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‘ऑपरेशन सिंदूर में भारत को नुकसान हुआ हो तो दिखाएं सबूत’, NSA डोभाल की दो टूक

नई दिल्ली पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. डोभाल ने आईआईटी मद्रास में अपने संबोधन के दौरान कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विदेशी मीडिया ने झूठी खबरें फैलाई हैं. मुझे एक तस्वीर दिखाइए, जिसमें भारत को नुकसान पहुंचा हो. भारत को इस दौरान कोई नुकसान नहीं पहुंचा. डोभाल ने कहा कि टेक्नोलॉजी और वॉरफेयर के बीच संबंध हमेशा महत्वपूर्ण होता है. हमें ऑपरेशन सिंदूर पर नाज है. हमें गर्व है कि इस ऑपरेशन के दौरान हमने स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया. हमने सीमापार नौ पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले का फैसला किया था. इनमें सीमावर्ती इलाके में एक भी ठिकाना नहीं था. हमारे सभी निशाने सटीक रहे. हमने सिर्फ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया. उन्होंने कहा कि यह पूरा ऑपरेशन 23 मिनट का था. मुझे एक तस्वीर दिखा दीजिए, जिसमें भारत को नुकसान पहुंचा हो. यहां तक कि एक गिलास भी नहीं टूटा. विदेशी मीडिया ने कई चीजें कहीं. उन्होंने कुछ चुनिंदा तस्वीरों को आधार बनाकर पाकिस्तान के 13 एयरबेस को लेकर कई बातें कहीं. लेकिन 10 मई से पहले और इसके बाद पाकिस्तान के 13 एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरें देखें. सब साफ हो जाएगा.  बता दें कि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम अटैक के जवाब में भारतीय सेना ने 7 मई की रात को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था. इसके तहत, भारतीय सेना ने पाकिस्तान और Pok में 9 आतंकी ठिकानों को उड़ा दिया था. इससे बौखलाकर पाकिस्तानी सेना ने भारत के सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया था. चार दिन तक चले सैन्य टकराव के बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच 'सीजफायर' हो गया था. भारत के साथ इस सीजफायर के लिए पाकिस्तान ने एक बार नहीं बल्कि दो बार संपर्क किया था. पाकिस्तान ने पहली बार 7 मई की शाम को भारत से सीजफायर के लिए संपर्क किया था. पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) की ओर से औपचारिक संदेश सहित भारत से संपर्क साधा गया था. सात मई की सैन्य कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था.  इसके बाद 10 मई को शाम 3.35 मिनट पर DGMO स्तर की वार्ता हुई, जिस दौरान दोनों तरफ से सीजफायर पर सहमति बनी. यह सहमति दोनों देशों के सैन्य संचार माध्यमों के जरिए हुई, जिसका उद्देश्य तनाव को कम करना था. 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए निर्देश, शासकीय भर्ती प्रक्रिया की नियमित निगरानी करें अधिकारी

नवीन शासकीय भर्तियों के कार्य की सतत् समीक्षा करें, वरिष्ठ अधिकारी: मुख्यमंत्री डॉ.यादव नवीन शासकीय भर्तियों की सतत समीक्षा करें वरिष्ठ अधिकारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए निर्देश, शासकीय भर्ती प्रक्रिया की नियमित निगरानी करें अधिकारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जानकारी प्राप्त कर दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विभिन्न शासकीय विभागों में रिक्त पदों को भरने का कार्य तेजी से पूर्ण किया जाए। रिक्त पदों पर सतत् रूप से नियुक्तियों का कार्य होने से विभागों के नियमित कार्यों में भी गति आ रही है। साथ ही वर्षों पश्चात पदोन्नतियों की प्रक्रिया प्रारंभ किए जाने से भी बड़ी संख्या में पदों पर नियुक्ति का कार्य आसान हो रहा है। वरिष्ठ अधिकारी नवीन शासकीय भर्तियों के कार्य की सतत् समीक्षा करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को समत्व भवन, मुख्यमंत्री निवास में हुई एक बैठक में विभिन्न शासकीय विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती के संबंध में जानकारी प्राप्त कर निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विभागों में नियुक्तियों के कार्य की निरंतर समीक्षा भी की जाए। मुख्य सचिव स्तर और अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विभागों को समय सीमा में कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है। इस क्रम में विभागों से पालन प्रतिवेदन प्राप्त किया जाए। इस कार्य को आवश्यक समन्वय और सर्वोच्च प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग संजय कुमार शुक्ल ने लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य स्तर से नवीन शासकीय भर्तियों की प्रगति से अवगत करवाया। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, सचिव मुख्यमंत्री सिबि चक्रवर्ती, आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

छांगुर बाबा के काले कारनामों पर नए खुलासे, स्विस बैंक में अकाउंट, लड़कियों को फंसाने की ट्रेनिंग…

लखनऊ जैसे-जैसे 70 वर्षीय जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा से पूछताछ बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे उसके काले कारनमों की परतें खुलती जा रही है. चार हजार से भी ज्यादा लोगों को धर्मांतरण कराने वाले इस बुजुर्ग पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), एटीएस और आयकर विभाग जैसी शीर्ष जांच एजेंसियों ने एक्शन शुरू कर दिया है. छांगुर बाबा का सबसे करीबी सलाहकार अब्दुल मोहम्मद राजा बाबा को लड़कियों को फंसाने की बाकायदा ट्रेनिंग देता था. वहीं छांगुर बाबा के सहयोगी नवीन रोहरा का स्विस बैंक में भी एकाउंट होने की जानकारी मिली है.  धर्मांतरण के धंधेबाज छांगुर उर्फ जलालुद्दीन इस समय काफी चर्चा में है. पकी हुई दाढ़ी, फकीरों जैसा लबादा और आंखों पर मोटा चश्मा और लड़खड़ाती हुई चाल. इसकी 78 साल की उम्र पर मत जाइये क्योंकि आरोप संगीन हैं कि ये जैसा दिख रहा है, असल में वैसा है नहीं. ये हिंदू लड़कियों को झांसे में लेकर उन्हें मुसलमान बनाने के बड़े मज़हबी रैकेट का मास्टरमाइंड है. इसी के पीछे नसरीन भी है वो लड़की जो कभी सिंधी हिंदू थी. छांगुर ने सबसे पहले इसे और इसके पति को ही मजहबी जाल में फंसाया था और इसे नीतू से नसरीन बनाया था. इसके बाद से धर्मांतरण के खेल में ये नसरीन ही इसका सबसे बड़ा मोहरा थी, जो हिंदू लड़कियों को फंसाकर छांगुर के पास लाती थी और फिर उनसे भी धर्म बदलवाया जाता था. अब छांगुर बाबा की धर्मांतरण की रेट लिस्ट भी सामने आई है. ब्राह्णण लड़की के धर्मांतरण के लिए 15 से 16 लाख रुपये था फिक्स इतना ही नहीं छांगुर ने हिंदू लड़कियों में भी ब्राह्रण, क्षत्रिय, OBC- SC-ST के हिसाब से टारगेट सेट करके उनके धर्मांतरण की रेट लिस्ट बनाई हुई थी. होटलों के रेट कार्ड की तरह धर्मांतरण की रेट लिस्ट आपने पहले नहीं सुनी होगी. जलालुद्दीन उर्फ छांगुर के नेटवर्क ने इसमें ब्राह्मण लड़कियों को इस्लाम कबूल करवाने के लिये 15 से 16 लाख रुपये रेट फिक्स कर रखा था. धर्मांतरण का यही 15 से 16 लाख रुपये का रेट उसने क्षत्रिय राजपूत लडकियों को मुसलमान बनवाने के लिये तय किया हुआ था. OBC वर्ग की हिंदू लड़की के धर्मांतरण के लिए 10 से 12 लाख था फिक्स वहीं पिछड़ी जाति यानी OBC वर्ग की हिंदू लड़की को कोई इस्लाम में कन्वर्ट कराता है तो उसके लिये 10 से 12 लाख रुपये का रेट फिक्स किया था. अन्य हिंदू जातियों यानी SC-ST वर्ग की लड़कियों का कोई धर्मांतरण करवाता है, तो उसके लिये रेट लिस्ट में कीमत 8 से 10 लाख रुपये रखी गई थी. ये अपने आप में हैरान करने वाला है कि धर्मांतरण का भी रेट कार्ड बनाया गया हो. ये रेट लिस्ट भी सवाल पैदा करती है कि हिंदू धर्मांतरण के लिये छांगुर को ऐसी कितनी विदेशी फंडिंग मिल रही थी? क्या इसी फंडिंग की बदौलत उसने दरगाह के पास ही हिंदू धर्मांतरण का करोड़ों का अवैध हेडक्वार्टर खड़ा किया था ?.  3 से 4 हजार हिंदुओं की लिस्ट बना रखी थी  सूत्रों के मुताबिक छांगुर की धर्मांतरण गैंग ने 3 से 4 हजार हिंदुओं की लिस्ट बना रखी थी जो सॉफ्ट टारगेट थे. दावा किया जा रहा है कि 40 हिंदुओं का धर्मांतरण करा भी चुका है. छांगुर और नसरीन को रिमांड पर लेकर यूपी ATS को इस धर्मांतरण रैकेट के सारे मंसूबे पता करने हैं. हिंदू धर्मांतरण के इस सनसनीखेज मामले में 9 आरोपी हैं, लेकिन गिरफ्तारी अभी सिर्फ 4 की हुई है. छांगुर पर यूपी ATS ने नवंबर 2024 में FIR की थी लेकिन गिरफ्तारी 5 जुलाई को हुई. जब छांगुर और नसरीन लखनऊ के स्मार्ट रूम होटल में बाप-बेटी की पहचान बताकर छिपे हुए थे.  छांगुर के पास 106 करोड़ रुपये मिडिल ईस्ट से आए मुंबई की हाजी अली दरगाह पर अंगूठियां बेचने वाले जलालुद्दीन उर्फ करीमुल्ला शाह उर्फ छांगुर ने कब हिंदू धर्मांतरण की साजिश शुरू की, कैसे करोड़ों का आसामी बना ये गुत्थी ED भी सुलझा रहा है. छांगुर पर विदेशी फंडिंग लेने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का भी आरोप दर्ज हैं. ED जांच में खुलासा हुआ है कि छांगुर के पास 106 करोड़ रुपये मिडिल ईस्ट से आए थे, ये 106 करोड़ रुपये 40 अलग-अलग बैंक खातों में जमा हुए. FIR में दर्ज है कि छांगुर ने कुछ वर्षों में 100 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति बनाई है. ये पैसा धोखाधड़ी और धर्मांतरण के एवज में कमाया गया है. इन पैसों से घर, दुकानें, स्कूल और कई धार्मिक संस्थाएं बनवाई हैं. ED ने छांगुर पर आरोपों का सारा चिट्ठा यूपी ATS से ले लिया है, दुबई और शारजाह से फंडिंग की बात जांच दायरे में है. इसके लिये छांगुर के 40 खातों की डिटेल्स निकाली जा रही हैं. दरगाह से छांगुर ने धर्मांतरण का पूरा नेटवर्क खड़ा किया मधपुर गांव में अपने अवैध अड्डे के पास इसी चांद औलिया दरगाह से छांगुर ने धर्मांतरण का पूरा नेटवर्क खड़ा किया. खुद को पीर बताकर यहीं से हिदुओं को फंसाने और उन्हें हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम को अपनाने के लिये बरगलाना शुरू किया था. छांगुर उर्फ़ जलालुद्दीन शिज्र-ए-तैयबा के हवाले से तकरीर करता था, चांद औलिया दरगाह पर भीड़ में ज्यादातर गरीब हिंदू दलित होते थे. छांगुर ब्रेनवॉश करता था, कहता था कि इस्लाम में ही हर दुख की दवा है. छांगुर बलरामपुर के आसपास भी कई कार्यक्रम आयोजित करता था, इन कार्यक्रमों में भीड़ जुटाकर इस्लाम कबूलने के लिये प्रेरित किया जाता था. गरीब हिंदुओं की भीड़ जुटाने में छांगुर के कई रिश्तेदारों के साथ नीतू उर्फ नसरीन का भी बड़ा रोल था. नीतू खुद के  नसरीन बनने की कहानी बताकर हिंदू लड़कियों को बरगलाती थी और चमत्कार का झांसा देकर छांगुर के पास लाती थी. ऐसे फैला रहा था धर्मांतरण का जाल एटीएस की एफआईआर में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. बाबा ने 'शिजरा-ए-तय्यबा' नाम की किताब के जरिए दलितों, गरीबों और महिलाओं को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया. उसके धार्मिक प्रवचनों में ऐसे तत्व थे जो लोगों के मन में भ्रम और असंतोष पैदा करते थे. जांच में सामने आया है कि 3 से 4 हजार हिंदुओं को टारगेट कर वह उन्हें जबरन या लालच देकर इस्लाम में शामिल कर चुका है. इनमें करीब 1500 से … Read more

बच्चों के पोषण अभियान के साथ महिलाओं की आर्थिक समृद्धि को मजबूती देगी यह पहल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रेडी टू ईट निर्माण एवं वितरण हेतु रायगढ़ में 10 महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपे अनुबंध पत्र फिर से महिला स्व-सहायता समूहों को मिला रेडी टू ईट निर्माण का कार्य: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और गारंटी हुई पूरी बच्चों के पोषण अभियान के साथ महिलाओं की आर्थिक समृद्धि को मजबूती देगी यह पहल: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायगढ़ जिले के सभी 2709 आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू ईट फूड का महिला स्व सहायता समूहों द्वारा किया जाएगा वितरण रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और गारंटी को पूरा करते हुए रेडी टू ईट निर्माण का कार्य पुनः महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने के निर्णय पर अमल की पहल की शुरुआत आज रायगढ़ जिले से की गई है। रायगढ़ जिले के सभी 2709 आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू इट फूड अब महिला स्व सहायता समूहों द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में 10 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी टू ईट निर्माण एवं वितरण के लिए अनुबंध पत्र सौंपे। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह, विधायक पुरंदर मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविंद्र गबेल, महापौर जीवर्धन चौहान एवं जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुषमा खलखो उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट) के निर्माण एवं वितरण का कार्य महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपने का निर्णय लिया है। यह कार्य प्रारंभिक चरण में 6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया जाएगा। रायगढ़ इस पहल का पहला जिला बना है, जहाँ 10 महिला स्व-सहायता समूहों को अनुबंध पत्र वितरित किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन समूहों की बहनें अब आंगनबाड़ी के बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस कार्य से अपनी आमदनी भी बढ़ाएंगी, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकेंगी। यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक सार्थक पहल है। साथ ही, बच्चों को पोषण युक्त आहार प्रदान कर राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि विगत डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश कार्यों को धरातल पर उतारा गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, दो वर्षों का बकाया बोनस वितरण, महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि, तेन्दूपत्ता संग्रहण दर में  5500 रुपये प्रति मानक बोरा की वृद्धि तथा चरण पादुका योजना की पुनः शुरुआत जैसे कार्य इसके सशक्त उदाहरण हैं। साथ ही, रामलला दर्शन योजना एवं तीर्थयात्रा योजना के माध्यम से प्रदेशवासियों को धार्मिक स्थलों की यात्रा का लाभ भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल डिजिटल सेवा केन्द्रों की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उनके गांव में ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है। अब तक प्रदेश की 1,460 पंचायतों में ऐसे सेवा केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे हजारों माताएं और बहनें सरल, सुरक्षित और सुलभ बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठा रही हैं। आने वाले समय में शेष पंचायतों को भी इस सुविधा से जोड़ा जाएगा। इस अवसर पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु सतत कार्य कर रही है। पूरे देश में 3 करोड़ लखपति दीदी बनाने का जो लक्ष्य रखा गया है, उसके अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। इसी दिशा में रेडी टू ईट योजना प्रारंभ की जा रही है, जिसके प्रथम चरण में 6 जिलों को शामिल किया गया है। रायगढ़ ऐसा पहला जिला है जहाँ महिला समूहों को अनुबंध पत्र सौंपे गए हैं। वित्त मंत्री ने अनुबंध प्राप्त सभी महिला समूहों से गुणवत्ता युक्त कार्य करने का आह्वान किया और कहा कि वे इस योजना को एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत करें। यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि राज्य के पोषण अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले में रेडी टू ईट कार्य हेतु 10 महिला समूहों का चयन किया गया है, जिन्हें अनुबंध पत्र प्रदान किए गए हैं। इन समूहों को रेडी टू ईट यूनिट की स्थापना हेतु प्रधानमंत्री फॉर्मेलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइज़ (PMFME) योजना के अंतर्गत उद्योग विभाग द्वारा पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी।रायगढ़ जिले की सभी परियोजनाओं रायगढ़ शहरी, रायगढ़ ग्रामीण, पुसौर, खरसिया, घरघोड़ा, तमनार, लैलूंगा, मुकड़ेगा, धरमजयगढ़ एवं कापू परियोजनाओं के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों में रेडी टू ईट वितरण हेतु महिला समूहों का चयन किया गया है।

न्यू मार्केट में दिखे सीएम, बिना तामझाम के फल खरीदते देख हैरान रह गए लोग

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 10 जुलाई की रात एक चौंकाने वाला लेकिन शानदार नजारा देखने को मिला, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक न्यू मार्केट पहुंचे। आम जनता के बीच पहुंचकर उन्होंने न केवल लोगों से बातचीत की और हालचाल जाना, बल्कि एक ठेले वाले से फल भी खरीदे और उसका डिजिटल पेमेंट किया। मुख्यमंत्री का यह सादगी भरा अंदाज लोगों को बेहद पसंद आया। बाजार में सीएम को देख चौंके लोग सीएम को अचानक बाजार में देख लोगों को उनकी सादगी पसंद आई। लोगों को यकीन ही नहीं हुआ कि उनके मुख्यमंत्री इतनी सहजता से उनके बीच खड़े हैं। अचानक सीएम को अपने बीच में देखकर लोग अचंभित नजर आए। काफिले में नहीं, सिर्फ दो गाडियों से पहुंचे न्यू मार्केट मुख्यमंत्री डॉ. यादव सादगी के साथ सिर्फ दो वाहनों में बाजार पहुंचे और 15 मिनट रुक कर फल खरीदे और निवास लौट गए। ट्रैफिक सिग्नल का किया पालन आमतौर पर सीएम का काफिला जिस रूट से गुजरता है। अमूमन 10-15 मिनट पहले पुलिस उस रूट पर ट्रैफिक रोक देती है लेकिन, सीएम ने अपने दौरे की किसी को जानकारी नहीं दी। वे जब फल लेकर वापस सीएम हाउस की तरफ जाने लगे तो सिग्नल पर रेड लाइट देखकर उनकी गाड़ी रुक गई। सीएम ने सिग्नल पर ट्रैफिक नहीं रोकने दिया। बल्कि, ग्रीन सिग्नल होने पर ही वे आगे बढ़े। इस दौरान लोगों ने सीएम का यह अंदाज देख वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर किया। डॉ. मोहन यादव बिना भारी-भरकम सुरक्षा के केवल दो वाहनों के काफिले के साथ बाजार पहुंचे और करीब 15 मिनट तक वहां रुके। इस दौरान उन्होंने ट्रैफिक नियमों का भी पूरी तरह पालन किया। फल विक्रेता से उन्होंने न सिर्फ सामान लिया, बल्कि उसके व्यवसाय और हालचाल की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री को यूं अपने बीच सहजता से खड़ा देख लोग आश्चर्यचकित रह गए और उनके इस व्यवहार की जमकर सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह बेफिक्र और जनता से जुड़ाव दर्शाने वाला अंदाज सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। ट्रैफिक सिग्नल का किया पालन इतना ही नहीं, लौटते समय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेड सिग्नल पर अपनी गाड़ी रोककर ट्रैफिक नियमों का पालन किया। उनके इस आचरण से यह स्पष्ट संदेश गया कि कानून का पालन हर नागरिक की जिम्मेदारी है, चाहे वह आम व्यक्ति हो या कोई पदाधिकारी। उनका सादगीभरा व्यवहार प्रदेशवासियों को यह सिखाता है कि सच्चे नेतृत्व का अर्थ केवल पद ग्रहण करना नहीं, बल्कि अपने आचरण से आदर्श प्रस्तुत करना भी है।

मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025 – सिटीज ऑफ टुमॉरो” का शुभारंभ करेंगे मुख्यमंत्री

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025 – सिटीज ऑफ टुमॉरो” का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में होटल, पर्यटन, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे। यह आयोजन प्रदेश में शहरी विकास के ब्लूप्रिंट और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित रहेगा। इस उच्च स्तरीय आयोजन में देश के 1500 से अधिक निवेशकों, उद्योगपतियों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों की सहभागिता होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर 1:30 बजे कॉन्क्लेव स्थल पर पहुँचकर एक्जीबिशन का अवलोकन करेंगे, उसके बाद विशिष्ट अतिथियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर 3 बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ कॉन्क्लेव का शुभारंभ करेंगे। कॉन्क्लेव में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। आयोजन में क्रेडाई, नगर निगम, आईडीए, स्मार्ट सिटी, हाउसिंग बोर्ड, मैट्रो, हुडको, एलआईसी सहित कई संस्थाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। तकनीकी सत्रों का आयोजन कॉन्क्लेव में चार तकनीकी-सत्र आयोजित होंगे, जिनमें “शहरी उत्कृष्टता के लिए आधिनिक तकनीक, विकास के केंद्र के रूप में शहर, भविष्य के लिए सतत हरित शहरीकरण और भविष्य के शहरों की यातायात व्यववस्था” जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में MP लॉकर, ET अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन समिट 2025 ब्रोशर का विमोचन, एमओयू साइनिंग और “सौगात” का उद्घाटन एवं अनावरण करेंगे। वह निवेशकों को प्रशस्ति-पत्र भी भेंट करेंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के शहरीकरण में निवेश अवसरों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जायेगा। शहरीकरण में निवेश के अवसर प्रदेश में मेट्रो, ई-बस, मल्टीमॉडल हब, अफोर्डेबल हाउसिंग, वॉटरफ्रंट डेवेलपमेंट, सीवेज नेटवर्क, ई-गवर्नेंस, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्ट रोड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की असीम संभावनाएँ हैं। प्रदेश में अफोर्डेबल हाउसिंग में 8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके हैं और 10 लाख से अधिक नए आवासों पर कार्य चल रहा है, जिनमें लगभग ₹50,000 करोड़ का निवेश संभावित है। रियल इस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध हैं। पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शतप्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई हैं। नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाइज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेव्हलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है। इंदौर में आयोजित यह ग्रोथ कॉन्क्लेव न केवल प्रदेश की शहरी योजनाओं को रफ्तार देगा, बल्कि निवेशकों को एक मजबूत और विश्वसनीय मंच भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नेतृत्व में प्रदेश शहरी परिवर्तन की ओर तेज़ी से अग्रसर है।  

बटेश्वर धाम में सांस्कृतिक धरोहर की वापसी, महाविष्णु मंदिर समेत कई स्थलों का हुआ जीर्णोद्धार

मुरैना  मध्य प्रदेश में मुरैना के बटेश्वर स्थित सबसे ऊंचा महाविष्णु मंदिर, जो लगभग छह सौ साल पहले पत्थरों के ढेर में तब्दील हो गया था, अब मूल स्वरूप में लौट आया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने बिखरे पत्थरों से मंदिर का पुनर्निर्माण किया है। इस परियोजना के तहत एक प्राचीन मठ और पांच अन्य मंदिरों का जीर्णोद्धार भी किया गया है। पुनर्निर्माण कार्य चार वर्षों से चल रहा था पुनर्निर्माण कार्य चार वर्षों से चल रहा था और संस्कृति मंत्रालय के नेशनल कल्चर फंड (एनसीएफ) के सहयोग से संपन्न हुआ है। बता दें कि इसके लिए इंफोसिस फाउंडेशन ने भी तीन करोड़ 80 लाख रुपये का योगदान दिया है। फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति ने मध्य प्रदेश के पर्यटन और पुरातात्विक स्थलों में गहरी रुचि दिखाई है। बटेश्वर में आठवीं से दसवीं शताब्दी के बीच निर्मित 200 मंदिर, जो क्षतिग्रस्त अवस्था में थे, के जीर्णोद्धार का कार्य 2005 से प्रारंभ हुआ था और अब तक 85 मंदिरों को पुनर्निर्मित किया जा चुका है। एएसआइ के भोपाल मंडल ने महाविष्णु मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य 2022 में आरंभ किया। सबसे पहले पत्थरों को हटाकर मंदिर की नींव का मूल डिजाइन तैयार किया गया। इसके बाद एक सौ से अधिक मंदिरों के टूटे हिस्सों में से महाविष्णु मंदिर के टुकड़े खोजे गए, जो बड़ी चुनौती थी। टीम ने 90 प्रतिशत पत्थरों को खोज निकाला टीम ने 90 प्रतिशत पत्थरों को खोज निकाला। जिन हिस्सों के टुकड़े नहीं मिले, उनके लिए बलुआ पत्थरों से टुकड़े तैयार किए गए। अब यह मंदिर 13 मीटर ऊंचा और गुर्जर-प्रतिहार शैली की स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण बनकर खड़ा है। मंदिर के निकट भगवान विष्णु की एक खंडित प्रतिमा भी मिली है, जिसे या तो मंदिर में स्थापित किया जाएगा या संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। गुर्जर-प्रतिहार वंश के वैभव के प्रतीक थे मंदिर एएसआइ भोपाल मंडल के अधीक्षक डा. मनोज कुर्मी ने बताया कि बटेश्वर में गुर्जर-प्रतिहार राजवंश ने बलुआ पत्थरों से 200 से अधिक मंदिर बनवाए थे। वास्तुकला की गुर्जर-प्रतिहार शैली के नमूने ये मंदिर भगवान शिव, विष्णु और शक्ति को समर्पित हैं। अब तक की खोज से पता चलता है कि वहां कोई आबादी नहीं थी, सिर्फ मंदिर और बावडि़यां बने थे। माना जाता है कि 13वीं-14वीं शताब्दी में आए शक्तिशाली भूकंप की वजह मंदिर बिखर गए। बटेश्वर मंदिर समूह: धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहर मध्य प्रदेश के मुरैना के निकट सुरम्य परिदृश्य में बसा बटेश्वर मंदिर समूह, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रमाण है। इस अद्भुत परिसर में लगभग 200 बलुआ पत्थर के मंदिर हैं, जिनमें से प्रत्येक आध्यात्मिक भक्ति और स्थापत्य कला की एक शाश्वत आभा बिखेरता है। ऐतिहासिक शहर ग्वालियर से मात्र 56 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, तथा ग्वालियर हवाई अड्डा निकटतम हवाई परिवहन केन्द्र के रूप में कार्य करता है, बटेश्वर मंदिर दूर-दूर से तीर्थयात्रियों, इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करते हैं। 25 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले बटेश्वर मंदिरों का निर्माण मूलतः 8वीं शताब्दी में हुआ था, जो गहन धार्मिक और कलात्मक उत्साह से भरा काल था। ये मंदिर हिंदू देवी-देवताओं की पूजा के लिए पवित्र तीर्थस्थल थे, जिनमें शिव, विष्णु और शक्ति को समर्पित मंदिर थे, जो हिंदू आस्था के विविध पहलुओं को दर्शाते थे। अपने प्रारंभिक वैभव के बावजूद, बटेश्वर मंदिरों का इतिहास उथल-पुथल भरा रहा, और 13वीं शताब्दी के बाद इनका पतन और अंततः विनाश हुआ। इनके पतन के पीछे के सटीक कारण अभी भी रहस्य में डूबे हुए हैं, जिससे इतिहासकार और पुरातत्वविद इनके पतन के कारणों पर अटकलें लगा रहे हैं। लचीलेपन और जीर्णोद्धार का एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 2005 में बटेश्वर मंदिरों के खंडहरों में बिखरे गिरे हुए पत्थरों से पुनर्निर्माण का एक विशाल प्रयास शुरू किया। स्थानीय समुदायों के सहयोग से संभव हुई इस महत्वाकांक्षी जीर्णोद्धार परियोजना को एक अप्रत्याशित स्रोत – पूर्व डाकू निर्भय सिंह गुज्जर और उसके गिरोह – से अमूल्य सहयोग प्राप्त हुआ। उनकी भागीदारी ने भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और इन प्राचीन स्मारकों के गौरव को पुनर्जीवित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। आज, बटेश्वर मंदिर समूह में आने वाले पर्यटकों का स्वागत बलुआ पत्थर की संरचनाओं के एक आकर्षक समूह द्वारा होता है, जो जटिल नक्काशी, विस्तृत मूर्तियों और स्थापत्य कला से सुसज्जित हैं और प्राचीन कारीगरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। मंदिर परिसर का शांत वातावरण आध्यात्मिक चिंतन और श्रद्धा के लिए एक शांत वातावरण प्रदान करता है, जो तीर्थयात्रियों को ईश्वर से जुड़ने के लिए एक पवित्र स्थान प्रदान करता है। बटेश्वर मंदिरों के भूलभुलैया जैसे रास्तों से गुजरते हुए, हर मंदिर बीते युगों की कहानियाँ सुनाता है, उस आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक जीवंतता की प्रतिध्वनि करता है जो कभी इन पवित्र परिसरों में फलती-फूलती थी। भगवान शिव को समर्पित दैदीप्यमान शिखरों से लेकर भगवान विष्णु और शक्ति के दिव्य स्वरूपों को समर्पित अलंकृत कक्षों तक, बटेश्वर मंदिर भारत की अटूट आस्था और कलात्मक प्रतिभा के चिरस्थायी प्रतीक हैं। संक्षेप में, बटेश्वर मंदिर समूह सांस्कृतिक विरासत के एक प्रकाश स्तंभ के रूप में कार्य करता है, जो आगंतुकों को समय और परंपरा के माध्यम से एक पारलौकिक यात्रा पर निकलने के लिए आमंत्रित करता है। अपने कालातीत आकर्षण और आध्यात्मिक प्रतिध्वनि के साथ, यह पवित्र अभयारण्य विस्मय और श्रद्धा को प्रेरित करता रहता है, अतीत और वर्तमान के बीच की खाई को पाटता है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सांस्कृतिक ताने-बाने को समृद्ध करता है।  

मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव-इंदौर: शहरी विकास के नए युग की ओर बढ़ते कदम

इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 जुलाई को इंदौर स्थित ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025 – सिटीज ऑफ टुमॉरो” का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में होटल, पर्यटन, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे। यह आयोजन प्रदेश में शहरी विकास के ब्लूप्रिंट और भविष्य की योजनाओं पर केंद्रित रहेगा। इस उच्च स्तरीय आयोजन में देश के 1500 से अधिक निवेशकों, उद्योगपतियों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों की सहभागिता होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर 1:30 बजे कॉन्क्लेव स्थल पर पहुँचकर एक्जीबिशन का अवलोकन करेंगे, उसके बाद विशिष्ट अतिथियों के साथ बैठक करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर 3 बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ कॉन्क्लेव का शुभारंभ करेंगे। कॉन्क्लेव में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और नगरीय प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। आयोजन में क्रेडाई, नगर निगम, आईडीए, स्मार्ट सिटी, हाउसिंग बोर्ड, मैट्रो, हुडको, एलआईसी सहित कई संस्थाओं की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। तकनीकी सत्रों का आयोजन कॉन्क्लेव में चार तकनीकी-सत्र आयोजित होंगे, जिनमें “शहरी उत्कृष्टता के लिए आधिनिक तकनीक, विकास के केंद्र के रूप में शहर, भविष्य के लिए सतत हरित शहरीकरण और भविष्य के शहरों की यातायात व्यववस्था” जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव में MP लॉकर, ET अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन समिट 2025 ब्रोशर का विमोचन, एमओयू साइनिंग और “सौगात” का उद्घाटन एवं अनावरण करेंगे। वह निवेशकों को प्रशस्ति-पत्र भी भेंट करेंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के शहरीकरण में निवेश अवसरों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जायेगा। शहरीकरण में निवेश के अवसर प्रदेश में मेट्रो, ई-बस, मल्टीमॉडल हब, अफोर्डेबल हाउसिंग, वॉटरफ्रंट डेवेलपमेंट, सीवेज नेटवर्क, ई-गवर्नेंस, स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, स्मार्ट रोड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की असीम संभावनाएँ हैं। प्रदेश में अफोर्डेबल हाउसिंग में 8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके हैं और 10 लाख से अधिक नए आवासों पर कार्य चल रहा है, जिनमें लगभग ₹50,000 करोड़ का निवेश संभावित है। रियल इस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन उपलब्ध हैं। पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शतप्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई हैं। नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाइज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेव्हलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है। इंदौर में आयोजित यह ग्रोथ कॉन्क्लेव न केवल प्रदेश की शहरी योजनाओं को रफ्तार देगा, बल्कि निवेशकों को एक मजबूत और विश्वसनीय मंच भी प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नेतृत्व में प्रदेश शहरी परिवर्तन की ओर तेज़ी से अग्रसर है।  

आजीविका के साथ आधुनिकता के संगम से समृद्ध बनेंगे मछुआरे : राज्यमंत्री पंवार

समर्पण, समानता और सेवा का सनातन प्रतीक हैं निषादराज सामाजिक समरसता के प्रतीक निषादराज के सम्मान में 12 जुलाई को उज्जैन में होगा महासम्मेलन आजीविका के साथ आधुनिकता के संगम से समृद्ध बनेंगे मछुआरे : राज्यमंत्री पंवार मुख्यमंत्री डॉ. यादव देंगे अनेक सौगातें भोपाल मत्स्य पालन एवं मछुआ कल्याण राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह पंवार ने निषाद समाज की समृद्धि के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हो रही सकारात्मक पहल के लिए आभार जताते हुए कहा कि निषादराज सम्मेलन से राज्य सरकार निषाद समाज की परंपराओं को सम्मान दे रही है। उनके जीवन और आजीविका को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने का कार्य भी कर रही है। यह एक ऐसा प्रयास है जिसमें इतिहास की प्रेरणा और भविष्य की योजना दोनों साथ चल रहे हैं। यह सम्मेलन मछुआ समाज के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि उज्जैन में होने जा रहे निषादराज सम्मेलन से निषाद समाज के गौरव को एक मंच मिलने जा रहा है। निषादराज सम्मेलन और उज्जैन की पवित्र नगरी में इसके आयोजन की पौराणिक संदर्भ में व्याख्या करते हुए राज्य मंत्री श्री पंवार ने कहा कि रामायण के लोकनायक श्रीराम जब 14 वर्षों के वनवास पर निकले, तब मार्ग में उन्हें जो प्रथम सच्चा मित्र मिला, वह था निषादराज गुह। न कोई राजसी वैभव, न कोई अधिकार फिर भी निषादराज ने जो आत्मीयता, श्रद्धा और समर्पण दिखाया, वह आज भी भारतीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राज्यमंत्री श्री पंवार ने कहा कि जब श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी गंगा के तट पर पहुंचे, तब निषादराज ने न केवल उन्हें विश्राम दिया, बल्कि अपनी संपूर्ण भक्ति से उनके चरण धोए। यह दृश्य केवल एक राजा की अतिथि सेवा नहीं था। यह सामाजिक समरसता का वह अद्वितीय पल था, जब एक वनवासी और एक राजकुमार के बीच भेदभाव की सारी रेखाएं मिट गईं। निषादराज और श्रीराम की मित्रता का यह आदर्श हमें आज भी यह सिखाता है कि भक्ति और मित्रता में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता, केवल भावना की विशालता ही सबसे बड़ा मूल्य है। निषादराज सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति इस आयोजन को विशेष बना रही है। इस मंच के माध्यम से न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह सम्मेलन सरकार और समाज के बीच सहभागिता का नया अध्याय रचेगा। मत्स्य संपदा में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश आज मत्स्य उत्पादन और मछुआ समाज के सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना जैसे नवाचारों ने हजारों मछुआरों के जीवन में नई आशा की किरण जगाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव देंगे विकास कार्यों की सौगात राज्य मंत्री श्री पंवार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 22.65 करोड़ रूपये की लागत के 453 स्मार्ट फिश पार्लर, 40 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे अत्याधुनिक अंडर वॉटर टनल सहित एक्वापार्क और 91.80 करोड़ रूपये की लागत से इंदिरा सागर जलाशय में 3060 केजेस का वर्चुअली भूमि-पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 430 मोटर साइकिल विद आइस बॉक्स के स्वीकृति पत्र एवं 100 यूनिट्स का वितरण, 396 केज के स्वीकृति पत्र का प्रदाय, फीडमील के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र का प्रदाय एवं उत्कृष्ट कार्य कर रहे मछुआरों एवं मत्स्य सहकारी समितियों को पुरस्कार वितरण करेंगे। इस अवसर पर महासंघ के मछुआरों को 9.63 करोड़ रूपये के डेफर्ड वेजेस का सिंगल क्लिक से अंतरण करने के साथ ही रॉयल्टी चेक प्रदाय करेंगे।  

रजिस्ट्री के लिए दफ्तर की दौड़ खत्म, अब 75 दस्तावेज ऑनलाइन होंगे रजिस्टर्ड

भोपाल  संपदा-2.0(Sampada 2.0) लागू होने के बाद इसमें लगातार नई सुविधाओं को जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में कुल 141 तरह के दस्तावेजों की रजिस्ट्री होती हैं। इनमें से 75 प्रकार के दस्तावेजों की रजिस्ट्री के लिए सब रजिस्ट्रार कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। ऐसा करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। लगभग 40% रजिस्ट्री इन्हीं दस्तावेजों की होती हैं। इनमें पॉवर ऑफ अटॉर्नी, इंडस्ट्री लोन, सर्टिफिकेट ऑफ सेल, बैंक द्वारा बेची जाने वाली प्रॉपर्टी, सभी तरह की लीज और कोऑनरशिप संबंधी दस्तावेज घर बैठे ऑनलाइन रजिस्टर करा सकते हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत उद्योगों संबंधी दस्तावेजों की रजिस्ट्री ऑनलाइन(Online Registry) कर दी गई है, लेकिन इस सुविधा का वे ही इस्तेमाल कर सकते हैं जिन्होंने आधार का उपयोग किया है। इसमें वीडियो ई-केवायसी का उपयोग किया जा रहा है। एआइ के जरिए चेहरा मैच कर पहचान स्थापित की जा रही है। घर बैठे ऑनलाइनरजिस्ट्री वाणिज्यिक कर विभाग ने 1 अप्रेल 2025 से सभी प्रकार की रजिस्ट्रियां संपदा-2.0 से शुरू कर दी हैं। 75 दस्तावेजों की रजिस्ट्री में ऐच्छिक कर दिया गया है कि पक्षकार सब रजिस्ट्रार ऑफिस आकर या नहीं आकर ऑनलाइनरजिस्ट्री करा सकते हैं। मॉडल दस्तावेज पंजीयन आइजी अमित तोमर के अनुसार वीडियो ई-केवायसी और एआइ से यह संभव हो सका है। दस्तावेज तैयार करने मॉडल दस्तावेज संपदा 2.0 की वेबसाइट पर डाले गए हैं। इनमें जानकारियां भरकर ऑनलाइन पंजीयन कराया जा सकता है। इसके अलावा सुविधाओं के टयूटोरियल भी डाल दिए गए हैं। इनके लिए सुविधा नहीं अनपढ़ और दृष्टिहीन लोगों को तकनीक के माध्यम से होने वाले फ्रॉड से बचाने के लिए ऑनलाइन सुविधा नहीं दी गई है। उन्हें ऑफिस में आकर ही रजिस्ट्री करानी होगी। इसके साथ अभी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री और वसीयतनामे जैसे संवेदनशील दस्तावेजों की रजिस्ट्री के लिए भी ऑफिस आने की अनिवार्यता है। अभीइनके लिए वीडियो ई-केवायसी की सुविधाशुरू नहीं की गई है। ऐसे समझें     नॉन इंटरेक्टिव ई-केवायसी में सबसे पहले डॉक्यूमेंट तैयार करना होगा। इसे ऑनलाइन तैयार कर सकते हैं या सर्विस प्रोवाइडर से।     डॉक्यूमेंट सबमिट करते समय वीडियो केवायसी का विकल्प मिलेगा। दो आइडी देनी होंगी।     रजिस्ट्री कराने वाले पक्षकार अपना वीडियो बनाएंगे। एआइ कुछ सवाल पूछेगा। पक्षकार के चेहरेका एनालिसिस करेगा।     सभी आइडी में जानकारियां एक जैसी नहीं होंगी या चेहरा मेल नहीं खाएगा तो एआइ रिजेक्ट कर देगा। मैच होने पर प्रक्रिया बढ़ेगी।     टोकन सब रजिस्ट्रार के पास पहुंच जाएगा और दस्तावेज अगले दिन रजिस्टर कर देगा। दस्तावेज ई-मेल, व्हाट्सएप पर पहुंच जाएगा।     इंटरैक्टिव वीडियो ई-केवायसी में सब रजिस्ट्रार वीसी से पक्षकारों से बात करेंगे। उसी दौरान एआइ चेहरे का मिलान कर लेगा। सब रजिस्ट्रार को तभी बताना होगा कि दस्तावेज रजिस्टर हुआ या नहीं।