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जीत के जश्न के बीच अचानक गिर पड़ा टेनिस स्टार, फ्रेंच ओपन में दिखा डराने वाला मंजर

 पेरिस याकूब मेनसिक ने फ्रेंच ओपन 2026 में जीत तो हासिल कर ली, लेकिन मैच खत्म होने के बाद जो दृश्य कोर्ट पर देखने को मिला, उसने खिलाड़ियों से लेकर दर्शकों तक सभी को चिंता में डाल दिया. लगभग पांच घंटे तक चले मुकाबले के बाद 20 साल का यह युवा टेनिस स्टार कोर्ट पर ही गिर पड़ा और दर्द से तड़पता नजर आया।  पेरिस की झुलसा देने वाली गर्मी, 33 डिग्री तापमान और बिना किसी छांव के खेला गया यह मुकाबला किसी परीक्षा से कम नहीं था. कोर्ट-6 पर खेले गए इस मुकाबले में मेनसिक ने मारियानो नावोन को 6-3, 2-6, 6-4, 1-6, 7-6 (11) से हराया. मुकाबला 4 घंटे 41 मिनट तक चला और आखिरी पल तक दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला।  पांचवें सेट का टाईब्रेकर शुरू होते-होते मेनसिक का शरीर जवाब देने लगा था. तेज गर्मी और लंबे मुकाबले की वजह से उनके पैरों में बुरी तरह क्रैम्प्स आने लगे. वह मुश्किल से चल पा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. दर्द में कराहते हुए भी वह हर पॉइंट के लिए लड़ते रहे।  टाईब्रेकर में स्कोर 13-11 पहुंचा और जैसे ही मेनसिक ने फोरहैंड विनर लगाकर मैच खत्म किया, वह तुरंत क्ले कोर्ट पर गिर पड़े. जीत का जश्न मनाने की ताकत भी उनके अंदर नहीं बची थी. वह पीठ के बल लेट गए, दोनों हाथों से चेहरा ढक लिया और कुछ देर तक बिल्कुल नहीं उठ पाए।  विपक्षी खिलाड़ी ने बढ़ाया हौसला कुछ सेकेंड बाद याकूब मेनसिक दर्द से अपना पैर पकड़ लिया और मदद का इशारा करने लगे. स्टेडियम में मौजूद दर्शक पूरी तरह खामोश हो गए. हारने के बावजूद मारियानो नावोन ने शानदार खेल भावना दिखाई. वह तुरंत नेट पार करके मेनसिक के पास पहुंचे और उनकी हालत का हाल जाना।  अंपायर भी तेजी से नीचे उतरे और फिजियो को बुलाया गया. करीब एक मिनट तक मेनसिक कोर्ट पर ही पड़े रहे, जिसके बाद मेडिकल टीम पहुंची. उन्हें बर्फ दी गई और धूप से बचाने के लिए छाता लगाया गया. करीब 10 मिनट तक उनका इलाज चलता रहा. हालांकि हालत खराब होने के बावजूद मेनसिक ने व्हीलचेयर लेने से मना कर दिया. वह धीरे-धीरे खुद चलकर कोर्ट से बाहर गए, लेकिन उनकी चाल साफ बता रही थी कि शरीर पूरी तरह टूट चुका है।  अब सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या मेनसिक तीसरे दौर में खेलने के लिए फिट हो पाएंगे. अगले मुकाबले में उनका सामना दुनिया के नंबर-8 खिलाड़ी एलेक्स डी मिनौर से होना है. दरअसल, इस साल फ्रेंच ओपन में खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ विरोधी खिलाड़ी नहीं, बल्कि पेरिस की खतरनाक गर्मी भी बन गई है. हीटवेव की वजह से कई खिलाड़ी शारीरिक परेशानियों से जूझ रहे हैं।  पूर्व फाइनलिस्ट कैस्पर रूड ने भी खुलासा किया कि उन्हें पहले दौर के मैच में हीटस्ट्रोक जैसा महसूस हुआ था. रूड ने कहा कि चौथे सेट में उन्हें चक्कर आने लगे थे और वह खुद को 'जॉम्बी की तरह' महसूस कर रहे थे। 

सिनर ने ताबुर को हराकर फ्रेंच ओपन में दमदार शुरुआत की

पेरिस  दुनिया के नंबर-1 टेनिस खिलाड़ी जानिक सिनर ने फ्रेंच ओपन में अपने पहले दौर के मुकाबले में एकतरफा जीत हासिल की। सिनर ने फ्रांस के 171वीं रैंकिंग वाले वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी क्लेमेंट ताबुर को 6-1, 6-3, 6-4 से हराया। इसके साथ ही उन्होंने लगातार 30वीं जीत दर्ज की। अब उन्होंने फ्रेंच ओपन खिताब जीतने की अपनी कोशिश भी शुरू कर दी है। पिछले साल फाइनल में कार्लोस अलकराज से पांच सेटों में मिली नाटकीय हार के बाद रोलां गैरो में वापसी करते हुए सिनर का पहला मुकाबला उस मैच से बिल्कुल अलग रहा। सिनर ने कहा कि मैं यहां वापस आकर बहुत खुश हूं। यहां की यादें बेहद शानदार हैं। पेरिस के माहौल में खुद को ढालने के लिए सिनर और उनके भाई ने एफिल टावर का लेगो प्रोजेक्ट शुरू किया था। इटालियन ओपन जीतने के बाद वह अपने घर गए थे, जहां उन्होंने इस मॉडल पर काम किया। सिनर का प्रचंड फॉर्म 24 वर्षीय सिनर इस समय शानदार फॉर्म में हैं और लगातार पांच टूर्नामेंट जीत चुके हैं। अलकराज के दाएं हाथ की कलाई में चोट के कारण बाहर होने के बाद सिनर को फ्रेंच ओपन जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। वहीं, अन्य मुकाबलों में नीदरलैंड्स के जेस्पर डी जोंग ने इटली के फेडरिको सीना को 6-3, 6-1, 6-3 को मात दी। इसके अलावा बेल्जियम के अलेक्जेंडर ब्लाक्स के विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया के आठवीं वरीयता प्राप्त एलेक्स डी मिनौर को वॉकओवर मिला। स्वियातेक तीसरे दौर में दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी इगा स्वियातेक ने बुधवार को फ्रेंच ओपन में अपनी लय हासिल करने की कोशिश जारी रखते हुए तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया। उन्होंने चेक गणराज्य की सारा बेजलेक को 6-2, 6-3 से हराया। चार बार की चैंपियन स्वियातेक अपनी प्रतिद्वंद्वी से काफी बेहतर नजर आईं। इसके बावजूद उन्होंने 38 अनफोर्स्ड एरर किए, जिनमें कई डबल फाल्ट भी शामिल रहे। कोर्ट फिलिप चैटियर पर खेले गए मुकाबले में शुरुआती गेमों में दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे की सर्विस तोड़ी। इसके बाद स्वियातेक ने 5-1 की बढ़त बना ली, लेकिन सातवें गेम में डबल फाल्ट कर उन्होंने दुनिया की 35वें नंबर की खिलाड़ी बेजलेक को वापसी का मौका दे दिया। बेलिंडा की एकतरफा जीत स्वियातेक ने कई बार जल्दबाजी दिखाई, लेकिन 19 अनफोर्स्ड एरर के बावजूद पहला सेट आसानी से अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट के शुरुआती आठ गेम में से पांच में सर्विस टूटने के बाद मुकाबला काफी बिखरा हुआ नजर आया। अंत में बेजलेक के फोरहैंड शॉट नेट में जाने के साथ स्वियातेक ने जीत दर्ज की। वहीं, 11वीं वरीयता प्राप्त बेलिंडा बेनसिक ने अमेरिका की कैटी मैकनेली को एकतरफा मुकाबले में 6-4, 6-0 से हराया। वहीं, पांचवीं वरीयता प्राप्त जेसिका पेगुला उलटफेर की शिकार हो गईं। उनको आस्ट्रेलिया की किंबर्ली बिरेल ने 1-6, 6-3, 6-3 से शिकस्त देकर अगले दौर में जगह बनाईं।

मेदवेदेव का क्ले पर संघर्ष जारी, फ्रेंच ओपन के पहले राउंड में फिर बाहर हुए रूसी स्टार

 पेरिस  रूस के स्टार टेनिस खिलाड़ी और पूर्व विश्व नंबर एक दानिल मेदवेदेव का फ्रेंच ओपन में निराशाजनक प्रदर्शन एक बार फिर जारी रहा। मंगलवार को छठी वरीयता प्राप्त मेदवेदेव को ऑस्ट्रेलिया के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी एडम वाल्टन ने पांच सेटों तक चले रोमांचक मुकाबले में 6-2, 1-6, 6-1, 1-6, 6-4 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। रोलां गैरों की धीमी क्ले कोर्ट सतह पर मेदवेदेव का संघर्ष एक बार फिर साफ दिखाई दिया। यह नौ में से छठी बार है जब वह फ्रेंच ओपन के पहले दौर में ही हारकर बाहर हुए हैं। मुकाबले में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिले और दोनों खिलाड़ियों ने बारी-बारी से दबदबा बनाया। वॉल्टन ने की शानदार शुरुआत ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी वॉल्टन ने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट आसानी से अपने नाम किया, लेकिन मेदवेदेव ने दूसरे सेट में जोरदार वापसी करते हुए केवल एक गेम गंवाया। हालांकि वह लय बरकरार नहीं रख सके और तीसरा सेट गंवा बैठे। चौथे सेट में फिर वापसी करने वाले मेडवेडेव निर्णायक सेट में दबाव नहीं झेल सके। विश्व रैंकिंग में 97वें स्थान पर मौजूद वॉल्टन ने पांचवें सेट में 4-4 की बराबरी पर मेदवेदेव की सर्विस तोड़ी और फिर शानदार होल्ड के साथ करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। यह किसी शीर्ष-10 में शामिल खिलाड़ी के विरुद्ध उनकी पहली जीत भी है। जीत के बाद वॉल्टन ने कहा कि पिछले साल सिनसिनाटी में मेदवेदेव के खिलाफ मिली जीत ने उन्हें आत्मविश्वास दिया था। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास था कि मैं यह कर सकता हूं। मैच में काफी उतार-चढ़ाव रहे, लेकिन निर्णायक सेट में जिस तरह वापसी की, उस पर मुझे गर्व है। मोनफिल्स की भावुक विदाई वहीं स्थानीय खिलाड़ी गेल मोनफिल्स को भी पहले दौर में हमवतन खिलाड़ी ह्यूगो गैस्टन के विरुद्ध हार का सामना करना पड़ा। 2008 में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाले मोनफिल्स का यह फ्रेंच ओपन में आखिरी मुकाबला रहा। 39 साल के मोनफिल्स अपने पसंदीदा कोर्ट फिलिप-चैटियर पर गैस्टन के विरुद्ध मैच जीतने के बहुत करीब थे। उन्होंने पहला और दूसरा सेट आसानी से 6-2, 6-3 से जीत लिया था। हालांकि, इसके बाद गैस्टन ने शानदार वापसी की और अगले दो सेट 3-6, 2-6 से अपने नाम कर लिए। आखिरी सेट में गैस्टन पूरी तरह हावी रहे और 6-0 से जीत हासिल कर ली। मैच के बाद एक खास ट्रिब्यूट वीडियो दिखाया गया, जिसमें राफेल नडाल, रोजर फेडरर, नोवाक जोकोविक, यानिक सिनर, कार्लोस अलकराज और स्टानिस्लास वावरिंका जैसे बड़े खिलाड़ियों के संदेश शामिल थे। इसके अलावा उनके फ्रेंच साथी गैस्केट, नोआ, गाइल्स साइमन, जो-विल्फ्रेड सोंगा और आर्थर फिल्स ने भी उन्हें सम्मान दिया। शीर्ष वरीय सबालेंका की शानदार शुरुआत महिला सिंगल्स में विश्व की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका ने स्पेन की जेसिका बूजास मानेरो को 6-4, 6-2 से शिकस्त देकर अपने अभियान की शुरुआत जोरदार तरीके से की। यह मुकाबला एक घंटे 15 मिनट तक चला। शीर्ष वरीयता प्राप्त सबालेंका ने कोर्ट फिलिप-चैट्रियर पर अपने कौशल का प्रदर्शन करते हुए ग्रैंड स्लैम में पहले दौर में लगातार 22वीं जीत दर्ज की। सबालेंका क्ले-कोर्ट सीजन में कुछ उतार-चढ़ाव भरे प्रदर्शन के बाद पेरिस पहुंची थीं। सबालेंका ने ओपन एरा में 'सनशाइन डबल' हासिल करने वाली सिर्फ पांचवीं महिला बनकर इतिहास रचा था। सबालेंका ने पूरे मैच में दबदबा बनाए रखा। पहले सेट में 4-0 की बढ़त बनाने के बाद सबालेंका ने दूसरे सेट में भी तेजी से आगे बढ़ते हुए 5-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। उनका बैकहैंड कोर्ट पर बार-बार जोरदार तरीके से चला, और नेट पर बढ़ते आत्मविश्वास ने उनके खेल में एक नया आयाम जोड़ दिया। दूसरे सेट में भी इस स्पेनिश खिलाड़ी ने कुछ शानदार पल दिखाए, जिसमें एक बेहतरीन एंगल्ड बैकहैंड वाली और एक साहसी 'बैकहैंड डाउन द लाइन' शाट शामिल था, जिसने कुछ देर के लिए मैच के नतीजे को टाल दिया।

रोलां गैरो डेब्यू में इतिहास: भारतीय मूल के निशेश ने फ्रिट्ज को दी करारी शिकस्त

नई दिल्ली फ्रेंच ओपन 2026 में रविवार को 21 साल के भारतीय मूल के अमेरिकी टेनिस खिलाड़ी निशेश बसावरेड्डी ने बड़ा उलटफेर किया, जिसने टेनिस जगत को हैरान कर दिया। विश्व नंबर 9 और 7वीं वरीयता प्राप्त टेलर फ्रिट्ज को विश्व नंबर 148 निशेश ने हराकर अपने रोलां गैरो डेब्यू मैच में इतिहास रच दिया। उन्होंने कोर्ट सुजैन लेंगलेन पर 7-5, 7-6, 6-5, 6-1 से 4 सेट के मुकाबले में अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। साल 2000 में जैन-माइकल गैम्बिल के बाद इस क्ले-कोर्ट ग्रैंड स्लैम में किसी टॉप-10 खिलाड़ी को हराने वाले वो पहले अमेरिकी बन गए हैं। घुटने की चोट से वापसी कर रहे थे फ्रिट्ज दरअसल, विश्व नंबर- 9 के खिलाड़ी टेलर फ्रिट्ज घुटने की चोट के कारण दो महीने तक कोर्ट से बाहर रहने के बाद बहुत कम अभ्यास मैचों के साथ पेरिस पहुंचे थे, जहां उन्हें मैच पर अपनी पकड़ बनाने में संघर्ष करते हुए देखा गया और लगभग तीन घंटे की कड़ी टक्कर के बाद वह अपने हमवतन युवा खिलाड़ी से हार गए। वहीं, निशेश ने शुरुआत से ही अपना आत्मविश्वास दिखाया और प्रेशर वाले इस खेल में जीत हासिल कर इतिहास रचा। भारतीय मूल के इस युवा प्रतिभा के लिए ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही, जिन्होंने USTA की रोलां गैरो वाइल्ड कार्ड चैलेंज जीतकर पेरिस में अपना वाइल्डकार्ड स्थान पक्का किया था। बता दें कि बसावरेड्डी पेरिस में अपना सफर जारी रखेंगे, जहां अगले दौर में उनका मुकाबला एक और युवा अमेरिकी खिलाड़ी एलेक्स मिशेलसन से हो सकता है, जो पहले दौर में अलेक्सांद्र शेवचेंको का सामना कर रहे हैं। कौन हैं निसेश बसावरेड्डी? निशेश बसावरेड्डी, भारतीय मूल के अमेरिकी खिलाड़ी हैं, जिनका जन्म 2 मई 2005 को हुआ था। उनके माता-पिता 1999 में आंध्र प्रदेश से अमेरिका शिफ्ट हो गए थे। कैलिफोर्निया में जन्मे निशेश का जूनियर करियर शानदार रहा, जहां वह  ITF जूनियर रैंकिंग में विश्व नंबर 3 पर पहुंचे और उन्होंने 2022 जूनियर यूएस ओपन का बॉयज डबल्स खिताब जीता। पूर्व डबल्स वर्ल्ड नंबर 1 राजीव राम के मार्गदर्शन में, बसावरेड्डी ने साल 2024 में प्यूर्टो वालार्टा और टिब्यूरॉन में दो एटीपी चैलेंजर खिताब जीते। इसी साल उन्होंने सऊदी अरब में 'एटीपी नेक्स्टजेन फाइनल्स' में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने 2025 में ऑस्ट्रेलियन ओपन से अपने ग्रैंड स्लैम करियर की शुरुआत की थी। पहले दौर में उनका सामना दिग्गज नोवाक जोकोविच से हुआ, जहां पहले सेट में शानदार शुरुआत करने के बाद वह 6-4, 3-6, 4-6, 2-6 से मैच हार गए थे। जून 2025 में, वह एटीपी (ATP) रैंकिंग में शीर्ष 100 में शामिल हो गए और विंबलडन तथा यूएस ओपन के मुख्य ड्रॉ में खेले, लेकिन दोनों ग्रैंड स्लैम के पहले दौर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

अलकराज की गैरमौजूदगी से बढ़ीं जोकोविच की उम्मीदें, सानिया मिर्जा का बड़ा बयान

 नई दिल्ली साल का दूसरा ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन 24 मई से शुरू होने जा रहा है। दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों के बीच इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। इस बार कार्लोस अलकराज पुरुष सिंगल्स में नहीं खेलेंगे और भारत की पूर्व टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा का कहना है कि अलकराज के नहीं होने पर नोवाक जोकोविक के पास खिताब जीतने का अच्छा मौका है। सानिया ने जोकोविक की जीत की संभावनाओं पर सानिया ने कहा कि कार्लोस अलकराज की गैरमौजूदगी से उनकी संभावनाएं बढ़ जाती हैं। अभी वह ज्यादातर हार सिर्फ जानिक सिनर और अलकराज से ही खाते हैं। 38-39 साल की उम्र में भी उनका शीर्ष स्तर पर बने रहना अविश्वसनीय है। सिनर इस समय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं, लेकिन नोवाक अब भी शीर्ष तीन खिलाड़ियों में हैं। उन्होंने हमेशा लोगों, उम्र और सीमाओं को गलत साबित किया है। इसलिए उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। तीन बार की डबल्स ग्रैंडस्लैम चैंपियन सानिया मिर्जा ने फ्रेंच ओपन में भारतीय खिलाड़ियों की चुनौतियों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी। सानिया ने कहा कि मुझे लगता है कि क्ले कोर्ट पर हमारा खेल हार्ड कोर्ट या ग्रास कोर्ट जितना मजबूत नहीं है। इसलिए यह मुश्किल जरूर होता है। क्ले कोर्ट पर ज्यादा शारीरिक मेहनत करनी पड़ती है। हालांकि, युकी भांबरी जैसे खिलाड़ी बहुत अच्छी रिटर्न करते हैं। इसलिए शायद क्ले कोर्ट उनके लिए मददगार साबित हो सकता है। लेकिन यह कहना मुश्किल है कि यह उनकी पसंदीदा सतह है या नहीं। कुल मिलाकर, क्ले कोर्ट पर खेलना काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा सानिया ने क्वालीफायर में भारतीय खिलाड़ी करमन कौर थांडी की वापसी को सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि करमन ने अपनी प्रोटेक्टेड रैंकिंग के जरिए वापसी की है, जो इस बात का प्रमाण है कि चोट लगने से पहले वह अच्छे स्तर पर खेल रही थीं। सानिया ने कहा कि लगभग दो साल बाद कोर्ट पर लौटने वाले खिलाड़ी का तुरंत आंकलन करना सही नहीं होगा। सानिया ने कहा कि इंजरी से वापसी में मानसिक मजबूती सबसे अहम होती है, क्योंकि खिलाड़ी के मन में फिटनेस, प्रदर्शन और दोबारा चोट लगने जैसे कई सवाल चलते रहते हैं।