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₹582 करोड़ की लागत से भोपाल में 700Km वाटर नेटवर्क, 30 हजार परिवारों तक पहुँचेगा नल-जल

भोपाल  राजधानी भोपाल में अमृत योजना-2.0 के तहत जलापूर्ति से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत 700 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, साथ ही नई टंकियां, इंटकवेल और फिल्टर प्लांट भी स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज यानी गुरुवार 21 अगस्त को कुशाभाऊ कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में भूमिपूजन समारोह का आयोजन करेंगे, जिसमें जलापूर्ति कार्यों के लिए 582.32 करोड़ रुपये की लागत से भूमिपूजन किया जाएगा। इसके अलावा, 30 हजार घरों में नल कनेक्शन भी प्रदान किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में महापौर मालती राय, निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, बीजेपी जिलाध्यक्ष रविंद्र यति, और अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। इसके साथ ही, निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र और अभ्यार्थियों को नवीन नियुक्ति पत्र भी वितरित किए जाएंगे। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में भोपाल को उत्कृष्ट स्थान प्राप्त होने पर सफाई मित्रों का सम्मान भी किया जाएगा। अमृत योजना-2.0 का उद्देश्य अगले 30 से 40 वर्षों के लिए जलापूर्ति प्रणाली को मजबूत करना है, ताकि बढ़ती जनसंख्या के अनुसार जलापूर्ति की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे। योजना के तहत 4 नए इंटकवेल, 4 नए फिल्टर प्लांट, 36 बड़ी टंकियां और 30 हजार घरों में नल कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे। कुशाभाऊ कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यक्रम होगा। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव अमृत योजना-2.0 के तहत 582.32 करोड़ रुपए की लागत से जलापूर्ति संबंधी कार्यों एवं वार्डों में 50 अन्य विकास कार्य के लिए भूमिपूजन करेंगे। वहीं, निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र, अभ्यार्थियों को नवीन नियुक्ति पत्र भी देंगे। साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में भोपाल को उत्कृष्ट स्थान प्राप्त होने पर सफाई मित्रों का सम्मान भी किया जाएगा। महापौर मालती राय, निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, बीजेपी जिलाध्यक्ष एवं एमआईसी मेंबर रविंद्र यति, राजेश हिंगोरानी, मनोज राठौर समेत कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। 36 बड़ी टंकियां, 4 फिल्टर प्लांट भी जानकारी के अनुसार, अमृत योजना-2.0 से शहर में वाटर नेटवर्क बिछाया जाएगा। अगले 30 से 40 साल के लिए स्कीम लाई गई है। ताकि, आबादी के हिसाब से सिस्टम काम करता रहे। योजना के तहत 4 नए इंटकवेल, 4 नए फिल्टर प्लांट, 36 बड़ी टंकियां, 700 किलोमीटर लंबी पानी की पाइप लाइन और 30 हजार घरों में नल कनेक्शन भी दिए जाएंगे।

उपराष्ट्रपति चुनाव: सुदर्शन रेड्डी का नामांकन, विपक्ष के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी

 नई दिल्ली INDIA ब्लॉक के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार  सुदर्शन रेड्डी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. इस मौके पर सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष-राज्यसभा नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा नेता रामगोपाल यादव, एनसपी (SP) प्रमुख शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत समेत विपक्ष के तमाम बड़े नेता मौजूद रहे. इससे पहले एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने कल नामांकन दाखिल किया था. सूत्रों के अनुसार, सुदर्शन रेड्डी चार सेट में नामांकन दाखिल किया. सेट में 20 प्रस्तावक और 20 समर्थक शामिल रहे. बी. सुदर्शन रेड्डी ने नामांकन दाखिल करने से पहले स्वतंत्रता सेनानियों और महान नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की. नंबर गेम में भले ही विपक्ष पीछे हो, लेकिन उसने भी मुकाबले को दिलचस्प बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. खास बात यह है कि विपक्ष ने भी दक्षिण भारत से ही उम्मीदवार उतारा है. ऐसे में इस बार का चुनाव “दक्षिण बनाम दक्षिण” की तस्वीर पेश कर रहा है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स (X) पर नामांकन का कार्यक्रम साझा किया. विपक्षी INDIA गठबंधन के तमाम नेता सुबह 11 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में एकत्र होंगे. इसके बाद वे सामूहिक रूप से राज्यसभा महासचिव और इस चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पी.सी. मोदी के कार्यालय जाएंगे और नामांकन दाखिल करेंगे. विपक्ष के 'सुदर्शन चक्र' में कौन-कौन से दल उलझेंगे, कौन एनडीए का देगा साथ?  उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए ने सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को संयुक्त उम्मीदवार बनाया है. इसके चलते उपराष्ट्रपति पद के चुनाव का मुकाबला अब काफी रोचक हो गया है, क्योंकि इंडिया ब्लॉक ने सुदर्शन के नाम का ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि यह वैचारिक लड़ाई है. सीपी राधाकृष्णन के ज़रिए बीजेपी के 'तमिल' दांव में फंसे इंडिया ब्लॉक ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति पद के लिए गैर-राजनीतिक चेहरे पर भरोसा जताकर जबरदस्त 'सुदर्शन चक्र' चलाया है. बी. सुदर्शन को उम्मीदवार बनाकर विपक्ष को एकजुट रखने के साथ-साथ सत्तापक्ष के सहयोगी और समर्थक दलों को भी उलझा दिया है. एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं, जबकि इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले से हैं, जो एक समय आंध्र प्रदेश में हुआ करता था. उपराष्ट्रपति चुनाव में बीजेपी का सियासी पलड़ा भले ही भारी हो, लेकिन कांग्रेस ने बी. सुदर्शन को उतारकर विपक्षी एकता का संदेश देने के साथ-साथ एनडीए के सहयोगी दलों को असमंजस में डाल दिया है. विपक्ष ने गैर-राजनीतिक चेहरे को उतारा इंडिया ब्लॉक के उम्मीदवार बी. सुदर्शन गैर-राजनीतिक चेहरे हैं, उनका किसी भी सियासी दल से जुड़ाव नहीं रहा है. यही वजह है कि विपक्ष पूरी तरह एक साथ खड़ा नजर आ रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार, सपा के सांसद धर्मेंद्र यादव, डीएमके सांसद कनिमोझी और टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने उपराष्ट्रपति के लिए बी. सुदर्शन को विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार घोषित किया. 2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग से दूर रहने वाली ममता बनर्जी की पार्टी पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ी है. रेड्डी पर आम सहमति बनने के बाद, आम आदमी पार्टी से लेकर ममता तक साथ हैं. टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात करके सुदर्शन रेड्डी के नाम पर समर्थन ले लिया है. बी. सुदर्शन के नाम पर इंडिया ब्लॉक पूरी तरह से एकजुट खड़ा नजर आ रहा है. इसके अलावा इंडिया ब्लॉक से अलग हो चुकी आम आदमी पार्टी ने बी. सुदर्शन को समर्थन दिया है. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह लड़ाई केवल उपराष्ट्रपति चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और संविधान के बीच की लड़ाई है. उनका कहना था कि बीजेपी के उम्मीदवार आरएसएस से जुड़े हुए हैं, जबकि विपक्षी दलों के साझा उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी कभी किसी राजनीतिक दल या किसी विशेष विचारधारा से नहीं जुड़े. वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और हमेशा निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं. विपक्ष के 'सुदर्शन चक्र' में उलझे दल बीजेपी ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान कर डीएमके को जिस तरह से कशमकश में फंसा दिया था, उसी तरह अब इंडिया ब्लॉक की तरफ से बी. सुदर्शन के उम्मीदवार बनने के बाद चंद्रबाबू नायडू, जगन मोहन रेड्डी और केसीआर जैसे नेताओं के लिए धर्मसंकट पैदा हो गया है. बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म आंध्र प्रदेश के रंगारेड्डी जिले में हुआ है, जो फिलहाल अब तेलंगाना का हिस्सा है. इस तरह से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के सियासी क्षत्रपों को भी साधने का दांव माना जा रहा है. आंध्र प्रदेश में टीडीपी सत्ता में है तो वाईएसआर कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है. तेलंगाना में बीआरएस विपक्ष में है. बीआरएस और वाईएसआर न ही एनडीए के साथ हैं और न ही इंडिया ब्लॉक के साथ हैं. इस तरह से उपराष्ट्रपति के चुनाव में टीडीपी से लेकर वाईएसआर और केसीआर की भूमिका काफी अहम है. इसके अलावा बीजेडी भी किसी भी गठबंधन के साथ नहीं है. एनडीए के बड़े सहयोगी टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के सीएम हैं. टीडीपी ने सुदर्शन रेड्डी के नाम से पहले एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के साथ होने का दावा किया था, लेकिन अब उसके सामने कशमकश की स्थिति खड़ी हो गई है. यही धर्मसंकट वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी के साथ भी खड़ी हो गई है. विपक्ष ने तेलुगू प्रत्याशी उतारकर जगन रेड्डी को सियासी तौर पर उलझा दिया है. तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाले बी. सुदर्शन को प्रत्याशी बनाकर राज्य में मुख्य विपक्षी दल बीआरएस के सामने भी टेंशन बढ़ा दी है. केसीआर की बीआरएस के पास राज्यसभा में तीन सदस्य हैं और एक लोकसभा सांसद हैं. बीआरएस सांसद केआर सुरेश ने कहा कि वे राष्ट्रहित के मुद्दों पर सरकार का समर्थन करते रहे हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में अब किसे समर्थन देना है, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है. बीजेडी ने भी अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन 2024 में ओडिशा की सियासत में आए परिवर्तन के बाद नवीन पटनायक ने बीजेपी से दूरी बनाई है. विपक्ष ने जिस तरह गैर-राजनीतिक चेहरे … Read more

छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया विधानसभा भवन, प्रधानमंत्री मोदी करेंगे उद्घाटन

रायपुर नवा रायपुर में तैयार हो रहे नए विधानसभा भवन का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकार्पण करेंगे। उन्होंने विधानसभा भवन और नवनिर्मित ब्रह्मकुमारी शांति शिखर के नये भवन के लोकार्पण की स्वीकृति दी है। लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। एक नवंबर को राज्योत्सव के दिन विधानसभा भवन का लोकार्पण प्रस्तावित है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने दिल्ली प्रवास के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने प्रदेश के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर एक नवंबर को नवनिर्मित विधानसभा भवन में प्रवेश करने की जानकारी दी और लोकार्पण के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह गौरवशाली क्षण प्रदेश की जनता और सभी विधानसभा सदस्यों के लिए स्मरणीय होगा। उन्हाेंने प्रधानमंत्री से चर्चा के दौरान बताया कि नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारी बहनों का नया भवन बनकर तैयार है, जिसके लोकार्पण समारोह में आमंत्रित करना चाहती हैं। डा. रमन सिंह के आग्रह को प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने ओम बिरला से भी मुलाकात की और विधानसभा भवन के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया। छत्तीसगढ़ के नया विधानसभा भवन 52 एकड़ में बनाया जा रहा है। नए भवन के सदन में एक साथ 200 लोगों के बैठने की सुविधा होगी। साथ ही विधानसभा भवन के ऑडिटोरियम में 500 लोगों के क्षमता होगी। नए परिसर में 700 कार पार्किंग की सुविधा होगी। बता दें कि, 1 नवंबर को छत्तीसगढ़ दिवस के रूप में मानाया जाता है। 1 नवंबर को 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया था। ऐसे में 1 नवंबर 2025 को राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे हो जाएंगे। 15 अगस्त को अपने भाषण के दौराण मुख्यमंत्री ने रजत राजोत्सव वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की है। साथ ही 1 एक नवंबर से रायपुर सहित सभी जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सम्पूर्णता अभियान से जिलों और विकासखंडों में जीवन में सकारात्मक बदलाव

सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आकांक्षी कृषि जिलों की अवधारणा कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण सम्पूर्णता कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी मूलभूत सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है सम्पूर्णता अभियान का उद्देश्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह में जिला और विकासखंड अधिकारियों को किया सम्मानित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और प्रतिबद्धता के परिणाम स्वरूप देश ने विकास की नई गति प्राप्त की है। पिछड़े जिलों‍ और विकासखंडों को आकांक्षी रूप में चिन्हित कर विकास के लिए समन्वित प्रयास करना, इस दिशा में उठाया गया प्रभावी कदम है। आज आयोजित सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह, जिला और विकासखंड स्तर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, आधारभूत संरचना और सुशासन में आए सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण है। इन जिलों और विकासखंडों के रहवासियों के जीवन और जीवन जीने की परिस्थितियों में आया बदलाव अभियान की सफलता को अभिव्यक्त करता है। सम्पूर्णता अभियान से आकांक्षी जिलों और विकासखंडों में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण और उन्हें पोषक भोजन की उपलब्धता, बच्चों के टीकाकरण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण, स्कूलों में बिजली की उपलब्धता और समय पर पाठ्य पुस्तक वितरण जैसी गतिविधियों में सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को राज्य स्तरीय सम्पूर्णता अभियान सम्मान समारोह के अंतर्गत कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पूर्णता अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदेश के आकांक्षी जिलों और विकासखंडों के अधिकारियों को उनकी टीम सहित सम्मानित किया। राज्य नीति आयोग की कॉफी टेबल बुक का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य नीति आयोग द्वारा प्रदेश में संचालित विकास गतिविधियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर विकसित कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप, खेल एवं युवा कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर उपस्थित रही। मुख्य सचिव अनुराग जैन, नीति आयोग भारत सरकार के अपर सचिव रोहित कुमार और सदस्य प्रोफेसर रमेशचंद्र ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।   राज्य सरकार प्रत्येक पात्र हितग्राही को सभी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही को दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। प्रदेश में शिक्षा, कृषि, उद्योग, रोजगार, ऊर्जा सहित सभी क्षेत्रों में लक्ष्य निर्धारित कर कार्य किये जा रहे है। प्रदेश में अब 30 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं, इनमें से 10 पिछले सवा साल में शुरू किए गए। सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। सवा साल में साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है। प्रदेश में खेती के साथ मत्स्य पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में किसानों के लिए कृषि मेले, निवेश और उद्योग बढ़ाने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर समिट और विभिन्न सेक्टर्स की रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव आयोजित की गई हैं। उन्होंने कहा कि जो कलेक्टर और अन्य अधिकारी बेहतर कार्य करेंगे उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कार्य में लापरवाही को राज्य सरकार किसी भी स्थिति में अनदेखा नहीं करेगी। सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को दी नई दिशा : मुख्य सचिव जैन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सम्पूर्णता अभियान ने शासन-प्रशासन की कार्य संस्कृति को नई दिशा दी है। डेटा आधारित मूल्यांकन और स्कोरिंग प्रणाली तथा प्राथमिकताओं की स्पष्टता व पारदर्शिता से प्रशासनिक दक्षता और जन सेवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी प्रोत्साहन मिला है। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र ने कहा कि प्रदेश के समुख बड़ी चुनौती थी, परंतु प्रदेश के अधिकारियों के समर्पित प्रयासों से लक्षित संकेतों में सम्पूर्णता प्राप्त करना संभव हुआ है। रमेश चंद्र ने स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े संकेतकों में मध्यप्रदेश में हुए कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम में हुए बेहतर कार्य से कृषि क्षेत्र में न केवल उत्पादकता सुधरेगी अपितु उपज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। उन्होंने आकांक्षी कृषि जिलों की अवधारणा का उल्लेख करते हुए इसे कृषि विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। नीति आयोग के अपर सचिव रोहित कुमार ने कहा कि सम्पूर्णता कार्यक्रम में स्थानीय प्रशासन और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। मध्यप्रदेश द्वारा इस क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियां अन्य राज्यों के लिए उदाहरण हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर सहित जिले की टीम को किया सम्मानित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मान समारोह के अंतर्गत जिला बड़वानी और विकासखंड पाटी के लिए तत्कालीन कलेक्टर राहुल फटिंग, जिला दमोह और विकासखंड तेंदूखेड़ा के लिए कलेक्टर सुधीर कोचर, जिला धार तथा विकासखंड तिरला के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, जिला खंडवा और विकासखंड छैगांव माखन के लिए कलेक्टर ऋषभ गुप्ता और तत्कालीन कलेक्टर अनूप कुमार सिंह, जिला निवाड़ी और विकासखंड पृथ्वीपुर के लिए कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, जिला टीकमगढ़ और विकासखंड बलदेवगढ़ के लिए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और तत्कालीन कलेक्टर अवधेश शर्मा, जिला विदिशा और विकासखंड बासौदा के लिए कलेक्टर अंशुल गुप्ता (प्रशिक्षण पर), तत्कालीन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, जिला झाबुआ और विकासखंड थांदला, मेघनगर, रामा व राणापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जितेन्द्र सिंह चौहान, जिला रतलाम और विकासखंड बाजना के लिए कलेक्टर राजेश बाथम, जिला अनूपपुर और विकासखंड पुष्पराजगढ़ के लिए कलेक्टर हर्षुल पंचोली और जिला शहडोल और विकासखंड पाली के अधिकारियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला डिण्डौरी और आकांक्षी विकासखंड करंजिया, मेहेंदवानी व बजाग के लिए संयुक्त कलेक्टर सुभारती मेरावी तथा तत्कालीन कलेक्टर हर्ष सिंह, जिला खरगोन और विकासखंड भगवानपुर तथा झिरन्या के लिए कलेक्टर श्रीमती भाव्या मित्तल और तत्कालीन कलेक्टर कर्मवीर शर्मा, जिला राजगढ़ और विकासखंड जीरापुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अर्पित गुप्ता, जिला श्योपुर और विकासखंड श्योपुर, कराहल तथा विजयपुर के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अतेन्द्र सिंह गुर्जर तथा तत्कालीन कलेक्टर लोकेश कुमार जांगीड़, जिला अलीराजपुर और विकासखंड कट्ठीवाड़ा के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रखर सिंह, जिला छतरपुर और विकासखंड बक्सवाहा के लिए सीईओ … Read more

राज्यपाल पटेल: समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए सरकार की योजनाएँ सक्रिय

राज्यपाल ने सिवनी जिले के ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद प्रधानमंत्री आवास के गृह प्रवेश में राज्यपाल शामिल हुए   भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए योजनाएँ बनाकर उनका मैदानी स्तर पर क्रियान्वयन कर रही हैं। आयुष्मान भारत योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत है। अब पाँच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध होने से हर गरीब परिवार सुरक्षित हुआ है। सरकार के प्रयासों से महिलाएं आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप से सशक्त बन रही है। कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं को ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में प्रशिक्षित कर आधुनिक खेती में उनका योगदान प्राप्त किया जा रहा है। राज्यपाल पटेल ने बुधवार को सिवनी जिले के विकासखंड केवलारी के ग्राम झोला में ग्रामीणजनों के साथ आत्मीय संवाद के दौरान यह बात कही। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आज ग्रामीण महिलाएँ स्व-सहायता समूहों के माध्यम से छोटे-बड़े उद्योग संचालित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। महिलाएँ अपने परिवार का बेहतर लालन-पालन के साथ ही समाज में भी सशक्त भूमिका निभा रही हैं। राज्यपाल पटेल ने जनजातीय समुदाय में पाए जाने वाले अनुवांशिक रोग सिकल सैल रोग और रोकथाम के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि जैसे विवाह से पहले लड़के-लड़की की कुंडली मिलाई जाती है, उसी तरह सिकल सैल कार्ड भी अवश्य मिलाना चाहिए। यदि दोनों ही वाहक या रोगग्रस्त हों तो विवाह कदापि न किया जाए। उन्होंने बताया कि सरकार सिकल सैल उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चला रही है। इसके अंतर्गत नि:शुल्क जांच एवं परामर्श की व्यवस्था की गई है। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जांच कराए और इस रोग की रोकथाम में सहयोग दे। प्रत्येक बच्चे की शिक्षा और समाज के उत्थान के लिए युवाओं की भूमिका पर दिया बल राज्यपाल ने विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री जन मन कार्यक्रम और धरती आबा अभियान की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी बच्चे स्कूल जाएं। युवा पात्र परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने और शिक्षा के प्रसार में सहयोग करें।  जनजातीय विकास सरकार की प्राथमिकता : डॉ. विजय शाह कार्यक्रम को जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. विजय शाह ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय अंचलों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री जन मन और धरती आबा अभियान जैसे विशेष कार्यक्रमों का उद्देश्य जनजातीय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़कर मुख्यधारा में लाना है।  डॉ. शाह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें और उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करें। मंत्री ने यह भी बताया कि जनजातीय युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं कौशल विकास योजनाएँ चल रही हैं, जिनसे वे आत्मनिर्भर बन सकते हैं। राज्यपाल पटेल ने श्रीमती मुलिया बाई के प्रधानमंत्री आवास का किया उद्घाटन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने विकासखंड केवलारी के ग्राम झोला के प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत हितग्राही श्रीमती मुलिया बाई पति सुक्कू बैगा के आवास का शुभारंभ कर गृह प्रवेश कराया। राज्यपाल ने लाभान्वित परिवार से संवाद कर उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी ली। राज्यपाल ने कहा कि ग्रामों की वास्तविक उन्नति तभी संभव है जब योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुँचे और उसका सदुपयोग हो। उन्होंने ग्रामीणों से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। प्रवास के दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक सैला नृत्य प्रस्तुत किया। महिलाओं ने स्वागत गीत गाकर अतिथियों का अभिनंदन किया। प्राथमिक शाला झोला का निरीक्षण राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्राथमिक शाला झोला का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से आत्मीय संवाद किया। बच्चों से सामान्य प्रश्न पूछे, जिनका उत्साहपूर्वक उत्तर देकर बच्चों ने अपनी जिज्ञासा और आत्मविश्वास का परिचय दिया। राज्यपाल पटेल ने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की ज्योति ही विकास की आधारशिला है। बच्चों की तरक्की के साथ ही गांव और समाज प्रगति की राह पर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने बच्चों को स्वच्छता, अनुशासन और संस्कारों के महत्व से भी अवगत कराया। राज्यपाल ने शिक्षकों से शैक्षणिक गतिविधियों, पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के परिणाम की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई में विशेष रुचि लेकर गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रेरित किया।          

फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह

एक बगिया मां के नाम परियोजना, MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह 34 हजार से अधिक महिलाओं ने कराया ऐप पर रजिस्ट्रेशन, निजी भूमि पर विकसित की जाएगी बगिया भोपाल स्व सहायता समूह की महिलाओं को समृद्ध बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नवाचारों के माध्यम से महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में "एक बगिया मां के नाम" परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाई जाएगी। फलोद्यान की बगिया लगाने को लेकर समूह की महिलाओं ने विशेष उत्साह का दिखाया है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक 34 हजार 84 महिलाओं ने एक बगिया मां के नाम ऐप पर पंजीयन कराया है। परियोजना के अंतर्गत सरकार हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि प्रदान कर रही है। योजनान्तर्गत प्रदेश में फलदार पौधे लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जा रहा है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से कराया गया है। अन्य किसी माध्यम से हितग्राही का चयन नहीं किया जाएगा। चयनित महिला हितग्राही के नाम पर भूमि नहीं होने की दशा में उस महिला के पति-पिता-ससुर-पुत्र की भूमि पर उनकी सहमति के आधार पर पौधरोपण किया जा सकेगा। पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से किया जा रहा पौधरोपण प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से किया गया है। जमीन चिन्हित होने के बाद सॉफ्टवेयर की मदद से ही भूमि का परीक्षण किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। पौधरोपण का कार्य बेहतर ढंग से हो इसके लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रदेश में 31 हजार 300 महिलाओं को मिलेगा परियोजना का लाभ “एक बगिया माँ के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लाभ मिलेगा। इनकी निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। हर एक ब्लॉक में 100 हितग्राहियों का किया जा रहा चयन एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया जा रहा है। चयनित हुई समूह की पात्र महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण महिलाओं को वर्ष में दो बार दिया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि की सीमा भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। प्रति 25 एकड़ पर 1 'कृषि सखी' की होगी तैनाती फलोद्यान की बगिया लगाने के लिए चयनित हितग्राहियों की सहायता के लिए कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ये कृषि सखी हितग्राहियों को खाद, पानी, कीटों की रोकथाम, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक तैयार करने और अंतरवर्तीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी। प्रत्येक 25 एकड़ पर एक कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ड्रोन-सैटेलाइट इमेज और डैशबोर्ड से निगरानी पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, पौधे कहाँ लगे हैं, कहाँ नहीं लगे, इसकी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड भी बनाया गया है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। हितग्राहियों के चयन में टॉप 5 जिले एक बगिया मां के नाम परियोजना के लिए हितग्राहियों के चयन में प्रदेश के 5 जिले सिंगरौली, देवास, खंडवा, निवाड़ी और टीकमगढ़ अग्रणी हैं।  

मोटापा घटाने का नया विकल्प: गोलियां जल्द आएंगी, इंजेक्शन के मुकाबले असर कितना?

नई दिल्ली भारत में फिलहाल वजन कम करने वाली और डायबिटीज को कंट्रोल करने वाली 2 दवाएं औपचारिक रूप से लॉन्च हो चुकी हैं. इनमें अली लिली की मौनजारो और नोवो नॉर्डिस्क की वेगोवी शामिल हैं. दुनिया भर में ओजेम्पिक, मौनजारो और वेगोवी जैसी दवाएं कई देशों में इंजेक्शन के रूप में मौजूद हैं लेकिन अब खबर आई है कि एली लिली और नोवो नॉर्डिस्क कंपनी जल्द ही मोटापे के इलाज की गोलियां भी मार्केट में लॉन्च करने जा रही है. इन वजन कम करने वाली गोलियों की अमेरिका में कीमतें उनके वजन घटाने वाले इंजेक्शनों के बराबर होंगी. हालांकि दोनों ही कंपनियों ने इन दवाओं की कीमतों का अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है. उनका कहना है आने वाली दवाओं को मंजूरी मिलने और लॉन्च होने में अभी कुछ महीनों का समय है इसलिए कीमतें बदल सकती हैं. कब लॉन्च होंगी गोलियां? डेनमार्क स्थित नोवो को इस साल के अंत में मंजूरी मिलने और उसके तुरंत बाद लॉन्च होने की उम्मीद है जबकि इंडियानापोलिस स्थित लिली को अगस्त 2026 तक लॉन्च होने की उम्मीद है. नोवो की वेगोवी और लिली की जेपबाउंड (टिरजेपेटाइड, टाइप 2 डायबिटीज और वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एक दवा) जो वीकली इंजेक्शन के रूप में दी जाती हैं. यह GLP-1 हार्मोन को टारगेट करने वाली एकमात्र अत्यधिक प्रभावी वजन घटाने वाली दवाएं हैं और इनका अमेरिका में सबसे बड़ा मार्केट है. अमेरिका में इनकी कीमत लगभग ₹83,000 से ₹85,000 प्रति माह या उससे अधिक है. दोनों कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस बीमा की जगह नकद भुगतान करने वाले ग्राहकों को ₹41,417 से ₹42,415 मासिक में दवा प्रदान करती है. अगर भारत की बात करें तो भारत में मौनजारो (Mounjaro) की 1 महीने (4 इंजेक्शन) की खुराक की कीमत लगभग 14,000 रुपये से 17,500 रुपये तक है, जबकि वेगोवी (Wegovy) की 1 महीने की खुराक की कीमत करीब 17,345 रुपये से 26,015 रुपये के बीच है. इंजेक्शन और गोली में से क्या अधिक इफेक्टिव? दोनों कंपनियों ने कहा है कि उन्होंने मरीजों की जरूरतों को पूरा करने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए, मुंह से ली जाने वाली वजन घटाने वाली दवाएं विकसित की हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि कुछ लोग इंजेक्शन से परहेज करते हैं. हालांकि, गोलियां इंजेक्शन से अधिक असरदार नहीं हैं. लिली ने इस महीने कहा कि उसकी गोली ऑर्फोर्ग्लिप्रॉन ने एक परीक्षण में 72 हफ्तों के बाद 12.4 प्रतिशत वजन कम किया. वहीं इसकी तुलना नोवो की रोजाना ली जाने वाली सेमाग्लूटाइड से 15 प्रतिशत वजन कम होने से की जा सकती है. दोनों ही लिली के इंजेक्शन से 21 प्रतिशत तक पीछे हैं. यूबीएस के विश्लेषक ट्रुंग हुइन्ह ने कहा कि कीमत शायद आज की मौजूदा दवाओं के बराबर या थोड़ी कम होंगी. वहीं टीडी कोवेन के विश्लेषक माइकल नेडेलकोविच ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नोवो की गोली वेगोवी की कीमत के आसपास ही शुरू होगी. उन्होंने अपनी डायबिटीज की गोली राइबेलसस की कीमत का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी डायबिटीज की गोली ओजेम्पिक जो वेगोवी का डायबिटिक-ट्रीटमेंट वैरिएंट है, उसके इंजेक्शन के बराबर कीमत रखी गई है. नोवो के अधिकारियों ने इस महीने विश्लेषकों को बताया कि वे नई गोली के लिए रियायती मूल्य निर्धारित करने की जल्दी में नहीं हैं. विश्लेषकों के अनुसार, ओरल जीएलपी-1 दवाएं इंजेक्शन की जगह लेने के बजाय एक विशिष्ट स्थान भरेंगी. टीडी कोवेन का अनुमान है कि 2030 तक मध्य किशोरावस्था में गोलियां ग्लोबल ओबेसिटी की दवा बाजार में 1 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर लेंगी, जो तब तक करीब 12.45 लाख करोड़ तक पहुंच सकती हैं.  

GST सुधार से छोटे वाहनों पर असर: कीमतें घटेंगी, राजस्व में 6 अरब डॉलर की कमी

नई दिल्ली स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री द्वारा जब गुड्स एंड सर्विस टैक्स में सुधार (GST Reforms) का ऐलान किया गया, जब से देश भर में कुछ ख़ास वस्तुओं और सर्विसेज के सस्ते होने की चर्चा हो रही है. पीएम मोदी ने लालकिले के प्राचरी से कहा कि, ये जीएसटी रिफॉर्म अक्टूबर में दिवाली से पहले किया जा सकता है, जो आम आदमी के लिए दिवाली गिफ्ट जैसा होगा. इस जीएसटी सुधार के दायरे में वाहन भी शामिल हैं, जिनकी कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीद की जा रही है. एचएसबीसी की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वाहनों पर जीएसटी में संभावित कमी से छोटी कारों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर छोटी कारों पर जीएसटी की दर मौजूदा 28% से घटाकर 18% कर दी जाए, तो इन वाहनों की कीमतों में लगभग 8% की कमी देखने को मिल सकती है.  बताया जा रहा है केंद्र सरकार ने जीएसटी स्लैब में सुधार के लिए प्रस्ताव दिया है और यदि यह प्रस्ताव माना जाता है तो छोटी कारों की कीमत में तगड़ी कमी आएगी. इससे फेस्टिव सीजन के मौके पर ऑटो सेक्टर को तगड़ा लाभ मिल सकता है. बशर्ते जीएसटी सुधार में ये ऐलान दिवाली के पहले घोषित किया जाए. इस बार दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी. भारत में ज्यादातर लोग इस धनतेरस और दिवाली के मौके पर अपने घर में नए वाहन लाते हैं. मौजूदा समय में, पैसेंजर व्हीकल्स पर 28% से 50% तक जीएसटी टैक्स लगाया जाता है, जो वाहन के साइज, फ्यूल टाइप और इंजन क्षमता पर निर्भर करता है. जीएसटी के अलावा इन वाहनों पर सेस (Cess) भी लगाया जाता है, जो 1% से 5% है. इससे वाहनों की कीमत में और भी इजाफा हो जाता है. ख़बर है कि, छोटी कारें, जिन पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी और 1-3 प्रतिशत की सेस (Cess) दरें लागू होती हैं, नए बदलाव के बाद ये 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आ सकती हैं. रिपोर्ट में छोटी कारों की कीमतों में 8% की संभावित गिरावट का अनुमान लगाया गया है, जबकि बड़ी कारों की कीमतों में 3% से 5% तक की कमी की उम्मीद है. रिपोर्ट में जीएसटी में एकसमान कटौती की संभावना पर भी विचार करने की बात कही गई है. अगर सभी वाहन श्रेणियों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया जाए, तो सभी कारों के लिए कीमतों में लगभग 6% से 8% का लाभ हो सकता है.  राजस्वर में 6 अरब डॉलर की कमी हालाँकि, वाहन के साइज के आधार पर मौजूदा उपकर यानी 'Cess' को बनाए रखने का मतलब है कि ऐसी स्थिति की संभावना कम है. रिपोर्ट में सरकार खजाने में होने वाले संभावित नुकसान की तरफ भी इशारा किया गया है. जिसके अनुसार इस तरह की किसी भी व्यापक टैक्स कटौती से सरकार को अनुमानित 5 अरब से 6 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच राजस्व में गिरावट का सामना करना पड़ेगा. रिपोर्ट में एक रिवाइज़्ड टैक्सेशन मैकेनिज़्म का भी सुझाव दिया गया है, जिसके तहत छोटी कारों पर 18% की कम दर से कर लगाया जा सकता है, जबकि बड़े वाहनों पर 40% की "स्पेशल रेट" लागू हो सकती है, और मौजूदा उपकर समाप्त कर दिया जाएगा. इस प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि, वाहनों के साइज और टाइप के अनुसार टैक्सेशन के तरीके को अनुकूलित करना है. जिससे बाजार में संतुलन बना रहे. इस सेग्मेंट में सबसे बड़े खरीदार भारत में 1000 सीसी से लेकर 1500 सीसी (1.0 लीटर से 1.5 लीटर इंजन) वाली कारों की डिमांड सबसे ज्यादा है. जिसमें सबसे सस्ती कार मारुति ऑटो के10 से लेकर हुंडई क्रेटा जैसी एसयूवी शामिल हैं. बीते जुलाई की टॉप 10 बेस्ट सेलिंग कारों की लिस्ट से यदि केवल महिंद्रा स्कॉर्पियो को बाहर कर दें तो कुल 10 में से 9 कारें 1.0 लीटर से 1.5 लीटर इंजन क्षमता के बीच आती हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि, जीएसटी में इस सुधार का आम आदमी को किस कदर लाभ मिलेगा. इस समय कारों पर कितना लगता है GST नए वाहनों के लिए, जीएसटी दरें कार के कैटेगरी और साइज के आधार पर अलग-अलग हैं. 1200 सीसी तक की इंजन क्षमता और 4 मीटर से कम लंबाई वाली छोटी पेट्रोल कारों पर 28% जीएसटी और 1% उपकर लगता है. जबकि छोटी डीजल कारों (1500 सीसी तक, 4 मीटर से कम) पर 3% उपकर के साथ 28% जीएसटी लगता है.  वहीं मिड-साइज की कारों पर कुल 43%, लग्ज़री कारों पर 48% और एसयूवी पर सबसे ज़्यादा 50% तक का टैक्स लगता है. दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक वाहनों पर केवल 5% जीएसटी टैक्स लागू होता है. जिससे वे अधिक किफायती हो जाते हैं. जीएसटी से पहले के दौर की तुलना में, छोटी कारों और लग्ज़री कारों पर कर का बोझ कम हुआ है, जबकि मिड-साइज की कारें थोड़ी महंगी हुई हैं. वाहन कैटेगरी इंजन क्षमता और लंबाई GST रेट उपकर  टोटल टैक्स छोटी पेट्रोल कारें 1200 सीसी तक, 4 मीटर से कम 28% 1% 29% छोटी डीजल कारें 1500 सीसी तक, 4 मीटर से कम 28% 3% 31% मिड-साइज कारें 1200 सीसी (पेट्रोल) और 1500 सीसी (डीजल) 28% 15% 43% लग्ज़री कारें 1500 सीसी तक   28% 20% 48% एसयूवी वाहन  1500 सीसी तक, 4 मीटर से ज्यादा  28% 22% 50% इलेक्ट्रिक वाहन  सभी क्षमता वाले  5% 0% 5% संभल जाएगा छोटी कारों का बाजार पिछले कुछ सालों में एंट्री लेवल छोटी कारों का बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है. 5 लाख रुपये से भी कम कीमत में आने वाली एंट्री लेवल कारें, जिनकी बिक्री वित्तीय वर्ष-16 में 10 लाख से ज्यादा यूनिट्स की थी वो वित्तीय वर्ष-25 में घटकर 25,402 यूनिट पर आ गिरी हैं. कुल कार बिक्री में हैचबैक कारों की हिस्सेदारी आधी रह गई है, जो 2020 में 47 प्रतिशत से घटकर 2024 में 24 प्रतिशत हो गई है. ऐसे में यदि छोटी कारों पर टैक्स का बोझ कम होता है तो लोग इन कारों की तरफ मुखर होंगे और इनकी बिक्री बढ़ने की उम्मीद है. 

दांतों की बीमारियों से परेशान MP: एम्स सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

भोपाल  एम्स भोपाल ने मध्यप्रदेश में दांत और मुंह की बीमारियों पर अब तक का सबसे बड़ा राज्यव्यापी सर्वेक्षण पूरा किया है। 2002-03 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट को हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साउथ-ईस्ट एशिया जर्नल आफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित किया है। यह सर्वेक्षण एम्स भोपाल के दंत विभाग और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर फार ओरल हेल्थ प्रमोशन एंड डेंटल पब्लिक हेल्थ के नोडल अधिकारी डा. अभिनव सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसमें मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय ने सहयोग दिया। अध्ययन में प्रदेश के 41 जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों से करीब 48 हजार लोगों को शामिल किया गया। नतीजे चौंकाने वाले सर्वे के मुताबिक, प्रदेश में दांतों में कीड़े लगना 40 से 70 प्रतिशत लोगों में पाया गया। मसूड़ों की बीमारी 50 से 87 प्रतिशत और मुंह के कैंसर दो से 17 प्रतिशत तक देखी गईं। सबसे गंभीर स्थिति यह रही कि 70 प्रतिशत से अधिक बुजुर्ग और लगभग 50 फीसद 5 साल के बच्चे दांतों की सड़न यानी कैविटी से जूझ रहे हैं। देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक एम्स भोपाल ने केवल सर्वे ही नहीं किया, बल्कि इसके आधार पर देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक भी बनाया है। डब्ल्यूएचओ माडल पर आधारित इस डेटा बैंक में जिलेवार मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति और सेवाओं का ब्योरा दर्ज है। सरकार और नीति-निर्माता अब इस आधार पर नई योजनाएं बना सकेंगे। तकनीक से आई पारदर्शिता सर्वेक्षण को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए मोबाइल एप और जीपीएस तकनीक का उपयोग किया गया। साथ ही एम्स भोपाल ने अपने ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से डॉक्टरों, शिक्षकों और काउंसलरों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी शुरुआत की है, ताकि रोकथाम और उपचार की सुविधाएं सीधे समाज तक पहुंच सकें। विशेषज्ञों की राय डॉ. अभिनव सिंह का कहना है कि अब जब मौखिक स्वास्थ्य की वास्तविक तस्वीर सामने आ चुकी है तो जनजागरुकता बढ़ाने, बचाव और उपचार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। यह सर्वे मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मौखिक स्वास्थ्य को नई दिशा देगा।     दांतों में कीड़े (कैविटी) – 40% से 70%     मसूड़ों की बीमारी (गम डिजीज) – 50% से 87%     मुंह के कैंसर से पहले की अवस्थाएं – 2% से 17%     बुजुर्गों में दांतों की सड़न – 70% से अधिक     5 साल के बच्चों में कैविटी – लगभग 50%  

BJP की रणनीति: हिंदुत्व एजेंडे को धार, OBC को साधने के लिए कल्याण सिंह की विरासत का सहारा

अलीगढ़ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बहाने बीजेपी मिशन-2027 का आगाज करने जा रही है. कल्याण सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर गुरुवार को अलीगढ़ में बीजेपी एक बड़ा कार्यक्रम कर रही है, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और बृजेश पाठक शिरकत करेंगे. इसके अलावा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और प्रदेश के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह शामिल होंगे. कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को बीजेपी 'हिंदू गौरव दिवस' के रूप में मना रही है. इस तरह बीजेपी 2027 के चुनाव से पहले यूपी की सियासत में हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने और सपा की पीडीए पॉलिटिक्स को काउंटर करने की कवायद में है. योगी सरकार के करीब दो दर्जन मंत्री गुरुवार को कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने अलीगढ़ पहुंचेंगे. इस दौरान सीएम योगी सहित बीजेपी के दिग्गज नेता अलीगढ़ में दो घंटे तक रहकर कल्याण सिंह के बहाने 2027 का एक तरह से पश्चिम यूपी में आगाज करेंगे. बीजेपी 2024 में पश्चिम यूपी की हारी हुई लोकसभा सीटों पर लोधी समुदाय के वोटरों को साधकर 2027 को फतह करने की रणनीति अपनाएगी. कल्याण सिंह के बहाने हिंदुत्व के एजेंडे को धार कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि सभा में बीजेपी के दिग्गज नेताओं के अलीगढ़ पहुंचने के पीछे सियासी मकसद साफ है. कल्याण सिंह को हिंदुत्व की राजनीति करने वाले राम मंदिर आंदोलन का नायक माना जाता है. नब्बे के दशक में कल्याण सिंह बीजेपी के हिंदुत्व का चेहरा बनकर उभरे थे. कल्याण सिंह के यूपी सीएम रहते हुए 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया था. कल्याण सिंह बीजेपी के इकलौते नेता थे, जो राम मंदिर के लिए जेल गए और अपनी सत्ता की बलि दे दी थी. इस तरह कल्याण सिंह की पहचान राम भक्त और हिंदुत्व की कट्टर छवि वाले नेता की रही, जिसे बीजेपी 2027 में भुनाने की कवायद में है. इसीलिए बीजेपी कल्याण सिंह की पुण्यतिथि को 'हिंदू गौरव दिवस' के रूप में मनाकर यूपी की सियासत में हिंदुत्व के एजेंडे को धार दे रही है. सपा के PDA का क्या काउंटर प्लान है? उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के रूप में बीजेपी के पास एक ऐसा ऑलराउंडर चेहरा था, जिसके सहारे पार्टी ने जातीय समीकरण को मजबूत करने के साथ-साथ हिंदुत्व की आक्रामक राजनीति को धार दी थी. यही वजह है कि बीजेपी कल्याण सिंह की श्रद्धांजलि का कार्यक्रम ऐसे समय कर रही है, जब 2027 के चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. सपा-कांग्रेस मिलकर बीजेपी के खिलाफ ओबीसी-दलित पॉलिटिक्स का सियासी नैरेटिव सेट करने में जुटी हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में ही सपा अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और राहुल गांधी के संविधान और आरक्षण वाले दांव के ज़रिए बीजेपी को मात देने में सफल रही है. बीजेपी अब कल्याण सिंह के बहाने सपा की रणनीति को काउंटर करने की कवायद में जुटी है. पूजा पाल के साथ खड़े होकर बीजेपी ओबीसी के तहत पाल-गड़रिया और बघेल समुदाय को साधने का दांव चल रही है, तो कल्याण सिंह के बहाने लोध समुदाय को साधे रखने की रणनीति है. कल्याण सिंह ओबीसी समुदाय की लोध जाति से आते हैं. ओबीसी में पाल और लोध दोनों अहम जातियां हैं. इस तरह बीजेपी पाल और लोध समाज के ज़रिए सपा की पीडीए राजनीति में सेंधमारी का प्लान बना रही है. बीजेपी के सबसे बड़े ओबीसी चेहरे रहे बीजेपी अपने शुरुआती दौर में ऊंची जातियों की राजनीति वाली पार्टी की पहचान रखती थी और उसे ठाकुर, ब्राह्मण, बनियों की पार्टी कहा जाता था. बीजेपी की इस छवि को बदलने का काम कल्याण सिंह ने किया था. तब गुड गवर्नेंस के ज़रिए उन्होंने तमाम ओबीसी जातियों को जोड़कर मंडल वाली सियासत पर कमंडल का पानी फेर दिया था. कल्याण सिंह ओबीसी की लोध बिरादरी से थे और उत्तर प्रदेश में लोध समाज का वोट भी निर्णायक है. ओबीसी में एक और बड़ा वोट बैंक लोध जाति का है. कल्याण सिंह के चलते लोधी समुदाय बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है. कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह योगी सरकार में मंत्री हैं. यही नहीं बीजेपी ने लोधी समुदाय के नेताओं को राज्यसभा और विधायक बना रखा है, लेकिन 2027 की चुनावी तपिश के साथ पार्टी कल्याण सिंह के ज़रिए लोधी ही नहीं बल्कि गैर-यादव ओबीसी वोटों को सियासी संदेश देने की कवायद शुरू कर रही है, ताकि 2024 में हुए सियासी नुकसान की भरपाई कर सके. पिछले दिनों लोध समुदाय की बीजेपी से नाराजगी का सवाल उठा था. पश्चिम यूपी के किले को दुरुस्त करने में जुटी बीजेपी पहले से यूपी के जाट लैंड कहे जाने वाले पश्चिमी यूपी की मुजफ्फरनगर, कैराना, सहारनपुर, नगीना और मुरादाबाद जैसी सीटें 2024 में गंवा चुकी है. इसके अलावा लोधी समाज के प्रभाव वाली कासगंज, बदायूं, आंवला, संभल, मैनपुरी, रामपुर, हमीरपुर और कन्नौज जैसी सीट हार चुकी है. इसके अलावा फर्रुखाबाद और अलीगढ़ की सीट बहुत मुश्किल से जीती है. ऐसे में बीजेपी कल्याण सिंह के बहाने लोध प्रभाव वाले इलाके में अपनी सियासी जड़ें मजबूत करने का दांव चल रही है, क्योंकि ओबीसी वोटों को साधे बिना बीजेपी यूपी में सत्ता की हैट्रिक नहीं लगा पाएगी. यूपी में करीब 3 फीसदी लोधी समुदाय के लोग हैं, लेकिन बृज और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में इनकी निर्णायक भूमिका है. यूपी के करीब 23 जिलों में लोध वोटरों का दबदबा है. रामपुर, ज्योतिबा फुले नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, महामायानगर, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, पीलीभीत, लखीमपुर, उन्नाव, शाहजहांपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, कन्नौज, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा ऐसे जिले हैं, जहां लोध वोट बैंक पांच से 10 फीसदी तक है. लोधी समुदाय ओबीसी की पहली जाति है, जो कल्याण सिंह के चलते बीजेपी के साथ जुड़ गई थी. बीजेपी अब कल्याण सिंह के निधन के बाद भी उसे अपने साथ पहले की तरह ही जोड़े रखना चाहती है. इसीलिए कल्याण सिंह की पुण्यतिथि पर सीएम योगी से लेकर बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ही नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी पहुंच रहे हैं. उत्तर प्रदेश में OBC पॉलिटिक्स उत्तर प्रदेश की सियासत ओबीसी मतदाताओं के इर्द-गिर्द सिमट गई है, जिसके चलते कल्याण सिंह के बहाने बीजेपी की लोधी समुदाय के … Read more