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AMCA बनाम F-35: क्या भारत रचेगा नया इतिहास? देसी फाइटर जेट प्रोजेक्ट ने बढ़ाई दुनिया की धड़कनें

बेंगलुरु  भारत ने रक्षा तकनीक की दुनिया में एक ऐसा दांव चला है, जिसने दुनिया के बड़े सैन्य विशेषज्ञों को चौंका दिया है. पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस मीडियम कंबैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA के लिए जारी हुए आरएफपी ने सिर्फ एक नए विमान की कहानी शुरू नहीं की, बल्कि भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल मॉडल को ही बदलने का संकेत दे दिया है. इसमें सबसे बड़ा संदेश यह है कि करीब सात दशक तक लड़ाकू विमान निर्माण में अकेले खिलाड़ी रहे सरकारी कंपनी एचएएल का एकाधिकार अब टूटता दिख रहा है. पहली बार भारत सरकार ने AMCA जैसे रणनीतिक और अत्यंत संवेदनशील प्रोजेक्ट के लिए निजी कंपनियों को आगे कर दिया है।  एलएंडटी-बीईएल, टाटा एडवांस सिस्टम्स और भारत फोर्ज-बीईएचएल जैसे निजी समूह अब उस दौड़ में हैं, जो भारत को अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की श्रेणी में ला सकती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत वाकई 30 महीने में वह कर सकता है, जिसके लिए अमेरिका जैसी सुपरपावर को 5 से 6 साल लगे थे? AMCA सिर्फ फाइटर जेट नहीं, भारत का टेक्नोलॉजिकल टेस्ट है AMCA परियोजना को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान सिर्फ एक एयरक्राफ्ट नहीं होता. यह उड़ने वाला सुपरकंप्यूटर होता है. इसमें स्टील्थ डिजाइन, सेंसर फ्यूजन, AI आधारित एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, सुपरक्रूज क्षमता और अत्याधुनिक हथियार एक साथ काम करते हैं. दुनिया में अभी तक केवल अमेरिका, चीन और सीमित स्तर पर रूस ही इस तकनीक को पूरी तरह विकसित कर पाए हैं. भारत अब इसी क्लब में प्रवेश करना चाहता है।    लेकिन असली कहानी यहां टाइमलाइन की है. अमेरिका को 72 महीने, भारत को सिर्फ 30 महीने! AMCA के RFP के अनुसार:     पहला प्रोटोटाइप 24 महीने में तैयार करना होगा     30 महीने के भीतर उसकी पहली उड़ान होगी     कुल 1800 शॉर्टिज सात वर्षों में पूरी करनी होंगी     उसके बाद ही सीरियल प्रोडक्शन शुरू होगा यानी अगर सब कुछ समय पर हुआ तो 2034-35 तक AMCA भारतीय वायुसेना में शामिल हो सकता है. अब इसकी तुलना अमेरिका से कीजिए।  F-22 और F-35 का उदाहरण अमेरिका ने 1991 में लॉकहीड मार्टिन-बोइंग टीम को F-22 रैप का कॉन्ट्रैक्ट दिया था. लेकिन पहला प्रोटोटाइप 1997 में रोलआउट हुआ और उसी साल उसकी पहली उड़ान हुई. यानी पहली उड़ान में करीब 72 महीने लगे. F-35 की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. F-35 लाइटिंग-II का कॉन्ट्रैक्ट 2001 में दिया गया. पहला प्रोटोटाइप 2006 में तैयार हुआ. यानी यहां भी लगभग 60 महीने लगे. अब भारत कह रहा है कि वह 30 महीने में पहली उड़ान करा देगा. यही वजह है कि दुनिया की नजरें इस प्रोजेक्ट पर टिक गई हैं।  HAL का युग खत्म या नई शुरुआत? AMCA प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा राजनीतिक और औद्योगिक संदेश यह है कि भारत अब सरकारी मॉडल से आगे बढ़कर निजी रक्षा उद्योग पर भरोसा कर रहा है. एचएएल ने दशकों तक मिग-21, जैगुआर, सुखोई-30MKI और तेजस जैसे विमानों का निर्माण किया. लेकिन तेजस प्रोग्राम में हुई लंबी देरी ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या भारत को तेज़ी से आगे बढ़ने के लिए नए मॉडल की जरूरत है? फिर यहीं से निजी क्षेत्र की एंट्री हुई. हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि प्रोटोटाइप निर्माण के बाद जब AMCA के बड़े पैमाने पर उत्पादन की बारी आएगी, तब एचएएल फिर से रेस में शामिल हो सकता है. क्योंकि HAL के पास मौजूदा असेंबली लाइनें हैं. एयरफोर्स के साथ दशकों का अनुभव है. सप्लाई चेन पहले से विकसित है. बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है. लेकिन जिस निजी कंपनी को शुरुआती प्रोटोटाइप कॉन्ट्रैक्ट मिलेगा, उसे तकनीकी बढ़त मिल जाएगी. इसलिए यह लड़ाई सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट की नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के एयरोस्पेस इकोसिस्टम की है।  सबसे बड़ी चुनौती- अनुभव की कमी यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारतीय निजी कंपनियां इतनी जल्दी फाइटर जेट निर्माण की क्षमता विकसित कर पाएंगी? सच्चाई यह है कि किसी भी निजी कंपनी ने अभी तक फाइटर जेट की फाइनल असेंबली लाइन नहीं बनाई है. टाटा ने जरूर एयरबस के साथ मिलकर C-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लाइन बनाई है, लेकिन वह फाइटर जेट नहीं है. स्टील्थ कोटिंग, सेंसर फ्यूजन और सुपरसोनिक डिजाइन जैसी तकनीकें भारत के लिए नई हैं।  इसके अलावा RFP में साफ कहा गया है कि नई कंपनी भारतीय नियंत्रण में होगी. विदेशी शेयर होल्डिंग सीमित रहेगी. सीईओ, सीएफओ और बोर्ड भारतीय नागरिक होंगे. विदेशी कंपनियों की प्रत्यक्ष भागीदारी लगभग नहीं होगी. यानी भारत को यह लड़ाई लगभग अकेले लड़नी होगी।  क्या भारत चुपके से डिफेंस टेक सुपरपावर बन रहा है? ऐसे में यह बड़ा सवाल बन गया है. यहां एक बड़ा बदलाव दिखाई देता है. पिछले दस वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में कई बड़े परिवर्तन किए हैं. जैसे-     मिसाइल टेक्नोलॉजी में तेज प्रगति     स्वदेशी रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम     ड्रोन और AI आधारित युद्ध प्रणालियां     ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्षमता     तेजस Mk1A और टीईडीबीएफ जैसी परियोजनाएं अब AMCA उस पूरी रणनीति का अगला चरण है. सरकार शायद यह समझ चुकी है कि अगर भारत को भविष्य के युद्धों में आत्मनिर्भर बनना है, तो उसे अब सिर्फ लाइसेंस प्रोडक्शन से आगे बढ़ना होगा. यही वजह है कि AMCA को केवल रक्षा परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय तकनीकी मिशन की तरह देखा जा रहा है।  AMCA की सबसे बड़ी ताकत उसकी महत्वाकांक्षा है और सबसे बड़ा खतरा भी वही है. अगर टाइमलाइन फिसली तो लागत कई गुना बढ़ सकती है. एयरफोर्स की क्षमता प्रभावित होगी. विदेशी लड़ाकू विमानों पर निर्भरता बढ़ेगी. निजी क्षेत्र का भरोसा भी हिल सकता है. तेजस परियोजना पहले ही दिखा चुकी है कि भारत में जटिल एयरोस्पेस प्रोजेक्ट समय से पीछे जा सकते हैं. ऐसे में 30 महीने की समय सीमा कई विशेषज्ञों को अवास्तविक लग रही है।  असली गेमचेंजर क्या हो सकता है? फिर भी इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष यह है कि भारत अब टेक्नोलॉजी रिस्क लेने को तैयार दिख रहा है. पहले भारत विदेशी तकनीक खरीदता था. अब भारत खुद प्लेटफॉर्म डिजाइन करना चाहता है. पहले सरकारी कंपनियां केंद्र में थीं. … Read more

देसी F-35 की धमाकेदार एंट्री, दुश्‍मनों का आसमान में मुकाबला करने के लिए एयर डिफेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा दबाव

बेंगलुरु  देश के साथ ही दुनियाभर में सामरिक हालात लगातार बदल रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल का ईरान पर अटैक या फिर भारत का ऑपरेशन सिंदूर, इन सब घटनाओं से ग्‍लोबल लेवल पर अभूतपूर्व स्थिति पैदा हुई है. कुछ दिनों पहले ही अमेरिका ने एक हाइपर-सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम देते हुए वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया. वॉशिंगटन के इस कदम ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सबके दिल-दिमाग में एक ही सवाल चल रहा है- क्‍या अब जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली स्थिति पैदा हो गई है? क्‍या कमजोर देश की संप्रभुता की कोई अहमियत नहीं है? इन सबको देखते हुए दुनिया के तमाम देशों ने अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने की मुहिम शुरू कर दी है. मिसाइल, एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम, ड्रोन और कटिंग एज फाइटर जेट पर हजारों-लाखों करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. सुरक्षा के लिहाज से भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन जैसा देश स्थित है. पाकिस्‍तान आतंकवादियों को पालने-पोसने के लिए दुनियाभर में कुख्‍यात है. पाकिसतान की सरजमीं पर ही ओसामा बिन लादेन जैसा दुर्दांत आतंकवादी मिला था. दूसरी तरफ, चीन की आक्रामक विस्‍तारवादी नीतियों से हर कोई वाकिफ है. ऐसे में भारत के लिए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करना अनिवार्य हो गया है. विदेशी तकनीक पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता है. यही वजह है कि भारत ने मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम और फाइटर जेट डेवलप करने में आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. अग्नि-5, ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्‍टम आदि उसके परिणाम है. भारत अब 5th जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की दिशा में भी अहम कदम उठा चुका है. इसको ध्‍यान में रखते हुए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है, जिसके तहत पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ जेट्स डेवलप किया जाना है. आनेवाले तीन से चार साल इसके लिए काफी अहम होने वाले हैं. जानकारी के अनुसार, भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य विमानन कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने पुष्टि की है कि देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्‍ट पर पूरी तरह तय समय पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक रोलआउट किया जाएगा, जबकि इसकी पहली उड़ान (मेडन फ्लाइट) 2029 की शुरुआत में होने की योजना है. डॉ. कामत ने यह अहम जानकारी बेंगलुरु में आयोजित ‘तेजस-25’ नेशनल सेमिनार के दौरान साझा की. इस कार्यक्रम का आयोजन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा किया गया था, जो स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की पहली उड़ान के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ. हालांकि, यह आयोजन तेजस की उपलब्धियों को याद करने के लिए था, लेकिन चर्चा का केंद्र भारत के भविष्य के सैन्य विमानन रोडमैप और खास तौर पर AMCA प्रोग्राम रहा. इसके तहत फाइटर जेट डेवलप होने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन श्रेणी में आ जाएगा. बता दें कि मौजूदा समय में पांचवीं पीढ़ी के जेट्स में अमेरिकी F-35 और Su-57 टॉप पर हैं. AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट्स इस वजह से खास     स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी: इस विमान में खास तरह की बनावट और रडार से निकलने वाली किरणों को अब्‍जॉर्ब यानी अवशोषित करने वाली टेक्‍नोलॉजी को शामिल किया गया है. इससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे.     इंटरनल वेपन बे: पुराने लड़ाकू विमानों में मिसाइलें पंखों यानी विंग्‍स पर लगाई जाती हैं, जिससे रडार पर उनकी पकड़ बढ़ जाती है. इसके विपरीत AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट में हथियार विमान के अंदर रखे जाएंगे, ताकि उसकी स्टील्थ क्षमता बनी रहे.     मॉडर्न सेंसर: इसमें आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर फ्यूज़न तकनीक होगी, जिससे पायलट दुश्मन के खतरों को बहुत पहले देख और ट्रैक कर सकेगा, उससे पहले कि दुश्मन उसे पहचान पाए.     पावरफुल इंजन: शुरुआती स्क्वाड्रन (AMCA Mk1) में अमेरिकी GE F414 इंजन लगाए जाने की उम्मीद है, जबकि भविष्य के संस्करण (Mk2) में इससे ज्यादा ताकतवर, संयुक्त रूप से विकसित इंजन इस्तेमाल किए जा सकते हैं. कहां तक पहुंचा AMCA प्रोजेक्‍ट? DRDO प्रमुख के अनुसार, AMCA प्रोग्राम अब केवल डिजाइन और कॉन्‍सेप्‍ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक विकास के चरण में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारतीय वायुसेना (IAF) की जरूरतों के अनुसार एक सख्त और समयबद्ध योजना के तहत आगे बढ़ रही है. साल 2028 में प्रोटोटाइप और 2029 में पहली उड़ान के बीच का कम अंतर यह दर्शाता है कि इस परियोजना पर कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है. इसे पैरेलल डेवलपमेंट रणनीति कहा जाता है, जिसमें डिजाइन को अंतिम रूप देने के साथ-साथ प्रोडक्‍शन की तैयारी और विभिन्न सिस्टम्स की टेस्टिंग भी एक साथ की जाती है. इससे जटिल रक्षा परियोजनाओं में अक्सर होने वाली देरी से बचने में मदद मिलती है. AMCA को लेकर DRDO का भरोसा काफी हद तक तेजस कार्यक्रम से मिले अनुभव पर आधारित है. शुरुआती वर्षों में तेजस परियोजना को कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसी प्रक्रिया ने भारत को एक मजबूत घरेलू रक्षा औद्योगिक ढांचा तैयार करने में मदद की. तेजस के जरिए देश में आधुनिक फ्लाइट टेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की टीम तथा मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई. अब DRDO और ADA इन सभी अनुभवों और सीख को AMCA परियोजना में लागू कर रहे हैं. इसके अलावा, निजी उद्योगों को शुरुआती चरण से ही निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, ताकि जोखिम कम हों और समयसीमा बनी रहे. AMCA प्रोजेक्ट क्या है और इसका उद्देश्य क्या है? AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है. इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत करना और भविष्य की हवाई चुनौतियों का सामना करना है. AMCA प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति क्या है? डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के अनुसार AMCA प्रोग्राम … Read more