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झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में AI की एंट्री, शिक्षक दिवस पर हेमंत सोरेन ने बताया भविष्य का रोडमैप

रांची शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ शिक्षा के तरीके में भी बदलाव जरूरी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत नई तकनीक विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के मुताबिक बेहतर शिक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। डॉ. राधाकृष्णन को किया नमन मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं और जोहार दिया। शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर सरकार का फोकस हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर स्तर पर मौजूद कमियों को दूर करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी सुधार लाकर विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। AI से बदलेगा पढ़ाने का तरीका मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में AI और आधुनिक तकनीक शिक्षण प्रक्रिया को ज्यादा सहज और प्रभावी बना सकती है। तकनीक के इस्तेमाल से विद्यार्थियों की जरूरत और क्षमता के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक शिक्षा के साथ मूल्यों से जुड़ाव जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है। नई पीढ़ी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उसे अपने मूल्यों, संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखना भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि समाज और नई पीढ़ी के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

रांची में अंग एवं ऊतक दान पर कार्यशाला, मुख्यमंत्री ने इसे जनआंदोलन बनाने की अपील की

रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बारियातू रोड स्थित एक होटल में मोहन फाउंडेशन की ओर से आयोजित 'अंग एवं ऊतक दान में श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां' विषयक कार्यशाला में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अंग एवं ऊतक दान का विषय बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है। इसके कानूनी पहलुओं को भी समझना जरूरी है। राज्य सरकार भी अंग एवं ऊतक दान को बढ़ावा देने के लिए पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि अंगदान कई अन्य व्यक्तियों के जीवन की नई शुरुआत बन सकता है और लोगों के जीवन में नई उम्मीद तथा खुशियां ला सकता है। अंगदान को जनआंदोलन बनाने की जरूरत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, सामाजिक संगठनों तथा आम लोगों को मिलकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिशा में सामूहिक प्रयास ही सकारात्मक परिणाम ला सकते हैं। मुख्यमंत्री कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में अहम पहल मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यशाला का आयोजन कर संस्थान ने एक अच्छी पहल की है। राज्य सरकार भी स्वस्थ समाज के निर्माण को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उनके परिवारजनों से अंगदान के संबंध में बातचीत की जानी चाहिए, ताकि अधिक लोगों को जीवनदान मिल सके। मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है अंगदान मुख्यमंत्री ने कहा कि अंगदान मानवता, संवेदनशीलता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। यह ऐसा कार्य है जो किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। आधुनिक चिकित्सा में बढ़ रही तकनीक की भूमिका मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक आधारित चिकित्सा प्रणाली का है। चिकित्सा जगत में बड़े पैमाने पर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। रोबोटिक शल्यक्रियाएं की जा रही हैं। यकृत और गुर्दा प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार भी स्वस्थ झारखंड निर्माण की दिशा में सकारात्मक कार्य कर रही है। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद कार्यक्रम में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, मणिपाल अंग साझाकरण के राष्ट्रीय प्रमुख कर्नल अवनीश, मोहन फाउंडेशन की राष्ट्रीय प्रमुख ललिता रघुराम, मणिपाल गहन चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार मिश्रा, कश्यप मेमोरियल नेत्र चिकित्सालय के संस्थापक निदेशक डॉ. बी. कश्यप सहित कई गणमान्य अतिथिगण उपस्थित थे।  

जमीन घोटाले में बढ़ीं हेमंत सोरेन की मुश्किलें, ED कोर्ट ने याचिका ठुकराई

 रांची  ईडी कोर्ट से बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन को राहत नहीं मिली है। ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका को खारिज कर दिया। तीन जून को सभी पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को अदालत ने 140 पेज में अपना निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रथम दृट्या मामला बनता है, इसलिए अब मुकदमा चलेगा। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि उपलब्ध सामाग्री से गंभीर संदेह पैदा होता है और यह पर्याप्त आधार है कि आरोपित के खिलाफ आरोप तय किए जाएं। कोर्ट ने हेमंत सोरेन इस दलील को खारिज कर दिया कि उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। क्या है पूरा मामला? मामला रांची के बरियातू रोड स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि यह जमीन हेमंत सोरेन ने अवैध रूप से कब्जाई थी। आरोप है कि सोरेन ने 2010-11 में मूल कब्जाधारियों को जबरन बेदखल कर यह जमीन हड़प ली और बाद में भू-राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसे वैध दिखाने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के पास से 17 मूल रजिस्टर और बड़ी संख्या में दस्तावेज बरामद हुए थे, जिनमें इसी जमीन का जिक्र था। ईडी के अनुसार, सोरेन के सहयोगी अभिषेक प्रसाद उर्फ पिंटू के जरिए मुख्यमंत्री कार्यालय से इस जमीन की वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए गए। हेमंत सोरेन की ओर से कहा गया था कि यह जमीन कथित अपराध से जुड़ी नहीं है। 2010-11 में कब्जे की बात है, जबकि आरोपित भानु प्रताप प्रसाद 2019 में ही रांची पोस्टिंग पर आया। इस जमीन पर कोई फर्जीवाड़ा पूरा नहीं हुआ। न तो रजिस्टर में सोरेन का नाम दर्ज किया गया और न ही कोई जाली दस्तावेज उनके नाम से बना। ईडी ने जिन गवाहों के बयानों का हवाला दिया, वे सुनी सुनाई बातों पर आधारित हैं। इसलिए प्रार्थी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। समय / वर्ष घटनाक्रम वर्ष 2024 बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025 हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026 ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026 विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में डिस्चार्ज याचिका पर फैसला। याचिका खारिज। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।  

हेमंत सोरेन को मिलेगी राहत या बढ़ेंगी मुश्किलें? जमीन घोटाले में 8 जून को आएगा कोर्ट का फैसला

रांची. ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में बड़गाई अंचल के 8.46 एकड़ जमीन घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत अपना निर्णय आठ जून को सुनाएगी। मामले में अपने आप को निर्दोष बताते हुए हेमंत सोरेन ने पांच दिसंबर को डिस्चार्ज याचिका दाखिल की है। हेमंत सोरेन की ओर से डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर कहा गया था कि वह इस मामले में निर्दोष है। उनके खिलाफ लगे सभी आरोप निराधार हैं। मामले में हेमंत सोरेन सहित 18 आरोपितों के खिलाफ ईडी ने चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए सभी आरोपितों को पुलिस पेपर सौंप दिया गया है। अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोप तय किया जाना है। समय / वर्ष     घटनाक्रम वर्ष 2024     बड़गाई अंचल की 8.46 एकड़ जमीन मामले में ईडी ने जांच तेज की और हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था (बाद में उन्हें जमानत मिली)। 5 दिसंबर 2025     हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर खुद को निर्दोष बताया। 3 जून 2026     ईडी की विशेष अदालत में दोनों पक्षों (हेमंत सोरेन के वकील और ईडी) की ओर से लंबी बहस पूरी हुई। 8 जून 2026     विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत इस डिस्चार्ज याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। न्यायालय के इस फैसले के बाद केस में आगे क्या होगा- यदि डिस्चार्ज याचिका स्वीकार होती है: अगर अदालत हेमंत सोरेन की दलीलें मान लेती है, तो उन्हें इस मामले से बरी किया जा सकता है (यानी उन पर ट्रायल नहीं चलेगा)। यदि डिस्चार्ज याचिका खारिज होती है: अगर अदालत याचिका खारिज कर देती है, तो अगली न्यायिक प्रक्रिया के तहत हेमंत सोरेन और अन्य सभी 18 आरोपितों पर कोर्ट में औपचारिक रूप से आरोप तय (Frame of Charges) किए जाएंगे और नियमित ट्रायल शुरू होगा। बड़गाई जमीन घोटाला: जानिए 4 बड़ी बातें मुख्य आरोप: यह पूरा मामला रांची के बड़गाई अंचल स्थित 8.46 एकड़ जमीन के अवैध कब्जे और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हेरफेर करने से जुड़ा है। ईडी इसे मनी लांड्रिंग का मामला मानकर जांच कर रही है। डिस्चार्ज याचिका क्या है: जब किसी आरोपी को लगता है कि जांच एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और आरोप निराधार हैं, तो वह अदालत से केस से बरी करने (डिस्चार्ज) की गुहार लगाता है। हेमंत सोरेन का पक्ष: पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर को याचिका दायर कर खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है और कहा है कि इस मामले से उनका कोई जुड़ाव नहीं है। अब तक की कार्रवाई: इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईडी अब तक  18 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर चुकी है।

झारखंड में ट्रेन देरी पर सियासत गरम: हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री को घेरा

 सरायकेला सरायकेला-खरसावां के चांडिल-टाटा रेल सेक्शन में ट्रेनों की लगातार हो रही लेट-लतीफी के मुद्दे को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उठाया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सीधे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को संबोधित करते हुए इस स्थिति को पूरी तरह ‘अस्वीकार्य’ बताया है. मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि पिछले दो वर्षों से इस महत्वपूर्ण रेल खंड पर यात्री ट्रेनें घंटों विलंब से चल रही हैं, जिससे आम जनता का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. मालगाड़ियों और पैसेंजर ट्रेनों के बीच भेदभाव का आरोप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेलवे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए लिखा कि एक ही ट्रैक पर यात्री ट्रेनों को घंटों रोक कर रखा जाता है, जबकि मालगाड़ियों की आवाजाही बिना किसी बाधा के निर्बाध रूप से जारी रहती है. उन्होंने तीखा सवाल पूछते हुए एक्स पर लिखा कि क्या रेलवे के हिसाब से झारखंड के लोगों का समय भी उतना ही मूल्यवान है, जितना देश की अर्थव्यवस्था के लिए माल परिवहन?” आम जनता और श्रमिकों पर पड़ रहा बुरा असर ट्रेनों के समय पर न चलने के कारण सबसे अधिक परेशानी उन श्रमिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को हो रही है जो प्रतिदिन रोजगार और शिक्षा के लिए इस रेल खंड का उपयोग करते हैं. सीएम ने कहा कि यह केवल परिचालन से जुड़ा एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों की सुविधा और उनकी गरिमा से जुड़ा प्रश्न है. हजारों यात्रियों को घंटों स्टेशन पर इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनके काम के घंटे और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं. रेल मंत्री से तत्काल समाधान का आग्रह हेमंत सोरेन ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मांग की है कि चांडिल-टाटा सेक्शन में यात्री ट्रेनों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए. इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में लंबित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है. सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड के नागरिकों की सुविधा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और रेलवे को ट्रेन लेट होने की समस्या का तत्काल स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए.

चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू, छात्रों को मिलेगी फेलोशिप

 रांची  राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है।   किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।

लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश, असम सरकार और केंद्र पर बरसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

असम  असम सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. उन्हें असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा में सभा करना था. पीएम के कार्यक्रम की वजह से उनके हैलीकॉप्टर को उड़ने की इजाजत नहीं दी गयी. इसके ठीक एक दिन पहले कल्पना सोरेन को तीन जगहों पर सभा करने की अनुमति नहीं दी गयी. असम में जब सभा करने नहीं दिया गया तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोबाइल फोन से ही जनता को संबोधित किया. सीएम ने सोशल मीडिया किया पोस्ट सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज को दबाने की फिर कोशिशें की गयी. कल कल्पना जी को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया.क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? असम में आदिवासी समाज को रोकने की कोशिश: हेमंत सोरेन सीएम ने कहा कि इतने वर्षों तक तो चाय बागान के मेरे लाखों शोषित, वंचित आदिवासी समाज के भाइयों बहनों को रोकने की नाकाम कोशिश की है, और कितना रोक पाओगे?इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है. आगामी नौ अप्रैल के दिन मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे. विरोधियों को चुनाव प्रचार करने से रोकते हैं: हेमंत सीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि असम की क्रांतिकारी धरती ने कभी झुकना नहीं सीखा है.प्रधानमंत्री जी का कार्यक्रम बताकर आज मुझे प्रचार के लिए जाने नहीं दिया गया. हमलोगों को जहां है वहीं पर रहने का आदेश दिया गया. पीएम अपने कुर्सी व राजनीतिक ताकत के बदौलत चुनाव के अंतिम चरण में विरोधियों को प्रचार-प्रसार करने से इसी तरह रोकते हैं. ये लोग ऐन-केन प्रकारेण चुनाव जीतने का प्रयास करते हैं. कभी वोट चोरी कर जीतते हैं. झामुमो पहली बार यहां चुनाव लड़ रहा है. जय भारत पार्टी के साथ हैं. लोकतंत्र की आड़ बंद किया जायेगा: सीएम क्या लोकतंत्र अब कार्यक्रमों की आड़ में बंद किया जायेगा? और यह सब कैसे हो रहा है? संवैधानिक संस्थाओं का खुलेआम दुरुपयोग कर, एजेंसियों को हथियार बनाकर. हमारे पुरखों ने हमें झुकना नहीं, संघर्ष करना सिखाया है. हम लड़ते आए हैं और हर लड़ाई जीतकर ही आगे बढ़े हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा सीएम ने कहा कि असम का शोषित, वंचित, आदिवासी, दलित और पिछड़ा समाज अब जाग चुका है. चाय बागान में रहने वाले लोग भी अब आगे बढ़कर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं. अब यह समाज चुप नहीं रहेगा, अपने अधिकार लेकर ही रहेगा.इसलिए साथियों, हमें एकजुट होना है. हमारी एकजुटता ही विरोधियों के लिए सबसे बड़ा जवाब है, और यही एकजुटता पहले ही इनके डर का कारण बन चुकी है. 250 रुपये में जहर भी नहीं मिलता सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि चाय बगान को मजदूरों को एक दिन की मजदूरी 250 रुपये मिलती है. इतनी राशि में तो जहर भी नहीं मिलता.राज्य सरकार ने चाय बगान के मजदूरों को न जीने के लिए छोड़ा है और न ही मरने के लिए छोड़ा है. नौ अप्रैल को अत्याचार का बदला वोट से देगी जनता सीएम ने कहा कि याद रखिये, जितना हमें रोकोगे, हम उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेंगे क्योंकि हमारे तीर-धनुष की ताकत सिर्फ प्रतीक नहीं, यह हमारे आत्मसम्मान और संघर्ष की पहचान है.आगामी नौ अप्रैल को हमारा यह संघर्षी समाज अपने ऊपर वर्षों से हुए शोषण और अत्याचार का बदला वोट की ताकत के साथ लेकर रहेगा.

Hemant Soren in Assam: JMM का चुनावी बिगुल आज, सोरेन संभालेंगे कमान

रांची. असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुक्रवार शाम असम पहुंच गए, जहां वे 28 मार्च से पार्टी के चुनावी प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत करेंगे। उनका पहला कार्यक्रम कोकराझार जिले के गोसाई गांव विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित है, जहां वे एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। झामुमो के लिए यह चुनाव महज विस्तार का प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री अगले कुछ दिनों तक असम में ही रहेंगे और विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में लगातार सभाएं करेंगे। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अभियान को धार पार्टी अध्यक्ष के रूप में हेमंत सोरेन खुद पूरे चुनावी अभियान की कमान संभाल रहे हैं। झामुमो ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह असम में अपने दम पर चुनाव लड़ रही है और इसके लिए संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया गया है। पार्टी महासचिव विनोद पांडेय असम में लगातार कैंप कर रहे हैं और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। उनके नेतृत्व में स्थानीय समीकरणों और मुद्दों के आधार पर प्रचार की रूपरेखा तैयार की जा रही है। स्टार प्रचारकों की तैनाती, संगठन हुआ सक्रिय झामुमो ने अपने 20 स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को सौंप दी है। इसमें हेमंत सोरेन के अलावा डा. सरफराज अहमद, सुप्रियो भट्टाचार्य, जोबा मांझी, दीपक बिरुआ, चमरा लिंडा, कल्पना मुर्मू सोरेन, अभिषेक प्रसाद और डा. महुआ माजी जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं। पार्टी के कई मंत्री और विधायक जैसे दीपक बिरुआ, चमरा लिंडा और आलोक सोरेन, एमटी राजा पहले ही असम पहुंचकर स्थानीय स्तर पर चुनावी गतिविधियों को गति दे रहे हैं। चुनिंदा क्षेत्रों पर फोकस, स्थानीय मुद्दों पर जोर झामुमो की रणनीति असम के चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रभाव को मजबूत करने पर केंद्रित है। पार्टी स्थानीय सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को प्रमुखता देते हुए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। हेमंत सोरेन की सभाएं झामुमो कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के साथ-साथ पार्टी को नए क्षेत्रों में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

उच्च शिक्षा को बढ़ावा: गोड्डा के बोआरीजोर में डिग्री कॉलेज बनाने की घोषणा

गोड्डा. राज्य सरकार ने बोआरीजोर प्रखंड के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा मुहैया कराने के लिए डिग्री कॉलेज का तोहफा दिया है। बीते दिनों कैबिनेट के फैसले के बाद बोआरीजोर में डिग्री कॉलेज के निर्माण के लिए सरकार ने 40.19 करोड़ रुपये का आवंटन जारी कर दिया। अब यहां के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। बोरियो विधायक धनंजय सोरेन के प्रयास के बाद यह काम हुआ है। कैबिनेट के फैसले के बाद अब बोआरीजोर में डिग्री कॉलेज खुलने का रास्ता साफ हो गया है। छात्रों को नहीं जाना पड़ेगा बाहर झारखंड सरकार ने कॉलेज निर्माण के लिए 40 करोड़ 19 लाख 1800 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। अनुसूचित जन जाति बहुल और ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण इंटर स्तरीय शिक्षा हासिल करने के बाद बच्चों को गांव से बाहर जाकर उच्च शिक्षा हासिल करनी पड़ती थी। डिग्री कॉलेज की स्वीकृति के बाद अब आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे गांव में ही डिग्री की पढ़ाई हासिल कर सकेंगे। इसकी स्वीकृति मिलने पर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोगों ने सरकार और विधायक को धन्यवाद दिया है। लोगों ने बताया कि डिग्री कालेज खुलने पर ग्रामीण क्षेत्र में शैक्षणिक विकास को और गति मिलेगी। झारखंड सरकार द्वारा उच्च शिक्षा ढांचा को सशक्त बनाने एवं छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर करने में यह महत्वाकांक्षी योजना मील का पत्थर साबित होगा। लोगों ने सरकार की इस पहल को स्वागत योग्य बताया है। 2 लाख से अधिक आबादी वाला है प्रखंड जिला समिति सदस्य दिलीप ठाकुर, अनुसील हेमब्रम,दिनेश, चांद नारायण मुर्मू, दीनबंधु मंडल आदि सामाजिक चिंतकों ने बताया कि बोआरीजोर एक कृषि आधारित क्षेत्र है। करीब 2 लाख से अधिक की आबादी वाला यह प्रखंड है। प्रखंड में कॉलेज नहीं रहने से अधिकतर छात्र एवं छात्राएं उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाती थी। उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ता था, जो प्रखंड से लगभग 55 किलोमीटर दूर है। लेकिन अब सरकार की पहल से कॉलेज निर्माण होने के बाद हर बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर सकेंगे। ग्रामीणों ने कॉलेज को प्रखंड के आस-पास बनाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने हेमंत सोरेन को दी राहत, ED की खिंचाई, CJI ने दी अहम नसीहत

रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज शिकायत वाद पर रांची सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा लिए गए संज्ञान को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने रांची की MP-MLA कोर्ट की विशेष अदालत में चल रही कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। साथ ही ED को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश के बाद फिलहाल निचली अदालत में आगे की प्रक्रिया स्थगित रहेगी, जिससे मुख्यमंत्री को अस्थायी राहत मिल गई है। सीजेआई की अगुवाई वाली खंडपीठ में हुई सुनवाई मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई, जिसमें जस्टिस जॉयमंगल बागची भी शामिल थे। मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता प्रज्ञा सिंह बघेल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि रांची सिविल कोर्ट के सीजेएम द्वारा संज्ञान लिये जाने और उसके बाद MP-MLA कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने की प्रक्रिया विधि सम्मत नहीं है। बहस के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप करते हुए विशेष अदालत की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। कोर्ट ने ED को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने MP-MLA कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम राहत को मुख्यमंत्री के लिए बड़ी कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय अभी बाकी है। ED के जवाब के बाद ही मामले में अगली सुनवाई की दिशा तय होगी। फिलहाल, MP-MLA कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक से राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज हो गई है।