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इनकम टैक्स विभाग में तबादलों की बड़ी सूची जारी, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के 182 अधिकारी प्रभावित

रायपुर. छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आयकर विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल (Income Tax Department Transfers) किया गया है। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त ने बस्तर से लेकर ग्वालियर तक पदस्थ 182 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। विभागीय स्तर पर हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानांतरण सूची में 20 अतिरिक्त, संयुक्त आयुक्त एवं अतिरिक्त संयुक्त अन्वेषण निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा 48 उपायुक्त और 114 आयकर अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। हाल ही में पदोन्नत हुए 14 अधिकारियों के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। उनकी पदोन्नति के बाद से ही तबादलों की चर्चाएं तेज हो गई थीं। अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे गए प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 18 अतिरिक्त आयुक्त और 11 उपायुक्तों को अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। विभाग का मानना है कि इस फेरबदल से कार्यप्रणाली में तेजी आएगी और प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा। जून में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश आदेश के अनुसार सभी स्थानांतरित अधिकारियों को 12 से 15 जून के बीच अपनी नई पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा। विभाग ने समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए हैं।

नए आयकर कानून के मसौदे पर विचार-विमर्श शुरू, विभाग ने मांगे सुझाव

नई दिल्ली आयकर विभाग ने रविवार को कहा कि उसने एक अप्रैल से प्रभावी होने वाले नए आयकर कानून, 2025 के तहत कर नियमों और प्रपत्रों के मसौदे पर हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। विभाग ने एक बयान में जानकारी दी कि व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘प्रस्तावित आयकर नियम, 2026’ और संबंधित फॉर्म को अंतिम अधिसूचना से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने परामर्श प्रक्रिया के तहत हितधारकों से चार श्रेणियों में सुझाव मांगे हैं। इनमें भाषा का सरलीकरण, मुकदमों में कमी, अनुपालन बोझ को कम करना और अप्रासंगिक या पुराने हो चुके नियमों व प्रपत्रों की पहचान करना शामिल है। विभाग ने कहा, ‘हितधारकों को इन मसौदों का अध्ययन कर सुझाव देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। अंतिम अधिसूचना से पूर्व इन सभी सुझावों को संकलित कर उन पर समीक्षा के लिए विचार किया जाएगा।’ सुझाव देने की सुविधा के लिए ‘ई-फाइलिंग’ पोर्टल पर एक लिंक जारी किया गया है, जो चार फरवरी, 2026 से सक्रिय है। हितधारक अपने नाम और मोबाइल नंबर के माध्यम से ओटीपी आधारित सत्यापन के बाद अपने सुझाव साझा कर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुझाव देते समय संबंधित नियम, उप-नियम या प्रपत्र संख्या का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए। छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 के स्थान पर अब नया आयकर अधिनियम, 2025 आगामी एक अप्रैल से लागू होगा। वर्तमान आयकर नियम, 1962 में 511 नियम और 399 फॉर्म हैं, जबकि प्रस्तावित नए नियमों में इनकी संख्या घटाकर क्रमशः 333 नियम और 190 फॉर्म कर दी गई है।  

ITR फाइलिंग पर नया अपडेट: ₹3 लाख कमाने वालों के लिए क्या है नियम?

नई दिल्ली  जिन लोगों का आयकर ऑडिट नहीं होता, उनके लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2025 है। अब केवल तीन हफ्ते बचे हैं और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस बारे में SMS रिमाइंडर भेजना शुरू कर दिया है। आयकर विभाग की ओर से भेजे जा रहे SMS में लिखा है- अब तक 3 करोड़ से ज्यादा आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं! कृपया 15.09.25 से पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर AY 2025-26 के लिए अपना आईटीआर दाखिल और ई-वेरिफिकेश करें। सालाना सैलरी 3 लाख रुपये हो तब? ऐसे में अब सवाल है कि किसके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। क्या उन लोगों के लिए भी रिटर्न फाइल करना जरूरी है जिसकी सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक है? नांगिया एंड कंपनी एलएलपी की कार्यकारी निदेशक संजोली माहेश्वरी ने कहा- वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आय सीमा टैक्सपेयर की कुल आय और चुने गई टैक्स रिजीम यानी पुरानी या नई टैक्स रिजीम पर आधारित है। ईटी की खबर में संजोली माहेश्वरी ने कहा- यदि टैक्सपेयर की कुल आय मूल छूट सीमा से अधिक है तो टैक्सपेयर को अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना चाहिए। नई टैक्स व्यवस्था के लिए मूल छूट सीमा 3 लाख रुपये और पुरानी टैक्स व्यवस्था के लिए 2.5 लाख रुपये है। किस तरह के होते हैं फॉर्म आईटीआर फॉर्म एक (सहज) और आईटीआर फॉर्म चार (सुगम) सरल फॉर्म हैं जो बड़ी संख्या में छोटे तथा मध्यम करदाताओं की जरूरतों के अनुरूप हैं। सहज को ऐसे व्यक्ति दाखिल कर सकते हैं, जिसकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक हो और जो वेतन, एक मकान की संपत्ति, अन्य स्रोतों (ब्याज) तथा कृषि आय से 5,000 रुपये प्रति वर्ष तक की आय प्राप्त करता हो। सुगम को ऐसे व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) और कंपनियों द्वारा दाखिल किया जा सकता है, जिनकी वार्षिक आय 50 लाख रुपये तक हो और व्यवसाय से और कोई पेशेवर आय हो। आईटीआर-2 उन व्यक्तियों और एचयूएफ द्वारा दाखिल किया जाता है जिनकी आय, व्यवसाय या पेशेवर लाभ या प्राप्ति से नहीं होती है।