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575 शिकायतें, सिर्फ 269 पर कार्रवाई; झारखंड में अवैध खनन रोकने में प्रशासन फेल

रांची झारखंड में अधिकारियाें के ढीले रवैये के कारण अवैध खनन रुक नहीं रहा है। अवैध खनन के आरोपियों की पहचान करना तो दूर की बात है, कार्यालय तक पहुंचनेवाली शिकायतों पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। विभागीय सचिव की समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई और हालात गंभीर दिखे। स्थिति यह है कि झारखंड में पिछले एक वर्ष में अवैध खनन एवं परिवहन से संबंधित 575 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 269 पर ही कार्रवाई हो सकी है। 306 मामलों में अभी भी जिला स्तर से कार्रवाई का इंतजार है। ज्यादातर मामले में आरोपियों पर एफआईआर भी नहीं दर्ज हो पा रही है। खनन सचिव पुलिस-प्रशासन से सख्ती बरतने का निर्देश दिया है। यहां यह बताना जरूरी है कि सर्वाधिक शिकायत धनबाद से आई है तो पाकुड़, गिरिडीह और साहिबगंज से भी बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंची हैं। झारखंड में अवैध खनन कोई नई बात नहीं है। अधिकारियों के स्तर से कार्रवाई नहीं होने के कारण अवैध खनन करनेवालों का मनोबल बढ़ जाता है खान एवं भूतत्व विभाग की रिपोर्ट कम से कम यही बता रही है। पिछले दिनों विभिन्न माध्यमों से 575 शिकायतें जिलों में खनन पदाधिकारी तक पहुंची, लेकिन इनमें से महज 269 मामलों में कार्रवाई की गई है। पूरे राज्य में तीन जिले गोड्डा, खूंटी और गुमला ऐसे हैं जहां शिकायतों पर शत-प्रतिशत कार्रवाई होने के आंकड़े मिले हैं। मजेदार बात यह है कि गोड्डा जिले के लिए एक ही शिकायत मिली थी, खूंटी के लिए दो और गुमला के लिए पांच। राज्य में गढ़वा एक ऐसा जिला रहा जहां के लिए कोई शिकायत नहीं मिली है। सरकार ने सभी जिलों से प्राप्त एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) के आधार पर यह जानकारी सामने आई है। आधे से अधिक जिलों में टास्क फोर्स की बैठक से संबंधित कोई जानकारी नहीं राज्य सरकार के पास अगस्त महीने में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक से संबंधित कोई जानकारी अपलोड नहीं की गई है। स्थापित व्यवस्था के अनुसार सभी जिलों को हर महीने बैठक कर इससे संबंधित मिनट्स को जेम्स पोर्टल पर अपलोड करना होता है। अगस्त महीने में राज्य के 13 जिलों से ऐसी बैठक से संबंधित कोई रिपोर्ट अपलोड नहीं है। सबसे अधिक शिकायतें धनबाद से, अवैध खन में गोफ में समा जाते लोग झारखंड में अवैध खनन से सर्वाधिक प्रभावित जिलों की बात करें तो सबसे अधिक शिकायतें धनबाद से मुख्यालय तक आती हैं और इस पर कार्रवाई का प्रतिशत भी बहुत कम है। नतीजा आए दिन देखने को मिलता है। इस जिले में अवैध खनन के कारण बड़ी घटनाएं आए दिन होती रहती हैं। रविवार को भी धनबाद में अवैध खनन की कोशिशों में दो लोगों की मौत हुई है और कुछ लोगों के मलबे में दबे होने की भी जानकारी मिल रही है। ऐसी जानकारियों की पुष्टि झारखंड में यदा-कदा ही हो पाती है और यही कारण है कि अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है। धनबाद के लोग अवैध खनन का दंश दशकों से झेल रहे हैं और हर वर्ष कई लोगों की जान अवैध खनन के परिणाम के स्वरूप बने गोफ में समा जाने से होती है। झारखंड के अन्य कई जिलाें में अवैध खनन के कारण लोगों की जान तो जा ही रही है, विधि-व्यवस्था की समस्या भी उत्पन्न हो रही है। इसे रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां औपचारिकताओं तक ही सीमित हैं। क्षेत्र के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि कहीं ना कहीं ऐसी घटनाएं रुक नहीं रही हैं। धनबाद समेत आसपास के तमाम जिलों में इस तरह की घटनाएं बार-बार होने के बावजूद प्रशासनिक विफलता के कारण इसे रोका नहीं जा पा रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जब तक आम लोग इसे रोकने के लिए आगे नहीं आएंगे और पुलिस, प्रशासन एवं नेतृत्वकर्ताओं से इसे रोकने के लिए जिद नहीं करेंगे तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। जिम्मेदार लोगों को इसके लिए सतर्कतापूर्वक काम करना होगा।  

नदियों का रास्ता बदलने से बढ़ी चिंता, अवैध खनन के बीच SYL मुद्दा फिर गरमाया

जालंधर. भाखड़ा बांध को लेकर फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। हालांकि सरकार और प्रशासन को मानसून के मद्देनजर सभी जरूरी तैयारियां समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए। भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा राज्यों से डैम का पानी लेने की अपील के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए इसे अलार्मिंग स्थिति नहीं कहा जा सकता। यह बात पंजाब सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह दुलेट ने कही। अमरजीत सिंह ने कहा कि इस समय भाखड़ा बांध का जलस्तर उसकी पूर्ण क्षमता से करीब 115 फीट नीचे है। ऐसे में तत्काल बड़े खतरे की आशंका नहीं है। बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए जरूरी हालांकि बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए यह जरूरी है कि हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले नालों, नहरों, नदियों और तटबंधों की सफाई व मरम्मत का कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाए। जून के अंत तक संबंधित विभागों से इन कार्यों का अंतिम प्रमाणपत्र भी प्राप्त हो जाना चाहिए। डैम को अधिक खाली रखने संबंधी सवाल पर दुलेट ने कहा कि बीबीएमबी की भूमिका केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है। उसका प्रमुख दायित्व जलविद्युत उत्पादन भी है। ऐसे में डैम को जरूरत से ज्यादा खाली रखना व्यावहारिक नहीं है। यदि भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ का पिघलना अपेक्षा से कम हुआ तो जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इसलिए जल प्रबंधन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। बीबीएमबी को संभावित परिस्थितियों के बारे में समय रहते राज्य सरकारों को सूचित करना चाहिए, ताकि प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त तैयारियां की जा सकें। पूर्व चीफ इंजीनियर ने नदियों में बढ़ती तबाही के पीछे अवैध और अनियंत्रित खनन को भी एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही माइनिंग के कारण कई नदियों ने अपना प्राकृतिक मार्ग बदल लिया है। इससे बाढ़ के दौरान पानी नए क्षेत्रों में फैलता है और नुकसान बढ़ जाता है। साथ ही अत्यधिक खनन से तटबंध कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे उनके टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है। एसवाईएल पर नए सिरे से जल उपलब्धता का आकलन हो सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पर दुलेट ने कहा कि यह मुद्दा पिछले चार दशकों से चला आ रहा है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। एसवाईएल की मूल नीति उस समय बनाई गई थी जब नदियों में पानी का प्रवाह आज की तुलना में काफी अधिक था। अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और नदियों में इनफ्लो कम हुआ है। ऐसे में जल उपलब्धता का नए सिरे से वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए। यदि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर आकलन किया जाए तो इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाएगी और समाधान का रास्ता भी आसान हो सकता है।

माइंस विभाग की समीक्षा बैठक: राजस्व बढ़ाने और खनन प्रक्रिया को समयबद्ध करने पर जोर

जयपुर अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम श्रीमती अपर्णा अरोरा ने खान एवं भूविज्ञान विभाग के फील्ड अधिकारियों को डेलिनियेशन से लेकर आॅक्शन तक के लिए मिनरल ब्लाॅक तैयार करने के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिनरल ब्लाॅकों की समय पर नीलामी से वैध खनन को बढ़ावा, अवैध खनन पर प्रभावी रोक, माइनिंग सेक्टर में निवेश और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। एसीएस माइंस श्रीमती अपर्णा अरोरा गुरुवार को खनिज भवन में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की हाईब्रिड मोड पर बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि मिनरल ब्लाॅकों के तैयार करने से नीलामी तक की प्रक्रिया का क्रियान्वयन टाइमलाइन बनाकर किया जाए ताकि क्रियान्वयन व प्रभावी मोनेटरिंग संभव हो सके। उन्होंने कहा कि इससे राज्य सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा माइनिंग सेक्टर में राजस्थान को अग्रणी प्रदेश बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ जीरो टाॅलरेंस की नीति पर कार्य करने के निर्देश है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए विभाग द्वारा वैध खनन को बढ़ावा देने के लिए मिनरल ब्लाॅकों के ऑक्शन पर जोर दिया जा रहा है। श्रीमती अरोरा ने कहा कि विभाग को राजस्व संग्रहण का बड़ा लक्ष्य मिला है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभी से कार्ययोजना बनाने के साथ ही पुराने बकाया और अवैध खनन गतिविधियों पर कार्यवाही की बकाया राशि की वसूली पर भी फोकस करना होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय होने से राजस्व में बढ़ोतरी और अवैध खनन गतिविधियों पर कारगर रोक लग सकेगी। एसीएस माइंस श्रीमती अपर्णा अरोरा ने निर्माण कार्य से जुड़ी संस्थाओं से उपलब्ध एम-सेंड के अधिक से अधिक उपयोग पर जोर दिया ताकि बजरी के विकल्प के रुप में एम-सेंड को प्रोत्साहित किया जा सकें। उन्होंने बजट घोषणाओं की क्रियान्विति प्रगति, राजस्व संग्रहण सहित महत्वपूर्ण बिन्दुओं की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  

अवैध खनन पर शासन-प्रशासन सख्त : केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की कार्रवाई में 4 हाईवा जब्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कड़े और स्पष्ट निर्देशों तथा राज्य शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए खनिज विभाग का मैदानी अमला लगातार सक्रियता के साथ कार्यवाही कर रहा है। शासन स्तर पर की जा रही गहन समीक्षा, सख्त निगरानी और प्रशासनिक चौकसी के परिणामस्वरूप अवैध खनिज गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगा है।         खनिज विभाग के सचिव एवं संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता तथा जिला स्तरीय टीमों द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण और संयुक्त कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 27 मई 2026 को केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने जिला रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद क्षेत्र अंतर्गत सघन निरीक्षण अभियान चलाया। निरीक्षण के दौरान रायपुर जिले के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिरदा एवं घिवरा में गौण निम्न श्रेणी चूनापत्थर से भरे 01 हाईवा तथा रेत के 03 हाईवा को वैध अभिवहन पास एवं अनुमति के बिना खनिज परिवहन करते पाए जाने पर अवैध परिवहन का प्रकरण दर्ज किया गया। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 के तहत कार्रवाई करते हुए चारों हाईवा वाहनों को जब्त कर संबंधित वाहन चालकों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया। जब्त वाहनों को आगामी आदेश तक रायपुर जिले के समीपस्थ विधानसभा एवं खरोरा थाना परिसर में अभिरक्षा में खड़ा कराया गया है। जांच के दौरान केंद्रीय खनिज उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार राज्य में अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा। शासन-प्रशासन की सख्ती, बढ़ी चौकसी और सतत निगरानी के कारण अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाही सुनिश्चित की जा रही है।

एनटीपीसी क्षेत्र में रातभर चला अवैध खनन, 15 फीट गहरे गड्ढे मिले

पटना पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित एनटीपीसी थाना क्षेत्र के ढीबर गांव के पास गंगा किनारे अवैध मिट्टी खनन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां लगातार तीन रातों तक अवैध मिट्टी कटाई होती रही, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जिस जगह मिट्टी की कटाई की जा रही है, वहीं से एनटीपीसी प्लांट के लिए पानी की सप्लाई भी होती है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रातभर चलता रहा अवैध खनन स्थानीय लोगों के अनुसार, ढीबर गांव के दियारा इलाके में लगातार रातभर गंगा बालू और मिट्टी की कटाई की जा रही थी। लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना की मिलीभगत से यह अवैध खनन हो रहा है, जिससे खनन माफियाओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को सबकुछ पता होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसडीपीओ की छापेमारी, लेकिन माफिया फरार मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ रामकृष्णा ने देर रात मौके पर छापेमारी की। हालांकि, छापेमारी की भनक लगते ही सभी खनन माफिया मौके से फरार हो गए। छापेमारी के दौरान खेतों में करीब 15 फीट तक गहरे गड्ढे पाए गए। इसके बाद एसडीपीओ ने तुरंत खनन विभाग को इसकी जानकारी दी। पहले भी हो चुके हैं हादसे स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले बारिश के दौरान खेतों में बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से कई लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। अब एनटीपीसी डैम के पास खुदाई होने से ग्रामीण किसी बड़े हादसे की आशंका से डरे हुए हैं। किसान रातभर कर रहे खेतों की रखवाली अवैध मिट्टी कटाई से परेशान किसान अब रातभर जागकर अपने खेतों की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर यह अवैध खनन चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रोज लाखों की कमाई का आरोप एक स्थानीय व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जिस जमीन से मिट्टी काटी जा रही है, उसे एनटीपीसी ने अधिग्रहित कर रखा है। हालांकि, मुआवजा नहीं मिलने के कारण किसान अभी भी उस जमीन पर खेती कर रहे हैं।  उसने बताया कि खनन माफिया एक ट्रिप मिट्टी 800 रुपये में बेचते हैं। इसमें 300 रुपये ट्रैक्टर मालिक को दिए जाते हैं, जबकि 500 रुपये माफिया के पास बचते हैं। बताया गया कि करीब 20 ट्रैक्टर लगाए गए हैं और हर ट्रैक्टर लगभग 20 ट्रिप मिट्टी की ढुलाई करता है। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 400 ट्रिप मिट्टी बेची जा रही है और माफिया रोज लगभग दो लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति ने यह भी आरोप लगाया कि छह दिनों तक लगातार मिट्टी कटाई हुई और माफियाओं ने लगभग “50 प्रतिशत पर थाना मैनेज” कर रखा था। एसडीपीओ ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी एसडीपीओ रामकृष्णा ने बताया कि ढीबर दियारा में मिट्टी कटाई की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की गई थी। मौके पर कोई व्यक्ति नहीं मिला, लेकिन मिट्टी कटाई के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अवैध कटाई से पर्यावरण समेत कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अब पुलिस खुद इस पूरे इलाके की निगरानी करेगी। एसडीपीओ ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध मिट्टी कटाई हो रही हो तो तुरंत सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने खनन माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि नियम और कानून के तहत ही कोई काम किया जाए। अगर कोई अवैध गतिविधि पाई गई तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद एक्शन, चंबल नदी में उतरी पुलिस-वन विभाग की टीम

  करौली राजस्थान में करौली जिले के नेशनल चंबल घड़ियाल सेंचुरी में अवैध बजरी खनन को लेकर करौली पुलिस ने चंबल के बीहड़ों में उतरकर बजरी माफियाओं के खिलाफ एक बड़ा और हाई-वोल्टेज ऑपरेशन चलाया. करौली के एसपी लोकेश सोनवाल के कुशल निर्देशन में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल नदी में पांच घंटे तक मोर्चा संभाला और अवैध खनन के पूरे नेटवर्क को हिलाकर रख दिया. सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई थी सख्ती अवैध बजरी खनन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने कहा कि यह लापरवाही पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा है. अदालत के सामने आई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि राज्य के 40 संवेदनशील इलाकों में से सिर्फ एक जगह सीसीटीवी कैमरा लगा है और सुरक्षा के सारे दावे अधूरे हैं. इस सख्ती के बाद सरकार ने तुरंत धौलपुर, करौली, कोटा, बूंदी और सवाई माधोपुर में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष टास्क फोर्स का गठन कर दिया है. एसपी की अगुवाई में बड़ा एक्शन सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए करौली एसपी लोकेश सोनवाल ने खुद कमान संभाली. उनके नेतृत्व में पुलिस ने शनिवार को करणपुर क्षेत्र के गौटा घाट पर धावा बोल दिया. पुलिस को आता देख माफिया ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लेकर मध्य प्रदेश की सीमा की तरफ भागने लगे. एसपी के कड़े निर्देशों के बाद थानाधिकारी देवेश कुमार जाटव अपने पुलिस जवानों के साथ मौके पर पहुंचे. इसके बाद जांबाज जवान वर्दी और हथियारों के साथ नदी के गहरे पानी में उतर गए और दूर तक माफियाओं का पीछा किया. एसपी सोनवाल ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन होगा और माफिया चाहे सीमा पार के हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. घड़ियालों के आशियाने पर मंडराता खतरा यह पूरा अवैध कारोबार घड़ियाल प्रजनन केंद्र से महज 500 मीटर की दूरी पर चल रहा है. भारी मशीनों का शोर और अवैध खनन घड़ियालों के प्राकृतिक माहौल को नष्ट कर रहा है. राजस्थान से मध्य प्रदेश के श्योपुर तक फैले इस नेटवर्क में हर दिन करीब 200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अवैध बजरी पार कराई जा रही हैं. फिलहाल पुलिस ने जेसीबी से रास्ते काटकर माफियाओं के रूट बंद कर दिए हैं और अब हर किसी की नजर 20 मई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है.

Ravi River और Sutlej River में माइनिंग पर कोर्ट सख्त, Punjab सरकार को समयसीमा तय

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने रावी और सतलुज दरिया के क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में पंजाब सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों पर तीन हफ्ते के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने यह आदेश ड्रोन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर खुदाई पाई जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाए। चंडीगढ़ निवासी गुरबीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि पंजाब में अवैध खनन का कार्य जोरों पर चल रहा है, जिससे राज्य सरकार को हर वर्ष लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अमृतसर बार्डर और रावी दरिया किनारे में अवैध रेत खनन अभी भी जारी है। सुनवाई के दौरान सर्वे आफ इंडिया द्वारा प्रस्तुत ड्रोन आधारित सर्वे रिपोर्ट को अदालत ने महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। रिपोर्ट में हाई रिजोल्यूशन इमेजरी और डिजिटल टेरेन माडल के माध्यम से यह संकेत मिला कि कई स्थानों पर खुदाई निर्धारित खनन क्षेत्र से बाहर की गई है। हालांकि, ड्रोन सर्वे अभी केवल कुछ गांवों तक सीमित है और पूरे रावी-सतलुज बेल्ट का आकलन बाकी है। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधूरी रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक स्थिति का आकलन संभव नहीं है। कोर्ट ने सर्वे आफ इंडिया को निर्देश दिया कि शेष क्षेत्रों का व्यापक सर्वेक्षण तीन सप्ताह के भीतर पूरा कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे, ताकि पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। अदालत ने पंजाब सरकार को भी निर्देशित किया कि जैसे ही अंतिम रिपोर्ट प्राप्त हो, अवैध खनन से जुड़े मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की जाए। इस पहले सुनवाई पर केंद्र सरकार ने भी बताया था कि बीएसएफ, सेना और केंद्र सरकार अवैध खनन और इसके जरिये सीमा क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने की दिशा में काम कर रही है। हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह बताएं कि सीमा के निकट कैसे वैध खनन की अनुमति दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा था कि सीमा पर अवैध खनन बंद है और केवल रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही खनन की इजाजत दी जा रही है।

Illegal Mining पर बड़ा एक्शन: छत्तीसगढ़ में Drone Surveillance और 10 ई-चेक गेट से होगी सख्त निगरानी

रायपुर. छत्तीसगढ़ में खदानों की निगरानी अब हाईटेक होने जा रही है. प्रदेश में अवैध खनन और ओवर माइनिंग पर लगाम के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा. प्रमुख खदानों और आसपास ड्रोन कैमरे तैनात किए जाएंगे. ये कैमरे एरियल सर्वे और 3डी मैपिंग के जरिए खदानों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे. ड्रोन से खदानों का ऊपर से लगातार सर्वे किया जाएगा. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि तय लीज क्षेत्र के भीतर ही खनन हो रहा है या सीमा से बाहर भी खुदाई की जा रही है. समय-समय पर मिलने वाले डेटा की तुलना कर ओवर माइनिंग यानी तय सीमा से अधिक खनिज निकालने की गतिविधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा. फिलहाल विभाग शुरुआती चरण में पांच ड्रोन कैमरे तैनात करने जा रहा है. इन्हें सर्विस मोड पर लिया जाएगा और इनके संचालन के लिए विशेषज्ञों की टीम भी तैनात रहेगी. ड्रोन को खासतौर पर रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार, बिलासपुर इत्यादि जिलों की खदानों में लगाया जाएगा, जहां अवैध खनन की शिकायतें ज्यादा सामने आती रही हैं. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुर्गम इलाकों जैसे जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में भी निगरानी आसान हो जाएगी. यहां फिलहाल पारंपरिक निरीक्षण में समय और संसाधन ज्यादा लगते हैं. ड्रोन से मिलने वाली हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें और मैपिंग डेटा सीधे विभाग तक पहुंचेगा, जिससे तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी. परिवहन गाड़ियों की डिजिटल निगरानी खनिज परिवहन को पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के लिए 10 प्रमुख परिवहन रूट्स पर ई-चेक गेट सिस्टम लागू करने जा रहा है. यह पूरी तरह डिजिटल एंट्री-एग्जिट सिस्टम होगा. इसमें खदान से निकलने वाले हर ट्रक या वाहन का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार होता है. जैसे ही वाहन चेक गेट से गुजरता है, उसकी जानकारी जैसे वाहन नंबर, खनिज का प्रकार, मात्रा और गंतव्य इत्यादि सिस्टम में दर्ज हो जाएगी. इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ओवरलोडिंग और बिना रॉयल्टी खनिज परिवहन पर रोक लगाई जा सकती है. पहले जहां कागजी दस्तावेजों के जरिए हेरफेर की गुंजाइश रहती थी, वहीं अब डेटा सीधे सिस्टम में दर्ज होने से गड़बड़ी पकड़ना आसान हो जाएगा. ई-चेक गेट रियल टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी देता है. अधिकारी किसी भी समय यह देख सकते हैं कि कौन सा वाहन कहां से निकला और कहां तक पहुंचा. इससे अवैध खनिज परिवहन और टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाता है. इन रूपों में होता है अवैध खनन 1. बिना लीज/परमिट के खनन : जमीन पर खनन शुरू कर दिया, लेकिन सरकार से अनुमति नहीं ली. 2. लीज एरिया से बाहर खनन : जहां तक खनन की इजाजत है, उससे बाहर खुदाई करना. 3. ओवर माइनिंग : तय सीमा से ज्यादा खनिज निकालना. 4. बिना रॉयल्टी/टैक्स के परिवहन : खनिज निकालकर बिना सरकारी शुल्क दिए बेच देना. 5. फर्जी कागजों से खनन : नकली परमिट या ट्रांजिट पास का इस्तेमाल. विभाग में अन्य कई प्रावधान खनिज नियमों में संशोधन कर रेत व गौड़ खनिजों के अवैध उत्खनन पर न्यूनतम 25 हजार रुपए जुर्माना माइनिंग सर्विलांस सिस्टम और सैटेलाइट मॉनिटरिंग से खदानों की रियल टाइम निगरानी कर कार्रवाई खनिज परिवहन में ऑनलाइन ट्रांजिट पास अनिवार्य किया गया, जिससे 5 साल में 84.47 करोड़ की वसूली सचिव खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने कहा कि प्रदेश में अवैध खनन को रोकने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाए गए हैं. खदानों की निगरानी और अवैध परिवहन रोकने के लिए ड्रोन कैमरे से निगरानी और ई-गेट चालान सिस्टम शुरू किया जा रहा है.

चंदवाजी पुलिस की बड़ी कार्रवाई, क्रेशर खदान से भारी मात्रा में विस्फोटक जब्त

 जयपुर जयपुर जिले में अवैध खनन और विस्फोटक तस्करी के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। चंदवाजी थाना पुलिस ने त्रिवेणी क्रेशर के पास खदान क्षेत्र में छापेमारी कर अवैध भंडारण का बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने 795 किलो अमोनियम नाइट्रेट जब्त किया पुलिस ने मौके से 795 किलो अमोनियम नाइट्रेट सहित बड़ी मात्रा में खतरनाक विस्फोटक सामग्री बरामद की। इस कार्रवाई में बाबूलाल और सुरेश नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार, पुलिस को पहले से इनपुट मिला था कि खदान क्षेत्र में अवैध रूप से विस्फोटक सामग्री जमा की जा रही है और बड़े स्तर पर ब्लास्टिंग की तैयारी चल रही है। इसी सूचना पर ट्रेनी आईपीएस नितिन चौधरी के नेतृत्व में टीम ने दबिश दी। बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जब्त तलाशी के दौरान पुलिस ने 32 कार्टन में रखा अमोनियम नाइट्रेट बूस्टर (कुल 286 नग, 795 किलो), 121 डेटोनेटर, डीटीएच वायर, जिलेटिन बत्ती और अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों के पास इस सामग्री के भंडारण या उपयोग का कोई वैध लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का अवैध भंडारण गंभीर सुरक्षा खतरे की ओर इशारा करता है। आशंका है कि इसका उपयोग अवैध खनन में बड़े पैमाने पर ब्लास्टिंग के लिए किया जाना था। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विस्फोटक सामग्री कहां से लाई गई और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है। मामले की गहन जांच जारी है।

खनन माफिया पर शिकंजा: आधा दर्जन ठिकानों पर रेड, कई वाहन पकड़े गए

राजनांदगांव. जिले भर खनिज के अवैध परिवहन और उत्खनन के खिलाफ लगातार ताबड़तोड़ कार्यवाही की जा रही है . इसी के तहत आज आधा दर्जन से अधिक स्थानों में छापामार कार्रवाई करते हुए मुरूम और गिट्टी से भरी गाड़ियों को पकड़ने में सफलता मिली है . जप्त गाड़ियों को संबंधित थाने में रखा दिया गया है. ज्ञात हो कि कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार खनिज विभाग द्वारा जिले में खनिज का अवैध उत्खनन एवं परिवहन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. खनिज अधिकारी ने बताया कि खनिज विभाग की टीम द्वारा आज ग्राम भर्रेगांव, खुटेरी, रवेली, कोटरासरार, अर्जुनी, भोथली, बाघमार सहित अन्य क्षेत्रों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया. निरीक्षण के दौरान खनिज अमला द्वारा खनिज मुरूव व मिट्टी एवं मुरूम व मिटटी का अवैध उत्खनन कर परिवहन करने वालों पर कार्रवाई की गई. जिसमें ग्राम खुटेरी निवासी गोविन्द साहू के स्वामित्व की हाईवा – सीजी 07 बीएम 2500 से वाहन चालक ग्राम सिकोला निवासी टोमन यादव द्वारा मुरूम व मिट्टी का अवैध परिवहन तथा ग्राम देवरी निवासी रूपेश साहू के स्वामित्व की जेसीबी- सीजी 24 यू 4031 से वाहन चालक ग्राम केंवट नवागांव निवासी मोहित कुमार द्वारा मुरूम व मिट्टी का अवैध उत्खनन करने पर कार्रवाई करते हुए थाना सोमनी को सुपुर्द किया गया. प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है. खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण के रोकथाम के लिए लगातार गस्त व निगरानी की जा रही है.