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मुख्यमंत्री साय बोले- छत्तीसगढ़ की बहनों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध

रक्षाबंधन पर जशपुर एक्सप्रेस का शुभारंभ : बिहान की 12 दीदियों को ई-रिक्शा का उपहार रायपुर रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के गृहग्राम बगिया से जशपुर एक्सप्रेस का शुभारंभ किया और बिहान योजना से जुड़ी 12 दीदियों को राखी के उपहार स्वरूप ई-रिक्शा प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वयं स्व-सहायता समूह की महिला श्रीमती गिलसोनिका पाण्डे के ई-रिक्शा में बैठकर बगिया निवास परिसर की यात्रा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह ई-रिक्शा न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इसकी परिचालन लागत भी कम है। इससे महिलाएं स्थानीय परिवहन सेवाओं में अपनी भागीदारी निभाते हुए आत्मनिर्भर बनेंगी और अपने परिवार की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकेंगी। उन्होंने रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारी सरकार छत्तीसगढ़ की सभी बहनों की सुरक्षा और सहयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्व-सहायता समूह की बहनों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ही यह ई-रिक्शा वितरण किया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी सरकार मोदी की गारंटी को तेजी से लागू कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत 18 लाख आवास का कार्य तीव्र गति से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही आवास प्लस प्लस योजना के अंतर्गत 5 एकड़ असिंचित भूमि, 2.50 एकड़ सिंचित भूमि, टू-व्हीलर और 15 हजार रुपये मासिक आमदनी वाले पात्र परिवारों को भी लाभ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से 70 लाख बहनों को प्रति माह 1000 रुपये दिए जा रहे हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों की आय बढ़ाने के लिए तेंदूपत्ता का समर्थन मूल्य 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। गांवों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अटल डिजिटल सुविधा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिन्हें आगामी पंचायत दिवस पर सभी ग्राम पंचायतों में शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम नागरिकों की सुविधा के लिए रजिस्ट्री में 10 नई क्रांतियों के तहत पंजीयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल, डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाया गया है। दूरस्थ एवं पहुंचविहीन क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत बस सेवाएं प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मेडिकल कॉलेज, प्राकृतिक चिकित्सा एवं फिजियोथेरेपी केंद्र, शासकीय नर्सिंग कॉलेज और शासकीय फिजियोथेरेपी कॉलेज खोले जाएंगे। कार्यक्रम में बताया गया कि ई-रिक्शा का संचालन जिले के विभिन्न रूट्स पर महिला संचालकों द्वारा किया जाएगा। फरसाबहार में प्रतिमा भगत फरसाबहार- कन्दईबहार- अमडीहा- तपकरा मार्ग पर, मदनावती लवाकेरा- अमडीहा- पुराईनबंध- समडमा- तपकरा मार्ग पर, राजकुमारी पैंकरा तपकरा- कन्दईबहार- तुबा- फरसाबहार मार्ग पर और उर्मिला भगत खुटगांव- सिंगीबहार- साजबहार- तपकरा मार्ग पर परिचालन करेंगी। इसी तरह, दुलदुला में बिंदेश्वरी देवी कोसा- दुलदुला- विपतपुर- छेरडांड मार्ग पर, पार्वती साय कोसा- दुलदुला- पतराटोली- लोरो- बम्हनी मार्ग पर, संगीता देवी छेरडांड- लोरो- बम्हनी- कस्तुरा मार्ग पर और बिमला देवी छेरडांड- दुलदुला- लोरो- पतराटोली मार्ग पर परिचालन करेंगी। कांसाबेल में गिलसोनिका पाण्डे टांगरगांव- हथगड़ा- कांसाबेल मार्ग पर, तियासो पैंकरा बांसबहार- दोकड़ा- पुसरा- खुंटीटोली- कांसाबेल मार्ग पर, नीता रवानी कटंगखार- दोकड़ा- बन्दरचुंआ- कांसाबेल मार्ग पर और अंगावती बाई देवरी- दोकड़ा- छाताबर- कांसाबेल मार्ग पर ई-रिक्शा का परिचालन करेंगी। इस अवसर पर कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, डिप्टी कलेक्टर समीर बड़ा, उपेन्द्र यादव, गणेश जैन एवं रवि यादव उपस्थित थे।  

अचानक भड़की आग ने मशरूम प्लांट को किया राख, वजह बना शॉर्ट सर्किट

मैनपुरी. बेवर क्षेत्र के गांव करपिया में संचालित सात मंजिला मशरूम प्लांट में शनिवार की देर रात शार्ट सर्किट के चलते आग लग गई। रविवार सुबह आग की लपटें देख ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। प्लांट संचालक की सूचना पर एएसपी नगर और सीओ सिटी ने दमकल टीमों ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। विकराल आग को बुझाने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए आसपास के जिलों से भी दमकल की गाड़ियों को बुलाकर आग बुझाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्लांट स्वामी ने आग लगने के कारण करोड़ों रुपये के नुकसान का अंदेशा जताया है। काेल्ड स्टोर में चार साल से चल रहा था मशरूम प्लांट बेवर क्षेत्र के गांव करपिया स्थित कपिलमुनि कोल्ड स्टोर में करीब चार साल से कपिल मुनि एग्रो फूड्स के नाम से मशरूम प्लांट का संचालन हो रहा है। इस सात मंजिला प्लांट में मशरूम उत्पादन के लिए करीब सात सौ ब्लाक बनाए गए हैं। इसका संचालन मनोज कुमार सिंह बैस करते हैं। शनिवार देर रात साढ़े 12 बजे के करीब शार्ट सर्किट से प्लांट में आग लग गई। इसकी जानकारी रविवार की सुबह लगभग पांच बजे स्थानीय ग्रामीणों ने प्लांट से धुआं निकलते देखकर दी। सूचना के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं  सूचना पाकर एएसपी नगर अरुण कुमार सिंह, एसडीएम भोगांव संध्या शर्मा, सीओ सिटी संतोष कुमार सिंह पुलिस और दमकल विभाग के साथ मौके पर पहुंचे। जहां टीम ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग इतनी विकराल थी कि काबू नहीं पाया जा सका। इसके बाद अधिकारियों ने फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर और इटावा जिले से दमकल वाहनों को बुलाया। टीम में अभी भी आग बुझाने में जुटी हुई हैं। आग में जल गए मशरूम के बैग वहीं प्लांट मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आग के कारण उनके मशरूम के बैग सहित गोदाम में रखी मशरूम आदि सब कुछ जल गया है। जिससे उन्हें करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। रक्षाबंधन होने के कारण प्लांट में काम करने वाले मजदूर अवकाश पर थे। इसलिए आग लगने के बारे में समय से जानकारी नहीं मिल सकी थी।   

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर संभाग में हो रहा है डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

रायपुर. बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तथा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का प्रभावी क्रियान्वयन क्षेत्र के लिए एक बड़ा परिवर्तन साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्त विस्तार की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सतत मार्गदर्शन में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं आज तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।  बस्तर के छ :जिला चिकित्सालयों,  दो सिविल अस्पतालों और 41 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल प्रणाली का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे ओपीडी पंजीकरण, परामर्श, जांच, दवा वितरण तथा मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां अब एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध हो रही हैं। इसके तहत मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल तकनीक के इस समावेशन ने अस्पतालों में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और मरीजों की संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत अस्पतालों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन (HFR) और चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन (HPR) सुनिश्चित किया गया है। अस्पताल परिसरों में आभा कियोस्क स्थापित कर मरीजों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने की सुविधा दी जा रही है। स्कैन एंड शेयर एवं आभा आईडी के माध्यम से ऑनलाइन ओपीडी पंजीयन की सुविधा से मरीजों को लम्बी कतारों से राहत मिली है और उन्हें त्वरित सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल नवाचारों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से सामने आया है। जिला चिकित्सालय बस्तर में मई, जून और जुलाई 2025 के दौरान कुल 60,045 ओपीडी पंजीयन दर्ज किए गए, जिनमें से 32,379 पंजीयन आभा लिंक के माध्यम से हुए — जो कि कुल पंजीयनों का 53% है। इसी अवधि में जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा में 33,895 ओपीडी पंजीयन दर्ज हुए, जिनमें से 13,729 पंजीयन आभा से लिंक किए गए — यानी 40% का डिजिटल एकीकरण। यह पूरी प्रक्रिया न केवल समय की बचत सुनिश्चित कर रही है, बल्कि मरीजों के लिए डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की सुविधा भी प्रदान कर रही है, जिसे वे देश के किसी भी हिस्से में कभी भी देख सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ उपचार की निरंतरता और गुणवत्ता में भी वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी आधुनिक तकनीकों के सफल क्रियान्वयन ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति और दिशा दी है। डिजिटल पंजीकरण, हेल्थ रिकॉर्ड और पारदर्शी सेवा प्रणाली से मरीजों को समयबद्ध, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। यह पहल न केवल बस्तर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है, जिसे हम शीघ्र ही राज्य के सभी जिलों में लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" के संकल्प को साकार करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का यह तकनीकी उन्नयन न केवल स्थानीय जनता के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस प्रणाली को सभी जिलों में सुदृढ़ रूप से लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में यह पहल केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। बस्तर में मिले सकारात्मक परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जब तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ आते हैं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाएगी, बल्कि ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण में भी छत्तीसगढ़ का महत्त्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करेगी।

नई AI तकनीक से PM आवास योजना में धोखाधड़ी पर लगाम, नकली आवेदकों की होगी पहचान

मुरादाबाद मुरादाबाद में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों का चयन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए होगा, जहां जिला प्रशासन ने बताया है कि 44533 नए आवेदनों की जांच एआई के माध्यम से होगी। एआई सैटेलाइट इमेजिंग और लोकेशन ट्रैकिंग से यह परखेगी कि पोर्टल पर डाले गए घरों की तस्वीरें असली हैं या नहीं। सभी आवेदनों की सत्यता जांचने के बाद आखिर में एआई ही यह तय करेगा कि किन लोगों को आवास मिलना चाहिए और किन लोगों को नहीं। इस तरह की जांच से योजना में गड़बड़ी की गुंजाइश ना के बराबर रहेगी, साथ ही झूठा दावा करने वालों की छुट्टी हो जाएगी। एआई का फायदा यह होगा कि अगर किसी ने पक्के मकान में रहते हुए कच्चे मकान की फोटो दिखाकर योजना का लाभ लेने की कोशिश की है, तो यहां एआई तुरंत पकड़ लेगा और उसका आवेदन तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। पूरी तरह निष्पक्ष होगी जांच इसको लेकर परियोजना निदेशक, डीआरडीए, निर्मल कुमार द्विवेदी ने बताया कि जांच में कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनके पास पहले से पक्का मकान है लेकिन योजना का लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक ऐसे लोगों को लिस्ट से बाहर कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल व निष्पक्ष होगी और अंतिम सूची https://awaasplus.nic.in पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाएगी। तीन चरणों में होगी जांच एआई की यह जांच तीन चरणों में होगी, जहां पहले चरण में ग्राम स्तर पर बनाई गई टीमें जांच करेंगी। इसमें सहायक विकास अधिकारी, अवर अभियंता और बोरिंग टेक्नीशियन शामिल हैं। इनका काम गांव-गांव जाकर सत्यापन करना है और 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट देनी है। दूसरे चरण में ब्लॉक रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम दस्तावेजों और जमीनी तथ्यों का पुनः मूल्यांकन करेगी। तीसरे और आखिरी स्टेज में एआई तकनीक के जरिए फोटो व लोकेशन मिलान के आधार पर गलत सूचनाएं देने वालों को छांटा जाएगा और असली लाभार्थियों को लिस्ट में जोड़ा जाएगा।

राजधानी के निकट रेल कोच इकाई से बढ़ेगा अधोसंरचना का विकास: CM यादव

रेल कोच इकाई से राजधानी के निकट होगी अधोसंरचना सशक्त : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दावा: रेल कोच इकाई से राजधानी के आसपास होगी अधोसंरचना मजबूत राजधानी के निकट रेल कोच इकाई से बढ़ेगा अधोसंरचना का विकास: CM यादव केन्दीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे भूमिपूजन भोपाल मेट्रोपोलिटन सिटी के विकास को भी मिलेगी गति स्वदेशी के मंच पर हो रहा अमल 1800 करोड़ रूपए की लागत से बनेगी रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग इकाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रदेश को रेल कोच इकाई की बड़ी सौगात प्राप्त हो रही है। परियोजना का भूमि-पूजन केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 10 अगस्त को औबेदुल्लागंज के दशहरा मैदान में करेंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, रक्षा उत्पाद सचिव संजीव कुमार, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार, भारत अर्थ मूवर्स परियोजना के अध्यक्ष शांतनु राय शामिल हो रहे हैं। इस अवसर पर बीईएलएल (भारत अर्थ मूवर्स लि) परियोजना पर केन्द्रित लघु फिल्म, प्रस्तावित प्लांट का 3डी वॉक थ्रू और नए संयंत्रों के मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया है कि भारत अर्थ मूवर्स परियोजना द्वारा भोपाल जिले की सीमा के पास रायसेन के ग्राम उमरिया में 60 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर 1800 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाली ब्रह्मा परियोजना (बीईएमएल रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग) से राजधानी भोपाल सहित रायसेन, सीहोर और विदिशा आदि जिलों को लाभ होगा। इन जिलों के तकनीकी संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। परियोजना में 5 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलना प्राप्त होगा। मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहे भोपाल क्षेत्र को इस परियोजना से बहुत लाभ होगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रहे मेक इन इंडिया मिशन के भाव का प्रकटीकरण है। यहां बनने वाले वंदे भारत-अमृत भारत और मेट्रो ट्रेनों के कोच से सम्पूर्ण भारतीय रेल व्यवस्था के नए युग का सूत्रपात होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहा कि न सिर्फ राजधानी क्षेत्र बल्कि प्रदेश के विकास को गति देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना से निकट स्थित औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप भी लाभान्वित होगा। विकास की नई इबारत लिखेंगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेल कोच फैक्ट्री को प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सशक्त नेतृत्व में मध्यप्रदेश सहित भारत के अन्य राज्यों के निवदेशकों को आमंत्रित किया जा रहा है। इस क्रम में कुछ माह पूर्व बैंगलोर में बीईएमएल संस्थान के भ्रमण के दौरान रायसेन जिले में रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना के संबंध में निर्णय लिया गया। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य के अनुरूप कार्य करेगा संयंत्र ‘ब्राह्मा’ संयंत्र पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करेगा। संयंत्र में उपयोग होने वाली अधिकांश तकनीक और सामग्री देश में विकसित व निर्मित की जाएगी, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी। यह परियोजना प्रदेश को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस संयंत्र के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यहां शून्य तरल अपशिष्ट प्रणाली, सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन और हरित लैंडस्केपिंग को अपनाया जाएगा। निर्माण में पुनर्नवीनीकृत और टिकाऊ सामग्री का प्रयोग करते हुए इसे हरित फैक्ट्री मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। परियोजना का प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 125 से 200 कोच प्रतिवर्ष होगी, जिसे पांच वर्षों में बढ़ाकर 1,100 कोच प्रतिवर्ष किया जाएगा। इस इकाई के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में उच्च स्तरीय औद्योगिक रोजगार उपलब्ध होंगे। साथ ही, यहां विकसित होने वाली तकनीकी क्षमताएं प्रदेश को हाई-स्पीड रेल और मेट्रो निर्माण के वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।  

विदेशी कृषि आयात और भारतीय किसान: खतरे और समाधान के आंकड़े

नई दिल्ली  भारत एक ऐसा देश है जहां खेती-बाड़ी हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है. करीब 44 प्रतिशत लोग खेती से अपनी जीविका चलाते हैं. हमारे किसान दिन-रात मेहनत करके देश का पेट भरते हैं, लेकिन उनकी जिंदगी आसान नहीं है. एक बड़ी समस्या है विदेशी कृषि और डेयरी उत्पादों का आयात, खासकर अमेरिका जैसे देशों से. वहां की सरकार अपने किसानों को इतनी बड़ी सब्सिडी देती है कि उनके उत्पाद बहुत सस्ते हो जाते हैं. अगर ये सस्ते उत्पाद हमारे बाजार में बिना किसी रोक-टोक के आ गए, तो हमारे किसानों का बहुत नुकसान होगा. अमेरिका में एक किसान को सब्सिडी अतुल ठाकुर के अनुसार, 2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अमेरिका से आने वाले खाद्य उत्पादों पर 40.2 प्रतिशत और पूरी दुनिया से आयात होने वाले खाद्य उत्पादों पर औसतन 49 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया था. यह शुल्क इसलिए जरूरी है ताकि विदेशी उत्पादों की कीमतें हमारे बाजार में ज्यादा रहें और हमारे किसानों के उत्पादों को बिकने का मौका मिले. अमेरिका में एक किसान को औसतन 61,000 डॉलर की सब्सिडी मिलती है, जबकि हमारे किसान को सिर्फ 282 डॉलर. इस वजह से अमेरिका के मक्का, सोयाबीन, गेहूं और डेयरी उत्पाद बहुत सस्ते दामों पर बिकते हैं. हमारे किसानों के लिए इनसे मुकाबला करना मुश्किल है, क्योंकि उनकी लागत ज्यादा आती है. फसलों की पैदावार कम भारत में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास औसतन सिर्फ 1.08 हेक्टेयर जमीन होती है. दूसरी तरफ, अमेरिका में एक किसान के पास औसतन 187 हेक्टेयर जमीन होती है. हमारे यहां खेती में मेहनत ज्यादा लगती है, क्योंकि ज्यादातर काम हाथ से या छोटी मशीनों से होता है. साथ ही, हमारी फसलों की पैदावार भी कम होती है, जिससे उत्पादन की लागत बढ़ जाती है. किसानों की कमाई कम होने का खतरा  अगर सस्ते विदेशी उत्पाद बाजार में आ गए, तो स्थानीय उत्पादों की कीमतें गिरेंगी. इससे किसानों की कमाई कम होगी और उनकी जिंदगी और मुश्किल हो जाएगी. इतना ही नहीं, इससे देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि हमारा देश अपनी जरूरतों के लिए खुद की फसलों पर निर्भर है. एक और बड़ी बात है हमारी संस्कृति और धर्म से भी जुड़ी हुई है. अमेरिका में कुछ उत्पादों में अक्सर मांस के मसाले का इस्तेमाल होता है, जो भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को आहत कर सकता है. कई भारतीय लोग इस बात को लेकर बहुत सजग हैं कि उनके खाने में ऐसी चीजें न हों. अगर अमेरिकी डेयरी उत्पाद बिना सख्त नियमों के यहां आए, तो लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं. इसके अलावा, अमेरिका से आने वाले मक्का और सोयाबीन ज्यादातर जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) होते हैं. भारत में जीएम फसलों की खेती की इजाजत नहीं है, क्योंकि इन्हें इंसान के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक माना जाता है. अगर ये आयातित फसलें हमारी फसलों के साथ मिल गईं, तो हमारी जैव विविधता को नुकसान हो सकता है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर कई बार बात हुई, लेकिन यह कृषि और डेयरी उत्पादों पर आकर अटक जाती है. अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजार को उसके दूध पाउडर, चीज़, सेब, अखरोट, मक्का और सोयाबीन जैसे उत्पादों के लिए खोले. वह आयात शुल्क कम करने और जीएम फसलों पर नियम ढीले करने की मांग करता है. लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं है, क्योंकि इससे करोड़ों छोटे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी. भारत का डेयरी उद्योग ज्यादातर असंगठित है, और अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं करोड़ों किसानों की कमाई का सहारा हैं. अमेरिकी डेयरी उत्पादों के सामने ये टिक नहीं पाएंगे. अन्य देशों का अनुभव दूसरे देशों के अनुभव भी यही बताते हैं. मैक्सिको ने 1994 में अमेरिका के साथ नाफ्टा समझौता किया, जिससे सस्ते अमेरिकी मक्का और सोयाबीन वहां आए. लाखों मैक्सिकन किसानों को खेती छोड़नी पड़ी और बेरोजगारी बढ़ी. चिली और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी यही हुआ. वहां अमेरिकी उत्पादों की बाढ़ से स्थानीय किसान कमजोर पड़ गए. भारत नहीं चाहता कि ऐसा यहाँ भी हो. भारत का रुख साफ है कि वह अपने किसानों और डेयरी उद्योग को बचाना चाहता है. अमूल और स्वदेशी जागरण मंच जैसे संगठन विदेशी डेयरी उत्पादों के लिए बाजार खोलने का विरोध करते हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि कुछ अमेरिकी उत्पादों को सीमित मात्रा में अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते उनकी साफ लेबलिंग हो कि वे किस चारे से बने हैं. भारत भी अपने जैविक खाद्य और मसालों को अमेरिका में निर्यात करने की छूट चाहता है. लेकिन डेयरी और जीएम उत्पादों पर भारत का रुख सख्त है. कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. सस्ते आयात से किसानों की आय घटने का खतरा है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कमजोर कर सकता है. 2020-21 के किसान आंदोलन ने दिखाया कि किसानों के हितों को नजरअंदाज करना सरकार के लिए जोखिम भरा हो सकता है. इसलिए, सरकार अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में अपने किसानों को प्राथमिकता दे रही है. आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी है. इससे न सिर्फ किसानों की जिंदगी बेहतर होगी, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान भी बनी रहेगी.  

टैरिफ बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था को झटका, 23 अरब डॉलर तक घट सकती है GDP

नई दिल्ली अमेरिका भारत पर टैरिफ 25 फीसदी लगा चुका है और एक्‍स्‍ट्रा 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो 27 अगस्‍त से प्रभावी है. अब इस टैरिफ को लेकर इकोनॉमिस्‍ट चिंता जाहिर कर रहे हैं. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इससे भारत की इकोनॉमी पर गहरा असर पड़ेगा. मार्केट एक्‍सपर्ट अजय बग्‍गा ने ट्रंप टैरिफ को लेकर भारत की अर्थव्‍यवस्‍था पर गंभीर परिणाम पड़ने की चेतावनी दी है.  उनका कहना है कि 50 फीसदी टैरिफ से भारत की GDP में करीब 23 अरब डॉलर का असर पड़ सकता है. सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर लिखते हुए बग्‍गा ने कहा कि अमेरिका के टैरिफ से भारतीय एक्‍सपोर्टर पर लागत का बोझ तेजी से बढ़ेगा. बग्‍गा ने कहा कि ऑटो इक्‍यूप्‍मेंट्स, कपड़ा, ज्‍वेलरी, कालीन, केमिकल और मेटल जैसे सबसे ज्‍यादा प्रभावित सेक्‍टर्स के एक्‍सपोर्टर्स को व्‍यस्‍त सीजन में नुकसान का सामना करना पड़ेगा.  टैरिफ से इतनी घट सकती है इकोनॉमी ग्रोथ उन्‍होंने कहा कि हैंडमेड टेक्‍सटाइल प्रोडक्‍ट्स, जो अमेरिका जाने वाले एक्‍सपोर्ट का 35 फीसदी हिस्‍सा है, पर प्रभावी टैरिफ 27 अगस्‍त से बढ़कर 63.9 फीसदी हो जाएगा. कालीनों के लिए ये टैरिफ बढ़कार 58.9 फीसदी हो जाएगा. बग्‍गा ने कहा कि इससे भारत के GDP पर 0.3 फीसदी से 0.6 फीसदी का असर पड़ेगा, जिससे 23 अरब डॉलर तक का नुकसान होगा. इसका असर नौकरियों पर भी पड़ सकता है.  गोल्‍डमैन सैक्‍स ने भी जताई चिंता!  गोल्‍डमैन सैक्‍स ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयातों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाने से भारत की अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है. रूस से भारत द्वारा कच्‍चा तेल खरीदने से जुड़े इस फैसले से वास्तविक जीडीपी ग्रोथ में 0.3 प्रतिशत की वार्षिक कमी आ सकती है. नए टैरिफ से अमेरिका में भारतीय एक्‍सपोर्ट एवरेज टैरिफ रेट करीब 32 फीसदी तक होने की उम्‍मीद है.  भारत का US से एक्पोर्ट-इम्‍पोर्ट भारत ने वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका को 86.5 अरब डॉलर वैल्‍यू की वस्तुओं का एक्‍सपोर्ट किया है, जबकि 45.7 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, दवाइयां और कपड़े प्रमुख निर्यात थे. भारत में कच्चे तेल के आयात में अमेरिका का हिस्सा 4% था, जो अप्रैल और मई 2025 में बढ़कर 8% हो गया, फिर भी रूस के योगदान की तुलना में यह कम ही रहा है.  भारत के पास क्‍या है विकल्‍प?  अजय बग्‍गा ने भारत सरकार को कुछ सुझाव दिया है, जो भारत को अमेरिका के टैरिफ वॉर से बचा सकती है. उन्‍होंने कहा कि कंज्‍युमर वस्‍तुओं पर GST में भारी कटौती, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के लिए सब्सिडी, अल्पकालिक और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (STCG और LTCG) का अस्‍थायी निलंबन, व्‍यापार के लिए सुगमता बढ़ाना और इंफ्रा के लिए स्‍मार्ट फंडिंग जैसे उपाय करके टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सकता है.  बग्गा ने यह भी कहा कि भारत का 150 मिलियन कंज्‍यूमर वर्ग विश्व स्तर पर सबसे ज्‍यादा टैक्‍स पे करने वाला वर्ग है और खर्च को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें तत्काल टैक्‍स राहत की आवश्यकता है.  किन सेक्‍टर पर टैरिफ पर ज्‍यादा होगा असर?    सेक्‍टर्स                        पिछला टैरिफ             नया टैरिफ                  भारत पर असर बुना हुआ कपड़ा (वस्त्र)        13.9%                   63.9%        वियतनाम की तुलना में ज्‍यादा नुकसान परिधान                              10.3%                  60.3%        ग्‍लोबल मार्केट में पहुंच खोने की आशंका  निर्मित वस्त्र                       9%                        59%     कालीन, घरेलू वस्त्र उद्योग प्रभावित होंगे  कालीन                            2.9%                     52.9%     1.2 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित रत्न और आभूषण               2.1%                     52.1%        10 अरब डॉलर का सेक्टर, एमएसएमई सबसे ज्यादा प्रभावित झींगा/समुद्री भोजन           33.26%                औसत    58%      एक्‍सपोर्ट कम होगा दवाइयां                          0%                       50% तक     वर्तमान में छूट प्राप्त, लेकिन असुरक्षित टेक्सटाइल: टैरिफ 60% के करीब पहुंचने से वैल्‍यू कंप्‍टीशन के हिसाब से कम हो रही है. निटवियर, बुने हुए परिधान और घरेलू वस्त्रों में MSME का अस्तित्व खतरे में है.   जेम्‍स एंड ज्‍वेलरी: 2% से 52% तक टैरिफ बढ़ने से अमेरिका को एक्‍सपोर्ट आर्थिक रूप से होना संभव नहीं दिख रहा है.  झींगा और सी फूड: पहले से ही उच्च टैरिफ से जूझ रहे भारतीय निर्यातकों को अब 58% का बोझ उठाना पड़ रहा है.  फार्मास्यूटिकल्स: वर्तमान में छूट प्राप्त है, लेकिन भविष्य में टैरिफ के दौर में शामिल होने से अमेरिका को भारत के 8-11 बिलियन डॉलर के फार्मा निर्यात में रुकावट पैदा हो सकती है. 

शिक्षा में संकट: मध्य प्रदेश में 6.70 लाख बच्चों ने बीच में छोड़ी पढ़ाई, हर साल बढ़ रही इनकी संख्या

 भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयार हो रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती ही जा रही है। सरकारी व निजी स्कूलों के इस साल 6.70 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 5.70 लाख था। वहीं सरकारी स्कूलों में इस साल करीब 4.67 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है। पिछले साल 3.99 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी थी। इसमें निजी स्कूलों के करीब दो लाख विद्यार्थी शामिल हैं। यह आंकड़ा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडाईस) रिपोर्ट में सामने आई है। इसके अनुसार, वर्ष 2024-25 में प्रदेश के सरकारी व निजी स्कूलों में पहली से 12वीं तक में करीब 1.50 करोड़ विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ था। वहीं 2025-26 में करीब एक करोड़ 41 हजार बच्चों का 13 जुलाई तक प्रोग्रेसिंग पेंडिंग है। वहीं 6.70 लाख बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विद्यार्थियों के प्रोग्रेशन को पूर्ण करें और ड्रापबाक्स के बच्चों को खोजकर स्कूल में नामांकन कराएं तथा नामांकित विद्यार्थियों का मैपिंग कराएं। इंदौर की स्थिति ज्यादा खराब प्रदेश के कुछ जिलों में अधिक संख्या में बच्चों ने स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। इसमें इंदौर में सर्वाधिक 38 हजार, शिवपुरी में 25 हजार, धार व बड़वानी में 21 हजार, छिंदवाड़ा में 20 हजार, छतरपुर में 19 हजार, खरगोन में 18 हजार, बालाघाट में 17 हजार और खंडवा में 16 हजार बच्चों ने स्कूल में प्रवेश नहीं लिया। यहां के सरकारी स्कूलों में सबसे अधिक बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले सत्र में 79.75 लाख बच्चों का नामांकन दर्ज हुआ था। इस सत्र में अब तक 53.81 लाख का प्रोग्रेशन पेडिंग है। वहीं 4.67 लाख बच्चों ने किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। इसमें सबसे अधिक बड़वानी में 17 हजार, छिंदवाड़ा व छतरपुर में 16 हजार, बालाघाट में 13 हजार, भिंड में 10 हजार, शहरी क्षेत्र ग्वालियर व भोपाल में चार-चार हजार, जबलपुर में छह हजार और इंदौर में 11 हजार विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी है। विभाग ने ये कारण गिनाए     बच्चों का अपने माता-पिता के साथ दूसरी जगह जाना।     समग्र आईडी से मैपिंग नहीं होने के कारण ऐसे हालात बने।     जगह बदलने के कारण बच्चे का ठीक से मैपिंग नहीं होना।     अब ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग से सही संख्या सामने आ रही है। ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग से सामने आ रही संख्या     ऐसा भी हो सकता है कि कई जगहों पर सरकारी व निजी स्कूलों में एक ही बच्चों के नाम दर्ज होते हैं। अब ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग के कारण वास्तविक संख्या सामने आ रही है। – डॉ. दामोदर जैन, शिक्षाविद्  

भोपाल में साइबर ठगी के 70 केस, करोड़ों की रिश्वत देकर बचे आरोपी

भोपाल  साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ने के बावजूद भोपाल में अब भी हर सप्ताह कम से कम एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मामला सामने आ रहा है। बीते डेढ़ साल में क्राइम ब्रांच की साइबर सेल में ऐसे 70 मामले दर्ज हुए हैं, यानी औसतन हर सात से आठ दिन में एक पीड़ित पुलिस तक पहुंच रहा है। इस दौरान ठगों ने पीड़ितों से करीब ढाई करोड़ रुपये हड़पे हैं। साल 2024 में डिजिटल अरेस्ट के 53 मामलों में लगभग 1 करोड़ 82 लाख रुपये की ठगी हुई, जबकि वर्ष 2025 में जून तक 17 लोगों से 77 लाख 57 हजार रुपये वसूले जा चुके हैं। ऐसे फंसाते हैं ठग साइबर ठग पहले विभिन्न माध्यमों से पीड़ितों के डाटा आधार, पैन, बैंक डिटेल, मोबाइल नंबर से लेकर सोशल मीडिया गतिविधियां तक पर नजर रखते हैं। इन जानकारियों के आधार पर वे पीड़ित की वर्चुअल प्रोफाइल बनाते हैं, ताकि उसे यह भरोसा हो कि काल करने वाला कोई सरकारी अधिकारी है। इसके बाद शुरू होता है डराने-धमकाने का सिलसिला। पीड़ित को फोन कर बताया जाता है कि उसका नाम मनी लांड्रिंग, ड्रग तस्करी या अवैध लेनदेन के मामले में आ गया है। दावा किया जाता है कि ईडी, सीबीआई या कोर्ट में मामला दर्ज है और तुरंत वेरिफिकेशन जरूरी है। पीड़ित को किसी ऐप के जरिए वीडियो कॉल पर जोड़ा जाता है, जहां ठग पुलिस अधिकारी के वेश में, पुलिस कार्यालय जैसी पृष्ठभूमि के साथ बैठा दिखता है। पीड़ित को परिवार या किसी अन्य से बात करने की मनाही होती है। सामान्य पूछताछ के बाद वीडियो काल में ‘अन्य एजेंसियों’ के अफसर के रूप में और लोग जुड़ते हैं, जो सख्ती से पूछताछ कर आरोप ‘सिद्ध’ कर देते हैं और फिर ‘क्लीन चिट’ के नाम पर रकम की मांग करते हैं। यह रकम सीधे ठगों के खातों में जमा कराई जाती है। जज बनकर सुनाई सजा सितंबर 2024 में भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक गैस संचालक की मां को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपये ठग लिए थे। आरोपियों ने उन्हें फर्जी मनी लांड्रिंग केस में फंसाया। करीब दस दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और ‘अदालत’ में पेश कर दिया। यहां नकली कोर्ट, फर्जी वकील और जज की भूमिका निभाई गई। महिला को ‘सजा’ सुनाने के बाद समझौते के नाम पर 80 लाख रुपये ले लिए गए। यह मामला क्राइम ब्रांच साइबर सेल में दर्ज हुआ था। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कमी आई     साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता के लिए भोपाल और प्रदेशभर में पुलिस लगातार अभियान चला रही है, जिससे डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कमी आई है। मप्र स्टेट साइबर ने पहली बार डिजिटल अरेस्ट में लाइव रेस्क्यू किया था। वहीं भोपाल क्राइम ब्रांच ने पहली बार डिजिटल अरेस्ट करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद से साइबर ठगों पर लगातार कार्रवाई जारी है। – शैलेंद्र सिंह चौहान एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच  

गोवंश सुरक्षा के नए प्रयास, गोसेवकों के लिए मानदेय योजना लागू

रायपुर  राज्य सरकार ने गोवंशों की सुरक्षा के लिए ‘गौधाम’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसमें बेसहारा गोवंश के लिए चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी। चरवाहों और गोसेवकों को मासिक मानदेय मिलेगा, चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी और बेहतर संचालन करने वाली संस्थाओं को रैंकिंग के साथ ईनाम भी दिया जाएगा। वित्त विभाग ने ‘गौधाम योजना’ को मंजूरी दे दी है और पशुधन विकास विभाग ने कलेक्टरों और फील्ड अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है। गोवंशों की लगातार हो रही मौतों पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का यह बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार में आने के बाद गो अभ्यारण बनाने की बात कही थी। बता दें कि दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री साय ने एक कार्यक्रम में कहा था कि गो माता हमारी समृद्धि का प्रतीक हैं और माना जाता है कि उनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा था कि गो अभ्यारण्य को ‘गौधाम’ कहना अधिक उचित है। बेमेतरा में 50 एकड़ में ‘गौधाम’ तैयार बेमेतरा के झालम में 50 एकड़ में गौधाम तैयार है। इसी तरह कवर्धा में 120 एकड़ में गौधाम निर्माण तेजी से जारी है। बता दें कि हाल ही में हाई कोर्ट ने सड़कों पर मृत पड़ी गायों की घटनाओं पर गंभीर टिप्पणी की थी। पिछले सप्ताह तीन अलग-अलग हादसों में 90 गायों की मौत और बिलासपुर रोड पर 18 गायों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्य सचिव ने अफसरों को फटकार लगाई थी। क्या होगा ‘गौधाम’ में     गौधाम शासकीय भूमि पर बनाए जाएंगे, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशु-शेड, पर्याप्त पानी, बिजली और चारागाह की सुविधा होगी।     इनका संचालन निकटस्थ पंजीकृत गौशाला समितियों को प्राथमिकता देकर किया जाएगा।     योग्य एनजीओ, ट्रस्ट, सहकारी समितियां या किसान उत्पादक कंपनियां भी जिम्मेदारी संभाल सकेंगी।     चयन का मापदंड गोसेवा, नस्ल सुधार, जैविक खाद निर्माण और पशुपालन प्रशिक्षण का अनुभव होगा।     गोधाम में वैज्ञानिक पद्धति से पशुओं का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा।     गो- उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकास, नस्ल सुधार, गौसेवा के प्रति जन-जागरण और रोजगार सृजन योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं।     प्रत्येक गो-धाम में अधिकतम 200 पशु रखे जा सकेंगे। ये हैं कानूनी प्रविधान छत्तीसगढ़ की सीमाएं सात राज्यों से जुड़ी हैं और यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिससे अंतर्राज्यीय पशु परिवहन की संभावना रहती है। राज्य में कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 (संशोधित 2011) और छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण नियम 2014 लागू हैं, जिनमें अवैध पशु परिवहन व तस्करी पर सख्ती से रोक है। प्रदेश में बड़ी संख्या में निराश्रित और जब्त गोवंश पाए जाते हैं, जो फसलों को नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। राज्य सरकार का मानना है कि ‘गौधाम योजना’ से न केवल निराश्रित पशुओं की मौत पर रोक लगेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नए अवसर पैदा होंगे। बेहतर प्रबंधन करने वाली संस्थाएं राज्य में माडल गौधाम के रूप में पहचान बनाएंगी।