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बिजली कर्मचारियों से मारपीट के आरोप में तीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा भोपाल शहर वृत्त के पूर्व शहर संभाग अंतर्गत बाग फरहत अफजा ऐशबाग में बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट करने वाले तीन आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। कंपनी के इंडस्ट्रियल गेट कार्यालय प्रबंधक संजय बारमासे ने बताया कि बाग फरहत अफजा निवासी श्रीमती शहजादी बी द्वारा विद्युत देयक बकाया 1 लाख 41 हजार 669 रुपए जमा नहीं किया जा रहा था। उन्होंने उक्त मकान सीमा बेगम को विक्रय कर दिया। सीमा बेगम को बताया गया कि आपके द्वारा क्रय किये गये मकान का विद्युत देयक बकाया है। यदि बकाया देयक जमा नहीं किया तो विद्युत विच्छेदन की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद उन्होंने शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए कर्मचारियों को अभद्रता की और मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इस पर मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आरोपितों सीमा बेगम, आशु एवं समीर के खिलाफ ऐशबाग थाने में भारतीय न्‍याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 296(बी), 132, 351(3) , 3(5) में एफआईआर दर्ज कराई गई है। थाना एशबाग ने भी प्रकरण पर संज्ञान लेकर विवेचना शुरू कर दी है। बिजली कंपनी के मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा मारपीट / दुर्व्यवहार की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने तुरन्त एफ.आई. आर. कराने के निर्देश दिए हैं। कंपनी ने कहा है कि प्रायः देखने में आ रहा है कि बिजली कर्मियों पर ड्यूटी के दौरान असामाजिक तत्वों द्वारा मारपीट / दुर्व्यवहार किया जा रहा है। चूंकि ऐसी घटनाएं विद्युत अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिराती हैं, इसलिए कंपनी के कार्यक्षेत्र में कार्यरत सभी नियंत्रणकर्ता अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार या मारपीट की घटनाओं को पूरी गंभीरता से लिया जाए।  

सार्वजनिक शौचालय में हुई घिनौनी हरकत: युवती का वीडियो बनाकर ऑनलाइन पोस्ट, FIR दर्ज

सतना  सतना के बीटीआई ग्राउंड में चल रहे विंध्य व्यापार मेले की चकाचौंध के बीच एक शर्मनाक करतूत सामने आई है। मेले के रामगढ़ सेक्शन में बने महिला बाथरूम में एक युवती का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। मैनेजमेंट के हाथ-पांव फूले, देर रात पहुंची पुलिस सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही मेला प्रबंधन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन के लोग देर रात कोलगवां थाने पहुंचे और अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब साइबर सेल की मदद से वीडियो के सोर्स का पता लगा रही है ताकि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। हजारों की भीड़, सुरक्षा नदारद विंध्य व्यापार मेला शहर का बड़ा आयोजन है, जहां रोजाना हजारों महिलाएं और युवतियां आती हैं। सार्वजनिक बाथरूम जैसी जगह पर ऐसी घुसपैठ ने लोगों को डरा दिया है। इस घटना के बाद मेले की सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को ट्रेस करने के प्रयास किए जा रहे हैं और उस पर सख्त कार्रवाई होगी।  

यूपी पंचायत चुनाव से पहले सियासी हलचल: संभल में फर्जी वोटिंग केस, 48 लोगों पर मामला दर्ज

संभल  उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से ठीक पहले संभल के गांव विलालपत से सामने आया फर्जी वोटर बनाने का मामला प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। फर्जी दस्तावेज और गलत आधार संशोधन के जरिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के आरोप में 48 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई लेखपाल गुन्नू बाबू कीअसमोली थाने में दर्ज शिकायत पर की गई।  मामला तब उजागर हुआ, जब जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र सिंह हाल ही में गांव विलालपत पहुंचे। वे वहां एसआईआर के कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान गांव से जुड़ी गंभीर शिकायतें उनके संज्ञान में आईं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल जांच समिति गठित की। समिति ने 19 दिसंबर को अपनी जांच आख्या सौंपी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि कई लोगों ने बीएलओ को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए, जिनके आधार पर उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज कर दिए गए। यह सीधा-सीधा चुनावी प्रक्रिया से छेड़छाड़ का मामला बताया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 दिसंबर को जिलाधिकारी ने सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए। इसके बाद 22 दिसंबर को तहसीलदार ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। लेखपाल गुन्नू बाबू ने बताया कि डीएम संभल के आदेश पर असमोली थाने में मामला दर्ज किया गया एफआईआर में ग्राम विलालपत के 48 नामजद आरोपी शामिल हैं, जिनमें पुरुष और महिला दोनों हैं। सभी पर फर्जी दस्तावेज के जरिए वोट बनवाने का आरोप है। जांच आख्या में यह भी कहा गया है कि ग्राम विलालपत में आधार कार्ड में गलत तरीके से संशोधन कराकर वोट बनवाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है तथा आने वाले दिनों में और नाम सामने आ सकते हैं। यह मामला सिर्फ फर्जी वोट बनवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत चुनाव से पहले लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा फर्जीवाड़ा बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के संभव था? क्या कार्रवाई सिर्फ 48 नामों तक सीमित रहेगी या फर्जी वोटर नेटवर्क की पूरी परतें उखड़ेंगी?

उत्तर बस्तर कांकेर : समर्थन मूल्य पर धान खरीदी 2025-26 : सहकारी समिति प्रबंधक, खरीदी केन्द्र प्रभारी एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज

उत्तर बस्तर कांकेर धान खरीदी कार्य को गंभीरता से नहीं लेने के कारण जिले की सहकारी समितियों के 02 प्रभारी प्रबंधक एवं 02 कम्प्यूटर ऑपरेटर और 01 धान खरीदी केन्द्र प्रभारी के विरूद्ध थाना पखांजूर एवं थाना नरहरपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। कार्यालय उपायुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं जिला कांकेर के निर्देश पर सहकारी निरीक्षकों एवं शाखा प्रबंधक द्वारा पुलिस थाना पखांजूर एवं नरहरपुर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उपायुक्त सहकारिता जिला कांकेर से मिली जानकारी के अनुसार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित पखांजूर विकासखण्ड कोयलीबेड़ा के प्रभारी प्रबंधक वासुदेव दास एवं उपार्जन केन्द्र पी.व्ही. 24 के कम्प्यूटर ऑपरेटर रविशंकर मंडल के विरूद्ध थाना पखांजूर और आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित उमरादाह विकासखण्ड नरहरपुर के प्रभारी प्रबंधक भूषण पटेल तथा उपार्जन केन्द्र नावडबरी के धान खरीदी प्रभारी शिवप्रसाद नाग एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर तेज सिन्हा के विरूद्ध थाना नरहरपुर में छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (एस्मा एक्ट) के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा विपणन वर्ष 2025-26 की संपूर्ण धान खरीदी अवधि तक धान खरीदी कार्य में संलग्न समस्त कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ आवश्यक सेवा संधारण एवं विच्छिन्नता निवारण अधिनियम 1979 (एस्मा एक्ट) लागू किया गया है।

सड़क सुरक्षा पर सख्ती: राजस्थान में ओवरस्पीडिंग पर दर्ज होगी FIR, ड्रिंक एंड ड्राइव मामले बढ़े 8%

जयपुर राजस्थान में इस साल सितंबर तक ड्रिंक एंड ड्राइव (शराब पीकर गाड़ी चलाने) के मामलों में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह खुलासा पुलिस मुख्यालय के आधिकारिक आंकड़ों से हुआ है। यह डेटा उस समय सामने आया है जब महज दो दिनों में दो अलग-अलग सड़क हादसों में 28 लोगों की मौत हो गई। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, 2024 में 40,715 मामले सामने आए थे, जिनमें ड्राइवर शराब के नशे में वाहन चलाते पकड़े गए थे, जबकि 2025 में सितंबर तक यह आंकड़ा 43,788 तक पहुँच गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सबसे ज्यादा मामले जयपुर और जोधपुर जिलों से दर्ज हुए हैं। सोमवार 3 नवंबर दोपहर जयपुर के हरमाड़ा इलाके में लोहे की मंडी के पास तेज रफ्तार डंपर ने 17 वाहनों को कुचल दिया, जिससे 12 लोगों की मौत हो गई और 10 घायल हुए। डीसीपी (पश्चिम) हनुमान प्रसाद मीणा ने बताया, “दुर्घटना दोपहर करीब 1 बजे हुई। प्राथमिक जांच में ड्राइवर शराब के नशे में पाया गया। उसे हिरासत में लेकर वाहन जब्त कर लिया गया है।” हरमाड़ा थाना अधिकारी उदय सिंह ने बताया कि डंपर पहले एक बाइक से टकराया और लोगों ने उसका पीछा किया। इसके बाद ड्राइवर ने रफ्तार बढ़ाई और लगभग 300 मीटर तक कई वाहनों को टक्कर मारता चला गया। एनसीआरबी रिपोर्ट में चिंताजनक स्थिति नवीनतम एनसीआरबी रिपोर्ट (2023) के अनुसार, राजस्थान देश में सातवें स्थान पर है जहाँ सबसे ज्यादा 24,694 सड़क हादसे दर्ज हुए। इनमें से 7,179 हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुए और 4,172 लोगों की मौत हुई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी, खराब सड़कें, वाहनों की स्थिति की जांच का अभाव और ब्लैक स्पॉट सुधार में सुस्ती— ये मुख्य कारण हैं जिन पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।” विशेषज्ञों ने की परिवहन विभाग की आलोचना जयपुर स्थित मुस्कान फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक नेहा खल्लर ने कहा, “हर बार हादसे के बाद पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगता है, जबकि सड़क सुरक्षा नीति बनाने और लागू करने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई की होती है।” उन्होंने बताया कि राज्य में केवल दो वाहन फिटनेस सेंटर हैं, जो पूरे राजस्थान की निगरानी के लिए अपर्याप्त हैं। “राज्य में व्यावसायिक वाहनों के लिए टेस्टिंग ट्रैक तक नहीं है, फिर भी लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे ड्राइवर कभी प्रशिक्षित नहीं हो पाते,” उन्होंने कहा। नेहा खल्लर ने यह भी बताया कि राजस्थान की कुल सड़क लंबाई का मात्र 11% हिस्सा राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का है, लेकिन 60% हादसे इन्हीं पर होते हैं। बावजूद इसके, सरकार की ट्रैफिक जागरूकता मुहिम ज्यादातर शहरों तक सीमित हैं। उन्होंने हाल ही में जयपुर के हरमाड़ा हादसे का हवाला देते हुए कहा, “ड्राइवर दोषी जरूर था, लेकिन राज्य में ब्रेद एनालाइज़र टेस्ट सही तरीके से लागू नहीं हुए हैं। उस ड्राइवर के खिलाफ पिछले दो महीनों में तीन बड़े चालान दर्ज थे, फिर भी उसका लाइसेंस रद्द क्यों नहीं किया गया?” जयपुर में ओवरस्पीडिंग पर 3 के खिलाफ एफआईआर जयपुर यातायात पुलिस ने ओवरस्पीडिंग के तीन मामलों में वाहन मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई शहर में सुरक्षित और सुचारू यातायात व्यवस्था बनाए रखने तथा सड़क हादसों पर रोक लगाने के उद्देश्य से की गई है। पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल के निर्देश पर यातायात पुलिस ने आईटीएमएस कैमरों में दर्ज तेज रफ्तार वाहनों की फुटेज के आधार पर यह कार्रवाई की। मालवीय नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 125, 281 और मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 183, 184 के तहत तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस के अनुसार, एफआईआर दर्ज वाहनों में RJ60CE0209 (103 किमी/घं.), RJ45CY3139 (119 किमी/घं.) और RJ60SY7327 (113 किमी/घं.) शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इन वाहन चालकों ने जानबूझकर लापरवाही से वाहन चलाकर मानव जीवन को खतरे में डाला।

सिराली में बिजली के तार चोरी, अज्ञात आरोपी के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा हरदा वृत्त के अंतर्गत ग्राम बड़झिरी में बिजली के तार चोरी करने वाले अज्ञात आरोपित के विरूद्ध थाना रहटगांव में एफ.आई.आर दर्ज कराई गई है। सहायक प्रबंधक सिराली  योगेश कुमार गौर ने बताया कि सिराली वितरण केन्द्र के ग्राम बड़झिरी में 24 सितंबर को अज्ञात व्यक्ति द्वारा 11 केवी पटाल्दा फीडर के 4 पोल के विद्युत लाइन से कीमत 53,434 रूपए के तार चोरी कर लिए गए थे। ग्रामीणों द्वारा 30 सितंबर को चोरी की जानकारी मिलने पर कंपनी द्वारा पंचनामा तैयार कर थाना रहटगांव में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध चोरी की एफआईआर दर्ज कराई गई है।  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक  क्षितिज सिंघल ने चोरी की घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। प्रबंध संचालक ने मैदानी कर्मचारियों और अधिकारियों को सजग रहने को कहा है, जिससे चोरी की घटनाएं न हों और बिजली कंपनी को आर्थिक हानि न हो। कंपनी ने मैदानी अधिकारियों/कर्मचारियों से कहा है कि विद्युत आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखें और जिले के कलेक्टर / पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर किसी भी अप्रिय स्थिति में उनसे आवश्यक सहयोग प्राप्त करें।  

पप्पू यादव के खिलाफ FIR, बाढ़ पीड़ितों को पैसे बांटने पर उठे सवाल

वैशाली वैशाली जिले में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पैसे बांटने को लेकर चुनाव आदर्श आचार संहिता (MCC) के उल्लंघन के आरोप में बिहार के सांसद पप्पू यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, पूर्णिया से निर्दलीय लोकसभा सदस्य यादव के खिलाफ यह मामला वैशाली जिले के सहदेई थाने में बृहस्पतिवार रात जिला प्रशासन की शिकायत पर दर्ज किया गया। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) ललित मोहन शर्मा ने बताया, “सीसीटीवी फुटेज और चुनावी ड्यूटी में तैनात एक अधिकारी के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया है।” राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आचार संहिता प्रभावी हो जाती है।  

‘I LOVE मोहम्मद’ पर FIR क्यों?: झांसी में दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल, RSS पर दंगे भड़काने का आरोप

झांसी  झांसी में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा- RSS दंगे भड़काती है। यह एक नॉन रजिस्टर्ड संस्था है। इनके लोग दंगा कराते हैं। फिर इनकी ओर से बयान आता है कि यह हमारा मेम्बर नहीं। जब संस्था का रजिस्ट्रेशन ही नहीं तो मेम्बर कहां से होगा?  सरकार चाहे तो कभी दंगे न हों। दंगे सरकार और अफसरों की नीयत पर निर्भर हैं। इसे रोकने के लिए समय रहते कदम उठाएं। बरेली बवाल पर उन्होंने कहा कि तौकीर रजा जैसे लोग हिंदुओं में भी हैं। ऐसे लोग भाषण देकर लोगों को उकसाते हैं। दिग्विजय शुक्रवार को दतिया के पीतांबरा पीठ दर्शन के बाद सर्किट हाउस पहुंचे थे। इसके बाद वे भोपाल रवाना हो गए। आरएसएस चंदा वूसली करती है। ये पैसा जाता कहां है। बैंक खाता कहां है? हर विजयादशमी और गुरु पूर्णिमा पर करोड़ों रुपए चंदे में आते हैं। जब संघ का अकाउंट नहीं है तो पैसा जाता कहां है। इनका एक ही एजेंडा है, हिदुओं को भड़काना और संविधान के खिलाफ लोगों को बचपन से तैयार करना। ये कभी आंदोलन प्रदर्शन नहीं करते, हमेशा कानाफूसी की राजनीति करते हैं। RSS के लोग कह रहे हैं कि मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ रही। उनकी संख्या बढ़ जाएगी, जो कि संभव ही नहीं है। क्योंकि, जितनी हिंदुओं की जनसंख्या घट रही है, उससे कहीं ज्यादा तेजी से मुसलमानों की जनसंख्या घट रही। 2001 और 2011 के बीच का जनसंख्या ग्राफ ये प्रमाणित करता है। अब 2021 की रिपोर्ट तो इन्होंने ही रोक कर रखी है। इसलिए वो बात सामने नहीं आईं। लेकिन RSS और सरकार मिलकर हिंदुओं को भ्रमित कर रहे हैं। अगर कोई 'आई लव मोहम्मद' कहता है और कोई आई लव रामजी, आई लव महादेव, आई लव कृष्ण भगवान, आई लव गांधीजी कहता है तो इसमें किसी को क्या दिक्कत? इसमें मुकदमा दर्ज करने की क्या जरूरत है। दंगे तो सरकार और सरकारी अफसरों की नीयत पर निर्भर हैं। अगर सरकार चाहे तो कभी दंगा नहीं हो सकता है। सरकार को ऐसे संवेदनशील मामलों में समय से कदम उठाने की जरूरत है। बरेली में मौलान तौकीर रजा पर कहा कि कुछ फितरती लोग अगर मुसलमानों में हैं तो हिंदुओं में भी हैं। ऐसे लोग भड़काऊ भाषण देने का काम करते हैं। संभल में हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर अवैधानिक निर्माण है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन किसी एक व्यक्ति के अपराध पर उसके परिवार को दंड देना कहीं से भी न्याय नहीं है। सरकार ने लिस्ट जारी की है। एक भी घुसपैठिए का नाम बता दें। किस पोलिंग बूथ पर कौन सा घुसपैठिया है। उसका नाम आ गया हो। घुसपैठिए की परिभाषा क्या है? जब केंद्र में 11 साल से भाजपा की सरकार है। तो घुसपैठिया नेपाल से आया या बांग्लादेश से? ये केवल भाजपा और अमित शाह की नजर में घुसपैठिए हैं। लेकिन घुसपैठिए का नाम तो बताना होगा। कोविड के समय RSS की ओर से कहा गया कि जनता को 7 करोड़ रुपए की मदद की है। मैंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस बारे में पत्र लिखा। उनसे पूछा कि नॉन रजिस्टर्ड संस्था कह रही है कि 7 करोड़ रुपए कलेक्ट करके खर्च किए हैं। तो आखिर कौन से अकाउंट से पेमेंट किया। इन पर तो मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलना चाहिए। नॉन रजिस्टर्ड संस्था ने बिना अकाउंट के 7 करोड़ रुपए कहां से खर्च कर दिए? मगर वित्त मंत्री जी का आज तक जवाब नहीं आया।  

अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर FIR, लेखपाल-नायब तहसीलदारों ने धरना दिया

लखनऊ  सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने गई टीम पर ही FIR लाद दी गई । सरकारी कर्मचारियों पर हुई एफआईआर के विरोध में नगर निगम मुख्यालय पर लेखपालों और नायब तहसीलदारों ने धरना दिया । मांग रखी गई है कि एफआईआर निरस्त कर मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों ने चेतावनी भी दी कि जब तक एफआईआर वापस नहीं होगी, तब तक सरकारी जमीन से कब्जा हटाने की कार्रवाई भी नहीं करेंगे। पूरा मामला 25 अगस्त को अर्जुनगंज क्षेत्र के मस्तेमऊ गांव में करीब डेढ़ करोड़ की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान बत्तमीजी करने पर नायब तहसीलदार ने किसान को धक्का मार दिया था। इस मामले में 28 अगस्त को नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार और लेखपाल सुभाष कौशल पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर दर्ज होने से नगर निगम में तैनात लेखपाल और नायब तहसीलदार लामबंद हो गए और सोमवार दोपहर एक से शाम पांच बजे तक मुख्यालय पर धरना दिया। इसमें निगम संपत्ति विभाग के साथ-साथ चकबंदी संघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए। नायब तहसीलदार रत्नेश ने कहा कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के अनुसार हुई थी। फरवरी में कब्जेदार राममिलन को नोटिस जारी किया गया था। अप्रैल में भी कब्जा हटाने के लिए पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन विरोध और गाली-गलौज के कारण लौटना पड़ा। आखिरकार 25 अगस्त को पुलिस बल के साथ कार्रवाई करनी पड़ी। धरने में रखी गईं यह प्रमुख मांगें – डीसीपी दक्षिणी, एसीपी गोसाईंगंज और सुशांत गोल्फ सिटी के थानाध्यक्ष का ट्रांसफर किया जाए। – अतिक्रमण हटाने के दौरान नगर निगम टीम को पुलिस पूरी सुरक्षा दे। – एफआईआर तत्काल निरस्त की जाए और उच्चस्तरीय जांच टीम गठित हो। – कब्जा हटाते वक्त जब टीम से गाली-गलौज हुई तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की, इसकी जांच हो।