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आधी रात का बवाल: JNU छात्रों की विरोध-यात्रा और उनके मुद्दों की पूरी कहानी

 नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का माहौल एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गया है. छात्रसंघ (JNUSU) ने कैंपस से मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन तक लॉन्ग मार्च निकालने का ऐलान किया था. इसका उद्देश्य रोहित एक्ट लागू करना और UGC के नियम के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करना था. लेकिन वहां पर देखते ही देखते माहौल बदल गया. मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस , RAF और CRPF की टीमें तैनात की गई थी. इस दौरान 50 से अधिक छात्रों को जबरन हिरासत में लिया गया. इससे जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं.   JNUSU के हंगामे का वीडियो आया सामने आरोप है कि वीडियो में JNUSU से जुड़े छात्र पुलिस के खिलाफ इकट्ठा करते, पुलिस को थप्पड़ मरते और सुरक्षाकर्मियों के साथ गाली गलौच और डंडा फेंकते नजर आ रहे हैं. एक वीडियो में PHD का छात्र नीतीश JNU की दीवार पर चढ़ कर छात्रों को उकसाता नजर आ रहा है, साथ ही पुलिस को सबक सिखाने का बात कर रहा है. श्रेय नाम का लड़का पुलिस को थप्पड़ मरता दिख रहा है. तीसरे वीडियो में छात्र JNU कैंपस के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ गाली-गलौच करते और RAF के जवान पर डंडा फेंकता नजर आ रहा है. दिल्ली पुलिस इन वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर रही है.   क्या है पूरा मामला? बता दें कि 26 फरवरी को JNUSU ने जेएनयू कुलपति की ओर से की गई जातिवाद टिप्पणियों, विश्वविद्यालय के कोष में कटौती, JNUSU पदाधिकारियों के निष्कासन और रोहित अधिनियम के साथ संशोधित यूजीसी नियमों को लागू करने की मांग को लेकर एक मार्च का आह्वान किया. इस दौरान सैकड़ों छात्रों के नियम का उल्लंघन करने पर दिल्ली पुलिस ने कुलपति के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग किया, जिसमें दर्जनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए. उनके शरीर पर चोटें आईं और खून बहने लगा. जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति, सचिव गोपिका और महासचिव दानिश के साथ-साथ एआईएसए की अखिल भारतीय अध्यक्ष नेहा और 50 अन्य छात्रों को 14 घंटे से अधिक समय तक पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 14 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार किए गए छात्रों में कॉमरेड अदिति, दानिश, गोपिका और नेहा भी शामिल हैं.  छात्रों को बाहर आने की नहीं थी इजाजत  प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस, RAF और CRPF की टीमों की भारी तैनाती की गई थी. कैंपस के बाहर कई परतों में बैरिकेड्स लगा दिए और किसी भी छात्र को बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी. हालात तब बिगड़ी जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस लगातार छात्रों को पीछे की ओर धक्का दे रही थी जिसके बाद से विवाद और भी ज्यादा बढ़ गया.  घायल हुए कई पुलिसकर्मी वहां पर मौजूद महिला छात्रों पर भी बल का प्रयोग किया गया. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. पुलिस के मुताबिक, JNU छात्रसंघ ने शिक्षा मंत्रालय तक लॉन्ग मार्च का आह्वान किया था.  प्रशासन ने छात्रों को साफ तौर पर बताया था कि कैंपस के बाहर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है लेकिन बावजूद इसके 400 से 500 छात्र इकट्ठा हुए मार्च निकाल दिया.  

एफआईआर दर्ज, JNU में विवादित नारे पर छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान

नई दिल्ली जेएनयू के सबरमती ढाबा वाली वो सड़क जहां प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ गूंजे नारों ने लोकतंत्र की अभिव्यक्ति और मर्यादा के बीच की धुंधली लकीर को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है. प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि जिसे छात्र आजादी समझ रहे हैं वह कानून की नजर में नफरत की प्रयोगशाला है और अब इस प्रयोगशाला के किरदार कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहें. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जांच के आधार पर दोषी छात्रों को विश्वविद्यालय से तत्काल निलंबित होंगे. यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक एक्‍स हेंडल पर कहा, ‘किसी भी तरह की हिंसा, गैर-कानूनी हरकत या देश विरोधी गतिविधि को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस घटना में शामिल छात्रों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें तुरंत सस्पेंशन, निष्कासन और यूनिवर्सिटी से स्थायी रूप से बाहर निकालना शामिल है.’ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी. प्रशासन ने पुलिस को औपचारिक अनुरोध भेजकर इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करा दी है. प्रशासन के अनुसार 5 जनवरी 2020 की हिंसा की छठी बरसी मनाने के लिए करीब 30-35 छात्र सबरमती हॉस्टल के बाहर एकत्र हुए थे. लेकिन कार्यक्रम का स्वरूप तब बदल गया जब उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसलों के बाद वहां उकसाने वाले नारे लगने शुरू हो गए. प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट का अनादर और जेएनयू की आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है. इन छात्रों पर गिर सकती है गाज विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी शिकायत में कुछ प्रमुख छात्रों की पहचान की है, जिन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक रही है:    पहचाने गए छात्र: अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान और शुभम आदि.      गवाह: घटना के समय सुरक्षा निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार और गार्ड जय कुमार मीणा व पूजा मौके पर मौजूद थे. ‘नफरत की प्रयोगशाला’ बनाम अभिव्यक्ति का अधिकार जेएनयू प्रशासन का यह बयान कि “विश्वविद्यालयों को घृणा की प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा”, एक गहरे बदलाव की ओर इशारा करता है. यह कार्रवाई केवल नारों तक सीमित नहीं है: 1.      न्यायिक गरिमा का प्रश्न: प्रशासन ने इसे केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि कोर्ट के फैसलों के प्रति ‘अनादर’ माना है. यह छात्रों की सक्रियता को कानूनी कटघरे में खड़ा करता है. 2.      कैंपस की छवि और सुरक्षा: प्रशासन का मानना है कि इस तरह की नारेबाजी से परिसर की शांति, सौहार्द और सुरक्षा माहौल को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है. 3.      अभिव्यक्ति की सीमाएं: प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मौलिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रविरोधी हरकतों या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह घटना दर्शाती है कि जेएनयू में छात्र राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ प्रशासन और छात्रों के बीच का संवाद पूरी तरह कानूनी प्रक्रियाओं (FIR और निलंबन) में तब्दील हो चुका है. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विश्वविद्यालय नवाचार और नए विचारों के केंद्र हैं, और उन्हें किसी भी कीमत पर अराजकता का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा.

जेएनयू परिसर में विवादित नारेबाजी: पीएम मोदी–अमित शाह को लेकर ‘कब्र खुदेगी’ के नारे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगा केस में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में जमकर नारेबाजी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कैंपस में जमकर नारेबाजी हुई। प्रदर्शन के कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में लेफ्ट स्टूडेंट्स 'मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' जैसे आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर विरोध दर्ज किया। उन्होंने ट्वीट किया 'मोदी शाह की कब्र खुदेगी जेनयू की धरती पर…' शरजील उमर को जमानत नहीं मिलने के बाद ये नारे जेएनयू में टुकड़े इकोसिस्टम द्वारा लगाए गए। यह शहरी नक्सलियों का भारत विरोधी समूह है।' पूनावाला ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि ‘कांग्रेस इकोसिस्टम के स्टूडेंट्स अब धमकी दे रहे हैं। वे नारे लगा रहे थे कि जेएनयू कैंपस पर मोदी-शाह की कब्र खुदेगी। ऐसे नारे हमने कांग्रेस के कार्यक्रम में भी सुने हैं। सोचिए जिन लोगों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आरोप तय किए हैं जिन्हें प्रथम दृष्टया आतंकवाद के लिए जिम्मेदार पाया है। एक साल तक उनको जमानत नहीं मिल सकती। ऐसे लोगों के बचाव में आते-आते आज देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को मारने की धमकी दी जा रही है।’ वहीं एबीवीपी के उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने कहा, 'कल जेएनयू में 'एबीवीपी-आरएसएस की कब्र खुदेगी' के नारे लगाए गए। जेएनयू में इस तरह की नारेबाजी आम बात हो गई है। एबीवीपी-आरएसएस के करोड़ों कार्यकर्ता हैं। क्या वे करोड़ों कार्यकर्ताओं के करोड़ों कब्र खोदने की बात कर रहे हैं? हमने यह भी देखा कि न्यूयॉर्क के मेयर ने एक 'आतंकवादी' को पत्र लिखकर उसे रिहा करने की बात कही। हम उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं।' आपत्तिजनक नारेबाजी पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा ‘शरजिल इमाम और उमर खालिद के समर्थन में जिस तरह जेएनयू में नारे लगे है, वाह निंदनीय है। छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगाए गए जो बेहद निंदनीय है। जेएनयू में हुआ यह घटनाक्रम विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है। ऐसे लोगों की हिम्मत इसलिए बढ़ती है क्योंकि दिल्ली विधानसभा में ऐसे विधायक है जो ऐसे छात्रों को समर्थन दे रहे हैं। पीएम द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं नीति के बारे में बोला जा सकता है लेकिन देश के खिलाफ जाकर पीएम और गृह मंत्री को धमकी देना बेहद निंदनीय है।’