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टाइम-लैप्स और पांच साल की मेहनत: राम मंदिर निर्माण पर बनेगी विशेष डॉक्यूमेंट्री

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बन रहा भव्य राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण का अधिकांश कार्य अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा. दिसंबर तक शेष काम भी समाप्त कर दिया जाएगा. इसके साथ ही जनवरी में होने वाले भव्य उद्घाटन के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं. राम मंदिर निर्माण की यह ऐतिहासिक यात्रा करीब पांच साल की रही है. खास बात यह है कि इस पूरे निर्माण कार्य को पांच टाइम-लैप्स कैमरों के माध्यम से लगातार रिकॉर्ड किया जा रहा है. खुदाई से लेकर सॉइल टेस्टिंग और चरणबद्ध निर्माण की यह पूरी कहानी भविष्य में डॉक्यूमेंट्री के रूप में दुनिया के सामने लाई जाएगी. ट्रस्ट ने इस रिकॉर्डिंग को बौद्धिक संपदा घोषित किया है और इसे कुछ शर्तों के साथ सीबीआरआई (रुड़की) को सौंपा जाएगा. डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य आगे की पीढ़ियों को यह दिखाना है कि कैसे तकनीकी विशेषज्ञता, वास्तुशिल्पी विशेषताएं और श्रमिकों का समर्पण मिलकर इस भव्य धरोहर को साकार कर पाया. मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप को बनाए रखना ट्रस्ट की प्राथमिकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सजावट और अन्य तकनीकी काम किए जा रहे हैं. मंदिर परिसर में फसाड लाइटिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है. अनुमानित 8 से 10 करोड़ रुपये की लागत से इस लाइटिंग का काम होगा. तीन प्रमुख कंपनियों ने प्रजेंटेशन दी है और चयन प्रक्रिया अंतिम दौर में है. रात के समय इन लाइट्स से मंदिर की अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला और भी भव्य दिखाई देगी. इसके साथ ही मंदिर की कलात्मकता को और विशेष बनाने के लिए थ्री-डी म्यूरल्स लगाए जा रहे हैं. कुल 90 म्यूरल्स में से 85 अयोध्या पहुंच चुके हैं. इनमें से 70 से अधिक को मंदिर की दीवारों पर स्थापित कर दिया गया है. शेष म्यूरल्स लगाने का काम 15 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा. राम मंदिर न सिर्फ आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय शिल्प, संस्कृति और इंजीनियरिंग का भी उदाहरण बनेगा. नृपेंद्र ने बताया कि सुबह 9:30 बजे तीन कंपनियों की ओर से फसाड लाइटिंग का प्रजेंटेशन किया गया। इसमें हाइब्रिड मॉडल, प्रोजेक्टर और लीनियर लाइटिंग जैसे विकल्प प्रस्तुत किए गए। अंतिम चयन के बाद इस पूरी व्यवस्था पर लगभग आठ से 10 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। इस लाइटिंग से रात में भी मंदिर की अद्भुत नक्काशी झलकेगी। थ्री डी म्यूरल के निर्माण में एक माह की हुई देरी उन्होंने बताया कि राम मंदिर के लोअर प्लिंथ में लगने वाले 90 म्यूरल्स में से 85 तैयार होकर अयोध्या पहुंच चुके हैं। इनमें से 70 से अधिक लगाए भी जा चुके हैं। थ्री डी मूर्तियों के निर्माण में तकरीबन 15 से 30 दिन की देरी दर्ज की गई है। यह काम अब 15 सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।  दिसंबर तक सभी काम पूरा कर लेने का लक्ष्य निर्माण समिति के अध्यक्ष ने बताया कि समीक्षा के दौरान अस्थायी मंदिर और शहीदों की स्मृति में लगाए गए ग्रेनाइट पिलर के स्वरूप पर भी विस्तार से विचार किया गया। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि मंदिर की पवित्रता और मूल स्वरूप पर किसी भी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। निर्माण कार्य की रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि अक्तूबर के अंत तक अधिकांश काम पूरे हो जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि दिसंबर तक शेष काम भी लक्ष्य के अनुसार पूरा कर लिया जाएगा। अयोध्या राम मंदिर; शेषावतार और परकोटा के 6 मंदिरों के दर्शन कर सकेंगे श्रद्धालु, 15 अक्टूबर से व्यवस्था लागू   राम मंदिर परिसर में सभी 6 मंदिरों के साथ सप्त मंडप, कुबेर टीला और शेषावतार मंदिर के दर्शन की व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू हो जाएगी. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 9 सितंबर को आयोजित होगी, जिसमें एक नए ट्रस्टी के नाम को भी शामिल करने पर मुहर लग सकती है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर निर्माण समिति की भी बैठक 7, 8 और 9 सितंबर को होगी. मंदिर निर्माण समिति की बैठक में इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं. पूरी उम्मीद है कि मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य इस वर्ष पूरे कर लिए जाएंगे. मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक के दूसरे दिन आगामी तैयारियों को देखते हुए निर्माण कार्य को पूरा करने और दर्शन व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर मंथन किया गया. लगभग 6 घंटे तक लगातार चल इस बैठक के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह तय कर लिया गया है कि परकोटा के 6 मंदिर और शेषावतार मंदिर में दर्शन की व्यवस्था अक्टूबर माह से प्रारम्भ हो जाएगी. लेकिन सप्त मंडपम में दर्शन की व्यवस्था शुरू किए जाने पर विचार किया जा रहा है. राम मंदिर परिसर में निर्माण. हालांकि, इसके पहले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए श्रद्धालुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की व्यवस्था में सुरक्षा बड़ी चुनौती बन सकती है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र टेस्ट की मानें तो दर्शन व्यवस्था प्रारंभ होने के बाद प्रतिदिन सुरक्षा के जवानों को परिसर में हर कोने की तलाशी न करनी पड़े, इसके लिए ट्रस्ट सुरक्षा एजेंसी के साथ अध्ययन कर रहा है. वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए लगेंगी तीन लिफ्ट: राम मंदिर में आने वाले अतिरिक्त श्रद्धालुओं के लिए लिफ्ट की व्यवस्था भी सितंबर तक पूरा कर की ली जाएगी. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर में तीन लिफ्ट लगाई जानी हैं. इसमें उत्तर दिशा में दो और एक पश्चिम दिशा में होगी. अक्टूबर में इसे प्रारंभ कर दिया जाएगा. एक दिन में एक लाख श्रद्धालु करेंगे शू सेंटर का उपयोग: राम मंदिर में दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गर्मी में तेज धूप का जलना पैरों में बर्दाश्त नहीं हो पता इसके चलते अब आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पास परकोटा के बाहर शू सेंटर का निर्माण कराया गया. चंपत राय ने बताया कि इसमें एक साथ लगभग 12000 से अधिक लोग एक साथ इसके अंदर अपने जूता और चप्पल को रख सकेंगे. एक दिन लगभग एक लाख श्रद्धालु इस सुविधा … Read more

62 हजार करोड़ का करार: IAF को मिलेंगे 97 नए तेजस MK-1A लड़ाकू विमान

बेंगलुरु भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के लिए 97 और एलसीए तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. 62,000 करोड़ रुपये की डील को एक उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम मंजूरी मिली, जिससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इन विमानों के उत्पादन का रास्ता साफ हो गया. यह कदम मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह कार्यक्रम न केवल भारतीय वायुसेना को आधुनिक बनाएगा, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्यमों को भी रक्षा क्षेत्र में व्यापार का बड़ा अवसर देगा.  तेजस: मिग-21 का आधुनिक विकल्प भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने पुराने मिग-21 विमानों पर निर्भर रही है, जो 1960 के दशक के डिजाइन हैं. ये विमान अब पुराने हो चुके हैं. आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करने में कमजोर पड़ रहे हैं. सरकार ने अगले कुछ हफ्तों में मिग-21 के बेड़े को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया है. इसकी जगह लेने के लिए स्वदेशी तेजस मार्क 1ए को चुना गया है, जो एक चौथी पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है. तेजस मार्क 1ए, पहले के 40 तेजस विमानों की तुलना में अधिक उन्नत है. इसमें बेहतर एवियोनिक्स (इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम) और रडार हैं, जो इसे आधुनिक हवाई युद्ध के लिए और सक्षम बनाते हैं. इस विमान में 65% से अधिक हिस्सा स्वदेशी है.   62,000 करोड़ की डील: दूसरा बड़ा ऑर्डर यह तेजस मार्क 1ए का दूसरा बड़ा ऑर्डर है. इससे पहले, कुछ साल पहले सरकार ने 48,000 करोड़ रुपये की लागत से 83 तेजस मार्क 1ए विमानों का ऑर्डर दिया था. नए ऑर्डर के साथ, भारतीय वायुसेना के पास अब कुल 180 तेजस मार्क 1ए विमान होंगे. यह डील हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को मिली है, जो भारत का प्रमुख रक्षा विमान निर्माता है. इस डील को मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक में मंजूरी दी गई, जिसके बाद HAL अब इन विमानों का उत्पादन शुरू करेगा. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को रक्षा क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. इस डील से न केवल भारतीय वायुसेना को आधुनिक विमान मिलेंगे, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को भी रक्षा क्षेत्र में व्यापार का बड़ा अवसर मिलेगा. तेजस मार्क 1ए में 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग होगा, जो भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को बढ़ाएगा. HAL को न केवल तेजस विमानों के लिए, बल्कि स्वदेशी हेलीकॉप्टरों और उनके इंजनों के लिए भी ऑर्डर मिले हैं. रक्षा खरीद परिषद ने 156 LCH प्रचंड हेलीकॉप्टरों और 84 सुखोई-30 एमकेआई विमानों के लिए 1.6 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी.   प्रधानमंत्री का तेजस में उड़ान अनुभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेजस के ट्रेनर संस्करण में उड़ान भरी थी, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा लड़ाकू विमान में पहली उड़ान थी. इस उड़ान ने तेजस की तकनीकी क्षमता और भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रगति को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया.   तेजस मार्क 1ए की खासियत तेजस मार्क 1ए एक आधुनिक लड़ाकू विमान है, जिसमें कई उन्नत विशेषताएं हैं…     एडवांस एवियोनिक्स और रडार: यह विमान पहले के तेजस विमानों की तुलना में अधिक उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस है, जो इसे लंबी दूरी के हवाई युद्ध (BVR) और हवाई निगरानी के लिए बेहतर है.     65% स्वदेशी सामग्री: इस विमान में 65% से अधिक हिस्सा भारत में बना है, जो देश की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है.     मैन्यूवरिंग और डिजाइन: इसका डेल्टा-विंग डिजाइन इसे हल्का और तेज बनाता है, साथ ही इसका रडार क्रॉस-सेक्शन कम है, जिससे इसे दुश्मन के रडार में पकड़ना मुश्किल होता है.     हथियारों की क्षमता: यह विमान आर-73 क्लोज-कॉम्बैट मिसाइल, डर्बी बीवीआर मिसाइल और सटीक बमों को ले जाने में सक्षम है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने बताया कि तेजस मार्क 1ए में अभी मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम (MAWS) की कमी है, जो मिसाइल हमले की चेतावनी देता है. इस सिस्टम पर डीआरडीओ और अन्य कंपनियों के साथ काम चल रहा है. भविष्य में इसे शामिल किया जा सकता है. तेजस का भविष्य और भारतीय वायुसेना तेजस कार्यक्रम भारतीय वायुसेना के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. वर्तमान में, दो वायुसेना स्क्वाड्रन तेजस विमानों का संचालन कर रहे हैं. आने वाले वर्षों में यह वायुसेना का सबसे बड़ा लड़ाकू बेड़ा बन सकता है. 2016 में तेजस के पहले संस्करण को शामिल किया गया था. अब मार्क 1ए के साथ वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी. इसके अलावा, HAL को 200 से अधिक तेजस मार्क 2 और उतनी ही संख्या में पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है. ये विमान और भी उन्नत होंगे और भारत को वैश्विक एयरोस्पेस शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे.

पदोन्नत प्राचार्यों की पदस्थापना प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा विभाग की पारदर्शी पहल: पदोन्नत प्राचार्यों की ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारम्भ पदोन्नत प्राचार्यों की पदस्थापना प्रक्रिया होगी पूरी तरह पारदर्शी- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 23 अगस्त तक चलेगी ऑनलाइन काउंसिलिंग, अंतिम दिन अनुपस्थितों को मिलेगा अवसर संचालक लोक शिक्षण की उपस्थिति और मार्गदर्शन में कराया जा रहा काउंसिलिंग ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रारंभ : पदोन्नत प्राचार्यों को ऑनलाइन काउंसिलिंग से मिलेगा पदस्थापना स्थल 845 नव पदोन्नत प्राचार्यों के पदांकन हेतु ओपन काउंसिलिंग प्रारंभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन की सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज से राजधानी रायपुर स्थित शासकीय शिक्षा महाविद्यालय परिसर, शंकर नगर में पदोन्नत प्राचार्यों के लिए ऑनलाइन ओपन काउंसिलिंग की शुरुआत हो गई है। इस प्रक्रिया में कुल 845 नव पदोन्नत प्राचार्य शामिल होंगे। संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति और मार्गदर्शन में काउंसिलिंग 20 अगस्त से 23 अगस्त 2025 तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से आयोजित होगी। प्रत्येक दिन दो पालियों में क्रमशः 150-150 प्राचार्यों को शामिल किया जाएगा। पदोन्नति आदेश एवं रिक्त पदों की सूची पूर्व में ही स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है, जिससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी एवं सुगम हो। सरकार द्वारा तय नियमावली एवं वरिष्ठता के आधार पर प्राथमिकता निर्धारित की जाएगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, इसके बाद महिला और फिर पुरुष अभ्यर्थियों को वरिष्ठता क्रम से संस्था चयन का अवसर मिलेगा। एक वर्ष से कम अवधि में सेवानिवृत्त होने वाले प्राचार्यों को भी प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। काउंसिलिंग हेतु वेटिंग हॉल और काउंसिलिंग कक्ष निर्धारित कर दिए गए हैं, जहाँ केवल अभ्यर्थियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। सभी पदोन्नत प्राचार्यों को अपने सेवा प्रमाण पत्र और मान्य फोटोयुक्त पहचान पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे। काउंसिलिंग में अनुपस्थित रहने वाले अभ्यर्थियों को अंतिम दिन 23 अगस्त को अवसर दिया जाएगा। काउंसिलिंग पूर्ण होने के पश्चात् शासन द्वारा पदस्थापना आदेश जारी किए जाएंगे तथा सभी को आदेश प्राप्ति के 7 दिवस के भीतर पदग्रहण करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन की सरकार ने शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और सरलता लाने का संकल्प लिया है। इस पहल से अब प्राचार्यों की पदस्थापना की प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गई है। पहले से ही रिक्त पदों का स्थान सार्वजनिक कर दिया गया है, जिससे सभी को अपने अधिकार और विकल्प स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सके।

लोकसभा में ‘दागी नेता हटाओ’ बिल पेश, विपक्षी सांसदों ने कॉपी फाड़ी, शाह पर कागज फेंके

नई दिल्ली प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को अपराध के गंभीर आरोपों के बाद पद से हटाने वाला बिल बुधवार को अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया। कांग्रेस, सपा समेत सभी विपक्षी दलों ने बिल का पुरजोर विरोध किया। कांग्रेस ने बिल को पूरी तरह से विनाशकारी बताया, जबकि अमित शाह ने कहा कि बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में भेजा जाएगा। बिल में प्रस्तावित किया गया है कि अगर कोई मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या फिर मंत्री पर गंभीर आरोप हैं और उसकी गिरफ्तारी होती है तो 30 दिनों तक जेल में रहने के बाद 31वें दिन उसके इस्तीफा देना पड़ेगा या फिर उसे बर्खास्त कर दिया जाएगा। अमित शाह की तरफ उछाले कागज विपक्ष के कुछ सांसद लोकसभा की वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. इस दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी भी फाड़ दी और कागज के टुकड़े अमित शाह की तरफ उछाले. हालांकि अमित शाह ने बिल पेश करने के दौरान कहा कि सरकार इस बिल को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखती है. बावजूद इसके बिल को विरोध का सामना करना पड़ा. संविधान के 130वें संशोधन विधेयक पेश होने के दौरान सदन में लगातार नारेबाजी होती रही. विपक्षी सांसदों ने सत्ता पक्ष को घेर लिया और गृह मंत्री का माइक मोड़ने की कोशिश की. इस पर काफी हंगामा हुआ और सदन के अंदर स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस दौरान सत्ता पक्ष के कई सांसद, गृह मंत्री का बचाव करने के लिए आगे आकर विपक्षी सांसदों को रोकने की कोशिश करने लगे. लोकसभा में अमित शाह के बिल पेश करने के बाद विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत समूचे विपक्ष का हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अमित शाह ने कहा कि दागी सीएम-पीएम और मंत्रियों को हटाने वाला बिल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने विचार के लिए भेजा जाएगा। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बिल को "पूरी तरह से विनाशकारी" बताया। कांग्रेस सांसद ने कहा, ''भारतीय संविधान कहता है कि कानून का शासन होना चाहिए, और इसका आधार यह है कि जब तक दोषी साबित न हो जाए, तब तक आप निर्दोष हैं। यह विधेयक इसमें बदलाव की उम्मीद करता है। यह एक कार्यकारी एजेंसी के अधिकारी को प्रधानमंत्री का बॉस बनाता है।'' बिल का विरोध करते हुए एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "मैं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 और संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक 2025 को पेश किए जाने का विरोध करता हूं। यह सरकार चुनने के अधिकार को कमजोर करता है। यह कार्यकारी एजेंसियों को तुच्छ आरोपों और संदेह के आधार पर न्यायाधीश और जल्लाद बनने की खुली छूट देता है। सरकार पुलिस राज्य बनाने पर तुली हुई है। यह निर्वाचित सरकार के लिए मौत की कील होगी। इस देश को पुलिस राज्य में बदलने के लिए भारत के संविधान में संशोधन किया जा रहा है।" आम आदमी पार्टी ने भी बिल का विरोध किया है। इंडिया गठबंधन का हिस्सा न होने पर भी आप ने कहा कि वह इसका कड़ा विरोध करती है। 'आप' नेता अनुराग ढांडा ने कहा, “केंद्र सरकार संसद में जो बिल पेश करेगी, उसका 'आप' कड़ा विरोध करती है। यह बिल तानाशाही लागू करने का तरीका है। केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं के खिलाफ एजेंसियों का दुरुपयोग करती रही है। कभी मंत्रियों को गिरफ्तार करती है, तो कभी दूसरी पार्टियों के मुख्यमंत्रियों को। सत्येंद्र जैन पर फर्जी केस लगाकर उन्हें डेढ़ साल से ज़्यादा जेल में रखा और कुछ दिन पहले कहा कि उनके पास उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। इस बिल के मुताबिक, निर्दोष होते हुए भी सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से हटाया जा सकता है। इस बिल का इस्तेमाल करके वे पूरी सरकार भी गिरा सकते हैं।” केंद्रीय गृह मंत्री ने लोकसभा में बुधवार को कुल तीन बिल पेश किए। ये तीनों बिल संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक हैं। सरकार ने तीनों बिलों में सख्त प्रावधान किए हैं। वेल में आकर विपक्ष की नारेबाजी सत्ता पक्ष की ओर से रवनीत बिट्टू, कमलेश पासवान, किरेन रिजिजू, सतीश गौतम ने गृह मंत्री के पास नारेबाजी कर रहे आक्रामक सांसदों को रोकने की कोशिश की. लोकसभा की वेल में नारेबाजी की शुरुआत टीएमसी सांसदों ने की और कल्याण बनर्जी ने विधेयक पेश होते ही नारेबाजी शुरू कर दी. बाद में, कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी. इसके बाद सभी कांग्रेस सांसद वेल में आ गए. केसी वेणुगोपाल के बाद सपा के धर्मेंद्र यादव ने भी अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी और समाजवादी पार्टी के सभी सदस्य संसद वेल में आ गए. इसके बाद जब गृह मंत्री अमित शाह विधेयक पेश कर रहे थे, तो सभी विपक्षी दल के सदस्य लोकसभा की वेल में आ गए और हंगामा करने लगे. स्थिति बिगड़ती देख लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. 'जेल जाने पर मैंने दिया था इस्तीफा' अमित शाह बिल पेश करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की आलोचना की और कहा कि मैं जब झूठे मामले में जेल गया था, तब नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा देकर गया था. उन्होंने कहा कि जब तक अदालत ने मुझे निर्दोष साबित नहीं किया, तब तक किसी भी संवैधानिक पद को ग्रहण नहीं किया. हम इतने बेशर्म नहीं हैं, कि हम पर आरोप लगें और पद पर बने रहें. उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता हमें नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा सकते. अमित शाह ने कहा कि मैं चाहता हूं कि ये नैतिकता के मूल्य बढ़ें.   अमित शाह ने बिल पेश करते हुए इसे 21 सदस्यों वाली जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया. इस पर ध्वनिमत से मतदान के दौरान विपक्ष ने वेल से ही विरोध दर्ज किया. लेकिन प्रस्ताव के ध्वनिमत से पारित होने के बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि कुछ विधेयक राजनीति में शुचिता और नैतिकता के लिए आते हैं, क्योंकि राजनीति में शुचिता और नैतिकता जरूरी है. अब ये बिल जेपीसी के पास चर्चा के लिए भेजे गए … Read more

सुरक्षा एजेंसियों ने उजागर किया जैश-ए-मोहम्मद का योजना, 313 नए ठिकाने तैयार करने की कोशिश

नई दिल्ली आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने पाकिस्तान में अपनी गतिविधियों को फैलाने के लिए गुप्त रूप से एक बड़े फंडरेजिंग अभियान की साजिश रची थी. खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन का मकसद पीकेआर 3.91 अरब रुपये जुटाकर पाकिस्तान भर में 313 नए मार्कज (ट्रेनिंग कैंप और सुरक्षित ठिकाने) स्थापित करना था. जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने अभियान का नेतृत्व किया और समर्थकों से बढ़-चढ़कर दान करने की अपील की. इसके लिए डिजिटल वॉलेट्स जैसे ईज़ीपैसा और सदापे का इस्तेमाल किया गया, ताकि लेन-देन को FATF (Financial Action Task Force) की निगरानी से बचाया जा सके. जांच में सामने आया कि ये डिजिटल वॉलेट्स मसूद अजहर के परिवार से जुड़े मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर्ड थे, जिनमें उसके भाई तल्हा अल सैफ और बेटे अब्दुल्ला अजहर के नंबर भी शामिल थे. इसके अलावा, हर शुक्रवार पाकिस्तान की मस्जिदों में गाजा के लिए चंदा बताकर नकद धन जुटाया गया, जबकि असल में ये रकम जैश की आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुई. इसी दौरान अल रहमत ट्रस्ट, जो जैश से जुड़ा हुआ संगठन है, बहावलपुर स्थित एक बैंक खाते के जरिए भी धन इकट्ठा कर रहा था. यह ट्रस्ट खुद मसूद अजहर और उसके नजदीकी सहयोगी चलाते हैं. फंडरेजिंग अभियान के आगे बढ़ते ही जैश नेताओं ने खुलासा किया कि नए बनाए जा रहे मार्कज मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने साबित होंगे, जिससे वे अपनी मौजूदगी छिपाकर रख सकें. इन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल नए आतंकियों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए भी किया जाना था. सूत्रों के मुताबिक, यह फंडरेजिंग अभियान पूरी तरह सफल रहा और जैश ने पाकिस्तान और विदेशों से भारी मात्रा में धन इकट्ठा कर लिया. इस रकम से संगठन ने मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर और मोर्टार जैसी आधुनिक हथियार खरीद लिए. अब अपने नए हथियारों और विस्तारित ढांचे के साथ जैश-ए-मोहम्मद एक नई आतंकी लहर छेड़ने की तैयारी में है. संगठन के नेताओं को भरोसा है कि उनकी परिष्कृत फंडिंग व्यवस्था और गुप्त कम्युनिकेशन चैनल्स की वजह से उनकी गतिविधियां लंबे समय तक नजरों से बची रहेंगी.

रेखा गुप्ता अटैक केस: गंभीर धाराओं में FIR, हत्या का प्रयास भी शामिल

 नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने हत्या की कोशिश  का मामला दर्ज किया है. आरोपी की पहचान राजेश के रूप में हुई है, जिससे दिल्ली पुलिस, खुफिया ब्यूरो (IB) और स्पेशल सेल की टीमें पूछताछ कर रही हैं. पुलिस आरोपी की 5 से 7 दिन की रिमांड मांगेगी. राजेश बुधवार सुबह ही ट्रेन से राजकोट से दिल्ली आया था और सिविल लाइंस के गुजराती भवन में रुका था.  दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता पर हमला: आरोपी पर पहले से दर्ज हैं पांच मामले . मुख्यमंत्री पर हमले के मामले में पुलिस स्टेशन सिविल लाइंस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1)/132/221 के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने सरकारी कर्मचारी पर हमला करने के आरोप में बीएनएस की धारा 132, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के आरोप में बीएनएस की धारा 221 और हत्या कोशिश के लिए धारा 109 के तहत मामला दर्ज किया है.  पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. मामले की आगे की जांच चल रही है. पुलिस सभी संभावित पहलुओं से जांच कर रही है. आईबी और स्पेशल सेल की टीम भी आरोपी राजेश से पूछताछ कर रही हैं. हमले से पहले दोस्त से किया बात… आरोपी राजेश ने हमले से पहले गुजरात में अपने दोस्त को फोन पर बताया था कि वह शालीमार बाग स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुच गया है. जांच में पता चला है कि यह पहली बार था जब आरोपी दिल्ली आया था. अब पुलिस आरोपी राजेश की 5 से 7 दिन की रिमांड मांगेगी, जिससे उससे मामले से जुड़ी और जानकारी हासिल की जा सके. सीएम पर हमला करने वालों को कितनी कड़ी मिलती है सजा दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर उनके सरकारी आवास सिविल लाइंस में जनसुनवाई के दौरान हमला किए जाने का मामला सामने आया है. बुधवार सुबह जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति ने पहले सीएम को कुछ कागज सौंपे और उसके बाद अचानक उन पर हमला करने की कोशिश की. मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने तुरंत आरोपी को काबू कर लिया और हिरासत में ले लिया. बताया जा रहा है कि सीएम रेखा गुप्ता को कंधे और सिर पर चोट आई है. इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. आरोपी की पहचान और पूछताछ दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अपना नाम राजेश भाई खीमजी बताया है और दावा किया है कि वह गुजरात के राजकोट का रहने वाला है. फिलहाल पुलिस उसकी सीएम को चोट पहुंचाने की मंशा की जांच कर रही है. पूछताछ में पता चला कि वह किसी रिश्तेदार की जेल से रिहाई के लिए आवेदन लेकर आया था. घटना के समय मौजूद लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता लोगों की शिकायतें सुन रही थी. तभी अचानक यह हमला हुआ एक चश्मदीद ने कहा हमने पीछे से शोर सुना. वहीं जब तक समझ पाए पुलिस ने हमलावर को पकड़ लिया था. हमले के बाद ही मुख्यमंत्री बिल्कुल सदमे में थी. कानून क्या कहता है-बीएनएस धारा115 कानूनन मुख्यमंत्री या किसी भी व्यक्ति पर इस तरह हमला करना भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 के तहत अपराध है. इसमें स्वेच्छा से चोट पहुंचाने की बात कही गई है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अन्य को चोट पहुंचाने का काम करता है तो इसे अपराध माना जाएगा. वहीं इसके लिए अपराधी पर एक साल तक की सजा या 10 हजार तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. हालांकि यह मामला सिटिंग सीएम पर हमले का है इसलिए पुलिस अन्य धाराओं के तहत भी गंभीर जांच कर सकती है. ऐसे मामले जो बीएनएस 115 में आते हैं     बीएनएस 115 में किसी को थप्पड़ या मुक्का मारने का मामला आता है.     इसके अलावा किसी को जानबूझकर धक्का देना भी इसी धारा के अंतर्गत आता है.     अगर किसी पर कोई व्यक्ति वस्तु फेंकता है तो भी उस व्‍यक्‍त‍ि पर बीएनएस 115 के अंदर मामला दर्ज किया जा सकता है     अगर किसी के शरीर को जोर से पकड़कर चोट पहुंचाने की कोशिश की गई तो उस पर भी बीएनएस 115 के तहत मामला दर्ज किया जाता है विपक्ष और नेताओं की प्रतिक्रियाएं हमले की घटना के बाद भाजपा ने इसे सुरक्षा में गंभीर चूक बताया है और जिम्मेदारी तय करने की मांग की. वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी इस घटना की निंदा की और कहा कि अगर राजधानी में मुख्यमंत्री ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा होता है.

ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग ऐप्स पर नियंत्रण: लोकसभा में नया कानून पारित, ,समझें क्यों जरूरी है ये नया कानून

नई दिल्ली सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को रेग्युलेट करने वाला महत्वपूर्ण बिल लोकसभा से पास हो गया है. इसका मकसद ऑनलाइन मनी गेम्स और सट्टेबाजी पर पूरी तरह से बैन लगाना और ई-स्पोर्ट्स व सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है. एक अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 45 करोड़ लोग इन ऑनलाइन मनी गेम्स के चक्कर में फंसकर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक गंवा देते हैं.   भारत ने मोदी सरकार के कार्यकाल में बीते एक दशक में यूपीआई, सेमीकंडक्टर से लेकर 5जी टेक्नोलॉजी में तेजी से डेवलप किया है. हमारे देश में जो डिजिटल क्रांति आई है उसे देख दुनिया भी हैरान है. डिजिटल दुनिया में भारत ने तेजी से कदम बढ़ाए हैं. लेकिन, इसी तेजी के बीच ऑनलाइन गेमिंग की अंधेरी दुनिया में खतरे भी कई गुना बढ़ गए हैं. इसलिए मोदी सरकार ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने जा रही है. बुधवार को मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में 'प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025' को पेश किया गया.  प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 को ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 भी कहा जा रहा है. सरकार का उद्देश्य इसके पीछे असली पैसे वाले खेलों पर लगाम लगाना है. साथ ही ई-स्पोर्ट्स और स्किल-बेस्ड सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है.  आने वाले समय में फैंटेसी लीग, कार्ड गेम्स, ऑनलाइन लॉटरी, पोकर, रमी और सट्टेबाजी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने जा रही है. इनसे जुड़ी फाइनेंशियल लेन-देन और एडवरटाइजमेंट भी अब अपराध के कैटेगरी में आएंगे. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए कैबिनेट बैठक में ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 को मंजूरी दे दी गई थी.      ऑनलाइन मनी गेमिंग को बैन करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में अहम विधेयक पेश किया है.     हर साल अनुमानित 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेम्स की लत में फंसकर आर्थिक नुकसान करते हैं.     इन गेम्स की वजह से भारत में लोगों को हर साल 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान होता है. सरकार क्यों लाई ये विधेयक? केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग से लोगों को हो रहे वित्तीय और सामाजिक नुकसान को रोकने के लिए यह बिल लाई है. इसका नाम प्रमोशन एंड रेग्युलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 है. सरकारी अनुमानों के मुताबिक, हर साल करीब 45 करोड़ लोग ऑनलाइन मनी गेम्स के जाल में फंसकर नुकसान उठाते हैं. इन गेम्स की लत सिर्फ पैसों का नुकसान ही नहीं बल्कि एक सामाजिक संकट बन चुकी है.  सरकारी सूत्रों ने बताया कि एक अनुमान के अनुसार, इन गेम्स की वजह से आम लोगों को हर साल करीब 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है. इसकी लत की वजह से सैकड़ों परिवार आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके हैं. कई तो आत्महत्या और हिंसा जैसा गंभीर कदम भी उठा लेते हैं.  ऑनलाइन गेमिंग बिल के 3 प्रमुख हिस्से ई-स्पोर्ट्स: इस बिल के जरिए ई-स्पोर्ट्स को पहली बार कानूनी मान्यता दी जा रही है. अब तक देश में ऑनलाइन स्पोर्ट्स गेम्स का कोई कानूनी आधार नहीं है.  ऑनलाइन सोशल गेम्स: सरकार ने ऑनलाइन सोशल गेम्स को कानूनी मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है. ये गेम्स आम लोगों के एजुकेशन के काम आते हैं ऑनलाइन मनी गेम्स: ऐसे ऑनलाइन गेम, जिनमें पैसों का लेन-देन होता है, उन पर बैन लगाने का प्रस्ताव है. इन गेम्स को प्रमोट करने वाले और ऐसी गेमिंग सर्विस देने वाली कंपनियों पर भी सख्त कार्रवाई के प्रावधान हैं. ऑनलाइन मनी गेम्स का प्रचार करने वालों और फंड ट्रांसफर करने वालों पर भी गाज गिरेगी.  नियम तोड़ने पर कितनी होगी सजा?     ऑनलाइन मनी गेमिंग सर्विस देने वालों को तीन साल तक की जेल या 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.     ऑनलाइन मनी गेम्स का विज्ञापन करने वालों को दो साल तक की जेल या 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकेगा.     अगर कोई बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसकी सजा बढ़कर पांच साल तक हो सकेगी, जुर्माना भी ज्यादा लगेगा.  ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) के चीफ एग्जिक्यूटिव रोलैंड लैंडर्स के मुताबिक, यह सेक्टर अब 2 खरब रुपये तक बढ़ चुका है. वित्त वर्ष 2025 में इस सेक्टर को 31 हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल हुआ था और 20 हजार करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों का भुगतान किया गया था.  लैंडर्स के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष तक भारत में 50 करोड़ से अधिक लोगों ने ऑनलाइन गेमिंग सर्विस का इस्तेमाल किया था. उनका कहना है कि इस बिल के कानून बनने से 400 से ज्यादा कंपनियां बंद हो सकती हैं और दो लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म हो जाएंगी.  कड़ाई क्यों जरूरी? सरकारी सूत्रों ने बताया है कि ये प्लेटफॉर्म केवल गेम्स नहीं हैं. बल्कि ये लोगों को मनोवैज्ञानिक जाल में फंसाते हैं और लोग इसकी लत के शिकार हो जाते हैं. उन्हें वित्तीय घाटा भी होता है. कई मामले तो ऐसे भी हैं जिसमें लोग आत्महत्या भी कर लेते हैं.  इसके साथ ही इन प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे देश से अवैध रूप से भारत में पैसे आते हैं (मनी लॉन्ड्रिंग), आतंकियों को फंडिंग और डिजिटल धोखाधड़ी की जाती है. बिल के बड़े प्रावधान क्या हैं? ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: वैध खेल के रूप में मान्यता, ट्रेनिंग, नीति समर्थन और इवेंट्स. सोशल और शैक्षिक गेम्स को मंजूरी: जो सीखने, जागरूकता और सकारात्मक उपयोग को बढ़ाएं. रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध: ऑफर, विज्ञापन और लेन-देन सब बैन. ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी: राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी, रजिस्ट्रेशन और कार्रवाई की ताकत. कड़े दंड: ऑपरेटरों को 3 साल तक जेल और 1 करोड़ तक जुर्माना. विज्ञापन करने वालों को 2 साल जेल और 50 लाख जुर्माना. बार-बार अपराध करने वालों पर 5 साल तक की सजा और 2 करोड़ तक का दंड. कॉर्पोरेट पर भी शिकंजा इस बिल के पास होने के बाद इसके ज़रिए कॉर्पोरेट पर भी शिकंजा कसा जाएगा. कंपनी के अधिकारी और मैनेजमेंट सीधे जिम्मेदार होंगे. हालांकि स्वतंत्र निदेशकों को बचाव मिलेगा.  भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के साथ इसके प्रावधान को जोड़े गए हैं. जिसके तहत जांच एजेंसियां बिना वारंट सर्च, सीज और गिरफ्तारी कर पाएंगी. ये बिल क्यों है जरूरी? रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: यह बिल भारत को वैश्विक गेमिंग … Read more

योगी सरकार ने दी सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारी

देश में कहीं भी उर्वरक की दिक्कत नहीं, कालाबाजारी पर योगी सरकार सख्त योगी सरकार ने दी सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारी पहली अप्रैल से 18 अगस्त 2025 तक हुई 42.64 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री  पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 4.37 लाख मीट्रिक टन अधिक यूरिया की हुई बिक्री मुख्यमंत्री ने दिया निर्देश- जनपदों में निरंतर मॉनीटरिंग करें अधिकारी, किसानों को न हो परेशानी सीएम योगी ने किसानों से की अपील- भंडारण न करें, जब चाहें, आवश्यकतानुरूप लें खाद   लखनऊ  योगी सरकार ने एक बार फिर साफ किया है कि प्रदेश में कहीं भी उर्वरकों की दिक्कत या कमी नहीं है। किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। सरकार ने खाद के अनावश्यक भंडारण न करने की अपील की है। कृषि विभाग ने सभी 18 मंडलों में खाद की उपलब्धता व बिक्री की जानकारी दी। खरीफ सत्र 2024 में इस अवधि (18 अगस्त) तक 36.76 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री हुई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 42.64 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री की जा चुकी है।  मुख्यमंत्री ने की किसानों से अपील  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों से अपील की कि खाद का भंडारण न करें। जितनी आवश्यकता है, उतना खाद लें, जब-जब आवश्यकता है, तब-तब खाद लें। हर जनपद में शिकायत प्रकोष्ठ है। किसी भी परेशानी की स्थिति में अवगत कराएं। मुख्यमंत्री ने उर्वरक की ओवररेटिंग, कालाबाजारी करने वालों को कड़ी चेतावनी भी दी है। उन्होंने जनपद में तैनात अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण करने, किसानों से संवाद स्थापित करने और समस्याओं का निस्तारण करने का निर्देश दिया है। कृषि विभाग ने बताया कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है। पिछले वर्ष से अधिक हुआ खाद वितरण प्रदेश में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अभी तक अधिक खाद वितरण किया जा चुका है। विगत वर्ष 27.25 लाख मीट्रिक टन यूरिया वितरण हुआ था, इस वर्ष अभी तक 31.62 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। डीएपी 2024 में वितरण 5.28 लाख मीट्रिक टन का रहा, इस वर्ष यह बिक्री 5.38 लाख मीट्रिक टन हुई। एनपीके उर्वरक (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व पोटेशियम मिश्रण) का वितरण विगत वर्ष 2.07 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष 2.39 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश) 0.25 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष इस वर्ष 0.46 लाख मीट्रिक टन वितरित हुआ। वहीं एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का वितरण 2024 में 1.91 लाख मीट्रिक टन रहा, इस वर्ष किसानों को 2.79 लाख मीट्रिक टन वितरण किया जा चुका है। खाद की उपलब्धता यूरियाः 18 अगस्त तक प्रदेश में 37.70 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता रही। इसमें से 31.62 लाख मीट्रिक टन की खरीद किसानों द्वारा की जा चुकी है।  डीएपी: 18 अगस्त तक 9.25 लाख मी. टन की उपलब्धता रही, जिसमें से 5.38 लाख मी. टन की खरीद किसानों ने कर ली है।   एनपीके: 18 अगस्त तक 5.40 लाख मी०टन की उपलब्धता रही। इसमें से 2.39 लाख मीट्रिक टन की खरीद किसानों ने कर ली।  गत वर्ष की तुलना में 4.37 लाख मीट्रिक टन अधिक यूरिया की बिक्री खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य पूर्ण हो गया है। मुख्य फसल धान में टॉप-ड्रेसिंग हेतु प्रतिदिन औसतन 49564 मी०टन यूरिया की खपत/बिक्री हो रही है। गतवर्ष की तुलना में इस वर्ष 16.04% (मात्रा 4.37 लाख मी०टन) अधिक यूरिया उर्वरक की बिक्री हुई है। बॉक्स  खाद उपलब्धता की सम्पूर्ण स्थिति (को-ऑपरेटिव स्टॉक और प्राइवेट स्टॉक) मंडल                  यूरिया           डीएपी         एनपीके                           सहारनपुर               18734         4577         3075 मेरठ                       39089       17195        8858 आगरा                    43824        28329       21502 अलीगढ़                 29597        18377       16464 बरेली                    41610         20790       28159 मुरादाबाद              46450         18159       27402 कानपुर                  52100         41168       30301 प्रयागराज               57212         21286       25580 झांसी                     28267        27164       16506   चित्रकूट                  25650          9110         3975 वाराणसी                43294         27689       14627 मीरजापुर                13626          7840         3804    आजमगढ़               34184         24481        9070 गोरखपुर                 34126         25756        15755 बस्ती                     12306        10439            4611 देवीपाटन               17955         18681          9017 लखनऊ                 41066         37964         36736 अयोध्या                28960          27997         25250 कुल-                  608049         387003     300693  नोटः यह आंकड़े खऱीफ सत्र 2025 में 18 अगस्त तक के हैं। यह मात्रा मीट्रिक टन में है।

दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 25.5 लाख का इनाम घोषित 13 शामिल

दंतेवाड़ा बस्तर में नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है. लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. 21 में से 13 नक्सलियों पर कुल 25 लाख 50 हजार का इनाम घोषित था. सभी आत्मसर्पित माओवादी अपने-अपने क्षेत्र में नक्सली बंद सप्ताह के दौरान रोड खोदना, पेड़ काटना, नक्सली बैनर, पोस्टर एवं पाम्प्लेट लगाने जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं.

यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना

अखिलेश के समय आत्महत्या को मजबूर होते थे किसान, 86 लाख किसानों का योगी सरकार ने किया कर्जमाफ : कृषि मंत्री  – यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना – बोले- सपा सरकार में न बोआई कर पाते थे किसान, न मिलता था न्यूनतम समर्थन मूल्य  – प्रदेश में खाद-यूरिया की कोई कमी नहीं, जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वालों के खिलाफ कसा जा रहा शिकंजा : शाही  – अनियमिता पाए जाने पर अबतक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस किये गये निरस्त : कृषि मंत्री  – हाई प्राइज़ और टैगिंग करने वाले 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 के लाइसेंस सस्पेंड और 4 के रद्द : कृषि मंत्री – खाद-यूरिया की कालाबाजारी करने वाले 93 लोगों के खिलाफ दर्ज किये गये हैं मुकदमे : सूर्य प्रताप शाही  – सीमावर्ती जनपदों में बढ़ाई गई है चौकसी, खाद-यूरिया के तस्करों और माफिया को बख्शा नहीं जाएगा : कृषि मंत्री  – रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य : शाही  – प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध : कृषि मंत्री – खाद वितरण में अनियमिता पाए जाने पर सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को किया गया है निलंबित : शाही  लखनऊ  प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने  प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को किसानों के बारे में बोलने का कोई हक नहीं है। उनके शासनकाल में किसान न तो समय से बोआई कर पाते थे और न ही उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की सुविधा मिलती थी। उस दौर में कर्ज में डूबे 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये योगी सरकार को माफ करने पड़े। यदि सपा सरकार इतनी ही किसान हितैषी थी तो किसानों को आत्महत्या क्यों करनी पड़ी। कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार कस रही शिकंजा कृषि मंत्री ने साफ कहा कि प्रदेश में खाद और यूरिया की कोई कमी नहीं है। दिक्कत केवल जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले तत्व पैदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 को निलंबन और 4 का लाइसेंस रद्द किया गया है। 93 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को निलंबित किया गया है। वहीं, महाराजगंज और सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पकड़े गए हैं जिन्होंने बिना जोत के ही दर्जनों बोरी यूरिया उठा ली। मंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसे माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों को हर हाल में मिलेगी खाद सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि राज्य सरकार हर किसान को समय से खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। फिलहाल प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध हैं। खरीफ 2024 में अब तक 32 लाख 7 हजार मीट्रिक टन खाद की बिक्री हुई है, जो पिछले साल की तुलना में साढ़े चार लाख मीट्रिक टन अधिक है। उन्होंने कहा कि 15 से ज्यादा जनपदों में 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की खपत हुई है, फिर भी कहीं कमी नहीं होने दी गई। रबी सीजन के लिए सरकार ने किये हैं बड़े इंतजाम कृषि मंत्री ने बताया कि रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले वर्ष 132.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई हुई थी। इस बार 4 लाख हेक्टेयर का विस्तार किया जाएगा। किसानों को 10 लाख क्विंटल अनुदानित बीज उपलब्ध कराया जाएगा। गेहूं, जौ, मक्का, राई और अलसी समेत दलहन-तिलहन के बीज किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 12.80 लाख मिनी किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। गन्ना किसानों को गन्ने के साथ ही दलहन-तिलहन की बोवाई के लिए प्रेरित किया जाएगा और उन्हें नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराई जाएगी।  फर्टिलाइजर की मांग और सब्सिडी की दी जानकारी शाही ने कहा कि रबी सीजन के लिए 41 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 17 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 7.08 लाख मीट्रिक टन एनपी, 1.78 लाख मीट्रिक टन एसएसपी और 2 लाख मीट्रिक टन पोटाश की मांग भारत सरकार से की जाएगी। उन्होंने बताया कि यूरिया पर केंद्र सरकार 1908 रुपये प्रति बोरी तक सब्सिडी दे रही है और किसानों को मात्र 266.50 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर यह सब्सिडी न हो तो यूरिया की कीमत 2200 रुपये तक पड़ती। डीएपी, एनपी, एसएसपी और पोटाश पर भी सरकार बड़ी मात्रा में सब्सिडी दे रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। खाद्यान उत्पादन और जीएसवीए में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कृषि मंत्री ने दावा किया कि समय से खाद, बेहतर बीज और सिंचाई सुविधाओं के कारण प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में करीब 200 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है। इस समय यह 737 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। गन्ना उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। किसानों की बढ़ी पैदावार का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जीएसवीए में जबरदस्त उछाल आया है, जो सपा शासन के दौरान दो लाख करोड़ रुपये था और अब बढ़कर सात लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। किसानों को किया आश्वस्त प्रेस वार्ता के अंत में सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों को किसी भी हाल में निराश नहीं होने दिया जाएगा। राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है। सीमावर्ती जिलों में खाद की तस्करी रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने दोहराया कि असली किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले माफियाओं को हर हाल में सख्त कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। पत्रकार वार्ता के दौरान राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और कृषि विभाग के अधिकारीगण मौजूद रहे।  प्रेस वार्ता के महत्वपूर्ण बिंदु * प्रदेश में खरीफ 2024 का रकबा बढ़कर 105.93 लाख हेक्टेयर पहुंचा। * 2013-14 में खरीफ का रकबा 90.46 लाख हेक्टेयर था। * अब तक खरीफ रकबे में 15.47 … Read more