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भूपेश बघेल के घर ED का छापा: बघेल परिवार पर शिकंजा कसती ED, शराब घोटाले में बेटा निशाने पर

भिलाई शराब घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के भिलाई स्थित आवास पर छापेमारी की. ईडी की टीम तीन गाड़ियों में सुबह करीब 6:30 बजे मौके पर पहुंची और CRPF के सुरक्षा घेरे में घर की तलाशी शुरू की गई. सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई शराब घोटाले और उससे जुड़ी आर्थिक गड़बड़ियों की जांच के तहत की गई है. फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. भिलाई स्थित घर पर मौजूद हैं भूपेश बघेल गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब आज छत्तीसगढ़ विधानसभा का अंतिम दिन है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज विधानसभा में रायगढ़ जिले में हो रही पेड़ कटाई का मुद्दा उठाने वाले थे. पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर उन्होंने हाल ही में ग्रामीणों से मुलाकात भी की थी. हालांकि आमतौर पर विधानसभा सत्र के दौरान वह रायपुर में रहते हैं, लेकिन इस बार वह भिलाई में ही मौजूद थे- जहां ईडी की टीम पहुंची.  भूपेश बघेल ने शुक्रवार को इस संबंध में सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया, ''ईडी आ गई। आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है। अडानी के लिए तमनार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा आज उठना था। भिलाई निवास में “साहेब” ने ईडी भेज दी है।  ईडी ने पहले कहा था कि चैतन्य बघेल पर कथित शराब घोटाले की आपराधिक आय का ‘प्राप्तकर्ता’ होने का संदेह है। इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के कारण राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और अपराध से प्राप्त 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबों में गई। कार्रवाई के बीच विधानसभा के लिए निकले बघेल ईडी के कार्रवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल विधानसभा के सत्र के लिए अपने निवास से निकल गए हैं। इस दौरान उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार केंद्रीय एजेंटीयों का दुरुपयोग कर रही है। जिसे जो करना है वह कर ले मुझे न्याय पालिका पर भरोसा है।  उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि मुझे तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है परंतु मैं हार नहीं मानूंगा। भूपेश बघेल अपने निवास से 100 मीटर दूर नेशनल हाईवे पैदल ही समर्थकों के साथ चल कर आए। इस दौरान फोरलेन पर कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बन गई थी। शराब घोटाला मामले में भूपेश बघेल के घर छापा आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ का आबकारी घोटाल अब 2100 करोड़ से बढ़कर 3200 करोड़ का हो गया है। मामले में एजेंसियां लगातार जांच कर रही हैं।मंगलवार को ईडी टीम ने होटल कारोबारी विजय अग्रवाल के भिलाई स्थित निवास के साथ-साथ होटल और कई अन्य ठिकानों पर छापा मारा था।  बता दें कि छापेमारी के दौरान विजय अग्रवाल के जुड़े गोवा और दिल्ली के ठिकानों पर भी टीम ने दबिश दी थी। जिसमें ईडी को 70 लाख रुपये नगद बरामद हुए थे। होटल कारोबारी विजय अग्रवाल पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में अब शुक्रवार को सुबह तड़के ईडी ने भूपेश बघेल के घर छापा मार दिया है। इस संबंध में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने ट्वीट किया है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि- ईडी आ गई। आज विधानसभा के सत्र का अंतिम दिन है। अडानी के लिए तमनार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा आज उठाना था। भिलाई निवास में 'साहेब' ने ED भेज दी है।  बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का आज पांचवां और अंतिम दिन है। ऐसे में भूपेश बघेल ने साय सरकार पर आरोप लगाया है कि सदन में तमनार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा उठाया जाना था, लेकिन ऐसा न हो सके इसलिए लिए यह ईडी की कार्रवाई की जा रही है। शराब घोटाले में अब तक क्या-क्या हुआ? 7 जुलाई को आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (EOW) ने शराब घोटाले में चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की, जिसमें घोटाले की अनुमानित राशि को 2,161 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3,200 करोड़ रुपये बताया गया. यह चार्जशीट 30 जून को दाखिल की गई थी. इस केस में अब तक कुल पांच चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं, जिनमें से तीन पहले दाखिल की जा चुकी थीं. इस घोटाले में 29 आबकारी अधिकारियों (जिला अधिकारी, सहायक आयुक्त, उप आयुक्त) को आरोपी बनाया गया है, जिनमें कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल हैं.

निवेशकों और प्रवासी भारतीयों से डॉ. यादव की मुलाकात, साझा करेंगे एमपी का विजन

स्पेन प्रवास का तीसरा दिन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पेन प्रवास का तीसरा दिन 18 जुलाई को मध्यप्रदेश की वैश्विक क्षमताओं को दर्शाने और निवेश सहयोग को सशक्त करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। दिनभर की गतिविधियाँ निवेश, स्मार्ट सिटी विकास, नवाचार और प्रवासी सहभागिता जैसे विविध पक्षों को समेटे हुए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री की भूमिका निर्णायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दिन की शुरुआत बार्सिलोना के प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स केंद्र 'मर्कारबेना' के भ्रमण से होगी, जो यूरोप का एक प्रमुख आपूर्ति श्रृंखला हब माना जाता है। इस भ्रमण के दौरान लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मध्यप्रदेश की संभावनाओं को समझने और यूरोपीय मॉडल से सीखने का अवसर प्राप्त होगा। इसके बाद 'इन्वेस्ट इन मध्यप्रदेश' थीम पर केन्द्रित बार्सिलोना बिजनेस फोरम का आयोजन होगा, जहां मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्पेनिश उद्योग जगत, कॉरपोरेट समूहों और संस्थागत निवेशकों के समक्ष मध्यप्रदेश की निवेश क्षमताओं को प्रस्तुत करेंगे। इस फोरम में प्रदेश की औद्योगिक नीतियाँ, प्राथमिक सेक्टर, अधोसंरचना परियोजनाएँ और ग्लोबल पार्टनरशिप मॉडल पर विशेष फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह संवाद प्रदेश में निवेश की मंशा को ठोस प्रस्तावों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। बिजनेस फोरम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न उद्योगपतियों, व्यापारिक प्रतिनिधियों और संभावित निवेशकों से वन-टू-वन बैठकों के माध्यम से सीधा संवाद करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यक्तिगत निवेश प्रस्तावों पर ठोस चर्चा करना और नीति से लेकर ज़मीन तक की स्पष्टता देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोपहर बाद बार्सिलोना के स्मार्ट सिटी एवं नवाचार केंद्रों का भ्रमण करेंगे। इस भ्रमण में शहरी प्रबंधन, हरित प्रौद्योगिकी, डेटा-ड्रिवन सर्विस मॉडल और स्टार्टअप सहयोग से संबंधित अवधारणाओं का अवलोकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान मध्यप्रदेश के स्मार्ट सिटी मॉडल के लिए संभावित तकनीकी साझेदारियों की भी जानकारी लेंगे। इसके बाद होटल इंटरकॉन्टिनेंटल में पुनः कुछ महत्वपूर्ण वन-टू-वन बैठकों का दौर चलेगा, जिसमें निवेश प्रोत्साहन विभाग के साथ मिलकर प्रदेश के प्रतिनिधि संभावित सहयोग की दिशा तय करेंगे। दिन का समापन ‘प्रवासी एवं फ्रेंड्स ऑफ मध्यप्रदेश’ समारोह के साथ होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूरोप में बसे प्रवासी भारतीयों, व्यवसायियों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों से आत्मीय संवाद करेंगे। इस आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के प्रति प्रवासी समुदाय की प्रतिबद्धता को सम्मान देंगे और उन्हें राज्य की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आमंत्रण देंगे।  

तकनीकी साझेदारी की पहल: मुख्यमंत्री यादव का सबमर कंपनी में दौरा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बार्सिलोना में सबमर कंपनी का किया दौरा मध्यप्रदेश को एआई-रेडी, ग्रीन और सस्टेनेबल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में अहम पहल तकनीकी साझेदारी की पहल: मुख्यमंत्री यादव का सबमर कंपनी में दौरा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने और वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को स्पेन के बार्सिलोना में स्थित इमर्शन कूलिंग टेक्नोलॉजी में अग्रणी कंपनी सबमर के मुख्यालय का दौरा किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबमर की अत्याधुनिक तकनीकों, कार्यप्रणाली और ग्रीन एनर्जी समाधानों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्हें स्मार्ट पोड और माइक्रो पोड जैसी उन्नत तकनीकों के साथ ही कंपनी की डिजाइन एंड बिल्ड क्षमताओं तथा इनोवेशन लैब्स की जानकारी दी गई। सबमर ने बताया कि वह अब तक 400 मेगावॉट से अधिक इमर्शन कूलिंग समाधान विश्वभर में तैनात कर चुकी है और OCP-रेडी ग्रीन कूलिंग सॉल्यूशन प्रदान करने वाली दुनिया की पहली कंपनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंपनी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश डेटा सेंटर और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वैश्विक निवेश के लिए एक नई ऊर्जा और अवसर का केंद्र बन रहा है। सबमर जैसी अग्रणी तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी से राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।" दौरे के दौरान सबमर और मध्यप्रदेश सरकार के बीच संभावित रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई। कंपनी सबमर को मध्यप्रदेश में तकनीकी सलाहकार और सर्टिफायर के रूप में शामिल कर, नए डेटा सेंटर परियोजनाओं की डिजाइन, सस्टेनेबिलिटी और एआई-रेडिनेस के मानकों को परिभाषित करने में भागीदार बनाया जाएगा। सबमर ने यह भी अवगत कराया कि वह भारत में अपनी कमर्शियल, आरएंडडी और प्रोडक्शन इकाइयों की स्थापना की योजना बना रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश को प्राथमिकता देते हुए कंपनी के इंडिया हेड देव त्यागी जुलाई के अंत में मध्यप्रदेश का दौरा करेंगे, जिससे संभावित साझेदारियों को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा न केवल तकनीकी नवाचारों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का माध्यम बनी, बल्कि यह प्रदेश को ग्रीन और AI-रेडी डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी सिद्ध होगी। 

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला: एक परीक्षा, कई सरकारी नौकरियों का रास्ता खुलेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों में होने वाली कर्मचारियों की नियुक्ति का पैटर्न बदलने जा रहा है. अब सरकारी विभागों में होने वाली नियुक्तियां यूपीएससी की तर्ज पर की जाएंगी. यानि कि विभिन्न सरकारी विभागों के लिए अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा देने की जरुरत नहीं होगी, बल्कि इस परीक्षा के माध्यम से सभी विभागों के विभिन्न रिक्त पदों के लिए एक ही मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी. सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एक वर्ष में एक ही भर्ती परीक्षा कराए जाने के संबंध में प्रारंभिक दौर की चर्चा कर चुके हैं. इस संबंध अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है. उम्मीदवारों को केवल एक बार देनी होगी फीस एकल भर्ती परीक्षा से अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा की झंझट से मुक्ति तो मिलेगी ही, साथ ही अलग-अलग विभागों की परीक्षा के लिए बार-बार आवेदन करने और फीस भरने की जरूरत नहीं रहेगी. उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी करने और स्लॉट चुनने में दिक्कत नहीं होगी. इससे सरकार को बार-बार परीक्षा आयोजित कराने के लिए समय और पैसा बर्बाद नहीं करना पड़ेगा. यदि कोई उम्मीदवार चयनित पद नहीं लेता है, तो वेटिंग लिस्ट के कारण अगला उम्मीदवार तुरंत नियुक्त हो सकेगा. इससे रिक्तियों को बिल्कुल भी नहीं छोड़ना पड़ेगा. मुख्यमंत्री ने बार-बार परीक्षा पर जताई चिंता मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के डायरेक्टर साकेत मालवीय ने बताया कि "विभिन्न सरकारी विभागों के लिए बार-बार परीक्षाएं आयोजित करने से सबसे अधिक परेशानी अभ्यर्थियों को होती थी. ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे. मालवीय ने बताया कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के लिए एसएससी और यूपीएससी की परीक्षाओं का पैटर्न आदर्श है. जिससे यूपीएससी की तरह मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में भी एकल परीक्षा का आयोजन किया जा सके. जिस तरह संघ लोक सेवा आयोग एक परीक्षा कराता है और विभिन्न श्रेणी के उपलब्ध पदों के लिए मेरिट के हिसाब से चयन होता है. अब यही प्रक्रिया मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में नियुक्ति के लिए अपनाई जाएगी. सभी विभागों में एक जैसे होंगे भर्ती नियम अधिकारियों ने बताया कि एकल परीक्षा प्रणाली में सभी सरकारी विभागों के भर्ती नियम भी अब एक जैसे होंगे. सामान्य प्रशासन विभाग ही इन्हें बनाकर अधिसूचित करने के लिए देगा. यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है, ताकि प्रदेश के सभी सरकारी विभागों की नियुक्तियों में एकरूपता रहे. इसमें समान प्रकृति के पदों के लिए एक जैसे नियम हो जाएंगे. साथ ही यह लाभ भी होगा कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को विज्ञापन निकालते समय विभागीय भर्ती नियम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और समय पर विज्ञापन जारी हो जाएंगे. कोर्ट जाने के लिए बाध्य नहीं होंगे अभ्यर्थी अभी मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में नकल और अनियमितताओं की घटनाएं सामने आती रहती है. लेकिन नई व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए नियम से लेकर परीक्षा का पूरा ब्योरा ऑनलाइन रहेगा. अभी राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली परीक्षा में कई चीज सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, जिससे अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं. परीक्षा परिणाम या चयन सूची पर रोक लगा जाती है. इससे पूरी प्रक्रिया रुक जाती है. आगे ऐसा न हो, इसके लिए सभी जानकारियां ऑनलाइन की जाएंगी, ताकि किसी को सूचना के अभाव में कोई भ्रम या संदेह ना रहे और अभ्यर्थी कोर्ट जाने के लिए बाध्य न हो. नए पैटर्न में इस प्रकार होंगी परीक्षाएं     मध्य प्रदेश शासन के सभी विभागों के लिए साल में एक बार एकल परीक्षा का आयोजन किया जाएगा.     इसमें सभी श्रेणी के पदों के लिए मेरिट के हिसाब से सूची बन जाएगी, लेकिन वेटिंग लिस्ट एक रहेगी.     एकल परीक्षा के लिए सभी विभागों से रिक्त पदों की संख्या साल में एक बार पूछी जाएगी.     सभी विभागों से मिले प्रस्तावों के आधार पर सितंबर महीने में परीक्षा का कैलेंडर तैयार किया जाएगा.     सामान्य प्रशासन विभाग जनवरी 2026 से कर्मचारियों के चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी में है. इन विभागों में बड़ी संख्या में होगी भर्ती बता दें कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने साल 2024 के जून महीने में आयोजित कैबिनेट बैठक स्वास्थ्य विभाग के 46,491 नए पदों का भर्ती करने का निर्णय लिया था. इसी प्रकार 22 अक्टूबर, 2024 को हुई कैबिनेट की बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग में सहायिका के 12,670 पद और सुपरवाइजर के 467 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई थी. वहीं बीते 9 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 49 हजार 263 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है. इन पदों पर भर्ती आने वाले वर्षों में की जाएगी. बता दें कि वर्तमान में मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में 1 लाख 40 हजार पद खाली हैं. सरकार एक साल में इनमें से 27 हजार रिक्त पदों को भरने जा रही है.

एमपी के विधायकों की होगी बल्ले-बल्ले, तीन हजार वर्गफीट में तीन बेडरूम, हॉल, किचन समेत अन्य सुविधाएं सरकार बनाकर देगी

भोपाल  मध्यप्रदेश के विधायकों के लिए राज्य सरकार फ्लैट बनाएगी। विधायकों के लिए 102 फ्लैट बनाने के फैसले को कैबिनेट ने दस महीने पहले मंजूरी दी थी और अब 21 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इन फ्लैट्स के लिए भूमिपूजन करेंगे।  नए बनने वाले फ्लैट्स में एक विधायक को तीन हजार वर्गफीट एरिया में तीन बेडरूम, एक हॉल और किचन समेत ओपन एरिया भी मिलेगा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि स्पेन से लौटने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विधायक विश्राम गृह परिसर में बनने वाले विधायकों के फ्लैट्स के लिए भूमिपूजन करेंगे। इसके बाद इसका काम शुरू हो जाएगा। इसकी निर्माण एजेंसी लोक निर्माण विभाग ही है। सिंह ने कहा कि अभी विधायक विश्राम गृह में विधायकों को जो कक्ष आवंटित किए जा रहे हैं, वह पर्याप्त स्पेस वाले नहीं हैं। विधायकों से मिलने वालों के हिसाब से यह जगह कम पड़ती है। नए आवास बनाने में इसका विशेष तौर पर ध्यान रखा गया है कि विधायकों की निजता और उनके क्षेत्र के लोगों के साथ संवाद के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराया जाए। 1958 में बने भवन को तोड़ा जाएगा विधायक के लिए फ्लैट बनाने जो एरिया चुना गया है वह विधायक विश्राम गृह के खंड एक और पुराने पारिवारिक खंड के साथ शॉपिंग काम्पलेक्स और दुकानों वाला एरिया है। इन्हें तोड़कर नए सिरे से काम किया जाएगा। प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि 102 फ्लैट बनाने में 159.13 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इसमें तीन बेडरूम होंगे जिसे विधायक अपने परिजनों और गेस्ट के लिए उपयोग में ला सकेंगे। यहां 80 से 100 लोगों के बैठने के हिसाब से एक हॉल भी रहेगा और सिक्योरिटी गार्ड के लिए भी अलग से कमरा होगा। गौरतलब है कि पूर्व में विधायकों के लिए आवास बनाने का फैसला विधानसभा कैम्पस के 22 एकड़ जमीन पर लिया गया था। यहां हरे भरे पेड़ काटे जाने थे और नगर निगम के कुछ पेड़ काटे भी थे। पेड़ों को काटने का भोपालवासियों ने विरोध किया जिसके बाद प्लान में बदलाव किया गया। यह भी रहेगा खास     इन फ्लैट्स के लिए 10 मंजिला पांच ब्लॉक्स बनेंगे।     बेसमेंट में पार्किंग, स्विमिंग पूल, जिम और कैंटीन की सुविधा रहेगी।     पूरा कैम्पस फायर अलार्म सिस्टम से लैस रहेगा।     हर फ्लैट में विधायकों के लिए ओपन एरिया भी मौजूद रहेगा।  

संघ भाजपा के लिए अगली नई पीढ़ी तैयार करना चाहता, रबर स्टांप अध्यक्ष की जगह एक मजबूत नेतृत्व की तलाश

नईदिल्ली   कौन बनेगा भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष? भगवा पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से लेकर सियासी पंडितों के मन में यह सवाल गूंज रहा है। अभी तक इस पद को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पा रही है। सूत्र यह भी बताते हैं कि हाल ही में दो-दो केंद्रीय मंत्रियों के नाम भाजपा अध्यक्ष के पद के लिए आरएसएस को भेजे गए थे, लेकिन उनमें से किसी के नाम पर भी सहमति नहीं बन सकी है। भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और भूपेंद्र यादव का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए भेजा गया था। दोनों ही नेताओं को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है। आरएसएस का मानना है कि भाजपा को 2029 के बाद के युग के लिए तैयार करना जरूरी है। संघ भाजपा के लिए अगली और एक नई पीढ़ी तैयार करना चाहता है। आरएसएस चाहता है कि भाजपा को एक रबर स्टांप अध्यक्ष की जगह एक मजबूत नेतृत्व मिले जिसे पार्टी के कार्यकर्ता भी पसंद करते हों। वह नरेंद्र मोदी के बाद भाजपा को संभालने में सक्षम हो। एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “आरएसएस और भाजपा के वर्तमान नेतृत्व के बीच तीन दौर की बैठकों के बाद भी सहमति नहीं बनी है। आगे और चर्चा होनी है।” चर्चा में और भी कई नाम इससे पहले खबर आई थी कि भाजपा अपने इतिहास में पहली बार किसी महिला नेता के हाथों में पार्टी की कमान सौंप सकती है। उनमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम प्रमुख था। इसके अलावा दो और केंद्रीय मंत्रियों के नाम इस रेस में थे, जनमें मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल हैं। कौन बनेगा यूपी का अध्यक्ष? राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम के चयन के साथ-साथ भाजपा के लिए देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के अगले प्रदेश अध्यक्ष के नाम की भी चुनौती बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि यूपी में भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच सहमति नहीं बन सकी है। कौन बनेगा भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष?  भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए तैयारी कर रही है। कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो चुकी है। उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में इसकी घोषणा बाकी है। इस सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने स्पष्ट कर दिया है कि भगवा पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसा होगा। आपको बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत से चूकने के बाद BJP एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। सत्ता में तो है पर पहले जैसा अजेय दबदबा नहीं है। अब जब पार्टी गठबंधन सरकार चला रही है, तो RSS का हस्तक्षेप अधिक स्पष्ट और मुखर हो गया है।  अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि RSS प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों को भाजपा के लिए मैसेज के तौर पर देखा जा रहा है। संघ प्रमुख ने सत्ता में बढ़ती अहंकार की भावना और संवादहीनता की आलोचना की तो इसे सीधे तौर पर BJP नेतृत्व के व्यक्तित्व केंद्रित मॉडल पर कटाक्ष माना जाने लगा है। क्या चाहता है संघ? >> आरएसएस एक ऐसा अध्यक्ष चाहता है जो अपेक्षाकृत युवा हो। जो संगठन के साथ जुड़ा हो। वह केवल रणनीतिकार न हो, बल्कि वैचारिक मार्गदर्शक भी हो। >> आरएसएस व्यक्तिगत प्रभुत्व नहीं बल्कि संगठन आधारित नेतृत्व की चाह रखता है। भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कैडर से संवाद, फीडबैक को स्वीकार करने वाला और अंदरूनी लोकतंत्र को पुनर्स्थापित करने वाला नेता हो। >> पार्टी में बढ़ते टेक्नोक्रेट्स और राजनीतिक प्रवासियों की भूमिका पर आरएसएस ने चिंता जताई है। संघ का कहना है कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष तकनीक नहीं, तपष्या से बना नेता हो। >> भाजपा का नया अध्यक्ष उन लोगों से जुड़ा हो जो शाखा, प्रांत प्रचारक और बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं। उसकी वैचारिक स्पष्टता को भी ध्यान में रखा जाए। समान नागरिक संहिता (UCC), जनसंख्या नीति, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर उसके विचार स्पष्ट हों। 28 प्रदेश अध्यक्ष बदले गए BJP ने अब तक 36 में से 28 राज्यों में नए या फिर से नियुक्त अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। बाकी महत्वपूर्ण राज्य जैसे कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात की घोषणा बाकी है। इस जमीनी पुनर्गठन से पार्टी एक नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन के लिए मंच तैयार कर रही है। BJP या RSS में 75 की उम्र से रिटायरमेंट की कोई औपचारिक नीति नहीं है, लेकिन मोहन भागवत का हालिया बयान जिसमें उन्होंने 75 पार कर चुके लोगों के उत्तराधिकार तय करने की आवश्यकता पर बल दिया, ने हलचल मचा दी है।

निमाड़ी में पूछो, निमाड़ी में पाओ जवाब — AI बना आपकी बोली का साथी, मिलेगा स्मार्ट जवाब

 धार अब अगर आप एआई से निमाड़ी में सवाल पूछेंगे, तो जवाब भी उसी बोली में मिलेगा। यह सपना अब साकार हो रहा है। केंद्र सरकार ने देश की भाषायी विविधता को तकनीक से जोड़ने के लिए एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल तैयार किया है, जिसका नाम है 'भारत जेन (Bharat Jain)'। हाल ही में इसे लॉन्च किया गया है और यह मॉडल खासतौर पर भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों को समझने और उनके अनुरूप जवाब देने में सक्षम है। भारत जेन को आईआईटी मुंबई ने विकसित किया है और इसमें देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं, जिनमें आईआईएम इंदौर (IIM Indore) भी एक प्रमुख भागीदार है। अब इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की निमाड़ी बोली को एआई में शामिल करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। यह कदम भाषायी समावेशिता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। भारत जेन परियोजना के सहायक प्रबंधक प्रतीक जोशी ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि देश के दूरदराज और जनजातीय अंचलों में रहने वाले लोग भी तकनीक से जुड़ सकें, चाहे उन्हें अंग्रेज़ी या हिंदी न भी आती हो। इसके लिए भारत जेन को लोकभाषाओं और बोलियों को समझने योग्य बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण आबादी भी इसका लाभ उठा सके। परियोजना की शुरुआत धार जिले के खलघाट से की गई है, जहां निमाड़ी भाषा को आधार बनाकर AI मॉडल को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए स्थानीय साहित्यकारों, शिक्षकों, और बोलियों के जानकारों से संवाद स्थापित किया गया है। बोलचाल की शैली, मुहावरे और सांस्कृतिक संदर्भों को एआई के डेटा में शामिल किया जा रहा है, ताकि जवाब न केवल सही बल्कि संदर्भपूर्ण भी हों।

रूस से कच्चा तेल खरीदने से 3 साल में भारत को 25 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत हुई

नई दिल्ली अमेरिका और NATO जो कुछ दिनों पहले तक भारत की ओर से रूस से कच्चे तल के आयात पर चिंता जता रहे थे अब सीधे धमकी भरी भाषा में बात कर रहे हैं. नाटो ने बुधवार को कहा कि अगर भारत, चीन और ब्राजील रूस से कच्चा तेल मंगाना जारी रखते हैं तो अमेरिका इन देशों पर 100 फीसदी का सेकेंडरी सैंक्शंस लगा सकता है.  अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी कि रूसी तेल आयात को लेकर पश्चिमी देशों की नीतियों का पालन करना होगा, वरना व्यापारिक और कूटनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. दरअसल रूस से कच्चे तेल के आयात को अमेरिका और नाटो यूक्रेन युद्ध से जोड़कर देखते हैं. अमेरिका का मानना है कि भारत और चीन द्वारा रूस से कच्चा तेल मंगाने की वजह से रूस के वॉर मशीन को फंडिंग होती है. अमेरिका को लगता है कि अगर भारत और चीन रूस से कच्चा तेल न मंगाए तो मॉस्को यूक्रेन से युद्ध का खर्चा न उठा पाएगा और उसे जंग बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. लेकिन अमेरिका की ये चाहत भारत और चीन के लिए अरबों डॉलर के नुकसान का सौदा है. तीन साल में भारत को 11 से 25 अरब डॉलर की बचत भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है. घरेलू उत्पादन बढ़ाने के बावजूद भारत को अपनी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए भारी मात्रा में तेल का विदेशों से आयात करना पड़ता है. भारत अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 35% रूस से आयात करता है, जो सस्ता होने के कारण 2022-2025 के बीच भारत को 10.5 से 25 अरब डॉलर की बचत करा चुका है.  वर्ष 2025 की शुरुआत में भारत ने अपनी कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग 40% हिस्सा रूस से मंगाया. मई-जून 2025 में यह मात्रा लगभग 38–44% के बीच रहा. बता दें कि 2022 से पहले भारत को तेल बेचने वाले बड़े देशों में ईराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल थे. लेकिन 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया तो वह अपने युद्ध के खर्चे को पूरा करने के लिए भारत, चीन और तुर्की जैसे देशों को सस्ता कच्चा तेल बेचने लगा. रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद से भारत को 2022-2024 की अवधि में करीब 11 से 25 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित बचत हुई है.  11 से 16% तक सस्ता पड़ा है कच्चा रूसी तेल  वित्त वर्ष 2023-24 में ही छूट पर रूसी तेल मंगाने से भारत को लगभग 7.9 अरब डॉलर (करीब 65,000 करोड़ रुपये) की बचत हुई. रूस से सस्ता कच्चा तेल मिलने की वजह से भारत का तेल बिल कम रहा और चालू खाते को नियंत्रित करने में सहायता मिली. बचा दें कि रूसी कच्चा तेल, पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं (जैसे मिडिल ईस्ट) की तुलना में औसतन 11 से 16% तक सस्ता मिलता है.  रूस भारत को डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेचता है, जो वैश्विक बाजार मूल्य (ब्रेंट क्रूड) से प्रति बैरल 4-5 डॉलर कम होता है. 2022 से 2025 तक रूसी तेल की औसत कीमत 65-75 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 80-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. सऊदी अरब और इराक जैसे देश ब्रेंट क्रूड के करीब या उससे थोड़ा कम कीमत पर तेल बेचते हैं, यानी 80-85 डॉलर प्रति बैरल. अमूमन सऊदी तेल रूसी तेल से 10-15% महंगा हो जाता है. अगर भारत मध्य पूर्व से समान मात्रा में तेल खरीदता है तो प्रति बैरल 4-5 डॉलर के अतिरिक्त खर्च के कारण सालाना अरबों डॉलर का अतिरिक्त बोझ  भारत पर पड़ेगा. उदाहरण के लिए 20 लाख बैरल प्रतिदिन के आयात पर 4 डॉलर प्रति बैरल का अंतर सालाना ~2.9 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च बनता है. मध्य पूर्व से सप्लाई पर लॉजिस्टिक समस्या मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति हमेशा से भारत के लिए रणनीतिक और लॉजिस्टिक समस्या लेकर आती है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अन्य देशों से तेल की आपूर्ति संभव है, लेकिन यह महंगा होगा और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बढ़ सकती हैं. पश्चिम एशिया में जंग की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से ही अस्थिर है. हाल ही में जब ईरान पर इजरायल ने हमला किया था तो ईरान ने होरमूज जलडमरूमध्य मार्ग को बंद करने की धमकी दी थी. ऐसी स्थिति में भारत के लिए समस्या पैदा हो सकती है.  रूसी तेल की डिलीवरी लागत भी अपेक्षाकृत कम है क्योंकि रूस भारत को समुद्री मार्गों (जैसे ब्लैक सी और बाल्टिक रूट्स) के जरिए तेजी से आपूर्ति करता है.

विंटर सीजन में भोपाल से नोएडा-नवी मुंबई के लिए उड़ानें संभव, एयर कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

भोपाल  देश में इस वर्ष नवीं मुंबई एवं नोएडा के जेवर एयरपोर्ट से हवाई यातायात शुरू हो जाएगा। इन शहरों के लिए पहले ही चरण में भोपाल जुड़ जाएगा। विंटर सीजन में इन शहरों तक सीधी उड़ान मिलने लगेगी। इंडिगो एवं एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इन शहरों के लिए स्लाट लेने में रुचि दिखाई है। अक्टूबर माह के अंत में नया विंटर शेड्यूल लागू होता है। इस शेड्यूल में कई उड़ानों की समय-सारिणी बदल जाती है। कुछ नए रूट जुड़ते हैं। इस बार इंडिगो ने नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सीधी उड़ान शुरू करने की पेशकश की है। इंडिगो ने भोपाल से बंद हो चुकी कोलकाता, लखनऊ एवं गोवा उड़ान भी फिर से प्रारंभ करने पर चर्चा की है। एयरपोर्ट अथारिटी ने इन सभी शहरों तक स्लाट देने की सहमति दी है। नोएडा एयरपोर्ट जल्द ही एयर ट्रेफिक शुरू होने की संभावना है। विमान संचालन शुरू होते ही भोपाल इससे जुड़ जाएगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी विंटर सीजन में भोपाल में दस्तक देगा। कंपनी ने बेंगलुरू तक दो उड़ानें शुरू करने की तैयारी की है। इसके अलावा कंपनी नवीं मुंबई तक सीधी उड़ान शुरू करेगा। नवीं मुंबई एयरपोर्ट से सिंतंबर के अंतिम सप्ताह से उड़ान संचालन शुरू होने की उम्मीद है। यहां से उड़ानें शुरू होने के बाद यात्रियों के पास मुंबई के मुख्य एयरपोर्ट के अलावा नवीं मुंबई तक जाने का भी विकल्प होगा। मुंबई में रोड ट्रैफिक को देखते माना जा रहा है नया एयरपोर्ट यात्रियों के लिए उपयोगी साबित होगा। गोवा और लखनऊ के लिए सीधी उड़ान इंडिगो एयरलाइन गोवा और लखनऊ के लिए सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने की योजना बना रही है। साथ ही, कोलकाता और जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) के लिए भी नई उड़ानें शुरू करने पर विचार कर रही है। ये उड़ानें दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, रायपुर, अहमदाबाद और बैंगलोर के लिए पहले से चल रही उड़ानों के साथ-साथ चलेंगी। जेवर के लिए सीधी उड़ानें शुरू होंगी एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए कोलकाता, नवी मुंबई और जेवर के लिए सीधी उड़ानें शुरू की जाएंगी। इससे भोपाल महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों और नए हवाई अड्डों से जुड़ जाएगा। एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु के लिए दो और नवी मुंबई के लिए एक उड़ान शुरू करेगी। एयर इंडिया की मेनलाइन सर्विस दिल्ली और मुंबई के लिए तीन डेली फ्लाइट्स जारी रखेगी। ऐसा यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए किया जा रहा है। वहीं, फ्लाई बिग अपनी रीजनल उड़ानें रीवा और दतिया के लिए UDAN-RCS प्रोग्राम के तहत जारी रखेगी। इससे छोटे शहरों में भी हवाई सेवा मिलती रहेगी। गौरतलब है कि इन नई उड़ानों से भोपाल से यात्रा करना और भी आसान हो जाएगा। यात्रियों को अब ज्यादा शहरों के लिए सीधी उड़ानें मिलेंगी। इससे समय की बचत होगी और यात्रा आरामदायक होगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी का कहना है कि वे यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इंडिगो की सेवाओं का विस्तार एक अन्य लोकप्रिय एयरलाइन इंडिगो भी अपनी सेवाओं का विस्तार कर रही है। उनके पुणे और गोवा के लिए नई उड़ानें शुरू करने की भी संभावना है। ये नई फ्लाइट इन छुट्टियों के डेस्टिनेशन के लिए उड़ान भरने वाले लोगों के लिए अधिक यात्रा विकल्प प्रदान करेंगी। एयर इंडिया की तैयारी एयर इंडिया भी विंटर शेड्यूल के लिए तैयारी कर रही है। वे प्रति दिन तीन नई उड़ानें शुरू करेंगे। इससे यात्रियों के लिए सुविधाजनक समय पर उड़ान बुक करना आसान हो जाएगा। हवाई अड्डे के निदेशक रामजी अवस्थी ने कहा, 'उड़ानों में वृद्धि का उद्देश्य सर्दियों के मौसम के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को पूरा करना है। अधिक उड़ानों का मतलब बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रियों के लिए अधिक विकल्प हैं। इस बदलाव से व्यवसाय और अवकाश यात्रियों दोनों को लाभ होगा।' छोटे शहर की कनेक्टिविटी बढ़ेगी भोपाल से विंटर सीजन में रीवा, सतना एवं दतिया जैसे शहरों तक भी कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। फ्लाय बिग ने उड़ान योजना के तहत रीवा एवं दतिया उड़ान के फेरे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। अलाइंस एयर भी रीवा एवं इंदौर के लिए उड़ान प्रारंभ कर सकता है। भोपाल सबसे पहले जुड़ेगा     देश के नए एयरपोर्ट्स से भोपाल से सबसे पहले जुड़े इसके प्रयास किए जा रहे हैं। नवीं मुंबई एवं जेवर एयरपोर्ट यात्रियों के लिए उपयोगी होगी। मुंबई एवं दिल्ली जाने वाले यात्रियों को एक उपयोगी विकल्प मिलेगा। बंद हो चुकी कुछ उड़ानें विंटर सीजन में पुन: प्रारंभ होंगी। – रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डायरेक्टर, भोपाल  

इंडिटेक्स ने मध्यप्रदेश के ईएसजी मॉडल और टेक्सटाइल इकोसिस्टम को सराहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्पेन यात्रा के दूसरे दिन का फोकस वैश्विक कपड़ा एवं फैशन क्षेत्र के दिग्गजों से निवेश संवाद का रहा। स्पेन के गैलिसिया स्थित इंडिटेक्स मुख्यालय में हुई बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को “हरित, लागत-प्रतिस्पर्धी और ट्रेसिबल उत्पादन हब” के रूप में प्रस्तुत किया। बैठक में इंडीटेक्स समूह के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापारिक साझेदारी और सतत निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार टेक्सटाइल क्षेत्र में वैश्विक साझेदारियों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इंडिटेक्स जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड की उपस्थिति से राज्य में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और हरित उत्पादन को गति मिलेगी। हम इस साझेदारी को सभी स्तरों पर समर्थन देने को तत्पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार (ईएसजी) (Environment, Social, Governance) मूल्यों को बढ़ावा देती है। वॉटर रिसायक्लिंग, वेस्ट मैनेजमेंट और डीसेंट वर्क स्टैंडर्ड्स राज्य में लागू हैं। इंडिटेक्स की जिम्मेदार सोर्सिंग नीति के साथ मध्यप्रदेश की दृष्टि पूरी तरह से मेल खाती है। प्रदेश के ईएसजी मॉडल की सराहना मध्यप्रदेश सरकार द्वारा विकसित किये जा रहे ईएसजी (पर्यावरण सामाजिक और सुशासन) मॉड्यूल को वैश्विक स्तर पर सकरात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। इंडिटेक्स के श्री जोसे एम रोमाये और मार्था फ्रांकोस रे ने राज्य के ईएसजी मॉडल की सराहना करते हुए इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि मध्यप्रदेश का यह मॉडल स्थिर विकास, समावेशिता और सुशासन के लिये एक रोल मॉडल बन सकता है। उन्होंने प्रदेश में ईएसजी लक्ष्यों को नीति निर्माण में हो रहे प्रयासों और टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश के लिये उपलब्ध इकोसिस्टम की सराहना की। मध्यप्रदेश टेक्सटाइल सेक्टर के लिए आदर्श स्थान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश देश के शीर्ष कच्चा कपास उत्पादक राज्यों में से एक है, जहाँ सालाना लगभग 18 लाख बेल्स (3 लाख मीट्रिक टन) का उत्पादन होता है। राज्य में 15 से अधिक टेक्सटाइल क्लस्टर हैं इसमें इंदौर, मंदसौर, बुरहानपुर, उज्जैन, नीमच जैसे केंद्र टेक्सटाइल उत्पादन में अग्रणी हैं। पीएम मित्रा पार्क: इंडिटेक्स के लिए सुनहरा अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि धार जिले में भारत सरकार की पीएम मित्रा योजना के अंतर्गत विकसित हो रहा टेक्सटाइल मेगा पार्क इंडिटेक्स जैसे वैश्विक ब्रांडों के लिए सस्टेनेबल और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग का आदर्श केंद्र बन सकता है।मुख्यमंत्री डॉ यादव ने इस पार्क में गारमेंटिंग यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। ऑर्गेनिक कॉटन में भागीदारी का आह्वान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश भारत का अग्रणी ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादक है। राज्य में यहां विशेषकर निमाड़ और मालवा क्षेत्रों में बहुतायत में कॉटन का उत्पादन होता है। यहाँ GOTS-सर्टिफाइड किसान समूह सक्रिय हैं, जो इंडिटेक्स की सस्टेनेबिलिटी और ट्रेसिबिलिटी नीतियों के लिए आदर्श साझेदार हो सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फार्मर-टू-फैब्रिक वैल्यू चेन पर इंडिटेक्स के साथ मिलकर काम करने का सुझाव दिया। कॉटन टू कार्बन फाइवर में भी मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहा है। निर्यात और वैश्विक संभावनाएँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य से टेक्सटाइल और गारमेंट का वार्षिक निर्यात 7 हजार करोड़ रूपये से अधिक है, जिसमें यूरोपीय संघ प्रमुख है। उन्होंने बताया कि इंडिटेक्स जैसे ब्रांड की साझेदारी से यह आंकड़ा 10 हजार करोड़ रूपये तक पहुँच सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार और महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। नीतिगत समर्थन और लॉजिस्टिक सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की नवीन औद्योगिक एवं निर्यात नीति – 2025 की विशेषताओं को साझा किया, जिसमें भूमि पर 90% सब्सिडी, मशीनरी पर 40% पूंजी सहायता, ग्रीन टेक्नोलॉजी पर 50% सहायता और ऋण पर ब्याज सब्सिडी आदि शामिल हैं। इंडीटेक्स को साझेदारी का निमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंडिटेक्स को आमंत्रण दिया कि वह पीएम मित्रा पार्क में सप्लाई चेन एंकर के रूप में भागीदारी बने। उन्होंने एक ऑर्गेनिक कॉटन ट्रेसिंग प्लेटफॉर्म और ई एस जी सर्टिफाइड एमएसएमई के साथ वेंडर डेवेलपमेंट प्रोग्राम प्रारंभ करने का सुझाव भी दिया। उल्लेखनीय है किस्पेन की Inditex (Industria de Diseño Textil S.A.) दुनिया की बड़ी फैशन रिटेल कंपनियों में से एक है। इसके अंतर्गत ज़ारा, मैसिमो दुत्ती, बेरशका, बुल एंड बीयर जैसे प्रसिद्ध ब्रांड्स हैं। कंपनी का मुख्यालय गैलिसिया के आर्तेइशो में है। यह अपने फास्ट फैशन मॉडल, ट्रेसिबल सप्लाई चेन और टिकाऊ प्रथाओं के लिए प्रसिद्ध है। भारत में इंडिटेक्स, टाटा समूह के साथ ज़ारा और मैसिमो दुत्ती ब्रांड्स के माध्यम से कार्यरत है।