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मार्च में ही गर्मी का कहर: अलीगढ़ में पारा 35° पार, लू जैसा महसूस हुआ मौसम

अलीगढ़ मार्च की शुरुआत के साथ ही अलीगढ़ शहर में गर्मी के तेवर तेज होने लगे हैं। स्थिति यह है कि बीते दो दिन से अलीगढ़ पूरे प्रदेश में तीसरा सबसे गर्म जिला बना हुआ है। रविवार को अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, लेकिन तेज धूप और मौसम में नमी कम होने के कारण लोगों को 37 डिग्री जैसा तापमान महसूस हुआ। दरअसल पिछले कुछ दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे दोपहर के समय गर्मी का असर ज्यादा महसूस हो रहा है। दोपहर के समय तेज धूप के कारण सड़कों और बाजारों में लोगों की आवाजाही भी कम नजर आई। खासकर दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बीच गर्मी का असर अधिक रहा। लोग धूप से बचने के लिए छाता, गमछा और पानी की बोतल साथ लेकर निकलते दिखाई दिए। झांसी में सबसे ज्यादा गर्मी, दूसरे स्थान पर आगरा मौसम विभाग की जिलेवार रिपोर्ट के अनुसार, बीते 7 मार्च को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में सबसे ज्यादा तापमान झांसी, आगरा और अलीगढ़ में दर्ज किया गया। इन जिलों में क्रमश : 36.6, 36.4 और 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। नई दिल्ली स्थित मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. एम राजकुमार बताते हैं कि बुंदेलखंड में ज्यादा गर्मी सामान्य मानी जाती है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कुछ परिस्थितियों में तापमान तेजी से बढ़ जाता है। इसलिए गर्म हो रहा अलीगढ़     प्रो. एम राजकुमार ने बताया कि जब उत्तर भारत से पश्चिमी विक्षोभ गुजर जाता है तो उसके बाद आसमान साफ हो जाता है। बादल और नमी कम होने से सूर्य की सीधी किरणें जमीन को ज्यादा गर्म करती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ जाता है। अगर हवा की गति कम हो जाए तो गर्मी ज्यादा महसूस होती है। हवा न चलने पर जमीन की गर्मी आसपास ही बनी रहती है, जिससे तापमान और हीट इंडेक्स दोनों बढ़ जाते हैं।     राजस्थान और बुंदेलखंड की तरफ से आने वाली शुष्क गर्म हवा पश्चिम यूपी के हिस्सों तक पहुंच जाती है। इससे दिन का तापमान सामान्य से ज्यादा हो सकता है।     अलीगढ़ में कंक्रीट, सड़कें और इमारतें ज्यादा होने से जमीन तेजी से गर्म होती है और गर्मी ज्यादा देर तक बनी रहती है। इसे शहरी हीट आइलैंड प्रभाव कहते हैं। अगले दो दिन में 37 डिग्री पार मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। अगले दो दिन में अलीगढ़ का तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। सर्वाधिक बुधवार को दोपहर के वक्त 37 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर की तेज धूप से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जा रही है।  

भीषण गर्मी का अलर्ट: देश के 417 जिले हाई रिस्क में, दिन ही नहीं रातें भी दे रहीं राहत नहीं

नई दिल्ली भारत में क्लाइमेट चेंज का असर अब सिर्फ "चिलचिलाती दोपहर" तक ही सीमित नहीं है, बल्कि "घुटन भरी रातें" और "बढ़ती नमी" भी बड़ी आबादी के लिए जानलेवा खतरा बन रही हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की तरफ से जारी की गई नई स्टडी, "बहुत ज्यादा गर्मी भारत पर कैसे असर डाल रही है: जिला-लेवल हीट रिस्क का आकलन 2025", ने चौंकाने वाले तथ्य सामने लाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 57 प्रतिशत ज़िले, जहां देश की 76 प्रतिशत आबादी रहती है, अब बहुत ज़्यादा से लेकर बहुत ज्यादा गर्मी के खतरे का सामना कर रहे हैं। यह स्टडी पहली बार 35 इंडिकेटर्स के आधार पर 734 ज़िलों का डिटेल्ड एनालिसिस करती है, जो 1982 से 2022 तक बदलते ट्रेंड्स को दिखाता है। हीट 'हॉटस्पॉट': दिल्ली और महाराष्ट्र लिस्ट में सबसे ऊपर CEEW डेटा के मुताबिक, देश के 417 जिले 'हाई रिस्क' कैटेगरी में हैं, जबकि 201 जिलों में मीडियम रिस्क है। सबसे ज्यादा गर्मी के खतरे वाले टॉप 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट इस तरह है: दिल्ली, आंध्र प्रदेश, गोवा, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश दिलचस्प और चिंता की बात यह है कि यह खतरा सिर्फ़ शहरी इलाकों तक ही सीमित नहीं है। जहाँ दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे आर्थिक केंद्र खतरे में हैं, वहीं महाराष्ट्र, केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण ज़िले, जहाँ खेती करने वाले मज़दूर खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं, भी ज़्यादा खतरे में हैं। रातें दिनों से ज्यादा खतरनाक स्टडी की सबसे डरावनी बात 'गर्म रातों' (बहुत ज़्यादा गर्म रातें) में बढ़ोतरी है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले एक दशक (2012-2022) में, लगभग 70 प्रतिशत ज़िलों में हर गर्मी के मौसम में कम से कम पाँच और बहुत ज़्यादा गर्म रातें दर्ज की गई हैं। "साइंस साफ़ है—हम अब बहुत ज़्यादा, लंबे समय तक चलने वाली गर्मी और खतरनाक रूप से गर्म रातों के दौर में आ गए हैं।" जब रात का टेम्परेचर नॉर्मल से काफ़ी ज़्यादा रहता है, तो इंसान के शरीर को दिन की गर्मी से उबरने का समय नहीं मिलता, जिससे हीट स्ट्रोक और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। डेटा के मुताबिक, गर्म दिनों के मुकाबले गर्म रातें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। उत्तर भारत में बढ़ती ह्यूमिडिटी उत्तर भारत के ज़िले, जिन्हें पहले सूखा माना जाता था, अब तटीय इलाकों के बराबर ह्यूमिडिटी महसूस कर रहे हैं। पिछले दस सालों में इंडो-गैंगेटिक मैदानों में रिलेटिव ह्यूमिडिटी में 10 परसेंट की बढ़ोतरी देखी गई है। बदलाव: कानपुर, जयपुर, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों में ह्यूमिडिटी का लेवल 30-40 परसेंट से बढ़कर 40-50 परसेंट हो गया है। असर: ज्यादा ह्यूमिडिटी की वजह से महसूस होने वाला टेम्परेचर असल टेम्परेचर से 3-5 डिग्री सेल्सियस ज़्यादा हो जाता है। इससे शरीर के पसीना निकलने के नैचुरल कूलिंग प्रोसेस में रुकावट आती है, जिससे नॉर्मल टेम्परेचर भी जानलेवा हो जाता है। आगे का रास्ता: डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हीट एक्शन प्लान CEEW में सीनियर प्रोग्राम लीड, डॉ. विश्वास चिताले ने ज़ोर दिया कि लोकल लेवल पर हीट एक्शन प्लान लागू करने का समय आ गया है। महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन इसे नेशनल लेवल पर बढ़ाने की जरूरत है। मुख्य सुझाव:     फाइनेंशियल मदद: 2024 में हीटवेव को डिजास्टर कैटेगरी में शामिल किए जाने के साथ, राज्य अब स्टेट डिज़ास्टर मिटिगेशन फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं।     समाधान: नेट-जीरो कूलिंग शेल्टर, कूल रूफ और अर्ली वार्निंग सिस्टम को ज़रूरी करें।     डेटा अपडेट: हीट एक्शन प्लान में सिर्फ टेम्परेचर ही नहीं, बल्कि रात में होने वाली गर्मी और ह्यूमिडिटी का डेटा भी शामिल करें।     यह रिपोर्ट साफ करती है कि बहुत ज़्यादा गर्मी अब भविष्य की चेतावनी नहीं है, बल्कि आज की एक त्रासदी है, जिससे निपटने के लिए पॉलिसी और स्ट्रक्चरल बदलावों की जरूरत है।