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नॉर्थ कोरिया की कमान दोबारा Kim Jong-un के हाथ, Vladimir Putin का खास संदेश

सोल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को राज्य मामलों के आयोग का अध्यक्ष पुनः चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के रिश्तों का भविष्य उज्जवल होगा। क्रेमलिन ने सोमवार को यह जानकारी दी। नॉर्थ की कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रविवार को हुए सुप्रीम पीपल्स असेंबली के पहले सत्र में किम को आयोग के सबसे ऊंचे पद पर फिर से नियुक्त किया गया। 2016 में देश की टॉप पॉलिसी गाइडेंस बॉडी के तौर पर कमीशन बनने के बाद से यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है। क्रेमलिन के टेलीग्राम चैनल पर पोस्ट किए गए एक मैसेज में पुतिन ने कहा, "प्रिय कॉमरेड किम जोंग उन, डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया के स्टेट अफेयर्स के चेयरमैन के तौर पर आपके पुनः चुने जाने पर मेरी दिल से बधाई स्वीकार करें।" उन्होंने आगे कहा, "रूस हमारे देशों के बीच दोस्ताना, सहयोगी रिश्तों को मजबूत करने में आपके निजी योगदान को बहुत महत्व देता है। हम स्वाभाविक रूप से मॉस्को और प्योंगयांग के बीच बड़ी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और बढ़ाने के लिए अपना करीबी सहयोग जारी रखेंगे। यह बेशक हमारे दोनों देशों के बुनियादी हितों को पूरा करता है।" रूस और नॉर्थ कोरिया हाल के वर्षों में अपने रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़े हैं। 2024 में एक रक्षा संधि की। न्यूज एजेंसी ने बताया कि नॉर्थ कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी लड़ाई में रूस का साथ देने के लिए सेना भी भेजी। इससे पहले, नॉर्थ कोरिया के लीडर किम जोंग-उन को पिछले महीने हुई रूलिंग पार्टी कांग्रेस के बाद सुप्रीम पीपल्स असेंबली (एसपीए) के पहले सेशन में 'स्टेट अफेयर्स कमीशन' का प्रेसिडेंट फिर से नियुक्त किया गया, यह जानकारी सरकारी मीडिया ने दी। कोरियन सेंट्रल न्यू एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि किम को 15वें एसपीए के पहले सत्र के पहले दिन स्टेट अफेयर्स कमीशन का प्रेसिडेंट फिर से अपॉइंट किया गया। केसीएनए के मुताबिक, बैठक के दौरान, जो योंग-वोन, जिन्हें किम के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता है, को भी एसपीए स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन चुना गया, जो संसद का सबसे बड़ा पद है, और उन्होंने चोई रयोंग-हे की जगह ली। नॉर्थ कोरिया आमतौर पर पार्टी कांग्रेस के बाद रबर-स्टैम्प पार्लियामेंट का एक सत्र बुलाता है ताकि कांग्रेस में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए जरूरी कानून बनाए जा सकें। यह नियुक्ति रविवार को एसपीए के पहले सत्र में की गई, जो इसके 15वें टर्म की पहली स्टेट अफेयर्स एक्टिविटी थी। प्रीमियर पाक थाए-सोंग ने अपना पद बरकरार रखा, जबकि पूर्व प्रीमियर किम टोक-हुन को पहला वाइस प्रीमियर नियुक्त किया गया, यह पद हाल ही में हुई बैठक में बनाया गया था। इस फेरबदल में, जो को स्टेट अफेयर्स कमीशन का उपाध्यक्ष भी नियुक्त किया गया, जबकि किम की ताकतवर बहन किम यो-जोंग को आयोग के सदस्य के पद से हटा दिया गया। किम की ताकतवर बहन, किम यो जोंग, देश की सबसे बड़ी लीडरशिप बॉडी, स्टेट अफेयर्स कमीशन के सदस्यों की केसीएनए लिस्ट से गायब थीं, जिस पर वह 2021 से काबिज थीं। उत्तर कोरिया के तीसरी पीढ़ी के नेता के तौर पर, किम ने 2011 में अपने पिता के निधन के बाद से न्यूक्लियर हथियारों से लैस देश पर शासन किया है। देश की स्थापना 1948 में उनके दादा, किम इल सुंग ने की थी।

किम जोंग उन ने अधिकारियों को गिफ्ट की स्नाइपर राइफल, बेटी ने भी दिखाया निशाना लगाना

फियोंगयांग उत्तर कोरिया की सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष पद पर चुने जने के बाद किम जोंग उन ने अपने शीर्ष अधिकारियों और कमांडरों को नई स्निपर राइफल गिफ्ट की हैं। एक समारोह के दौरान किम जोंग उन ने लोगों को राइफल का तोहफा दिया। वहीं उनकी बेटी राइफल से निशाना लगाती नजर आई। चर्चा है कि किम जोंग उन बेटी को ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते हैं। किम जोंग उन ने कहा कि राइफल गिफ्ट करना दिखाता है कि उनका अपने अधिकारियों पर पूर्ण विश्वास है। इसके अलावा वर्कर्स पार्टी के लिए वह पूरी तरह से ईमानदार हैं. हाल ही में किम की ब हन किम यो जोंग भी अमरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ काफी बयान दे रही थीं। ऐसे में उनको लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि एक बार फिर किम जोंग उन को ही वर्कर्स पार्टी का चीफ चुना गया। स्थानीय मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों में दिखाया गया कि किम यो जोंग के हाथ में भी राइफल है। बेटी किम जू ए को लेकर क्या है प्लान किम जोंग की बेटी की उम्र अभी 13 साल है। वैसे तो किम जोंग उन अपने परिवार को सार्वजनिक रूप से कहीं ले नहीं जाते हैं। हालांकि हाल ही में एक मिसाइल टेस्ट के दौरान वह अपनी बेटी को लेकर गए थे। इसके अलावा उनकी बहन की भी कई तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। हाल ही में जब किम जोंग उन चीन की यात्रा पर गए थे तब भी वह बेटी को साथ लेकर गए थे। वर्कर्स पार्टी ने सात दिनों का एक वार्षिक समारोह किया जिसमें किम जोंग उन का जमकर गुणगान किया गया। अमेरिका को दे दी धमकी किम जोंग उन ने कहा है कि यदि अमेरिका अपनी शत्रुतापूर्ण नीति छोड़कर उत्तर कोरिया के परमाणु संपन्न राष्ट्र के संवैधानिक दर्जे को स्वीकार करता है, तो उत्तरी कोरिया अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने के लिए तैयार होगा। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के अनुसार वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की नौवीं कांग्रेस के अवसर पर आयोजित एक परमाणु सैन्य परेड में श्री किम ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा 'यदि अमेरिका उत्तर कोरिया के संविधान में परिभाषित परमाणु राष्ट्र की वर्तमान स्थिति का सम्मान करता है और उत्तर कोरिया के प्रति अपनी शत्रुतापूर्ण नीति वापस लेता है, तो ऐसा कोई कारण नहीं है कि हम अमेरिका के साथ अच्छे संबंध स्थापित न कर सकें।' किम ने कहा कि अमेरिका और उत्तर कोरिया साथ चल सकते हैं, लेकिन केवल तभी जब अमेरिका यह स्वीकार कर ले कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार स्थायी रूप से रहेंगे। उत्तरी कोरिया के सुप्रीम लीडर की टिप्पणियों को अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खोलने के रूप में देखा गया। श्री किम ने हालांकि दक्षिण कोरिया के साथ किसी भी राजनयिक सुधार की उम्मीदों को खारिज करते हुए उन्हें सबसे बड़ा शत्रु करार दिया।

न्यूक्लियर ताकत पर किम जोंग उन का बड़ा बयान, कहा- देश को छेड़ा तो अंजाम होगा भयानक

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी सुरक्षा को खतरा हुआ तो परमाणु-संपन्न देश दक्षिण कोरिया को 'पूरी तरह से मिटा' सकता है। उन्होंने सियोल के साथ बातचीत करने से एक बार फिर इनकार कर दिया। सरकारी मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी। हालांकि, सत्तारूढ़ पार्टी की एक बैठक के समापन के दौरान उन्होंने अगले पांच वर्षों के लिए अपने नीतिगत लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वॉशिंगटन से बातचीत के लिए अपने रास्ते खुले रखे। हाल के वर्षों में किम ने सियोल के प्रति अपनी बयानबाजी को और तीखा कर दिया है और उसके साथ कूटनीति के प्रति अपनी अस्वीकृति पर जोर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सैन्य संघर्ष की आशंका नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य एक व्यापक रणनीति को आगे बढ़ाना है। इसके तहत किम के परमाणु हथियारों और मॉस्को तथा बीजिंग के साथ संबंधों के बल पर उत्तर कोरिया की अधिक मजबूत और प्रभावशाली भूमिका स्थापित करना है। आधिकारिक न्यूज एजेंसी ने कहा कि किम ने अपनी परमाणु-संपन्न सेना को मजबूत करने के लिए नई हथियार प्रणालियों को विकसित करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में उनके परमाणु और मिसाइल के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास ने देश को परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में उभारा है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका लंबे समय से रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है तो उसे उत्तर कोरिया के प्रति अपनी कथित "शत्रुतापूर्ण" नीतियों को छोड़ना होगा। दक्षिण कोरिया ने क्या कहा दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा कि उत्तर कोरिया का अंतर-कोरियाई संबंधों को शत्रुतापूर्ण रूप में परिभाषित किया जाना खेदजनक है और सियोल शांति के प्रयासों को 'धैर्यपूर्वक' जारी रखेगा। ठप है अमेरिका से बातचीत विशेषज्ञों ने पहले ही अनुमान लगाया था कि किम दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कड़े रुख को और संस्थागत रूप दे सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 2019 में वार्ता विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया का अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ कूटनीतिक संवाद ठप है। किम ने दक्षिण कोरिया को 2024 में स्थायी दुश्मन घोषित कर संबंधों को और तनावपूर्ण बना दिया था। किम जोंग उन फिर बने नेता उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को सोमवार को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के शीर्ष पद पर फिर से निर्वाचित किया गया था। उत्तर कोरिया की आधिकारिक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि हजारों प्रतिनिधियों की 'एकमत इच्छा' से किम को पार्टी का महासचिव चुना गया। वर्ष 2016 से हर पांच वर्ष में आयोजित इस कांग्रेस में शीर्ष नेता का चुनाव होता है।  

तानाशाह के बाद कौन? किम जोंग उन की बहन के बढ़ते कद से नए पावर गेम के संकेत

उत्तर कोरिया उत्तर कोरिया में किम परिवार की सत्ता और मजबूत हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तानाशाह किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया में बड़ी पदोन्नति मिली है। यूं कहें तो उनका कद और पावर बढ़ गया है। अब उन्हें उप-विभाग निदेशक से पूर्ण विभाग निदेशक (Department Director) बनाया गया है, जो मिनिस्टीरियल स्तर का पद माना जाता है। यह फैसला हाल ही में हुई पार्टी की नौवीं कांग्रेस के दौरान लिया गया, जहां किम जोंग उन को एक बार फिर पार्टी महासचिव चुना गया। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने मंगलवार को रिपोर्ट किया कि किम यो जोंग, जो पहले सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया की केंद्रीय समिति में डिप्टी डिपार्टमेंट डायरेक्टर थीं, अब एक विभाग की डिपार्टमेंट डायरेक्टर नियुक्त कर दी गई हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें किस विभाग का नेतृत्व सौंपा गया है। उत्तर कोरिया में पांच वर्षों बाद हो रही इस पार्टी कांग्रेस के दौरान यह पदोन्नति हुई है। प्योंगयांग में चल रहे इस बहुचर्चित सम्मेलन में लगभग 5000 प्रतिनिधि शामिल हैं। यह सम्मेलन गुरुवार को शुरू हुआ था और इसमें किम जोंग उन को पार्टी के महासचिव के रूप में दोबारा चुना गया। माना जा रहा है कि यह किम राजवंश के शासन के निरंतर बने रहने का एक और संकेत है। वहीं, दक्षिण कोरिया की जासूसी एजेंसी के इस महीने के आकलन के अनुसार, उत्तर कोरिया पर 1940 के दशक से किम परिवार का ही शासन है। साथ ही, नेता किम की नाबालिग बेटी किम जू ऐ को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। किम यो जोंग शासन की प्रमुख आवाज बन चुकी हैं और दक्षिण कोरिया के खिलाफ धमकियों व उकसावे वाली बयानबाजी की एक श्रृंखला का नेतृत्व कर रही हैं। हालांकि, हाल ही में सीमा पार ड्रोन हमलों पर सियोल द्वारा खेद व्यक्त करने के संदर्भ में उनकी टिप्पणी में दुर्लभ सकारात्मकता दिखी थी। वह किम परिवार के उन चुनिंदा सदस्यों में से हैं जिन्होंने प्रमुख स्थान बनाए रखा है। राज्य मीडिया में उनका जिक्र होता रहता है, जबकि उत्तर कोरिया जैसे देश में नेता के भाई-बहनों का प्रदर्शन अक्सर अच्छा नहीं रहा है। गौरतलब है कि किम जोंग उन पर 2017 में अपने सौतेले बड़े भाई किम जोंग नाम की हत्या का आदेश देने का आरोप लगा था, जो उनका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता था। पूर्व नेता किम जोंग इल के एक भाई की बचपन में डूबने से मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य सौतेले भाई को दशकों तक निर्वासित रखा गया।  

13 साल की बेटी को ‘पावर’ देने की तैयारी में किम जोंग उन, परिवारिक झगड़े में फंसा क्रूर तानाशाह

सोल दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाहों में से एक किम जोंग उन के परिवार में ही फिलहाल झगड़ा होता दिख रहा है। साउथ कोरिया की खुफिया एजेंसी का कहना है कि किम जोंग उन की बेटी किम जू ऐ का नाम अगले नेता के तौर पर घोषित किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में किम जोंग उन की बेटी का मुकाबला पावरफुल बुआ किम यो जोंग से हो सकता है। भविष्य में देश पर कंट्रोल करने की लड़ाई दोनों के बीच तेज हो सकती है। किम जू ऐ की उम्र महज 13 साल है और चर्चा है कि उसे 14 साल का होते ही किम जोंग उन की ओर से अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है। उन की बहन भी खुद को एक पावर सेंटर मानती रही हैं। ऐसे में संभव है कि यह संघर्ष बढ़ सकता है। साउथ कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस ने बीते सप्ताह बताया कि किम जू ऐ की उम्र 13 साल की हो गई हैं। अब उन्हें औपचारिक तौर पर उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है। यह समय अहम है क्योंकि उत्तर कोरिया में इसी महीने एक बड़ा राजनीतिक आयोजन होने वाला है। इसमें किम जोंग उन बताएंगे कि देश के लिए भविष्य में क्या लक्ष्य तय किए गए हैं। इसके अलावा वह देश की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भी कुछ कदमों का ऐलान कर सकते हैं। इस दौरान किम जोंग उन की बेटी भी मंच पर हो सकती हैं। हाल ही में एक मीटिंग में वह अपने पिता का हाथ थामे हुए पहुंची थीं। किम जू ऐ को किसी सार्वजनिक आयोजन में पहली बार नवंबर 2022 में देखा गया था। तब वह एक लॉन्ग रेंज मिसाइल के परीक्षण में पहुंची थीं। इसके बाद वह लगातार कई आयोजनों में पिता के साथ नजर आई हैं। उन्होंने हथियार फैक्ट्रियों के दौरे किए हैं तो वहीं सैन्य परेडों में भी हिस्सा लिया है। यही नहीं बीते साल सितंबर में वह चीन की राजधानी बीजिंग भी पहुंची थीं। आमतौर पर उत्तर कोरिया की राजनीति में पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है, लेकिन पहली बार किम जोंग उन बेटी को कमान दे सकते हैं। इसी उद्देश्य से उन्हें चीन ले जाया गया था ताकि उन्हें स्थापित किया जा सके और दुनिया भर में एक संदेश जाए। क्यों इतनी पावरफुल मानी जाती हैं किम जोंग उन की बहन किम जोंग उन की बेटी के लिए देश में कोई चुनौती नहीं है, लेकिन बुआ से ही चैलेंज मिल सकता है। दरअसल 38 वर्षीय किम यो जोंग को उन के बाद देश की दूसरी सबसे पावरफुल शख्सियत माना जाता है। उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत है तो वहीं सैन्य हलकों में भी उनकी ताकत कम नहीं है। फिलहाल वह कोरिया की वर्कर्स पार्टी की सेंट्रल कमेटी में सीनियर पद पर हैं। इसके अलावा भाई की राय को भी वह काफी हद तक प्रभावित करती रही हैं। ऐसे में अब यदि किम जोंग उन की बेटी मजबूत हुई तो फिर चीजें बदल सकती हैं। किम जोंग के परिवार में बर्बर रहा है सत्ता का संघर्ष उत्तर कोरिया पूरी दुनिया के उनके मुल्कों में शुमार किया जाता है, जो सूचना से कटे हुए हैं। यहां के आम नागरिकों को दुनिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती। इसके अलावा दुनिया के मीडिया या लोगों की एंट्री पर भी काफी पाबंदियां हैं। मीडिया पर इस सेंसरशिप के चलते ही उत्तर कोरिया के लोग पूरी दुनिया से एक तरह से कटे हुए हैं। बता दें कि देश में सत्ता संघर्ष भी बहुत क्रूर रहा है। किम जोंग उन ने 2011 में सत्ता संभालने के बाद अपने अंकल और मेंटर रहे जांग सॉन्ग थाएक को गोलियां मरवाकर जान ले ली थी। इसके अलावा किम जोंग उन के सौतेले भाई किम जोंग नाम की भी 2017 में हत्या करा दी गई थी।

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने यूक्रेन युद्ध में खोए सैनिकों को किया याद, स्मारक निर्माण की तैयारी

फियोंगयांग यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस का खुलकर समर्थन करने वाला उत्तर कोरिया अब अपने सैनिकों के लिए स्मारक बनवा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस-यूक्रेन के युद्ध में उत्तर कोरिया के हजारों सैनिक मारे गए हैं। उत्तर कोरिया की न्यूज एजेंसियों के मुताबिक राजधानी प्योंगयांग में इस स्मारक की नींव रखी गई है। शिलान्यास कार्यक्रम में उत्तर कोरिया में रूस के राजदूत और खुद किम जोंग उन शामिल हुए थे। किम ने कहा कि यह म्यूजियम सच्चे देशभक्तों के लिए बनाया जा रहा है। बता दें कि उत्तर कोरिया जो कि दुनियाभर में सबसे अलग-थलग देश माना जाता है, उसकी रूस के साथ खूब बन रही है। पश्चिमी रूस से यूक्रेनी सेना को खदेड़ने के लिए किम जोंग उन ने हथियार और हजारों सैनिक रूस भेजे थे। दक्षिण कोरिया की मीडिया के मुताबिक इस युद्ध में उत्तर कोरिया के करीब 6 हजार सैनिक मारे गए हैं और हजारों सैनिक घायल हुए हैं। किम जोंग उन ने रूस की मदद करने के लिए अपने सैनिकों की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय उन सैनिकों को समर्पित है जिन्होने राष्ट्रभक्ति की भावना का परिचय देते हुए रूस के लिए लड़ते हुए अपनी जान दे दी। इस मौके पर सेना के बड़े अधिकारियों के साथ उन सैनकों के परिवारवाले भी मौजूद थे जिनकी रूस में मौत हो गई है। बता दें कि रूस और उत्तर कोरिया में बड़ा सैन्य समझौता हुआ है जिसके मुताबिक युद्ध की स्थिति में दोनों को एक दूसरे के साथ खड़े होना है। वहीं उत्तर कोरिया लगातार नए-नए हथियारों का परीक्षण करता रहता है। हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने विभिन्न हाइपरसोनिक हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया है। ये हथियार ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक गति से उड़ान भरने में सक्षम बताए जाते हैं और अपने मार्ग से मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भ्रमित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया है कि क्या उत्तर कोरियाई मिसाइलें वास्तव में परीक्षणों के दौरान उतनी ही गति से उड़ान भर रही हैं जितनी गति का दावा किया जाता है।