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योगी सरकार की आबकारी नीति का कमाल, अप्रैल-मई में 10,635 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व

योगी सरकार में प्रभावी आबकारी नीति का असर, अप्रैल-मई में 10,635 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त मई में 5,387.63 करोड़ रुपये का राजस्व, 2.29 लाख लीटर अवैध शराब बरामद पिछले वर्ष की तुलना में 865 करोड़ रुपये का अधिक राजस्व, 8.85 प्रतिशत की हुई वृद्धि लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में आबकारी विभाग लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में ही विभाग ने राजस्व संग्रह के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए अप्रैल – मई माह में 10,635.69 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, इसमें अप्रैल का करीब 5248 करोड़ रुपये का राजस्व शामिल है। यह उपलब्धि न केवल विभाग की कार्यकुशलता को दर्शाती है, बल्कि राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की सफलता का भी प्रमाण है। मई में 5,387.63 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त, 2.29 लाख लीटर अवैध शराब बरामद मई 2026 माह में 5,387.63 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होना इस बात का संकेत है कि आबकारी विभाग लगातार अपने निर्धारित लक्ष्यों की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। इस अवधि में यूपी में 9,898 केस दर्ज किए गए हैं जबकि 2.29 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई है। इसके अलावा अवैध शराब के कारोबार में संलिप्त 1,564 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 298 को जेल भेजा गया है। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल 12 वाहनों को भी जब्त किया गया है। योगी सरकार में रोका गया राजस्व रिसाव यूपी में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार, आबकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी के बेहतर क्रियान्वयन का सीधा लाभ राजस्व संग्रह में दिखाई दे रहा है। योगी सरकार द्वारा लागू की गई नई व्यवस्थाओं ने न केवल राजस्व रिसाव को रोका है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली को भी अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाया है। सुशासन आधारित कार्यशैली का दिख रहा असर: मंत्री नितिन अग्रवाल आबकारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुशासन आधारित कार्यशैली और राजस्व बढ़ाने के लिए अपनाई गई रणनीतियों का असर विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। आबकारी विभाग की यह सफलता उसी श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसने उत्तर प्रदेश को राजस्व संग्रह के मामले में लगातार नई उपलब्धियां दिलाई हैं।  चालू वित्तीय वर्ष में मई तक 8.85 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज  आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने कहा कि यूपी में यही गति बनी रही तो चालू वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है। उन्होने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की समान अवधि में विभाग को 9,770.68 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसके मुकाबले चालू वित्तीय वर्ष में मई तक 865.01 करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। इस प्रकार विभाग ने 8.85 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है।

नई आबकारी नीति लागू, रायपुर एयरपोर्ट के होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को मिली बड़ी राहत, बार खुलने की अनुमति

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई आबकारी नीति 2026-27 को हरी झंडी दे दी गई है। इस नीति का मुख्य केंद्र बिंदु राजस्व में वृद्धि और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नई शराब दुकानें नहीं खोली जाएंगी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लाभप्रद बनाया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, अब शराब की आपूर्ति से पहले ही टैक्स का भुगतान अनिवार्य होगा, जिससे सरकारी खजाने में समय पर राजस्व सुनिश्चित हो सकेगा। रायपुर एयरपोर्ट पर बार और लाइसेंस फीस में राहत पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रायपुर एयरपोर्ट पर ‘विमानपत्तन रेस्टोरेंट बार’ (FL-3 घ) शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही, होटल, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लाइसेंस फीस में उल्लेखनीय कटौती की गई है। इस रियायत का उद्देश्य (CG New Excise Policy) राज्य में निवेश आकर्षित करना और आतिथ्य सत्कार क्षेत्र को मजबूती देना है। हालांकि, बार संचालन के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है; यह पहले की तरह सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक ही संचालित होंगे। प्लास्टिक बोतलों में मिलेगी शराब पर्यावरण और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा बदलाव पैकेजिंग में किया गया है। अब छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी शराब कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। विभाग का तर्क है कि कांच की बोतलों के टूटने से हर साल करोड़ों का नुकसान होता है और इससे कर्मचारियों के घायल होने का खतरा भी बना रहता है। प्लास्टिक पैकेजिंग से परिवहन आसान होगा और स्टोरेज की लागत में कमी आएगी। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा। महंगी होगी शराब: नया टैक्स स्लैब लागू शराब प्रेमियों के लिए खबर थोड़ी कड़वी हो सकती है क्योंकि नई नीति में आबकारी ड्यूटी बढ़ा दी गई है। विशेष रूप से विदेशी और प्रीमियम ब्रांड्स (CG New Excise Policy) पर अब ‘रिटेल सेल प्राइस’ (RSP) के आधार पर टैक्स लगेगा। जितनी महंगी बोतल होगी, उस पर उतना ही अधिक ड्यूटी टैक्स देना होगा। बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पदार्थों पर भी नई दरें लागू की गई हैं। सरकार का मानना है कि उच्च श्रेणी के ब्रांड्स पर टैक्स बढ़ाने से राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जबकि सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए ड्यूटी की न्यूनतम दरें बरकरार रखी गई हैं। प्रशासनिक सुधार और निगरानी नई नीति के तहत प्रशासनिक शक्तियों में भी बदलाव किया गया है। अब कंपोजिट लाइसेंस जारी करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त के पास होगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी। साथ ही, अवैध शराब की तस्करी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

राजस्थान में आबकारी नीति 2025-29 में बड़े बदलाव की तैयारी

जयपुर. राजस्थान में शराब को लेकर सरकार ने चुपचाप ऐसा फैसला कर दिया है, जो प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सामाजिक ताने-बाने और अपराध नियंत्रण की नीति पर सीधा असर डाल सकता है। आबकारी एवं मद्य-संयम नीति 2025–29 में संशोधन करते हुए सरकार ने शराब दुकानों के खुलने और बंद होने का समय तय करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त को सौंप दिया गया है। यह बदलाव सोची-समझी रणनीति के तहत देर रात तक शराब बिक्री का रास्ता खोलने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। आबकारी महकमा लंबे समय से शराब दुकानों का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर रात 10 या 11 बजे तक बढ़ाने की पैरवी करता रहा है। अब जब समय निर्धारण का पूरा अधिकार उनके हाथ में है, तो सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार भविष्य में राजनीतिक जवाबदेही से बचते हुए अफसरों के जरिए शराब बिक्री का समय बढ़वाना चाहती है? जबकि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने बढ़ते अपराध, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को देखते हुए शराब दुकानों का समय रात 11 बजे से घटाकर रात 8 बजे कर दिया था। तब पुलिस और प्रशासन का तर्क था कि देर रात शराब बिक्री अपराधों को बढ़ावा देती है। अब उसी फैसले को अप्रत्यक्ष रूप से पलटने की जमीन तैयार की जा रही है। कुंभलगढ़-रणकपुर में बार लाइसेंस शुल्क तीन गुना कुंभलगढ़ और रणकपुर जैसे सीमित पर्यटक आवागमन वाले क्षेत्रों में बार लाइसेंस शुल्क तीन गुना बढ़ा दिया गया है। स्थानीय होटल व्यवसायियों का कहना है कि यहां पर्यटन साप्ताहिक और सीजनल है, ऐसे में इतनी अधिक फीस अव्यावहारिक है और इससे व्यवसाय प्रभावित होगा। पार्टी के लिए देना होगा ज्यादा शुल्क नीति में किया गया एक और बदलाव सीधे तौर पर आम परिवारों पर प्रहार माना जा रहा है। विभाग से रजिस्टर्ड स्थानों पर शादी, रिसेप्शन या अन्य सामाजिक आयोजनों में शराब परोसने के लिए लिए जाने वाले एक दिवसीय लाइसेंस की फीस को 12 हजार रुपए से बढ़ाकर 20 हजार रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं घर पर पार्टी के लिए भी अब लाइसेंस लेने पर ज्यादा शुल्क देना होगी। वार्षिक गारंटी राशि में 12.5 प्रतिशत वृद्धि नीति संशोधन का दूसरा बड़ा फैसला शराब दुकानों के नवीनीकरण से जुड़ा है। वर्ष 2025–26 की वार्षिक गारंटी राशि को 12.5 प्रतिशत बढ़ाकर वर्ष 2026–27 के लिए तय किया गया है। दुकान पूरे वर्ष चली हो या आंशिक अवधि के लिए, हर स्थिति में बढ़ी हुई गारंटी राशि लागू होगी। क्लस्टर सिस्टम में भी यही व्यवस्था रहेगी। सरकार भले ही इसे राजस्व बढ़ाने का कदम बता रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ता पर पड़ेगा, क्योंकि कारोबारी बढ़ी हुई लागत की भरपाई शराब के दामों से करेंगे। अन्य प्रमुख प्रावधान देशी मदिरा और राजस्थान निर्मित मदिरा की न्यूनतम 3 प्रतिशत आपूर्ति एसेप्टिक ब्रिक पैक में अनिवार्य की गई है, जिसे भविष्य में 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकेगा। होटल, रेस्टोरेंट, क्लब बार में सूक्ष्म मदिरा निर्माण इकाई पर पहले दो माह 50 प्रतिशत आबकारी शुल्क में छूट। हेरिटेज व अन्य होटलों के लाइसेंस शुल्क का पुनर्निर्धारण क्षेत्रफल, कमरों की संख्या के आधार पर किया गया। अवसर विशेष लाइसेंस के दुरुपयोग पर लाइसेंस निरस्तीकरण और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

आबकारी नीति 2026-27 का निर्धारण करने मंत्रि-परिषद् समिति गठित

भोपाल राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के निर्धारण, उससे संबंधित अनुषांगिक विषयों पर समय-समय पर निर्णय लेने तथा आगामी वर्षों के लिए सुझाव प्रस्तुत करने के उद्देश्य से मंत्रि-परिषद् समिति का गठन किया गया है। समिति में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, श्री उदय प्रताप सिंह मंत्री परिवहन एवं स्कूल शिक्षा तथा श्रीमती सम्पतिया उइके, मंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। समिति के सचिव प्रमुख सचिव वाणिज्यिक कर होंगे। समिति द्वारा आबकारी नीति 2026-27 को अंतिम रूप देने के साथ-साथ संबंधित विषयों पर निर्णय लेकर आगामी वर्षों के लिए आवश्यक सुझाव प्रस्तुत किए जाएंगे।