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महंगे और अनुपलब्ध गैस सिलेंडर ने बढ़ाई मुश्किलें, उधना स्टेशन पर उमड़ी भीड़

सूरत गुजरात के सूरत में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत ने गंभीर सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर कालाबाज़ारी बढ़ने से आम लोगों, खासकर प्रवासी श्रमिकों के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं. स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि बड़ी संख्या में मजदूर शहर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. स्टेशन पर भीड़, खुले मैदान में परिवार के साथ बैठे नजर आए लोग शनिवार रात और रविवार सुबह उधना रेलवे स्टेशन पर हजारों श्रमिकों की भीड़ देखने को मिली. रेलवे स्टेशन के वेटिंग एरिया से लेकर खुले मैदान तक लोग अपने परिवारों के साथ बैठे नजर आए. ट्रेनों में सफर करने के लिए लंबी कतारें लगी हुई थीं, जिससे साफ है कि पलायन का सिलसिला पिछले एक महीने से लगातार जारी है. मजदूरों ने बताया कि उन्हें सामान्य कीमत पर गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है. कई लोगों का कहना है कि सिलेंडर या तो उपलब्ध नहीं है या फिर ब्लैक में कई गुना ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा है. सीमित आय वाले इन श्रमिकों के लिए इतना महंगा सिलेंडर खरीद पाना संभव नहीं है. ऐसे में खाना बनाना और रोजमर्रा का जीवन चलाना कठिन हो गया है. श्रमिकों का पलायन उद्योगों के लिए भी बना चिंता का विषय एक श्रमिक ने बताया कि “काम तो मिल रहा है, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस नहीं है. महंगे सिलेंडर खरीदना हमारे बस की बात नहीं है, इसलिए गांव लौटना ही बेहतर विकल्प है.” कई परिवारों ने भी यही कारण बताते हुए शहर छोड़ने का निर्णय लिया है. आपको बता दें कि सूरत देश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री में लाखों प्रवासी मजदूर काम करते हैं. ऐसे में श्रमिकों का यह पलायन उद्योगों के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है. यदि यही स्थिति बनी रही, तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गैस की आपूर्ति को सामान्य करना और कालाबाज़ारी पर सख्ती से रोक लगाना है. जब तक यह समस्या हल नहीं होती, तब तक सूरत से श्रमिकों का पलायन जारी रहने की आशंका बनी हुई है.

गाजियाबाद, छोटे सिलिंडरों की भारी कमी और एजेंसियों पर ताला लगने से उपभोक्ता परेशान

 गाजियाबाद गैस किल्लत दूर करने के लिए प्रशासन एजेंसियों में छोटे सिलिंडर पहुंचाने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत ठीक उलट है। इस कारण जिले में रह रहे चार लाख से ज्यादा श्रमिकों, छात्र-छात्राओं और किरायेदारों के सामने इन दिनों घरेलू गैस का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि लोगों को बाहर से 400 रुपये प्रति किलो तक गैस खरीदकर खाना पकाना पड़ रहा है। 700 रुपये दिहाड़ी कमाने वाले मजदूरों के लिए इतनी महंगी गैस खरीदना संभव नहीं है। इसके चलते उनके सामने पलायन की नौबत आ गई है। कुटी रोड स्थित गंगा विहार कॉलोनी में साथी छोटेलाल के साथ रहने वाले कुशीनगर के बाबूलाल बताते हैं कि एक माह से हालात बेहद खराब हैं। दोनों घरों में रंगाई-पुताई करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं।  बाबूलाल के मुताबिक, पहले पांच किलो वाला घरेलू गैस सिलिंडर 110 रुपये प्रति किलो में भर जाता था। अब गैस का भाव 400 रुपये प्रति किलो हो गया है। उन्होंने बताया कि एक किलो गैस दो दिन भी नहीं चलती, जबकि एक दिन की दिहाड़ी 700 रुपये मिलती है।   एजेंसियों पर पांच किलो वाला सिलिंडर मिल नहीं रहा है। ऐसे में गांव लौटने का ही विकल्प बचा है। इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने बताया कि एजेंसी संचालकों से इस संबंध में वार्ता की गई है। कालाबाजारी के लिए कैसे मिल रही गैस जिले में छोटे-बड़े डेढ़ लाख से ज्यादा उद्योग संचालित हैं। इनमें बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। इसके अलावा 50 हजार के करीब छात्र, किरायेदार भी हैं। इनके पास गैस कनेक्शन नहीं है। बीते दिनों अधिकारियों ने पांच किलो का सिलिंडर आसानी से उपलब्ध होने का दावा किया तो इन लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन जमीनी स्थिति विपरीत है। नंदग्राम में किराये पर रहने वाले कपिल ने बताया कि एजेंसियों पर सिलिंडर उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कालाबाजारी करने वालों को गैस कैसे मिल रही है।  गोदाम पर लटका ताला सिलिंडर के लिए कतार सिलिंडर के लिए लोग घंटों लाइन में लगकर बैरंग लौट रहे हैं। हैप्पी होम गैस एजेंसी के गोदाम पर मंगलवार सुबह से ताला लगा रहा। लोग सिलिंडर के लिए घंटों लाइन में लगे रहे और बाद में उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।   आदर्शनगर कॉलोनी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि सिलिंडर लेने के लिए सुबह छह बजे ही गोदाम पर पहुंच गए थे। चौकीदार ने बताया कि दो दिन से गैस सिलिंडर का ट्रक नहीं आया है। लगभग तीन घंटे इंतजार करने के बाद घर लौट गए। अन्य उपभोक्ता भी इसी तरह परेशान हुए।   पांच किलो में कॉमर्शियल सिलिंडर है, घरेलू नहीं नेहरूनगर स्थित कमला गैस एजेंसी में मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे तीन श्रमिक रोजी, मोहन व सुनील पांच किलो का घरेलू सिलिंडर लेने गए तो निराशा हाथ लगी। उनको बताया गया कि पांच किलो का कॉमर्शियल सिलिंडर उपलब्ध है, लेकिन पांच किलो में घरेलू सिलिंडर नहीं पहुंचा है।  पांच किलो का घरेलू सिलिंडर 344 रुपये, जबकि कॉमर्शियल की कीमत 649 रुपये है। ऐसे में कॉमर्शियल सिलिंडर ले पाना सबके बस की बात नहीं है। इसी तरह मसूरी स्थित चौधरी इंडेन गैस एजेंसी में भी पांच किलो का सिलिंडर लेने पहुंचे 8-10 श्रमिकों को कर्मचारियों ने खाली हाथ लौटा दिया। डासना स्थित इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि उनके यहां बेहद कम संख्या में पांच किलो के सिलिंडर आए हैं, इसलिए अधिकांश लोगों को बैरंग लौटाना पड़ रहा है। एजेंसी संचालकों पर लगाया कालाबाजारी का आरोप भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के बैनर तले मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि मुरादनगर के महाजनान मोहल्ला स्थित नमन गैस एजेंसी और मेन रोड स्थित भारत गैस एजेंसी में कालाबाजारी की जा रही है। इस मौके मनोज नागर, प्रमोद त्यागी, शील कुमार त्यागी, रिंकू प्रधान, सलीम अली, जान मोहम्मद, बाली त्यागी आदि अनेक लोग मौजूद रहे।    

LPG की भारी किल्लत से हाहाकार: सप्लाई ठप, 50 हजार की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 1 हजार सिलेंडर उपलब्ध

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बेंगलुरु में कमर्शियल एलपीजी की गंभीर कमी को लेकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में उन्होंने बताया कि शहर में होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाओं और पीजी आवासों की दैनिक मांग लगभग 50 हजार सिलेंडर की है, लेकिन 1,000 सिलेंडर प्रतिदिन ही मिल पा रहे हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हालिया निर्देश के कारण घरेलू LPG को प्राथमिकता देने से कमर्शियल सप्लाई में भारी कमी आई है। इससे बेंगलुरु के कई व्यवसाय प्रभावित हुए हैं और कुछ होटल-रेस्तरां पहले ही बंद होने लगे हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के कदम उठाए जाने का जिक्र किया, लेकिन मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर अभी बहुत बड़ा है। यह संकट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ा हुआ है, जहां ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुआ है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम रास्ता है, जिसके बंद होने से भारत में एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। भारतीय ध्वज वाले 2 एलपीजी जहाज एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी ने सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार किया और 92,712 मीट्रिक टन LPG लेकर भारत पहुंचे। फिर भी, स्थानीय स्तर पर कमर्शियल उपयोगकर्ताओं को राहत नहीं मिल पाई है। बेंगलुरु के होटल एसोसिएशन और अन्य संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो सैकड़ों दुकानें बंद हो सकती हैं, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी। LPG संकट कितना गंभीर कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं, जिसमें कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के आदेश शामिल हैं। राज्य ने होटलों को बिजली या वैकल्पिक ईंधन पर स्विच करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में केंद्र से कमर्शियल और ऑटो एलपीजी के लिए तत्काल अतिरिक्त आवंटन की मांग की है। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे महानगर में कमर्शियल LPG पर निर्भरता बहुत अधिक है और इसकी कमी से शहर की खाद्य सेवा व्यवस्था ठप हो सकती है। केंद्र सरकार ने प्रभावित निर्यातकों के लिए 497 करोड़ रुपये की राहत पैकेज की घोषणा की है और वैश्विक साझेदारों से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है। यह संकट न केवल बेंगलुरु बल्कि पूरे कर्नाटक में व्यवसायों, रोजगार और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राज्य सरकार आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन केंद्र से तत्काल समर्थन जरूरी है। अगर स्थिति सुधरती नहीं तो होटल, रेस्तरां और अन्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर बंदी हो सकती है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल से इस समस्या का जल्द समाधान निकालने की जरूरत है।

घरेलू गैस की किल्लत से हाहाकार: झारखंड में बुकिंग ठप, एजेंसियों पर भीड़ बेकाबू

गढ़वा झारखंड के गढ़वा शहर में अब घरेलू गैस की ऑनलाइन बुकिंग बंद हो गई है। इसके बाद लोग गैस बुक करने के लिए सीधे एजेंसी के नंबर पर फोन कर रहे हैं। इससे शहर के ब्लॉक के पास इंडियन गैस कार्यालय और गोदामों में भारी भीड़ लग गई है। इस भीड़भाड़ और मारपीट की घटनाओं को देखते हुए वितरक ने जिला प्रशासन से पुलिस सुरक्षा की मांग की। अब पुलिस सुरक्षा के बीच ही गैस का कागजी काम और वितरण किया जा रहा है। उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्हें समय पर गैस नहीं मिल रही और कुछ लोग गैस का कालाबाजारी भी कर रहे हैं। वहीं गैस एजेंसी के वितरक अरविंद तूफानी ने कहा कि नियम के अनुसार आने वाले उपभोक्ताओं को कोई परेशानी नहीं है। नियम का उल्लंघन करने वाले ही दिक्कत में हैं। उन्होंने बताया कि गैस की कमी नहीं है, बस थोड़ी परेशानी होने के कारण पुलिस सुरक्षा मांगी गई है, इसके बाद सब सामान्य हो जाएगा। "जिले में गैस और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है" पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी और अनुमंडल पदाधिकारी गैस की व्यवस्था के लिए ठोस कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि अभी अधिकारी केवल फोटो खिंचवाने और भाषण देने में व्यस्त हैं। गढ़वा के डीसी दिनेश यादव ने कहा कि जिले में गैस और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जमाखोरी करने वालों या ऊंचे दाम पर बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  

गैस की किल्लत से हड़कंप: चेन्नई के रेस्तरां बंद, हाई कोर्ट कैंटीन प्रभावित, रेलवे ने अपनाया इंडक्शन

नई दिल्ली ईरान में जारी जंग का असर अब सीधे तौर पर भारत में भी दिखने लगा है। देश भर में एलपीजी की कमी देखी जा रही है। यहां तक कि सप्लाई ठीक बनी रहे और किसी तरह की अफवाह ना फैले। इससे बचाव के लिए सरकार ने एस्मा लागू कर दिया है। इसके तहत तय किया गया है कि उद्योगों को सप्लाई में पहले की तुलना में 80 फीसदी ही सप्लाई की जाएगी। वहीं घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह गैस मिलती रहेगी।   पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इसके परिणामस्वरूप गैस आपूर्ति में व्यवधान के बीच, उत्तराखंड सरकार ने जरूरत की स्थिति में व्यावसायिक उपयोग के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है। उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वर्तमान स्थिति संकटपूर्ण है। उन्होंने कहा, 'कई पश्चिम एशियाई देशों में युद्ध जैसी परिस्थितियां बन रही हैं, इसलिए गैस की कमी की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।' इस स्थिति से निपटने के लिए उत्तराखंड वन विकास निगम को लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि गैस संकट बढ़ने की स्थिति में वाणिज्यिक गतिविधियों में इसका उपयोग वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जा सके। खाड़ी देशों में युद्ध का असर नोएडा तक, गैस सिलेंडर की किल्लत बढ़ने से एजेंसियों पर उमड़ी भीड़ खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से कई इलाकों में किल्लत बढ़ गई है। स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग गैस एजेंसियों के बाहर पहुंच रहे हैं और लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। नोएडा सेक्टर-24 थाना क्षेत्र के सेक्टर-54 स्थित गैस एजेंसियों के बाहर बुधवार सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ देखने को मिली। जैसे ही सिलेंडर की कमी की खबर फैली, लोग समय से पहले ही एजेंसियों पर पहुंचने लगे। कई उपभोक्ता अपने खाली सिलेंडर लेकर लाइन में खड़े नजर आए। कुछ जगहों पर इतनी भीड़ हो गई कि एजेंसी के बाहर अव्यवस्था जैसी स्थिति बनती दिखाई दी। माइक्रोवेव, इंडक्शन का इस्तेमाल करें वेंडर्स- IRCTC IRCTC ने वेंडर्स से खाना पकाने के तरीके बदलने को कहा, क्योंकि ईरान युद्ध से LNG का फ्लो रुका हुआ है। रेलवे ने कहा है कि 'माइक्रोवेव, इंडक्शन का इस्तेमाल करें' दिल्ली हाई कोर्ट में लंच उपलब्ध नहीं। एलपीजी संकट के चलते हालात ऐसे हो गए हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट में लंच उपलब्ध नहीं है। चेन्नई में एलपीजी सिलेंडर का संकट गहराया, होटलों-रेस्तरां ने घोषित की छुट्टी चेन्नई और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में संचालित होटलों और रेस्तरां के एक वर्ग ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति न होने के कारण बुधवार को छुट्टी घोषित कर दी। कर्मचारियों ने यह जानकारी दी। सुबह-सुबह चाय-कॉफी के लिए पहुंचे ग्राहकों ने होटलों के बंद रहने पर निराशा व्यक्त की और आशा जताई कि केंद्र सरकार स्थिति सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाएगी। शहर के एक लोकप्रिय होटल में बुधवार को लगे नोटिस में लिखा था, 'एलपीजी आपूर्ति न होने के कारण 11 मार्च 2026 को छुट्टी घोषित की गई है।' करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा- केजरीवाल एलपीजी संकट के कारण होटल और रेस्तरां पर पड़ने वाले प्रभाव से एक करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा: अरविंद केजरीवाल