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भारत की अर्थव्यवस्था 2026 तक 6.4% बढ़ेगी, अमेरिकी टैरिफ और टैक्स के बावजूद UN रिपोर्ट में आ रहा है सकारात्मक आकलन

नई दिल्ली  संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCAP) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट 'इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026' के अनुसार, भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2026 में 6.4 प्रतिशत और साल 2027 में 6.6 प्रतिशत की दर से विकास करेगी।  विकास के मुख्य कारक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रही थी. इस वृद्धि के पीछे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार, मजबूत घरेलू खपत और वस्तु एवं सेवा कर की दरों में कटौती जैसे प्रमुख कारण रहे. साथ ही, अमेरिकी टैरिफ लागू होने से पहले निर्यात में आई तेजी ने भी इसे समर्थन दिया. रिपोर्ट में सेवा क्षेत्र को भारतीय विकास का मुख्य इंजन बताया गया है।  वैश्विक व्यापार तनाव और चुनौतियां भविष्य के लिए सकारात्मक अनुमानों के बीच रिपोर्ट ने कुछ गंभीर चिंताओं की ओर भी इशारा किया है. अगस्त 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के बाद, 2025 की दूसरी छमाही में अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई।  एक और बड़ी चिंता प्रेषण को लेकर है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता देश है, जिसे 2024 में 137 अरब डॉलर मिले थे. हालांकि, जनवरी 2026 से अमेरिका द्वारा सभी प्रेषणों पर लगाए गए 1 प्रतिशत टैक्स के कारण भारत को बड़ा आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. भारत में प्रेषण का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों पर सीधा असर पड़ सकता है।  निवेश और हरित अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश (FDI) के मामले में भारत का प्रदर्शन सराहनीय रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की पहली तीन तिमाहियों में भारत ने 50 अरब डॉलर का ग्रीनफील्ड एफडीआई आकर्षित किया, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है।  रिपोर्ट में भारत की 'उत्पादन आधारित प्रोत्साहन' (PLI) योजना की भी प्रशंसा की गई है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सोलर मॉड्यूल, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली यह योजना आयात पर निर्भरता कम करने और हरित औद्योगिक विकास के लिए एक बेहतरीन मॉडल है. वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 1.66 करोड़ हरित नौकरियों में से भारत की हिस्सेदारी 13 लाख है, जिसे और बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं।  कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत की आर्थिक नींव मजबूत है. हालांकि, मुद्रास्फीति के 2026 में 4.4% और 2027 में 4.3% रहने का अनुमान है. यदि भारत बाहरी व्यापारिक बाधाओं और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करता है, तो वह अपनी विकास यात्रा को स्थिर रख सकता है। 

भारत की अर्थव्यवस्था पर विश्वास: FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़कर 6.6%, मॉर्गन स्टेनली से विश्व बैंक तक

नई दिल्ली विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक ताकत पर भरोसा जताया है। उसने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का विकास अनुमान 6.3 फीसदी से बढ़ाकर 6.6 फीसदी कर दिया है। यह संशोधन ऐसे समय हुआ, जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे मजबूत स्थान पर है। जहां पूरे क्षेत्र की विकास दर धीमी पड़ रही है, वहीं भारत इस क्षेत्र के लिए स्थिरता और वृद्धि का प्रमुख इंजन बना हुआ है।  रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया की कुल विकास दर 2025 में 7 फीसदी से घटकर 2026 में 6.3 फीसदी रहने का अनुमान है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता है, जिसने आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव डाला है। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो इससे महंगाई में वृद्धि हो सकती है और केंद्रीय बैंकों को सख्त नीतियां अपनानी पड़ सकती हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता चिंता का विषय बनी हुई है। खासकर मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आम लोगों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा, कच्चे माल की लागत बढ़ने और वैश्विक मांग कमजोर रहने के कारण निवेश की गति भी धीमी पड़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख बाजारों में धीमी आर्थिक वृद्धि का असर भारत के निर्यात पर पड़ सकता है। हालांकि, इन बाजारों तक बेहतर पहुंच के बावजूद कुल निर्यात प्रदर्शन पर दबाव रह सकता है। अन्य संस्थानों के अनुमानों से तुलना करें तो भारतीय रिजर्व बैंक ने FY27 के लिए 6.9 प्रतिशत, OECD ने 6.1 प्रतिशत और मूडीज ने 6 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान लगाया है। इस लिहाज से विश्व बैंक का अनुमान संतुलित माना जा रहा है। घरेलू मांग है भारत की ताकत विश्व बैंक के मुताबिक, भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत स्थिति में है। 2025-26 में देश की विकास दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है, जो इस वित्त वर्ष में घटकर 6.6 फीसदी हो सकती है। मजबूत घरेलू मांग भारत की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में अहम भूमिका निभा रही है।  मॉर्गन स्टेनली का अनुमान वैश्विक संगठन मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी में वृद्धि के अनुमान को प्रतिशत 0.30 अंक घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले संगठन ने 6.5 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया था। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहेगी तथा गैस की उपलब्धता एक अतिरिक्त बाधा होगी। मॉर्गन स्टेनली की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की बढ़ती कीमत और औद्योगिक आपूर्ति में कमी से उत्पादन के संसाधनों की लागत बढ़ रही हैं और चुनिंदा वस्तुओं के उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है। रुपये की कमजोरी के बीच आयातित महंगाई बढ़ रही है। इसके अलावा, रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अनुमान लगाया है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रतिकूल प्रभाव के कारण वित्त वर्ष 2026- 27 में भारत की वृद्धि धीमी होकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। मूडीज रेटिंग्स ने क्या कहा? बीते दिनों मूडीज रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत की वृद्धि की रफ्तार घटेगी और इससे महंगाई का जोखिम भी बढ़ेगा।

चुनावी वादों ने खोली जापान की सच्चाई: वह तस्वीर जो दुनिया नहीं देखती

टोक्यो  यह खबर तो आपको भी पता चल गई होगी कि जापान में संपन्‍न हुए हालिया चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता सनाए तकाची ने 75.7 फीसदी सीटों पर कब्‍जा जमाकर जीत हासिल की है. यह दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद किसी भी जापानी नेता को मिला सबसे बड़ा समर्थन है. इस चुनाव ने न सिर्फ जापान की सत्‍ता को ग्‍लोबल चर्चा का विषय बना दिया, बल्कि दुनिया के सामने जापान की ऐसी तस्‍वीर भी पेश की जिसके बारे में ज्‍यादातर लोगों को पता ही नहीं है. हमें आपको यही लगता होगा कि विकसित देशों की सूची में शामिल जापान आर्थिक प्रगति का रोल मॉडल है, लेकिन इस बार के चुनाव में की गई घोषणाओं ने जापान की पिछड़ी तस्‍वीर भी दुनिया के सामने रखी. दूसरा विश्‍व युद्ध समाप्‍त होने के बाद जापान साल 1960 से 1980 के बीच इकनॉमिक सुपरपॉवर बनकर उभरा. 90 के दशक तक जापान की जीडीपी ग्रोथ जी-7 में शामिल अन्‍य देशों के मुकाबले काफी तेज रही थी. इसके बाद से ही जापान की अर्थव्यवस्‍था पर दबाव बढ़ने लगा और आज तो यह भयंकर आर्थिक संकट में घिर चुका है. 60 से 70 और 70 से 80 के दशक में जापान की जीडीपी ग्रोथ 16.4 फीसदी और 17.9 फीसदी रही थी. साल 2010 से 2024 तक जापान की जीडीपी ग्रोथ शून्‍य से भी 2.4 फीसदी नीचे रही यानी फिलहाल वहां मंदी चल रही है. दुनिया में सबसे ज्‍यादा सरकारी कर्ज जापान इस समय आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति में है. एक तो उसकी जीडीपी ग्रोथ माइनस में चल रही है, जबकि सरकारी कर्ज जीडीपी के मुकाबले 230 फीसदी पहुंच गया है. यह दशकों से चले आ रहे घाटे वाले खर्चों का नतीजा है. जापान की नई प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने अपने चुनावी वादों में अतिरिक्‍त खर्चों को घटाने और टैक्‍स कम करने का ऐलान किया था. इसके बाद से ही जापान के बॉन्‍ड मार्केट में हलचल बढ़ गई है. फिलहाल बॉन्‍ड यील्‍ड 3.56 फीसदी के साथ रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है. इसे जापान के लिए डेट क्राइसिस की शुरुआत माना जा रहा है, जो ग्‍लोबल इकनॉमी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है. कमजोर मुद्रा बन रही परेशानी जापान की मुद्रा येन भी लगातार कमजोर हो रही है, जो फिलहाल डॉलर के मुकाबले कई साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गई है. जापान ने ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की है, जिससे आयात महंगा हो रहा है और महंगाई भी बढ़ रही है. अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर की वजह से निर्यात में कमी आ रही और निवेश भी कमजोर पड़ा है. फिलहाल सबकुछ बैंक ऑफ जापान पर निर्भर करता है, जो आने वाले समय के लिए नीतियां निर्धारित करेगा और जापान को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. गरीबों के लिए चुनावी वादे प्रधानमंत्री सनाए तकाची ने चुनावी वादों में गरीबों और निम्‍न आय वर्ग के लिए कई घोषणाएं की हैं. उनका कदम महंगाई से निपटने और स्थिर मजदूरी और बढ़ते खर्च से निपटने के लिए है. इस कड़ी में पीएम ने खाद्य उत्‍पादों पर 8 फीसदी का कंजप्‍शन टैक्‍स भी दो साल के लिए खत्‍म कर दिया है. इससे गरीब परिवारों के लिए भोजन की लागत कम होगी और उनके जीवन यापन में सुधार आएगा. साथ ही टैक्‍स छूट का दायरा भी बढ़ाए जाने की तैयारी है, ताकि निम्‍न आय वर्ग वालों की बचत को बढ़ाया जा सके.  

भारत की ग्रोथ को लेकर IMF का सकारात्मक दृष्टिकोण, FY26 में 7.3% की वृद्धि का अनुमान

नई दिल्ली.  भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक बार फिर भरोसा जताया है. ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में IMF ने भारत के आर्थिक विकास अनुमान को बढ़ाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा और अगले वित्त वर्ष में भारत की ग्रोथ पहले के आकलन से तेज रहने की उम्मीद है. बेहतर आर्थिक प्रदर्शन, मजबूत घरेलू मांग और लगातार बढ़ती गतिविधियों ने भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखा है. वहीं निजी संस्था मूडीज रेटिंग्स ने सोमवार को अनुमान लगाया कि भारत मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 7.3 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल करेगा. मूडीज ने कहा कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को सपोर्ट मिलेगा और इंश्योरेंस प्रोटेक्शन की मांग बढ़ेगी. FY26 और FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ा IMF ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. यह अक्टूबर में दिए गए अनुमान से 0.7 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं, FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान को 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है. IMF का कहना है कि FY28 में भी विकास दर लगभग 6.4 प्रतिशत के आसपास स्थिर रह सकती है, हालांकि अस्थायी और चक्रीय समर्थन धीरे-धीरे कम होंगे. मजबूत तिमाही प्रदर्शन से बढ़ा भरोसा IMF के अनुसार, साल की तीसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे और चौथी तिमाही में मजबूत रफ्तार ने ग्रोथ अनुमान को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई. रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुकूल आधार प्रभाव और अल्पकालिक कारकों से फिलहाल अर्थव्यवस्था को सहारा मिला है. साल की पहली छमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 8 प्रतिशत से ज्यादा की दर से बढ़ी, जिसने वैश्विक एजेंसियों को सकारात्मक संकेत दिया. सरकार और वर्ल्ड बैंक के अनुमान से मेल भारत सरकार ने 6 जनवरी को जारी अपने पहले अग्रिम अनुमान में FY26 की ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने की बात कही थी, जो IMF के नए अनुमान के काफी करीब है. इससे पहले वर्ल्ड बैंक भी भारत को लेकर अपना अनुमान बढ़ा चुका है. वर्ल्ड बैंक ने FY26 में 7.2 प्रतिशत ग्रोथ और उसके बाद करीब 6.5 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया है. इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग और उपभोक्ता खर्च में स्थिरता बताई गई है. वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की भूमिका IMF ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी उम्मीदें बढ़ाई हैं. 2026 के लिए वैश्विक ग्रोथ अनुमान 3.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.3 प्रतिशत कर दिया गया है. अमेरिका की ग्रोथ 2.4 प्रतिशत और चीन की 4.5 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है. IMF का मानना है कि व्यापार नीतियों से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निवेश और निजी क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता दुनिया की अर्थव्यवस्था को संतुलन में बनाए हुए है.

भारत की आर्थिक उन्नति: 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य

नई दिल्ली   भारत 4.18 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ जापान को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पछाड़कर तीसरी रैंक हासिल कर लेगा और 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह जानकारी सोमवार को एक आधिकारिक बयान में दी गई। भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से विकास कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर छह तिमाही के उच्चतम स्तर पर रही है। यह दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक उतार-चढ़ाव में भी मजबूत बनी हुई है। बयान के कहा गया, "भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इस गति को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में है। 2047 तक – अपनी आजादी के सौवें साल तक – उच्च मध्यम-आय वाला देश बनने की महत्वाकांक्षा के साथ, देश आर्थिक विकास, संरचनात्मक सुधारों और सामाजिक प्रगति की मजबूत नींव पर आगे बढ़ रहा है।" आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। भारत की घरेलू ग्रोथ कई कारणों से ऊपर की ओर जा रही है जिसमें मजबूत घरेलू मांग, इनकम टैक्स और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) का सरलीकरण, कच्चे तेल की कम कीमतें, सरकारी पूंजीगत खर्च, साथ ही अनुकूल मौद्रिक और वित्तीय स्थितियां शामिल हैं, जिन्हें कम महंगाई का भी समर्थन मिल रहा है। बयान में कहा गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की गति में निजी क्षेत्र मजबूत भूमिका निभा रहा है और लगातार ग्रोथ को सपोर्ट कर रहा है। इसके अलावा, सरकार देश के निर्यात को आगे बढ़ाने के लिए लगातार अन्य देश के साथ व्यापारिक समझौता कर रही है। 2025 में सरकार ने यूके, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किया है। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-सितंबर 2025 के दौरान भारत के सामान और सेवाओं का कुल निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 418.91 अरब डॉलर हो गया। इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 5.86 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है।

रिपोर्ट: भारत की अर्थव्यवस्था 2047-48 तक 26 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छूने की संभावना

नई दिल्ली  अगर भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में 6 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर के साथ बढ़ती है तो देश की जीडीपी वित्त वर्ष 2047-48 तक 26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। साथ ही, प्रति व्यक्ति आय 15,000 डॉलर होने की उम्मीद है, जो कि मौजूदा स्तर से छह गुना अधिक है। यह जानकारी ईवाई की एक रिपोर्ट में दी गई।  रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में जापान और जर्मनी को पछाड़ कर 2030 तक अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। भारत ने विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है, जो मुख्य रूप से इसकी आर्थिक उदारीकरण नीतियों के कारण संभव हुआ है। इन नीतियों ने भारत को अधिक बाजार केंद्रीय बनाया, निजी पूंजी की भूमिका को बढ़ाया और इस प्रक्रिया ने देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत किया। आने वाले दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के अनुमान किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे अधिक हैं। 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी  भारत ने विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है, जो मुख्य रूप से इसकी आर्थिक उदारीकरण नीतियों के कारण संभव हुआ है. इन नीतियों ने भारत को अधिक बाजार केंद्रीय बनाया, निजी पूंजी की भूमिका को बढ़ाया और इस प्रक्रिया ने देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत किया. आने वाले दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के अनुमान किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे अधिक हैं. 2 दशकों में 14% बढ़ा सर्विस एक्‍सपोर्ट  पहले से मजबूत भारत के सेवा निर्यात में पिछले दो दशकों में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2021-22 में यह 254.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया. सेवा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवाओं से आता है, जो 2021-22 में 157 अरब डॉलर था. यह वृद्धि भारतीय मुख्यालय वाली और वैश्विक आईटी कंपनियों दोनों के कारण हुई है. दुनिया के 45% ग्‍लोबल कैपिसिटी सेंटर भारत में  इसके अलावा, अन्य ग्लोबल कॉरपोरेट्स भारत में स्थित अपने क्षमता केंद्रों के माध्यम से भारतीय प्रतिभा का लाभ उठा रहे हैं, जिनमें 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं. लागत लाभ के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभा और अत्याधुनिक इनोवेशन का एक प्रमुख स्रोत बन गया है. भारत में स्थित 1,500 वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) वैश्विक जीसीसी के 45 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014-19 की अवधि में, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में, डिजिटल अर्थव्यवस्था में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से 2.4 गुना अधिक थी. पहले से मजबूत भारत के सेवा निर्यात में पिछले दो दशकों में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2021-22 में यह 254.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सेवा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवाओं से आता है, जो 2021-22 में 157 अरब डॉलर था। यह वृद्धि भारतीय मुख्यालय वाली और वैश्विक आईटी कंपनियों दोनों के कारण हुई है। इसके अलावा, अन्य ग्लोबल कॉरपोरेट्स भारत में स्थित अपने क्षमता केंद्रों के माध्यम से भारतीय प्रतिभा का लाभ उठा रहे हैं, जिनमें 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। लागत लाभ के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभा और अत्याधुनिक इनोवेशन का एक प्रमुख स्रोत बन गया है। भारत में स्थित 1,500 वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) वैश्विक जीसीसी के 45 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014-19 की अवधि में, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में, डिजिटल अर्थव्यवस्था में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से 2.4 गुना अधिक थी।

फिच रेटिंग्स का अपडेट: GDP अनुमान 6.9% से बढ़कर 7.4%, उपभोक्ता खर्च और GST सुधार से मिली ताकत

मुंबई साख निर्धारित करने वाली एजेंसी फिच रेटिंग्स ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमान को 6.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया। मुख्य रूप से उपभोक्ता खर्च में वृद्धि और जीएसटी सुधारों के साथ बेहतर धारणा के कारण वृद्धि अनुमान को बढ़ाया गया है। गुरुवार को फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले यह अनुमान 6.9 प्रतिशत था. फिच ने अपने आर्थिक विश्लेषण में कहा कि उपभोक्ता खर्च में तेजी, व्यावसायिक माहौल में सुधार और हाल ही में लागू किए गए जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था की गति तेज हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत थी. हालांकि, फिच का अनुमान है कि मार्च 2026 के अंत तक वृद्धि दर थोड़ी धीमी रह सकती है. बावजूद इसके, पूरे वर्ष के लिए एजेंसी ने अपनी वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत पर रखा है. फिच ने क्या कहा फिच ने कहा कि घटती मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को दिसंबर में नीतिगत दरों में एक और कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत पर लाने गुंजाइश देती है। आरबीआई इस साल अब तक मुख्य नीतिगत दर रेपो में एक प्रतिशत की कटौती कर चुका है। उसने कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गई जो इससे पिछली अप्रैल-जून तिमाही के 7.8 प्रतिशत थी। रेटिंग एजेंसी ने दिसंबर के लिए अपनी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2025-26 (मार्च के अंत तक) की शेष अवधि में वृद्धि धीमी रहेगी, लेकिन हमने पूरे वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि अनुमान को सितंबर के 6.9 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है।’’ इस वर्ष वृद्धि को मुख्य रूप से निजी उपभोक्ता खर्च गति दे रहा है। इसका कारण मजबूत वास्तविक आय गतिशीलता, उपभोक्ता धारणा में सुधार और हाल ही में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों का प्रभाव है। क्या है डिटेल जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत लगभग 375 वस्तुओं पर कर की दरें कम की गई है। इससे 99 प्रतिशत से अधिक उपभोग की वस्तुएं सस्ती हुई हैं। जीएसटी में संशोधित दरें 22 सितंबर से प्रभावी हुई हैं। फिच को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर धीमी होकर 6.4 प्रतिशत रहेगी। इसने अनुमान लगाया है कि वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ अगले वित्त वर्ष (2026-27) की दूसरी छमाही में निजी निवेश में तेजी आएगी। खाने-पीने की चीजों की कम कीमतों के कारण अक्टूबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत के अबतक के सबसे निचले स्तर पर आ गई। फिच ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि घटती मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को दिसंबर में नीतिगत दर में एक और कटौती करके इसे 5.25 प्रतिशत करने की गुंजाइश देगी…।’’ आरबीआई शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगा। फिच के अनुसार, मुख्य मुद्रास्फीति में सुधार और गतिविधियों के मजबूत बने रहने के अनुमान के साथ आरबीआई नीतिगत दर में कटौती के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है और अगले दो साल तक नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बनी रहेगी। उपभोक्ता खर्च बना मुख्य चालक फिच के अनुसार, निजी उपभोक्ता खर्च इस वित्त वर्ष की वृद्धि का मुख्य स्तंभ है. इसे मजबूत वास्तविक आय, उपभोक्ता विश्वास में बढ़ोतरी और जीएसटी सुधारों से समर्थन मिला है. अक्तूबर में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत के सर्वकालिक निम्न स्तर पर आ गई, जिसका मुख्य कारण खाद्य और पेय पदार्थों की कम कीमतें रही. वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटने की संभावना एजेंसी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. फिच ने कहा कि वित्तीय स्थिति में नरमी आने पर अगले वर्ष की दूसरी छमाही में निजी निवेश में तेजी आ सकती है. आरबीआई को दरों में कटौती का अवसर मुद्रास्फीति में कमी के कारण फिच का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर में नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत तक ले जा सकता है. साल 2025 में अब तक कुल 100 आधार अंकों की कटौती हो चुकी है, साथ ही नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में भी कई बार कमी की गई है. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति शुक्रवार को अपनी नीति समीक्षा की घोषणा करेगी. फिच ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति में सुधार और आर्थिक गतिविधियों के मजबूत बने रहने के कारण, केंद्रीय बैंक ने अपने सहजता चक्र के अंत तक पहुंच गया है और अगले दो वर्षों तक ब्याज दरें 5.25 प्रतिशत पर बनी रह सकती हैं.

भारत को IMF का नया लक्ष्य—कुछ साल बाद 5 ट्रिलियन डॉलर क्लब में एंट्री!

 नई दिल्‍ली       इंटरनेशल मोनिटरी फंड (IMF) ने भारत को नया टारगेट दे दिया है. IMF ने 26 नवंबर को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार भारत के अब वित्त वर्ष 29 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के मील के पत्थर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पहले के अनुमान से एक पूरा वर्ष बाद है.  भारत का लंबे समय से 5 ट्रिलियन डॉलर के जीडीपी टारगेट पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. आईएमएफ की रिपेार्ट में कहा गया है कि लक्ष्य तक पहुंचने में देरी, उम्‍मीद से धीमी ग्रोथ और अनुमान से कहीं ज्‍यादा तेज रुपये में बदलाव को दिखाती है.  आईएमएफ के 2025 के अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 28 में भारत का GDP सिर्फ़ 4.96 ट्रिलियन डॉलर रहेगा, जो इस साल की शुरुआत में अनुमानित 5.15 ट्रिलियन डॉलर से कम है और 2023 के 5.96 ट्रिलियन डॉलर के अनुमान से भी काफी कम है.  जीडीपी अनुमान में क्‍यों कटौती?  आईएमएफ ने कहा कि डॉलर बेस्‍ड GDP पूर्वानुमान में कटौती का मुख्‍य कारण रुपये में गिरावट है. आईएमए ने वित्त वर्ष 2025 के लिए विनिमय दर अनुमान को 82.5 रुपये प्रति डॉलर से संशोधित कर 84.6 रुपये प्रति डॉलर कर दिया है.र्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 के लिए, अब यह क्रमशः 87 रुपये और 87.7 रुपये तक और कमजोर होने का अनुमान है. 21 नवंबर को रुपया 89.49 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा था.  नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान इस बदलाव ने IMF को भारत के एक्‍सचेंज रेट व्‍यवस्‍था को 'स्थिर' से 'क्रॉल जैसे' में क्‍लासिफाइड करने के लिए प्रेरित किया है, जो करेंसी में हुए बदलाव के ट्रांसपैरेंसी का संकेत देता है. आईएमएफ ने नॉमिननल जीडीपी ग्रोथ अनुमानों  में भ्‍ली कटौती की है.  आईएमएफ अब वित्त वर्ष 26 में 8.5% की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है, जो 2024 के 11% के अनुमान से कम है. डॉलर के संदर्भ में इसका अर्थ है कमजोर ग्रोथ वित्त वर्ष 26 में 5.5% और वित्त वर्ष 27 में 9.2% रहेगा, क्योंकि विनिमय दर संबंधी अनुमान वास्तविक विस्तार को कमज़ोर कर रहे हैं.  इन झटकों के बावजूद, आईएमएफ का मानना ​​है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है, जिसका श्रेय मज़बूत घरेलू मांग और बेहतर होते इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को जाता है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर प्रमुख व्यापार समझौते अंतिम रूप ले लेते हैं और सुधारों की गति बनी रहती है, तो भारत का भविष्य बेहतर हो सकता है.  भारत ने कुछ धारणाओं को खारिज कर दिया है, विशेष रूप से इस उम्मीद को कि भारतीय निर्यात पर 50% अमेरिकी टैरिफ जारी रहेगा, मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में आईएमएफ के नजरिए को अत्यधिक रूढ़िवादी बताया गया है.

इकोनॉमी का सरप्राइज जंप! सितंबर क्वार्टर में GDP 8.2% बढ़ी, प्रोजेक्शन उलटे पड़े

नई दिल्ली  भारत की इकोनॉमी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2) के दौरान जीडीपी 8.2% की मजबूत दर से बढ़ी है, जो विशेषज्ञों के अनुमान से कहीं बेहतर है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 5.6 प्रतिशत की दर से इकोनॉमी बढ़ी थी। वहीं, ताजा ग्रोथ पिछली तिमाही यानी अप्रैल से जून की अवधि के 7.8% से भी ज्यादा है। इस बार के आंकड़े बताते हैं कि उपभोक्ता खर्च में जोरदार तेजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शानदार प्रदर्शन की वजह से जीडीपी ने 8 पर्सेंट के आंकड़े को पार कर लिया है । सितंबर तिमाही के जीडीपी ग्रोथ में जीएसटी कटौती का मामूली असर है। दरअसल, जीएसटी कटौती 22 सितंबर से लागू हुई है। इसका व्यापक असर दिसंबर तिमाही के जीडीप आंकड़ों में देखने को मिलेगा। ग्रामीण बाज़ार की वापसी ने भरा दम अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस मज़बूत ग्रोथ के पीछे आम जनता की बढ़ती मांग का बड़ा हाथ है। इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, त्योहारी सीज़न से पहले शहरी मांग में ज़बरदस्त तेज़ी आई है। साथ ही, कई सालों की सुस्ती के बाद ग्रामीण ख़र्च में भी एक सार्थक सुधार देखने को मिला है. यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि देश की GDP में 55% से 60% योगदान उपभोग (Consumption) का होता है, और यह इंजन अब फिर से तेज़ी पकड़ रहा है। Union Bank of India के अर्थशास्त्रियों ने Q2FY26 के लिए GDP को 7.5% रहने का अनुमान लगाया है। उन्होंने यह भी बताया कि सकल मूल्य वर्धित (GVA) ग्रोथ, जो उत्पादन पक्ष को दर्शाती है, वह भी बढ़कर 7.3% हो सकती है। SBI म्यूचुअल फंड की मुख्य अर्थशास्त्री नम्रता मित्तल का मानना है कि वास्तविक GDP ग्रोथ 8% तक भी जा सकती है, जो RBI के अनुमान से काफी अधिक है। उनका भी कहना है कि सरकार के खर्च ने इस ग्रोथ को मज़बूत सहारा दिया है। दूसरी छमाही के लिए चेतावनी हालांकि, इतने उत्साहजनक आंकड़ों के बावजूद, विशेषज्ञों ने एक चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में (अक्टूबर से मार्च) GDP के आंकड़े थोड़े कमज़ोर पड़ सकते हैं। इसका मुख्य कारण है कि जो सांख्यिकीय कारक अभी ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं, वे धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे. इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी के कारण अमेरिकी टैरिफ का पूरा प्रभाव भी आने वाली तिमाहियों के आंकड़ों में नज़र आएगा। यह नाम मात्र की GDP ग्रोथ का धीमा पड़ना ही वह मुख्य चिंता है, जिस पर नीति-निर्माताओं को ध्यान देने की ज़रूरत होगी। बता दें Q2FY26 के GDP आंकड़े शुक्रवार, 28 नवंबर को जारी होने वाले हैं।

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना कारोबार 4 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना 4 लाख करोड़ का होगा कारोबार    जनवरी-जून, 2025 के बीच लगभग 23 करोड़ पर्यटक आए, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में मिलेगी मदद   लखनऊ अयोध्या में ध्वजारोहण कार्यक्रम से रामनगरी का गौरव विश्व में अपने व्यापक स्वरूप में आलोकित होने लगेगा। श्रीराम मंदिर की ध्वजा पर भगवान सूर्यदेव विराजमान हैं। सूर्यवंशी प्रभु श्रीराम की नगरी में ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद पर्यटन में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। आध्यात्मिकता, प्राचीनता और दैवीय गुणों को समेटे हुए ध्वज की छटा देखने के लिए विश्व से बड़ी संख्या में पर्यटक अयोध्या पहुंचेंगे। इससे अयोध्या के पर्यटन में पहले से ज्यादा उछाल आने वाला है पर्यटन से राजस्व के 4 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान  अयोध्या में जनवरी-जून 2025 के बीच करीब 23 करोड़ पर्यटक आए थे। दिसंबर 2025 तक करीब 50 करोड़ पर्यटकों के शहर पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का पर्यटन 4 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2029 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। अयोध्या का पर्यटन सीएम योगी के इस मिशन को पूरा करने में  महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। अयोध्या उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी में अभी 1.5% योगदान कर रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से अयोध्या की हिस्सेदारी और बढ़ जाएगी।     अयोध्या बन रहा है पर्यटन का सबसे बड़ा हब श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। राम मंदिर और उससे जुड़े निर्माण कार्य में अब तक लगभग 2150 करोड़ रूपये खर्च किया जा चुका है। यहां के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें, टूर एंड ट्रैवेल्स, पूजा सामग्री और प्रसाद के कारोबार रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 76 से ज्यादा होटल खुल चुके हैं। निजी क्षेत्र की होटल कंपनियां आईएचसीएल, मैरियट, रैडीशन, कामट, लेमन ट्री बड़ी मात्रा में निवेश कर रही हैं। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुख-सुविधा का पूरा ध्याम रखा जा रहा है।  उत्तर प्रदेश के पर्यटन में अयोध्या की हिस्सेदारी में वृद्धि 2028 तक उत्तर प्रदेश का पर्यटन सेक्टर 70,000 करोड़ का उद्योग बन जाएगा। इसमें अकेले अयोध्या का योगदान लगभग 25% होगा। अगर इसी तरह की ग्रोथ पर्यटन क्षेत्र में आगे देखने को मिलती है तो 4 लाख करोड़ राजस्व का टारगेट आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब ₹1.25 लाख करोड़ का योगदान किया है। आध्यात्म से आर्थिक विकास की यात्रा  अयोध्या केवल धार्मिक केंद्र न रहकर आर्थिक क्रियाकलापों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। रामनगरी की पर्यटन वृद्धि केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक बहुआयामी आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है। इससे अयोध्या विकास के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी।