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जहांगीर खान का नया वीडियो चर्चा में, कभी कान पकड़ते तो कभी हाथ जोड़कर दिखे नेता

 कोलकाता पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर खान एक बार फिर सुर्खियों में हैं. पुलिस की मौजूदगी में उनकी परेड का वीडियो वायरल है. सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे वीडियो में जहांगीर खान नंगे पैर दिखाई दे रहे हैं. उनकी कमर में रस्सी बंधी है और चलते-चलते वह कभी हाथ जोड़ते नजर आते हैं तो कभी कान पकड़ते हुए दिखाई देते हैं।  एक के बाद एक वायरल हो रहे वीडियो जहांगीर खान से जुड़े वीडियो पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में हैं. इससे पहले भी उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. उस वीडियो में भी वह हाथ जोड़कर लोगों के बीच चलते दिखाई दे रहे थे. अब सामने आए नए वीडियो ने फिर से नई बहस शुरू कर दी है. वीडियो में दिख रहा है कि जहांगीर खान के आसपास पुलिसकर्मी मौजूद हैं. वह नंगे पैर सड़क पर चल रहे हैं और कई बार हाथ जोड़कर लोगों की ओर देखते हैं. कुछ सेकेंड के वीडियो में वह कान पकड़ते हुए भी नजर आते हैं. यही वजह है कि वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है और लोग इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।  फलता विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल उपचुनाव के दौरान सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई थी. यहां से टीएमसी ने जहांगीर खान को उम्मीदवार बनाया था. चुनाव प्रचार के दौरान लगातार आरोप लग रहे थे कि कुछ इलाकों में मतदाताओं पर दबाव बनाने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों के बाद चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं. इसी क्रम में यूपी के आईपीएस अजय पाल शर्मा की टीम भी क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही थी. चुनावी माहौल उस समय और गर्म हो गया जब अजय पाल शर्मा अपनी टीम के साथ जहांगीर खान के करिबियों के घर पहुंचे. वहां उन्होंने परिवार के सदस्यों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि मतदान के दौरान किसी मतदाता को डराने-धमकाने या मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।  उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ऐसी कोई शिकायत सामने आती है तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो गया. अजय पाल शर्मा की चेतावनी के बाद जहांगीर खान ने एक चुनावी सभा में ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया था. उन्होंने कहा, अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं. फिल्मी अंदाज में दिया गया यह बयान देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 

अपराधियों को सख्त संदेश! जहांगीर खान के गढ़ में पुलिस की अनोखी हाफ पैंट परेड

कलकत्ता एक समय जिस इलाके में तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान का दबदबा और खौफ माना जाता था, वहीं अब एक बिल्कुल अलग तस्वीर सामने आई है. गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जहागीर खान को हाफ पैंट पहनाकर सड़कों पर पैदल घुमाया, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मियों के बीच जहागीर खान सड़क पर चलते नजर आ रहे हैं. यह तस्वीर उस छवि से बिल्कुल उलट है, जिसमें कभी उनका रसूख और दबदबा चर्चा में रहता था और अब वही शख्स सरेआम इस तरह पेश किया जा रहा है।  भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान जहांगीर खान को उत्तरी बंगाल के पानीटंकी इलाके में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ़्तार किया गया था. खान ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली. इस सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होने से कुछ दिन पहले से ही खान को दक्षिण 24 परगना ज़िले के उनके निर्वाचन क्षेत्र में नहीं देखा गया था।  डायमंड हार्बर की एक अदालत ने सरकारी पक्ष की अपील पर, फाल्टा पुलिस थाने में खान के खिलाफ दर्ज सात प्राथमिकियों के सिलसिले में उन्हें पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 26 मई को खान को मिला अंतरिम संरक्षण हटा दिया था. खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना ज़िले के फाल्टा पुलिस थाने में सात प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।  जहांगीर के ब्लॉकबस्टर फिल्म 'पुष्पा: द राइज़' के 'झुकेगा नहीं' मशहूर डॉयलॉग को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई थी. उपचुनाव से पहले केंद्रीय बलों और पुलिस ने जहांगीर के घर पर छापा मारा था. इस कार्रवाई का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त और पश्चिम बंगाल में पुलिस पर्यवेक्षकों में से एक अजय पाल शर्मा ने किया था. इस घटना के बाद तृणमूल ने पुलिस पर्यवेक्षक के अधिकार पर सवाल उठाए थे. जहांगीर ने कहा था कि यदि वह पुलिस अधिकारी 'शेर' है, तो वह भी 'पुष्पा' है. वे चुनाव आयोग के कथित पक्षपाती व्यवहार के आगे नहीं झुकेंगे। 

करीबी की कॉल बनी सुराग, नेपाल सीमा क्षेत्र में किराये के मकान से पकड़ा गया जहांगीर खान

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक जहांगीर खान पर कानून का शिकंजा कस गया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जहांगीर को गिरफ्तार कर लिया है. जहांगीर को नेपाल की सीमा के समीप से पकड़ा गया है. जहांगीर फलता चुनाव में नाम वापसी का ऐलान करने के बाद से ही अंडरग्राउंड चल रहा था।  जहांगीर खान की गिरफ्तारी को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक वह नेपाल की सीमा से सटे इलाके में किराये का मकान लेकर अपने परिवार के साथ रह रहा था. एसटीएफ को आधा दर्जन से अधिक मामलों में जहांगीर की तलाश थी. एसटीएफ ने जहांगीर की गिरफ्तारी के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था।  पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने जहांगीर खान के करीबी सहयोगियों के फोन भी ट्रेस करना शुरू कर दिया. जहांगीर ने इसी बीच अपने एक करीबी सहयोगी से संपर्क किया और यही फोन कॉल एसटीएफ के लिए उस तक पहुंचने का रास्ता तैयार कर गई. एसटीएफ ने मोबाइल नेटवर्क के जरिये लोकेशन का पता लगा लिया. एसटीएफ ने तसल्ली से पहले जहांगीर खान का ठिकाना चिह्नित किया।  एसटीएफ जब जहांगीर खान के ठिकाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हो गई, 7 और 8 जून की रात छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. जहांगीर के खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली समेत कई गंभीर धाराओं में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. जहांगीर खान हालिया बंगाल चुनाव में फलता विधानसभा सीट से टीएमसी का उम्मीदवार था. जहांगीर खान ने सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।  आईपीएस अजयपाल शर्मा के साथ हुआ था विवाद फाल्टा में चुनाव के दौरान टीएमसी नेता जहांगीर खान पर ईवीएम में छेड़खानी के आरोप लगे थे। इसके अलावा चुनाव ऑब्जर्वर बनाए गए आईपीएस अजयपाल शर्मा की सख्ती के बाद उनके बयानों ने सुर्खियां बटोरी थीं। जहांगीर खान ने कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा सिंघम है तो वह पुष्पा हैं। चुनाव में गड़बड़ी की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने फाल्टा का चुनाव रद्द कर दिया था। 26 मई को फाल्टा में दोबारा मतदान हुआ। तब जहांगीर खान ने वोटिंग से दो दिन पहले खुद को चुनाव से अलग कर लिया। फाल्टा में बीजेपी की जीत हुई और जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे। जहांगीर खान को टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। फाल्टा में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर भी काफी हंगामा हुआ और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठे। जहांगीर खान के खिलाफ दर्ज थे ये केस     जहांगीर खान के खिलाफ जबरन वसूली, धमकी देने, राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने से जुड़े सात से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।     जहांगी इन सभी मामलों में लगातार फरार चल रहा था।     पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही थी।     स्थानीय स्तर पर प्रभाव और दबदबे के कारण जहांगीर खान को लोग ‘फाल्टा का पुष्पा’ भी कहकर बुलाते थे। खुद को बताया था पुष्पा बता दें कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी को पहली बार पश्चिम बंगाल में सफलता मिली। सत्ता संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने फाल्टा में चुनाव प्रचार भी किया। प्रचार के दौरान उन्होंने जहांगीर खान को चुनौती देते हुए कहा था कि जनता अब 'पुष्पा' को हराएगी। बता दें कि चुनाव के दौरान जहांगीर खान ने आईपीएस अजयपाल शर्मा को ललकारते हुए कहा था कि अगर वह सिंघम हैं तो हम भी पुष्पा हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन बुधवार को भी शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी उम्मीदवार के साथ रोड शो किया। फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को मतदान होगा और 24 मई को वोटों की गिनती होगी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने जहांगीर खान को फलता चुनाव तक के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी थी. जहांगीर ने फिर हाईकोर्ट का रुख कर इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस बार उसे झटका दे दिया. जहांगीर खान ने फलता चुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद से ही वह अंडरग्राउंड चल रहा था।  नतीजों के बाद हुए गायब पश्चिम बंगाल में 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही राजनीतिक समीकरण बदल गए थे। इसके बाद 21 मई तक जहांगीर खान पूरी तरह से परिदृश्य से ‘गायब’ हो चुके थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने चुनाव से ठीक दो दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया था। नाम वापस लेने के बाद से ही वे लगातार पुलिस की टीम को चकमा देकर भाग रहे थे। आखिरकार उनकी यह फरारी आज सुबह नेपाल सीमा के पास हमेशा के लिए समाप्त हो गई। वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप चुनावी प्रक्रिया के दौरान एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई अवैध गतिविधियों के आरोप थे। उन पर सरकारी बीएलओ को डरा-धमकाकर अपने पक्ष में प्रभावित करने का बेहद गंभीर आरोप लगा था। इसके अलावा उन्होंने वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए मृतकों के नाम भी सूची में शामिल करवाए थे। इन सभी जालसाजियों के सबूत सामने आने के बाद से ही पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इन हरकतों ने चुनाव की पूरी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। अजय पाल शर्मा की तैनाती इलाके में जहांगीर खान द्वारा लोगों को धमकाने और डराने के आरोपों पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं इन घटनाओं के खिलाफ बहुत मजबूती से अपनी आवाज उठाई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजय पाल शर्मा को नियुक्त किया। उन्हें विशेष पर्यवेक्षक के रूप में जिम्मेदारी सौंपकर डुंडी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में भेजा गया था। इस नियुक्ति का उद्देश्य इलाके में पूरी तरह से कानून व्यवस्था बहाल करना था। मशीनों पर टेप और दोबारा चुनाव फालता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दिन बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली और अराजकता देखने को मिली थी। वोटिंग के दौरान ही कई ईवीएम मशीनों पर सेलोटेप चिपकाए जाने की चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई थीं। इस … Read more

तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान STF के शिकंजे में, सीमा क्षेत्र से हुई गिरफ्तारी

कोलकत्ता  फालता से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को राज्य पुलिस की STF ने गिरफ्तार किया है। उन्हें आज सुबह नेपाल बॉर्डर इलाके से गिरफ्तार किया गया है। काफी दिनों से फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया है। जहांगीर खान पर लगे थे कई आरोप बंगाल के चुनावी नतीजे आने के बाद से जहांगीर फरार था। उसकी तलाश जारी थी। आखिरकार आज एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। चुनाव से पहले एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई आरोप लगे थे। उन पर बीएलओ को प्रभावित करने और मृतकों के नाम सूची में जोड़ने का आरोप था। जहांगीर खान की गिरफ्तारी किस जगह से और कब की गई, इस संबंध में अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जहांगीर खान की गिरफ्तारी के संबंध में अधिक जानकारी साझा कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक जहांगीर खान फलता विधानसभा सीट के लिए हाल ही में हुए चुनाव के बाद से लापता चल रहा था।  पश्चिम बंगाल पुलिस और एसटीएफ को कई मामलों में जहांगीर खान की तलाश थी. जहांगीर खान के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं. एसटीएफ ने जहांगीर खान को पकड़ने के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया. जहांगीर खान के एक सहयोगी का फोन जब ट्रैक किया गया, एसटीएफ जहांगीर खान तक पहुंच गई।  लोगों को धमकाने का भी आरोप भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं उनके खिलाफ आवाज उठाई थी। इसके बाद चुनाव से पहले इलाके में धमकाने के आरोप भी लगे। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुठभेड़ विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में डुंडी पुलिस स्टेशन भेजा था। बता दें कि दक्षिण 24 परगना की फलता सीट से जहांगीर खान टीएमसी के उम्मीदवार थे। चुनाव के वक्त उनपर हिंसा और लोगों को धमकाने का आरोप लगा था। चुनाव में गड़बड़ियों की शिकायत के बाद इस सीट पर दोबारा चुनाव हुआ और बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की। वहीं जहांगीर खान पहले ही हथियार डाल चुके थे। चुनाव में भी वह चौथे नंबर पर खिसक गए। उनपर फलता थाने में धमकी देने, जबरन वसूली, हिंसा, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने समेत सात केस दर्ज हुए थे। वह चुनाव के बाद से ही फरार थे। वहीं एसटीएफ उनकी तलाश में जुटी थी।

मतदान से पहले बंगाल की राजनीति गरमाई, फलता सीट को लेकर कोर्ट पहुंचे जहांगीर खान

 कोलकाता पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता सीट पर रीपोलिंग से महज 72 घंटे पहले टीएमसी उम्मीदवार ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए अग्रिम राहत की मांग की है. जहांगीर खान का आरोप है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश के तहत कई झूठी FIR दर्ज कराई गई हैं. इन्हीं मामलों के चलते उन्होंने अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया है।  जहांगीर ने अपनी याचिका में कहा कि वह फलता विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं और क्षेत्र में उनका चुनाव प्रचार अंतिम दौर में है. उम्मीदवार का स्पष्ट आरोप है कि उनके खिलाफ जानबूझकर कई झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराए गए हैं, ताकि उन्हें चुनाव प्रक्रिया से दूर किया जा सके. इसी चुनावी दबाव और गिरफ्तारी के डर के चलते उन्होंने अपनी स्वतंत्रता और सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत की शरण ली है।  TMC उम्मीदवार की ओर से वरिष्ठ वकील किशोर दत्ता ने कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित किया और तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया. बताया जा रहा है कि इस याचिका पर आज दोपहर 2:00 बजे सुनवाई होने की संभावना है।  आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल के फलता में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान हुआ था, जहां कई केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं थीं. इसके बाद चुनाव आयोग ने फिर से मतदान कराने का आदेश दिया था।  चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, फलता विधानसभा के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक री-पोलिंग कराई जाएगी. इसमें सहायक मतदान केंद्र भी शामिल रहेंगे. पूरी प्रक्रिया एक साथ कराई जाएगी, ताकि हर बूथ पर समान माहौल बना रहे और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।  आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत रखी जाए और हर केंद्र पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो. री-पोलिंग खत्म होने के बाद मतगणना 24 मई 2026 को की जाएगी।