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अब UPI ट्रांजैक्शन फिंगरप्रिंट या चेहरे से! 8 अक्टूबर से लागू होगा बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन

नई दिल्ली भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. करोड़ों भारतीयों द्वारा हर दिन इस्तेमाल किए जाने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI से भुगतान करने का तरीका हमेशा के लिए बदलने वाला है. अब आपको पेमेंट करते समय 4 या 6 अंकों का पिन याद रखने और उसे डालने की जरूरत नहीं होगी. इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर से उपयोगकर्ता अपने चेहरे (फेशियल रिकग्निशन) और फिंगरप्रिंट के जरिए UPI पेमेंट को मंजूरी दे सकेंगे. यह कदम न केवल भुगतान प्रक्रिया को तेज और आसान बनाएगा, बल्कि इसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित भी बना सकता है. जानकारों का कहना है कि यह भारत के डिजिटल सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां आपकी पहचान ही आपका पासवर्ड बन जाएगी. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), जो UPI नेटवर्क का संचालन करता है, इस अत्याधुनिक सुविधा को मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है. हालांकि, NPCI ने अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस नई तकनीक को लागू करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. क्या है डिटेल NPCI (जो UPI का संचालन करती है) इस फीचर को ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल, मुंबई में प्रदर्शित करने जा रही है। इससे डिजिटल पेमेंट्स और तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नई सुविधा में पेमेंट की ऑथेंटिकेशन (वेरिफिकेशन) भारत सरकार की आधार प्रणाली में दर्ज बायोमेट्रिक डेटा के माध्यम से की जाएगी। यानी, यूजर्स का चेहरा या फिंगरप्रिंट उनके आधार डेटा से मैच किया जाएगा, जिससे पेमेंट की अनुमति मिल जाएगी। RBI के नए दिशानिर्देशों बता दें कि यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें डिजिटल ट्रांजैक्शनों के लिए वैकल्पिक ऑथेंटिकेशन तरीकों की अनुमति दी गई थी। इससे डिजिटल पेमेंट्स में सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव — दोनों को बेहतर बनाने की उम्मीद है। UPI अनुभव होगा और आसान वर्तमान में, हर UPI ट्रांजैक्शन के लिए यूजर्स को 4 या 6 अंकों का PIN दर्ज करना होता है। नई सुविधा लागू होने के बाद, फेस स्कैन या फिंगरप्रिंट सेंसर के जरिए पेमेंट तुरंत ऑथेंटिकेट हो जाएगा। इससे ट्रांजैक्शन समय घटेगा, सुरक्षा बढ़ेगी, और यूजर अनुभव और सहज होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से धोखाधड़ी की संभावना कम होगी, क्योंकि चेहरा या फिंगरप्रिंट किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कॉपी करना मुश्किल है। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए NPCI और UIDAI के बीच मजबूत तकनीकी प्रोटोकॉल अपनाए जाएंगे। कैसे काम करेगी यह नई तकनीक? यह नई बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली पूरी तरह से भारत सरकार की विशिष्ट पहचान प्रणाली ‘आधार’ पर आधारित होगी. सूत्रों में से एक ने स्पष्ट किया कि जब कोई उपयोगकर्ता भुगतान के लिए अपने चेहरे या फिंगरप्रिंट का उपयोग करेगा, तो उसका सत्यापन आधार के साथ संग्रहीत बायोमेट्रिक डेटा से किया जाएगा. इसका मतलब है कि केवल वही व्यक्ति भुगतान को मंजूरी दे पाएगा, जिसका बैंक खाता और UPI आईडी उसके आधार कार्ड से जुड़ा हुआ है. यह प्रक्रिया बेहद सरल होगी. भुगतान करते समय, उपयोगकर्ता को पिन डालने के बजाय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का विकल्प चुनना होगा. इसके बाद फोन का कैमरा या फिंगरप्रिंट स्कैनर सक्रिय हो जाएगा. एक सफल स्कैन के बाद, डेटा को सुरक्षित रूप से आधार सर्वर से मिलान के लिए भेजा जाएगा और मिलान होते ही भुगतान तुरंत सफल हो जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाएगी, जिससे भुगतान का अनुभव सहज और बाधा रहित हो जाएगा. यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा जिन्हें अपना पिन याद रखने में कठिनाई होती है या जो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहते हैं. क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? UPI में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को शामिल करने का यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सीधा परिणाम है. RBI ने भुगतान प्रणालियों में सुरक्षा और नवीनता को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणीकरण के वैकल्पिक तरीकों की अनुमति दी थी. केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और सुरक्षित बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे अपना सकें. मौजूदा पिन-आधारित प्रणाली, हालांकि काफी हद तक सुरक्षित है, फिर भी इसमें कुछ कमजोरियां हैं, जैसे कि कोई आपका पिन देख सकता है या फिशिंग के जरिए उसे चुरा सकता है. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण इन जोखिमों को लगभग समाप्त कर देता है, क्योंकि हर व्यक्ति का फिंगरप्रिंट और चेहरा अलग होता है.  

वीडी के हटाए गए संगठन मंत्री वापसी के संकेत, MP भाजपा कार्यकारिणी में बड़ा बदलाव संभव

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा का काम अब लगभग पूरा हो चुका है। अब जल्द टीम का ऐलान होगा। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मिलकर प्रदेश पदाधिकारियों के नामों पर चर्चा की और लिस्ट तैयार की। अब यह लिस्ट केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि जल्द इस लिस्ट पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से फाइनल मुहर लग जाएगी।  हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बने लगभग 100 दिन पूरे होने वाले हैं। उन्हें 2 जुलाई को अध्यक्ष बनाया गया था और तब से वे पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा की टीम के साथ काम कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों से वे लगातार कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी दिवाली से पहले घोषित हो सकती है। इसके बाद एमपी बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी बैठक होगी।  हेमंत खंडेलवाल की टीम में होंगे 60 फीसदी नए चेहरे वीडी शर्मा मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और उन्होंने 5 साल 4 महीने 17 दिन तक इस पद पर काम किया। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना के कारण उनका कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया गया था, फिर संगठन चुनाव में देरी के कारण उनका कार्यकाल बढ़ता गया। वीडी शर्मा की टीम में रहे 8 पदाधिकारी अब सांसद बन चुके हैं, जबकि 8 अन्य विधायक बन चुके हैं।  वीडी की टीम में रहे 60% चेहरे बाहर होंगे वीडी शर्मा मध्य प्रदेश भाजपा के 5 साल 4 महीने 17 दिन तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना संकट के चलते उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था। फिर संगठन चुनाव में हुई देरी के कारण उनका कार्यकाल अघोषित रूप से बढ़ता गया। वीडी शर्मा के साथ प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल रहे 8 पदाधिकारी सांसद और 8 पदाधिकारी विधायक बन चुके हैं। किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी सांसद और मंत्री बन गए हैं। नई कार्यकारिणी में टीम वीडी में शामिल रहे पदाधिकारियों में से 60% चेहरे बदले जाएंगे। पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी संभव सितंबर 2021 में बीजेपी ने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को संभागीय संगठन मंत्री पद से हटाकर प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य बनाया था। इन संगठन मंत्रियों में केशव भदौरिया को छोड़कर 5 नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में एडजस्ट किया था। अब बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी में इन पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी हो सकती है। इस बार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम में करीब 60% नए चेहरे होंगे। इसके अलावा किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी अब सांसद और मंत्री बन गए हैं। सितंबर 2021 में बीजेपी ने अपने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। उस समय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को हटाकर उन्हें प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बना दिया था। इनमें से पांच नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में जगह दी थी, लेकिन केशव भदौरिया को इसमें शामिल नहीं किया गया था। अब बीजेपी की नई टीम में इन पुराने मंत्रियों की फिर से वापसी हो सकती है। मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी में इतने नेता मध्यप्रदेश बीजेपी की मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी के प्रदेश उपाध्यक्ष में एक मंत्री, तीन सांसद और दो विधायक हैं। वहीं, प्रदेश महामंत्री में दो विधायक और एक सांसद हैं। साथ ही, प्रदेश मंत्री में दो सांसद और एक विधायक है। वहीं, संयुक्त कोषाध्यक्ष में अनिल जैन कालूहेड़ा से विधायक हैं।    पद (Post) नाम (Name) पद/कार्यक्षेत्र (Designation/Field) प्रदेश उपाध्यक्ष (State Vice President) नागर सिंह चौहान कैबिनेट मंत्री   आलोक शर्मा सांसद (भोपाल)   संध्या राय सांसद (भिंड)   सुमित्रा वाल्मीकि राज्यसभा सांसद   ललिता यादव विधायक   चिंतामणि मालवीय विधायक   चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी पूर्व विधायक (मेहगांव)   कांत देव सिंह     सीमा सिंह जादौन     जीतू जिराती पूर्व विधायक   बहादुर सिंह चौहान पूर्व विधायक   पंकज जोशी     श्याम महाजन     बृजराज सिंह चौहान पूर्व विधायक — — — प्रदेश महामंत्री (State General Secretary) कविता पाटीदार राज्यसभा सांसद   भगवानदास सबनानी विधायक   हरिशंकर खटीक विधायक   शरलेन्दु तिवारी पूर्व विधायक   रणवीर सिंह रावत पूर्व विधायक — — — प्रदेश मंत्री (State Secretary) लता वानखेड़े सांसद (सागर)   आशीष दुबे सांसद (जबलपुर)   मनीषा सिंह विधायक   रजनीश अग्रवाल     प्रभुदयाल कुशवाहा     राजेश पांडेय     नंदिनी मरावी पूर्व विधायक   राहुल कोठारी     संगीता सोनी     जयदीप पटेल     केशव सिंह भदौरिया     क्षितिज भट्ट     योगेश पाराशर   — — — कोषाध्यक्ष (Treasurer) अखिलेश जैन CA संयुक्त कोषाध्यक्ष (Joint Treasurer) अनिल जैन कालूहेड़ा विधायक प्रदेश कार्यालय मंत्री (State Office Secretary) राघवेन्द्र शर्मा   कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के भी बदलेंगे अध्यक्ष  बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी में जगह पाने के लिए नेताओं ने बड़े नेताओं से सिफारिशें करवाई हैं। सबसे ज्यादा कोशिश प्रदेश महामंत्री बनने के लिए की गई है। इसके अलावा, प्रदेश कार्यालय प्रभारी और कार्यालय मंत्री के लिए भी नेताओं ने नए प्रदेश अध्यक्ष से कई बार मुलाकात की है। बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के अध्यक्ष भी बदलेंगे। ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाह अब मध्यप्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री बन गए हैं। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दर्शन सिंह होशंगाबाद से सांसद बन गए हैं। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष माया नारोलिया राज्यसभा सांसद बन चुकी हैं। इन बदलावों के साथ-साथ युवा मोर्चा, एससी मोर्चा और एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जाएंगे।      

रुपया बचाने को एक्टिव हुआ RBI, गिरावट थामने के लिए बनाया रणनीतिक ब्लूप्रिंट

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को गिरने से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप (Buy/Sell Swap) के जरिए विदेशी मुद्रा बाजार (forex market) में दखल दिया. इस कार्रवाई के बाद रुपये की कीमत 88.77 प्रति डॉलर पर टिकी रही, जो उसके सर्वकालिक निचले स्तर 88.80 के बेहद करीब थी. ट्रेडर्स का कहना है कि RBI ने एक साथ स्पॉट मार्केट और फॉरवर्ड मार्केट में दखल देकर डॉलर की उपलब्धता और रुपये की स्थिरता दोनों को नियंत्रित करने की कोशिश की. जानिए आखिर ये ‘बाय/सेल स्वैप’ होता क्या है और इससे कैसे रुकती है रुपये की गिरावट. क्या होता है RBI का ‘डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप’ ‘बाय/सेल स्वैप’ एक ऐसा सौदा होता है जिसमें RBI अभी के समय में (स्पॉट मार्केट में) डॉलर खरीदता है, लेकिन साथ ही यह तय कर लेता है कि भविष्य की किसी तारीख पर (फॉरवर्ड मार्केट में) वही डॉलर वापस बेच देगा. सीधे शब्दों में कहें तो यह एक तरह का टेंपरेरी ट्रांजेक्शन होता है, जिसका मकसद बाजार में अचानक आई डॉलर की मांग को पूरा करना और रुपये पर दबाव को कम करना होता है. इस प्रक्रिया में RBI न तो स्थायी रूप से डॉलर जमा करता है और न ही अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा बदलाव लाता है. बस इतना सुनिश्चित करता है कि डॉलर की कमी से रुपया कमजोर न पड़े. इससे रुपये की गिरावट कैसे रुकती है जब बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है, जैसे तेल कंपनियां, इंपोर्टर्स या फॉरेन इन्वेस्टर्स एक साथ डॉलर खरीदने लगते हैं, तो डॉलर की कीमत बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है. ऐसे समय में RBI बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर डॉलर की कीमत को स्थिर रखता है. अगर RBI डॉलर बेचता है तो बाजार में डॉलर की भरमार हो जाती है और रुपया संभल जाता है. अगर RBI ‘बाय/सेल स्वैप’ करता है, तो वह अस्थायी तौर पर डॉलर खरीदता है लेकिन भविष्य में बेचने का वादा करता है. इससे बाजार में भरोसा बनता है कि RBI रुपया कमजोर नहीं होने देगा, जिससे ट्रेडर्स रुपये पर सट्टा लगाना कम कर देते हैं. फॉरवर्ड प्रीमियम क्यों घटा RBI की इस स्वैप कार्रवाई के बाद डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम यानी भविष्य के सौदों पर ब्याज दरें कम हो गईं. 1-वर्षीय इम्प्लाइड यील्ड 6 बेसिस पॉइंट गिरकर 2.23% पर आ गई, जो एक महीने में सबसे निचला स्तर है. यह संकेत देता है कि बाजार को भरोसा है कि RBI स्थिति पर नियंत्रण रखेगा और आने वाले समय में रुपये में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. क्यों जरूरी है RBI की ये दखलअंदाजी भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और डॉलर पर निर्भरता काफी ज्यादा है. ऐसे में डॉलर का महंगा होना सीधा असर महंगाई और आयात लागत पर डालता है. RBI के समय रहते कदम उठाने से एक ओर रुपये की स्थिरता बनी रहती है, तो दूसरी ओर विदेशी निवेशकों को भी भरोसा मिलता है कि भारतीय बाजार में वोलैटिलिटी सीमित रहेगी.

नेतन्याहू का दावा: ईरान की मिसाइल रेंज में अमेरिका के प्रमुख शहर और ट्रंप का आवास

तेहरान  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि जल्द ही अमेरिका के बड़े शहर ईरानी एटॉमिक गन के दायरे में होंगे. एक इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि ईरान 8000 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली इंटर कांटिनेन्टल बैलेस्टिक मिसाइलें (ICBM) बना रहा है. उन्होंने कहा कि अगर इन मिसाइलों की क्षमता 3000 किलोमीटर और बढ़ा दी जाए तो इसके रेंज में न्यूयॉर्क और वाशिंगटन जैसे शहर होंगे.  यही नहीं मार-ए-लागो भी ऐसे मिसाइल के रेंज में आ जाएगा. मार-ए-लागो फ्लोरिडा के पाम बीच में स्थित एक भव्य रिसॉर्ट है. यहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का एक घर भी है. 17 एकड़ जमीन पर फैला मार-ए-लागो डोनाल्ड ट्रंप का निजी आवास रहा है. यहां विलासिता की तमाम सुविधाएं मौजूद हैं.  इसी साल जून में ईरान से जंग लड़ चुके इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हथियारों को लेकर ईरान की महात्वाकांक्षा से अमेरिका और दुनिया को आगाह किया.  उन्होंने एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के मंसूबों के बारे में सतर्क करते हुए कहा कि ईरान 8000 किलोमीटर तक मार कर सकने में सक्षम इंटर कांटिनेन्टल बैलेस्टिक मिसाइलें बना रहा है.  नेतन्याहू ने कहा कि अगर ईरान भविष्य में इस क्षमता में 3000 किलोमीटर का इजाफा और कर लेता है तो उसके पास 11000 किलोमीटर तक परमाणु हमले करने की क्षमता होगी.  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी बात को समझाते हुए कहा कि ईरान के पास इस क्षमता के होने का क्या मतलब है. इसका मतलब यह है कि अमेरिका के बड़े शहर जैसे न्यूयॉर्क सिटी, वाशिंगटन, बॉस्टन और मियामी यहां तक कि मार-ए-लागो भी ईरान के एटॉमिक गन के दायरे में आ जाएगा.  बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने ईरान के तीन यूरेनियम संवर्धन केंद्रों नतांज, इस्फहान और फोर्दो पर बी-2 बॉम्बर विमानों से हमला कर इसे तहत-नहस करने का दावा किया था. लेकिन ईरान ने कहा था कि यूरेनियम एनरिचमेंट एक विज्ञान है और इसे कोई खत्म नहीं कर सकता है.  इसके बाद पश्चिमी दुनिया में कयास लगाया जा रहा है कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को फिर से आगे बढ़ा सकता है. हालांकि ईरान ने कहा है कि वो परमाणु बम नहीं चाहता है कि लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट से उसे कोई नहीं रोक सकता है.  ईरान का ICBM प्रोग्राम ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम मध्य पूर्व में सबसे बड़ा और एडवांस है. ईरान इस पर 1980 के दशक से ही काम कर रहा है. यह कार्यक्रम मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) द्वारा संचालित होता है और इसमें शॉर्ट-रेंज से लेकर मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें (MRBM) शामिल हैं. हालांकि विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का विकास अभी प्रारंभिक चरण में है. क्या होता है ICBM, क्यों होते हैं खतरनाक? ICBM एक लंबी दूरी की मिसाइल है, जो 5,500 किलोमीटर से अधिक रेंज तक वारहेड (परमाणु, रासायनिक या पारंपरिक) ले जा सकती है. यह  एक महादेश से दूसरे महादेश पर हमला करने के लिए डिजाइन की जाती है. यह मिसाइल पृथ्वी की कक्षा में उड़ान भरकर लक्ष्य तक पहुंचती है.  ICBM मिसाइल हाइपरसोनिक गति, मल्टिपल वारहेड्स और सटीक गाइडेंस सिस्टम के कारण बेहद खतरनाक मानी जाती हैं. अगर एशिया से हमला किया जाए तो ये मिसाइलें यूएस, यूरोप जैसे दूरस्थ टारगेट को निशाना बना सकती हैं. हालांकि मार्डन वारफेयर में ICBM का इस्तेमाल नहीं हुआ है. 

रियल एस्टेट में बूम! ₹35,000 करोड़ के निवेश में भारतीय निवेशक आगे, विदेशियों को दी मात

मुंबई घरेलू पूंजी के सहारे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) के दौरान इस सेक्टर में 4.3 बिलियन डॉलर (₹35,000 करोड़) का बड़ा निवेश हुआ है. यह आंकड़ा पिछले पांच सालों के औसत निवेश को पार कर गया है.  यह निवेश पिछले पांच वर्षों के जनवरी से सितंबर की अवधि के औसत 4 बिलियन डॉलर के प्रवाह से अधिक रहा है, जैसा कि कोलियर्स इंडिया (Colliers India) की एक रिपोर्ट में बताया गया है. यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत मज़बूती और रियल एस्टेट बाज़ार में निवेशकों के लगातार विश्वास को दर्शाती है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेश Q3 2025 (जुलाई-सितंबर तिमाही) में $1.3 बिलियन तक पहुंच गया, जो कि साल-दर-साल 11 प्रतिशत की वृद्धि है'.  घरेलू निवेशकों का बढ़ता दबदबा रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू संस्थागत पूंजी में साल-दर-साल (YoY) 52 प्रतिशत की भारी उछाल दर्ज की गई है, जो $2.2 बिलियन तक पहुंच गई है. यह भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेशकों की बढ़ती गहराई और रुचि को दर्शाता है. घरेलू निवेशकों की सबसे अधिक रुचि ऑफिस और आवासीय (Residential) सेगमेंट में दिखी. तिमाही के दौरान घरेलू निवेश में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा अकेले ऑफिस संपत्तियों का रहा, जो तैयार और निर्माणाधीन दोनों तरह की वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए लगातार भूख को दर्शाता है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "मुख्य एसेट क्लास में निरंतर मांग और घरेलू पूंजी की बढ़ती गहराई के साथ, निवेश की गति स्थिर रहने की संभावना है, भले ही वैश्विक चुनौतियों के कारण विदेशी निवेशक निकट भविष्य में सतर्क बने रहें." ऑफिस सेगमेंट और प्रमुख शहर ऑफिस सेगमेंट में निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है, जो वर्ष 2024 के स्तर के लगभग बराबर है, 2025 के पहले नौ महीनों में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश $1.5 बिलियन तक पहुंच गया, जो इस अवधि के कुल निवेश का 35 प्रतिशत है. पिछली छमाही की तुलना में Q3 2025 में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश में जबरदस्त उछाल आया, जो साल-दर-साल 27 प्रतिशत बढ़कर $0.8 बिलियन हो गया.  कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नाडार ने बताया, "ऑफिस संपत्तियों ने कुल तिमाही प्रवाह का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाया, जिसका नेतृत्व तैयार वाणिज्यिक संपत्तियों के उल्लेखनीय अधिग्रहणों ने किया, खासकर चेन्नई और पुणे में." प्रमुख शहर और भविष्य की रणनीति मुंबई इस साल निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा, करीब $0.8 बिलियन के प्रवाह के साथ, मुंबई ने 2025 में कुल संस्थागत निवेश का 19 प्रतिशत आकर्षित किया, जिसका मुख्य कारण ऑफिस और आवासीय संपत्तियों में बड़ी डील्स थीं. इसके बाद बेंगलुरु का स्थान रहा, रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि घरेलू संस्थान निरंतर पूंजी का स्थिर स्रोत बने रहने की उम्मीद है.

सीजनल पॉल्यूशन रोकने हरियाणा में दो जिलों में वाहन और डीजल जनरेटर पर रोक

चंडीगढ़  हरियाणा के NCR शहरों फरीदाबाद और गुरुग्राम में प्रदूषण से छुटकारा पाने के लिए सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इन दोनों शहरों में ठंड के दिनों में आमतौर पर सबसे खराब वायु गुणवत्ता (AQI) स्तर दर्ज होती है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने 2025-26 के लिए विंटर सीजन वर्क मेगा प्लानिंग तैयार की है। इस मेगा प्लान के तहत गाड़ियों और उद्योग से होने वाले प्रदूषण के साथ ही सड़कों और निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल की जांच की जाएगी। HSPCB के इस मेगा प्लान से प्रदेश में हो रहे प्रदूषण पर रोक लगाई जाएगी। HSPCB का मेगा प्लान क्या है?     HSPCB के मेगा प्लान में पुरानी गाड़ियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के संचालन पर रोक लग सकती है। अधिकारियों द्वारा शहर में इस तरह की 15 लाख गाड़ियों की पहचान की गई है। इसे लेकर जिला परिवहन विभाग और यातायात पुलिस द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है।     सरकार ने सभी बिल्डरों और डेवलपर्स को 500 वर्ग मीटर से बड़े प्रोजेक्ट्स को राज्य के धूल नियंत्रण पोर्टल पर पंजीकरण करने का निर्देश दिया है। HSPCB इसका निरीक्षण करेगा। नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा।     गुरुग्राम और फरीदाबाद दोनों शहरों में प्रशासन ने डीजल जनरेटर (DG) पर भी रोक लगाने का आदेश दिया है, जबकि उद्योगों को तुरंत ग्रीन फ्यूल अपनाने के लिए कहा है। अगर कोई व्यक्ति निर्देशों का पालन नहीं करेगा, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।     गुरुग्राम नगर निगम ने धुंध से छुटकारा पाने के लिए अपने जल छिड़काव यंत्रों की संख्या 8 से बढ़ाकर 40 करने का फैसला लिया है। इसके अलावा 29 नए सड़क सफाई यंत्र जोड़ेगा, जिसकी कुल संख्या 54 हो जाएगी। मुख्य निर्माण जगहों पर 850 से ज्यादा एंटी-स्मॉग गन की व्यवस्था की जाएगी। इसी तरह फरीदाबाद अपने स्प्रिंकलरों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 कर देगा। 15 रोड स्वीपर कनेक्ट करेगा और मुख्य प्रदूषण वाली जगहों पर 190 स्मॉग गन की व्यवस्था की जाएगी। योजना के सबसे बड़े फैसलों में से एक है 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को सड़कों से हटाना। गुरुग्राम और फरीदाबाद में ऐसे लगभग 15 लाख वाहनों की पहचान की गई है। जिला परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने इन पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य ट्रैफिक से होने वाले वायु प्रदूषण में भारी कमी लाना है। निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। अब 500 वर्ग मीटर से बड़े सभी निर्माण प्रोजेक्ट्स को राज्य सरकार के धूल नियंत्रण पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। HSPCB नियमित निरीक्षण करेगा और नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम निर्माण क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही दोनों जिलों में डीजल जनरेटर के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। सभी औद्योगिक इकाइयों को तुरंत ग्रीन फ्यूल अपनाने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न करने वाले उद्योगों पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम उद्योगों से होने वाले धुएं और जहरीली गैसों के उत्सर्जन को कम करने की दिशा में उठाया गया है। धुंध और स्मॉग से निपटने के लिए दोनों नगर निगमों ने एंटी-स्मॉग गनों और सफाई यंत्रों की संख्या में इजाफा किया है। गुरुग्राम में जल छिड़काव मशीनों की संख्या 8 से बढ़ाकर 40 की जा रही है, साथ ही 29 नए सड़क सफाई यंत्र शामिल किए जा रहे हैं, जिससे कुल संख्या 54 हो जाएगी। 850 से अधिक एंटी-स्मॉग गन प्रमुख निर्माण स्थलों पर तैनात की जाएंगी। इसी तरह, फरीदाबाद में भी स्प्रिंकलरों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 की जाएगी, 15 नई रोड स्वीपर मशीनें जोड़ी जाएंगी और 190 स्थानों पर स्मॉग गन लगाई जाएंगी। प्रशासन ने दोनों शहरों को "कम उत्सर्जन क्षेत्र" (Low Emission Zone) घोषित किया है, जहां उच्च स्तर का प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इन क्षेत्रों में सख्त निगरानी की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीधी कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि इस साल वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। कार्य योजना का अमल शुरू हो चुका है और संबंधित विभागों को समन्वय में रहकर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, उद्योगपतियों और आमजन को भी जागरूक किया जा रहा है ताकि वे प्रदूषण नियंत्रण में प्रशासन का सहयोग करें। 1. 15 लाख डीजल-पेट्रोल वाहन नहीं चलेंगे इस योजना में पुराने वाहनों पर कड़ी कार्रवाई शामिल है। 10 साल से पुराने डीजल वाहन और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहन सड़कों से हटा दिए जाएंगे। अधिकारियों ने दोनों जिलों में लगभग 15 लाख ऐसे वाहनों की पहचान कर ली है। जिला परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। 2. बिल्डरों का धूल नियंत्रण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होगा निर्माण संबंधी प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़े कदम के तहत, सभी बिल्डरों और डेवलपर्स को 500 वर्ग मीटर से बड़े प्रोजेक्ट्स को राज्य के धूल नियंत्रण पोर्टल पर पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया है। एचएसपीसीबी नियमित निरीक्षण करेगा और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। 3. डीजल जनरेटर पर रोक रहेगी दोनों जिलों गुरुग्राम और फरीदाबाद प्रशासन ने डीजल जनरेटर (DG) सेटों पर भी पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया है, जबकि उद्योगों को तुरंत ग्रीन फ्यूल अपनाने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। 4. दोनों जिलों में एंटी स्मॉग गन तैनात होंगी धुंध से निपटने के लिए, गुरुग्राम नगर निगम अपने जल छिड़काव यंत्रों की संख्या 8 से बढ़ाकर 40 करेगा तथा 29 नए सड़क सफाई यंत्र जोड़ेगा, जिससे कुल संख्या 54 हो जाएगी। प्रमुख निर्माण स्थलों पर 850 से अधिक एंटी-स्मॉग गन तैनात की जाएंगी।इसी प्रकार, फरीदाबाद अपने स्प्रिंकलरों की संख्या 25 से बढ़ाकर 38 करेगा, 15 रोड स्वीपर जोड़ेगा, तथा प्रमुख प्रदूषण वाले स्थानों पर 190 स्मॉग गन तैनात करेगा। ​​​​​​​क्यों लिया फैसला? गुरुग्राम और फरीदाबाद … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस में हुआ जन कल्याण के लिए मंथन

  प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति और सुशासन की व्यवस्था लागू करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कांफ्रेंस जन कल्याण के विषयों पर मंथन की दृष्टि से सार्थक रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की पूर्ति के लिए सुशासन की व्यवस्था लागू करते हुए हम सभी कदम से कदम मिलाकर चलें। मध्यप्रदेश में जहां मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास, नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, सांदीपनि विद्यालयों की व्यवस्था सुदृढ़ बनाने और पीएम एक्सीलेंस कॉलेज के माध्यम से बेहतर शिक्षा के कदम उठाए गए हैं, वहीं प्रदेश में अनेक नवाचार भी हुए हैं। गत दो वर्ष में प्रदेश में अनेक प्रमुख नवाचार हुए इनमें एयर एंबुलेंस सेवा की शुरुआत, स्वतंत्रता दिवस पर जिला स्तर पर मंत्रीगण द्वारा जिले के विकास पर केंद्रित भाषण की प्रस्तुति, प्रदेश में औद्योगीकरण को प्राथमिकता, केन बेतवा परियोजना और पार्वती काली सिंध परियोजनाओं की बाधाएं समाप्त कर नदी जोड़ो परियोजनाओं के लिए पहल आदि प्रमुख हैं। इसके साथ ही जनसुविधा के लिए पर्यटन हवाई सेवा, ड्रोन तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहन और ई पंजीयन सहित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए सुशासन के अंतर्गत विभिन्न व्यवस्थाएं विकसित की गईं। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कांफ्रेंस के प्रथम दिन समस्त सत्रों के पश्चात कलेक्टर्स और कमिश्नर्स को जन कल्याण की अपेक्षा के साथ आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी अधिकारी विजन-2047 के अंतर्गत प्रथम पांच वर्ष की योजना पर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ, एसपी, डीएफओ अपने जिले में टीम बनाकर कार्य करें।     कलेक्टर, सीईओ एवं अन्य अधिकारी अनिवार्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि विश्राम करें।     सीएम हेल्पलाईन की शिकायतों के निराकरण पर ध्यान दिया जाए।     जनसुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी, इसे गंभीरता से लें।     किसी भी जिले से जन प्रतिनिधियों से संवादहीनता की शिकायत नहीं आना चाहिए।     जिलों में नवाचार की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।     जिन योजनाओं में सुधार की गुंजाईश है, उन पर कार्य किया जाए।     गीता भवन योजना में गति लाई जाए, नगरों में ये भवन सामाजिक सद्भाव बढ़ाएंगे।     साडा के कार्यों की समीक्षा की जाए।     उद्योगों के लिए एमओयू के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।     पुरानी बंद मिलों की भूमि का यथाशीघ्र निपटारा किया जाए।     धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दें, प्रत्येक जिले में इस दिशा में संभावनाओं को साकार करें।     लघु, कुटीर उद्योगों को प्राथमिकता देते हुए कार्य हो।     भू-अर्जन की प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाए।     राजस्व प्रकरणों का निराकरण के तहत राजस्व महाभियान में जनवरी 24 से आज तक एक करोड़ 8 लाख प्रकरणों का निराकरण हो चुका है। यह कार्यवाही निरंतर जारी रहे, राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रखे जाएं।     कृषि क्षेत्र में भावान्तर योजना के पंजीयन पर ध्यान दें। वर्तमान में डेढ़ लाख किसानों के पंजीयन हो चुके हैं।     प्रत्येक जिले में जैविक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें। उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित करें।     गुलाब की खेती को धार्मिक शहरों के करीब प्रोत्साहन दिया जाए।     ड्रिप स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया जाए। प्रत्येक जिले में सप्ताह में एक दिन जैविक एवं प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए बाजार नियत होना चाहिए।     स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें। बड़े अस्पतालों के साथ प्राईवेट मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल में निर्मित किए जाएं।     कुपोषण के विरूद्ध अभियान तेज किया जाए।     जिलों में स्वास्थ्य विभाग एवं महिला एवं बाल विकास के अमले में पर्याप्त समन्वय रहे।     नगरीय निकायों के क्षेत्र में शहरी यातायात सुधारें।     बड़े शहरों में फ्लाई ओवर बनवाएं।     अवैध कॉलोनियों पर नियंत्रण की कार्यवाही की जाए।  

पाक की हार और झूठी कहानियां! वायुसेना चीफ ने पेश किए 6 ठोस सबूत

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हर युद्ध में झूठी और आकर्षक कहानियां गढ़ता है, ताकि अपनी हार छिपा सके. ऑपरेशन सिंदूर जैसे हाल के संघर्ष में भी पाक ने झूठ फैलाए. वायुसेना प्रमुख का यह बयान पाक की प्रोपेगैंडा मशीनरी पर सटीक है. 6 ऐतिहासिक फैक्ट्स से समझते हैं कि पाकिस्तान कैसे युद्धों में झूठ बुनता रहा है. 1. 1947-48 कश्मीर युद्ध: 'आजादी की लड़ाई' का झूठ पाकिस्तान ने कबायली हमले को 'आजादी की लड़ाई' बताया, लेकिन यह पाक आर्मी समर्थित आक्रमण था. पाक ने दावा किया कि स्थानीय विद्रोह है, लेकिन दस्तावेजों से साबित हुआ कि पाक ने हजारों सैनिक भेजे. भारत ने श्रीनगर बचाया, लेकिन पाक ने अपनी हार को 'नैतिक जीत' कहा. 2. 1965 युद्ध: 'ग्रैंड स्लैम' की काल्पनिक जीत पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम' को सफल बताया, दावा किया कि जम्मू पर कब्जा कर लिया. लेकिन भारत ने पलटवार से लाहौर पर हमला किया. पाक ने प्रोपेगैंडा में कहा कि भारत हार गया, जबकि ताशकंद समझौते में पाक ने कब्जे वाले इलाके छोड़े. 'जीत की कहानी' पाक मीडिया ने फैलाई. 3. 1971 युद्ध: सैन्य हार को 'भारतीय आक्रमण' का नाम पाकिस्तान ने पूर्वी पाक (अब बांग्लादेश) में हार को 'भारतीय साजिश' कहा. 93,000 सैनिकों की सरेंडर को नकारा. पाक ने दावा किया कि युद्ध 'नैतिक जीत' था, लेकिन शिमला समझौते में हार स्वीकार की. प्रोपेगैंडा ने कहा कि पाक ने 'इस्लामी एकता' बचाई. 4. 1999 कारगिल युद्ध: 'मुजाहिदीन' का झूठा नाम पाकिस्तान ने कारगिल घुसपैठ को 'कश्मीरी मुजाहिदीन' की लड़ाई बताया, सेना की संलिप्तता नकारा. लेकिन पकड़े और मारे गए पाक सैनिकों के दस्तावेजों से साबित हुआ कि पाक आर्मी ने घुसपैठ की. नवाज शरीफ ने बाद में माना, लेकिन प्रोपेगैंडा ने 'जीत' का दावा किया. 5. 2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक: 'दो जेट गिराए' का झूठ बालाकोट हमले के बाद पाक ने दावा किया कि दो भारतीय जेट गिराए. लेकिन केवल एक मिग-21 गिरा. पाक का एफ-16 भी नष्ट हुआ. पाक ने विंग कमांडर अभिनंदन की गिरफ्तारी को 'बड़ी जीत' बताया, लेकिन सच्चाई सामने आई. 6. 2025 ऑपरेशन सिंदूर: 'राफेल गिराया' की फर्जी वीडियो हाल के ऑपरेशन सिंदूर में पाक ने दावा किया कि भारतीय राफेल जेट गिराए, अमृतसर पर हमला किया. लेकिन पीआईबी ने साबित किया कि ये फर्जी वीडियो और एआई-जनरेटेड कहानियां हैं. पाक मीडिया ने 'सिविलियन मौतों' का प्रोपेगैंडा फैलाया, लेकिन सच्चाई उलट थी.

डॉ. मोहन यादव का स्वास्थ्य विभाग को संदेश – सुविधाएं बढ़ाएं, कमजोरियों पर करें काम

कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के साथ कमियों को दूर करने का करें प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वास्थ्य एवं पोषण पर कलेक्टर्स के साथ हुआ व्यापक संवाद कलेक्टर्स ने साझा किये अपने जिलों के नवाचार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अनेक नई सुविधाए प्रारंभ की गई हैं और कमियों को दूर करने का भी पूरा प्रयास किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टर्स से आयुष्मान कार्ड धारकों को पूरा लाभ दिलाने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच को आसान बनाने की बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न जिलों में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किये जा रहे हैं। पीपीपी मॉडल पर भी अनेक कॉलेज प्रारंभ हुए हैं। वर्तमान में तीस से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। शीघ्र इनकी संख्या 50 हो जाएगी। प्रदेश के लगभग प्रत्येक जिले के नागरिकों को मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि आवंटन की कार्यवाही प्रचलन में है, उसे अंतिम रूप देकर भूमि आवंटन का कार्य पूर्ण किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में नागरिकों के हित में सर्वाधिक अनुकूल वातावरण निर्मित किए जाने का प्रयास है।‍मुख्यमंत्री डॉ. यादव कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस के प्रथम दिन द्वितीय सत्र 'स्वास्थ्य एवं पोषण' को संबोधित कर रहे थे। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य  संदीप यादव ने राज्य में स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति को सुदृढ़ करने कलेक्टर्स के साथ विस्तृत चर्चा की। सत्र में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग (एनसीडी), क्षय उन्मूलन और सिकल सेल उन्मूलन के लिए ठोस रणनीति पर विमर्श किया गया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य  यादव ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दिशा में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत शिशुओं, किशोरियों, गर्भवती और धात्री महिलाओं की नियमित हीमोग्लोबिन जांच सुनिश्चित की जाए। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (VHSND) में गुणवत्तापूर्ण जांच, टीकाकरण और ANMOL 2.0 पर सटीक डेटा एंट्री की व्यवस्था की जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के तहत उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, उपचार और बर्थ वेटिंग होम्स में सुरक्षित प्रसव की अनिवार्यता पर जोर दिया। प्रमुख सचिव  यादव ने कहा कि पोषण ट्रैकर के प्रभावी उपयोग, छह माह तक केवल स्तनपान, मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्द्धन कार्यक्रम (MMBASK) के अंतर्गत कुपोषित बच्चों के प्रबंधन तथा आशा, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गृह आधारित सेवाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रसूति सहायता योजनाओं के भुगतान में समयबद्धता बनाए रखना सुनिश्चित करें। गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की रोकथाम के लिए प्रमुख सचिव  यादव ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह, फैटी लीवर और तीन प्रमुख कैंसर की स्क्रीनिंग को अनिवार्य बताया। उन्होंने एनसीडी पोर्टल पर सभी प्रविष्टियों की अद्यतन स्थिति बनाए रखने, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, ईट राइट अभियान, तेल की खपत में 10 प्रतिशत कमीं, फिट इंडिया और योग जैसी गतिविधियों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने कहा कि क्षय उन्मूलन के लिए एक्स-रे और अन्य मशीनों से जांच की जाए, निक्षय पोर्टल पर सभी प्रकरणों की सूचना दर्ज हो, उपचार और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए तथा निक्षय मित्रों के माध्यम से पोषण सहायता और डीबीटी समय पर प्रदान की जाए। इसी प्रकार, सिकल सेल उन्मूलन अभियान के अंतर्गत स्क्रीनिंग, कार्ड वितरण, हाइड्रोक्सीयूरिया दवा की उपलब्धता, न्यूमोकोकल वैक्सीनेशन और सिकल मित्र पहल के माध्यम से जनभागीदारी और काउंसलिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभागों के बीच संयुक्त कार्ययोजना बनाकर समन्वय को सशक्त करें। VHSND के गुणवत्तापूर्ण आयोजन, उपकरणों के सार्थक उपयोग, e-KYC और DBT सक्षमता, PMSMA संचालन, नवजातों के गृह आधारित फॉलो-अप, मातृ एवं शिशु मृत्यु की शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग, ईट राइट, फिट इंडिया, योग और खेलकूद के माध्यम से जन-जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सुपोषित ग्राम पंचायतों के लिए स्थानीय खाद्य विविधता को प्रोत्साहित करने, आंगनवाड़ी केंद्रों के नियमित संचालन, डेटा सत्यापन, और सिकल मित्र तथा निक्षय मित्र के माध्यम से फूड बास्केट वितरण जैसी गतिविधियों को परिणाममुखी बनाया जाये। उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों ने दीं अपनी प्रस्तुतियाँ बालाघाट ने शिशु एवं मातृ मृत्यु दर नियंत्रण पर, झाबुआ ने स्वास्थ्य एवं पोषण सुधार प्रयासों और मंदसौर ने सम्पूर्ण स्वास्थ्य मॉडल पर प्रेजेन्टेशन देते हुए अपने अनुभव साझा किए।  

बिहार चुनाव में अक्षरा सिंह की एंट्री? गिरिराज सिंह से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल

पटना  बिहार में जैसे-जैसे चुनावी माहौल गर्म हो रहा है, वैसे-वैसे सियासी गलियारों में नए चेहरे सुर्खियों में आ रहे हैं. अब भोजपुरी फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने भी राजनीति में कदम रखने के संकेत दे दिए हैं. दरअसल, अक्षरा सिंह ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की है.  इस मुलाकात की तस्वीर उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर शेयर की और लिखा- 'गिरिराज सिंह जी से आशीर्वाद मिला.' इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि क्या अक्षरा सिंह भी इस बार बिहार के चुनावी रण में उतरने की तैयारी कर रही हैं?  विनोद तावड़े से मिलीं मैथिली ठाकुर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई नाम राजनीति में एंट्री कर चुके हैं. एक दिन पहले ही लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने विनोद तावड़े और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी.   मैथिली ने कहा कि उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही और वह एनडीए के समर्थन में हैं. उन्होंने कहा कि मेरी आत्मा बिहार से जुड़ी है और मैं बिहार में रहकर लोगों की सेवा करना चाहती हूं. कई बड़े चेहरों की राजनीति में एंट्री   इससे पहले भोजपुरी फिल्मों के एक्टर पवन सिंह की भी बीजेपी में वापसी हो चुकी है. गायक और अभिनेता रितेश पांडे भी प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज जॉइन कर चुके हैं. चर्चा है कि मशहूर गायक राधेश्याम रसिया भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.  इस लिस्ट में एक नाम भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव का भी है जिन्होंने पिछले दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी. हालांकि उनके राजनीति में आने या चुनाव लड़ने को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.