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ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति! होर्मुज के लिए खर्ग द्वीप कब्जाने की तैयारी में ट्रंप

वॉशिंगटन ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध दिन पर दिन और भीषण रूप ले रहा है। अब दोनों तरफ से ही तेल रिफाइनरियों पर हमले किए जा रहे हैं। ईरान की जवाबी कार्रवाइयों में कतर, सऊदी अरब, यूएई और इजरायल में तेल-गैस केंद्रों पर मिसाइलों और ड्रोन बरसाए गए हैं। वहीं, ईरान दुनियाभर को तेल सप्लाई करने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए सहमत नहीं हो रहा है। इस बीच, अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज खुलवाने के लिए बड़ा प्लान तैयार कर रहे हैं। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान को होर्मुज खोलने पर मजबूर करने के लिए खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की रणनीति तैयार कर रहे। कितना अहम है ईरान का खर्ग द्वीप खर्ग द्वीप वह द्वीप है, जो ईरान का ऑयल हब यानी कि तेल का मुख्य केंद्र माना जाता है। यहीं से ईरान को 90 फीसदी तेल मिलता है। यह द्वीप ईरान के दक्षिणी तट से करीब 25-30 किलोमीटर की दूरी पर है। पर्शियन गल्फ के बीच में होने की वजह से इसकी लोकेशन भी रणनीतिक है। हाल ही में ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने इस द्वीप पर हवाई हमले भी किए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यहां पर 90 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसमें मिसाइल स्टोरेज बंकर, एयर डिफेंस सिस्टम शामिल थे। खर्ग पर कब्जे की रणनीति एक्सियोस ने शुक्रवार को चार ऐसे सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी, जिन्हें इस मामले की जानकारी है, कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का दबाव बनाने के लिए, ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसकी घेराबंदी करने की योजनाओं पर विचार कर रहा है। खर्ग द्वीप पर कब्जा करने का ऑपरेशन, जो तट से 15 मील दूर स्थित है और ईरान के 90 फीसदी कच्चे तेल के निर्यात को प्रोसेस करता है, अमेरिकी सैनिकों को सीधे तौर पर हमला करने की जद में ला सकता है। इसलिए, ऐसा कोई भी ऑपरेशन तभी शुरू किया जाएगा जब अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की सैन्य क्षमता को और कमजोर कर देगी। व्हाइट हाउस की सोच की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, “हमें हमलों के जरिए ईरानियों को और कमजोर करने, द्वीप पर कब्जा करने, और फिर उन्हें पूरी तरह से अपने शिकंजे में लेकर बातचीत के लिए इस्तेमाल करने में लगभग एक महीने का समय लगेगा।” और अधिक सैनिक भेज सकता है अमेरिका अगर ऐसे किसी ऑपरेशन को मंजूरी मिलती है, तो उसके लिए और ज्यादा सैनिकों की जरूरत होगी। तीन अलग-अलग मरीन यूनिट इस क्षेत्र की ओर रवाना हो चुकी हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि व्हाइट हाउस और पेंटागन जल्द ही और भी ज्यादा सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''वह चाहते हैं कि होर्मुज खुला रहे। अगर ऐसा करने के लिए उन्हें खर्ग द्वीप पर कब्ज़ा करना पड़ा, तो वह होगा। अगर वह तटीय आक्रमण करने का फ़ैसला करते हैं, तो वह भी होगा। लेकिन अभी तक ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।'' उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप समेत हर राष्ट्रपति के कार्यकाल में, संघर्ष वाले इलाकों में हमारे सैनिक हमेशा ज़मीन पर मौजूद रहे हैं। मुझे पता है कि मीडिया में इस बात को लेकर काफी चर्चा होती है, और मैं इसके पीछे की राजनीति भी समझता हूं, लेकिन राष्ट्रपति वही करेंगे जो सही होगा।

ट्रंप ने पलटी मारी, अमेरिका ने होर्मुज पर ईरानी मिसाइल भंडार पर गिराया भारी बम

वाशिंगटन  ईरान के साथ जंग में अमेरिका अकेला पड़ चुका है. उसका साथ कोई नहीं दे रहा है. ऐसे में अब अमेरिका ने अकेले ही ईरान से आर-पार की जंग लड़ने की ठान ली है. अमेरिका अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अकेले ईरान के कब्जे से मुक्त कराने में जुट गया है. जी हां, इसी सिलसिले में अमेरिका ने होर्मुज के पास 23 क्विंटल के खतरनाक बमों की बमबारी की है. इस बमबारी का मकसद होर्मुज के पास स्थित ईरानी मिसाइल साइटों को ध्वस्त करना था. ताकि होर्मुज के दरवाजे को समुद्री व्यापार के लिए खोला जा सके. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. इसके मुताबिक, ईरान की इन क्रूज मिसाइलों से होर्मुज से होने वाली अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा था। दरअसल, अमेरिकी फोर्स ने कई 5000 पाउंड वजन वाले गहराई तक घुसने वाले बम गिराए. यानी अमेरिका ने करीब 23 क्विंटल के बम से ईरान के मिसाइल भंडार पर हमला किया है. ये बम ईरान के मजबूत बनाए गए मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च साइटों पर गिराए गए, जो समुद्र किनारे बने थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी सफलता की जानकारी दी। यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ‘कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के समुद्र तट पर स्थित ईरान की मजबूत मिसाइल साइटों पर 5000 पाउंड के कई ‘डीप पेनिट्रेटर’ बमों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. इन साइटों पर मौजूद ईरान की जहाज-रोधी क्रूज मिसाइलों से इस जलडमरूमध्य में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही को खतरा था.’ इसका मतलब है कि अमेरिका इस कार्रवाई को सफल मान रहा है। क्यों दुनिया के लिए खास है होर्मुज गौरतलब है कि होर्मुज की खाड़ी दुनिया के लिए बहुत अहम है. यहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. अगर ये रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू जाती हैं. अभी इस होर्मुज के कारण पूरी दुनिया में खलबली है. कारण कि पिछले कुछ हफ्तों से ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग चल रही है. ईरान ने बदला लेते हुए होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान लगातार होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को टारगेट करने के लिए मिसाइलें, ड्रोन और माइन्स का इस्तेमाल कर रहा है. इस खौफ से ईंधन वाले जहाज पार नहीं कर पा रहे हैं. इससे तेल के टैंकर रुक गए और दुनिया भर में तेल संकट खड़ा हो गया है। होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल पर अटैक क्यों? होर्मुज खोलना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है. कारण कि ईरान ने भारत समेत एशिया के कुछ देशों को छूट तो दी है, मगर अमेरिका और यूरोप के लिए पूरी तरह से होर्मुज का दरवाजा बंद कर रखा है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार नाटो और अन्य देशों से होर्मुज खोलने में मदद मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि होर्मुज को खुला और सुरक्षित रखने के लिए दूसरे देश भी जहाज भेजें.  लेकिन कई सहयोगी देशों ने मना कर दिया. ट्रंप ने नाराजगी जताई और कहा कि अमेरिका अकेले ही ये काम कर सकता है. यहा कारण है कि अब अमेरिका अकेले ही होर्मुज को खुलवाने में जुट गया है. आज का यह एक्शन इसी का नतीजा है। अमेरिका ने गेम पलटना शुरू किया पहले अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर भी हमले किए थे. वहां मिलिट्री टारगेट नष्ट किए गए, लेकिन तेल सुविधाओं को बचाया गया. ट्रंप ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो तेल सुविधाएं भी निशाना बनाई जा सकती हैं. अब ये नया हमला ट्रंप की रणनीति का हिस्सा लगता है. होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल भंडार को तबाह करके ट्रंप ने गेम पलट दिया है. अमेरिका के इस एक्शन से होर्जुम में ईरान का खतरा कम हो जाएगा. ईरान की मिसाइलें नष्ट होने से होर्मुज का दरवाजा फिर से खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिका ने किस बम से किया अटैक अमेरिका का ये हमला बंकर-बस्टर बमों से किया गया. ये बम जमीन के अंदर घुसकर मजबूत ठिकानों को तबाह कर देते हैं. अमेरिका ने 5000 पाउंड यानी करीब 23 क्विंटल बमों से अटैक किया. ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन ये साफ है कि अमेरिका ईरान की समुद्री ताकत को कमजोर करने पर जोर दे रहा है. अगर अमेरिका का यह दावा सही है तो दुनिया भर के व्यापारियों और तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है. अगर होर्मुज खुल गया तो तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी और कीमतें गिरेंगी. वैसे भी ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के बिना भी इस रास्ते को सुरक्षित रखेगा. बता दें कि 28 फरवरी से ही युद्ध जारी है। क्या है ये बंकर बस्टर बम और क्यों है इसकी इतनी चर्चा? अब सवाल उठता है कि ये बंकर बस्टर बम आखिर बला क्या है? आम भाषा में समझें तो ये ऐसे बम हैं जो जमीन या कंक्रीट की मोटी दीवारों को भेदकर गहराई में छिपे दुश्मनों का काल बन जाते हैं. 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे बम की कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर होती है. हालांकि, अमेरिका के पास इससे भी बड़े 30,000 पाउंड वाले बम हैं, लेकिन फिलहाल ईरान के इन मिसाइल ठिकानों को मिट्टी में मिलाने के लिए ये 5,000 पाउंड यानी 2200 किलो वाले बम ही काफी थे। पूरी कहानी का दूसरा पहलू ये भी है कि इस जंग के पीछे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भी हाथ माना जा रहा है, जो महीनों से अमेरिका को इस रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहे थे. लेकिन ट्रंप का कहना है कि यह उनकी अपनी फीलिंग थी कि ईरान से खतरा बढ़ रहा है, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया. दूसरी तरफ, ईरान आज भी अपनी बात पर अड़ा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने जैसे शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका बम बनाने का कोई इरादा नहीं है। फिलहाल, हालात ये हैं कि पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज के इस रास्ते पर टिकी हैं. अमेरिका ने अपनी ताकत दिखाकर ये साफ कर दिया है कि वो पीछे हटने वाला नहीं है. अब देखना ये होगा कि ईरान इस बंकर बस्टर हमले का क्या … Read more