samacharsecretary.com

मुख्यमंत्री साय बोले – बस्तर का हर गांव बनेगा आपका अच्छा गांव

  मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर के युवा ग्रेजुएट पंच का बढ़ाया हौसला बीजापुर जिले के युवाओं से मुख्यमंत्री साय ने की आत्मीय मुलाकात रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर में स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत राजधानी रायपुर के भ्रमण पर आए बीजापुर जिले युवाओं से मुलाकात की। मुख्यमंत्री श्री साय इन युवाओं से बहुत आत्मीयता से मिले और उनसे राजधानी रायपुर भ्रमण के अनुभवों को जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव आपका अच्छा गांव बनेगा। बस्तर के विकास को अब कोई नहीं रोक सकता। बस्तर का युवा आज आत्मविश्वास से भरा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बीजापुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों से आये युवाओं से उनका हाल-चाल जाना और आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री ने युवाओं से पूछा कि वे विगत डेढ़ वर्षों में क्या परिवर्तन महसूस कर रहे हैं ? युवाओं ने बताया कि बहुत परिवर्तन है। अब हमारे क्षेत्र में सड़कें बन रही हैं, बिजली की व्यवस्था हुई है और आंगनबाड़ी केंद्र भी खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर का विकास हमारी सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से उनकी पढ़ाई-लिखाई और गतिविधियों के विषय में जानकारी ली। बीजापुर के एक युवा ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि वह जूलॉजी विषय से बीएससी कर चुका है और वर्तमान में वह अपने गांव का पंच है। उसका एक साथी भी पंच निर्वाचित हुआ है। मुख्यमंत्री ने इन युवाओं के जज्बे की सराहना की और उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बच्चों से पूछा- कितने बच्चे इंस्टाग्राम चलाते हैं ? जब इस प्रश्न पर कई बच्चों ने हाथ उठाया तो मुख्यमंत्री ने आश्चर्यमिश्रित मुस्कान के साथ कहा- अब बस्तर के हमारे बच्चे भी समय के साथ हाईटेक हो रहे हैं। ये सुनकर ठहाके गूंज उठे। मुख्यमंत्री ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि युवा अपडेट हैं और तकनीक को समझ रहे हैं। युवाओं ने बताया कि उनके गांव में अब मोबाइल टावर भी लग रहे हैं। युवाओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे कल राजधानी रायपुर आये हैं। उन्होंने मुक्तांगन, जंगल सफारी सहित अन्य जगहें देखी हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं से कहा कि वे राजधानी रायपुर के भ्रमण के अनुभव का पूरा लाभ उठाएं। उल्लेखनीय है कि स्वामी विवेकानंद युवा प्रोत्साहन योजना के तहत बीजापुर जिले के नियद नेल्लानार ग्राम पंचायतों के 100 युवा राजधानी रायपुर के भ्रमण पर आये हैं। जिसके अंतर्गत  आज ये युवा छत्तीसगढ़ विधानसभा पहुंचे। इस अवसर पर वनमंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण देव, श्री संपत अग्रवाल, श्री ईश्वर साहू सहित गणमान्यजन उपस्थित थे।

सुपर स्वच्छता लीग में छत्तीसगढ़ के तीन शहरों ने बनाई जगह, रायपुर राज्य का प्रॉमिसिंग स्वच्छ शहर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत नगरीय निकायों को दी बधाई रायपुर. केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में छत्तीसगढ़ के सात शहरों ने अपनी स्वच्छता की चमक बिखेरी है। बिल्हा नगर पंचायत 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में अब देश का सबसे साफ-सुथरा शहर बन गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में बिल्हा ने देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है। तीन लाख से दस लाख जनसंख्या वाले शहरों में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा और 20 हजार से 50 हजार आबादी वाले शहरों में कुम्हारी को तीसरा स्थान मिला है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में इन तीनों नगरीय निकायों के साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य के कुल सात नगरीय निकायों को पुरस्कृत किया। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव, संबंधित निकायों के महापौर, अध्यक्षों और अधिकारियों ने ये पुरस्कार ग्रहण किए। केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल और केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू भी पुरस्कार समारोह में शामिल हुए। भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में अंबिकापुर, पाटन, विश्रामपुर और रायपुर ने भी राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। स्वच्छ सर्वेक्षण में पहली बार शामिल नई श्रेणी 'स्वच्छता सुपर लीग' (एसएसएल) में अंबिकापुर, पाटन और विश्रामपुर ने जगह बनाई है। यह सम्मान उन शहरों को दिया गया, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में रहे हैं और वर्तमान वर्ष में शीर्ष 20 शहरों में शामिल हैं। अंबिकापुर ने 50 हजार से तीन लाख जनसंख्या श्रेणी में तथा पाटन और विश्रामपुर ने 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में एसएसएल में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। इनके अतिरिक्त, राजधानी रायपुर को छत्तीसगढ़ का 'प्रॉमिसिंग (Promising) स्वच्छ शहर' का पुरस्कार मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी विजेता नगरीय निकायों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने इन शहरों में स्वच्छता के प्रति नागरिकों, स्थानीय निकायों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ये पुरस्कार राज्य के अन्य शहरों को भी अपने शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने भी आज पुरस्कृत नगरीय निकायों को बधाई दी और कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए केवल एक सम्मान ही नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। आने वाले समय में अन्य नगरीय निकायों को भी स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त होंगे। शहरी सरकारों से लेकर राज्य और केंद्र की सरकार शहरों को स्वच्छ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने के लिए कई नवाचारों के साथ सतत काम कर रहे हैं।

कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं को मिलेगा वीआईपी अनुभव, सुरक्षा, फलाहार और आराम का पूरा ख्याल, सरकार ने की विशेष व्यवस्थाएँ

इंदौर  कांवड़ यात्रा करते-करते अगर आप थक जाएं और आपको आराम करने के साथ स्वादिष्ट व्यंजन चखने का मन करें, तो आपके लिए राज्य सरकार की ओर से तैयार किए गए कांवड़ कैंप में तमाम सुख सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. जहां आपके रहने और खाने से लेकर तमाम व्यवस्था निशुल्क की गई है. उत्तर प्रदेश की राह पर एमपी मध्य प्रदेश में अब कावड़ यात्री सरकार के वीआईपी अतिथि होंगे, क्योंकि कांवड़ियों को मोहन यादव सरकार ने खाने पीने से लेकर रहने तक की सुविधा देने का फैसला किया है. जिसकी तैयारियां खंडवा इंदौर मार्ग पर हो गई हैं. दरअसल, श्रावण मास शुरू होते ही शिव के दर्शन के लिए कावड़ यात्रियों की बड़ी संख्या में उज्जैन और ओंकारेश्वर सहित शिव तीर्थों की ओर से यात्रा आरंभ हो चुकी है. लिहाजा उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर सीएम मोहन यादव ने भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. जिसके बाद इंदौर जिले में कांवड़ यात्रियों के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है. भोजन एवं फलाहार की विशेष व्यवस्था मुख्यमंत्री के निर्देश पर कावड़ यात्रियों के लिए राजोदा (सांवेर रोड) और बाईग्राम (खंडवा रोड, महू क्षेत्र) में ठहराव, भोजन और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई हैं. इसी प्रकार इंदौर-उज्जैन महाकालेश्वर मार्ग पर राजोदा ग्राम में रामा फास्फेट फैक्ट्री के सामने और इंदौर-ओंकारेश्वर मार्ग पर बाईग्राम में वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं, जिनमें यात्रियों को शयन, भोजन, चाय, फलाहार और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही है. भोजन की व्यवस्था प्रतिदिन 8 बजे से रात्रि 10 बजे तक रहेगी. उपवास वाले कांवड़ियों का खास ख्याल कांवड़ यात्रियों के साथ चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए कैंपों में चाय, रोटी, पूरी, सब्जी, दाल, चावल, खिचड़ी आदि भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. वहीं, उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है. उनके लिए फलाहार में मोरधन की खिचड़ी, केले, ककड़ी तथा साबूदाने की खिचड़ी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उपवास वाले यात्री भी बिना कठिनाई के अपनी यात्रा पूरी कर सकें. खंडवा रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध श्रावण मास के अवसर पर इंदौर-खंडवा रोड में ट्रक भार वाहक वाहनों की आवाजाही सुबह 8 बजे से रात्रि 9 बजे तक (केवल श्रावण मास हेतु) प्रतिबंधित रहेगी. उक्त वाहन एबी रोड होते हुए सनावद की ओर जा सकेंगे. यह प्रतिबंध केवल भारी मालवाहक वाहनों पर लागू होगा. यात्री बस, कार, जीप, दोपहिया वाहन, दूध-वाहन, एलपीजी गैस सप्लाई, पानी टैंकर, एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन आदि आवश्यक सेवाओं से संबंधित वाहन प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे. कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा, "कांवड़ यात्रा को देखते हुए इंदौर-खंडवा रोड में भारी वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित किया गया है. इस साल से हम लोगों ने दो जगहों पर कांवड़ियों के लिए सुविधा केंद्र बनाने का फैसला किया है. जहां पर विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी."

वस्त्र उद्योग में नया युग: मध्यप्रदेश बनेगा वैश्विक विनिर्माण का हब – CM डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्पेन यात्रा के दूसरे दिन का फोकस वैश्विक कपड़ा एवं फैशन क्षेत्र के दिग्गजों से निवेश संवाद का रहा। स्पेन के गैलिसिया स्थित इंडिटेक्स मुख्यालय में हुई बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को “हरित, लागत-प्रतिस्पर्धी और ट्रेसिबल उत्पादन हब” के रूप में प्रस्तुत किया। बैठक में इंडीटेक्स समूह के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापारिक साझेदारी और सतत निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार टेक्सटाइल क्षेत्र में वैश्विक साझेदारियों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इंडिटेक्स जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड की उपस्थिति से राज्य में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और हरित उत्पादन को गति मिलेगी। हम इस साझेदारी को सभी स्तरों पर समर्थन देने को तत्पर हैं। मध्यप्रदेश टेक्सटाइल सेक्टर के लिए आदर्श स्थान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश देश के शीर्ष कच्चा कपास उत्पादक राज्यों में से एक है, जहाँ सालाना लगभग 18 लाख बेल्स (3 लाख मीट्रिक टन) का उत्पादन होता है। राज्य में 15 से अधिक टेक्सटाइल क्लस्टर हैं इसमें इंदौर, मंदसौर, बुरहानपुर, उज्जैन, नीमच जैसे केंद्र टेक्सटाइल उत्पादन में अग्रणी हैं। पीएम मित्रा पार्क: इंडिटेक्स के लिए सुनहरा अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धार जिले में भारत सरकार की पीएम मित्रा योजना के अंतर्गत विकसित हो रहा टेक्सटाइल मेगा पार्क इंडिटेक्स जैसे वैश्विक ब्रांडों के लिए सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग का आदर्श केंद्र बन सकता है।मुख्यमंत्री डॉ यादव ने इस पार्क में गारमेंटिंग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। ऑर्गेनिक कॉटन में भागीदारी का आह्वान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश भारत का अग्रणी ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादक है। राज्य में यहां विशेषकर निमाड़ और मालवा क्षेत्रों में बहुतायत में कॉटन का उत्पादन होता है। यहाँ GOTS-सर्टिफाइड किसान समूह सक्रिय हैं, जो इंडिटेक्स की सस्टेनेबिलिटी और ट्रेसिबिलिटी नीतियों के लिए आदर्श साझेदार हो सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फार्मर-टू-फैब्रिक वैल्यू चेन पर इंडिटेक्स के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया। ESG फ्रेमवर्क में मेल-जोल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार (ईएसजी) (Environment, Social, Governance) मूल्यों को बढ़ावा देती है। वॉटर रिसायक्लिंग, वेस्ट मैनेजमेंट और डीसेंट वर्क स्टैंडर्ड्स राज्य में लागू हैं। इंडिटेक्स की जिम्मेदार सोर्सिंग नीति के साथ मध्यप्रदेश की दृष्टि पूरी तरह से मेल खाती है। निर्यात और वैश्विक संभावनाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य से टेक्सटाइल और गारमेंट का वार्षिक निर्यात 7 हजार करोड़ रूपये से अधिक है, जिसमें यूरोपीय संघ प्रमुख है। उन्होंने बताया कि इंडिटेक्स जैसे ब्रांड की साझेदारी से यह आंकड़ा 10 हजार करोड़ रूपये तक पहुँच सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार और महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। नीतिगत समर्थन और लॉजिस्टिक सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की नवीन औद्योगिक एवं निर्यात नीति – 2025 की विशेषताओं को साझा किया, जिसमें भूमि पर 90% सब्सिडी, मशीनरी पर 40% पूंजी सहायता, ग्रीन टेक्नोलॉजी पर 50% सहायता और ऋण पर ब्याज सब्सिडी आदि शामिल हैं। इंडीटेक्स को साझेदारी का निमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडिटेक्स को आमंत्रण दिया कि वह पीएम मित्रा पार्क में सप्लाई चेन एंकर के रूप में भागीदारी बने। उन्होंने एक ऑर्गेनिक कॉटन ट्रेसिंग प्लेटफॉर्म और ई एस जी सर्टिफाइड एमएसएमई के साथ वेंडर डेवेलपमेंट प्रोग्राम प्रारंभ करने का सुझाव भी दिया। उल्लेखनीय है किस्पेन की Inditex (Industria de Diseño Textil S.A.) दुनिया की बड़ी फैशन रिटेल कंपनियों में से एक है। इसके अंतर्गत ज़ारा, मैसिमो दुत्ती, बेरशका, बुल एंड बीयर जैसे प्रसिद्ध ब्रांड्स हैं। कंपनी का मुख्यालय गैलिसिया के आर्तेइशो में है। यह अपने फास्ट फैशन मॉडल, ट्रेसिबल सप्लाई चेन और टिकाऊ प्रथाओं के लिए प्रसिद्ध है। भारत में इंडिटेक्स, टाटा समूह के साथ ज़ारा और मैसिमो दुत्ती ब्रांड्स के माध्यम से कार्यरत है।  

इंदौर सुपर स्वच्छ लीग सिटीज़ श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित

मध्यप्रदेश अब स्वच्छता में देश का बना अग्रदूत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में मध्य प्रदेश फिर अव्वल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर सुपर स्वच्छ लीग सिटीज़ श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में भोपाल दूसरे, जबलपुर 5वें और ग्वालियर 14वें स्थान पर 3 से 10 लाख जनसंख्या श्रेणी में उज्जैन, देश के शीर्ष शहरों में शामिल ग्वालियर को मिला प्रॉमिसिंग शहर का स्टेट अवार्ड 50 हजार से 3 लाख जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में देवास प्रथम स्थान पर मुख्यमंत्री ने दी प्रदेशवासियों और नगरीय निकायों को बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 के सम्मान समारोह में इंदौर को 'सुपर स्वच्छ लीग सिटीज़' श्रेणी में देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित किया जाना प्रदेशवासियों के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उल्लेखनीय है कि विगत 7 वर्षों से स्वच्छ शहरों की श्रेणी में इंदौर ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया था। इंदौर के साथ भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन एवं बुधनी को भी विभिन्न श्रेणियों में स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि पूरा मध्यप्रदेश अब स्वच्छता में देश का अग्रदूत बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस सफलता के लिए प्रदेश के समस्त स्थानीय निकायों के नागरिकों, विशेषकर स्वच्छताकर्मियों, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को स्पेन यात्रा के दूसरे दिन जारी संदेश में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने हमेशा की तरह एक बार फिर टॉप किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सभी राज्यों को स्वच्छता की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता की विभिन्न श्रेणियों में अग्रणी शहरों की एक लीग बनाई गई, जिसमें इंदौर को शीर्ष स्थान मिला। इंदौर स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार-2024 में 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों की नवीन श्रेणी "स्वच्छ लीग अवार्ड" में सर्वश्रेष्ठ शहर बना है। धार्मिक नगरी उज्जैन को स्वच्छ लीग अवार्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छ लीग अवार्ड में धार्मिक नगरी उज्जैन को 3 से 10 लाख जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में शीर्ष स्थान मिला है। इसी प्रकार 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों में बुदनी सर्वश्रेष्ठ शहर बना है। जबकि 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में भोपाल दूसरे, जबलपुर पांचवें और ग्वालियर 14वें स्थान पर रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में स्वच्छता में प्रॉमिसिंग शहर का स्टेट अवार्ड ग्वालियर को मिला। पचास हजार से तीन लाख जनसंख्या वाले स्वच्छ शहरों में देवास प्रथम स्थान पर रहा। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल देश की सबसे स्वच्छ राजधानी पहले ही बन चुका है।  

MP अतिथि शिक्षकों को अलर्ट: 18 जुलाई से ई-अटेंडेंस नहीं तो मानदेय भी नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों से जुड़ी जरुरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों के लिए “हमारे शिक्षक” ऐप पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया है, लेकिन कई शिक्षक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि 18 जुलाई, 2025 से जो अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगाएंगे, उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय रोका जाएगा।  ई-अटेंडेंस के चौंकाने वाले आंकड़े विभाग ने सभी जिलों में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की स्थिति की समीक्षा की तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। किसी भी जिले में 50 प्रतिशत से अधिक ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हुई है। कई जिलों में यह आंकड़ा मात्र 10 से 20 प्रतिशत के बीच है, जबकि अनूपपुर जिले में ई-अटेंडेंस शून्य प्रतिशत रहा। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अब अनिवार्य है।  "हमारे शिक्षक" ऐप से अनिवार्य की गई उपस्थिति स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस मोबाइल ऐप "हमारे शिक्षक" के जरिए दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब शिक्षक की उपस्थिति सिर्फ ऐप के माध्यम से ही मान्य मानी जाएगी। हालांकि, अभी तक कई गेस्ट टीचर्स इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर लोक शिक्षण आयुक्त ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लगभग 80% अतिथि शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि बहुत ही निराशाजनक है। 18 जुलाई से अटेंडेंस नहीं तो वेतन नहीं मध्यप्रदेश में गेस्ट टीचर्स के लिए शुरू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था जुलाई माह के पहले पंद्रह दिनों में बुरी तरह विफल साबित हुई है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 जुलाई से जिन अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी, उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा और उनका मानदेय भी रोका जाएगा।” ई-अटेंडेंस नहीं लगाई तो रुकेगा मानदेय विभाग ने साफ कहा है कि सभी गेस्ट टीचर्स को सूचना दी जाए कि अगर वे "हमारे शिक्षक" ऐप से अटेंडेंस दर्ज नहीं करते हैं, तो उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय नहीं मिलेगा। यह ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 1 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। लेकिन पहले 15 दिन की समीक्षा में सामने आया कि 80% से ज्यादा गेस्ट टीचर्स ने ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाई है। गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस की रिपोर्ट जारी शिक्षा विभाग ने हमारे शिक्षक’ ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों को अब अनुपस्थित मानते हुए वेतन न देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि इसे सख्ती से लागू किया जाए। वहीं, अतिथि शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक वे ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे। गेस्ट टीचर्स ने नहीं लगाई ई-अटेंडेंस दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की उपस्थिति मोबाइल ऐप ‘हमारे शिक्षक’ के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक अब तक इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस लापरवाही पर लोक शिक्षण आयुक्त ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग 80% गेस्ट टीचर्स ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि अत्यंत चिंताजनक और निराशाजनक स्थिति है।” शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का कर रहा विरोध विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है, उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और ऐप की तकनीकी खामियों के कारण यह प्रणाली अव्यवहारिक है। इस सख्ती के बाद अब देखना होगा कि अतिथि शिक्षक इस नियम का पालन करते हैं या विरोध और तेज होता है। डिंडोरी जिले में 50 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति शिक्षा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से केवल डिंडोरी ऐसा जिला है जहां अपेक्षाकृत बेहतर ई-अटेंडेंस दर्ज की गई है। यहां 57% गेस्ट टीचर्स ने ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद झाबुआ में 48%, खरगोन में 45%, तथा नरसिंहपुर और शहडोल में 44-44% गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, अनूपपुर जिला सबसे पीछे रहा, जहां 17 गेस्ट टीचर्स में से किसी ने भी एक भी दिन उपस्थिति दर्ज नहीं की। इसी तरह निवाड़ी और अलीराजपुर में मात्र 7-7% और मऊगंज और हरदा में 8-8% अटेंडेंस ही रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़े ई-अटेंडेंस व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। "जब तक अवकाश की सुविधा नहीं मिलेगी, नहीं लगाएंगे ई-अटेंडेंस" अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील परिहार ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस अनिवार्यता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में अतिथि शिक्षकों को एक भी अवकाश की सुविधा नहीं दी गई है, जबकि अतिथि विद्वानों को यह सुविधा उपलब्ध है। परिहार ने कहा, हमारे पास न तो दुर्घटना बीमा है और न ही महिला शिक्षकों को प्रसूति अवकाश मिलता है। कई अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें मात्र ₹10,000 मानदेय मिलता है और वे पिछले चार महीनों से बेरोजगार हैं। कई के पास स्मार्टफोन तक नहीं हैं, ऐसे में वे ई-अटेंडेंस कैसे लगाएं?

MP अतिथि शिक्षकों को अलर्ट: 18 जुलाई से ई-अटेंडेंस नहीं तो मानदेय भी नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों से जुड़ी जरुरी खबर सामने आई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों के लिए “हमारे शिक्षक” ऐप पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना अनिवार्य किया है, लेकिन कई शिक्षक इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश जारी किए हैं कि 18 जुलाई, 2025 से जो अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगाएंगे, उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय रोका जाएगा।  ई-अटेंडेंस के चौंकाने वाले आंकड़े विभाग ने सभी जिलों में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस की स्थिति की समीक्षा की तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। किसी भी जिले में 50 प्रतिशत से अधिक ऑनलाइन अटेंडेंस दर्ज नहीं हुई है। कई जिलों में यह आंकड़ा मात्र 10 से 20 प्रतिशत के बीच है, जबकि अनूपपुर जिले में ई-अटेंडेंस शून्य प्रतिशत रहा। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि “हमारे शिक्षक” ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अब अनिवार्य है।  "हमारे शिक्षक" ऐप से अनिवार्य की गई उपस्थिति स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस मोबाइल ऐप "हमारे शिक्षक" के जरिए दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब शिक्षक की उपस्थिति सिर्फ ऐप के माध्यम से ही मान्य मानी जाएगी। हालांकि, अभी तक कई गेस्ट टीचर्स इस आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस पर लोक शिक्षण आयुक्त ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि लगभग 80% अतिथि शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि बहुत ही निराशाजनक है। 18 जुलाई से अटेंडेंस नहीं तो वेतन नहीं मध्यप्रदेश में गेस्ट टीचर्स के लिए शुरू की गई ई-अटेंडेंस व्यवस्था जुलाई माह के पहले पंद्रह दिनों में बुरी तरह विफल साबित हुई है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने इसको लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 18 जुलाई से जिन अतिथि शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति (ई-अटेंडेंस) ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से दर्ज नहीं होगी, उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा और उनका मानदेय भी रोका जाएगा।” ई-अटेंडेंस नहीं लगाई तो रुकेगा मानदेय विभाग ने साफ कहा है कि सभी गेस्ट टीचर्स को सूचना दी जाए कि अगर वे "हमारे शिक्षक" ऐप से अटेंडेंस दर्ज नहीं करते हैं, तो उन्हें गैरहाजिर माना जाएगा और उनका मानदेय नहीं मिलेगा। यह ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 1 जुलाई 2025 से शुरू की गई है। लेकिन पहले 15 दिन की समीक्षा में सामने आया कि 80% से ज्यादा गेस्ट टीचर्स ने ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाई है। गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस की रिपोर्ट जारी शिक्षा विभाग ने हमारे शिक्षक’ ऐप से अटेंडेंस नहीं लगाने वाले शिक्षकों को अब अनुपस्थित मानते हुए वेतन न देने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के गेस्ट टीचर्स की ई-अटेंडेंस पर आधारित रिपोर्ट जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि इसे सख्ती से लागू किया जाए। वहीं, अतिथि शिक्षक संघ ने आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उन्हें अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक वे ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे। गेस्ट टीचर्स ने नहीं लगाई ई-अटेंडेंस दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस शैक्षणिक सत्र से गेस्ट टीचर्स की उपस्थिति मोबाइल ऐप ‘हमारे शिक्षक’ के माध्यम से दर्ज करना अनिवार्य कर दिया है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक अब तक इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं। इस लापरवाही पर लोक शिक्षण आयुक्त ने गंभीर नाराजगी जताते हुए कहा कि लगभग 80% गेस्ट टीचर्स ने ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं की है, जो कि अत्यंत चिंताजनक और निराशाजनक स्थिति है।” शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का कर रहा विरोध विभाग का कहना है कि यह कदम शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि, शिक्षकों का एक वर्ग इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है, उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और ऐप की तकनीकी खामियों के कारण यह प्रणाली अव्यवहारिक है। इस सख्ती के बाद अब देखना होगा कि अतिथि शिक्षक इस नियम का पालन करते हैं या विरोध और तेज होता है। डिंडोरी जिले में 50 प्रतिशत से ज्यादा उपस्थिति शिक्षा विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से केवल डिंडोरी ऐसा जिला है जहां अपेक्षाकृत बेहतर ई-अटेंडेंस दर्ज की गई है। यहां 57% गेस्ट टीचर्स ने ‘हमारे शिक्षक’ ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद झाबुआ में 48%, खरगोन में 45%, तथा नरसिंहपुर और शहडोल में 44-44% गेस्ट टीचर्स की अटेंडेंस दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर, अनूपपुर जिला सबसे पीछे रहा, जहां 17 गेस्ट टीचर्स में से किसी ने भी एक भी दिन उपस्थिति दर्ज नहीं की। इसी तरह निवाड़ी और अलीराजपुर में मात्र 7-7% और मऊगंज और हरदा में 8-8% अटेंडेंस ही रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़े ई-अटेंडेंस व्यवस्था की जमीनी स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। "जब तक अवकाश की सुविधा नहीं मिलेगी, नहीं लगाएंगे ई-अटेंडेंस" अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील परिहार ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस अनिवार्यता पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पिछले 17 सालों में अतिथि शिक्षकों को एक भी अवकाश की सुविधा नहीं दी गई है, जबकि अतिथि विद्वानों को यह सुविधा उपलब्ध है। परिहार ने कहा, हमारे पास न तो दुर्घटना बीमा है और न ही महिला शिक्षकों को प्रसूति अवकाश मिलता है। कई अतिथि शिक्षक ऐसे हैं जिन्हें मात्र ₹10,000 मानदेय मिलता है और वे पिछले चार महीनों से बेरोजगार हैं। कई के पास स्मार्टफोन तक नहीं हैं, ऐसे में वे ई-अटेंडेंस कैसे लगाएं?

भगदड़ कांड में RCB फंसी, कर्नाटक सरकार ने क्रिमिनल केस चलाने की मंजूरी दी

बेंगलुरु  बेंगलुरु भगदड़ मामले में कर्नाटक सरकार ने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) और कर्नाटक राज्य क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) के खिलाफ आपराधिक मामले दायर करने की मंजूरी दे दी है. ये फैसला मंत्रिमंडल की बैठक में जस्टिस माइकल डी'कुन्हा आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने के बाद लिया गया है. आयोग की इस रिपोर्ट में कई अनियमितताओं और गड़बड़ियों का खुलासा किया गया है, जिसके आधार पर ये कार्रवाई की जा रही है. जस्टिस माइकल डी'कुन्हा की अध्यक्षता में गठित आयोग ने आरसीबी और केएससीए से जुड़े विभिन्न मुद्दों की गहन जांच की थी. इस जांच में वित्तीय अनियमितताओं, प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी और अन्य गंभीर उल्लंघनों के सबूत सामने आए. आयोग की रिपोर्ट में इन संगठनों द्वारा नियमों के उल्लंघन और संदिग्ध गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, जिसे मंत्रिमंडल ने गंभीरता से लिया. मंत्रिमंडल की बैठक में इस रिपोर्ट को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया और इसके आधार पर आरसीबी और केएससीए के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का फैसला लिया गया है. ये कदम खेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. RCB की लापरवाही पर सवाल ट्रिब्यूनल ने आईपीएल फ्रेंचाइजी RCB की कड़ी आलोचना की, क्योंकि उन्होंने पुलिस की मंजूरी के बिना अपनी जीत के जश्न की घोषणा की थी, जिसके बाद भारी भीड़ उमड़ी और ये हादसा हुआ. ट्रिब्यूनल ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास कुमार विकास की निलंबन आदेश को रद्द करते हुए कहा कि RCB ने अचानक सोशल मीडिया पर जश्न की घोषणा की, जिसके कारण लगभग तीन से पांच लाख लोग जमा हो गए.ट्रिब्यूनल ने कहा, ‘पहली नजर में ऐसा लगता है कि RCB तीन से पांच लाख लोगों के जमा होने के लिए जिम्मेदार है. RCB ने पुलिस से उचित अनुमति या सहमति नहीं ली. अचानक, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया और इसके बाद भीड़ जमा हो गई.’ सरकार को झटका, आपराधिक मामला दर्ज ट्रिब्यूनल का ये फैसला कर्नाटक सरकार के लिए भी एक बड़ा झटका है. कर्नाटक सरकार ने इस हादसे के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया था. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पहले खुफिया विभाग की आलोचना करते हुए कहा था, ‘अगर खुफिया विभाग समय पर और सटीक जानकारी नहीं दे सकता, तो इसका क्या फायदा?’ RCB अधिकारियों, KSCA और डीएनए एंटरटेनमेंट के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है. कई इवेंट मैनेजर्स को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें अंतरिम जमानत दे दी गई. इस बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट इस हादसे की सुनवाई कर रहा है. 

निवेशकों के लिए खुशखबरी! Nifty में जबरदस्त उछाल की संभावना

मुंबई  भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन और अनुकूल नीतिगत वातावरण के चलते शेयर बाजार में आने वाले महीनों में मजबूती देखने को मिल सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी 2025 के अंत तक 26,300 से 27,500 की रेंज में रह सकता है। मार्च में बने निचले स्तर से बाजार में तेजी का रुझान देखा जा रहा है और 26,300 का स्तर एक महत्वपूर्ण अवरोध हो सकता है। यदि इसमें ब्रेकआउट होता है, तो निफ्टी 27,500 तक जा सकता है। बर्नस्टीन के प्रबंध निदेशक और भारतीय शोध प्रमुख वेणुगोपाल गैरे ने निखिल अरेला के साथ लिखे नोट में कहा है, यह सीधे ही उस स्तर तक नहीं जाएगा। हमें अगले कदम से पहले इसके कुछ मजबूती लेने की उम्मीद है। सेक्टर के नजरिए से हम कुछ दांव यूटिलिटी से स्टेपल की ओर कर रहे हैं और थोड़े समय के लिए रणनीतिक रूप से ज्यादा वेटेज की ओर बढ़ रहे हैं। रणनीति के तौर पर उन्होंने यूटिलिटी सेक्टर को इक्वल वेट कर दिया है। वित्तीय, टेलिकॉम और डिस्क्रिशनरी उनके ओवरवेट सेक्टर बने हुए हैं। आर्थिक संकेतक बर्नस्टीन ने आगाह किया कि इस बात के संकेत बढ़ रहे हैं कि आ​र्थिक रफ्तार नरम हो रही है और यह नियमित रूप से आने वाले हाल के संकेतकों में दिखता भी है। औद्योगिक गतिविधियों में नरमी लग रही है क्योंकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक मई में नौ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया और कोर सेक्टर में भी इसी तरह की गिरावट देखी गई। अप्रैल-मई में बिजली की मांग और तेल व गैस उत्पादन में नरमी आई है जबकि यात्री वाहनों की बिक्री सुस्त बनी हुई है। हवाई यातायात की वृद्धि भी नरमी के संकेत दे रही है। ऋण वृद्धि में भी नरमी आई है। हालांकि, कुछ मजबूत रुझान भी हैं। इस्पात और कोयला उत्पादन ने हाल के औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। सीमेंट भी मज़बूत है। इसे आंशिक रूप से पेटकोक की बढ़ती खपत से सहारा मिला है। उपभोक्ता मोर्चे की बात करें तो एफएमसीजी और खुदरा क्षेत्र की कई उपभोक्ता कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही के बारे में सकारात्मक टिप्पणियां की हैं और उन्होंने बिक्री वृद्धि में तिमाही आधार पर सुधार की बात कही है। पिछले कुछ हफ़्तों में बिजली की मांग में तेजी आई है। इन कारकों पर रहेगी नजर रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष की दूसरी छमाही में कुछ प्रमुख वैश्विक और घरेलू घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। इनमें शामिल हैं:     अमेरिका की टैरिफ नीतियों पर स्पष्टता और उसका वैश्विक व्यापार पर प्रभाव     हिंद-प्रशांत और मध्य पूर्व क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव का समाधान     यूके-भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रगति     अमेरिका में महंगाई के रुझान        

स्वच्छता में नंबर वन इंदौर ने अनोखे अंदाज़ में मनाया जश्न, आतिशबाजी के बाद खुद की सफाई, जिम्मेदारी भी निभाई

इंदौर का स्वच्छता मॉडल बना ग्लोबल आइकन, 50 देशों के प्रतिनिधि हुए प्रेरित इंदौर की सफाई को कांग्रेस सांसद ने बताया मिसाल, कहा – यूरोप नहीं, यहां से सीखें स्वच्छता में नंबर वन इंदौर ने अनोखे अंदाज़ में मनाया जश्न, आतिशबाजी के बाद खुद की सफाई, जिम्मेदारी भी निभाई इंदौर पिछले कई वर्षों से ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ में सबसे साफ शहर बनकर उभरा इंदौर अब वैश्विक स्तर पर स्वच्छता के लिए जाना जाने लगा है। इसके सख्त सफाई और कचरा प्रबंधन नीतियों ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र भी बना दिया है, जहां दुनियाभर के देश अपने प्रतिनिधियों को भेजकर इसकी प्रणाली सीखने की प्रेरणा पा रहे हैं। कुछ साल के अंदर कई दल इंदौर आ चुके हैं और उन्होंने यहां से सीखी स्वच्छता की बातों को अपने देशों में भी लागू किया है। अब तक देश के अलग अलग शहरों के 100 से अधिक प्रतिनिधि स्वच्छता मॉडल को देखने के लिए आ चुके हैं।  दुनियाभर के 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भी यहां पर आकर स्वच्छता के गुर सीख चुके हैं। फ्रांस से लेकर फिजी और जाम्बिया तक के देशों ने इंदौर के सफाई मॉडल पर विश्वास दिखाया है। देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों ने इसकी उत्कृष्टता को सराहा और उसे सीखने की इच्छा जताई है, जो स्वच्छ भारत और ग्लोबल सिटी मॉडल की दिशा में एक मजबूत कदम है।   प्रवासी भारतीय सम्मेलन में भी स्वच्छता रही मुख्य आकर्षण साल 2023 में इंदौर में प्रवासी भारतीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान दुनियाभर के देशों से लोग इंदौर आए। यहां पर सभी के लिए स्वच्छता आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। विदेशी दलों को नगर निगम की टीम पर्यटन स्थलों के साथ में स्वच्छता के मुख्य केंद्रो पर भी ले गई।  बांग्लादेश ने भेजा विशेष दल बांग्लादेश के ज्वाइंट सेक्रेटरी निरोद चंद्र मंडल के नेतृत्व में 13 बांग्लादेशी प्रतिनिधियों का दल इंदौर आया। इन्होंने शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी इकट्ठा की। इसके साथ ही सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट सिस्टम को भी समझा बारीकी से समझा। विदेशी प्रतिनिधिमंडल आए 22 सदस्यीय विदेशी टीम इंदौर आई। यह 6 अलग-अलग देशों से थी। इन्होंने इंदौर के बायो‑CNG संयंत्र, घर-घर कूड़ा संग्रह, कंपोस्टिंग समाधान और सफाई स्टाफ की प्रशिक्षण विधियों का ज्ञान साझा किया। इस टीम में यह देश शामिल थे… फ्रांस (France) उरुग्वे (Uruguay) फिजी (Fiji) जाम्बिया (Zambia) ग्वाटेमाला (Guatemala) होंडूरस (Honduras)  प्रदेशों ने भी भेजे अपने दल उत्तर प्रदेश का एक दस-सदस्यीय दल  जिसमें “Safai Mitra” एवं राज्य के अधिकारी शामिल थे, नवंबर 2022 में इंदौर आया। उन्होंने इंदौर की बायो-CNG संयंत्र सुविधा को समझा और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल की पूरी जानकारी ली और अपनी नगरपालिकाओं में इसके मॉडल को लागू करने की योजना बनाई। हैदराबाद की मेयर और 40 GHMC निगम सदस्य सितंबर 2024 में आए, ताकि इंदौर के door-to-door collection, स्रोत पर कचरा विभाजन (segregation), और सफाई कर्मचारियों के सशक्त बनावट मॉडल को सीख सकें।  इन सभी दलों ने इंदौर के कई पहलुओं को समझा, जिनमें मुख्य रूप से यह बातें शामिल थी… wet waste से bio-CNG उत्पादन, बायो‑CNG संयंत्र (Asia's largest) dry waste का पुनः उपयोग  100% door-to-door कचरा संग्रह होम कंपोस्टिंग टेक्निक zero-landfill नीति सफाई संगठनों (Safai Mitras) की कार्यप्रणाली 'Reduce‑Reuse‑Recycle' मॉडल आईआईएम ने शुरू किया कोर्स, देशभर से आ रहे अधिकारी इंदौर आईआईएम द्वारा शुरू की गई पहल अन्वेषण से देशभर में स्वच्छता के लिए जागरूकता बढ़ रही है। अन्वेषण आईआईएम इंदौर द्वारा चलाया जा रहा कोर्स है जिसमें देशभर के निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी स्वच्छता से जुड़ी ट्रेनिंग लेते हैं। अपशिष्ट प्रबंधन और वॉश (WASH: Water, Sanitation and Hygiene – जल, स्वच्छता और सफाई) पर केंद्रित अन्वेषण की कई बैच निकल चुकी हैं। चार दिवसीय कार्यक्रम में देश के कई राज्यों के नगर निगम आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। अन्वेषण की यह बैच अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के माध्यम से देशभर के अधिकारियों को एक मंच पर लाने का काम करती है। आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और अंतर्दृष्टि का उपयोग कर सभी अधिकारी अपने संबंधित शहरों में स्थायी अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को लागू कर रहे हैं। इससे स्वच्छ भारत अभियान में महत्वपूर्ण योगदान हो रहा है।  इंदौर की सफाई को कांग्रेस सांसद ने बताया मिसाल, कहा – यूरोप नहीं, यहां से सीखें इंदौर का स्वच्छता का डंका न सिर्फ देश में बल्कि दुनियाभर में बजता है। भारत में ही हर पार्टी के नेता इंदौर की स्वच्छता के गुर सिखाने के लिए अपने दल भेजते रहते हैं। समय समय पर देशभर के जनप्रतिनिधि इंदौर की तारीफ भी करते रहते हैं।  कांग्रेस सांसद बोले स्वच्छता सीखने यूरोप क्यों जा रहे, इंदौर जाइए इस साल मार्च में चेन्नई का विशेष दल स्वच्छता के गुर सीखने यूरोप जा रहा था। कांग्रेस के सांसद कार्ति चिदंबरम इस पर नाराज हो गए और कहा कि चेन्नई नगर निगम के अधिकारियों को कचरा प्रबंधन के गुर सीखने के लिए यूरोप क्यों जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे पहले इंदौर का दौरा किया जाना चाहिए।  रायपुर की महापौर बोली इंदौर जैसे काम करेंगे, नंबर वन बनेंगे पिछले महीने इंदौर आई रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने इंदौर में दो दिवसीय कार्यक्रम में स्वच्छता की बारीकियां सीखी। यहां से लौटने के बाद रायपुर की स्वच्छता और विकास के लिए कई ठोस कदमों की घोषणा की। महापौर ने बताया कि इंदौर से मिले अनुभव और मॉडल को रायपुर में अपनाकर शहर को स्वच्छता के मामले में नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास किया जाएगा। महापौर चौबे ने कहा कि रायपुर में इंदौर की तरह सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए आमजन को जागरूक किया जाएगा। इसमें एनजीओ की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही शहर के सभी 10 जोनों में आरआरआर (रियूज, रिड्यूस, रिसाइकल) केंद्र खोलकर उनके प्रभावी संचालन के लिए एनजीओ के सहयोग से रणनीति बनाई जाएगी।  भागलपुर की महापौर बोली इंदौर की ट्रेनिंग से हुआ फायदा भागलपुर की महापौर वसुंधरा लाल ने अपने शहर के सफाई कर्मचारियों को इंदौर भेजा ताकि वे वहां की सफाई व्यवस्था को समझकर भागलपुर में लागू कर सकें। वसुंधरा ने कहा कि इंदौर में सफाई व्यवस्था की ट्रेनिंग … Read more