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मध्य प्रदेश : घोषणा के 6 साल बाद भी कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारी 6 साल बाद भी आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना का इंतजार कर रहे हैं। यह योजना 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के शासनकाल में घोषित की गई थी, लेकिन आज तक यह योजना कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाई है। तीन मुख्यमंत्रियों (कमलनाथ, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव) के पास यह योजना फाइल के रूप में पहुंची, लेकिन कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिला। मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।  मध्य प्रदेश के 6 लाख से अधिक कर्मचारी अब भी आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना के लाभ लेने के लिए इंतजार कर रहे हैं। दरअसल 2019 में कमलनाथ सरकार ने इसकी घोषणा की थी। लेकिन अब तक यह जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया। वर्ष 2019 से लेकर अब तक तीन अलग-अलग मुख्यमंत्री की टेबल तक इसकी फाइलें पहुंची है।      मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 9 फरवरी 2024 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति का उद्देश्य शासकीय कर्मचारी, कार्यकर्ता और संविदा कर्मचारियों को आयुष्मान भारत निरामयम प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल करने का निर्णय लेना था। यह कमेटी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 4 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक के निर्णय के आधार पर गठित की गई थी, जिसमें शासकीय कर्मचारियों को सालाना 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ देने की स्वीकृति दी गई थी। हालांकि, अब तक इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। योजना तैयार करने पर काम जारी  कमेटी में शामिल अधिकारियों की सूची में मुख्य सचिव के अलावा अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव हैं, और अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, प्रमुख सचिव वित्त विभाग, जो पहले प्रमुख सचिव थे, अब अपर मुख्य सचिव के पद पर हैं। कमेटी में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग शामिल हैं। इसके अलावा कमेटी में सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत निरामयम मध्यप्रदेश भी शामिल हैं। कमलनाथ ने बनाई थी कैशलेस इलाज की योजना यह योजना 6 साल पहले 2019 में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में कैबिनेट बैठक में मंजूर की गई थी। उस समय यह योजना 1 अप्रैल से लागू होने वाली थी और प्रदेश के सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने वाला था। इसके साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया था। योजना के तहत साधारण बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जानी थी। इस स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में शासकीय कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग और नगर सैनिक के अलावा राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा यह योजना निगम मंडलों में काम करने वाले कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवा के कर्मचारियों के लिए विकल्प के तौर पर रखा गया है।  योजना से एमपी सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय भार इस बीमा योजना के लागू होने से एमपी सरकार पर 756.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार होने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेश के कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा का लाभ देने की बात की थी। हालांकि, कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, इसके चलते मामले में देरी आई।  तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बावजूद प्रदेश के कर्मचारियों को अब तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी अन्य राज्यों में लागू आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा की तरह 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब तक किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया है। कर्मचारी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी इस सुविधा से वंचित हैं। अभी इस व्यवस्था पर हो रहा है काम वर्तमान में कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था कुछ इस प्रकार है। जब कर्मचारी इलाज कराते हैं, तो उन्हें खर्च की हुई राशि का रिम्बर्समेंट कराने के लिए अपने विभाग में आवेदन करना होता है। इसके लिए पहले डॉक्टर, मेडिकल बोर्ड या डायरेक्टर हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन से मंजूरी प्राप्त करनी होती है। अगर कर्मचारी अस्तपताल में भर्ती होकर इलाज कराते हैं, तो ऐसे में उन्हें 5 लाख रुपये तक के क्लेम की मंजूरी संभागीय स्तर के सरकारी अस्पताल के डीन की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से जाती है। यदि क्लेम 5 लाख से अधिक और 20 लाख रुपये तक होता है, तो इस मामले में संचालक स्वास्थ्य सेवाओं की अध्यक्षता में बनी कमेटी रिम्बर्समेंट को मंजूरी देती है। यदि कर्मचारी भर्ती नहीं होते, तो वे या उनके परिजन बाह्य रोगी के रूप में इलाज कराते हैं। इसका मतलब है कि अस्पताल में दिखाया जाता है और फिर लौट आते हैं। इस स्थिति में एक साल में अधिकतम 20 हजार रुपये का रिम्बर्समेंट होता है। यदि इलाज निरंतर चल रहा हो, तो तीन माह में 8000 रुपये से अधिक का रिम्बर्समेंट नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी होती है।

ई-वॉलेट्स के जरिए पैसा जुटा रहा जैश, हमलों से बचने को बदल रहा रणनीति

लाहौर  ऑपरेशन सिंदूर के तहत मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में कई आतंकी लॉन्च पैड तबाह किए थे. इन ठिकानों का इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) कर रहे थे. इस बीच खुफिया रिपोर्टों के आधार पर IANS ने खुलासा किया है कि जैश-ए-मोहम्मद अब अपने नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने की तैयारी कर रहा है. संगठन पूरे पाकिस्तान में 313 नए मरकज बनाने की योजना पर काम कर रहा है. ये ठिकाने नए आतंकियों को ट्रेनिंग देने और सुरक्षित आश्रय प्रदान करने के काम आएंगे. साथ ही ये ठिकाने जैश प्रमुख मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए भी सुरक्षित अड्डे होंगे. इस नेटवर्क को खड़ा करने के लिए जैश ने 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस धन उगाही अभियान का नेतृत्व जैश प्रमुख मसूद अजहर और उसका भाई तल्हा अल सैफ कर रहे हैं. संगठन ने ऑनलाइन धन इकट्ठा करने के लिए ईजीपैसा और सदापे जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की योजना बनाई है. इसके अलावा जैश के कमांडर मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज के दौरान भी चंदा इकट्ठा कर रहे हैं. चंदे को गाजा में मानवीय सहायता के नाम पर दिखाया जा रहा है, जबकि असल में इसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए हो रहा है. जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी ब्लैंक दान रसीद सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े ब्लैंक दान रसीद की एक कॉपी भी मिली. जांच में इस बात के सबूत मिले कि जमा किए जा रहे 3.94 अरब पाकिस्तानी रुपये कई पाकिस्तानी डिजिटल वॉलेट में जा रहे हैं. ऐसा ही एक सदापे खाता मसूद अजहर के भाई, तल्हा अल सैफ (तल्हा गुलजार) के नाम पर है, जो पाकिस्तानी मोबाइल नंबर +92 3025xxxx56 से जुड़ा है. यह नंबर जैश-ए-मोहम्मद के हरिपुर जिले के कमांडर आफ़ताब अहमद के नाम पर रजिस्ट्रड है, जिसके CNIC नंबर 133020376995 पर हरिपुर के खाला बट्ट टाउनशिप में जैश-ए-मोहम्मद के कैंप का पता दर्ज है. भारत के लिए क्या मायने रखता है यह पुनर्गठन जैश-ए-मोहम्मद की यह गतिविधि भारत के लिए नई चुनौती है. संगठन की कोशिश है कि ऑपरेशन सिंदूर से हुए नुकसान की भरपाई करके फिर से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाए. नए शिविरों का जाल फैलाने से कश्मीर घाटी में आतंक फैलाने की साजिश तेज हो सकती है. भारत के सुरक्षा तंत्र को इस पुनर्गठन पर करीबी निगरानी रखने की जरूरत है. 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. जैश का बहावलपुर स्थित मुख्यालय और कई ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला थी, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे. पाकिस्तान में बनाएगा 313 नए मरकज, मांग रहा चंदा ऑपरेशन सिंदूर के कई महीने बाद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) अपने तबाह हुए प्रशिक्षण शिविरों और ठिकानों के नेटवर्क को फिर से पुनर्जीवित तकरने की तैयारी में लग गया है। अपने आतंकी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने एक बड़ा धन उगाही अभियान शुरू किया है। इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में इसके बारे में जानकारी दी है। मई में आपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर स्थित मुख्यालय और आतंकी लॉन्च पैड को नेस्तनाबूद कर दिया था। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में 9 आतंकी लॉन्च पैड को तबाह किया था। ये लॉन्च पैड जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। यह अभियान 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए चलाया गया था। पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। 313 नए शिविर स्थापित करने की योजना  खुफिया जानकारी के आधार पर अपनी रिपोर्ट में बताया है कि जैश-ए-मोहम्मद अपनी स्थिति सुधारने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। संगठन ने कथित तौर पर पूरे पाकिस्तान में 313 नए 'मरकज' स्थापित करने की योजना बनाई है, जिनका इस्तेमाल आतंकियों को ट्रेनिंग और उन्हें ठिकाने देने के लिए किया जाएगा। इसके लिए 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। पकड़े जाने से बचने के लिए ऑनलाइन चंदा इन ठिकानों में नए आतंकियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र चलाने के साथ ही जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में काम करने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि धन उगाही अभियान का नेतृत्व मसूद अजहर अपने भाई तल्हा अल सैफ के साथ मिलकर कर रहा है। पकड़े जाने से बचने के लिए जैश ने ईजीपैसा और सदापे जैसे डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल की योजना बनाई है। ऑनलाइन पैसा इकठ्ठा करने के अलावा जैश के कमांडर शुक्रवार की नमाज के दौरान मस्जिदों में भी चंदा इकठ्ठा कर रहे हैं। इसे गाजा में मानवीय सहायता के लिए दिए जाने के लिए दिखा रहे हैं।

बिहार और बंगाल के लिए PM मोदी की बड़ी घोषणाएँ, पुल और मेट्रो परियोजनाएँ शामिल

औंटा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 22 अगस्त को बिहार और पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे. वह सुबह गया में लगभग 13,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. इस दौरान प्रधानमंत्री दो नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर जनता को संबोधित करेंगे. इसके बाद, मोदी गंगा नदी पर बने औंटा–सिमरिया पुल परियोजना का उद्घाटन करेंगे. लगभग 1,870 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 6 लेन पुल की लंबाई 1.86 किलोमीटर है, जबकि एप्रोच रोड सहित कुल लंबाई 8.15 किलोमीटर है. यह पुल मोकामा और बेगूसराय को जोड़ेगा और उत्तर व दक्षिण बिहार के बीच आवागमन को तेज़ और सुगम बनाएगा. कई जिलों के बीच दूरी 100 किलोमीटर तक घट जाएगी और सफर का समय लगभग डेढ़ घंटे तक कम होगा. 34 मीटर चौड़ा यह एशिया का सबसे चौड़ा पुल है, जिसे 18 मज़बूत पिलरों पर बनाया गया है. गेमचेंजर साबित होगा पुल पुल के दोनों छोर पर आधुनिक रोटरी और हरियाली से युक्त पार्क विकसित किए गए हैं. निर्माण के दौरान Push Box Method, Gabbion Wall और PVD जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पुल की मजबूती और लोडिंग कैपेसिटी बढ़ाई जा सके. यह पुल न केवल बिहार बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों के उद्योग और व्यापार के लिए भी गेमचेंजर साबित होगा. प्रधानमंत्री द्वारा 2015 में घोषित विशेष पैकेज के तहत यह पुल तैयार किया गया है. 2017 में मोदी ने इसकी आधारशिला रखी थी और अब इसका उद्घाटन होने जा रहा है. प्रधानमंत्री बिहार में बक्सर थर्मल पावर प्लांट (6,880 करोड़ रुपये), मुजफ्फरपुर कैंसर अस्पताल, मुंगेर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (520 करोड़ रुपये) और 1,260 करोड़ रुपये की शहरी परियोजनाओं का भी उद्घाटन करेंगे. इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हज़ारों लाभार्थियों को घर सौंपे जाएंगे. कोलकाता में करोड़ों की परियोनाओं का उद्घाटन शाम को प्रधानमंत्री कोलकाता पहुंचेंगे और लगभग 5,200 करोड़ रुपये की मेट्रो और अन्य विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. वे खुद मेट्रो की सवारी भी करेंगे. नई मेट्रो सेवाएं कोलकाता में यात्रा समय घटाएंगी और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मज़बूती देंगी. साथ ही, वे 1,200 करोड़ रुपये की लागत वाले 7.2 किमी लंबे कोना एक्सप्रेसवे की आधारशिला भी रखेंगे. यह हावड़ा और कोलकाता के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा.

सिंहस्थ : 2028 के लिए घाट निर्माण, शिप्रा शुद्धिकरण, बैराज निर्माण कार्यों की भी हुई समीक्षा

आने वाले 3 वर्ष में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार 100 लाख हेक्टेयर तक करें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सिंचाई क्षेत्र का निरंतर विस्तार आवश्यक है। इसके लिए जल संसाधन विभाग और सभी संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्य करें। वर्तमान में शासकीय स्रोतों से प्रदेश में सिंचाई प्रतिशत 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे शीघ्र ही दोगुना करने का लक्ष्य ध्यान में रखकर कार्य किया जाए जिससे आने वाले 3 वर्ष में प्रदेश में 100 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार हो जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ ही उद्योग क्षेत्र में पानी देने, पेयजल प्रबंध और ऊर्जा उत्पादन में जल का उपयोग जल संसाधन विभाग के स्रोतों से हो रहा है। सिंचाई के 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य के अनुसार जल संसाधनों के समुचित उपयोग को पूरी प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न परियोजनाओं से बढ़ रहे सिंचाई क्षेत्र की जानकारी भी प्राप्त की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किए हैं लाभकारी प्रावधान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं जैसे केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, संशोधित पार्वती-काली-सिंध चंबल लिंक परियोजना को अति उपयोगी बताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश के लगभग आधे जिलों की तस्वीर बदल जाएगी। राज्य के अंदर भी नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा में कार्य प्रारंभ कर लाभ प्राप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों को जोड़ने का स्वप्न भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल ने देखा जिसे प्रधानमंत्री श्री मोदी साकार कर हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा ऐसी परियोजनाओं के लिए 90% राशि देने का लाभकारी प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशा के अनुसार राज्यों की ऐसी पहल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के कार्य जैसे-जैसे क्रियान्वित होंगे, सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा, साथ ही खुशहाली भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संसाधन विभाग की ओर से राज्य के अंदर नदी जोड़ो प्रकल्पों की संभावनाओं का सर्वेक्षण और अध्ययन कर प्रतिवेदन तैयार किया जाए। केन्द्र सरकार को ऐसे प्रस्ताव भेजकर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सिंहस्थ : 2028 के कार्यों की समीक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान शिप्रा शुद्धिकरण, नदी एवं जल निकायों के विकास और घाट निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्तमान में शिप्रा पर लगभग 30 किलोमीटर लंबाई में घाट निर्माण का कार्य हो रहा है, यह सभी कार्य वर्ष 2027 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। घाटों के निर्माण से सिंहस्थ के दौरान एक दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकेंगे। शिप्रा नदी पर बैराज निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। सिंचाई क्षेत्र में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि बैठक में बताया गया कि रबी 2023-24 में प्रदेश में सिंचित रकबा 44.56 लाख हेक्टेयर था जो रबी 2025-26 में बढ़कर 52.06 हो गया है। इस तरह बीते डेढ़ वर्ष में प्रदेश के सिंचाई क्षेत्र में 7.50 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसमें जल संसाधन विभाग द्वारा 2.39 और नर्मदा घाटी विकास विभाग 5.11 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने में सफलता प्राप्त की गई है। बताया गया कि प्रदेश में आगामी पांच वर्ष में 200 करोड़ से अधिक लागत की 38 सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, जिसके फलस्वरूप 17 लाख 33 हजार 791 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा। इस वर्ष 2 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षेत्र बढ़ेगा, जो मोहनपुरा बांयीतट परियोजना जिला राजगढ़, चंदेरी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जिला अशोकनगर, पंचमनगर सिंचाई परियोजना जिला दमोह एवं सागर, त्योंथर बहाव योजना जिला रीवा और घोघरी मध्यम परियोजना जिला बैतूल के माध्यम से संभव होगा। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास डॉ. राजेश राजौरा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

हिंदू लड़की के साथ युवक की भयावह हरकतें, बेटा होने पर करवाया खतना

इंदौर हिंदू युवती को धोखाधड़ीपूर्वक प्रेम जाल में फंसा कर मुस्लिम बनाने की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। तुकोगंज पुलिस ने हाई प्रोफाइल परिवार की महिला की शिकायत पर मुंबई के युसूफ खान और गुलबानू खान के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पीड़िता ने बच्चे की जबरदस्ती खतना कराने, मांस खिलाने और अश्लील वीडियो बनाकर धमकाने के आरोप लगाए हैं। 40 दिन बाद ही करवा दिया बच्चे का खतना पीड़िता ने रिश्ता खत्म कर अलग होने का फैसला किया, मगर युसूफ ने कहा वह उसको खोना नहीं चाहता है। उसने आश्वस्त किया कि वह जैन धर्म के मुताबिक रह सकेगी। साल 2011 में पीड़िता ने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद युसूफ और उसकी बहन गुलबानू का व्यवहार बदल गया। उसने 40 दिन बाद ही बच्चे का खतना करवा दिया। उसने कहा कि बेटे की परवरिश मुस्लिम रिवाज से होगी। उसकी तालीम भी मुस्लिम संस्थान में होगी। दोनों ने सिद्ध विनायक मंदिर में की थी शादी साउथ तुकोगंज की पाश कालोनी में रहने वाली 40 वर्षीय महिला से आरोपी युसूफ खान की साल 2004 में दोस्ती हुई थी। महिला एडवरटाइजिंग का काम करती है। उस वक्त युसूफ ने रोमी (हिंदू) नाम बताया और पीड़िता से बातचीत करने लगा। दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और 2004 में ही मुंबई के सिद्ध विनायक मंदिर में राजी से शादी कर ली। 2005 में पीड़िता एक टीवी चैनल से जुड़ गई। इसी दौरान पता चला रोमी बता कर साथ रहने वाला व्यक्ति मुस्लिम है।   गुलबानू ने पीड़िता को भी धमकाया और कहा तुम भी मुस्लिम बन जाओ। वरना युसूफ के साथ तुम्हारा रिश्ता हराम माना जाएगा। युसूफ और गुलबानू ने जबरदस्ती मांस पकाने और खाने का दबाव बनाया। युसूफ ने उसके साथ मारपीट भी की। इसी दौरान मालिश करने वाले व्यक्ति को बुलाया और उसका आपत्तिजनक वीडियो बना लिया। उसने महिला के साथ बिताए निजी पलों का वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया। वह वीडियो बहुप्रसारित कर मुस्लिम धर्म स्वीकारने का दबाव बनाने लगा। पिछले साल महिला कार्यक्रम के बहाने इंदौर आई और स्वजन को घटना के बारे में बताया। बुधवार रात वह स्वजन के साथ थाने आई और युसूफ और गुलबानू निवासी मलाड़ बरिहान मुंबई के खिलाफ केस दर्ज करवाया।

कांग्रेस और इनेलो तैयार, हरियाणा विधानसभा में कल से शुरू होगा मानसून सत्र

चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा के शुक्रवार को दोपहर दो बजे से आरंभ होने वाले मानसून सत्र में हंगामा होने के पूरे आसार हैं। कांग्रेस व इनेलो विधायक जहां सरकार को राज्य की कानून व्यवस्था पर घेरने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं हरियाणा सरकार ने सत्र से पहले ही भिवानी के लोहारू की मनीषा के शव का अंतिम संस्कार करवाकर विपक्ष के मुद्दे को छीनने की कोशिश की है। विपक्षी विधायकों द्वारा राज्य में अपहरण, हत्या और लूटमारी समेत विभिन्न आपराधिक वारदातों को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा कराने के लिए विधानसभा सचिवालय को ‘काम रोको प्रस्ताव’ दिया जा चुका है। सरकार भी कानून व्यवस्था की स्थिति पर विपक्ष को जवाब देने के लिए तैयार नजर आ रही है। हरियाणा के नये राज्यपाल प्रो. अशीम घोष के संबोधन से मानसून सत्र की शुरुआत होगी। पिछले 10 माह में यह चौथा सत्र होगा, जिसमें कांग्रेस बिना विधायक दल के नेता के नजर आएगी। कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद संभावना जताई जा रही थी कि मानसून सत्र से पहले कांग्रेस अपनी पार्टी के विधायक दल के नेता का नाम घोषित कर सकती है, लेकिन बृहस्पतिवार शाम तक भी कांग्रेस की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई। हालांकि विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ही बिना घोषणा के विपक्ष के नेता की भूमिका में होते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पिछले बजट सेशन में कह चुके हैं कि हमारी नजर में हुड्डा ही विपक्ष के नेता हैं। संवैधानिक पदों पर होने वाली नियुक्तियों पर निर्णय लेने के लिए आयोजित बैठकों में हुड्डा ही कांग्रेस की ओर से शामिल होते रहे हैं। विधानसभा का मानसून सत्र कितने दिन चलेगा, यह शुक्रवार को सुबह 11 बजे होने वाली बिजनेस एडवाइजर कमेटी की बैठक में तय किया जाएगा, लेकिन विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी अस्थाई कार्यक्रम के मुताबिक सत्र 26 अगस्त तक चलने की संभावना है। पूरे सत्र में तीन दिन सदन की कार्यवाही चलेगी। 23 और 24 अगस्त को अवकाश रहेगा, जबकि 25 व 26 अगस्त को सदन की कार्यवाही का संचालन होगा। छोटा होने के बाद भी यह सत्र काफी प्रभावी और हंगामेदार रहने के आसार हैं। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सदन में बड़ा गतिरोध देखने को मिल सकता है। हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से कानून व्यवस्था की स्थिति पर दिए गए काम रोको प्रस्ताव पर हंगामा होने की संभावना है। विधानसभा स्पीकर हरविन्द्र कल्याण यदि शुक्रवार को ही इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार नहीं करते तो कांग्रेस पहले दिन ही वाकआउट कर सकती है। भिवानी की शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध मौत के अलावा व्यापारियों से मांगी जा रही फिरौती, विधायकों को मिल रही धमकियां और हत्या की कई वारदातों को कांग्रेस विधानसभा में मुद्दा बनाने वाली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार की शाम को भाजपा विधायक दल की अहम बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें विपक्ष के हर हमले का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा की गई है। मानसून सत्र में उठाए जाने वाले सवालों के जवाब को लेकर मुख्यमंत्री नायब सैनी शुक्रवार को 12 बजे विधानसभा के कमेटी हाल में मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में उन सभी प्रश्नों पर चर्चा होगी, जो शुक्रवार के प्रश्नकाल में लगाए गए हैं। मानसून सत्र की शुरूआत से पहले मुख्यमंत्री रोजाना ही मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे ताकि उनमें प्रश्नों के साथ-साथ दूसरे प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सके। जलभराव से नुकसान का मुद्दा गूंजेगा साइबर सिटी गुरुग्राम, फरीदाबाद व जींद समेत कई शहरों में मानसून में जलभराव की वजह से जो हालत हुई है, विपक्ष विधानसभा में उसे भी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। सीएम के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर एक सप्ताह तक गुरुग्राम में रहकर वहां जल निकासी समेत विभिन्न समस्याओं के समाधान की रूपरेखा तैयार करवाकर आए हैं।  

मुख्यमंत्री यादव ने कहा- हर घर तक सतत जल आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

नल से जल पहुंचाने में मध्यप्रदेश ने हासिल की 70 प्रतिशत से अधिक सफलता मार्च-2027 तक हर ग्रामीण परिवार तक पहुंचेगा जल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता केवल हर घर तक नल से जल पहुँचाने की ही नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पेयजल सुविधा आने वाले वर्षों तक सतत और गुणवत्तापूर्ण रूप में उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नलजल योजनाओं के संचालन और संधारण की नीति को इस प्रकार तैयार किया जाय, जिससे हर गांव में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था बने और किसी भी परिवार को पानी के लिए कठिनाई न उठानी पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में ग्रामीण नल-जल प्रदाय योजनाओं के संचालन एवं संधारण नीति के प्रारूप पर हुई बैठक में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन योजनाओं को निर्माण कार्य तक ही सीमित न रखकर संचालन और रखरखाव की ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे आने वाले वर्षों में भी योजनाएँ पूरी क्षमता से कार्य करती रहें। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए, जिससे ग्रामीण अपने स्तर पर भी योजनाओं की देखरेख कर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ किए गए जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल दी है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। बैठक में निर्णय लिया गया कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा तैयार किये गये "ग्रामीण नलजल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नीति" को सक्षम स्वीकृति उपरांत 03 वर्षों के लिये लागू किया जाये। इस नीति के लागू होने से समूह जलप्रदाय योजनाओं की भांति एकल ग्राम नलजल योजनाओं का सुचारू एवं दीर्घकालिक संचालन हो सकेगा। इस नीति के अनुसार ग्रामीण नलजल योजनाओं का संचालन, संधारण एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जायेगा। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि ने बताया कि प्रदेश में अगस्त 2019 तक जहाँ केवल 12.11 प्रतिशत अंतर्गत 13 लाख 53 हजार ग्रामीण परिवारों को ही नल से जल मिल रहा था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 78 लाख 64 हजार से अधिक हो गई है। इस प्रकार 70.41 प्रतिशत ग्रामीण परिवार नल से जल सुविधा से जुड़ चुके हैं। कुल 1 करोड़ 11 लाख 69 हजार परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। जल जीवन मिशन का कार्य वर्ष 2027 तक पूर्ण कर लिया जायेगा। समूह नलजल की 147 इसी प्रकार कुल योजनाओं में से अब तक 52 योजनाएँ पूर्ण की जा चुकी हैं जिनसे 4 हजार 285 ग्रामों में जलापूर्ति की जा रही है। शेष 95 योजनाएँ प्रगति पर हैं। प्रमुख सचिव श्री नरहरि द्वारा प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित हो रही नलजल योजनाओं के दीर्घकालिक एवं प्रभावी संचालन हेतु विभाग द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित विभिन्न स्तरों पर विचार विमर्श उपरांत तैयार की गई "ग्रामीण नलजल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नीति" की विस्तार से जानकारी दी गई। इस नीति के प्रावधानों के अनुसार ग्रामीण नलजल योजना का संचालन पूर्व की भांति संबंधित ग्राम पंचायत के द्वारा किये जाने तथा ग्राम पंचायतों को योजना के संचालन में सहयोग देने हेतु तथा योजना संचालन की व्यवस्था को सदृढ करने के उददेश्य से योजना के संधारण से संबंधित कार्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के द्वारा अनुबंधित एजेंसी के माध्यम से किये जाने की जानकारी दी गई। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती सम्पतिया उइके, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव, वित्त श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रबंध संचालक जल निगम श्री के. वी.एस. चौधरी कोलसानी भी उपस्थित थे।  

सीएम हेल्पलाइन पर आयुष्मान योजना को लेकर लगातार मिल रही शिकायतें

भोपाल  केंद्र सरकार ने गरीब, जरूरतमंदों के लिए निश्शुल्क स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से आयुष्मान भारत योजना शुरू की है। जिसमें हर प्रति वर्ष पांच लाख रूपये तक का उपचार करवाया जा सकता है। लेकिन निजी अस्पतालों ने योजना के नाम पर अवैध वसूली शुरू कर दी है। हाल ही में कनाड़िया क्षेत्र के फिनिक्स अस्पताल से शिकायत मिली है, जांच में आयुष्मान कार्ड धारक मरीज से राशि लेना पाया गया है। लेकिन इस तरह राशि वसूलने का खेल सिर्फ फिनिक्स अस्पताल में ही नहीं बल्कि शहर के कई निजी अस्पतालों में चल रहा है।   सीएम हेल्पलाइन पर हर माह करीब 10 शिकायतें आयुष्मान कार्ड धारकों द्वारा वसूली, इलाज नहीं मिलने, लंबे समय तक भर्ती रखने आदि की आती है। यानि हर वर्ष 100 से अधिक शिकायतें होती है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच के लिए भी अस्पतालों में जाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक इंदौर में 68 निजी अस्पताल और 35 शासकीय अस्पताल जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल है। यहां आयुष्मान योजना के अंतर्गत मरीजों का उपचार होता है। मरीजों को स्वस्थ होने के बाद भी नहीं करते डिस्चार्ज शहर के निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के अंतर्गत सबसे अधिक शिकायत इस संबंध में आती है कि मरीजों को स्वस्थ होने के बाद भी यह डिस्चार्ज नहीं करते हैं। छोटी बीमारी में भी उपचार के लिए मरीजों को लंबे समय तक भर्ती रखा जाता है। ताकि मोटा बिल बनाकर राशि ले सकें। लेकिन इस संबंध में कभी बड़ी कार्रवाई होते हुए नजर नहीं आती है। निजी अस्पतालों पर हो चुकी कार्रवाई इससे पहले भी मरीजों से राशि वसूलने, मरीजों को जबरन भर्ती करने सहित आयुष्मान से जुड़ी अन्य गड़बड़ी सामने आ चुकी है। यह गड़बड़ी शहर के बड़े निजी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सामने आई थी। जिसकी भोपाल से आई टीम ने जांच की थी और कार्रवाई भी हुई थी।     इंदौर के 68 निजी अस्पतालों आयुष्मान योजना से इलाज।     शहर के 35 शासकीय अस्पताल, प्राथमिक केंद्रों पर योजना से इलाज।     अस्पतालों में आयुष्मान के अप्रुवल के लिए परेशान होते हैं मरीज। 

नई बस सेवा: यूपी से बिहार के लिए अब रोजाना सीधी यात्रा, जानें ठहराव वाले शहर

लखनऊ आलमबाग बस टर्मिनल से मुजफ्फरपुर की बस सेवा शुरू होने के बाद अब वाराणसी से गया के लिए विशेष बस सेवा का संचालन होगा। सरकार ने पितृपक्ष के दौरान पिंडदान व तर्पण के लिए गया बिहार जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बस शुरू कर रही है। बस सप्ताह में सातों दिन चलेगी। इनमें यात्रियों की सुरक्षा व सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा गया है। परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया, बस सेवा से पितृपक्ष में लोग गया आसानी से पहुंच सकेंगे। वाराणसी (कैंट) से संचालित बस चंदौली-सासाराम-औरंगाबाद-शेरघाटी-गया (बिहार) तक के लिए चलेगी। रूट के अन्य यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। वाराणसी स्टेशन से रात्रि आठ बजे चलकर बस गया, बिहार सुबह चार बजे पहुंचेगी। वाराणसी से बिहार तक का 465 रुपये निर्धारित किया गया है। परिवहन मंत्री ने बताया, इस बस के संचालन से निजी वाहनों पर श्रद्धालुओं की निर्भरता कम होगी, जो कि उनके खर्च और समय को भी बचाएगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितृपक्ष में गया जाते हैं। उनकी सुविधा को देखते हुए परिवहन निगम ने मंथन किया। यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस बस संचालन को नियमित करने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने व श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने का प्रयास कर रही है। हरियाणा के लिए भी अंतरराज्यीय बस सेवा अंतरराज्यीय बस संचालन के तहत सारनाथ वाराणसी से बोधगया बिहार के लिए भी बस सेवा संचालित होगी। लखनऊ से मुजफ्फरपुर के लिए व मेरठ से सोनीपत (हरियाणा) के लिए भी बसों का संचालन शुरू किया गया है। लखनऊ (आलमबाग बस टर्मिनल) से मुजफ्फरपुर का किराया 862 रुपये निर्धारित किया गया है। बस सेवा लखनऊ से रात्रि दो बजे चलकर बाराबंकी, अयोध्या, गोरखपुर, तुमकुही, गोपालगंज होते हुए अगले दिन सुबह चार बजे मुजफ्फरपुर पहुंचती है। मेरठ से सोनीपत के लिए चलने वाली बसें दिन में तीन फेरे लगाएंगी। यह बस बड़ौत डिपो से सुबह 06ः30 बजे, 10ः50 बजे व 15ः50 बजें चलकर सोनीपत जाएगी। यात्रियों को आवागमन में आ रही परेशानियों को देखते हुए परिवहन निगम ने सोनीपत (हरियाणा) के लिए बस संचालन शुरू करने का निर्णय लिया है।

भारतीय वायुसेना में 97 Tejas MK-1A, जानें कितना बड़ा होगा जेट बेड़ा और भविष्य की रणनीति

नई दिल्ली भारत ने हाल ही में 97 LCA (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) तेजस मार्क 1A फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दी है, जिसकी कीमत करीब 62,000 करोड़ रुपये है. यह डील मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे भारतीय वायुसेना (IAF) का फाइटर जेट बेड़ा न केवल बड़ा होगा, बल्कि आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से लैस भी होगा.  वर्तमान में भारतीय वायुसेना का बेड़ा भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में 31 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है. प्रत्येक स्क्वाड्रन में औसतन 18 जेट्स होते हैं, यानी कुल मिलाकर IAF के पास करीब 558 फाइटर जेट्स हैं. इनमें शामिल हैं…     सुखोई Su-30 MKI: 265 जेट्स (भारत में निर्मित, रूस से लाइसेंस प्राप्त)     मिग-21: 36 जेट्स (2025 में रिटायर होने वाले)     मिग-29: 65 जेट्स     मिराज 2000: 44 जेट्स     राफेल: 36 जेट्स     जगुआर: 130 जेट्स     तेजस मार्क 1: 31 जेट्स (2 स्क्वाड्रन) हालांकि, पुराने मिग-21, मिग-23 और मिग-27 के रिटायर होने से स्क्वाड्रन की संख्या घटी है. सितंबर 2025 में आखिरी दो मिग-21 स्क्वाड्रन (नंबर 3 और 23) रिटायर हो जाएंगे, जिससे स्क्वाड्रन की संख्या 29 तक कम हो जाएगी. 97 LCA मार्क 1A का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A जेट्स की खरीद के साथ, IAF का तेजस बेड़ा काफी मजबूत होगा. वर्तमान में IAF के पास…     40 तेजस मार्क 1 जेट्स हैं (2 स्क्वाड्रन: नंबर 45 ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 ‘फ्लाइंग बुलेट्स’)     83 LCA मार्क 1A का ऑर्डर पहले से दिया जा चुका है (2021 में, 48000 करोड़ रुपये की डील). नई डील के साथ, 97 और LCA मार्क 1A जेट्स जुड़ने से कुल 180 LCA मार्क 1A और 40 मार्क 1 जेट्स होंगे, यानी 220 तेजस जेट्स. यह IAF के बेड़े का एक बड़ा हिस्सा होगा. ये जेट्स पुराने मिग-21 की जगह लेंगे और स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने में मदद करेंगे. LCA मार्क 1A में 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री है. यह उन्नत AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सुइट और अस्त्र मिसाइल जैसी तकनीकों से लैस है. यह 4.5 पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमले करने में सक्षम है.  IAF का बेड़ा कितना बड़ा होगा? 97 LCA मार्क 1A के शामिल होने के बाद, IAF का बेड़ा 220 तेजस (मार्क 1 और मार्क 1A) के साथ-साथ अन्य जेट्स (Su-30 MKI, राफेल, मिग-29, मिराज, और जगुआर) को मिलाकर करीब 600-620 फाइटर जेट्स का होगा. यह 33-34 स्क्वाड्रन के बराबर होगा. हालांकि, यह अभी भी 42 स्क्वाड्रन के लक्ष्य से कम है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 2025 के अंत तक 12 LCA मार्क 1A जेट्स और 2029 तक 83 जेट्स की पूरी डिलीवरी का वादा किया है. 97 नए जेट्स की डिलीवरी 10 साल में पूरी होगी, यानी 2035 तक. भविष्य की योजनाएं: 60 स्क्वाड्रन का लक्ष्य IAF ने 2047 तक अपने बेड़े को 60 स्क्वाड्रन (लगभग 1,080-1,200 जेट्स) तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. यह लक्ष्य भारत के दो मोर्चों—पाकिस्तान और चीन—से बढ़ते खतरों को देखते हुए जरूरी है. चीन के पास 1,900 से अधिक फाइटर जेट्स हैं, जिनमें पांचवीं पीढ़ी के J-20 शामिल हैं, जबकि पाकिस्तान अपने JF-17 बेड़े को अपग्रेड कर रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए IAF की योजनाएं हैं… LCA मार्क 2: यह तेजस का उन्नत संस्करण है, जो GE F414 इंजन से लैस होगा और 6,500 किलो पेलोड ले जा सकता है. IAF ने 120-200 LCA मार्क 2 जेट्स का ऑर्डर देने की योजना बनाई है. इसका पहला प्रोटोटाइप 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में उड़ेगा. 2029 से बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होगा. यह मिग-29, मिराज 2000 और जगुआर की जगह लेगा. एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA): यह भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर होगा, जिसे 2035 तक शामिल करने की योजना है. IAF 200 AMCA जेट्स (मार्क 1 और मार्क 2) खरीदना चाहता है, जो हवा में श्रेष्ठता और गहरे हमलों के लिए होंगे. इसमें स्टील्थ, सुपरक्रूज और उन्नत सेंसर होंगे. मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA): IAF 114 नए फाइटर जेट्स खरीदने की योजना बना रहा है, जिसमें राफेल, F-15EX, F/A-18 सुपर हॉर्नेट, टाइफून और Su-35 जैसे विकल्प हैं. यह डील स्क्वाड्रन की कमी को जल्दी पूरा करने के लिए है. Su-30 MKI अपग्रेड: IAF अपने 260 Su-30 MKI जेट्स को अपग्रेड करेगा, जिसमें स्वदेशी उत्तम AESA रडार, डिजिटल कॉकपिट और नया मिशन कंप्यूटर शामिल होगा. इसमें 78% स्वदेशी सामग्री होगी. मानवरहित विमान (UAV): IAF 2030 तक 30-50 ड्रोन (छोटे, मध्यम, और बड़े) खरीदेगा, जैसे DRDO घातक और ALFA-S स्वार्म ड्रोन, जो नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए होंगे. चुनौतियां और समाधान उत्पादन में देरी: तेजस मार्क 1A की डिलीवरी में देरी हुई, क्योंकि GE F404 इंजन की आपूर्ति में रुकावट आई. मार्च 2025 तक पहला जेट मिलने की उम्मीद है. HAL 2025 में 12 जेट्स देगा. स्वदेशी इंजन: तेजस अभी अमेरिकी GE F404 इंजन पर निर्भर है. भारत का कावेरी इंजन प्रोजेक्ट चल रहा है, लेकिन अभी परिपक्व नहीं है. HAL और GE अब F414 इंजन का भारत में सह-उत्पादन करेंगे. निजी क्षेत्र की भागीदारी: सरकार ने एक समिति बनाई है, जो निजी क्षेत्र को तेजस और AMCA के उत्पादन में शामिल करने की योजना बना रही है. इससे उत्पादन तेज होगा और लागत कम होगी. मेक इन इंडिया का प्रभाव 97 LCA मार्क 1A की डील मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी. इन जेट्स में 65% स्वदेशी सामग्री है. मार्क 2 में यह 70% तक होगी. यह छोटे और मध्यम उद्यमों को रोजगार देगा और भारत को एयरोस्पेस में आत्मनिर्भर बनाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस के ट्रेनर वेरिएंट में उड़ान भरी और इसकी तारीफ की, जिससे स्वदेशी तकनीक में भरोसा बढ़ा.