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लोकायुक्त रिपोर्ट: 4 साल में हजारों मामले, कई भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में

भोपाल  लोकायुक्त में बीते चार वर्षों में मध्यप्रदेश के 1379 अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध जांचें चल रही हैं। जांच के दायरे में आए मामलों में 20.97 करोड़ रुपए की वसूली किए जाने के बावजूद 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए जा चुके हैं। यह जानकारी कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी। उन्होंने बताया कि लोकायुक्त संगठन में वर्ष 2022-23 से अब तक 1884 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि विशेष पुलिस स्थापना में 1063 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं। इन मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा तथा तकनीकी शाखा द्वारा इसी अवधि में 1592 जांच पूरी कर प्रकरणों का निराकरण किया है। वर्तमान में शिकायत एवं जांच शाखा में 1291 तथा तकनीकी शाखा में 88, कुल 1379 प्रकरण जांच के दायरे में हैं। 134 केस अभियोजन स्वीकृति में लंबित लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा पंजीबद्ध 1063 आपराधिक प्रकरणों में से 393 प्रकरणों की विवेचना पूरी की जा चुकी है। इनमें 134 प्रकरण अभियोजन स्वीकृति में लंबित हैं। वहीं 39 प्रकरणों में चालानी कार्रवाई की गई है और 208 प्रकरणों में न्यायालय में चालान पेश किए हैं। इसके अतिरिक्त 12 प्रकरणों में न्यायालय में खात्मा पेश किया है, जिनमें आरोपी की मृत्यु अथवा प्रकरण के उन्मोचित होने का आधार रहा। शेष 670 प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन हैं। 153 मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई जवाब में यह भी बताया गया कि कुल जांच किए गए मामलों में शिकायत एवं जांच शाखा के 146 तथा तकनीकी शाखा के 7, कुल 153 प्रकरणों में अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। साथ ही शिकायत एवं जांच के आधार पर 20 करोड़ 97 लाख 17 हजार 905 रुपए की वसूली की गई है। लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना द्वारा न्यायालय में पेश किए गए 208 चालानों में से 7 प्रकरणों में आरोपियों के विरुद्ध दोष सिद्ध हुआ है। इन मामलों में संबंधित आरोपियों के खिलाफ सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक C-6-2/98/3/1 दिनांक 26 मई 1998 के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस विधायक ने पूछा था यह सवाल कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने विधानसभा के माध्यम से राज्य सरकार से पूछा था कि वर्ष 2022-23 से वर्तमान तक लोकायुक्त संगठन में कुल कितने प्रकरण प्राप्त हुए, कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया और कितने वर्तमान में लंबित हैं। साथ ही कितने प्रकरणों में दोष सिद्ध हुआ, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित की गई तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के लिए शासन द्वारा क्या कार्ययोजना और समय-सीमा निर्धारित की गई है।

CMHO ऑफिस में NHM डाटा मैनेजर रिश्वत लेते पकड़ा गया, छिंदवाड़ा में लोकायुक्त ने किया सख्त कदम

छिंदवाड़ा  भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने सोमवार को छिंदवाड़ा में एक बड़ी कार्रवाई की। CMHO कार्यालय खजरी में पदस्थ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डाटा मैनेजर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह रिश्वत एक नर्सिंग ऑफिसर के स्थानांतरण के बदले मांगी गई थी। कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। CMHO कार्यालय में लोकायुक्त की दबिश छिंदवाड़ा में जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने सोमवार को भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में कार्रवाई करते हुए CMHO कार्यालय खजरी में पदस्थ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के डाटा मैनेजर जितेन्द्र यदुवंशी को गिरफ्तार किया। आरोपी को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। स्थानांतरण के बदले मांगी थी रिश्वत जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहनाकला (ब्लॉक पिण्डरईकला) में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा वडघरे अपना स्थानांतरण नजदीकी संजीवनी क्लीनिक में करवाना चाहती थीं। इस कार्य के लिए डाटा मैनेजर जितेन्द्र यदुवंशी ने उनसे 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। लोकायुक्त में की गई शिकायत रिश्वत की मांग से परेशान नर्सिंग ऑफिसर पुष्पा वडघरे ने इसकी शिकायत लोकायुक्त जबलपुर में की। शिकायत सत्य पाए जाने पर लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने की रणनीति बनाई। रंगे हाथों गिरफ्तारी सोमवार को जैसे ही आवेदिका ने रिश्वत की राशि आरोपी जितेन्द्र यदुवंशी को सौंपी, पहले से घात लगाए लोकायुक्त दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। आरोपी के हाथ धुलाने पर वे गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। कानूनी कार्रवाई शुरू आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(b) एवं 13(2) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में कार्रवाई यह सफल कार्रवाई पुलिस महानिदेशक (लोकायुक्त) योगेश देशमुख के निर्देश और डीआईजी मनोज सिंह के मार्गदर्शन में की गई। टीम में निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया, राहुल गजभिये, उप निरीक्षक शिशिर पांडेय सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।  

रिश्वत मामले की फाइलें लोकायुक्त कार्यालय से गुम, हाईकोर्ट के रडार पर अधिकारी, FIR की मांग

जबलपुर  लोकायुक्त कार्यालय से गुम हुई रिश्वत संबंधित प्रकरण की फाइल के मामले में हाईकोर्ट सख्त रुख अपनाया है. हाईकोर्ट ने लोकायुक्त के इतने अहम दस्तावेज गुम होने जाने के बावजूद भी एफआईआर दर्ज नहीं करवाए जाने पर हैरानी व्यक्त की है. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस विनय सराफ ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को लोकायुक्त की फाइल गुमने के संबंध में एफआईआर दर्ज करवाने व सेवानिवृत्त लापरवाह अधिकारी के खिलाफ भी विभागीय जांच प्रारंभ करने के निर्देश जारी किए हैं. क्या है लोकायुक्त की फाइल गुमने का मामला? पीडब्ल्यूडी के हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक की ओर से इस मामले में याचिका दायर की गई थी. याचिका में ट्रायल कोर्ट के द्वारा कार्यवाही के दौरान लिए गए आवाज के नमूनों को द्वितीय साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के आदेश को चुनौती दी गई थी. याचिका में कहा गया था कि लोकायुक्त ने उनके खिलाफ अगस्त 2009 में तीन हजार रु की रिश्वत लेने का प्रकरण दर्ज किया था. प्रकरण संबंधित मूल फाइल गुम जाने के बाद लोकायुक्त ने कार्यवाही के दौरान आवाज के नमूनों को द्वितीय साक्ष्य के रूप के स्वीकार करने ट्रायल कोर्ट में आवेदन दायर किया था. ट्रायल कोर्ट द्वारा मूल फाइल गुम होने के बाद आवाज के नमूनों को द्वितीय साक्ष्य स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने पुर्निरक्षण याचिका दायर की. अधिकारी की लापरवाही आई सामने याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले उपस्थित हुईं. उन्होंने बताया कि मूल फाइल खो जाने के बाद जांच के आदेश दिए गए थे. इंचार्ज डीएसपी ओसकर किंडो ने फाइल खो जाने के लिए अपनी गलती स्वीकार की थी, जिसके बाद युगलपीठ ने याचिकाकर्ता के आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया. युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यह समझ से परे है कि लोकायुक्त की एक महत्वपूर्ण फाइल गुमने की एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई? डीजीपी को जांच के निर्देश हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए डीजीपी को निर्देशित किया है कि फाइल गुमने के संबंध में एफआईआर दर्ज करवाएं. इसके साथ ही लापरवाह अधिकारी को सेवानिवृत्त हुए चार साल से अधिक का समय नहीं हुआ है, ऐसे में उसके खिलाफ भी विभागीय जांच प्रारंभ की जाए.

लोकायुक्त की कार्रवाई: मंत्री जमीर अहमद के सेक्रेटरी के घर से 14 करोड़ की राशि जब्त

बेंगलुरु  कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार में मंत्री जमीर अहमद के निजी सचिव सरफराज खान के घर और ऑफिस पर लोकायुक्त ने एक साथ छापेमारी की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस छापे में लोकायुक्त की टीम ने 14 करोड़ रुपए बरामद किए हैं। बेंगलुरू के लोकायुक्त पुलिस थाने में इस मामले पर केस दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज होने के बाद की गई थी। गौरतलब है कि जमीर अहमद को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का करीबी सहयोगी माना जाता है। एक लोकायुक्त अधिकारी ने बताया, ‘‘आज बेंगलुरु में सहकारी विभाग निदेशालय से आवासीय विभाग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात सरदार सरफराज खान से जुड़े परिसरों की तलाशी ली जा रही है।’’ सरफराज खान पहले वृहद बेंगलुरु महानगरपालिका (बीबीएमपी) में संयुक्त आयुक्त थे।

लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास अधिकारी को दबोचा, नौकरी बचाने के लिए मांगी रिश्वत

देवास  कम्प्यूटर ऑपरेटर को नौकरी पर बरकरार रखने के एवज में रिश्वत मांगना महिला व बाल विकास परियोजना अधिकारी को महंगा पड़ गया. बागली में लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए परियोजना अधिकारी को कार में 5 हजार रु की रिश्वत लेते पकड़ा है. हालांकि, अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उसे षड्यंत्र रचाकर फंसाया गया है. कंप्यूटर ऑपरेटर ने लगाए थे रिश्वत मांगने के आरोप देवास के बागली क्षेत्र के महिला व बाल विकास विभाग में आउटसोर्सिंग कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रीतेश तंवर का आरोप है कि उसे नौकरी पर कन्टिन्यू रखने के एवज में 18 हजार रू की रिश्वत मांगी गई थी. उसने उज्जैन लोकायुक्त की टीम को इस मामले की लिखित शिकायत की थी. पहले लोकायुक्त उज्जैन ने शिकायत कंफर्म करने के लिए शिकायतकर्ता को कुछ पैसे लेकर अधिकारी के पास भेजा और कंफर्मेशन के बाद ट्रैप की प्लानिंग की. इसके बाद बुधवार को अगली किश्त के रूप में शिकायतकर्ता से 5 हजार रु रिश्वत के रूप में दिलवाए, तभी लोकायुक्त की टीम ने महिला व बाल विकास परियोजना अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ लिया. उज्जैन लोकयुक्त की टीम ने आगे की कार्रवाई देवास सर्किट हाउस में की और लोकल जमानत पर अधिकारी को छोड़ दिया है. डीएसपी लोकायुक्त ने बताई पूरी कहानी वहीं, मामले को लेकर लोकायुक्त डीएसपी उज्जैन दिनेशचंद्र पटेल ने कहा, '' 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता प्रीतेश तंवर, निवासी बागली, जिला देवास ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन आनंद यादव को शिकायत की थी कि वह कार्यालय परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत है. उसे ऑनलाइन सेंटर वफोटोकॉपी सेंटर से प्रपत्र टाइपिंग कार्य और ईमेल आदि कार्यों के संपादन के लिए 9000 रु प्रतिमाह मिलता है. लेकिन आरोपी रामप्रवेश तिवारी, परियोजना अधिकारी ने उसी कार्यालय में लगातार उसे कार्य करने देने के लिए दो महीने के हिसाब से 18 हजार रु की मांग की थी. इसके बाद शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद ट्रैप की कार्वाई की गई.'' लोकायुक्त डीएसपी ने आगे कहा, '' 10 दिसंबर को आवेदक द्वारा आरोपी रामप्रवेश तिवारी को रेलवे स्टेशन रोड देवास पर रिश्वत की अगली किस्त दी गई, तभी टीम ने रिश्वत राशि लेते हुए आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा है.''

लोकायुक्त जबलपुर ने पकड़ा भ्रष्ट सचिव, ग्राम पंचायत उकवा में रिश्वत लेते रंगे हाथ

बालाघाट  लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। जनपद पंचायत परसवाड़ा की ग्राम पंचायत खरपड़िया सचिव और ग्राम पंचायत उकवा के प्रभारी सचिव योगेश हिरवाने को ग्राम पंचायत उकवा के सामने में रोड पर अंकुश पिता संतोष चौकसे से 50 हजार रुपये लेते रंगे हाथ दबोचा गया। लोकायुक्त टीम ने सचिव को गिरफ्तार कर बैहर ले जाया गया है। शिकायतकर्ता अंकुर चौकसे की माने तो शासन के द्वारा एक डिसमिल का पट्टा दिया गया है, जो आबादी जमीन का है। मेरे द्वारा भवन निर्माण किया जाना था जिसके लिए मैं ग्राम पंचायत उकवा से एनओसी मांगना चाह तो ग्राम पंचायत उकवा के प्रभारी सचिव योगेश हिरवाने के द्वारा मुझे 200000 लाख रुपये की मांग की गई थीं।  

लोकायुक्त की दबिश से मचा हड़कंप: RES कार्यालय में रिश्वत लेते पकड़ी गई महिला, अफसर फरार

सीधी सीधी के जिला मुख्यालय स्थित RES विभाग में रीवा लोकायुक्त पुलिस टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोर महिला कर्मी को आठ हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। छापेमारी की जानकारी लगते ही इंजीनियर और एसडीओ समेत सब इंजीनियर दफ्तर छोड़ मौके से फरार हो गए। भाजपा नेता राजकुमार की शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस टीम ने आठ हजार रुपये की नगर रिश्वत लेते नेहा सिंह को गिरफ्तार किया है। आगे की कार्यवाही के लिए सर्किट हाउस लाया गया है। जहां कार्यवाही जारी है। बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत में हुए पुलिया निर्माण का भुगतान करने के एवज में एसडीओ आर यस पटेल और रामाश्रय पटेल सब इंजीनियर अखिलेश मौर्य ने रिश्वत की मांग की थी। छापेमारी के दौरान RES विभाग के महिला कर्मी नेहा सिंह रिश्वत की राशि लेते हुए गिरफ्तार हुई है।  लोकायुक्त की छापेमारी कार्रवाई के बाद एसडीओ इंजीनियर और सब इंजीनियर दफ्तर छोड़ फरार हुए हैं, जिनकी तलाश में लोकायुक्त पुलिस टीम जुटी हुई है। लोकायुक्त की कार्यवाही से प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप का माहौल है।

रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया नेत्र सहायक, टीकमगढ़ में लोकायुक्त ने की बड़ी कार्यवाही

टीकमगढ़  जिला अस्पताल में लोकायुक्त टीम सागर ने नेत्र सहायक को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। रिटायर कर्मचारी द्वारा रिश्वत रुपी केमिकल लगे हुए नोट देने के बाद जैसे ही इशारा किया, तो टीम के सदस्य पहुंच गए और नेत्र सहायक से बीस हजार रुपये जब्त किए। इस कार्रवाई के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और कई अधिकारी अपने सीट से गायब हो गए। फंड निकालने के एवज में मांगी थी रिश्वत शिकायतकर्ता रमेश चंद्र नायक निवासी पहाड़ी बुजुर्ग ने बताया कि वह स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के पद पर पदस्थ थे। हाल ही में रिटायर हुए हैं, जिनके रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फंड के भुगतान के लिए स्थापना बाबू संतोष अंबेडकर से कहा, तो उन्होंने नेत्र सहायक उमेश जैन से मिलने को कहा। उमेश जैन से मिलने पर उन्होंने 30 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इसमें 28 हजार रुपये देना तय हुआ था।  

शिक्षा विभाग में हड़कंप, संकुल प्रिंसिपल रिश्वत लेते पकड़ी गईं, लोकायुक्त ने किया कार्रवाई

  सांवेर सांवेर क्षेत्र के कछालिया गांव के शासकीय सांदीपनी स्कूल में रिश्वत का मामला सामने आया है। एक महिला प्रिंसिपल ने दो शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक पहुंचाने के एवज में दो हजार रुपए की रिश्वत मांगी। प्रिंसिपल मनीषा पहाड़िया ने शिक्षकों से कहा था कि वह रिश्वत के पैसे लिफाफे में रखकर लाए। फाइल बढ़ाने के लिए दो हजार की रिश्वत मांगने पर दोनों शिक्षक हैरान थे। उन्होंने लोकायुक्त विभाग को इसकी शिकायत की। लोकायुक्त पुलिस ने महिला प्रिंसिपल को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया। केमिकल लगे नोट लिफाफे में रखवा कर शिकायतकर्ता शिक्षकों को दिए।  बुधवार को दोनों शिक्षक प्रिंसिपल मनीषा के केबिन में पहुंचे और लिफाफा टेबल पर रख दिया। प्रिंसिपल ने लिफाफा पर्स में रखकर कहा कि अब फाइल आगे बढ़ा दूंगी।  इस बीच लोकायुक्त की टीम इशारा पाते ही केबिन में पहुंची और महिला प्रिंसिपल को रिश्वत लेते रहेंगे हाथों पकड़ लिया। उन्होंने मनीषा के हाथ धुलवाए तो हाथ केमिकल के कारण पीले हो गए।भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रिंसिपल के खिलाफ केस दर्ज किया और रिश्वत लेने के उपयोग में लाया गया पर्स भी टीम ने जप्त कर लिया है।  पकड़े जाने के बाद प्रिंसिपल मनीषा ने कहा कि उससे गलती हो गई ,उसे रिश्वत के पैसे नहीं लेना चाहिए थे। शिकायतकर्ता शिक्षकों की चार साल पहले स्कूल में नियुक्ति हुई थी। उन्होंने तय नियम के तहत स्थाई करने के लिए प्राचार्य को फाइल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में भेजने के लिए कहा था। प्रिंसिपल ने दोनों से फाइल आगे बढ़ाने की एवज में दोनों से एक- एक हजार रुपए मांगे थे। अब महिला प्रिंसिपल को निलंबित किया जा सकता है।  

अदालत में अपील लगाने सरकारी वकील मांग रही थी रिश्वत, लोकायुक्त ने दबोचा

जबलपुर  जबलपुर में लोकायुक्त टीम ने एक महिला सरकारी वकील कुक्कू दत्त को 15 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है। महिला सरकारी वकील ने शिकायतकर्ता से उसकी केस की पैरवी करने के बदले में 15 हजार रुपए की मांग की थी। फरियादी ने इसी की शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस से कर दी, जिसकी पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त ने घेराबंदी कर जाल बिछाया और महिला सरकारी वकील को 15 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया। फिलहाल, लोकायुक्त टीम महिला वकील के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई कर रही है। क्या कहता है नियम? दरअसल, पिछले दिनों मध्य प्रदेश शासन ने शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले बिहारी लाल की केस की पैरवी करने के लिए सरकारी महिला वकील को नियुक्त किया था। शासन के निर्देश पर नियुक्त सरकारी वकील फरियादी से पैसे नहीं मांग सकता। फिर भी महिला वकील कुक्कू दत्त शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपए मांग रही थीं। दरअसल पिछले दिनों मध्य प्रदेश शासन ने सिविल लाइन निवासी बिहारी लाल की केस की पैरवी करने के लिए सरकारी महिला वकील को नियुक्त किया था। शासन के निर्देश के अनुसार नियुक्त सरकारी वकील फरियादी से पैसे की नहीं मांग सकता। लेकिन उसके बावजूद सरकारी महिला वकील ने शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपए की मांग की थी। यही नहीं, पीड़ित का कहना है कि महिला वकील ने उसे कहा था कि यदि उसने उसे 15000 रुपए नहीं दिए तो वह उसके केस में काम नहीं करेगी। जिसके चलते वह फिर से अपना केस हार जाएगा। शिकायतकर्ता का आरोप पीड़ित का ये भी आरोप है कि, सरकारी महिला वकील ने उसे ये भी धमकी दी थी कि, अगर वो उसे 15 हजार नहीं देता तो वो केस पर किसी करह का काम नहीं करेगी, जिसके पर्णाम स्वरूप वो केस हार जाएगा।