samacharsecretary.com

पाकिस्तान को भारत का सख्त संदेश, ख्वाजा आसिफ के बयान पर PoK का मुद्दा उठाकर दिया जवाब

 नई दिल्ली भारत ने  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया युद्ध संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. भारत ने कहा कि पीओके में अपनी नाकामियों को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान की ओर से ऐसी बयानबाजी की जा रही है. साथ ही भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हो रही कार्रवाई का मुद्दा भी उठायाव्।  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा, 'पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की टिप्पणियों को लेकर हमने रिपोर्ट्स देखी हैं. इस तरह के बयान पाकिस्तान की अपनी विफलताओं को छिपाने और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की हताश कोशिश हैं. हम इन मनगढ़ंत दावों को पूरी तरह खारिज करते हैं.' रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूदा हालात पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीतियों का नतीजा हैं।  उन्होंने कहा, 'पीओके में चल रहे घटनाक्रम पाकिस्तान की उस नीति का सीधा परिणाम हैं, जिसमें आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित करना और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक दमन शामिल रहा है.' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने पीओके में सरकारी विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति रोकी है, इंटरनेट सेवाएं बंद की हैं और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया है।  रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन घटनाओं में कई लोगों की जान भी गई है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस मामले में पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की मांग की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कृत्यों, गलत नीतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।  भारत की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की उस चेतावनी के तीन दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि सिंधु जल संधि को लेकर भारत की किसी कार्रवाई से पाकिस्तान की जल सुरक्षा प्रभावित होती है तो उनका देश सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है. एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा था, 'जिस क्षण हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, जिसमें पानी भी शामिल है, खतरे में है, हम भारत के खिलाफ युद्ध शुरू करेंगे. निश्चित रूप से करेंगे। 

पाकिस्तान में इतिहास पर बवाल: ख्वाजा आसिफ ने माना- हिंदू थे हमारे पूर्वज, किताबों में फैलाया गया झूठ

इस्लामाबाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने पाकिस्तान में पहचान और इतिहास को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आसिफ ने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तान के बच्चों को "गलत इतिहास" पढ़ाया जा रहा है और देश के लोग अपनी असली जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "हम पाकिस्तानी मुसलमान अपने हिंदू पूर्वजों से नफरत करते हैं. पाकिस्तान के आधे लोग झूठा दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे." उन्होंने कहा कि यह सोच जानबूझकर तैयार की गई ताकि पाकिस्तान की नई पीढ़ी अपनी सभ्यता की पहचान से कट जाए। ख्वाजा आसिफ ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में हिंदू शासकों को इतिहास से लगभग मिटा दिया गया. उन्होंने कहा, "हमने चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक को इतिहास की किताबों से हटा दिया क्योंकि वे हिंदू थे." उन्होंने आगे कहा, "मेरे पूर्वज हिंदू थे. क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?" आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान में पढ़ाई जाने वाली किताबें ऐसे लोगों ने लिखीं जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को एक खास मानसिकता में ढालने की कोशिश की। पाकिस्तानी समाज की सोच बदली गई! ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अमेरिका की लड़ाइयों में पाकिस्तान को इस्तेमाल करने के लिए समाज की सोच बदली गई और उसी हिसाब से इतिहास को पेश किया गया. उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे. आज पाकिस्तान में कई लोगों को यह तक नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक कौन थे। ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब वह पहले से ही अमेरिका और इजरायल के मुद्दे पर विवादों में घिरे हुए हैं. हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी। पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा- आसिफ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा था, "मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमें ऐसे किसी समझौते में शामिल होना चाहिए जो हमारी बुनियादी सोच से टकराता हो." उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान का पुराना रुख आज भी कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनता, तब तक इस्लामाबाद इजरायल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है. यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है. आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली. अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तान की सोच लंबे समय से नकारात्मक रही है और ऐसे में अमेरिका-ईरान या इजरायल से जुड़े मामलों में उसकी मध्यस्थता "समस्याओं से भरी" हो सकती है।

संसद में पाकिस्तान का कबूलनामा! रक्षा मंत्री बोले- अमेरिका ने किया फायदा, हमें छोड़ा मुश्किल में

 इस्लामाबाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में स्वीकार किया है कि अमेरिका ने अपने रणनीतिक हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और फिर उसे 'टॉयलेट पेपर से भी बदतर तरीके से फेंक दिया'. उन्होंने कहा कि अमेरिका की जंगों में शामिल होने का खामियाजा पाकिस्तान को भारी कीमत चुकाकर उठाना पड़ा. ख्वाजा आसिफ ने 1999 के बाद अफगानिस्तान में पाकिस्तान की दोबारा सक्रिय भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस वक्त इस्लामाबाद ने एक बार फिर वॉशिंगटन के साथ खड़े होने का फैसला किया, ताकि अमेरिकी समर्थन हासिल किया जा सके. उन्होंने साफ कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के लिए तबाही भरा साबित हुआ. 'जिहाद के नाम पर बड़ी गलती हुई' पाकिस्तान में वर्षों से गढ़ी गई आधिकारिक धारणाओं को खारिज करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अफगान युद्धों में पाकिस्तान की भागीदारी इस्लाम की रक्षा के लिए नहीं थी. उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि पाकिस्तानियों को जिहाद के नाम पर लड़ने और मरने भेजा गया, जो एक गलत फैसला था. ख्वाजा आसिफ ने यह भी बताया कि इन युद्धों को जायज ठहराने के लिए पाकिस्तान के शिक्षा पाठ्यक्रम तक में बदलाव किए गए और आज भी वे बदलाव पूरी तरह वापस नहीं लिए जा सके हैं. उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में सोवियत संघ के खिलाफ अफगान युद्ध धार्मिक कर्तव्य नहीं बल्कि अमेरिकी रणनीति का हिस्सा था. आसिफ के मुताबिक, रूस ने अफगानिस्तान पर इस तरह कब्जा नहीं किया था कि जिहाद का ऐलान जरूरी हो, इसके बावजूद पाकिस्तान उस युद्ध में कूद पड़ा. उन्होंने माना कि उस फैसले के दुष्परिणाम दशकों बाद भी देश भुगत रहा है. 'अमेरिका ने इस्तेमाल किया और छोड़ दिया' रक्षा मंत्री ने कहा कि 1999 के बाद अमेरिका के साथ फिर से खड़े होने की पाकिस्तान को बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी, जिससे देश आज तक पूरी तरह उबर नहीं सका है. उन्होंने पूर्व सैन्य शासकों जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने पाकिस्तान को ऐसी जंगों में झोंक दिया, जो उसकी नहीं थीं. संसद में बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान को 'टॉयलेट पेपर से भी बदतर' तरीके से इस्तेमाल किया गया. पहले जरूरत पड़ी तो साथ लिया गया और फिर बेरहमी से छोड़ दिया गया. 11 सितंबर 2001 के बाद के दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका के नेतृत्व वाली वॉर ऑन टेरर में तालिबान के खिलाफ मोर्चा लिया. हालांकि बाद में अमेरिका वहां से चला गया, लेकिन उस जंग के दीर्घकालिक दुष्परिणाम आज भी पाकिस्तान झेल रहा है. ख्वाजा आसिफ ने कहा, 'इस नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती.' उन्होंने इन फैसलों को अपरिवर्तनीय गलतियां करार देते हुए कहा कि इन्हीं कारणों से पाकिस्तान दूसरों की जंगों में एक मोहरा बनकर रह गया.