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धान खरीद में देरी से किसान परेशान, जींद-असंध मार्ग पर जाम; अंबाला की मंडियों में बढ़ी निगरानी

पानीपत  प्रदेशभर की अनाज मंडियों में धान की आवक जोरों पर है। वहीं कई जिलों की मंडियों में धान खरीद न होने से किसानों में रोष है। मंडियों में पीआर धान की सरकारी खरीद 29 सितंबर से शुरू हो चुकी है, लेकिन कई जगह राइस मिलर्स के पंजीकरण में देरी के चलते एजेंसियां खरीद शुरू करने से पीछे हटती रही बुधवार को अनाज जींद की अलेवा अनाज मंडी में धान खरीद शुरू नहीं होने से गुस्साए किसानों ने जींद-असंध मार्ग के मुख्य चौक पर जाम लगा दिया। वहीं अंबाला में सभी मंडियों में पुलिस निगरानी बढ़ गई है। यमुनानगर में मंगलवार को हुई वर्षा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। जींद में अब तक 31,380 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है और 5,253 टन की खरीद हुई है। कुरुक्षेत्र में 35 हजार मीट्रिक टन की आवक और 17 हजार एमटी धान की खरीद, यमुनानगर में 87 हजार एमटी धान की आवक और 38,400 एमटी धान की खरीद, पानीपत में अब तक 25 हजार मीट्रिक टन धान की आवक और खरीद 24,700 एमटी की खरीद हुई। अंबाला में अब तक 40 हजार एमटी धान की आवक हुई है, वहीं खरीद करीब 30 हजार एमटी हुई है। कैथल में अब तक साढ़े 3 लाख मीट्रिक टन धान की आवक और 38 हजार एमटी की खरीद हुई। इधर यमुनानगर में उठान धीमा होने से किसानों का भुगतान अटक गया है। अंबाला जिले की अनाज मंडियां पुलिस की निगरानी में हैं। बुधवार को अलेवा अनाज मंडी में पीआर धान की खरीद शुरू न होने से किसानों ने जींद-असंध मार्ग पर जाम लगा दिया। अलेवा थाना प्रभारी आत्माराम और नायब तहसीलदार ओंकार दत्त शर्मा मौके पर पहुंचे। एसडीएम और डीएम हैफेड ने किसान सभा के पदाधिकारियों के साथ पहुंचकर खरीद एजेंसी के माध्यम से पीआर धान की खरीद शुरू करवाई। अधिकारियों पर लगाए आरोप करनाल की नई अनाजमंडी में धान की सरकारी खरीद में देरी से परेशान किसानों की शिकायत पर भाकियू नेता पहुंचे। नेताओं ने अधिकारियों से बातचीत कर एक सप्ताह से मंडी में बैठे किसानों की खरीद शुरू करवाई और नमी जांच कराई। बहादुर मैहला बलड़ी व जगदीप ओलख ने अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए। लाडवा मंडी में पहुंचे कृषि मंत्री कुरुक्षेत्र की लाडवा मंडी में बुधवार दोपहर बाद उस समय हलचल मच गई, जब कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा मंडी का निरीक्षण करने पहुंचे। मंडी में मंत्री के पहुंचने की सूचना पर आढ़तियों व किसानों में भी सक्रियता दिखाई दी। कृषि मंत्री ने कहा कि फसल की खरीद में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना में बढ़ा लाभ, वैकल्पिक फसलों पर मिलेंगे ₹10 हजार तक

 चंडीगढ़  लगातार गिरते भू-जलस्तर से जूझ रहे हरियाणा में अब प्रदेश सरकार ने किसानों को धान की सीधी बिजाई या फिर कम पानी लेने वाली फसलों को लगाने के लिए प्रोत्साहित करने को 'मेरा पानी-मेरी विरासत' तथा 'फसल विविधीकरण और जल संरक्षण' योजना का विस्तार किया है। दोनों योजनाओं में पंजीकरण कराने वाले किसानों की प्रोत्साहन राशि पांच वर्षों तक हर साल बढ़ती जाएगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी को मंजूरी प्रदान की है, जिसके बाद कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने अधिसूचना जारी कर दी है। मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत धान की बजाय वैकल्पिक फसलें लगाने वाले किसानों को पहले साल 8000 रुपये, दूसरे वर्ष 8300 रुपये, तीसरे वर्ष 8800 रुपये, चौथे वर्ष 9400 रुपये और पांचवें साल 10,000 रुपये दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, दालें, तिलहन और कपास लगाने पर दो हजार रुपये का बोनस अलग से मिलेगा। इसी तरह धान की सीधी बिजाई पर पहले साल 4500, दूसरे साल 4700, तीसरे साल 5000, चौथे साल 5400 और पांचवें साल 6000 रुपये मिलेंगे। बढ़ी प्रोत्साहन राशि का लाभ उठाने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्याेरा पोर्टल पर किला नंबर वही दर्ज होना चाहिए। मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में पहली बार धान की बजाय खेत में मक्का, कपास, खरीफ की दालें (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन), खरीफ के तिलहन (तिल, अरंडी, मूंगफली), चारे की फसलें, कृषि-वानिकी (पापुलर और सफेदा) तथा खरीफ की प्याज सहित बागवानी फसलें व सब्जियां लगाने पर किसानों के बैंक खातों में आठ हजार रुपये डाले जाएंगे। इसके बाद किसान जैसे-जैस वैकल्पिक फसलें लगाते रहेंगे, उनकी प्रोत्साहन राशि बढ़ती जाएगी। वे किसान भी लाभान्वित होंगे, जिन्होंने धान लगाने की बजाय अपने खेतों को खाली छोड़ा है। फिलहाल योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने पिछले साल धान उगाया था और इस साल उसी खेत में स्वीकृत वैकल्पिक फसलों में से कोई एक फसल लगाई है। वे किसान, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में से किसी भी वर्ष उसी खेत में वैकल्पिक फसलें उगाई थीं, वे पात्र नहीं होंगे। जिस किसानों ने पिछले खरीफ सीजन में मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत फसल विविधीकरण अपनाया था, वह इस साल भी योजना का लाभ उठा सकेंगे, बशर्ते कि उसी खेत में मंजूर की गईं वैकल्पिक फसलें उगाएं। यदि कोई किसान किसी बाद के वर्ष में उस 'किला नंबर' पर वैकल्पिक फसलें लगाना बंद कर देता है, तो वह उस विशिष्ट वर्ष में प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं होगा। यदि किसान एक साल के अंतराल के बाद उसी किला नंबर पर वैकल्पिक फसल अपनाता है, तो इसे नया नामांकन माना जाएगा और उसे प्रति एकड़ 8000 रुपये का शुरुआती वर्ष का प्रोत्साहन मिलेगा। डीएसआर मशीन पर मिलेगी 40 हजार रुपये तक सब्सिडी धान की सीधी बिजाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डीएसआर मशीन पर सब्सिडी कीमत की 50 प्रतिशत या 40 हजार रुपये (जो भी कम हो) के हिसाब से दी जाएगी। सभी लाभार्थियों के बैंक खातों में यह राशि डीबीटी के माध्यम से डाली जाएगी। हरी खाद लगाने पर प्रति एकड़ मिलेंगे एक हजार रुपये किसानों को खेतों में हरी खाद तैयार करने के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाएंगे। ढैंचा, गर्मी की मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, अरहर और सोयाबीन तथा ग्वार लगाने पर यह प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  

धान खरीद को लेकर हरियाणा सरकार की केंद्र से बड़ी मांग, 65 लाख टन का कोटा मांगा

चंडीगढ़  हरियाणा में इस बार धान की संभावित रिकार्ड पैदावार के बीच खरीद को लेकर राज्य सरकार ने केंद्र के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री प्रहलाद जोशी से मुलाकात कर हरियाणा के लिए धान खरीद का कोटा बढ़ाने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में उत्पादन अधिक होने की स्थिति में किसानों की पूरी फसल खरीदने की व्यवस्था जरूरी है। बैठक में विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी जे गणेशन समेत वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। राजेश नागर ने केंद्र से हरियाणा को कम से कम 65 लाख टन धान खरीद की मंजूरी देने का अनुरोध किया। प्रदेश सरकार ने पहले करीब 60 लाख टन धान खरीद की मंजूरी मांगी थी, जबकि केंद्र ने फिलहाल 58 लाख टन की ही मंजूरी दे रखी है। ऐसे में राज्य सरकार को आशंका है कि यदि उत्पादन अनुमान के मुताबिक अधिक रहा तो खरीद के समय मंडियों में दबाव बढ़ सकता है और किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी आ सकती है। चावल का कोटा घटने से भी बढ़ी चिंता बैठक में हरियाणा ने धान के साथ-साथ चावल के खरीद कोटे में कमी का मुद्दा भी उठाया। केंद्र की ओर से चावल लेने का कोटा करीब 8 लाख टन घटाया गया है। केंद्र की ओर से हर साल लगभग 40 टन चावल खरीदा जाता है। राज्य सरकार का कहना है कि धान की अधिक उपलब्धता के बीच चावल का कोटा कम होने से खरीद और उठान की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इस बार सबसे अधिक धान उत्पादन की संभावना इस बार प्रदेश में करीब 17.41 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई हुई है। पिछले वर्षों में भी धान उत्पादन लगातार बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में करीब 82.29 लाख टन, 2022-23 में 88.20 लाख टन, 2023-24 में 94.20 लाख टन और 2024-25 में 92.99 लाख टन उत्पादन दर्ज हुआ। इस बार उत्पादन करीब 97.86 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। राजेश नागर को खरीद कोटा बढ़ने की उम्मीद केंद्रीय मंत्री के साथ हुई बैठक के बाद राजेश नागर ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ने हरियाणा की मांग पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का भरोसा दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसानों के हित को देखते हुए धान खरीद का कोटा बढ़ाया जाएगा।