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नॉर्थ कोरिया में नई चाल? किम जोंग उन अब अमेरिका से वार्ता को राजी — दक्षिण कोरिया की रिपोर्ट

सोल  उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन अमेरिका से बातचीत को इच्छुक हैं और जल्द ही वाशिंगटन में ये मुलाकात हो सकती है। दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी (एनआईएस) की कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से योनहाप न्यूज एजेंसी ने ये दावा किया है। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरियाई एजेंसी को लगता है कि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच एक समिट होने की संभावना बहुत ज्यादा है। एजेंसी का अनुमान है कि यह बैठक अगले साल मार्च में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के जॉइंट मिलिट्री ड्रिल के बाद हो सकती है।  रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (एनआईएस) पर पार्लियामेंट्री ऑडिट के बाद, सांसद ली सेओंग-क्वेन ने पत्रकारों से कहा, "एनआईएस का मानना ​​है कि किम जोंग उन अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं और जब हालात सही होंगे तो वे अमेरिका से संपर्क साधेंगे।" हालांकि व्हाइट हाउस ने समिट की संभावना को लेकर टिप्पणी का आग्रह किया, लेकिन उसका उन्हें जवाब नहीं मिला। उत्तर कोरियाई नेता किम कह चुके हैं कि अगर वॉशिंगटन न्यूक्लियर हथियारों को खत्म करने की मांग छोड़ दे तो वह अमेरिका से बात करने को तैयार हैं, लेकिन जब पिछले हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण कोरिया दौरे के दौरान बातचीत का ऑफर दिया तो उन्होंने (किम) सार्वजनिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया। पिछले हफ्ते एपीईसी समिट से पहले दक्षिण कोरिया दौरे पर आए ट्रंप ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था: "हम वापस आएंगे, और बहुत जल्द, उत्तर कोरिया से मिलेंगे।" प्योंगयांग के न्यूक्लियर हथियारों के जखीरे को लेकर बातचीत टूटने से पहले ट्रंप और किम ने 2018 और 2019 में शिखर वार्ता की थी। उत्तर कोरिया पर इन हथियारों के साथ-साथ अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर भी कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं। योनहाप ने बताया कि संसदीय सत्र के बाद एक और सांसद ने पत्रकारों से कहा कि किम को कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या नहीं लगती है, हालांकि पहले ऐसी खबरें थीं कि उन्हें हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है। सांसद ने कहा कि उत्तर कोरियाई नेता की किशोर बेटी किम जू ए, उनकी संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रही है, हालांकि पिछले 60 दिनों से वह लाइमलाइट से दूर है।

दुनिया भर में चर्चा बटोर रही किम जोंग उन की 12 साल की बेटी किम जू, क्यों ले गए थे चीन

बीजिंग उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बीजिंग यात्रा की काफी चर्चा है। व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के साथ उनकी तस्वीरें इंटरनेशनल मीडिया में सुर्खियां बटोर रही हैं। कहा जा रहा है कि किम जोंग उन को इस तरह महत्व मिलना उन्हें दुनिया के एकांतवास से बाहर निकालने वाला है। यही नहीं उनकी 12 साल की बेटी और संभावित उत्तराधिकारी किम जू ए भी चर्चा में हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि किम जोंग उन पहली बार किसी विदेश दौरे पर बेटी को लेकर गए थे। किम जोंग उन के साथ ही उनकी बेटी नजर आईं और उनका परिचय खुद पिता ने पुतिन और शी जिनपिंग जैसे नेताओं से कराया। चीन की राजधानी बीजिंग में हुई विक्ट्री डे परेड में भी वह किम जोंग उन के आसपास ही बनी रहीं। यह पहला मौका था, जब किम जोंग उन की बेटी को दुनिया ने किसी सार्वजनिक आयोजन में देखा। जानकारों का कहना है कि जिस तरह वह पिता के साथ-साथ दिखीं और उनका परिचय वैश्विक नेताओं से कराया गया, इससे संकेत मिलता है कि वही किम जोंग उन की उत्तराधिकारी होंगी। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि किम जोंग उन की आयु फिलहाल 41 साल ही है। किम जोंग उन और उनके परिवार को लेकर दुनिया को बहुत कम ही जानकारी ही है। वजह है कि उत्तर कोरिया में मीडिया पर काफी पाबंदियां हैं और वहां से जानकारियां बाहर कम ही आती हैं। किम जोंग उन की बेटी जू ए के बारे में दुनिया को पहली बार पहली बार 2022 में ही जानकारी मिली थी। जब वह अपने पिता के साथ एक बलिस्टिक मिसाइल लॉन्च के कार्यक्रम में गई थीं। पूर्व एनबीए स्टार डेनिस रॉडमैन ने दुनिया को बताया था कि वह किम की बेटी हैं। रॉडमैन ने कहा था कि 2013 में वह प्योंगयांग गए थे और इस दौरान उनकी किम से मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग के दौरान किम जोंग उन ने अपनी पत्नी रि सोल जू और एक छोटी बच्ची से भी परिचय कराया था। तब उन्होंने कहा था कि यह मेरी बेटी है। प्योंगयांग का सरकारी मीडिया कभी भी बेटी का नाम नहीं लिखता, लेकिन साउथ कोरिया के खुफिया सूत्रों के अनुसार जू ए किम की बेटी ही हैं। वैश्विक नेताओं से मिलतीं किम जू ए उत्तर कोरिया के नेता की शादी 2009 में हुई थी। बीते कुछ सालों में उत्तर कोरिया के मीडिया में किम जू ए के बारे में रिपोर्टिंग होती रही है, लेकिन उन्हें प्यारी बच्ची या फिर होनहार बच्ची कहके संबोधित किया जाता रहा है। उत्तर कोरिया से आई तस्वीरों में अकसर दिखता है कि बड़ी आयु के लोग भी बच्ची के आगे सिर झुकाते हैं। इससे भी अनुमान लगाया गया कि शायद वही किम जोंग उन की बेटी और सत्ता की वारिस हैं। यही नहीं सार्वजनिक कार्यक्रमों में वह अकसर अपनी बुआ किम यो जोंग और मां से आगे चलती दिखती हैं।

रेल पर सवार होकर चीन पहुंचे किम जोंग उन, शाही बेड़े में क्या-क्या शामिल?

बीजिंग आमतौर पर किसी देश का सर्वोच्च नेता दूसरे देश की यात्रा के लिए हवाई जहाज का उपयोग करता है, ताकि कम समय में वह वहां पहुंचे और वापस लौट आए। लेकिन उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन हवाई जहाज के बजाय ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। वे बख्तरबंद रेलगाड़ी में सवार होकर दूसरे देश की सीमा में प्रवेश करते हैं। एक बार फिर उन्होंने चीन जाने के लिए इसी रेलगाड़ी का उपयोग किया और मंगलवार को चीन पहुंचे। 1300 किलोमीटर की दूरी तय की ट्रेन ने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग से चीन की राजधानी बीजिंग तक लगभग 1300 किलोमीटर की दूरी तय की। बुधवार को बीजिंग में 'विक्ट्री डे' परेड होने वाली है, जिसमें किम जोंग उन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य विश्व नेताओं के साथ शामिल होंगे। उम्मीद है कि इस सैन्य परेड के जरिए वे अमेरिका के खिलाफ अपनी त्रिपक्षीय एकता का प्रदर्शन करेंगे। किम जोंग उन पहली बार लेंगे हिस्सा किम और व्लादिमीर पुतिन उन 26 विश्व नेताओं में शामिल हैं, जो बीजिंग में आयोजित होने वाली इस विशाल सैन्य परेड में शी जिनपिंग के साथ हिस्सा लेंगे। यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति और जापानी आक्रामकता के खिलाफ चीन के प्रतिरोध की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हो रही है। यह ऐसा अवसर होगा, जिसमें किम जोंग उन अपने 14 साल के शासनकाल में पहली बार किसी बड़े बहुपक्षीय आयोजन में भाग लेंगे। साथ ही यह पहला मौका होगा, जब अमेरिका को चुनौती देने वाले देशों के नेता किम, शी और पुतिन एक ही स्थान पर एक साथ नजर आएंगे। इस ट्रेन में क्या-क्या है? उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के लिए ट्रेन से इतनी लंबी यात्रा करना कोई नई बात नहीं है। उनके पिता और दादा भी ऐसा कई बार कर चुके हैं। यानी, यह परंपरा उनके दादा ने शुरू की थी, जिसे आज तक कायम रखा गया है। किम जोंग उन के पिता, किम जोंग इल ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। कहा जाता है कि किम जोंग इल को हवाई जहाज से यात्रा करने में डर लगता था, इसलिए वे ट्रेन से सफर करते थे। किम जोंग उन ट्रेन यात्रा बुलेटप्रूफ ट्रेन में 90 डिब्बे इस गहरे हरे रंग की ट्रेन में कॉन्फ्रेंस रूम, ऑडियंस चैंबर, बेडरूम, सैटेलाइट फोन और फ्लैट स्क्रीन टीवी जैसे साधन मौजूद हैं। नवंबर 2009 में दक्षिण कोरिया के एक समाचार आउटलेट ने बताया था कि इस बुलेटप्रूफ ट्रेन में कुल 90 डिब्बे हैं। इन डिब्बों में लाल रंग की लेदर आर्मचेयर हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ट्रेन की गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस रेलगाड़ी का नाम 'टाएयेनघो' है, जिसका कोरियाई भाषा में अर्थ 'सूरज' है। यह उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल सुंग का प्रतीक माना जाता है। उत्तर कोरियाई नेताओं का ट्रेन से क्या है संबंध? बताया जाता है कि लंबी दूरी की यात्राओं के लिए ट्रेन का उपयोग करने की परंपरा किम इल सुंग ने शुरू की थी। किम जोंग उन के दादा, किम इल सुंग, वियतनाम और पूर्वी यूरोप तक ट्रेन से यात्रा करते थे। इस ट्रेन की सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तर कोरिया के सुरक्षा एजेंट संभालते हैं। वे बम या अन्य खतरों को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के मार्ग और अगले स्टेशनों की जांच करते हैं। बता दें कि 2001 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए किम जोंग इल ने दस दिन की ट्रेन यात्रा कर मॉस्को पहुंचे थे।