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RJD-माले के बाद हेमंत सोरेन का अलग रुख, परिमल नथवानी की जीत ने INDIA गठबंधन की केमिस्ट्री बिगाड़ी

रांची  झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में 'इंडिया ब्लॉक' की कलाई खुल गई. इंडिया ब्लॉक के पास पूरे वोट होने के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को करारी मात खानी पड़ी है. वहीं, नंबर गेम में कमजोर होने के बाद भी बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी राज्यसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे।  राज्यसभा चुनाव के नतीजे सिर्फ दो सांसदों के चुनाव का परिणाम नहीं है. ये विधानसभा के भीतर राजनीतिक रिश्तों, गठबंधन प्रबंधन, भरोसे और रणनीतिक कौशल की भी परीक्षा थी. 56 विधायकों के साथ इंडिया ब्लॉक के पास राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने के लिए जरूरी संख्या मौजूद थी, लेकिन उसके बाद भी एक ही सीट जीत सकी और एक पर हार का सामना करना पड़ा है।  झारखंड में इंडिया ब्लॉक का जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी, माले और लेफ्ट हिस्सा है और सत्ता में भी है. कांग्रेस ने अपने इन्हीं सहयोगियों के सहारे राज्यसभा चुनाव जीतने का तानाबाना बुना था, पर आरजेडी और माले ही नहीं बल्कि हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम ने खेला कर दिया.  झारखंड में इंडिया गठबंधन कहीं अब टूट न जाए?  झारखंड में जेएमएम और नथवानी जीते झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में उतरे थे. जेएमएम से बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा तो निर्दलीय तौर पर परिमल नथवानी उम्मीदवार थे. नथवानी को बीजेपी सहित एनडीए का समर्थन था. 56 विधायकों के साथ इंडिया गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या थी जबकि एनडीए के 24 विधायकों के साथ नथवानी को चार विधायकों के वोट की अतरिक्त जुगाड़ थी।  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर विधायकों की बैठकें हुईं, मॉक पोल कराया गया, विधायकों को मतदान की तकनीकी भी सिखाई गई और सार्वजनिक रूप से एकजुटता का दावा किया गया, लेकिन नतीजों ने इन सारे दावे को पोल खोल दी. इंडिया ब्लॉक के विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस के प्रणव झा को मात खाना पड़ा. राज्यसभा चुनाव में जेएमएम प्रत्याशी बैजनाथ राम और बीजेपी समर्थित परिमल नथवानी जीतने में कामयाब रहे।  मंत्री का ओवर कॉन्फिडेंस वोटिंग के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पूरी तरह कॉन्फिडेंट थे कि एक सीट तो कांग्रेस उम्मीदवार को ही मिलेगी. एनडीटीवी के रिपोर्टर ने जब इरफान अंसारी से कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की जीत वाले उनके दावे को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वे कभी गलत नहीं बोलते. रिजल्ट आने में अब कितने ही घंटे ही बचे हैं. कांग्रेस जीत जाएगी उसके बाद आप खुद हमारे उम्मीदवार से मिल लेना।  60 वोट तक का आंकड़ा पार कर लिया मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि वोटिंग हो चुकी है. हम लोग 61 वोटों तक जा रहे थे, हमें लगता है कि हमने 60 वोट तक का आंकड़ा पार कर लिया है. बीजेपी के हताश और निराश लोग यहां से निकल गए, क्यों कि बीजेपी यहां कहीं भी नहीं है. लेकिन इसके बाद भी बीजेपी ने हमको बहुत तंग किया. वोटिंग का  परिणाम इरफान अंसारी की सोच के एकदम उलट आया. चुनाव के नतीजों ने पार्टी ही नहीं सभी को चौंका दिया।  कांग्रेस को आरजेडी और माले का धोखा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार ने इंडिया ब्लॉक की कलाई खोलकर रख दी है. क्या इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने वास्तव में कांग्रेस का साथ नहीं दिया? वहीं, अगर सहयोगियों ने साथ दिया तो फिर वोट कहां गए? झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू कहते हैं कि आरजेडी और माले के व‍िधायकों ने हमारे साथ धोखा कर द‍िया. उन्‍होंने हमारे कैंड‍िडेट को वोट नहीं दिया।  के राजू कहते हैं कि कांग्रेस के सभी 16 विधायोंके वोट सुरक्षित रहे, जेएमएम ने 4 वोट दिए और कांग्रेस को कुल 20 वोट मिले. यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवार ने पैसे का इस्तेमाल किया. हमारे गठबंधन के साथियों ने साथ नहीं दिया. इंड‍िया अलायंस के सभी सहयोगी पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहते, तो परिणाम अलग हो सकता था।    कांग्रेस के दावे को मानें तो उसके 16 विधायक एकजुट रहे और जेएमएम के अतिरिक्त वोट भी उसे मिले हैं. कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी प्रणव झा की हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की मजबूती का दावा करने वाले सहयोगी दलों को अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए. ऐसे में सवाल राजद और माले पर जाता है।  क्या सोरेन ने भी कांग्रेस के साथ खेला किया  झारखंड विधानसभा का गण‍ित देखें तो 81 सीटों वाले सदन में  जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और लेफ्ट के दो विधायक हैं. इस तरह कुल 56 वोट इंडिया ब्लॉक के बनते हैं, जिसमें जेएमएम की जीत के बाद भी कांग्रेस को 20 वोट ही मिले हैं. कांग्रेस और माले के विधायक को मिलाकर तो 6 वोट बनते हैं, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 8 वोट कम मिले है।  हेमंत सोरेन की पार्टी के उम्मीदवार 28 वोट से जीत सकते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें 30 वोट सिक्योर किया. इस तरह से दो वोट ज्यादा रखा, जिसका नतीजा रहा कि कांग्रेस के वोट कम हो गए. आरजेडी और माले का वोट कांग्रेस को मिल भी जाता तो हार तय थी।  इंडिया गठबंधन के पास 56 का आंकड़ा था, तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा के जीत का वोट का ख्याल क्यों नहीं रखा फैक्ट यह है कि जीत के लिए 28 वोट चाहिए थे, लेकिन सोरेन ने अपने उम्मीदवार बैजनाथ राम के लिए 30 वोट सुरक्षित कर लिए. झामुमो ने जरूरत से 4 वोट ज्‍यादा लिए, जबकि कांग्रेस सिर्फ 20 वोटों पर सिमट गई. ऐसे में साफ है कि कांग्रेस की हार में जेएमएम भी कहीं न कहीं गेम कर गई है।  क्या झारखंड में टूट जाएगा गठबंधन  कांग्रेस जहां हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहरा रही है तो दूसरी ओर आरजेडी-माले का कहना है कि उन्होंने गठबंधन धर्म निभाया और कांग्रेस को अपने भीतर झांकना चाहिए. ऐसे में सच्चाई जो भी हो, लेकिन एक तथ्य निर्विवाद है कि महागठबंधन में समन्वय नहीं था. यही कारण है कि परिणाम आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।  राजनीति में हमेंशा परिणाम ही सबसे बड़ा प्रमाण माना … Read more

सीटें, कई दावेदार: झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर बढ़ी हलचल, गठबंधन गणित पर टिकी नजरें

रांची  झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। राज्य से राज्यसभा की दो सीटें खाली होने जा रही हैं, जिन पर सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। इन सीटों को लेकर सत्ता पक्ष में भी अंदरूनी खींचतान के संकेत मिल रहे हैं, जबकि भाजपा सीमित संख्या के बावजूद मुकाबले को रोचक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत मान रहा है। पार्टी का मानना है कि राज्य की राजनीति में उसकी प्रमुख भूमिका के मद्देनजर उसे अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हालांकि, यह राह इतनी आसान नहीं है। झामुमो को इन दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के सहयोग की आवश्यकता होगी। गठबंधन की मजबूती और आपसी तालमेल इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव कम अहम नहीं है। असम विधानसभा चुनाव में तालमेल की कमी के कारण पार्टी पहले से ही असहज स्थिति में है। ऐसे में झारखंड में राज्यसभा सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ना उसके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। पार्टी के भीतर यह संदेश देने की कोशिश होगी कि वह गठबंधन में बराबरी की हिस्सेदार है और अपने राजनीतिक हितों से समझौता नहीं करेगी। भाजपा की मौजूदगी से रोमांचक होगा चुनाव, रेस में सीता सोरेन विपक्षी भाजपा भी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं दिख रही है। भले ही पार्टी के पास अपने दम पर जीत के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन सहयोगी दलों आजसू पार्टी, जदयू और लोजपा के साथ मिलाकर उसके पास 24 वोट हैं। ऐसे में यदि भाजपा चार अतिरिक्त वोटों का इंतजाम कर लेती है तो वह अपने प्रत्याशी को जीत दिलाने की स्थिति में आ सकती है। यही कारण है कि भाजपा संभावित क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक समर्थन की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा की ओर से सीता सोरेन का नाम चर्चा में है। यदि उन्हें मैदान में उतारा जाता है तो चुनाव दिलचस्प हो सकता है। आंकड़ा गठबंधन के पक्ष में संख्या बल के लिहाज से देखें तो राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को निर्धारित 28 वोटों की आवश्यकता होगी। सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दलों झामुमो, कांग्रेस, राजद, भाकपा माले को मिलाकर 56 विधायकों का आंकड़ा है, जो दो सीटों पर जीत के लिए पर्याप्त है, लेकिन इसके लिए गठबंधन के घटक दलों में आपसी तालमेल और विश्वास आवश्यक है।