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ईरान के हमलों से बढ़ा तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों को अब सिर्फ 2 तय समय पर मिलेगी अमेरिकी सुरक्षा

वाशिंगटन  अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल टौंकरों को दी जाने वाली सैन्य सुरक्षा, खासकर हवाई सुरक्षा के समय को सीमित कर दिया है। यह कदम इस अहम समुद्री रास्ते पर चलने वाले जहाजों पर ईरान के हमलों में बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका मई से ही जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में ओमान के तट के पास वाले रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को हवाई सुरक्षा दे रहा था, जिससे ईरानी हमलों के बावजूद तेल की कुछ शिपमेंट आती-जाती रहीं। इस व्यवस्था के तहत, जहाज के मालिक सबसे पहले अमेरिकी नौसेना के कोऑर्डिनेशन सेंटर से मंजूरी लेते थे। यह सेंटर जहाजों को कोऑर्डिनेट्स और गुजरने का समय बताता था, जिसके दौरान अमेरिकी विमान उन्हें सुरक्षा देते थे। होर्मुज में टैंकरों की हवाई सुरक्षा के समय घटाया लेकिन NCAGS द्वारा समुद्री सलाहकारों को भेजे गए ईमेल के हवाले से पता चला है कि सितंबर की शुरुआत में रात भर मिलने वाली सुरक्षा की लंबी अवधि को घटाकर हर दिन दो तय ट्रांजिट स्लॉट कर दिया गया है। जहाजों को सलाह दी गई है कि वे तय समय पर अपनी यात्रा शुरू करें ताकि उन्हें अमेरिकी सेना से सबसे अच्छी सुरक्षा मिल सके। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अभियानों की देखरेख करने वाली यूएस सेंट्रल कमांड ने इन संदेशों को बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया और कहा कि NCAGS के संदेश खुद ही सब कुछ स्पष्ट करते हैं। कमर्शियल जहाजों पर बढ़े ईरान के हमले यह बदलाव तब हुआ जब कमर्शियल जहाजों पर हमले बढ़ गए। ईरान ने बुधवार को कहा कि उसने पांच ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में दो अमेरिकी जहाजों और आठ तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने कहा कि ये हमले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा बैलिस्टिक मिसाइलों से एक अमेरिकी युद्धपोत पर किए गए हमलों के बाद हुए थे। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स ने भी दुबई और इराक के पास टैंकरों पर ईरान के और हमलों की जानकारी दी। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 70 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों पर हमले हो चुके हैं।

हूती का लाल सागर में कब्जा बढ़ा, होर्मुज में कमर्शियल जहाज पर हमला; BRICS की अपील बेअसर?

नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भारत, सऊदी अरब, ईरान और यूएई सहित सदस्य देशों की ओर से पश्चिम एशिया (West Asia) में 'अधिकतम संयम' बरतने की अपील और "नई दिल्ली घोषणापत्र" जारी करने के महज 24 घंटे के भीतर क्षेत्रीय तनाव और गहरा गया है। रणनीतिक रूप से अति-संवेदनशील स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक कमर्शियल जहाज पर एक अज्ञात मिसाइल से हमला किया गया है। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, जहाज को पहुंचे नुकसान और चालक दल के सदस्यों की स्थिति की जांच की जा रही है, जबकि इलाके में बाकी जहाजों को काफी ज्यादा सतर्कता बरतने की चेतावनी जारी की गई है। मोखा पोर्ट और बाब अल-मंडेब पर हूतियों का कब्जा ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक समुद्री मार्ग बाब अल-मंडेब स्ट्रेट पर स्थित आखिरी दो प्रमुख द्वीपों और महत्वपूर्ण मोखा बंदरगाह पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया है। मोखा पोर्ट पर कब्जे के बाद हूतियों ने सऊदी अरब के शरूराह सैन्य अड्डे पर हथियार डिपो और कमांड सेंटर को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं। अल जजीरा के मुताबिक, सऊदी सीमा पर हुए इस हमले में दो लोग घायल हुए हैं। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के विकल्प के रूप में इस्तेमाल होने वाले लाल सागर के इस व्यापारिक मार्ग पर हूतियों के बढ़ते नियंत्रण से सऊदी अरब के कच्चे तेल के वैश्विक निर्यात पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता हुसैन मोहब्बी ने यमन के 'अंसार अल्लाह' (हूती) की इन सैन्य सफलताओं का खुले तौर पर स्वागत किया है। प्रेसिडेंट ट्रंप ने ठुकराई सऊदी की सैन्य कार्रवाई की मांग सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हूतियों के खिलाफ सीधी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया था। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने इस चरण में हूतियों के खिलाफ प्रत्यक्ष अमेरिकी सैन्य अभियानों में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरान और ओमान तय करेंगे होर्मुज के नए समुद्री रूट इस बीच, चीन की सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान और ओमान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के लिए नए एंट्री और एग्जिट रूट के ब्योरे पर सहमति व्यक्त की है। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि दोनों देश सोमवार को मस्कट में होने वाली एक क्षेत्रीय बैठक के दौरान खाड़ी देशों के प्रतिनिधियों को इन नए नेविगेशन मार्गों की विस्तृत जानकारी देंगे, ताकि तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो। BRICS की अपील के बेअसर होने की आशंका यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब शनिवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर पश्चिम एशिया में नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और एनर्जी सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखने के लिए तत्काल शांति व कूटनीतिक वार्ता का आह्वान किया था। लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि लाल सागर और फारस की खाड़ी में युद्ध का दायरा लगातार चौड़ा होता जा रहा है।

Hormuz Crisis के बीच Xi Jinping का Egypt दौरा, Suez Canal पर चीन की बढ़ती नजर से बदलेगा समीकरण

वाशिंगटन एक तरफ होर्मुज की खाड़ी में अमेरिका और ईरान की जंग एक बार फिर से तेज हो चुकी है, तो दूसरी तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मिस्र पहुंच गए हैं. यह दौरा देखने में सामान्य कूटनीतिक यात्रा लगता है, लेकिन इसका समय बहुत मायने रखता है. जिस वक्त होर्मुज का समुद्री रास्ता युद्ध की वजह से बुरी तरह प्रभावित है, ठीक उसी वक्त चीन मिस्र के साथ अपने रिश्ते और मजबूत कर रहा है, जिसके हाथ में दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक रास्तों में से एक, यानी स्वेज कैनाल है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज में जहाजों की आवाजाही तेजी से घटी है. मंगलवार को सिर्फ चार मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजरे, जबकि पिछले दस दिनों का औसत करीब तेरह जहाजों का था. सामान्य दिनों में दुनिया का लगभग बीस फीसदी तेल व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है. लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और टैंकरों पर हमलों ने इस रूट को बेहद असुरक्षित बना दिया है।  ठीक इसी समय शी जिनपिंग काहिरा में हैं. चीन के राष्ट्रपति करीब एक दशक बाद मिस्र पहुंचे हैं. यह सिर्फ पुरानी दोस्ती निभाने की यात्रा नहीं है. मिस्र लंबे समय से अमेरिका का करीबी रणनीतिक साथी रहा है, लेकिन बीते कुछ सालों में काहिरा ने बीजिंग, मॉस्को और दूसरी ताकतों के साथ भी अपने संबंध तेजी से बढ़ाए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक चीन और मिस्र के बीच व्यापार करीब इक्कीस अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, और स्वेज कैनाल आर्थिक क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में चीनी निवेश बढ़ रहा है।  यही इस दौरे की सबसे बड़ी कहानी है. अमेरिका जहां मिडिल ईस्ट में सैन्य ताकत के जरिए ईरान को रोकने में जुटा है, वहीं चीन उसी इलाके में निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, कूटनीति और साझेदारियों के जरिए अपना असर बढ़ा रहा है. मिस्र के पास स्वेज कैनाल है, जो एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ता है. होर्मुज में बाधा के बीच स्वेज ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम विकल्प बनकर उभरा है।  इसी बीच अगस्त में चीन और मिस्र ने पहली बार संयुक्त हवाई अभ्यास भी किया, जिसमें चीनी J-16 और मिस्री राफेल लड़ाकू विमानों ने साथ उड़ान भरी. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह दिखाता है कि अब चीन-मिस्र संबंध सिर्फ सड़कों और फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहे।  मिस्र अरब जगत का बड़ा केंद्र है, अफ्रीका का प्रवेश द्वार है और ब्रिक्स का सदस्य भी है. शी जिनपिंग मिस्र को मिडिल ईस्ट और अफ्रीका दोनों में अपना प्रभाव बढ़ाने के आधार के तौर पर देख रहे हैं. इससे पहले बीजिंग ईरान और सऊदी अरब के बीच बातचीत करवाकर भी मध्यस्थ की छवि बनाने की कोशिश कर चुका है।  रॉयटर्स के अनुसार, काहिरा अमेरिकी सैन्य मदद के साथ साथ चीन, रूस और यूरोप के साथ भी अपने विकल्प बढ़ा रहा है. इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने मिडिल ईस्ट में अमेरिका की जगह ले ली है, लेकिन तस्वीर बदल जरूर रही है।  भारत के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है. होर्मुज भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है, जबकि स्वेज भारत के यूरोप व्यापार के लिए जरूरी है. अगर ये समुद्री रास्ते लंबे समय तक अस्थिर रहते हैं, तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, माल भाड़े और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. ऐसे में अमेरिका के साथ रिश्ते बनाए रखते हुए चीन से मुकाबला और रूस के साथ संतुलन बनाना भारत के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। 

होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव, दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइल हमला; वैश्विक शिपिंग पर मंडराया खतरा

नई दिल्ली ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने मंगलवार तड़के होर्मुज के पास दो व्यापारिक जहाजों पर मिसाइलें दागी हैं. यह जानकारी अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है. इस हमले से अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने की बातचीत पर असर पड़ने की आशंका है।  यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान में लोग पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का शोक मना रहे हैं. खामेनेई की मौत ईरान युद्ध की शुरुआत में हुई थी।  रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर पिछले कुछ समय से इस इलाके में जहाजों को धमकी दे रहा था. यह पैरामिलिट्री फोर्स बातचीत की कोशिशों को कमजोर करने में जुटा है. गार्ड कोर ने जहाजों को चेतावनी दी थी कि वे उस रास्ते से न गुजरें जिसे अमेरिकी सेना ने ओमान के तट के पास सुरक्षित घोषित किया है।  मंगलवार का हमला इसी चेतावनी के बाद हुआ है और इससे इलाके में तनाव और बढ़ गया है. इस बीच यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी यूकेएमटीओ ने भी एक घटना की जानकारी दी है।  UKMTO ने बताया है कि टैंकर ओमान के लिमाह के पास दक्षिण की ओर जा रहा था, तभी उसके बाईं ओर (पोर्ट साइड) टक्कर हुई, जिससे तुरंत ही आग लग गई। हालांकि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ और ना ही पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचा है। अधिकारी फिलहाल इस घटना की जांच कर रहे हैं। ईरान ने किया हमला: अमेरिका अमेरिका ने हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार माना है। एक्सियोस अनुसार, दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान की IRGC ने सोमवार रात होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर दो मिसाइलें दागीं। एक ऑयल टैंकर और एक कमर्शियल जहाज इसकी चपेट में आया। दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, 2024 में यहां से हर दिन तकरीबन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा है। यह जलमार्ग हालिया अमेरिका-ईरान संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से यातायात को नियंत्रित करना शुरू किया था। इसके बाद से यहां तनाव चल रहा है। हालांकि अमेरिका-ईरान के समझौते में होर्मुज को खोलने की बात कही गई है लेकिन इस समुद्री गलियारे में चीजें सामान्य होती नहीं दिख रही हैं। यूकेएमटीओ के मुताबिक ओमान के लीमाह से करीब आठ नॉटिकल मील पूर्व में एक घटना हुई है. एक टैंकर जहाज दक्षिण दिशा में जा रहा था तभी उसे किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने बाईं ओर से टक्कर मारी. इस टक्कर से जहाज में आग लग गई. राहत की बात यह है कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।  यूकेएमटीओ ने सभी जहाजों को सावधानी से यात्रा करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत देने की सलाह दी है।  इन दोनों घटनाओं ने होर्मुज में सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है. यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम माना जाता है क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल का व्यापार होता है। 

ईरान की Maham-3 नेवल माइन पर विवाद, होर्मुज में अमेरिकी तलाशी अभियान तेज

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ओमान के समुद्री क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है. होर्मुज स्ट्रेट से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें ईरान की नौसेना द्वारा बिछाई गई संदिग्ध बारूदी माइन्स दिखाई देने का दावा किया जा रहा है. ये ईरान की महम-3 (Maham-3) नेवल माइन हो सकती है, जिसका वजन करीब 300 किलोग्राम बताया जा रहा है. इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं. खास बात यह है कि लगातार तलाशी अभियान चलाने के बावजूद अमेरिकी सेना अब तक इन माइन्स की निश्चित पहचान नहीं कर पाई है. ऐसे में सामने आई तस्वीरों को अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. होर्मुज के समुद्री इलाके में अमेरिकी नौसेना लगातार तलाशी अभियान चला रही है. इसके बावजूद ईरान द्वारा बिछाई गई एक भी नेवल माइन की आधिकारिक पहचान नहीं हो सकी है. अब सामने आई तस्वीरों ने पूरे मामले को ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. माना जा रहा है कि यदि ये वास्तव में महम-3 माइन साबित होती है तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है. इसी बीच ईरान की एक और बड़ी खबर सामने आई है. वीडियो में देखिए होर्मुज स्ट्रेट में बारूदी माइन्स… जानकारी के मुताबिक, तेहरान अब संभावित ड्रोन युद्ध की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है. ईरान के रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन सहायता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है. ईरानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार जल्द ही एक विशेष ड्रोन सहायता केंद्र बनाया जाएगा. यह केंद्र सरकारी और सैन्य दोनों संगठनों को ड्रोन से जुड़ी सभी नागरिक सेवाएं उपलब्ध कराएगा. माना जा रहा है कि इससे ईरान की मानवरहित हवाई वाहन क्षमता को और मजबूती मिलेगी. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव किसी भी समय बड़े सैन्य संघर्ष का रूप ले सकता है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसे कई विश्लेषक ईरान के लिए चेतावनी के तौर पर देख रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप का AI अवतार सोशल मीडिया पर सामने आया है. इसको लेकर चर्चा है कि अमेरिका ईरान को संकेत देना चाहता है कि वो किसी भी स्थिति के लिए तैयार है. यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि ईरान अभी भी अमेरिका की रणनीति को लेकर असमंजस में है. इसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर सैन्य कार्रवाई का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि तेहरान के साथ समझौता नहीं हो पाता तो अमेरिका दोबारा हमले शुरू करने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है. दोनों पक्ष प्रमुख मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. दोनों के बीच पिछले डेढ़ महीने से तनाव कम करने को लेकर बातचीत चल रही है. हेगसेथ का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान संकट पर अपने प्रमुख सलाहकारों के साथ अहम बैठक की थी. यह बैठक व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई थी, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा की गई. हालांकि, इस बैठक के बाद व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया.

ईरान का ट्रंप पर हमला, खामेनेई के आदेश पर होर्मुज खोला जाएगा, न कि ‘इडियट’ के कहने पर

तेहरान  ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा कूटनीतिक विवाद अब व्यक्तिगत हमलों और सोशल मीडिया वॉर में बदल गया है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने एक वायरल समुद्री ऑडियो क्लिप का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इडियट (मूर्ख) करार दिया है। इस तीखे हमले ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। क्या है पूरा मामला? विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो और ऑडियो क्लिप से हुई, जो कथित तौर पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना और समुद्र में मौजूद जहाजों के बीच रेडियो संचार की है। इस रिकॉर्डिंग में ईरानी नौसेना का एक अधिकारी इडियट शब्द का इस्तेमाल करता सुनाई दे रहा है। शुरुआत में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि ईरानी अधिकारी ने अपने ही विदेश मंत्री के लिए इस शब्द का प्रयोग किया है। ईरानी दूतावास का तीखा पलटवार इन दावों को खारिज करते हुए दक्षिण अफ्रीका में ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद कड़ा और सीधा पोस्ट किया। दूतावास ने लिखा, "ओ बेवकूफ, उसका मतलब तुम्हारे 'इडियट' राष्ट्रपति ट्रंप से था। बस गूगल पर 'इडियट' सर्च करके देख लो, तुम्हें समझ आ जाएगा कि वह कौन है।" दूतावास का यह बयान सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाता है, जो अक्सर सोशल मीडिया के जरिए अपनी विदेश नीति और घोषणाएं साझा करते रहते हैं। ऑडियो क्लिप में क्या था? मैरीटाइम चैनल 16 पर प्रसारित इस रेडियो संदेश में IRGC नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों को सख्त चेतावनी दी थी। संदेश में कहा गया, "यह चैनल 16 पर ईरानी सिपह नौसेना की कॉल है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी बंद है। हम इसे हमारे इमाम खामेनेई के आदेश पर खोलेंगे, न कि किसी 'इडियट' के ट्वीट्स के आधार पर।" यह संदेश स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के उन हालिया ट्वीट्स और बयानों पर कटाक्ष था, जिनमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले होने का दावा किया था। आम तौर पर दूतावास और राजनयिक मिशन इस तरह की अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल से बचते हैं, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी ने ईरान के रुख को और अधिक आक्रामक बना दिया है। ईरान का यह हमला दर्शाता है कि वह कूटनीतिक मेज के साथ-साथ नैरेटिव की लड़ाई में भी पीछे नहीं हटना चाहता। इस निजी हमले के बाद फिलहाल वाइट हाउस या राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

तेहरान का बयान, होर्मुज में भारतीय जहाज पर फायरिंग को लेकर 10 ताज़ा अपडेट्स

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से एक बार फिर जहाजों का आवाजाही बंद हो गई है. होर्मुज के रास्ते कच्चा तेल ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर फायरिंग की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है. समुद्री सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब ये जहाज इस संकरे जलमार्ग से गुजर रहे थे, जो पहले से ही क्षेत्रीय संघर्ष के चलते संवेदनशील बना हुआ है. इस घटना के बाद भारत ने तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के राजदूत को तलब किया और अपने नागरिकों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई।  इस बीच एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई है, जिसमें एक भारतीय जहाज के क्रू मेंबर समुद्री अधिकारियों पर नाराजगी जताते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं, ‘आपने मुझे रास्ता दिया और अब फायरिंग कर रहे हैं, मुझे वापस मुड़ने दीजिए.’ इस बीच ईरान की ओर से शांति का संदेश भी आया है, लेकिन जमीनी हालात और समुद्री गतिविधियां लगातार बढ़ते तनाव की ओर इशारा कर रही हैं।  होर्मुज के हालात पर 10 लेटेस्ट अपडेट्स…     होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों के पास अचानक फायरिंग शुरू हो गई. बताया गया कि ये गोलियां आसपास हो रही ‘स्मॉल आर्म्स फायरिंग’ का हिस्सा थीं, जो जहाजों तक पहुंच गईं. हालांकि किसी भी क्रू मेंबर को चोट नहीं आई.     सरकार से जुड़े सूत्रों ने स्पष्ट किया कि दोनों जहाजों को हल्का नुकसान हुआ है. इन जहाजों की ब्रिज विंडो पर गोली लगने की बात सामने आई है, लेकिन कोई बड़ा तकनीकी नुकसान या जानमाल की हानि नहीं हुई।      एक टैंकर के कप्तान ने दावा किया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े दो गनबोट्स जहाज के पास आए और फायरिंग शुरू कर दी. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।      इस घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत मोहम्मद फताअली को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय के अनुसार, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ईरानी राजदूत को इस ‘गोलीबारी की घटना’ पर भारत की ‘गहरी चिंता’ से अवगत कराया.उन्होंने भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।      विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि पहले भी ईरान ने भारत जाने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में सहयोग किया है. अब भारत चाहता है कि वही प्रक्रिया जल्द बहाल की जाए।      भारतीय सूत्रों के मुताबिक, जहाजों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया, बल्कि वे ‘भटकी हुई गोलियों’ की चपेट में आए. इसके बावजूद घटना ने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।      उधर यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने ओमान तट से करीब 20 नॉटिकल मील दूर सुरक्षा घटना की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में खतरे का स्तर और बढ़ गया है।      कई जहाजों ने दावा किया कि उन्हें VHF रेडियो पर ईरानी नौसेना की ओर से संदेश मिला कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया गया है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इससे जहाजों में दहशत फैल गई।      होर्मुज में गोलीबारी की इस घटना पर भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा, ‘ईरान और भारत के बीच रिश्ते बहुत मज़बूत हैं और जिस घटना का आपने ज़िक्र किया है, उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।  हमें उम्मीद है कि सब ठीक हो जाएगा और यह मामला सुलझ जाएगा.’ इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘…हम यह युद्ध नहीं चाहते. हम शांति चाहते हैं, और हमें उम्मीद है कि दूसरा पक्ष भी शांति का पालन करेगा, ताकि हम एक शांतिपूर्ण क्षेत्र बना सकें।      इसी बीच ईरानी नेता मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ़ और सईद खतिबजादेह के बयानों ने हालात को और जटिल बना दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका को लेकर सख्त रुख अपनाया है और परमाणु मुद्दे पर किसी भी दबाव को मानने से इनकार किया है. इससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है।  होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई यह घटना सिर्फ एक फायरिंग नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा संकेत है. भारत जैसे देश, जिनका बड़ा व्यापार इस मार्ग से गुजरता है, अब अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या यह संकट और गहराता है।   

तेल और गैस की कीमतों में गिरावट: होर्मुज खुलने से 11% कमी, नया संकट?

नई दिल्‍ली हार्मुज खुलने के ऐलान के बाद इंटरनेशनल मार्केट में भारी उलटफेर देखने को मिला है, जहां कल तक कच्‍चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने हुए थे. वहीं अब इसकी कीमत अचानक से सस्‍ती हो चुकी हैं. मार्केट समय के दौरान इसकी कीमत 86 डॉलर के करीब चुकी थीं. हालांकि कुछ देर बाद तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर आ गईं।  दरअसल, ईरान ने कहा कि जबतक सीजफायर लागू है, तबतक कमर्शियल जहाजों से होर्मुज से गुजरने की मंजूरी रहेगी. वहीं ट्रंप ने भी कहा कि अब ईरान कभी भी होर्मुज को बंद नहीं करेगा. ईरान ने सहमति जताई है. इस खबर के आते ही तेल-गैस की कीमतें तेजी से गिरें।  11 फीसदी तक सस्‍ता हुआ तेल ब्रेंट क्रूड वायदा रात में 10.42 डॉलर या 10.48% गिरकर 88.97 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, सत्र के दौरान यह 86.09 डॉलर के निचले स्तर पर भी पहुंचा था. WTI क्रूड वायदा 11.48 डॉलर या 12.12% गिरकर 83.21 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 80.56 डॉलर तक पहुंच गया था. हालांकि, कारोबार बंद होने तक क्रूड ऑयल 90.38 डॉलर पर पहुंच गया. तेल की कीमतों में एक दिन में यह सबसे बड़ी गिरावट रही।  गैस की कीमतों पर भी असर  खबर आते ही गैस की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली. एलएनजी की की कीमत 2.624 डॉलर आ गईं. हालांकि ईरानी राष्‍ट्रपति की ओर से अपडेट आने के बाद यह वायदा बाजार में 2.674 डॉलर पर पहुंच गया. इसका मतलब है कि नेचुरल गैस की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।  होर्मुज को लेकर फिर बना संकट?  शनिवार की सुबह ईरान के सांसद अध्‍यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा कि होर्मुज को अमेरिका के इशारे पर नहीं, बल्कि ईरान के नियम के आधार पर संचालित किया जाएगा. साथ ही उन्‍होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरानी पोर्ट पर प्रतिबंध लगाकर रखता है तो होर्मुज बंद कर दिया जाएगा. उन्‍होंने ट्रंप के बयानों की आलोचना की. इस खबर के बाद सोमवार को तेल की कीमतों पर असर दिखाई दे सकता है. तेल-गैस की कीमतों में फिर से तेजी दिख सकती हैं।  बाजार में क्‍या होगा असर?  स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से अमेरिकी बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली. अमेरिकी बाजार 2 फीसदी से ज्‍यादा चढ़ गया. वहीं भारतीय बाजार का इंडिकेटर गिफ्ट निफ्टी भी शानदार तेजी का संकेत दे रहा है. सोमवार को भारतीय बाजार में करीब 300 अंकों का गैपअप देखने को मिल सकता है। 

होर्मुज तनाव समाप्त, रूस के बाद अब भारत को मिल रही तेल की बड़ी खेप

नई दिल्‍ली मिडिल ईस्‍ट में जंग के कारण तेल संकट पैदा हुआ है, जिस कारण कई देशों में तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच चुकी है. अभी ब्रेंट क्रूड ऑयल 112 डॉलर के करीब आ चुका है. इस बीच, भारत ने अपने कच्‍चे तेल के आयात में विविधता लाया है. भारत ईरानी और रूसी तेल की खरीद तो कर ही रहा है. इस बीच खबर है कि भारत को वेनेजुएला से एक बड़ी खेप मिल रही है।  कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, दक्षिण अमेरिकी देश से पिछली खेप आने के लगभग एक साल बाद, इस महीने लगभग 10-12 मिलियन बैरल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है. वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू होना ऐसे समय में हुआ है, जब भारतीय रिफाइनर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर विकल्पों में विविधता ला रही हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में आने वाले कार्गो को हालिया रुकावट से काफी पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था, जो एक लंबे समय की रणनीतिक बदलाव को दिखाता है. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रोक लगने से पहले वेनेजुएला का कच्चे तेल का आयात औसतन 1.9 मिलियन बैरल था।  भारत के लिए बेहतर विकल्‍प है वेनेजुएला  वेनेजुएला भारत के लिए तेल का नया मार्केट है, जो भारत का एक बड़ा विकल्‍प देता है. खासकर होर्मुज रास्‍ता बंद होने के बाद से भारत के कच्‍चे तेल की आपूर्ति पूरी कर सकता है और भारत में तेल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं और युद्ध का प्रभाव कम हो सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला से तेल आने पर इनमें से कुछ माल कोच्चि बंदरगाह पर उतारे जा सकते हैं, जहां बीपीसीएल की रिफाइनरी है।  हर तरफ से भारत के पास आ रहा तेल गौरतलब है कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कंट्रोल के बाद भारतीय रिफाइनरियों और अमेरिका के बीच वेनेजुएला से तेल खरीदने की डील हुई है, जिसके तहत पहली खेप भारत आ रही है. इसके साथ ही अमेरिका द्वारा रूस और ईरानी तेल पर से प्रतिबंध हटाने के बाद भारत रूसी और ईरानी तेल खरीद रहा है. इसके साथ ही भारत अफ्रीकी देशों से भी तेल की आपूर्ति कर रहा है, जिसमें से प्रमुख देश अंगोल है।  क्‍यों खास है वेनेजुएला का तेल  वेनेजुला में दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार मौजूद हैं. यह एक हैवी और एक्‍स्‍ट्रा हैवी क्रूड ऑयल की बड़ी मात्रा रखता है. यह तेल भले ही रिफाइन करना थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन इसकी उपलब्धता बहुत अधिक है, इसलिए लंबी अवधि में यह सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। 

होर्मुज स्ट्रेट का संकट समाप्त, तेल-गैस वाले देशों का गठबंधन, अब बिना दिक्कत जलेंगे चूल्हे

 मुंबई  ईरान जंग ने एक बार फिर से फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल, डीजल आदि) बेस्‍ड डेवलपमेंट मॉडल की खामियों को उजागर कर दिया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का तीन तिहाई आयात करता है. अरब देश एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत हैं. तेल के साथ ही गैस का भी आयात किया जाता है. इनसे ही भारत में गाड़ियां सड़कों पर सरपट भागती हैं और घरों में चूल्‍हे जलते हैं. ऐसे में खाड़ी देश में किसी भी तरह का संकट आने पर उसका सीधा असर भारत भी पड़ता है. अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान अटैक करने के बाद ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है. एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले होर्मुज स्‍ट्रेट पर भी इसका व्‍यापक असर पड़ा है. इससे तेल और गैस से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्‍य काफी अहम है, क्‍योंकि इसी रूट से तेल और गैस के अधिकांश शिपमेंट आते हैं ।  अब इस निर्भरता को कम करने की दिशा में अहम और निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया गया है. भारत अगले 9 से 10 साल में नॉन-फॉसिल फ्यूल बेस्‍ड पावर कैपेसिटी को कुल उत्‍पादन का 60 फीसद करने का लक्ष्‍य रखा है. इस तरह फॉसिल फ्यूल यानी तेल आधारित ऊर्जा जरूरतों को तकरीबन एक तिहाई तक सीमित कर दिया जाएगा. ऐसे में यदि होर्मुज जैसे संकट की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतों पर ज्‍यादा असर नहीं पड़ेगा।  अब समझ‍िए कि होर्मुज स्‍ट्रेट पर निर्भरता आने वाले कुछ सालों में कैसे खत्‍म होगी. दरअसल, वैश्विक जलवायु संकट के बीच भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को और मजबूत करते हुए बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने United Nations Framework Convention on Climate Change (UNFCCC) के तहत 2031-2035 अवधि के लिए देश के अपडेटेड राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) को मंजूरी दे दी. इस नए लक्ष्य के तहत भारत ने 2005 के स्तर के मुकाबले अपनी अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता में 47% की कमी लाने और 2035 तक कुल बिजली क्षमता में 60% हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधनों से हासिल करने का लक्ष्य रखा है. यह कदम पेरिस एग्रीमेंट (Paris Agreement) के तहत भारत की जिम्मेदारियों का हिस्सा है और इसे देश की तीसरी NDC प्रस्तुति माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि यह लक्ष्य केवल महत्वाकांक्षी नहीं, बल्कि पहले से हासिल प्रगति पर आधारित है।  संकट से सीख, टार्गेट से आगे की बात सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत ने साल 2015 में तय किए गए अपने पूर्व NDC लक्ष्यों (33-35% उत्सर्जन तीव्रता में कमी और 40% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता) को समय से काफी पहले ही हासिल कर लिया था. इसी आधार पर अब नए और अधिक कड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. अपडेटेड NDC समानता और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों (CBDR-RC) के सिद्धांतों के अनुरूप है और ‘विकसित भारत 2047’ की व्यापक परिकल्पना को भी मजबूती देता है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता के बीच कई देश अपने जलवायु लक्ष्यों से पीछे हटते दिख रहे हैं. ऐसे समय में भारत का यह कदम वैश्विक मंच पर एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. ऊर्जा और जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस बार जलवायु महत्वाकांक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है. दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आकलनों के अनुसार 2035-36 तक भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता लगभग 70% तक पहुंच सकती है, लेकिन सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तौर पर 60% का ही लक्ष्य रखा है, जिससे यह लक्ष्य यथार्थवादी और विश्वसनीय बना रहे।  ऐसे बनेगी बात सरकार ने स्पष्ट किया कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कई मौजूदा और नई नीतियों का सहारा लिया जाएगा. इनमें ग्रीन एनर्जी का विस्तार (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन) बैटरी स्टोरेज, स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाएं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं. इसके अलावा International Solar Alliance जैसे वैश्विक सहयोग मंच और राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना (NAPCC) के तहत चल रहे कार्यक्रम भी इन लक्ष्यों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे. सरकार कार्बन कैप्चर तकनीकों और जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. नई NDC केवल उत्सर्जन में कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अनुकूलन उपायों पर भी खास ध्यान दिया गया है. इसमें तटीय सुरक्षा, ग्लेशियर निगरानी, हीट एक्शन प्लान और आपदा लचीलापन शामिल हैं. सरकार ने Lifestyle for Environment (LiFE) पहल के जरिए आम नागरिकों को भी जलवायु कार्रवाई में शामिल करने का लक्ष्य रखा है, ताकि रोजमर्रा की जीवनशैली में पर्यावरण अनुकूल बदलाव लाए जा सकें।