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इंदौर नगर निगम का बड़ा फैसला: 7,500 सफाई कर्मचारियों को मिलेगी स्वास्थ्य सहायता

 इंदौर  आठवें वर्ष इंदौर को स्वच्छता में सिरमौर बनाने वाले सफाईकर्मियों को वेतनवृद्धि का उपहार मिला है। स्वच्छता के लिए पसीना बहाने वाले सफाई मित्रों को हर माह एक हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। स्वच्छता की ट्राफी लेकर दिल्ली से इंदौर पहुंचे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह घोषणा की। नगर निगम इंदौर से जुड़े सभी 7500 सफाई कर्मियों को पुरस्कार के रूप में यह अतिरिक्त राशि वेतन के साथ दी जाएगी। स्वास्थ्य मद में राशि प्रदान की जाएगी ताकि शहर को साफ रखने वाले कर्मचारी स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए इस राशि को खर्च कर सकें। आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर घोषित होने के बाद शुक्रवार को नगर निगम की टीम इंदौर लौटी तो राजवाड़ा से छप्पन दुकान तक जश्न मनता दिखा। स्वच्छतम शहर के नववर्ष प्रवेश को यादगार बनाते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सफाई मित्रों को स्वास्थ्य सुरक्षा के रूप में वेतनवृद्धि का उपहार देने की घोषणा कर दी। जीत का साफा बांधे महापौर व जनप्रतिनिधियों ने राजवाड़ा पर देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर महापौर ने ऐलान किया कि निगम के सफाई मित्रों को एक हजार रुपये प्रति माह स्वास्थ्य मद में दिए जाएंगे। स्वच्छता के लिए जोखिम, इसलिए ईनाम स्वच्छता के लिए जुटने वाले निगम के सफाई कर्मी सीवेज, ड्रेनेज से लेकर ठोस अपशिष्ट के बीच काम करते हैं। ऐसे में शहर को सफाई देने वाले इन कर्मचारियों को हमेशा संक्रमण और बीमारियों के जोखिम के बीच काम करना पड़ता है। इससे पहले इंदौर ने जब भी स्वच्छता के पुरस्कार को हासिल किया तो सफाईकर्मियों को बोनस देने जैसी घोषणाएं हुईं। अब जब इंदौर स्वच्छता सुपरलीग का चैंपियन बना तो पहली बार उनके स्वास्थ्य को केंद्र में रखते हुए प्रति माह वेतन के साथ स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अतिरिक्त राशि देने की पहल नगर निगम ने की है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जल्द से जल्द सफाई मित्रों को उनके वेतन के साथ स्वास्थ्य की देखभाल के लिए अतिरिक्त रूप से यह राशि मिलने लगेगी, घोषणा कर दी है तो इसमें किसी तरह का संशय नहीं है। अतिरिक्त भुगतान को लेकर नगर निगम और शासन स्तर पर औपचारिकताएं और आवश्यक प्रक्रिया जल्द ही कर ली जाएंगी। प्रतिस्पर्धा कठिन थी, इस बार थे 4,775 निकाय शुक्रवार सुबह दिल्ली से स्वच्छता का पुरस्कार लेकर लौटे महापौर के साथ निगमायुक्त शिवम वर्मा का विमानतल पर ही स्वागत हुआ। विमानतल के बाहर महिला सफाई मित्र ढोल की थाप पर झूमती नजर आईं। विजय रथ में सवार होकर महापौर ने स्वच्छता की सुनहरी ट्राफी थामी और जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों के साथ स्वच्छता का काफिला राजवाड़ा पर पहुंचा। यहां आयोजित समारोह की अग्रिम पंक्ति में सफाई मित्रों को बैठाया गया। महापौर भार्गव ने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के शुरुआती वर्ष में 77 नगरीय निकायों ने प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया था। अब स्पर्धा में शामिल निकायों की संख्या बढ़कर 4775 के पार पहुंच गई। ऐसे में प्रतिस्पर्धा बढ़ी और प्रतियोगिता कड़ी हो गई थी। इसमें न केवल इंदौर ने परचम लहराया बल्कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के साथ प्रदेश के आठ शहर सर्वेक्षण में उच्च स्थान पर आए। वाराणसी में सफाई की जिम्मेदारी उठाएगा इंदौर इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, विधायक रमेश मेंदोला, महेन्द्र हार्डिया, मधु वर्मा के साथ पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे, निगम सभापति मुन्नालाल यादव व महापौर परिषद के सदस्यों ने भी अहिल्या प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सांसद लालवानी ने इंदौर को बधाई दी तो भाजपा अध्यक्ष मिश्रा ने कहा कि इंदौर अपने शहर के साथ ही अब वाराणसी जैसी पवित्र नगरी की भी सफाई की जिम्मेदारी उठाएगा। यह हमारे लिए गौरव की बात है। आयुक्त शिवम वर्मा ने कहा कि निगम के सफाई मित्रों व स्वच्छता टीम के प्रयासों से इंदौर ने सफलता हासिल की है। देर शाम स्वच्छ शहर का उल्लास छप्पन दुकान पर भी नजर आया। महापौर व अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में छप्पन पर जमकर आतिशबाजी की गई। स्वच्छता मुहिम में आगे बढ़कर डिस्पोजेबल फ्री बनने वाले छप्पन दुकान के व्यापारी-दुकानदारों ने भी स्वच्छता के जश्न में मिठाई बांटकर भागीदारी की।

टेक्सटाइल निवेश पर बार्सिलोना में सीएम यादव की बड़ी पहल, निवेशकों को उपलब्ध करायेंगे हर सुविधा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बार्सिलोना में टेक्सटाइल मशीनरी कंपनियों के पदाधिकारियों के साथ की राउंड टेबल बैठक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बार्सिलोना में टेक्सटाइल कंपनियों संग की राउंड टेबल मीटिंग टेक्सटाइल निवेश पर बार्सिलोना में सीएम यादव की बड़ी पहल, निवेशकों को उपलब्ध करायेंगे हर सुविधा टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश अनुकूल माहौल और नीतियों की दी जानकारी निवेशकों को उपलब्ध करायेंगे हर सुविधा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पेन यात्रा के तीसरे दिन बार्सिलोना में विश्व की अग्रणी टेक्सटाइल मशीनरी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय राउंड टेबल बैठक की। बैठक का आयोजन मध्यप्रदेश को टेक्सटाइल मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने और यूरोपीय टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश के टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश के लिए अनुकूल माहौल और निवेशक अनुकूल नीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल निवेश आकर्षित करने में भारत में अग्रणी है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाएं, जैसे विशेष टेक्सटाइल पार्क, SEZ और निवेशकों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने निवेशकों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को समझने पर जोर दिया जिससे उनकी जरूरतों के अनुरूप नीतियां और सुविधाएं प्रदान की जा सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “मध्यप्रदेश टेक्सटाइल मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए भी आदर्श है। राज्य सरकार वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी कर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सस्टेनेबल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। मेक इन इंडिया और मेक इन एमपी के तहत निवेश का आहवान बैठक में यूरोपीय टेक्सटाइल मशीनरी कंपनियों को मध्यप्रदेश में अपनी उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित कर आमंत्रित किया गया। मध्यप्रदेश में टेक्सटाइल मशीनरी मैन्युफैक्चरिंग हब की स्थापना, भारतीय और यूरोपीय कंपनियों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, और नॉलेज एक्सचेंज की संभावनाओं पर चर्चा की गई। यह पहल मेक इन इंडिया और मेक इन एमपी के तहत विश्व स्तरीय टेक्सटाइल मशीनरी के उत्पादन को बढ़ावा देने और विशेष टेक्सटाइल पार्क व SEZ की स्थापना पर केंद्रित थी। वैश्विक टेक्सटाइल कंपनियों की भागीदारी बैठक में वैश्विक स्तर की टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी कंपनियों आर्थर इमैनुएल, यूएस की अग्रणी टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी स्टार्टअप लॉन्च के फाउंडर, एनरिक सिला, जीनोलॉजिया के सीईओ और संस्थापक, जे जामिन्टरनेशनल, इटली की प्रीमियम वीविंग और स्पिनिंग मशीनरी निर्माता कंपनी,ग्राज़ियानो मैकटेक, इटली की फाइबर प्रोसेसिंग और यार्न प्रोडक्शन में विशेषज्ञता वाली कंपनी,जोसे मारिया ब्रोंको, इटली के टेक्सटाइल इंजीनियरिंग विशेषज्ञ, शामिल थे। मध्यप्रदेश से प्रमुख टेक्सटाइल कंपनियों बेस्ट कॉर्प, प्रतिभा सिंटेक्स, श्रीजी पॉलिमर्स, और डीबी ग्रुप ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।  

वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता डॉ. यादव ने, वन-टू-वन संवाद रहा अहम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वन-टू-वन बैठकों से खुले वैश्विक निवेश के नए द्वार सीएम यादव की सीधी बातचीत ने खोले विदेशी निवेश के नए रास्ते वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता डॉ. यादव ने, वन-टू-वन संवाद रहा अहम टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल से लेकर औद्योगिक ट्रांसफॉर्मेशन पर हुई निवेश वार्ता विश्वस्तरीय कंपनियों ने जताई मध्यप्रदेश में निवेश की गहरी रुचि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बार्सिलोना प्रवास के तीसरे दिन विश्व की अग्रणी कंपनियों के शीर्ष पदाधिकारियों से वन-टू-वन मुलाकात कर मध्यप्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और रोजगार के नए अवसरों को लेकर विस्तृत चर्चा की। सेनेटरीवेयर, वस्त्र, स्वास्थ्य सेवाएं, डाटा सेंटर, एनीमेशन, ब्रांडिंग और मीडिया नीति जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी वैश्विक कंपनियों ने मध्यप्रदेश में निवेशकों की संभावनाओं को लेकर गंभीर रुचि प्रदर्शित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबसे पहले स्पेन की अग्रणी सेनेटरीवेयर कंपनी रॉका ग्रुप (Roca Group) के कॉर्पोरेट संचालन निदेशक पाउ अबेलो से भेंट की। इस दौरान देवास स्थित कंपनी की इकाई ‘रॉका बाथरूम प्रॉडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ (Roca Bathroom Products Pvt. Ltd.) द्वारा किए गए ₹164.03 करोड़ के निवेश और 445 लोगों को दिए गए रोजगार पर संतोष व्यक्त किया गया। कंपनी ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाई के विस्तार और विविधीकरण की योजना भी साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वस्त्र क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हेलोटेक्स ग्रुप (Helotex Group) के मालिक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोर्डी बोनारो ट्रियोलार्ट से भेंट हुई। कंपनी पहले से ही इंदौर स्थित ‘प्रतिभा सिंटेक्स लिमिटेड’ (Pratibha Syntex Ltd.) के साथ साझेदारी में कार्यरत है। बैठक में वस्त्र उद्योग के विस्तार और निवेश प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने पर चर्चा हुई। अमेक (Association Multisectorial de AMEC) के निदेशक एलेजांद्रो गैलेगो अल्काइडे से मुलाकात में राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग, मीडिया एनालिटिक्स, एआई आधारित संचार रणनीतियों और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मध्यप्रदेश की पहचान को सशक्त करने की दिशा में सहयोग की सहमति बनी। एसएसएल-कोटिंग्स (पावर सॉइल) के प्रतिनिधि जीफ विशेप के साथ हुई बैठक में टिकाऊ सड़क निर्माण तकनीक “टेरा-3000” के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई, जो विशेष रूप से ग्रामीण सड़कों, नींव और सख्त मिट्टी में उपयोगी है। इस समाधान के माध्यम से पारंपरिक निर्माण सामग्रियों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होता है। सोगो समूह के सतीश रायसिंघानी के साथ बातचीत में भारत और विशेष रूप से मध्यप्रदेश में एसओजीओ ब्रांड के उत्पादों के विस्तार की संभावनाएं तलाशी गईं। एसओजीओ घरेलू उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स का एक मजबूत यूरोपीय ब्रांड है, जो भारतीय उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए अपने उत्पादों की पहुँच बढ़ाना चाहता है। सर्विटाइज के सीईओ मार्क विंटर के साथ बैठक में औद्योगिक परामर्श, डिजिटल परिवर्तन और ग्राहक अनुभव आधारित समाधानों पर चर्चा हुई। यह कंपनी सेवा-आधारित व्यापार मॉडल के जरिये उद्यमों की दक्षता बढ़ाने में विशेषज्ञता रखती है और मध्यप्रदेश में MSME सेक्टर को स्मार्ट मॉडल से जोड़ने में रुचि रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की नॉर्सेक ग्लोबल के निवेशकों के साथ भी सार्थक चर्चा हुई। स्पोर्ट्सफन टीवी एस.एल. के सह-संस्थापक सिद्धार्थ तिवारी से हुई बैठक में मध्यप्रदेश में फुटबॉल खेल के विकास हेतु प्रतिभा खोज, प्रशिक्षण शिविरों और अकादमियों की स्थापना के माध्यम से सहयोग की संभावनाएँ तलाशी गईं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी झारखंड सरकार के साथ पहले से इस दिशा में कार्यरत है और अब मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की पहल को लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों के समक्ष राज्य की निवेश-अनुकूल नीतियों का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में उद्योगों के लिए आवश्यक भूमि, जल, ऊर्जा और मजबूत आधारभूत संरचना सहज रूप से उपलब्ध है। उन्होंने राज्य की उत्कृष्ट लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी, दक्ष मानव संसाधन, सुगम और पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ में हासिल उल्लेखनीय उपलब्धियों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए एक सुरक्षित, स्थिर और समर्थ राज्य है, जो वैश्विक कंपनियों के लिए दीर्घकालिक सहयोग के द्वार खोलता है।  

जशपुर में 74,000 परिवारों को मिला पक्का घर, PM आवास योजना से आई खुशहाली

जशपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं का लाभ अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना से दूरस्थ अंचलों के लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है और हितग्राही अपने खुद के मकान में सुकून से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जिला पंचायत विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर जिले में 74 हजार 346 मकान पूर्ण हो चुके हैं। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम खटंगा के एक साधारण परिवार की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहां शासन की तीन योजनाओं ने एक साथ उनकी ज़िंदगी को नई दिशा दी है।  74 हजार से अधिक आवास बन कर तैयार सुरेशराम की पत्नी सुमित्रा बाई बताती हैं पहले हम कच्चे घर में रहते थे। बरसात हो या गर्मी, हमेशा डर बना रहता था। पानी टपकता था, दीवारें गिरने का डर और रात-बिरात सांप, बिच्छू का डर अलग से। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर अब हमारे लिए एक नई दुनिया जैसा है। अब न डर है, न परेशानी3 घर भी साफ-सुथरा है, और बच्चों को पढ़ने-लिखने का भी अच्छा माहौल मिल गया है।  उनकी बेटी कुमारी संगीता बताती है जब कच्चा घर था, तब हम पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते थे। बरसात के दिन बहुत दिक्कत होती थी। अब जब पक्का घर मिला है, तो मन लगता है। हम अब बहुत खुश हैं। उन्होंने आगे बताया कि मुझे मुख्यमंत्री महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 मिलते हैं। उसी से हम तेल, नमक, साबुन जैसे जरूरी सामान खरीद लेते हैं। कभी बेटी को स्कूल के लिए कॉपी-किताब भी लेना हो, तो उसी से काम चल जाता है।

बिहार के बाद अब मध्य प्रदेश में मखाना क्रांति, किसानों को मिलेगा नया विकल्प

नर्मदापुरम  गेहूं, चना, धान के साथ नर्मदापुरम जिले में मखाने की खेती (makhana cultivation) करने का प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग सब्सिडी देकर किसानों को इस खेती के लाभ बता रहा है। अभी तक 150 किसानों ने अपनी सहमति दे दी हैं। उन्हें मखाने उत्पादन का दरभंगा में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उद्यानिकी फसलों में विस्तार करते हुए मखाने को भी जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में जिलेभर में लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने लगाए जाएंगे। मखाने की खेती पहली बार की जाएगी। इसे लेकर किसान असमंजस में हैं। इसलिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारी उन्हें मखाने के उत्पादन से लेकर लाभ तक की जानकारी दे रहे हैं। किसानों की बढ़ेगी आय बाजार में 2 हजार रुपए क्विंटल बिकने वाले मखाने की खेती होने वाली अतिरिक्त आय के बारे में बताया जा रहा है। किसान को बताया जा रहा है कि इसमें खेत का उपयोग नहीं करना है। किसान अपने तालाब में सिंघड़ा की खेती की तरह ही मखाने की फसल लगा सकता है। अभी तक 150 किसानों को चिह्नित किया गया है। इन किसानों को दरभंगा रिसर्च सेंटर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए जल्दी ही एक दल रवाना होगा।  किसानों को शासन करेगा मदद मखाना की खेती (makhana cultivation) के लिए शासन किसानों को सब्सिडी देगा, इसमें कितनी राशि होगी। इसका निर्धारण होना अभी की स्थिति में बाकी है। इसके लिए शासन स्तर से योजना की नीति आने वाली है। इसके हिसाब से जिले में मखाना खेती की योजना संचालित होगी। उद्यानिकी अधिकारी भी जाएंगे दरभंगा किसानों की तरह उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को भी मखाने लगाने की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए अधिकारियों की टीम दरभंगा जाएगी। यह टीम वहां मखाने की खेती में तकनीक का उपयोग कैसे किया जाता है, इसका प्रशिक्षण लेगी। प्रयोग किया जा रहा है जिले में पहली बार मखाने की खेती करने का प्रयोग किया जा रहा है। इसके लिए अभी तक 150 किसान ने सहमति दी है। जल्द ही इन्हें दरभंगा में खेती करने को प्रशिक्षण दिलाएंगे। अधिकारियों को भी प्रशिक्षण मिलेगा।- रीता उईके, उप संचालक उद्यानिकी नर्मदापुरम

शिवभक्ति का नया अध्याय: 23 जुलाई को पार्थिव शिवलिंग निर्माण का विश्व रिकॉर्ड, शिवरात्रि पर होगा रुद्राभिषेक

सीहोर  सावन मास में आगामी 23 जुलाई को पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि की शाम 7 से 8 बजे  हर घर में पूजा-अर्चना की गूंज सुनाई देगी। देश-विदेश में बसे श्रद्धालु पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करेंगे। अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में आयोजित शिव महापुराण के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सावन मास की इस पावन शिवरात्रि पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर सामूहिक रूप से उनका अभिषेक किया जाए। मान्यता है कि सामूहिक पूजा से आराध्य देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पिछले छह वर्षों से पंडित मिश्रा के आह्वान पर देश-विदेश में करोड़ों शिव भक्तों द्वारा पार्थिव शिवलिंग निर्माण कर पूजन किया जा रहा है। इस बार श्रद्धालुओं में पहले से दोगुना उत्साह देखा जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ लेकर चितावलिया हेमा स्थित निर्माणाधीन मुरली मनोहर और कुबेरेश्वर महादेव मंदिर पहुंच रहे हैं। वहां नियमित रूप से नि:शुल्क प्रसादी, पेयजल, नाश्ता और फलाहारी की व्यवस्था की गई है। 23 जुलाई को शिवभक्तों का दिव्य अनुष्ठान इस वर्ष का आयोजन 23 जुलाई बुधवार को शाम 7 से रात 8 बजे तक किया जाएगा। पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान पर ‘हर-हर महादेव, घर-घर महादेव’ के संकल्प के साथ देश-विदेश में बसे भक्त अपने-अपने घरों पर पार्थिव शिवलिंग बनाएंगे और विधिपूर्वक जलाभिषेक करेंगे। यह आयोजन यूट्यूब और फेसबुक पर लाइव प्रसारित किया जाएगा। पंडित मिश्रा ने अपने वीडियो संदेश में भक्तों से अपील की है कि वे पूजन के लिए ब्राह्मणों और संतों को आमंत्रित करें। यदि यह संभव न हो, तो श्रद्धालु टीवी या ऑनलाइन माध्यम से पूजा-अर्चना में भाग ले सकते हैं। मासिक शिवरात्रि का महत्व समिति के मनोज दीक्षित ‘मामा’ ने बताया कि महाशिवरात्रि शिवभक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। यह वह क्षण था जब ब्रह्मा और विष्णु ने पहली बार शिवलिंग का पूजन किया। प्रत्येक वर्ष एक महाशिवरात्रि और 11 मासिक शिवरात्रियां होती हैं। मासिक शिवरात्रि हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। देवी लक्ष्मी, सरस्वती, इंद्राणी, गायत्री, सावित्री, पार्वती और रति ने इस व्रत को कर शिव कृपा से अनंत फल प्राप्त किए थे। 

उपभोक्ताओं को पहले करना होगा भुगतान, अगस्त से MP में प्रीपेड बिजली प्रणाली शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई शहरों में स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई। कई स्थानीय रहवासियों ने जिला कलेक्ट्रेट में इसकी शिकायत की थी।  आने वाली 1 अगस्त 2025 से  राज्य में प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू हो जाएगी। विद्युत वितरण कंपनी ने इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है। जिसे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लागू किया जाएगा।  बिजली कंपनी के अनुसार, पहले चरण में सरकारी दफ्तर, उसके बाद इसे आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली प्रणाली मोड पर स्थानांतरित किया जाएगा। बता दें सरकारी और आम उपभोक्ताओं को दी जाने वाली ये व्यवस्था अलग-अलग होंगी। मध्य प्रदेश विद्युत वितरण क्षेत्र कंपनी  ने रिपोर्ट में बताया कि अगस्त माह से क्षेत्र में आने वाले मालवा निमाड़ के 10 हजार सरकारी ऑफिसों को प्रीपेड बिजली आवंटन किया जाएगा।  पहले रिचार्ज, फिर उपयोग आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली व्यवस्था का ढांचा सरकारी कार्यालयों से अलग होगा। उन्हें हर दो महीने में बिजली बिल जमा नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय, मोबाइल या वाई-फाई की तरह पहले रिचार्ज करना अनिवार्य होगा, तभी बिजली का उपयोग संभव होगा। उपभोग के अनुसार उनका बैलेंस धीरे-धीरे घटता जाएगा। उपभोक्ताओं को अपना बैलेंस देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकारी विभागों के लिए दो महीने का एडवांस पेमेंट अनिवार्य नई व्यवस्था के तहत सरकारी बिजली कनेक्शनों के लिए संबंधित अधिकारी की स्वीकृति के बाद विभागीय कोषाधिकारी को दो माह का अग्रिम भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके लिए संबंधित जोन, वितरण केंद्र प्रभारी और कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से विभागीय कोषाधिकारी को आवश्यक जानकारी भेजेंगे। इसके पश्चात कोषाधिकारी द्वारा निर्धारित दो माह की अग्रिम राशि बिजली कंपनी के खाते में स्थानांतरित की जाएगी। इन कनेक्शनों के माध्यम से बिजली कंपनी को शुरुआत में दो माह का अग्रिम भुगतान प्राप्त होगा। इसके बाद प्रत्येक माह वास्तविक खपत के अनुसार बिल राशि वसूली जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रीपेड प्रणाली में उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की विशेष छूट भी प्रदान की जाती है। बिजली के मीटर में नहीं होगा कोई बदलाव प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू करने के लिए मीटर को बदला नहीं जाएगा, बल्कि कंपनी द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में ही यह सुविधा सक्रिय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर अपनाने पर प्रति यूनिट 25 पैसे की टैरिफ छूट मिलेगी। इसके साथ ही, सरकार पूर्ववत सब्सिडी भी जारी रखेगी। वर्तमान में उपभोक्ताओं को वार्षिक खपत के आधार पर औसतन 45 दिनों के बिल के बराबर राशि सुरक्षा निधि के रूप में जमा करनी होती है। अस्पतालों और थानों में बाद में लागू होगी नई बिजली व्यवस्था ऊर्जा विभाग के निर्देशानुसार, बिजली कंपनियां फिलहाल अस्पताल, थाने और जल प्रदाय इकाइयों जैसे शासन के आवश्यक विभागों को प्रीपेड बिजली प्रणाली में शामिल नहीं कर रही हैं। जानकारी के अनुसार, इन विभागों को व्यवस्था लागू होने के एक या दो महीने बाद प्रीपेड मोड में जोड़ा जाएगा। इसके पश्चात अन्य शासकीय कनेक्शनों को चरणबद्ध रूप से जोड़ा जाएगा। वहीं, निजी उपभोक्ताओं को इस प्रणाली में शामिल करने पर निर्णय बाद में शासन द्वारा लिया जाएगा। रिचार्ज की राशि पर मंथन जारी हालांकि, विद्युत वितरण कंपनियों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उपभोक्ताओं को कितनी राशि का रिचार्ज कराना होगा और उस पर कितनी यूनिट बिजली प्रदान की जाएगी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों का बिजली बिल अक्सर समय पर नहीं भरता है। इस प्रणाली को कुछ चुनिंदा सरकारी ऑफिसों में लागू किया जाएगा। इनमें इंदौर के 1550 सरकारी कार्यालय शामिल है। जिसे दिसंबर तक इस इलाके के सभी 50 हजार सरकारी कार्यालय को इसमें शिफ्ट करने का प्लान है।  नई प्रणाली के अंतर्गत, सरकारी विद्युत कनेक्शनों के लिए इससे संबंधित अधिकारी की सहमति से, विभाग के कोषाधिकारी को 2 महीने का एडवांस बिल जमा करना होगा। संबंधित जोन, वितरण केन्द्र प्रभारी, कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से संबंधित कार्यालयों के कोषाधिकारी को इसकी सूचना देंगे। बिजली कंपनी को फिलहाल 2 महीने की एडवांस राशि मिल सकेगी। आगे प्रति महीने में खर्च हुए बिजली खपत के आधार पर बिल का भुगतान देना होगा। स्मार्ट प्रीपेड मीटर से मिलेगी बिजली नई प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए बिजली मिलेगी, जिसमें उपभोग के अनुसार बैलेंस कम होगा और रिचार्ज के बिना बिजली आपूर्ति नहीं होगी। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत और बैलेंस की जानकारी आसानी से मोबाइल या पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। बिजली वितरण कंपनियों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकारी और आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड व्यवस्था की प्रक्रिया और नियम अलग-अलग निर्धारित किए जा रहे हैं, जिससे दोनों की आवश्यकताओं के अनुसार सिस्टम को लागू किया जा सके। पहले सरकारी कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अगस्त 2025 से कंपनी के अंतर्गत आने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लगभग 10,000 सरकारी कार्यालयों को प्रीपेड मीटर सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिनमें अकेले इंदौर के 1,550 सरकारी कार्यालय शामिल हैं। योजना के तहत दिसंबर 2025 तक इस क्षेत्र के सभी 50,000 सरकारी दफ्तरों को पूरी तरह से प्रीपेड व्यवस्था में शामिल कर लिया जाएगा। सरकार ने तय किया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रदेश के हर सरकारी कार्यालय में यह नई बिजली व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जाए। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक खर्चों पर नियंत्रण रखेगा, बल्कि ऊर्जा दक्षता को भी बढ़ावा देगा। आम उपभोक्ताओं को भी किया जाएगा शिफ्ट इस प्रक्रिया के पहले चरण के बाद दिसंबर 2025 के बाद दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड बिजली सिस्टम पर शिफ्ट किया जाएगा। इस चरण में सबसे पहले वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों और अधिक लोड वाले कनेक्शनों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद घरेलू उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इस आधुनिक प्रणाली में शामिल किया जाएगा। भरना होगा 2 महीने का अग्रिम बिल प्रीपेड बिजली व्यवस्था के तहत सरकारी दफ्तरों को अपनी बिजली खपत का दो महीने का बिल एडवांस में जमा करना होगा। इसके लिए संबंधित अधिकारी की अनुमति से विभाग के कोषाधिकारी (अकाउंट ऑफिसर) यह भुगतान बिजली कंपनी को करेंगे। बिजली वितरण जोन और केंद्र के अधिकारी … Read more

उपभोक्ताओं को पहले करना होगा भुगतान, अगस्त से MP में प्रीपेड बिजली प्रणाली शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई शहरों में स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई। कई स्थानीय रहवासियों ने जिला कलेक्ट्रेट में इसकी शिकायत की थी।  आने वाली 1 अगस्त 2025 से  राज्य में प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू हो जाएगी। विद्युत वितरण कंपनी ने इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है। जिसे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लागू किया जाएगा।  बिजली कंपनी के अनुसार, पहले चरण में सरकारी दफ्तर, उसके बाद इसे आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली प्रणाली मोड पर स्थानांतरित किया जाएगा। बता दें सरकारी और आम उपभोक्ताओं को दी जाने वाली ये व्यवस्था अलग-अलग होंगी। मध्य प्रदेश विद्युत वितरण क्षेत्र कंपनी  ने रिपोर्ट में बताया कि अगस्त माह से क्षेत्र में आने वाले मालवा निमाड़ के 10 हजार सरकारी ऑफिसों को प्रीपेड बिजली आवंटन किया जाएगा।  पहले रिचार्ज, फिर उपयोग आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली व्यवस्था का ढांचा सरकारी कार्यालयों से अलग होगा। उन्हें हर दो महीने में बिजली बिल जमा नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय, मोबाइल या वाई-फाई की तरह पहले रिचार्ज करना अनिवार्य होगा, तभी बिजली का उपयोग संभव होगा। उपभोग के अनुसार उनका बैलेंस धीरे-धीरे घटता जाएगा। उपभोक्ताओं को अपना बैलेंस देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकारी विभागों के लिए दो महीने का एडवांस पेमेंट अनिवार्य नई व्यवस्था के तहत सरकारी बिजली कनेक्शनों के लिए संबंधित अधिकारी की स्वीकृति के बाद विभागीय कोषाधिकारी को दो माह का अग्रिम भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके लिए संबंधित जोन, वितरण केंद्र प्रभारी और कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से विभागीय कोषाधिकारी को आवश्यक जानकारी भेजेंगे। इसके पश्चात कोषाधिकारी द्वारा निर्धारित दो माह की अग्रिम राशि बिजली कंपनी के खाते में स्थानांतरित की जाएगी। इन कनेक्शनों के माध्यम से बिजली कंपनी को शुरुआत में दो माह का अग्रिम भुगतान प्राप्त होगा। इसके बाद प्रत्येक माह वास्तविक खपत के अनुसार बिल राशि वसूली जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रीपेड प्रणाली में उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की विशेष छूट भी प्रदान की जाती है। बिजली के मीटर में नहीं होगा कोई बदलाव प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू करने के लिए मीटर को बदला नहीं जाएगा, बल्कि कंपनी द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में ही यह सुविधा सक्रिय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर अपनाने पर प्रति यूनिट 25 पैसे की टैरिफ छूट मिलेगी। इसके साथ ही, सरकार पूर्ववत सब्सिडी भी जारी रखेगी। वर्तमान में उपभोक्ताओं को वार्षिक खपत के आधार पर औसतन 45 दिनों के बिल के बराबर राशि सुरक्षा निधि के रूप में जमा करनी होती है। अस्पतालों और थानों में बाद में लागू होगी नई बिजली व्यवस्था ऊर्जा विभाग के निर्देशानुसार, बिजली कंपनियां फिलहाल अस्पताल, थाने और जल प्रदाय इकाइयों जैसे शासन के आवश्यक विभागों को प्रीपेड बिजली प्रणाली में शामिल नहीं कर रही हैं। जानकारी के अनुसार, इन विभागों को व्यवस्था लागू होने के एक या दो महीने बाद प्रीपेड मोड में जोड़ा जाएगा। इसके पश्चात अन्य शासकीय कनेक्शनों को चरणबद्ध रूप से जोड़ा जाएगा। वहीं, निजी उपभोक्ताओं को इस प्रणाली में शामिल करने पर निर्णय बाद में शासन द्वारा लिया जाएगा। रिचार्ज की राशि पर मंथन जारी हालांकि, विद्युत वितरण कंपनियों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उपभोक्ताओं को कितनी राशि का रिचार्ज कराना होगा और उस पर कितनी यूनिट बिजली प्रदान की जाएगी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों का बिजली बिल अक्सर समय पर नहीं भरता है। इस प्रणाली को कुछ चुनिंदा सरकारी ऑफिसों में लागू किया जाएगा। इनमें इंदौर के 1550 सरकारी कार्यालय शामिल है। जिसे दिसंबर तक इस इलाके के सभी 50 हजार सरकारी कार्यालय को इसमें शिफ्ट करने का प्लान है।  नई प्रणाली के अंतर्गत, सरकारी विद्युत कनेक्शनों के लिए इससे संबंधित अधिकारी की सहमति से, विभाग के कोषाधिकारी को 2 महीने का एडवांस बिल जमा करना होगा। संबंधित जोन, वितरण केन्द्र प्रभारी, कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से संबंधित कार्यालयों के कोषाधिकारी को इसकी सूचना देंगे। बिजली कंपनी को फिलहाल 2 महीने की एडवांस राशि मिल सकेगी। आगे प्रति महीने में खर्च हुए बिजली खपत के आधार पर बिल का भुगतान देना होगा। स्मार्ट प्रीपेड मीटर से मिलेगी बिजली नई प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए बिजली मिलेगी, जिसमें उपभोग के अनुसार बैलेंस कम होगा और रिचार्ज के बिना बिजली आपूर्ति नहीं होगी। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत और बैलेंस की जानकारी आसानी से मोबाइल या पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। बिजली वितरण कंपनियों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकारी और आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड व्यवस्था की प्रक्रिया और नियम अलग-अलग निर्धारित किए जा रहे हैं, जिससे दोनों की आवश्यकताओं के अनुसार सिस्टम को लागू किया जा सके। पहले सरकारी कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अगस्त 2025 से कंपनी के अंतर्गत आने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लगभग 10,000 सरकारी कार्यालयों को प्रीपेड मीटर सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिनमें अकेले इंदौर के 1,550 सरकारी कार्यालय शामिल हैं। योजना के तहत दिसंबर 2025 तक इस क्षेत्र के सभी 50,000 सरकारी दफ्तरों को पूरी तरह से प्रीपेड व्यवस्था में शामिल कर लिया जाएगा। सरकार ने तय किया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रदेश के हर सरकारी कार्यालय में यह नई बिजली व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जाए। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक खर्चों पर नियंत्रण रखेगा, बल्कि ऊर्जा दक्षता को भी बढ़ावा देगा। आम उपभोक्ताओं को भी किया जाएगा शिफ्ट इस प्रक्रिया के पहले चरण के बाद दिसंबर 2025 के बाद दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड बिजली सिस्टम पर शिफ्ट किया जाएगा। इस चरण में सबसे पहले वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों और अधिक लोड वाले कनेक्शनों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद घरेलू उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इस आधुनिक प्रणाली में शामिल किया जाएगा। भरना होगा 2 महीने का अग्रिम बिल प्रीपेड बिजली व्यवस्था के तहत सरकारी दफ्तरों को अपनी बिजली खपत का दो महीने का बिल एडवांस में जमा करना होगा। इसके लिए संबंधित अधिकारी की अनुमति से विभाग के कोषाधिकारी (अकाउंट ऑफिसर) यह भुगतान बिजली कंपनी को करेंगे। बिजली वितरण जोन और केंद्र के अधिकारी … Read more

रालामंडल को मिला ‘ऑक्सीजन बॉक्स’ का दर्जा, एक किलोमीटर तक नहीं होगा कोई निर्माण

इंदौर  संभागायुक्त दीपक सिंह की अध्यक्षता में रालामंडल अभ्यारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आवासीय भूमि उपयोग हेतु तैयार किए गए नियोजन मापदंडों पर विचार करने के लिए ईको सेंसिटिव जोन समिति की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के सभाकक्ष में संपन्न हुई। अधिकारियों की मौजूदगी में हुई अहम बैठक बैठक में मुख्य वन संरक्षक पी.एन. मिश्रा, अपर कलेक्टर गौरव बैनल, पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता संजय कुमार, नगर एवं ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक सुभाषीश बेनर्जी, संयुक्त कलेक्टर सुप्रिया पटेल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एस.एन. द्विवेदी, वन विभाग के एसडीओ योहन कटारा और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। 'ग्रीन कॉरिडोर' के विकास पर जोर संभागायुक्त दीपक सिंह ने रालामंडल अभ्यारण्य के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह क्षेत्र इंदौर जैसे महानगर के लिए 'ऑक्सीजन बॉक्स' के रूप में कार्य कर सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि रालामंडल की पहाड़ियों को जोड़कर ग्रीन कॉरिडोर का विकास किया जाए ताकि वन्यजीवों का आवास संरक्षित रहे और वे स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकें। संयुक्त फील्ड विजिट के निर्देश संभागायुक्त दीपक सिंह ने नगर एवं ग्राम निवेश, आईडीए, नगर निगम, वन विभाग, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे संयुक्त रूप से फील्ड विजिट कर प्रस्तावित ग्रीन कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईको सेंसिटिव जोन से एक किलोमीटर के दायरे में सघन नगरीय विकास नहीं होना चाहिए। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भूमि उपयोग मापदंड बैठक में यह भी बताया गया कि ईको सेंसिटिव जोन के तहत नियोजन मापदंडों में प्रत्येक भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। निर्माण क्षेत्र अधिकतम 15% तक सीमित रहेगा, जबकि भवन की ऊंचाई 12.5 मीटर से अधिक नहीं होगी। साथ ही कम से कम 10% क्षेत्र खुला रखना अनिवार्य होगा। इन नियमों का उद्देश्य क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना और विकास को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- बार्सिलोना स्थित मर्काबार्ना का समग्र मॉडल मध्यप्रदेश के लिए उपयोगी हो सकता है

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बार्सिलोना स्थित मर्काबार्ना का समग्र मॉडल मध्यप्रदेश के लिए उपयोगी हो सकता है। मध्यप्रदेश में बढ़ते कृषि उत्पादन को देखते हुए बेहतर ‘पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट’ और निर्यात प्रणाली की आवश्यकता है।स्पेन प्रवास के तीसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मर्काबार्ना के भ्रमण के दौरान यह बात कही। यह संस्थान 250 एकड़ में फैला हुआ यूरोप का प्रमुख फूड लॉजिस्टिक्स हब है, जहाँ उत्पादन, भंडारण, प्रोसेसिंग और वितरण की व्यवस्थाएं एकीकृत रूप से संचालित होती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश को सिर्फ उत्पादन की नहीं, बल्कि कटाई के बाद मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, भंडारण, और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच की भी चुनौती है। इस दिशा में मर्काबार्ना का अनुभव एक मॉडल के रूप में सामने आता है, जिससे प्रेरणा लेकर प्रदेश के खाद्य उत्पादकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है। मर्काबार्ना के सीईओ ने मध्यप्रदेश के प्रति रूचि जताई। मर्काबार्ना के सीईओ पाब्लो विल्लानोवा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिवादन करते हुए कहा कि भारत और स्पेन के बीच कृषि लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग और मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग की संभावनाएं हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश के प्रति विशेष रुचि और भविष्य में द्विपक्षीय ज्ञान साझेदारी पर सहमति जताई। फार्म-टू-फोर्क जैसे मॉडल होंगे लागू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘फार्म-टू-फोर्क’ मॉडल, कोल्ड चेन प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण, ट्रेसेबिलिटी और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मर्काबार्ना द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रक्रियाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे मेगा फूड पार्क, एग्रीबिजनेस क्लस्टर और ग्रामीण उद्योग केंद्रों में इन नवाचारों को समाहित किया जाएगा। खाद्य अपशिष्ट नियंत्रण और नवाचार के क्षेत्र में भी प्रेरणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मर्काबार्ना में संचालित फूड बैंक, जीरो वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली और फूड-टेक स्टार्टअप्स के लिए तैयार किए गए इनक्यूबेशन मॉडल का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्थाएं मध्यप्रदेश में नवाचार-आधारित कृषि नीति को मजबूती देंगी। निर्यात और वैश्विक पहुंच के लिए ठोस रणनीति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में गेहूं, चावल, फल, सब्जियों और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात की असीम संभावनाएं हैं। मर्काबार्ना जैसे केंद्रों से प्रेरणा लेकर मध्यप्रदेश में पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस को कम करते हुए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुरूप उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। निवेश और साझेदारी के लिए खुला निमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मर्काबार्ना प्रबंधन को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश वैश्विक साझेदारियों के लिए तैयार है। राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और तकनीकी निवेश को बढ़ावा भी दे रही है। कृषि आधारित औद्योगिक प्रगति का नया चरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा कृषि आधारित विकास के एक नए चरण की भूमिका तय कर रही है। अब मध्यप्रदेश केवल उत्पादन आधारित राज्य नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत भागीदार के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का नेतृत्व कृषि, नवाचार और निर्यात के समन्वय से ‘एडवांटेज एमपी’ के विजन को साकार कर रहा है।