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पाकिस्तान सीमा के करीब होगा भारत का बड़ा एयर एक्सरसाइज, 40 हजार फीट तक एयरस्पेस रिजर्व

जोधपुर भारत और पाकिस्तान के बीच बनी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सठे राजस्थान के पश्चिमी रेगिस्तान में भारतीय वायुसेना अपने सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास 'तरंगशक्ति-2026' की मेजबानी करने जा रही है। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित होने वाले इस मेगा एक्सरसाइज को लेकर वायुसेना ने 21 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक कुल 17 दिनों के लिए एक 'नोटम' (NOTAM – Notice to Airmen) जारी कर दिया है। इसके तहत जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर सेक्टर के विशाल हवाई क्षेत्र को पूरी तरह से सैन्य गतिविधियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। सीमा पार महज 20 किलोमीटर की दूरी तक भारतीय लड़ाकू विमानों की दहाड़ सुनाई देगी, जिससे पाकिस्तानी सेना और वहां के रणनीतिकारों में जबर्दस्त खलबली मच गई है। इस मेगा एयर एक्सरसाइज में दुनिया के 8 शक्तिशाली देश अपने उन्नत एयरक्राफ्ट और फाइटर जेट्स के साथ सीधे तौर पर हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा करीब 30 से अधिक देशों के रक्षा प्रतिनिधि और सैन्य अधिकारी ऑब्जर्वर के तौर पर इस ऐतिहासिक अभ्यास के साक्षी बनेंगे। राजस्थान के 4 प्रमुख सीमावर्ती जिलों के ऊपर 40 हजार फीट तक के आसमान को सैन्य उड़ानों के लिए पूरी तरह रिजर्व किया गया है। भारतीय वायुसेना का यह कदम न केवल अपनी सामरिक ताकत और त्वरित कार्रवाई की रणनीति को परखने का जरिया है, बल्कि यह पाकिस्तान को उसकी दहलीज पर भारत की अंतरराष्ट्रीय रक्षा साझेदारी का सीधा संदेश भी है। पाकिस्तान सीमा में हलचल, पाक सेना में इमरजेंसी बैठकें! भारतीय वायुसेना द्वारा जारी किए गए नोटम का दायरा इतना व्यापक है कि बीकानेर के नाल एयरबेस के पास इसका एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इतने कम फासले पर आधुनिक युद्धक विमानों के अभ्यास की खबर मिलते ही रावलपिंडी और इस्लामाबाद के सैन्य गलियारों में हड़कंप मच गया है। मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी थलसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने आपातकालीन बैठकें बुलाकर सीमा पर अपनी चौकसी और रडार सर्विलांस बढ़ा दिया है। भारत के इस युद्धाभ्यास में मित्र देशों के अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट भी शामिल हो रहे हैं, इसी वजह से पाकिस्तान ने सीमा पार अपनी जासूसी और निगरानी गतिविधियों को काफी तेज कर दिया है। 40 हजार फीट की ऊंचाई तक सील होगाएयरस्पेस, जानिए नोटम का पूरा शेड्यूल 'तरंगशक्ति-2026' अभ्यास के दौरान आम नागरिक उड़ानों की सुरक्षा और वायुसेना के लड़ाकू जहाजों के निर्बाध संचालन के लिए एयरस्पेस को 40 हजार फीट की ऊंचाई तक आरक्षित किया गया है। यह नोटम 17 दिनों के दौरान लगातार लागू नहीं रहेगा, बल्कि इसे अलग-अलग चरणों में सुबह 9:00 बजे से लेकर मध्यरात्रि 12:00 बजे तक प्रभावी बनाया गया है। पहला चरण: 21 सितंबर से 24 सितंबर 2026 तक दूसरा चरण: 28 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक तीसरा चरण: 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक अंतिम चरण: 7 अक्टूबर 2026 को इन निर्धारित तिथियों पर जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर और जैसलमेर सेक्टर में वायुसेना के विमान अपनी युद्धक क्षमताओं, हवा से हवा में ईंधन भरने, और सटीक बॉम्बिंग का अभ्यास करेंगे। जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है। यहां दुनिया की 8 प्रमुख वायुसेनाओं के स्क्वाड्रन अपने-अपने लड़ाकू जहाजों के साथ पहुंच रहे हैं। जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना के राफेल, सुखोई-30 MKI, तेजस और जगुआर जैसे अग्रिम पंक्ति के विमान विदेशी फाइटर जेट्स के साथ मिलकर मॉक-ड्रिल और कॉम्बैट ऑपरेशन्स को अंजाम देंगे। 30 देशों के सैन्य पर्यवेक्षकों की मौजूदगी इस बात का सबूत है कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख और रणनीतिक महत्व कितना बढ़ चुका है। इस अभ्यास के जरिए मित्र देशों की वायुसेनाओं के बीच आपसी तालमेल, साझा रणनीति और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान को नई मजबूती मिलेगी। सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है यह अभ्यास राजस्थान से सटी पश्चिमी सीमा हमेशा से ही रक्षा के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील रही है। पोकरण और थार के रेगिस्तान में वायुसेना का यह बहुराष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन भारत की ऑपरेशनल रेडिनेस (युद्धक तैयारी) का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'तरंगशक्ति-2026' से भारतीय वायुसेना न केवल अपने नए हथियारों और रणनीति का परीक्षण करेगी, बल्कि सीमा पार से होने वाली किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब देने के लिए अपनी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी और धार देगी। अगले 17 दिनों तक राजस्थान का आसमान वायुसेना के पराक्रम का गवाह बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।

चीन का सैन्य शक्ति प्रदर्शन! लड़ाकू विमानों और जहाजों से ताइवान को घेरा, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

ताइवान ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया कि देश के चारों ओर चीन के 10 लड़ाकू विमान  और 10 नौसैनिक जहाज सक्रिय रूप से संचालित होते देखे गए हैं। इनमें से चार विमान ताइवान की “मीडियन लाइन” पार कर उसके उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में घुस गए। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “आज सुबह 6 बजे (स्थानीय समयानुसार) तक 10 PLA विमानों और 10 PLAN जहाजों को ताइवान के आसपास देखा गया। ताइवान की सशस्त्र सेनाएं हालात की बारीकी से निगरानी कर रही हैं और आवश्यक कदम उठा रही हैं।”  इससे पहले शनिवार को ताइवान ने 18 चीनी विमानों, सात नौसैनिक जहाजों और एक सरकारी पोत की गतिविधियां दर्ज की थीं। वहीं शुक्रवार को 38 विमान और नौ जहाज ताइवान के आसपास देखे गए थे, जिनमें से 31 विमानों ने मीडियन लाइन पार की थी। यह “मीडियन लाइन” ताइवान जलडमरूमध्य में एक अनौपचारिक सीमा है, जिसे चीन ने हाल के वर्षों में बार-बार पार कर ताइवान पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है। इन लगातार हो रही सैन्य गतिविधियों ने ताइवान स्ट्रेट में तनाव और बढ़ा दिया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा-“बीजिंग जानता है कि अगर उसने ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की तो परिणाम क्या होंगे।”सीबीएस को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने खुलासा किया कि उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई मुलाकात में यह विषय नहीं उठा, लेकिन उन्होंने कहा,“अगर कुछ होता है तो दुनिया देखेगी… मैं अपनी रणनीति नहीं बताऊंगा, लेकिन चीन जानता है कि नतीजे क्या होंगे।”

62 हजार करोड़ का करार: IAF को मिलेंगे 97 नए तेजस MK-1A लड़ाकू विमान

बेंगलुरु भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) के लिए 97 और एलसीए तेजस मार्क 1ए लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई. 62,000 करोड़ रुपये की डील को एक उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम मंजूरी मिली, जिससे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को इन विमानों के उत्पादन का रास्ता साफ हो गया. यह कदम मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. यह कार्यक्रम न केवल भारतीय वायुसेना को आधुनिक बनाएगा, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्यमों को भी रक्षा क्षेत्र में व्यापार का बड़ा अवसर देगा.  तेजस: मिग-21 का आधुनिक विकल्प भारतीय वायुसेना लंबे समय से अपने पुराने मिग-21 विमानों पर निर्भर रही है, जो 1960 के दशक के डिजाइन हैं. ये विमान अब पुराने हो चुके हैं. आधुनिक युद्ध की जरूरतों को पूरा करने में कमजोर पड़ रहे हैं. सरकार ने अगले कुछ हफ्तों में मिग-21 के बेड़े को पूरी तरह से हटाने का फैसला किया है. इसकी जगह लेने के लिए स्वदेशी तेजस मार्क 1ए को चुना गया है, जो एक चौथी पीढ़ी का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है. तेजस मार्क 1ए, पहले के 40 तेजस विमानों की तुलना में अधिक उन्नत है. इसमें बेहतर एवियोनिक्स (इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम) और रडार हैं, जो इसे आधुनिक हवाई युद्ध के लिए और सक्षम बनाते हैं. इस विमान में 65% से अधिक हिस्सा स्वदेशी है.   62,000 करोड़ की डील: दूसरा बड़ा ऑर्डर यह तेजस मार्क 1ए का दूसरा बड़ा ऑर्डर है. इससे पहले, कुछ साल पहले सरकार ने 48,000 करोड़ रुपये की लागत से 83 तेजस मार्क 1ए विमानों का ऑर्डर दिया था. नए ऑर्डर के साथ, भारतीय वायुसेना के पास अब कुल 180 तेजस मार्क 1ए विमान होंगे. यह डील हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को मिली है, जो भारत का प्रमुख रक्षा विमान निर्माता है. इस डील को मंगलवार को उच्च स्तरीय बैठक में मंजूरी दी गई, जिसके बाद HAL अब इन विमानों का उत्पादन शुरू करेगा. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को रक्षा क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. इस डील से न केवल भारतीय वायुसेना को आधुनिक विमान मिलेंगे, बल्कि देश के छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को भी रक्षा क्षेत्र में व्यापार का बड़ा अवसर मिलेगा. तेजस मार्क 1ए में 65% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग होगा, जो भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को बढ़ाएगा. HAL को न केवल तेजस विमानों के लिए, बल्कि स्वदेशी हेलीकॉप्टरों और उनके इंजनों के लिए भी ऑर्डर मिले हैं. रक्षा खरीद परिषद ने 156 LCH प्रचंड हेलीकॉप्टरों और 84 सुखोई-30 एमकेआई विमानों के लिए 1.6 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी.   प्रधानमंत्री का तेजस में उड़ान अनुभव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तेजस के ट्रेनर संस्करण में उड़ान भरी थी, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा लड़ाकू विमान में पहली उड़ान थी. इस उड़ान ने तेजस की तकनीकी क्षमता और भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रगति को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया.   तेजस मार्क 1ए की खासियत तेजस मार्क 1ए एक आधुनिक लड़ाकू विमान है, जिसमें कई उन्नत विशेषताएं हैं…     एडवांस एवियोनिक्स और रडार: यह विमान पहले के तेजस विमानों की तुलना में अधिक उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से लैस है, जो इसे लंबी दूरी के हवाई युद्ध (BVR) और हवाई निगरानी के लिए बेहतर है.     65% स्वदेशी सामग्री: इस विमान में 65% से अधिक हिस्सा भारत में बना है, जो देश की तकनीकी प्रगति को दर्शाता है.     मैन्यूवरिंग और डिजाइन: इसका डेल्टा-विंग डिजाइन इसे हल्का और तेज बनाता है, साथ ही इसका रडार क्रॉस-सेक्शन कम है, जिससे इसे दुश्मन के रडार में पकड़ना मुश्किल होता है.     हथियारों की क्षमता: यह विमान आर-73 क्लोज-कॉम्बैट मिसाइल, डर्बी बीवीआर मिसाइल और सटीक बमों को ले जाने में सक्षम है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने बताया कि तेजस मार्क 1ए में अभी मिसाइल अप्रोच वार्निंग सिस्टम (MAWS) की कमी है, जो मिसाइल हमले की चेतावनी देता है. इस सिस्टम पर डीआरडीओ और अन्य कंपनियों के साथ काम चल रहा है. भविष्य में इसे शामिल किया जा सकता है. तेजस का भविष्य और भारतीय वायुसेना तेजस कार्यक्रम भारतीय वायुसेना के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. वर्तमान में, दो वायुसेना स्क्वाड्रन तेजस विमानों का संचालन कर रहे हैं. आने वाले वर्षों में यह वायुसेना का सबसे बड़ा लड़ाकू बेड़ा बन सकता है. 2016 में तेजस के पहले संस्करण को शामिल किया गया था. अब मार्क 1ए के साथ वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी. इसके अलावा, HAL को 200 से अधिक तेजस मार्क 2 और उतनी ही संख्या में पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के ऑर्डर मिलने की उम्मीद है. ये विमान और भी उन्नत होंगे और भारत को वैश्विक एयरोस्पेस शक्ति के रूप में स्थापित करेंगे.