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Iran War Impact: एशिया में बढ़ी न्यूक्लियर रेस, वियतनाम और रूस के बीच अहम समझौता

रूस वियतनाम और रूस ने मिलकर एक बड़ा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है। इस समझौते के तहत वियतनाम में “निन्ह थुआन-1” नाम का परमाणु बिजली संयंत्र बनाया जाएगा। यह डील वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह की मॉस्को यात्रा के दौरान हुई, जहां उन्होंने रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन से मुलाकात की।इस प्रोजेक्ट के तहत दो परमाणु रिएक्टर बनाए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता लगभग 2400 मेगावाट होगी। यह प्लांट रूस की आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा।दरअसल, वियतनाम ने 2016 में सुरक्षा और लागत के कारण अपने पुराने न्यूक्लियर प्रोजेक्ट रोक दिए थे। लेकिन अब बढ़ती बिजली की जरूरत और ऊर्जा सुरक्षा के कारण उसने फिर से इस दिशा में कदम बढ़ाया है। ईरान में चल रहे युद्ध और उससे पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट ने भी इस फैसले को तेज कर दिया है। तेल और गैस की कीमतें बढ़ने से कई देश अब स्थायी और सस्ती ऊर्जा के विकल्प तलाश रहे हैं। न्यूक्लियर ऊर्जा को कोयला और तेल की तुलना में ज्यादा साफ माना जाता है, क्योंकि इससे ग्रीनहाउस गैसें कम निकलती हैं। साथ ही, नई तकनीक के कारण अब परमाणु संयंत्र पहले से ज्यादा सुरक्षित और किफायती हो गए हैं। वियतनाम का लक्ष्य 2050 तक एक मजबूत और विकसित अर्थव्यवस्था बनना है। इस न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों ने तेल-गैस, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है। वियतनाम और रूस के संबंध पुराने हैं, लेकिन व्यापार अभी भी सीमित है।

ईरान संकट: भारतीय छात्रों की वापसी का प्लान तैयार, कल रवाना होगा पहला बैच, तय किए गए दो रूट

ईरान पश्चिमी एशियाई देश ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमले के बाद पूरा मध्य-पूर्व क्षेत्र संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। हालांकि, इस जंग के बीच ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को वहां से निकालने का इंतजाम पूरा कर लिया गया है। युद्ध के तेरहवें दिन यानी गुरुवार को भारतीय छात्रों का पहला जत्था ईरान से आर्मेनिया के रास्ते निकलेगा। उम्मीद है कि पहला बैच गुरुवार को आर्मेनिया बॉर्डर के लिए रवाना होगा क्योंकि वहां से निकलने की योजना धीरे-धीरे बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच समन्वय के बाद उन्हें सुरक्षित निकासी के लिए आर्मेनिया या अजरबैजान होकर दो मार्गों के विकल्प दिए गए हैं। ताकि ईरान से बाहर निकाले जा सकें। इनमें अधिकांश मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र हैं। उनमें भी अधिकांश जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं। ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के साथ शेयर की गई जानकारी के अनुसार, तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (TUMS), ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (IUMS), और शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (SBUMS) में एनरोल्ड स्टूडेंट्स को निकलने के दो रास्ते दिए हैं। उन्हें कहा गया है कि या तो आर्मेनिया या अज़रबैजान के रास्ते बाहर निकलिए। अधिकारी और स्टूडेंट ग्रुप यह पक्का करने के लिए कोऑर्डिनेट कर रहे हैं कि जो लोग जाने को तैयार हैं, वे तय एग्जिट पॉइंट तक सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकें। छात्र संगठनों और स्थानीय अधिकारियों की मदद से उन्हें सीमा तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। कुछ छात्र फ्लाइट से लौटना चाहते हैं हालांकि, कुछ छात्रों ने जमीनी रास्ते से निकलने के बजाय हवाई मार्ग से भारत लौटने का फैसला किया है। उनमें से बहुत से लोगों ने 15 मार्च, 16 मार्च और उसके बाद के दिनों के लिए फ़्लाईदुबई फ़्लाइट बुक की हैं, ताकि नजदीकी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों तक पहुंचकर सीधे भारत लौट सकें। दूसरी तरफ, शिराज यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में, जहाँ 86 भारतीय मेडिकल छात्र अभी अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, लोकल अधिकारियों ने उनके आने-जाने को आसान बनाने के लिए एक अलग इवैक्युएशन रूट का सुझाव दिया है। इस प्लान के तहत, छात्र अज़रबैजान के बाकू में शिराज – क़ोम – बाकू एयरपोर्ट से जा सकते हैं, जहाँ से वे भारत के लिए इंटरनेशनल फ़्लाइट ले सकते हैं। छात्रों में बढ़ रही चिंता ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) जम्मू-कश्मीर के प्रेसिडेंट मोहम्मद मोमिन खान ने कहा कि उन्हें गोलेस्तान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़, केरमान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ और इस्फ़हान यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ में एनरोल्ड भारतीय छात्रों से परेशानी भरे कॉल आ रहे हैं। उनके अनुसार, कई छात्र अधिकारियों से इवैक्युएशन का इंतज़ाम करने की गुज़ारिश कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि पूरे देश में हालात सुरक्षित नहीं हो सकते हैं। खान ने कहा, "स्टूडेंट्स लगातार फोन कर रहे हैं और इवैक्युएशन की रिक्वेस्ट कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ईरान का कोई भी हिस्सा अभी सेफ नहीं है," उन्होंने स्टूडेंट्स और उनके परिवारों की चिंताओं को भी बताया। राजनीतिक प्रतिनिधियों से भी सहयोग उन्होंने उन पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेटिव्स की कोशिशों को भी माना जो स्टूडेंट्स के टच में हैं और मदद को कोऑर्डिनेट कर रहे हैं। खान ने सपोर्ट देने और इंडियन स्टूडेंट्स की चिंताओं को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाने में मदद करने के लिए मेंबर ऑफ पार्लियामेंट आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का शुक्रिया अदा किया। बयान में कहा गया, "डॉ. खान ने मेंबर ऑफ पार्लियामेंट आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी का भी शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इंडियन स्टूडेंट्स की चिंताओं को दूर करने और उनकी सेफ वापसी की कोशिशों में मदद करने के लिए लगातार सपोर्ट और कोऑर्डिनेशन दिया।" परिवारों की बढ़ी चिंता जैसे-जैसे अलग-अलग बैच देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं, भारत में मौजूद उनके परिवार सुरक्षित निकासी की उम्मीद कर रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि आने वाले दिनों में और अधिक छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था की जा सकती है।  

कौन हैं Mojtaba Khamenei और क्यों हैं रहस्य के घेरे में? Iran पर हमलों के बीच बढ़ी अटकलें

ईरान ईरान युद्ध के 12वें दिन मध्य-पूर्व में संघर्ष तेज हो गया है। एक तरफ ईरान तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक सवाल भी तेजी से कौंध रहा है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई कहां हैं? ताजपोशी के कई दिनों बाद भी सार्वजनिक तौर पर मोजतबा की अनुपस्थिति ने कई बड़े सवालों और अटकलों को जन्म दिया है। कुछ रिपोर्टों में उनके घायल होने की बात कही गई है। इन अटकलों के बीच ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वह “सुरक्षित और स्वस्थ” हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बेटे और सरकारी सलाहकार यूसुफ पेज़ेशकियन ने टेलीग्राम पर एक संदेश में कहा कि उन्होंने मोजतबा खामेनेई के घायल होने की अफवाहों की पुष्टि करने की कोशिश की थी। उन्होंने लिखा कि उनसे जुड़े लोगों ने बताया है कि “खामेनेई सुरक्षित हैं और उन्हें कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।” इस बीच, इजरायल के खुफिया अधिकारियों ने दावा किया है कि मोजतबा घायल हैं। सार्वजनिक रूप से नहीं आए सामने रविवार को ईरान का सर्वोच्च नेता बनने के बाद से मोजतबा खामेनेई ने अभी तक कोई सार्वजनिक बयान या भाषण जारी नहीं किया है। उनकी इस अनुपस्थिति से देश और विदेश में उनकी सेहत और लोकेशन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट में तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि हालिया हमलों में मोजतबा खामेनेई के पैरों में चोट आई थी। रिपोर्ट के अनुसार वह फिलहाल एक अत्यंत सुरक्षित स्थान पर रह रहे हैं और सीमित संपर्क में हैं। युद्ध के बीच बढ़ती अनिश्चितता खामेनेई की हालत को लेकर अनिश्चितता ऐसे समय में है जब मिडिल ईस्ट में लड़ाई लगातार बढ़ रही है। यह लड़ाई ईरान पर US-इजरायली हमलों से शुरू हुई थी और तब से इसमें कई रीजनल एक्टर्स शामिल हो गए हैं, जिसमें मिसाइल हमले, ड्रोन इंटरसेप्शन और खाड़ी में नेवी की घटनाओं की खबरें शामिल हैं। मोजतबा खामेनेई के पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिकी और इजरायली हमलों में मौत हो गई थी। इसके बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज हो गया। क्षेत्रीय संकट गहराने की आशंका इस युद्ध के दौरान ईरान और इज़रायल के बीच मिसाइल हमले जारी हैं। वहीं सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों ने अपनी सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने का दावा किया है। इसके अलावा ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps ने यह भी कहा है कि उसने कुवैत में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे की ओर मिसाइल दागी है, हालांकि कुवैत ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर युद्ध इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे मध्य-पूर्व की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। वहीं ईरान के नए सर्वोच्च नेता की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता इस संकट को और जटिल बना रही है।  

हवाई यात्रा पर ईरान संकट की मार: सैकड़ों उड़ानें कैंसिल, यात्रियों को रिफंड में छूट

ईरान ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई से उपजे पश्चिम एशिया संकट के बीच सोमवार को भी बड़ी संख्या में वहां जाने वाली और वहां से गुजरने वाली उड़ानें रद्द रहीं। इंडिगो की आज 162 उड़ानें रद्द हैं। उसने मंगलवार को भी 47 उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है। एयरलाइंस ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर एक पोस्ट में बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों के होकर गुजरने वाली चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का अस्थायी निलंबन बढ़ा दिया गया है। साथ ही, अब 07 मार्च तक की यात्रा के लिए बिना शुल्क टिकट रद्द कराने या तारीख में बदलाव का विकल्प दिया जा रहा है। पहले 05 मार्च तक की यात्रा के लिए यह विकल्प दिया गया था। यह 28 फरवरी से पहले बुक कराये गये टिकटों पर लागू होगा। अंतर्राष्ट्रीय मार्गों पर देश की सबसे बड़ी विमान सेवा कंपनी एयर इंडिया ने भी 28 फरवरी या उससे पहले बुक कराये गये 05 मार्च तक की यात्रा के टिकट रद्द कराने या यात्रा की तारीख में बदलाव पर कोई शुल्क न लेने की घोषणा की है। उसने संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इजरायल और कतर को जाने वाली और वहां से आने वाली उसकी सभी उड़ानें आज रात 11:59 बजे तक के लिए रद्द कर दी हैं। एयरलाइंस ने बताया है कि 02 मार्च को उत्तरी अमेरिका और यूरोप की उसकी सिर्फ छह उड़नें रद्द रहेंगी। दिल्ली हवाई अड्डे पर आज दोपहर बाद एक बजे तक यहां से जाने वाली 37 और यहां आने वाली 50 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें हवाई क्षेत्र से संबंधित प्रतिबंधों के कारण रद्द रही हैं। पश्चिम एशिया संकट के कारण स्पाइसजेट की आज 17 उड़ानें (सात प्रस्थान, 10 आगमन) रद्द रही हैं। उसने 01 मार्च को 24 उड़ानें रद्द की थीं जबकि 03 मार्च को दो उड़ानें रद्द करने की घोषणा की है। अकासा एयर ने 03 मार्च तक अबू धाबी, दोहा, जेद्दा, कुवैत और रियाद की अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं। उसने भी 07 मार्च तक की यात्रा के टिकट पर पूरा रिफंड देने या बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के यात्रा की तारीख में बदलाव का विकल्प दिया है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी सभी उड़ाने आज आधी रात तक के लिए रद्द करने की सूचना दी है। उसने भी 05 मार्च तक की यात्रा के टिकट रद्द करने या तारीख में बदलाव पर कोई शुल्क नहीं लगाने की घोषणा की है।  

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कच्चे तेल में उछाल, भारतीयों की जेब पर संकट!

नई दिल्ली मध्य पूर्व में तनाव अब खुले युद्ध में बदल चुका है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें तेहरान समेत कई शहरों में विस्फोट की खबरें हैं। इस घटना ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और दुनिया भर के निवेशक व आम लोग इस बात से चिंतित हैं कि क्या यह आग भारत की जेब तक पहुंच जाएगी? भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, और इसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE, इराक आदि) से आता है, जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ईरान: एक प्रमुख तेल उत्पादक देश अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेलने के बावजूद ईरान आज भी दुनिया के शीर्ष 10 तेल उत्पादकों में शामिल है। 'ओपेक' (OPEC) के आंकड़ों के अनुसार, ईरान वर्तमान में लगभग 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन करता है। ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट के मुख्य विश्लेषक अर्ने लोहमैन रासमुसेन के अनुसार, 1974 में ईरान अमेरिका और सऊदी अरब के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था (6 मिलियन बैरल प्रतिदिन)। ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है। सालों के कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, इसके तेल उद्योग की स्थिति वेनेजुएला जैसे देशों से काफी बेहतर है। होर्मुज जलडमरूमध्य: सबसे बड़ा खतरा तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी है, जिसे ठप करने की धमकी ईरान अक्सर देता रहा है। यह मध्य पूर्व के अमीर तेल उत्पादक देशों को शेष विश्व से जोड़ने वाला मुख्य समुद्री मार्ग है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो वैश्विक खपत का करीब 20 प्रतिशत है। यह जलमार्ग काफी संकरा (लगभग 50 किलोमीटर चौड़ा) और उथला (अधिकतम 60 मीटर गहरा) है। इस मार्ग पर सुरक्षा को लेकर जरा सा भी संदेह होने पर जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आ सकता है। सैक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हैनसेन के अनुसार, केवल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास ही वैकल्पिक (बाईपास) बुनियादी ढांचा है, जिसकी अधिकतम क्षमता मात्र 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। अत्यधिक लाभदायक तेल और चीन पर निर्भरता पश्चिमी देशों (कनाडा, अमेरिका) में जहां तेल निकालने की लागत $40 से $60 प्रति बैरल आती है, वहीं ईरान के लिए यह लागत मात्र $10 प्रति बैरल है। 1979 की इस्लामी क्रांति और विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप की अधिकतम दबाव नीति के कारण ईरान के पास निर्यात के बहुत कम विकल्प बचे हैं। चीन सबसे बड़ा खरीदार ईरान वर्तमान में 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन निर्यात करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसका 80% से अधिक हिस्सा बाजार मूल्य से कम कीमत पर चीनी रिफाइनरियों मुख्यतः स्वतंत्र टीपॉट रिफाइनरियों को जाता है। पड़ोसी देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर खाड़ी देशों से लेकर तुर्की और पाकिस्तान तक, ईरान के पड़ोसी डरे हुए हैं। चूंकि इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, इसलिए वे ईरान के जवाबी हमले के निशाने पर आ सकते हैं। भूमध्यसागरीय सामरिक अध्ययन फाउंडेशन के निदेशक पियरे रज़ौक्स के अनुसार, ईरान के पास मध्यम दूरी की मिसाइलें हैं जो हाइड्रोकार्बन हब, बिजली संयंत्रों और समुद्री जल संयंत्रों को नष्ट कर सकती हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल तक पहुंच जाती है (जो फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से नहीं हुआ है), तो इससे दुनिया भर में महंगाई फिर से बेकाबू हो सकती है। तेल की बढ़ती कीमतें इस साल के अंत में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति ट्रंप को नुकसान पहुंचा सकती हैं, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी मतदाताओं से सस्ती ऊर्जा का वादा किया है। भारत पर असर को विस्तार से समझिए अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए इस सैन्य हमले का भारत पर बहुत गहरा और बहुआयामी असर पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए मध्य पूर्व में कोई भी अस्थिरता सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापक आर्थिक स्थिरता को चुनौती देती है। इस भू-राजनीतिक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला संभावित असर- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत अगर $100 प्रति बैरल के पार जाती है, तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की रिफाइनिंग लागत में भारी वृद्धि होगी। यदि सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती करके इस झटके को खुद नहीं सहती है, तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में प्रति लीटर ₹5 से ₹10 तक का उछाल आ सकता है। बता दें कि यह महज अनुमान है। सरकार की ओर से कुछ भी आदेश नहीं आया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूसी तेल का लाभ उठाया था, लेकिन यदि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो माल ढुलाई और बीमा लागत इतनी बढ़ जाएगी कि कोई भी रियायती तेल अंततः महंगा ही पड़ेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डीजल की कीमतें बढ़ने से देश भर में माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों, एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों, फलों और सब्जियों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे खुदरा महंगाई दर (CPI) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर जा सकती है।  

ईरान संकट गहराया: बिगड़ते हालात पर भारत का अलर्ट, नागरिकों को तत्काल निकलने की सलाह

तेहरान ईरान में विरोध प्रदर्शन के चलते हालात बेकाबू हो गए हैं। अब तक इन प्रदर्शनों में दो हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। बिगड़ते हालात के बीच भारत ने ईरान में रह रहे अपने लोगों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिक- टूरिस्ट, बिजनेसमैन, छात्र आदि से देश छोड़ने के लिए कह दिया है। दूतावास ने कहा है कि वे कमर्शियल फ्लाइट्स समेत उपलब्ध ट्रांसपोर्ट के साधनों का इस्तेमाल करके ईरान छोड़ दें। यह फैसला बदलती स्थिति को देखते हुए लिया गया है।   दूतावास ने ईरान में सभी भारतीय नागरिकों और PIO को सावधानी बरतने की सलाह दी है, और उनसे उन इलाकों से दूर रहने को कहा है जहां विरोध प्रदर्शन या धरने हो रहे हैं। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे ईरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और किसी भी नई जानकारी के लिए स्थानीय मीडिया रिपोर्ट पर नजर रखें। दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपने इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स तैयार रखने का आग्रह किया है। एडवाइजरी में कहा गया है, "ईरान में सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने यात्रा और इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स, जिसमें पासपोर्ट और आईडी शामिल हैं, अपने पास तैयार रखें। इस संबंध में किसी भी सहायता के लिए उनसे भारतीय दूतावास से संपर्क करने का अनुरोध किया जाता है।"