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गणपति बप्पा मोरया! दिल्ली में 12 दिन गूंजेगा जयकारा, 25 सितंबर को होगा विसर्जन

नई दिल्ली गणेश चतुर्थी के साथ आज से राजधानी में गणपति उत्सव की रौनक बढ़ जाएगी। मुंबई के प्रसिद्ध 'लाल बाग के राजा' की तर्ज पर दिल्ली में भी कई बड़े सार्वजनिक गणेश महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। पीतमपुरा से लेकर लक्ष्मी नगर तक इस बार धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े संदेश भी इस बार पंडालों में दिखाई देंगे। पीतमपुरा के डीडीए ग्राउंड में लाल बाग का राजा ट्रस्ट दिल्ली की ओर से 14 से 24 सितंबर तक 10वां गणपति पूजा महा महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक 14 सितंबर शाम 6 बजे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गणपति प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इस दौरान 2100 श्रद्धालु एक साथ शंखनाद कर रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेंगे। गणपति पंडाल में दिखेगी भारत की तकनीकी ताकत इसके साथ ही लक्ष्मी नगर में श्री गणेश सेवा मंडल की ओर से 14 से 25 सितंबर तक प्रियदर्शिनी विहार स्थित डीडीए मिनी क्रिकेट स्टेडियम, बैंक एन्क्लेव में 12 दिवसीय गणेशोत्सव का आयोजन होगा। इस बार यहां गणेश महोत्सव की सिल्वर जुबली है। ऐसे में इस बार की थीम 'विघ्नहर्ता से विकासकर्ता 25 वर्ष की आस्था, 2047 विकसित आधुनिक भारत का संकल्प' रखी गई है। गणपति बप्पा के हाथों में मेड इन इंडिया ड्रोन, ब्रह्मोस मिसाइल और सेमीकंडक्टर की प्रस्तुति इस बार खास आकर्षण होगी। पूजा में क्या क्या खास…     2100 श्रद्धालु पीतमपुरा में एक साथ करेंगे शंखनाद     12 दिनों का गणेशोत्सव लक्ष्मी नगर में मनाया जाएगा     12 ज्योतिर्लिंगों की झलक के साथ ही केदारनाथ मंदिर का डिजाइन भी यहां आएगा नजर इस बार 12 दिन गूंजेगा ‘गणपति बप्पा मोरया’ विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य और सिद्धियों के दाता भगवान श्री गणेश के स्वागत की तैयारी घरों और पंडालों में पूरी हो गई है। महापर्व इस बार 12 दिनों का होगा। अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर को गणपति विसर्जन होगा। आम तौर पर 11वें दिन विसर्जन होता था, लेकिन इस बार 12वें दिन होगा। बप्पा की स्थापना के तीन उत्तम मुहूर्त     मुंबई के प्रख्यात ज्योतिर्विद् आचार्य पं. घनश्याम तिवारी के अनुसार, 14 सितंबर को बप्पा की     आज से शुरू होगा गणेश महापर्व, 25 को अनंत चतुर्दशी पर होगा विसर्जन     तिथि बढ़ने से एक दिन ज्यादा मिलेगा पूजा का अवसर     स्थापना के तीन शुभ मुहूर्त हैं। पहला सुबह 7:15 से 7:59 बजे, दूसरा 9:30 से 11:02 बजे और तीसरा दोपहर 12:09 से 12:58 बजे तक रहेगा। क्या कहते हैं दिल्ली के ज्योतिषाचार्य वहीं, पंडितों की मानें तो दिल्ली में गणेश पूजा और मूर्ति स्थापना के लिए दोपहर का समय सबसे शुभ माना गया है। पंचांग के अनुसार सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु गणपति की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकते हैं। ज्योतिषाचार्य आशीष शास्त्री के मुताबिक इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जा रही है। चतुर्थी तिथि सोमवार सुबह करीब 7:07 बजे शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी वजह से गणपति की स्थापना के लिए दोपहर का समय रखा गया है।

गणपति स्थापना का सुबह का मुहूर्त छूटा? दोपहर बाद इन 3 शुभ समय में घर लाएं बप्पा

गणेश चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा को घर लाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सुबह के मुख्य मुहूर्त में स्थापना नहीं कर पाए तो परेशान होने की जरूरत नहीं है.14 सितंबर 2026 को गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल के अलावा तीन शुभ चौघड़िया मुहूर्त भी बन रहे हैं. ऐसे में दोपहर 1 बजे के बाद भी शुभ समय में गणपति की स्थापना की जा सकती है. 11 बजे के बाद कब-कब कर सकते हैं गणपति स्थापना? 14 सितंबर को सुबह के मुख्य गणेश स्थापना मुहूर्त के बाद चर, लाभ और अमृत चौघड़िया में भी बप्पा की स्थापना का शुभ समय रहेगा. चर मुहूर्त दोपहर 1:49 बजे से 3:22 बजे तक अगर सुबह के समय गणपति घर नहीं ला पाए हैं तो दोपहर में इस मुहूर्त के दौरान बप्पा को घर लाकर स्थापना कर सकते हैं. लाभ मुहूर्त दोपहर 3:22 बजे से शाम 4:55 बजे तक इसके बाद लाभ चौघड़िया शुरू होगा.  इस दौरान भी गणपति स्थापना की जा सकती है. पूजा के लिए पहले से चौकी और बाकी सामग्री तैयार रखना अच्छा रहेगा. अमृत मुहूर्त शाम 4:55 बजे से 6:28 बजे तक तीसरा शुभ समय अमृत चौघड़िया है.  यह समय शाम तक चलता है, इसलिए अगर दिन में किसी वजह से समय नहीं मिल पाया तो इस अवधि में भी गणपति की स्थापना की जा सकती है. सुबह का मुख्य मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें? गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न काल में हुआ था. इसलिए इस दौरान पूजा और स्थापना को विशेष शुभ माना जाता है. लेकिन अगर किसी वजह से इस समय स्थापना नहीं हो पाती है तो चर, लाभ और अमृत चौघड़िया के इन तीन विकल्पों में से सुविधानुसार समय चुना जा सकता है. गणपति की स्थापना से पहले क्या करें? जिस जगह गणपति को स्थापित करना है, उसे पहले अच्छी तरह साफ कर लें.  चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं, पूजा की सभी सामग्री पहले से तैयार रखें.  गणपति की प्रतिमा स्थापित करने के बाद दीप जलाएं और भगवान गणेश को रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद गणपति को मोदक या मिठाई का भोग लगाकर आरती करें.  परिवार की सुख-समृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना के साथ पूजा पूरी करें.