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MP में औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार, धरमपुरा और आष्टा में बनेंगे विशाल इंडस्ट्रियल पार्क

इंदौर/भोपाल/जबलपुर  मध्यप्रदेश में विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी हो रही है। राज्य के तीन प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित 600 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के किनारे प्रदेश का सबसे बड़ा और पहला इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह एक्सप्रेस-वे महज शहरों के बीच सफर का रास्ता नहीं होगा, बल्कि इसके आसपास के इलाकों में नए औद्योगिक क्षेत्र बसाए जाएंगे, जो नए उद्योगों की स्थापना का मुख्य आधार बनेंगे। धरमपुरा और आष्टा में बनेंगे विशाल औद्योगिक पार्क     इस महात्वाकांक्षी परियोजना के तहत जबलपुर और भोपाल के बीच धरमपुरा में 576 करोड़ रुपये की लागत से 954 एकड़ में एक मल्टी-प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क तैयार किया जा रहा है। यह जगह जबलपुर से मात्र 40 किमी और भोपाल से 297 किमी की दूरी पर स्थित है। वहीं, भोपाल और इंदौर के मध्य सीहोर जिले के आष्टा में लगभग 21 हजार एकड़ (8,482 हेक्टेयर) जमीन पर एक और विशाल औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। इसके अलावा बढ़ियाखेड़ी और झीलेरा में भी नए औद्योगिक केंद्र विकसित किए जाएंगे। आष्टा वाले प्रोजेक्ट के लिए सरकार 5 हजार हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण करेगी, जबकि 6 हजार एकड़ सरकारी और औद्योगिक विकास निगम की जमीन पहले से उपलब्ध है। जमीन अधिग्रहण के लिए बनेगी स्पेशल कंपनी (SPV)     सड़क किनारे उद्योगों के लिए माकूल जमीन तलाशने का जिम्मा एक नई स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी को सौंपा जाएगा। सरकार इस कंपनी को जमीन अधिग्रहण के विशेष अधिकार भी दे सकती है। गुरुवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस कंपनी के गठन को मंजूरी मिलने की पूरी संभावना है। इसके लिए सरकार एक अलग कंपनी (एसपीवी) बनाएगी, जो सड़क के आसपास उद्योगों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशेगी। कंपनी को जमीन अधिग्रहण के अधिकार भी दिए जा सकते हैं। प्रस्ताव गुरुवार को कैबिनेट में आ सकता है। मंजूरी मिली तो यह प्रदेश का पहला और सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर होगा। एक साल में नए निवेश क्षेत्र तय होंगे 1. जबलपुर-भोपाल के बीच धरमपुरा में 954 एकड़ में मल्टी प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होगा। इस पर 576 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह जबलपुर से 40 किमी, सिवनी से 156 किमी, नागपुर से 260 किमी, भोपाल से 297 किमी दूर होगा। 2. भोपाल-इंदौर के बीच सीहोर जिले के आष्टा में 8,482 हेक्टेयर यानी करीब 21 हजार एकड़ में औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। इसके अलावा बड़ियाखेड़ी और झीलेला में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। यहां 6 हजार एकड़ सरकारी और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की जमीन है। 5 हजार हेक्टेयर निजी अधिग्रहीत करेंगे। 3. कैबिनेट की मंजूरी के बाद कंपनी बनेगी उद्योग विभाग ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले जमीन की उपलब्धता व सड़क संपर्क की संभावनाएं तलाश रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अलग कंपनी गठित होगी। यह एक साल में तय करेगी कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन जगहों पर नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, किराया राज्य के बजाय कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति तय करेगी। प्रदेश के 19 जिलों में बस संचालन के लिए ऑपरेटर नहीं मिलने से करीब 1.5 लाख बच्चे परेशान हैं। विभिन्न विभागों की योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद, यह कंपनी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले कनेक्टिविटी और जमीन की उपलब्धता तलाशेगी और एक साल के भीतर यह तय करेगी कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन जगहों पर उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं।     गौरतलब है कि प्रदेश के 19 जिलों में बस ऑपरेटर नहीं मिलने के कारण करीब 1.5 लाख बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, बैठक में नए जिलों (निवाड़ी, मैहर, मऊगंज और पांढुर्ना) में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय खोलने और विभिन्न विभागों की योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे।  

उत्तर प्रदेश बनेगा इंडस्ट्री हब! 10 नए औद्योगिक क्षेत्रों के साथ केंद्र लाएगा जन विश्वास विधेयक

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में प्लग एंड प्ले नीति के तहत 10 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जाएगी। केंद्र सरकार की मदद से स्थापित होने वाले इस औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया है, हालांकि अभी यह तय नहीं है कि यह औद्योगिक क्षेत्र किन जिलों में स्थापित किए जाने हैं।  पिकप भवन में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआइआइटी) के संयुक्त सचिव डा. जय प्रकाश शिवहरे ने बताया कि केंद्र सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ईज आफ डूइंग बिजनेस (कारोबार में सुगमता) को बढ़ावा देने को लेकर देश भर में 100 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की योजना पर काम शुरू किया है। एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों का विकास प्राथमिकता यीडा के सीईओ आर.के. सिंह के अनुसार, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास स्थित सेक्टरों का विकास सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा गया है. एयरपोर्ट के संचालन से पहले इन क्षेत्रों में सड़क, जलापूर्ति, सीवर और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इससे एयरपोर्ट आधारित उद्योगों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश का केंद्र बन सकेगा।  46 नए सेक्टरों के लिए सर्विस मास्टर प्लान पर काम यमुना सिटी में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 46 नए सेक्टरों के लिए सर्विस मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. इसके अंतर्गत जलापूर्ति, सीवर नेटवर्क, ड्रेनेज और अन्य शहरी सुविधाओं की विस्तृत योजना बनाई जाएगी. यीडा ने इसके लिए आरएफपी जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं. यह योजना शहर के व्यवस्थित और टिकाऊ विकास को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  ग्रेटर नोएडा में गरीब परिवारों के लिए बनेंगे किफायती फ्लैट ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के परिवारों के लिए किफायती आवास योजना पर तेजी से काम कर रहा है. बिरौंडा और पतवाड़ी गांव के पास जमीन चिह्नित की गई है, जहां बहुमंजिला आवासीय परियोजनाएं विकसित होंगी. लगभग 30 वर्गमीटर आकार के फ्लैटों में लिफ्ट और दैनिक जरूरतों की दुकानों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे निम्न आय वर्ग को बेहतर आवास मिल सके।  श्रमिकों को कम कीमत में बेहतर आवास देने की योजना ग्रेटर नोएडा के सीईओ रवि कुमार एनजी ने बताया कि श्रमिकों और निम्न आय वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना प्राधिकरण का उद्देश्य है. परियोजना और नियोजन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं. जमीन चिन्हित होने के बाद योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा. इससे हजारों श्रमिक परिवारों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास का लाभ मिल सकेगा।  इसके लिए राज्यों से जुलाई तक नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना संबंधी प्रस्ताव मांगे गए हैं। पहले और दूसरे चरण में 25-25 औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कारोबार में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए जन विश्वास (प्रविधान संशोधन) विधेयक-3.0 लाने की तैयारी की जा रही है। जन विश्वास-2.0 के तहत 717 प्रकार के औद्योगिक अपराधों में सीधे जेल भेजे जाने के प्रविधान को समाप्त किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश से निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। इनवेस्ट यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद ने बताया कि निर्यात के मामले में उत्तर प्रदेश 11वें स्थान से 9वें स्थान पर आ गया है। इससे पहले उन्होंने निर्यातकों व औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर जन विश्वास (प्रविधान संशोधन) विधेयक में संशोधन को लेकर उनकी राय ली।