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2200 करोड़ की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची टीम पर विरोध, कार्रवाई रुकी

जयपुर जयपुर में को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उस समय हालात बिगड़ गए, जब हाउसिंग बोर्ड की टीम को स्थानीय लोगों के विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा. मामला बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसकी कीमत 2200 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन कब्जा लेने की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचा था. उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम जेसीबी मशीनों के साथ पहुंची और अवैध निर्माणों को हटाने की शुरुआत की. इस दौरान बाउंड्री वॉल और अस्थायी ढांचों को तोड़ा जाने लगा. तभी प्रशासन की टीम को मौके पर विरोध झेलना पड़ा. महिलाओं ने जेसीबी पर फेंके पत्थर कार्रवाई शुरू होते ही वहां रह रहे लोगों ने विरोध जताया और देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया. कुछ महिलाओं द्वारा जेसीबी पर पत्थर फेंके जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई, जिसके चलते प्रशासन को कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी. भू-माफियाओं ने किया घोटाला! बताया जा रहा है कि संबंधित जमीन का अधिग्रहण हाउसिंग बोर्ड ने वर्ष 1989 में किया था और 1991 में इसकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन लंबे समय तक कब्जा नहीं लिया जा सका. इसी बीच कथित तौर पर भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यहां कॉलोनी विकसित कर दी और प्लॉट बेच दिए. सूत्रों के अनुसार, पुराने दस्तावेजों के सहारे जमीन का सौदा दिखाकर कई लोगों को कम दामों में भूखंड आवंटित किए गए. साल 2019 में कॉलोनी के नियमितीकरण का मामला उठा. तब जयपुर विकास प्राधिकरण ने एनओसी मांगी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच एसीबी को सौंप दी गई थी. फिलहाल, प्रशासन की सख्ती और स्थानीय विरोध के बीच यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.

अवैध कब्जों पर चला प्रशासन का डंडा, पश्चिमी चंपारण में 60 अतिक्रमणकारियों को अल्टीमेटम

बगहा/चंपारण. बगहा प्रखंड एक के मझौवा गांव में बेतिया राज की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए अंचल प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन की ओर से चिह्नित 60 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर उनसे भूमि संबंधी कागजात प्रस्तुत करने और जवाब देने को कहा गया है। अंचल प्रशासन के अनुसार, मझौवा क्षेत्र में लंबे समय से बेतिया राज की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिल रही थी। नोटिस मिलने के बाद गांव के लोग अंचल कार्यालय पहुंचे। प्रभारी सीओ सह बीडीओ प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि संबंधित लोग निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक जवाब या वैध कागजात प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो कब्जे वाली जमीन को खाली कराया जाएगा। इसके लिए आवश्यक होने पर प्रशासनिक बल का भी प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अधिकांश लोगों ने न तो जवाब दिया और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किया। इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निष्पक्ष कार्रवाई से सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कर जनहित में उपयोग किया जा सकेगा। समय रहते प्रस्तुत करें कागजात वहीं, कुछ लोगों ने प्रशासन से पारदर्शिता बनाए रखने और वास्तविक पात्रों को परेशान नहीं करने की मांग की है। अंचल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपने कागजात प्रस्तुत करें, ताकि अनावश्यक कार्रवाई से बचा जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

असम के आदिवासी बहुल जिले में जमीन विवाद, हाईकोर्ट ने पूछा: निजी कंपनी इतनी बड़ी जमीन कैसे खरीद सकती है?

गौहाटी  गौहाटी हाई कोर्ट ने असम के आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले में एक प्राइवेट सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (करीब 1,000 एकड़) जमीन आवंटित किए जाने पर नाराजगी जाहिर की है और पूछा है कि एक निजी कंपनी 3,000 बीघा जमीन कैसे खरीद सकती है। हाई कोर्ट ने छठी अनुसूची के तहत आने वाले इस क्षेत्र के 22 निवासियों की एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक निजी कंपनी द्वारा इतने बड़े भू-भाग की खरीद से ‘परेशान और स्तब्ध’ हैं। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी ली गई है। रिट याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी और राज्य के महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया के बीच इस बात पर लंबी बहस हुई कि क्या छठी अनुसूची क्षेत्र के उमरंगसो में कारखाना स्थापित करने के लिए महाबल सीमेंट को इतनी अधिक जमीन दी जानी चाहिए। सुनवाई का यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण इस सुनवाई का हाई कोर्ट के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस मेधी ने कहा, "अदालत 3,000 बीघा जमीन के आवंटन से परेशान है। हम सिर्फ़ यह रिकॉर्ड देखना चाहते हैं कि नीति कैसे बनाई गई।" इस दौरान असम के महाधिवक्ता सैकिया ने अदालत को बताया कि एक सीमेंट कंपनी ने 2 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से जमीन खरीदी है। महाधिवक्ता के बार-बार अनुरोध के बाद, अदालत ने सरकार से 3 सितंबर को अपना हलफनामा दाखिल करने को कहा। जज बोले- मैं तो हैरान-परेशान सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी 3,000 बीघा की बात सुनकर हैरान रह गए! "पूरा जिला? क्या हो रहा है? एक निजी कंपनी को 3,000 बीघा जमीन दी जा रही है।" इस दौरान एनसी हिल्स स्वायत्त परिषद (NCHAC) के वकील, जिनके पास भूमि का अधिकार क्षेत्र है, ने दीमा हसाओ में एक सीमेंट कारखाने को 3,000 बीघा भूमि के आवंटन से संबंधित कुछ कागजात प्रस्तुत किए, लेकिन कोर्ट ने उन्हें पूरी फाइल पेश करने का निर्देश दिया, जिसमें छठी अनुसूची क्षेत्र में भूमि के बड़े हिस्से को निजी फर्म को आवंटित करने का निर्णय शामिल है। पूरी फाइल पेश करने का आदेश रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस मेधी ने कहा, "NCHAC के वकील ने कुछ कागजात पेश किए। पिछले आदेश का उद्देश्य कुछ कागजात देखना नहीं था, बल्कि उस फाइल को देखना था जिसमें जमीन के बड़े हिस्से को आवंटित करने का निर्णय शामिल है।" उन्होंने NCHAC को अगली सुनवाई में फाइल पेश करने का निर्देश दिया। महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी और उसने रिपोर्ट सौंप दी है।