविष्य की दिशा तय करते हैं। परीक्षा के दिनों में बच्चे अकेले परीक्षार्थी नहीं होते; सच तो यह है कि उस अवधि में पूरा परिवार और समाज, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, परीक्षार्थी बन जाता है। आज जब बोर्ड परीक्षाएँ समीप आती हैं, तो समाज में अचानक एक विशेष प्रकार की हलचल दिखाई देने लगती है। जगह-जगह मोटिवेशनल भाषण, लंबे-चौड़े वक्तव्य, सोशल मीडिया पर उपदेशात्मक संदेश, सफलता के किस्से और असफलता से डराने वाले उदाहरण—सब कुछ एक साथ बच्चों पर बरसने लगता है। मंशा भले ही अच्छी हो, पर प्रश्न यह है कि क्या यही वह सहयोग है जिसकी एक परीक्षार्थी को सबसे अधिक आवश्यकता होती है? परीक्षार्थी को इस समय सबसे अधिक आवश्यकता होती है—शांति, स्थिरता और अनुकूलता की। विषयवस्तु की तैयारी जितनी महत्त्वपूर्ण है, उतना ही महत्त्वपूर्ण वह मानसिक और भावनात्मक परिवेश है जिसमें वह तैयारी की जा रही है। ज्ञान तभी फलित होता है जब मन शांत हो, जब वातावरण सहयोगी हो और जब परीक्षार्थी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। अक्सर यह देखा जाता है कि परीक्षा के समय घर का वातावरण अनजाने में ही तनावपूर्ण बना दिया जाता है। छोटी-छोटी बातों पर चर्चा, पारिवारिक समस्याओं का अनावश्यक विस्तार, रिश्तों के तनाव, भविष्य को लेकर आशंकाएँ—ये सब बातें उस मन पर अतिरिक्त बोझ डाल देती हैं, जो पहले ही परीक्षा की जिम्मेदारी से भरा होता है। बच्चे इन बातों को व्यक्त नहीं कर पाते, पर भीतर ही भीतर उनका मन विचलित होता चला जाता है। यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी से अधिक अपेक्षा नहीं, बल्कि अधिक समझ की आवश्यकता होती है। उसे बार-बार यह याद दिलाना कि यह परीक्षा जीवन का निर्णायक मोड़ है, उसे और अधिक दबाव में डाल देता है। वास्तव में, परीक्षार्थी स्वयं इस तथ्य से परिचित होता है; उसे इसकी पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि भरोसे की ज़रूरत होती है। परीक्षा के समय समाज और परिवार को कुछ समय के लिए स्वयं परीक्षार्थी बनने की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह नहीं कि वे किताबें खोलकर पढ़ने लगें, बल्कि यह कि वे परीक्षार्थी की संवेदनाओं को पढ़ें। वे यह समझने का प्रयास करें कि इस समय कौन-सी बात उसे सशक्त बनाएगी और कौन-सी उसे कमजोर कर देगी। एक सकारात्मक परीक्षा-परिवेश वही होता है जहाँ अनावश्यक हस्तक्षेप न हो। जहाँ बच्चे को अपनी दिनचर्या तय करने की स्वतंत्रता मिले। जहाँ उसकी नींद, भोजन और एकांत का सम्मान किया जाए। जहाँ उससे यह अपेक्षा न की जाए कि वह हर समय प्रसन्न दिखाई दे या हर प्रश्न का उत्तर दे। कई बार परीक्षार्थी को परीक्षा देने के लिए रिश्तेदारों या परिचितों के यहाँ जाना पड़ता है। ऐसे में वहाँ उपस्थित लोगों का व्यवहार अत्यंत संवेदनशील होना चाहिए। जिज्ञासावश पूछे गए प्रश्न—“तैयारी कैसी है?”, “इस बार कितने प्रतिशत आएँगे?”—अक्सर मन पर अनावश्यक दबाव बना देते हैं। उस समय सबसे बड़ा सहयोग यह होता है कि परीक्षार्थी को सामान्य, सहज और स्वाभाविक वातावरण दिया जाए। यह भी देखा गया है कि कई अत्यंत प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल इसलिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते क्योंकि परीक्षा के दौरान उनका पारिवारिक या सामाजिक परिवेश असंतुलित रहा। विषय की समझ और परिश्रम के बावजूद, मन की अस्थिरता उनकी क्षमता को सीमित कर देती है। यह एक गंभीर सामाजिक प्रश्न है, जिस पर सामूहिक चिंतन आवश्यक है। परीक्षा के समय जीवन की अन्य समस्याओं को परीक्षार्थी से यथासंभव दूर रखना चाहिए। जीवन में समस्याएँ हमेशा रहेंगी—यह जीवन का स्वभाव है। पर परीक्षा के कुछ सप्ताह ऐसे होते हैं, जब समाज और परिवार को यह जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि वे उन समस्याओं का भार परीक्षार्थी के कंधों पर न डालें। एक संतुलित परिवार वही है जो परीक्षा के समय विवादों को स्थगित करना जानता है। जहाँ यह समझ हो कि अभी प्राथमिकता क्या है। जहाँ सहयोग शब्दों से नहीं, व्यवहार से दिखाई दे। समाज की भूमिका भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। शिक्षक, पड़ोसी, रिश्तेदार, मित्र—सभी को यह समझना चाहिए कि उनका एक छोटा सा वाक्य भी परीक्षार्थी के मन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। सकारात्मक ऊर्जा वही नहीं होती जो ऊँचे स्वर में प्रेरणा देती है, बल्कि वह भी होती है जो मौन में सुरक्षा का एहसास कराती है। परीक्षा के दौरान समाज को एक सामूहिक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना चाहिए—जहाँ तुलना न हो, उपहास न हो, डर न हो। जहाँ सफलता को सम्मान मिले और असफलता को स्वीकार्यता। यह भी आवश्यक है कि परीक्षार्थी को यह महसूस कराया जाए कि उसका मूल्य केवल परीक्षा परिणाम से निर्धारित नहीं होता। परीक्षा जीवन का एक चरण है, सम्पूर्ण जीवन नहीं। यह भाव यदि ईमानदारी से व्यवहार में उतारा जाए, तो परीक्षार्थी का आत्मविश्वास स्वतः सुदृढ़ होता है। परीक्षा के समय परिवार और समाज का दायित्व केवल समर्थन देना नहीं, बल्कि सही समय पर चुप रहना भी है। यह मौन कई बार सबसे बड़ा सहयोग बन जाता है। यदि हम वास्तव में चाहते हैं कि हमारे बच्चे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें, तो हमें उनके लिए एक ऐसा वातावरण बनाना होगा जहाँ वे स्वयं को बोझ नहीं, बल्कि भरोसे से घिरा हुआ महसूस करें। अंततः परीक्षा एक व्यक्तिगत प्रयास है, पर उसकी सफलता सामूहिक संवेदनशीलता पर निर्भर करती है। जिस दिन समाज और परिवार यह समझ लेंगे कि परीक्षा के समय उन्हें भी परीक्षार्थी बनना है—उस दिन न केवल परिणाम बेहतर होंगे, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था अधिक मानवीय और संवेदनशील बन सकेगी। लेखक  डॉ० सदानन्द गुप्ता अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वाराणसी

मध्य प्रदेश बोर्ड परीक्षा में नई पहल: ईमानदारी की पेटी, सेंटरों पर CCTV और ऐप से मॉनिटरिंग

भोपाल  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा 10 फरवरी से शुरू होने जा रही है. इस परीक्षा में बच्चों के ज्ञान के साथ नैतिकता की भी परीक्षा होगी. एमपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए बच्चों की नैतिकता की कसौटी कसेगा. इसके लिए सभी परीक्षा केन्द्रों के बाद इस बार ईमानदारी की पेटी भी रखी जाएगी, ताकि नकल करने के इरादे से परीक्षा हॉल में पहुंचने वाले बच्चे पहले ही नकल सामग्री को इस पेटी में डालें और पूरी ईमानदारी से परीक्षा में शामिल हों. उधर एमपी बोर्ड परीक्षा में नकल और गड़बड़ियों को रोकने कई तैयारियां की हैं. बच्चे ईमानदारी से दें परीक्षा माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव बुद्धेश कुमा वैद्य कहते हैं कि "हमारी कोशिश है कि पूरी परीक्षा पारदर्शी हो. इसके लिए कई तरह के काम किए जा रहे हैं. इसमें स्टूडेंट्स को नैतिकता की कसौटी पर कसने के लिए सभी परीक्षा केन्द्रों के बाहर इस बार एक बॉक्स लगाया जा रहा है. इसका नाम ईनामदारी की पेटी रखा गया है. इसका उद्देश्य है कि यदि कोई बच्चा कोई नकल सामग्री लेकर पहुंचा है, तो वह परीक्षा शुरू होने के पहले ही इस बॉक्स में उसे डाल दे और अपनी पूरी मेहनत से परीक्षा दे. एडमिट कार्ड पर होगा क्यूआर कोड इस बार स्टूडेंट्स के प्रवेश पत्र पर क्यूआर कोड की भी व्यवस्था की गई है. प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) को स्कैन करते ही स्टूडेंट्स से जुड़ी पूरी जानकारी पलक झपकते ही सामने आ जाएगी. इससे बच्चे की पुष्टि करना आसान होगा. पेपर लीक जैसे घटनाओं को रोकने के लिए इस बार प्रश्न पत्रों को थाने से उठाने से लेकर परीक्षा केन्द्र तक पहुंचने तक की हर बंडल की लोकेशन ट्रेस होगी. इसके लिए एक एप तैयार किया गया है. इसमें प्रश्न पत्र उठाने और केन्द्र पर सौंपने के दौरान संबंधित व्यक्तियों को एप पर सेल्फी अपलोड करनी होगी. हर प्रश्न पत्र का पैकेट नंबर एप पर दर्ज करना होगा. इसके बाद प्रश्न पत्र को खोलने से लेकर इसके वितरण और परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपी के बंडल बनने और मूल्यांकन केन्द्र तक जाने तक की एंट्री इस एप के माध्यम से ही होगी." कैमरों से होगी लाइव निगरानी उधर एमपी बोर्ड ने प्रदेश भोपाल, इंदौर, देवास, सागर, दमोह, रीवा, भिंड मुरैना, ग्वालियर जैसे 9 जिलों के 226 परीक्षा केन्द्रों को अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों की सूची में रखा है. इन केन्द्रों में पूर्व में नकल के मामले सामने आ चुके हैं. इसको देखते हुए इन सभी केन्द्रों पर इस बार करीबन 1000 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों के जरिए परीक्षा की लाइव स्थिति को एमपी बोर्ड मुख्यालय में देखा जा सकेगा. इसके लिए कंट्रोल कमांड सेंटर बनाया गया है. प्रदेश में परीक्षा के लिए 3856 परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं, जहां करीबन 16 लाख बच्चे परीक्षा देंगे. इन परीक्षा केन्द्रों में 448 संवेदनशील केन्द्र भी चिन्हित किए गए हैं. इन परीक्षा केन्द्रों पर विशेष निगरानी रहेगी. सिर्फ कलेक्टर प्रतिनिधि के पास होगा मोबाइल एमपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान कोई भी टीचर अपने साथ मोबाइल नहीं रख सकेगा. एमपी बोर्ड ने इसके लिए सभी जिलों में निर्देश जारी कर दिए हैं. सिर्फ कलेक्टर प्रतिनिधि ही अपने साथ मोबाइल रख सकेंगे. परीक्षा शुरू होने के पहले सभी ड्यूटी टीचर को अपने मोबाइल ऑफिस में जमा कराने होंगे.

उत्तर बस्तर कांकेर : महापरीक्षा अभियान अंतर्गत कांकेर जिला में 9765 नवसाक्षरों ने दी परीक्षा

उत्तर बस्तर कांकेर : महापरीक्षा अभियान अंतर्गत कांकेर जिला में 9765 नवसाक्षरों ने दी परीक्षा उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में 90 प्रतिशत असाक्षर हुए शामिल उत्तर बस्तर कांकेर कलेक्टर एवं अध्यक्ष निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत रविवार 07 दिसंबर को महापरीक्षा अभियान जिला में आयोजित किया गया, जिसके लिए 426 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे जहां महिला नवसाक्षर 6216 और पुरुष नवसाक्षर 3549 कुल 9765 नवसाक्षर ने परीक्षा दी। इसके अंतर्गत 15 वर्ष से अधिक उम्र के असाक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 2027 तक शत-प्रतिशत साक्षर किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जिले के सातों विकासखंडों की प्राथमिक शाला और माध्यमिक शाला को परीक्षा केंद्र बनाया गया था। इस बर परीक्षा में अलग नजारा देखने को मिला जहां एक ही परिवार के कई सदस्यों ने एक साथ परीक्षा दी। उम्रदराज महिला एवं पुरुष शिक्षार्थियों ने भी साक्षर होने के लिए बढ़-चढ़कर परीक्षा दी। इसी क्रम में विधानसभा कांकेर के विधायक महोदय श्री आशाराम नेताम द्वारा अन्नपूर्णापारा के प्राथमिक शाला परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया गया। साथ ही प्राथमिक शाला बागोडार के परीक्षा केंद्र का जिला शिक्षा अधिकारी श्री रमेश निषाद ने भी परीक्षा केंद्र का निरीक्षण किया। बताया गया कि जिले के 4 विकासखंडों में क्रमशः परीक्षा केंद्र शासकीय माध्यमिक शाला बेवरती, माध्यमिक शाला पटौद, प्राथमिक शाला करप, प्राथमिक शाला सरईटोला, माध्यमिक शाला करप, माध्यमिक शाला सरंगपाल, माध्यमिक शाला माटवाड़ा मोदी, प्राथमिक शाला तेलगरा, प्राथमिक शाला हिंगनझर का निरीक्षण परीक्षा के दौरान विभाग के अधिकारियों के द्वारा किया गया। इसके अलावा विकासखंड भानुप्रतापपुर में नक्सली पुनर्वास केंद्र मुल्ला में भी विशेष तौर पर 34 असाक्षरों के द्वारा साक्षर बनने के लिए परीक्षा दी गई। निरीक्षण के दौरान सभी परीक्षा केन्द्रों में परीक्षार्थी परीक्षा दिलाते हुए पाए गए। इसी प्रकार जिले में लक्ष्य के अनुसार 9765 नवसाक्षरों ने परीक्षा में सम्मिलित हुए, जहां नवसाक्षरों की उपस्थिति 90 प्रतिशत रही।

मंत्री अग्रवाल ने CGPSC 2024 में 14वीं रैंक पाने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को फोन पर दी बधाई

 मंत्री  अग्रवाल ने सीजीपीएससी 2024 की परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल करने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को दूरभाष पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं पंकज यादव की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा: मंत्री श्री राजेश अग्रवाल रायपुर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सीजीपीएससी 2024 की परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल करने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को दूरभाष पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सीजीपीएससी 2024 की परीक्षा में 14वीं रैंक हासिल करने वाले अंबिकापुर के पंकज यादव को दूरभाष पर दी बधाई एवं शुभकामनाएं छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की 2024 की परीक्षा  में अंबिकापुर के बौरीपारा निवासी पंकज यादव ने राज्य में 14वीं रैंक हासिल कर अंबिकापुर का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस महत्वपूर्ण सफलता पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दूरभाष पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी। श्री अग्रवाल ने कहा कि पंकज की उपलब्धि न केवल उनके कठिन परिश्रम का परिणाम है, बल्कि पूरे अंबिकापुर का मान और गर्व भी है।     मंत्री श्री अग्रवाल ने पंकज से कहा कि आपने अपने माता-पिता का, शहर का और हम सभी का नाम रोशन किया है। आपके पिता ने कठिन परिस्थितियों में भी आपको पढ़ाया-लिखाया और आपने अथक मेहनत से सफलता हासिल की, इसके लिए आपको हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।  उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता के त्याग और संघर्ष को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि उन्हीं की बदौलत आज आप इस मुकाम पर पहुंचे हैं। मंत्री श्री अग्रवाल ने पंकज यादव के माता-पिता को भी विशेष रूप से बधाई प्रेषित की। ठेलेवाले पिता के बेटे ने छुआ कामयाबी की ऊंचाई     पंकज यादव के पिता रामेश्वर यादव रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करने हेतु ठेला चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रायवती गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी हार नहीं मानी। पंकज ने बताया कि उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा मल्टीपरपज स्कूल अंबिकापुर से की और बीएससी कंप्यूटर व एमएससी की पढ़ाई क्रमशः साईं बाबा कॉलेज और पीजी कॉलेज से पूरी की है। छह साल के कड़े संघर्ष के बाद मिली सफलता     पंकज यादव बीते छह वर्षों से लगातार सीजीपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुटे थे। कई प्रयासों के बाद अब जाकर उन्हें सफलता मिली। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता की कठिन मेहनत, त्याग और धैर्य को दिया। पंकज ने कहा कि उनके माता-पिता का आशीर्वाद और प्रेरणा ही इस सफलता का आधार रही है। इस सफलता से पूरे परिवार और अंबिकापुर शहर में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों ने पंकज को “संघर्ष और संकल्प का प्रतीक” बताया है, जिसका उदाहरण आने वाली पीढ़ियां लेंगी।

छमाही परीक्षाओं के लिए बोर्ड पैटर्न अनुसार प्रश्नपत्रों की तैयारी शुरू

भोपाल  सरकारी स्कूलों में नौवीं से 12वीं तक की छमाही परीक्षाएं तीन नवंबर से आयोजित की जा रही है। इसमें अक्टूबर तक के करीब 70 फीसद पाठ्यक्रम से सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है, इससे कुछ स्कूलों का पाठ्यक्रम करीब 40 से 50 फीसद पूरा हुआ है। स्कूलों में 18 से 23 अक्टूबर तक दीपावली का अवकाश है। इसको देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों को अतिरिक्त कक्षाएं संचालित कर पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अब कई स्कूलों ने अवकाश में भी रेमेडियल कक्षाएं लगाकर पाठ्यक्रम पूरा कराने की योजना पर काम कर रहे हैं। विभाग ने सरकारी स्कूलों में होने वाली छमाही परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है। इनमें पाठ्यक्रम 70 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की वार्षिक के हिसाब से तैयारी हो सके। वहीं बोर्ड व वार्षिक परीक्षा फरवरी में होगी। प्रश्नपत्र ईमेल के माध्यम से स्कूलों में भेजे जाएंगे और वहीं से प्रिंट निकालकर विद्यार्थियों में वितरित किए जाएंगे। प्रश्नपत्र बोर्ड के पैटर्न पर तैयार होंगे। रिजल्ट में देखा जाएगा कि जिन सवालों में अधिकांश विद्यार्थी गलती कर रहे हैं, उनके लिए अलग से कक्षा लगाई जाएगी, ताकि वे वार्षिक परीक्षा में इस गलती को न दोहराएं। विद्यार्थियों के लिए रेमेडियल और विशेष कक्षाएं भी लगाई जाएंगी, ताकि वार्षिक परीक्षा के लिए उनकी पर्याप्त तैयारी हो सके। अवकाश में भी लग रही कक्षाएं सांदीपनि विद्यालय बरखेड़ी के प्राचार्य केडी श्रीवास्तव ने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए दीपावली की छुट्टियों में भी कक्षाएं संचालित की जाएंगी। विद्यार्थी अपने मन से कक्षाओं में आएंगे। वहीं सांदीपनि विद्यालय निशातपुरा के प्राचार्य आरसी जैन ने बताया कि 60 फीसद पाठ्यक्रम पूरा कर लिया गया है। रविवार और दीपावली के अवकाश में भी कक्षाएं लगाई जाएंगी।इसके अलावा रेमेडियल कक्षाएं भी संचालित की जा रही है। इस बार फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं अधिकारियों ने बताया कि पेपर बोर्ड पैटर्न पर तैयार किया जाएगा और कठिनाई स्तर का भी ध्यान रखेंगे। इसे मध्यम स्तर पर तैयार करेंगे ताकि छात्रों को वार्षिक परीक्षा का पूर्वाभ्यास हो जाए। इस बार 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी के पहले सप्ताह से शुरू हो रही हैं। इस वजह से भी अधिकतम पाठ्यक्रम को कवर करेंगे। विद्यार्थियों को उत्तरपुस्तिकाएं दिखाएंगे परीक्षा के दौरान ही उत्तरपुस्तिकाएं चेकिंग का काम भी शुरू हो जाएगा। जिस विषय का पेपर होता जाएगा, उसकी उत्तरपुस्तिकाएं भी जांचनी शुरू कर दी जाएंगी। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि परीक्षा समाप्ति के दो-तीन दिन के भीतर ही छात्रों को उनकी उत्तरपुस्तिकाएं दिखा दी जाए। अधिकारियों ने बताया कि विद्यार्थियों को कक्षाओं में संबंधित विषय के शिक्षक यह भी बताएंगे कि उन्होंने कहां गलती की है और वार्षिक परीक्षा में इस तरह के प्रश्नों के उत्तर कैसे लिखने हैं। अभी से स्कूलों में रेमेडियल कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इसी के साथ छमाही परीक्षा के परिणाम के आधार पर भी स्कूलों में विशेष कक्षाएं लगाकर उनकी समस्या दूर की जाएगी। स्कूल स्तर पर भी पेपर तैयार करवाकर विद्यार्थियों से हल करवाएंगे। छमाही परीक्षाओं के लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। नरेंद्र अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी

MPBSE ने द्वितीय परीक्षा की कॉपियां जांची, अब छात्रों को रिजल्ट का इंतजार

भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) की ओर से बोर्ड 10वीं व 12वीं की द्वितीय परीक्षा का दो चरणों में मूल्यांकन कार्य पूरा हो गया है। पहला चरण दो से 11 जुलाई तक और दूसरा 12 से 20 जुलाई तक चला। 28 या 29 जुलाई को परिणाम जारी कर दिया जाएगा। इस परीक्षा में साढ़े तीन लाख अभ्यर्थियों की नौ लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। उधर, माशिमं भोपाल के एक केंद्र पर 12वीं के विद्यार्थियों द्वारा 10वीं का प्रश्नपत्र हल करने के मामले में मूल्यांकन किस तरह होगा। इस संबंध में मंडल की परीक्षा समिति 24 जुलाई को निर्णय लेगी। गलत प्रश्नपत्र हल करने वाले उत्तरपुस्तिकाओं को समिति में भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में समिति निर्णय लेगी। तीसरी बार परीक्षा के तनाव से नहीं गुजरना होगा मंडल के सचिव केडी त्रिपाठी का कहना है कि विद्यार्थियों का नुकसान नहीं होगा, उन्हें फिर से तीसरी बार परीक्षा के तनाव से नहीं गुजरना होगा। इस प्रकरण में दोषी केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं अब तक स्कूल शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं की है। स्कूल शिक्षा विभाग ने केंद्राध्यक्ष व पर्यवेक्षक को निलंबित नहीं किया है। बता दें, कि अरेरा कॉलोनी स्थित शासकीय नवीन उमावि के परीक्षा केंद्र पर 19 जून को 12वीं के विद्यार्थियों को 10वीं कक्षा का अंग्रेजी का पर्चा दे दिया था। उसे उन्होंने हल करा लिया।