samacharsecretary.com

रफ्तार बनी मौत की वजह: ट्रैक्टर पलटने से चालक की जान गई, 5 घायल

बालोद छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर खेत में पलट गया, जिससे चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।यह हादसा राजहरा थाना क्षेत्र के पत्थराटोला गांव के पास हुआ। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर में 20 से अधिक ग्रामीण सवार थे, जो रजही डेम किनारे खटला खाने गए थे। खाना खाने के बाद सभी लोग पथरकटोला होते हुए अपने गांव लौट रहे थे, तभी रास्ते में ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर खेत में पलट गया। हादसे में ट्रैक्टर चालक गौकरण दर्रो (40 वर्ष) ट्रैक्टर के नीचे दब गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं ट्रैक्टर में सवार पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है। ग्रामीणों के अनुसार ट्रैक्टर में क्षमता से अधिक लोग सवार थे, जिससे हादसे की आशंका और बढ़ गई थी। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

हाईवे पर स्पीड लेजर गन बढ़ाकर गाड़ियों की रफ्तार पर लगेगी लगाम

रांची. राज्य में सड़क दुर्घटना रोकने के लिए झारखंड पुलिस लगातार कोशिश में जुटी है। सड़क दुर्घटना के कारणों में वाहनों के रफ्तार को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। वाहनों के रफ्तार पर लगाम कसने के लिए हाइवे पर स्पीड लेजर गन की संख्या बढ़ाने पर विचार हुआ है। इसकी खरीदारी होने जा रही है। वहीं, शहरों में बेहतर गुणवत्ता के कैमरे भी जहां-तहां चौक-चौराहों पर लगेंगे, जो नंबर प्लेट की पहचान कर नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान जेनरेट करके भेजेंगे। दूसरे राज्यों में हाइवे पर वर्तमान में ऐसे कैमरे लग रहे हैं, जो स्पीड लेजर गन की तरह काम कर रहे हैं। कैमरे में स्पीड लिमिट तय है। उस स्पीड लिमिट को जैसे ही उक्त वाहन क्रास करता है, उसका स्वत: कट जाता है। राजधानी के भीतर वाहनों की रफ्तार पर लगाम कसने के लिए विशेष वाहन इंटरसेप्टर को भी उतारा गया था, लेकिन उक्त वाहन खराब पड़ा है। सड़क सुरक्षा कोषांग ने नए विशेष वाहन, इंटरसेप्टर खरीदने के लिए राज्य सरकार से अनुशंसा की थी। इसपर भी काम चल रहा है। राज्य में नए कैमरे, नए विशेष वाहन इंटरसेप्टर सहित सड़क सुरक्षा के लिए नए-नए उपकरणों की खरीदारी होनी है। कोषांग ने सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम कसने के लिए मोटर वाहन अधिनियम का सौ प्रतिशत अनुपालन पर जोर दिया है, जिसके लिए उपरोक्त उपकरणों की आवश्यकता पड़ेगी। करीब 30-31 तरह के उपकरण से राज्य की यातायात पुलिस लैस होगी। इनमें स्पीड लेजर गन, विशेष वाहन इंटरसेप्टर, ब्रेद एनालाइजर, स्ट्रेचर, हाई रेजोल्यूशन कैमरे, बटन कैमरे, व्हील लाक, बाडी वोर्न कैमरे आदि शामिल हैं। ये पुलिस को कानून के अनुपालन में मदद भी करेंगे और बदनामी से भी बचाएंगे। बॉडी ओर्न कैमरे चौक-चौराहों पर तैनात यातायात पुलिस को लगाने होंगे, ताकि आम नागरिक से उनके किए गए बर्ताव उसमें रिकार्ड हो सकें। इससे यह होगा कि पुलिस पर लगने वाले दुर्व्यवहार के आरोपों से उक्त पुलिसकर्मी, पदाधिकारी बच सके। बेहतर स्वास्थ सुविधा पर भी जोर सड़क दुर्घटना में अधिक से अधिक घायलों की जान बच सके, इसके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पर भी जोर दिया गया है। अब सभी जिलों में वहां के सिविल सर्जन व वहां की पुलिस के बीच आपसी समन्वय और मजबूत होगी। घायलों को अस्पताल ले जाने पर बेहतर समन्वय से घायलों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए भी सभी सिविल सर्जन को राज्य सरकार की ओर से सतर्क किया गया है। सरकार की ओर से जारी पत्र में सड़क सुरक्षा कोषांग की समीक्षा बैठक में आए तथ्यों को भी शामिल किया गया है।

MP में हाईवे पर हर दिन 21 करोड़ का खर्च, बावजूद इसके 33 सड़क हादसे और 10 मौतें

भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके नेशनल हाईवेज की जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है।  प्रदेश में जहां हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन 21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आंकड़ों की मानें तो एमपी के हाईवे पर हर दिन औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना 10 से 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पांच साल में खर्च हुए 38 हजार 700 करोड़ सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020-21 से लेकर 2024-25 तक MP में हाईवे के विकास और मरम्मत के लिए कुल 38 हजार 700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन 7 हजार 740 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण, डवलपमेंट और सुरक्षा कार्यों पर खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों पर सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं मिल पा रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिखित उत्तर से सामने आया है कि मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब ₹21 करोड़ हाईवे मेंटेनेंस और विकास पर खर्च हो रहे हैं , इसके बावजूद रोजाना औसतन 33 सड़क हादसे हुए और 10 से 11 लोग अपनी जान गवां रहे हैं। हर साल कितना खर्च हो रहा है? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 2020-21 से 2024-25 तक कुल हाइवे मेंटेनेंस व विकास बजट (MP): लगभग ₹38,700 करोड़ यानी औसतन ₹7,740 करोड़ हर साल है। सरकार के मुताबिक यह राशि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, चौड़ीकरण, उन्नयन और सड़क सुरक्षा पर खर्च की गई। 12 हजार से ज्यादा हादसे हर साल लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों को देखें तो एमपी में 2021 से लेकर 2025 तक पांच सालों में 61,176 दुर्घटनाएं हुई और इन हादसों में 19,416 मौतें हुईं। हर साल औसतन एमपी में 12,235 हादसे हो रहे हैं और 3,883 मौतें प्रति वर्ष हो रहीं हैं। हर दिन ₹21 करोड़ खर्च, फिर चूक कहां? केंद्र सरकार के अनुसार यह बजट सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत व रखरखाव, सुरक्षा कार्य, और नई परियोजनाओं पर खर्च किया गया। बीते पांच साल में मध्य प्रदेश को 4,000 किमी से ज्यादा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी सौंपी गईं। इसके बावजूद हादसों की संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मेंटेनेंस की गुणवत्ता, हाइवे डिजाइन और सुरक्षा इंतजाम जमीन पर उतने प्रभावी हैं? सरकार ने गिनाईं वजहें लोकसभा में दिए जवाब में मंत्रालय ने हादसों के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग, सड़क व वाहन की स्थिति को जिम्मेदार बताया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनज, लाइटिंग, सर्विस रोड और निगरानी पर खर्च की वास्तविक असरदार मॉनिटरिंग भी जरूरी है। डेवलपमेंट और मेंटेनेंस पर खर्च हुई राशि(करोड़ रुपए) वर्ष खर्च 2020–21 8,250 2021–22 9,006 2022–23 6,210 2023–24 7,447 2024–25 7,799 पांच साल में 19 हजार से ज्यादा मौतें लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश के हाईवे पर कुल 61 हजार 176 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। इनमें 19 हजार 416 लोगों की मौत हो गई। अगर इसका सालाना औसत निकालें, तो प्रदेश में हर साल 12 हजार 235 हादसे हो रहे हैं। साथ ही 3 हजार 883 लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों के निवेश के बाद भी हाईवे डेथ ट्रैप बने हुए हैं। मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025) साल कुल हादसे (Total Accidents) कुल मौतें (Total Deaths) 2021 11,030 3,389 2022 13,860 4,025 2023 14,561 4,476 2024 13,937 4,644 2025 7,788 2,882 कुल (Total) 61,176 19,416 करोड़ों के खर्च के बाद चूक कहां? केंद्र सरकार का दावा है कि बीते पांच सालों में मध्य प्रदेश को चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सौंपी गईं। बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा इंतजामों और मरम्मत पर खर्च हुआ। लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या ने मेंटेनेंस की गुणवत्ता और हाईवे डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड, लाइटिंग और सर्विस रोड जैसे सुरक्षा इंतजाम कागजों से उतरकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो पा रहे हैं?  

देश में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे की तैयारी, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को मिलेगा बड़ा फायदा

सागर देश में बिछाए जा रहे नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस वे के जाल बाद अब सरकार ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे बनाने पर फोकस करेगी. सरकार आगामी बजट में नीतिगत बदलाव करते हुए ग्रीन और इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को प्राथमिकता देने जा रही है. चर्चा है कि आगामी बजट में इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे के लिए 5000 करोड़ रुपए का विशेष प्रावधान किया जा रहा है. इसके तहत दिल्ली जयपुर और दिल्ली मुंबई एक्स्प्रेस के विशेष सेक्शन का चयन करके पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे विकसित करने के लिए प्रोत्साहन देने की तैयारी है. केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गड़करी पिछले दिनों इस बात के संकेत दे चुके हैं. इस प्रोजेक्ट के तहत स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर ओव्हरहैड केबल तकनीक और भारी वाहनों के लिए ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन डाली जाएगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे को बढ़ावा देने के पीछे प्रदूषण कम करना और पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता कम करना है. क्या होता है इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे में ऐसे नेशनल हाइवे तैयार किए जाएंगे. जहां विशेष रूप से ई व्हीकल को चार्ज किया जा सकेगा. यहां पर केबल तकनीक के जरिए ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाकर भारी वाहनों की चार्जिंग सड़क पर हो सकेगी. इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन भी बनाए जाएंगे, जहां छोटे ई व्हीकल चार्ज हो सकेंगे और बैटरी एक्सचेंज कर सकेंगे. ये हाइवे विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए विकसित किए जाने की तैयारी है. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण सुधार और ईधन की खपत कम होगी. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे से प्रदूषण की समस्या कम होगी. देश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होगा और विदेश से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योग को पंख लगेंगे. सरकार देश के बडे़ शहरों के बीच के सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस प्रोजेक्ट पर फोकस कर रही है. स्वीडन और जर्मनी की तर्ज पर विकसित होंगे इलेक्ट्रिक हाइवे इसके लिए सरकार ने स्वीडन और जर्मनी में विकसित की गई इलेक्ट्रिक हाइवे तकनीक को आधार बनाए गया है. इस तकनीक के तहत हाइवे पर ओव्हरहैड इलेक्ट्रिक लाइन बिछाने का काम किया जाएगा. हर 40-50 किमी पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. बड़े और भारी वाहन सड़क पर ही ओव्हरहैड केबल के जरिए चार्ज हो सकेंगे. इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे पर ग्रीन एनर्जी से चलने वाले चार्जिंग स्टेशन विकसित होंगे. 2030 तक पायलट प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य है इलेक्ट्रिक नेशनल हाइवे प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस वे और दिल्ली जयपुर नेशनल हाइवे पर चुनिंदा सेक्शन में ये विकसित किए जा रहे हैं. इसका उद्देश्य नेशनल हाइवे पर इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग के ढांचे को मजबूत करना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भारत का ऐसा इलेक्ट्रिक हाइवे होगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक हाईवे बन सकता है.

मध्य प्रदेश में 165 करोड़ रुपये का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू, 324 किमी का निर्माण करेगी मुंबई की कंपनी

 छतरपुर  छतरपुर शहर के तालाबों को स्वच्छ और साफ रखने के लिए वर्ष 2022 में स्वीकृत सीवर प्रोजेक्ट बीते चार साल से अटका हुआ था। तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण काम समय पर शुरू नहीं हो पाया था लेकिन अब नगर पालिका छतरपुर और मुंबई की कंपनी आरएनबी इंफ्रा के बीच अनुबंध होने के बाद परियोजना को नई दिशा मिली है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से अंतिम सर्वे शुरू कर दिया है, जिसे 90 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 165 करोड़ रुपए है। सर्वे के बाद ठेकेदार फाइल का वेरिफिकेशन किसी इंजीनियरिंग कॉलेज से कराएगा और इसके बाद इसे अंतिम अनुमोदन के लिए भोपाल भेजा जाएगा। अनुमोदन मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा। कार्य शुरू होने के बाद प्रोजेक्ट के अंतर्गत होने वाले कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।  तीन साल पहले पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट समय पर शुरू नहीं हो पाया। गुजरात की कंपनी द्वारा डीपीआर समय पर तैयार न करने और बार-बार टेंडर निरस्त होने के कारण कार्य रुक गया था। इस कारण शहर के प्रमुख तालाबों प्रताप सागर, संकट मोचन, ग्वाल मंगरा और किशोर सागर में गंदगी, जलकुंभी और जलकुमा डेमली जैसी वनस्पतियां पनप गई हैं। इससे पानी दुर्गंधपूर्ण और अनुपयोगी हो गया है। अलग-अलग क्षेत्रों में होगा सर्वे का कार्य नगर पालिका के उपयंत्री अंकित अरजरिया ने बताया, निर्माण एजेंसी और नगर पालिका के बीच अनुबंध हो गया है। ठेकेदार के कर्मचारियों ने नारायणपुरा रोड से सर्वे कार्य भी शुरू कर दिया है। निर्माण जल्द शुरू करने के लिए ठेकेदार को अलग-अलग क्षेत्र का सर्वे करने कहा गया है, ताकि ड्राइंग जल्दी तैयार हो और अनुमोदन मिल सके। अनुमोदन मिलने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शहर में तालाबों को स्वच्छ बनाने की योजना… प्रारंभ में नरायणपुरा और राजनगर रोड पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाएगा। इस चरण में आधुनिक तकनीक और उच्च क्षमता वाले उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे शहर के गंदे पानी को प्रभावी ढंग से साफ किया जा सके। इसके बाद फ्लौठा और सौरा तालाब में इंटरमीडिएटर पंपिंग सिस्टम (आईपीएस) लगाया जाएगा। यह सिस्टम तालाबों में जमा गंदे पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित रूप से बाहर निकालने का काम करेगा। 3 फेज में होगा प्रोजेक्ट फेज-1- शहर में 5 पानी की टंकियों का निर्माण। फेज-2- शहर के तालाबों का सौंदर्गीकरण और सफाई। फेज-3- 324 किलोमीटर सीवर लाइन बिछेगी, 3 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 पंपिंग स्टेशन बनेंगे। ये पंपिंग स्टेशन पानी को एक से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का कार्य करेंगे।

बिहार में हाइवे-एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को अब नहीं लगेगा अड़ंगा

पटना. बिहार में हाइवे, एक्सप्रेसवे और अन्य सड़कों के निर्माण के लिए सबसे प्रमुख माने जाने वाली जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में अब रुकावट नहीं आएगी। इसके लिए नीतीश सरकार ने विशेष पहल की है। इसके तहत विभागों की आपसी असहमति को दूर करने की कोशिश की गई है। दरअसल, पथ निर्माण विभाग और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों के बीच जमीन की रिपोर्ट मांगने-देने में कई बार देरी हो जाती है। इसका असर, विभिन्न सड़क निर्माण परियोजनाओं पर पड़ता है। इसका समाधान निकालने के लिए बिहार में अब जमीन अधिग्रहण के लिए परियोजनावार राजस्व अधिकारी तैनात किए जाएंगे। पथ निर्माण ने इसका प्रस्ताव तैयार कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा है। विभाग की यह कवायद सड़क परियोजनाओं के लिए तेजी से जमीन अधिग्रहण करना है, ताकि उसे समय पर पूरा किया जा सके। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस प्रस्ताव पर मुहर लगने के आसार हैं। पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार अभी सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का काम जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के माध्यम से हो रहा है। ऐसे में जब पथ निर्माण विभाग किसी खास परियोजना में जमीन अधिग्रहण की प्रगति की रिपोर्ट मांगता है तो वे जिले भर की परियोजना का हवाला देते हुए अपनी उपलब्धि गिनाने लगते हैं। साथ ही परियोजनाओं की संख्या गिनाते हुए अपनी व्यस्तता भी गिनाने लगते हैं। उनकी इस दलील के कारण यह हो रहा है कि कोई-कोई परियोजना में सालों बाद भी भी जमीन अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए अब विभाग ने तय किया है कि राज्य की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं के लिए अधिकारियों को नामित कर दिया जाए। खासकर नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे में अधिकारियों को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय की ओर से नामित किया जाता है। बिहार में सड़क निर्माण परियोजनाओं की बाधा दूर ऐसे में अगर पथ निर्माण विभाग किसी अधिकारी का नाम केंद्र को भेज देगा तो वे अपनी जिम्मेवारी से बच नहीं पाएंगे। ऐसे अधिकारियों की मांग पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग से की है। ये अधिकारी एडीएलओ (अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी) होंगे। ये जिलों में ही डीएलओ के अधीन काम करते हैं। अनुमंडल में बैठने वाले डीसीएलआर के समकक्ष इनकी शक्ति होती है। दोनों विभागों में बनी सहमति, जल्द निकलेगा आदेश पथ निर्माण विभाग ने राजस्व विभाग को कहा है कि वह परियोजनावार एडीएलओ दे। वे पथ निर्माण के लिए सड़क परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण करेंगे। केंद्र सरकार, पथ निर्माण के साथ ही राजस्व विभाग के साथ समन्वय कायम करने की जिम्मेदारी एडीएलओ की होगी। सूत्रों के अनुसार राजस्व विभाग और पथ निर्माण विभाग के बीच इस पर सहमति बन गई है। सरकार के शीर्ष स्तर पर जल्द ही इस बाबत विधिवत आदेश निकाला जाएगा।

मोदी सरकार ने बिहार के लिए रेलवे और हाईवे विकास परियोजनाओं को दी मंजूरी

पटना  चुनावी साल में बिहार को केंद्र सरकार से एक और बड़ा तोहफा मिला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में बुधवार को कुल 6 अहम फैसलों पर मुहर लगी. इन फैसलों पर करीब 94,916 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. रेलवे, सड़क, शिक्षा, जहाजरानी और रिसर्च जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी इन योजनाओं का सीधा फायदा बिहार और देश के बाकी हिस्सों को मिलेगा. रेलवे कर्मचारियों के लिए भी सरकार ने खुशी की सौगात दी है. उन्हें प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस देने का फैसला हुआ है, जिस पर 1,866 करोड़ रुपये खर्च होंगे. बिहार में बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेल लाइन डबलिंग परियोजना को मंजूरी दी गई है. इस पर 2,192 करोड़ रुपये खर्च होंगे. रेलवे का यह कदम न सिर्फ यात्रियों की सुविधा बढ़ाएगा बल्कि मालगाड़ियों की आवाजाही को भी दोगुना कर देगा. इसके अलावा साहेबगंज-बेतिया एनएच-139W को चार लेन बनाने पर 3,822 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट से सीमांचल और उत्तर बिहार के लोगों को तेज रफ्तार कनेक्टिविटी मिलेगी. चार-लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्‍ट से पटना और बेतिया के बीच संपर्क को बेहतर बनाया जाएगा. इससे उत्तर बिहार के वैशाली, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिले भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों तक जुड़ जाएंगे. मेड‍िकल, स्‍वास्‍थ्‍य से लेकर शिपबिल्डिंग प्रोजेक्‍ट पास     केंद्र ने मेडिकल कॉलेज और मेडिकल शिक्षा विस्तार पर 15,034 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है. इससे बिहार सहित देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और बेहतर होने की उम्मीद है.     इसके साथ ही सीएसआईआर की क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास योजना पर 2,277 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे देश में रिसर्च और इनोवेशन को नई उड़ान मिलेगी.     कैबिनेट ने शिपबिल्डिंग और समुद्री विकास सुधारों के लिए सबसे बड़ा पैकेज द‍िया है. इस पर 69,725 करोड़ रुपये खर्च क‍िए जाएंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की समुद्री ताकत और वैश्विक व्यापार में पकड़ मजबूत होगी. मरीन सिक्‍योरिटी नेशनल सिक्‍योरिटी का एक बहुत बड़ा ह‍िस्‍सा है और सरकार लगातार इसे बेहतर करने की कोश‍िश कर रही है. बिहार को एक साल में कई सौगात बीते एक साल में केंद्र सरकार ने बिहार के लिए कई योजनाओं पर मुहर लगाई है. रेलवे लाइन अपग्रेडेशन, नई सड़कों और पुलों के निर्माण, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर लगातार निवेश हो रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 12 महीनों में बिहार के लिए करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की योजनाओं को मंजूरी मिली है. इनमें सड़क, रेलवे, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रोजेक्ट प्रमुख हैं. क्यों अहम है बिहार? बिहार में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं. इसल‍िए सरकार का फोकस बिहार पर ज्‍यादा है. बिहार की राजनीति हमेशा से दिल्ली की राजनीति को प्रभावित करती रही है. राज्य में विधानसभा की 243 सीटें हैं और यहां का चुनाव सीधा-सीधा राष्ट्रीय राजनीति का रुख तय करता है. यही वजह है कि केंद्र सरकार चाहती है कि 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विकास की बड़ी तस्वीर जनता के सामने रखी जाए.  2024–25 में जिन योजनाओं को मंजूरी मिली है, जैसे रेलवे लाइन डबलिंग, हाईवे चौड़ीकरण, मेडिकल कॉलेज विस्तार, बिजली और शिक्षा योजनाएं—इनका फायदा सरकार चुनाव प्रचार में सीधे तौर पर दिखा सकती है. लोग जब नई सड़क, बेहतर अस्पताल या कॉलेज बनते देखते हैं तो यह सरकार की छवि पर असर डालता है.