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पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही आम आदमी पर डबल मार, एक्सपर्ट बोले- अब और बढ़ेगी महंगाई

भोपाल  पांच दिन के अंदर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गईं। इसके बाद ट्रांसपोर्टर्स ने मध्य प्रदेश में माल भाड़ा बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में माल भाड़ा 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पहले ही दूध, खाना और LPG महंगे हो चुके हैं। अब भाड़े में बढ़ोतरी से आम आदमी का बजट गड़बड़ाना तय है। भोपाल के बड़े ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि सरकार की नीतियों के चलते ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही ऑक्सीजन पर है। अब डीजल के रेट तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि भोपाल से इंदौर के बीच का भाड़ा 10 हजार रुपए है तो यह बढ़कर 11 हजार रुपए हो सकता है। एमपी में 8 से 10 लाख ट्रक चलते हैं, जो ऑल इंडिया परमिट वाले होते हैं, यानी ये पूरे देश में कहीं भी माल लाने-ले जाने का काम करते हैं। माल भाड़ा बढ़ा तो महंगा होगा सामान ट्रक व लोडिंग वाहनों से पूरे प्रदेश में किराना, सोयाबीन, कपास, गेहूं, सीमेंट, चूना पत्थर, दवाएं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोलर पैनल, खाद आदि की सप्लाई की जाती है। माल भाड़ा बढ़ने से इन सामानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि भाड़ा बढ़ने का असर आखिरकार जनता पर ही होगा। खाना महंगा, होटल और रेस्टॉरेंट में 10 से 15% तक बढ़ोतरी भोपाल होटल एवं रेस्टॉरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली बताते हैं कि होटल इंडस्ट्री पहले ही LPG संकट से जूझ रही है। 2 महीने के अंदर कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ गए। अब यह करीब 3 हजार रुपए में मिल रहा है। LPG संकट के बाद भोपाल में भोजन 10 से 15 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। दूध के रेट 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़े हैं। इस वजह से पनीर और दही भी महंगे हो गए, जिसका असर सीधे खाने के मेन्यू पर पड़ा है। किचन से जुड़ा सामान महंगा हो चुका किराना कारोबारी विवेक साहू कहते हैं कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद बाजार में रोजमर्रा की जरूरत के सामान की कीमतें बढ़ी हैं। इससे जनता के बजट पर असर पड़ा है। माल भाड़ा बढ़ता है तो तय है कि कीमतें और भी बढ़ जाएंगी। टैक्सी संगठन की बैठक अगले सप्ताह ऑल इंडिया टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के राष्ट्रीय सचिव नफीस उद्दीन ने बताया कि संगठन और टैक्सी चालकों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। अगले एक सप्ताह में बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें 10 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बैठक के बाद ही तय होगा कि किराया कितना बढ़ाया जाए। पंपों की स्टॉक लीमिट तय पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, एचपीसीएल में 300 लीटर, बीपीसीएल व इंडियन ऑयल में एक बार में 200 लीटर से ज्यादा डीजल भरते ही मशीन लॉक हो जाएगी। बता दें ​कि बस और ट्रक का डीजल टैंक 150 से 600 लीटर के बीच होता है। तेल कंपनियां ऐसी कैपिंग से इनकार किया है। एचपीसीएल के सीजीएम अश्विन के सिन्हा व इंडियन ऑयल के सीजीएम नवनीत मेहता ने ने कहा कि ऐसी कोई कैपिंग नहीं की है।

गिरते रुपये पर सरकार का बड़ा प्लान, विदेशी आयात घटाने की रणनीति पर काम तेज

नई दिल्ली भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.5 पर बंद हुआ, जबकि  यह 96.34 पर था. इस गिरते हुए रुपया को संभालने के लिए पिछले महीने ही आरबीआई ने कई अहम कदम उठाए थे. लेकिन इससे भी कुछ खास असर पड़ता हुआ नजर नहीं आया।  अब सरकार देश के बढ़ते इंपोर्ट बिल को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गैर-जरूरी(non essential) सामानों के इंपोर्ट की समीक्षा कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, जिन सामानों में भारत की विदेशों पर निर्भरता कम है, उनके आयात पर ज्यादा चार्ज या कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  पेमेंट बैलेंस पर दबाव इस मुद्दे पर अगले हफ्ते पश्चिम एशिया संकट को लेकर होने वाली मंत्रालय की बैठक में चर्चा हो सकती है. भारत का ट्रेड डेफिसिट अप्रैल में बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मार्च में 20.7 अरब डॉलर था. इससे देश के पेमेंट बैलेंस पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि विदेशी निवेश में कमी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाहर जाने जैसी चुनौतियां भी सामने हैं।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि अगर आयात पर कोई रोक या अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो उसे बहुत सोच-समझकर लागू किया जाएगा, ताकि जरूरी सप्लाई चेन और उद्योगों पर कोई बड़ा असर न पड़े।  रुपये की स्थिति सुधारने के लिए सरकार का कदम अगले हफ्ते होने वाली बैठक में सरकार गैर-जरूरी सामानों(non essential items) के आयात को कम करने, रुपये की स्थिति सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने के उपायों पर चर्चा करेगी. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ऐसे कदमों पर विचार कर रही है जिससे देश का इंपोर्ट बिल कम हो और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिले।  इस बैठक में वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होंगे. साथ ही रेवेन्यू बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए तुरंत लागू किए जा सकने वाले उपायों पर भी चर्चा की जाएगी।  इंपोर्टेड सामानों नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी सरकार का मानना है कि कई ऐसे सामान विदेशों से इंपोर्ट किए जा रहे हैं, जिन्हें भारत में ही बनाया जा सकता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. अधिकारियों ने कहा कि सरकार उद्योगों से बातचीत कर रही है ताकि गैर-जरूरी आयात कम हो सके. जरूरत पड़ने पर कुछ सामानों पर इंपोर्ट बिल बढ़ाया जा सकता है या नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  सोने के आयात पर सरकार का फैसला हाल ही में सरकार ने सोने के आयात को कम करने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाई थी और कुछ नियम भी लागू किए थे. सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिसमें 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत सेस शामिल है. सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट कम होगा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और देश का बढ़ता इंपोर्ट बिल नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।  अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में उठाए जाने वाले कदम पूरी योजना और संतुलन के साथ होंगे, ताकि जरूरी सामानों और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर असर न पड़े. इसका मकसद रुपये को मजबूती देना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।  सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन सामानों की लिस्ट मांगी है जिनके आयात को सीमित किया जा सकता है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कारोबारियों से कहा है कि जिन चीजों का उत्पादन भारत में हो सकता है, उन्हें विदेशों से मंगाने से बचना चाहिए. उनका कहना है कि कई सस्ते आयातित सामान की क्वालिटी भी अच्छी नहीं होती, इसलिए देश में निर्माण बढ़ाना जरूरी है।