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MP राज्यसभा चुनाव में बड़ा सस्पेंस, कमलनाथ या किसी बाहरी चेहरे पर दांव लगाएगी कांग्रेस?

भोपाल  मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हैं। कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है। यह सीट दिग्विजय सिंह की है। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से मना कर चुके हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि पूर्व सीएम कमलनाथ को राज्यसभा भेजा सकता है। बुधवार को नई दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है। इसके बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा की तीन सीटें हो रही हैं खाली मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें बीजेपी की हैं। जनवरी में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने घोषणा की थी कि वह मध्य प्रदेश से जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की एकमात्र सीट खाली कर देंगे। उम्मीदवारों की है लंबी सूची प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के अनुसार जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए एआईसीसी के पास उम्मीदवारों की एक लंबी सूची है। इस सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, पूर्व राज्यसभा सांसद बी के हरिप्रसाद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। कांग्रेस की आएंगी पांच सीटें वहीं, इस रेस में कमलनाथ का नाम शामिल होता है तो इससे चयन प्रक्रिया आसान नहीं होगी, क्योंकि राज्यसभा की कुल 26 सीटें खाली होने के बावजूद कांग्रेस के हिस्से में केवल पांच सीटें ही आएंगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की एक सीट खाली हो रही है। ऐसे में यह काफी महत्वपूर्ण है। कांग्रेस में नहीं मिला कोई पद दरअसल, 2022-23 में कमलनाथ को कथित रूप से एआईसीसी अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव मिला था। 2024 में कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ को बीजेपी में जाने की चर्चा हुई थी। इसके बाद से कांग्रेस में उन्हें कोई पद नहीं मिला है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से सांसद रह चुके हैं। अपनी सीट उन्होंने बेटे के लिए छोड़ दी थी लेकिन 2024 में नकुलनाथ चुनाव हार गए। माना जा रहा है प्रबल दावेदार वहीं, दिग्विजय सिंह के बाद मध्य प्रदेश के कमलनाथ ही कांग्रेस में ऐसे कद्दावर नेता हैं, जिनके नाम पर उम्मीद की जा सकती है कि क्रॉस वोटिंग न हो। इसी साल मार्च में हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस के लिए क्रॉस-वोटिंग एक बड़ी समस्या बनकर उभरी थी। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों का दावा है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को शायद ही 61 विधायकों का समर्थन मिल पाए। दो विधायक हैं वोट से वंचित मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है। तीसरी एमलए निर्मला सप्रे के खिलाफ हाईकोर्ट में दल बदल का मामला लंबित है। ऐसे में हो सकता है कि वह भी वोट न दें। एमपी से राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 58 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पास इस आंकड़े से सिर्फ तीन वोट अधिक हैं। इसलिए स्थिति नाजुक है। बीजेपी के पास हैं 165 विधायक वहीं, मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 165 विधायक हैं। ऐसे में दो सीटों पर उनकी जीत पक्की है। इसके बाद उनके पास 49 विधायक बचते हैं। राज्य बीजेपी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि अगर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी होती है तो बीजेपी तीसरी सीट पर चुनाव करवाने का मौका भुनाने से पीछे नहीं हटेगी।

कमलनाथ का बड़ा बयान: भारत में पेट्रोल-डीज़ल और गैस की कोई कमी नहीं है

भोपाल  कांग्रेस नेता कमलनाथ के देश में LPG गैस क्राइसिस पर दिए गए बयान के बाद अब BJP ने कांग्रेस और राहुल गांधी के एलपीजी क्राइसिस को लेकर घेरना शुरू कर दिया है। सबसे आगे केंद्रीय मंत्री सिंधिया आए, जिन्होंने कहा कि कमलनाथ ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों की पोल खोल दी है, शर्म आना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने लिखा है कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ जी ने भी स्वयं कह दिया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है' 'झूठ और भ्रम के बलबूते जनता को इतने दिनों तक गुमराह कर रही कांग्रेस को अब शर्म आना चाहिए। अब समय है कि कांग्रेस जनता में डर और विश्वास पैदा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद कर दे।' क्या है मामला, ऐसे समझें     कमलनाथ ने गैस क्राइसिस पर बयान दिया था     उन्होंने कहा था, गैस की ऐसी कोई कमी नहीं है     उनका बयान पार्टी लाइन से इतर आया था     भाजपा ने तत्काल इसे कांग्रेस लपक लिया     सिंधिया ने कहा, कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही     कांग्रेस को शर्म आना चाहिए कमलनाथ का वीडियो भी शेयर किया है मंत्री सिंधिया ने भाजपा मध्य प्रदेश के X की पोस्ट को शेयर किया था, जिसमें पार्टी ने लिखा था कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी राहुल गांधी द्वारा एलपीजी को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा की पोल खोल दी' इसमें कमलनाथ का छिंदवाड़ा का वह वीडियो भी लगाया गया था, जिसमें कमलनाथ ने कहा था कि, गैस की कमी नहीं है, सिस्टम में गड़बड़ी है और एक भ्रम फैलाया गया है। कमलनाथ ने LPG पर क्या कहा था दरअसल बीते रोज कमलनाथ छिंदवाड़ा आए थे। उन्होंने हेलीपेड पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि, 'गैस की कोई कमी नहीं है, यह अव्यवस्था है, लेकिन माहौल बना दिया कि कमी है।' उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उनका यह बयान पार्टी लाइन से हटकर दिया है। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में एलपीजी और पेट्रोलियम क्राइसिस को लेकर MP सहित पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन कर रही है। जबकि कमलनाथ कह रहे हैं कि ऐसी कोई कमी नहीं है। BJP ने मौके को तत्काल लपक लिया कमलनाथ का 'गैस ऐसी कोई कमी नहीं है' बयान को BJP ने तत्काल पलक लिया और इसके 'कांग्रेस के गैस की क्राइसिस कैंपेन' की हवा निकालने के लिए उपयोग कर रही है। भाजपा इस मौके को कतई छोड़ने वाली नहीं है। MP से लेकर दिल्ली तक भाजपा ने इसको लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

मताधिकार पर हमला! भोपाल में फर्जी आवेदन से वोटरों को हटाने की कोशिश – कमलनाथ

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि फर्जी आवेदनों के जरिए मतदाताओं के मताधिकार को छीनने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। राजधानी भोपाल में नाम कटवाने के लिए फर्जी आवेदनों का मामला सामने आने पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर फर्जीवाडा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।  मध्य प्रदेश में ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं जहां लोगों ने दूसरों के नाम से फॉर्म सात भरके मतदाता सूची में मौजूद नाम काटने के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि अकेले भोपाल में ही इस तरह के नौ हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। फॉर्म सात के जरिए इस तरह से नाम कटने के फर्जी आवेदन देश के मतदाता के अधिकार को छीनने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा की गई व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि जब चुनाव आयोग द्वारा तैनात बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता की जांच कर रहे हैं तो उन्हीं को सुनिश्चित करना चाहिए कि कौन वहां रह रहा है या नहीं। उन्होंने आगे कहा कि गैर सरकारी व्यक्तियों को किसी का भी नाम कटवाने का आवेदन देकर चुनाव आयोग ने वैध मतदाता के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। वोट चोरी के षड्यंत्र को हर हाल में खत्म करने की जरूरत है। दरअसल, राजधानी में लगभग नौ हजार ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें फर्जी आवेदनों के जरिए मतदाता के नाम काटने को कहा गया है। इसे प्रशासन ने भी गंभीरता से लिया है और पूरे मामले की जांच की बात कही है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर एक तरफ चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं, वहीं वोट चोरी को लेकर भाजपा को घेरने की कोशिश की है।

पूर्व CM कमलनाथ बोले, सिंधिया को लगा दिग्विजय सरकार चला रहे थे, इसलिए बगावत

भोपाल  2020 में मध्य प्रदेश कांग्रेस सरकार गिरने की वजह का खुलासा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पांच साल बाद किया है. कमलनाथ ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने कांग्रेस के 22 विधायकों को तोड़कर सरकार गिरा दी. इस बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है. दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने हाल ही में MPTAK के पॉडकास्ट में बताया कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मतभेद विचारधारा (आइडियोलॉजिकल) नहीं, बल्कि व्यक्तिगत (पर्सनालिटी) थे. वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय ने बताया कि उन्होंने कई बार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश की. यहां तक कि एक उद्योगपति के घर डिनर मीटिंग आयोजित कर कई मुद्दों पर सहमति बनाई गई और एक 'विशलिस्ट' तैयार हुई, जिसमें ग्वालियर-चंबल संभाग से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का आश्वासन भी था. दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने भी उस लिस्ट पर दस्तखत किए थे, लेकिन बाद में उसका कोई पालन नहीं हुआ. इसी वजह से विवाद बढ़ा और सरकार गिर गई. दिग्विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने सरकार गिरने की चेतावनी पहले ही दी थी, न कि भरोसा दिलाया था कि सरकार बचेगी.  अब दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई है. कमलनाथ ने भी कड़ा पलटवार किया है. कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, ''मध्य प्रदेश में 2020 में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर हाल ही में कुछ बयानबाजी हुई है. मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फायदा नहीं. लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं. इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिराई.'' 2018 में सरकार बनी, 2020 में गिरी बता दें कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी, जबकि BJP को 109 सीटें मिली थीं. बसपा (2), सपा (1) और निर्दलियों (4) के समर्थन से कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी. लेकिन डेढ़ साल बाद मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हो गए, जिसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और 20 मार्च 2020 को गिर गई.  BJP ने कहा- अब सच्चाई सामने है इस मुद्दे पर BJP ने भी प्रतिक्रिया दी. पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा, ''अब सच्चाई सामने है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार मिस्टर बंटाधार चला रहे थे. सरकार पर माफियाओं और भ्रष्टाचार का शिकंजा था. कुशासन और अव्यवस्था का बोलबाला था. इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश को बचाने और सुशासन व विकास की पटरी पर लाने के लिए भाजपा की स्थिर सरकार बनाई.''  BJP मीडिया प्रभारी ने यह भी आरोप लगाया कि कमलनाथ का बयान कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और दिग्विजय सिंह के प्रभाव को उजागर करता है. 

कानूनी मोर्चे पर राहत, पूर्व सीएम कमल नाथ को हाई कोर्ट से मिला सकारात्मक फैसला

इंदौर  मध्य प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप मामले की सीडी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ दायर जनहित याचिका गुरुवार को कोर्ट ने खारिज कर दी। एडवोकेट भूपेंद्रसिंह कुशवाह द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि नाथ ने खुद एक साक्षात्कार में कहा था कि उनके पास हनी ट्रैप मामले की सीडी है। मांग की गई थी कि नाथ को आदेश दिया जाए कि वे सीडी एसआईटी को उपलब्ध कराएं। याचिका निरस्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर याचिका दायर की है। किसी राजनेता के राजनीतिक बयान को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। प्रतिपरीक्षण का अवसर दिए बगैर प्रकरण में फैसला लेने के मामले में मप्र हाई कोर्ट ने सीजीएसटी को फटकार लगाई है। कोर्ट ने सीजीएसटी को आदेश दिया कि वह प्रकरण की दोबारा सुनवाई करे और प्रतिपरीक्षण का अवसर दे। एडवोकेट पीयुष पाराशर ने बताया कि पेपर ट्रेड लिंक के खिलाफ वर्ष 2023 में सीजीएसटी ने एक आदेश पारित किया था। इसमें सीजीएसटी और एसजीएसटी के 3.78 करोड़ रुपये की रिकवरी कंपनी पर निकाली गई थी। प्रकरण की सुनवाई के दौरान गवाहों के प्रतिपरीक्षण का अवसर नहीं दिया गया था। कंपनी ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका कंपनी ने यह बात बार-बार उठाई, लेकिन हर बार यह कहकर इसे खारिज कर दिया गया कि इससे केस के निराकरण में समय लगेगा। इस पर कंपनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कंपनी ने कोर्ट को बताया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार उन्हें गवाहों के प्रतिपरीक्षण का अवसर दिया जाना था, जो नहीं मिला। कोर्ट ने सभी पक्षकारों के तर्क सुनने के बाद कहा कि अपीलकर्ता को बहस और गवाहों के प्रतिपरीक्षण का अवसर दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने जनवरी 2023 में जारी आदेश को रद करते हुए कहा कि केस में दोबारा सुनवाई करें।