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महाकाल लोक जाने का रास्ता होगा आसान, 710 मीटर नया कॉरिडोर तैयार, जून 2027 तक प्रोजेक्ट पूरा

उज्जैन   मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन को नया रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब क्षिप्रा नदी के घाटों (Kshipra Ghat) पर होने वाली आरती को बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती (Shipra is a tributary of Ganga) की तरह भव्य और आधुनिक रूप में आयोजित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ (2028) तक उज्जैन में ऐसी आरती शुरू हो जाए, जिसे देखने वाले श्रद्धालु भावविभोर हो उठें। इस दिशा में राज्य सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी पेशेवर एजेंसियों का चयन करना है, जो टेक्निक, म्यूजिक, लाइट और परम्परा को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकें। तकनीक से बनेगी आरती आकर्षक उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का मकसद क्षिप्रा आरती (Kshipra River) को इतना भव्य और यादगार बनाना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां का अनुभव जीवनभर याद रखें। महाकाल लोक जाने के लिए 710 मीटर लंबा और 22.18 मीटर चौड़ा नया रास्ता बन रहा है। 63 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सुगम रास्ता जून 2027 तक तैयार हो जाएगा। रेलवे से भी सहमति मिल गई है। इससे अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल लोक तक पहुंचना आसान होगा। अभी उन्हें पार्किंग से पुल पर चढ़ने के बाद 2100 मीटर लंबी दूरी तय कर महाकाल लोक पहुंचना पड़ रहा है। भीड़ नियंत्रण में रहेगी: इंदौर, देवास से आने वाले यात्री हरिफाटक के पास वाहन पार्क कर सीधे महाकाल लोक पहुंच सकेंगे। महाशिवरात्रि, नागपंचमी, नववर्ष पर भीड़ नियंत्रण में की जा सकेगी। 2. यातायात का दबाव कम होगा: पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग बनने से हरिफाटक ब्रिज, महाकाल घाटी, नीलगंगा, इंदौर रोड, जयसिंहपुरा में यातायात का दबाव कम होगा। उन्होंने कहा, हमने ऐसी एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आरती को और आकर्षक बना सकें। इसका मकसद यह है कि जब श्रद्धालु घाट पर आएं तो उन्हें सिर्फ आरती नहीं, बल्कि भावनात्मक अनुभव हो।  गंगा आरती क्यों है प्रेरणा का स्रोत हरिद्वार और बनारस की महागंगा आरती में हर शाम सैकड़ों पुजारी, घंटों और दीपों के साथ गंगा आरती करते हैं। वाराणसी की दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अपने आप में खास होती है। यहां दर्जनों पुजारी एक साथ समान वेशभूषा में दीप थाल लेकर मंत्रोच्चार करते हैं। हर पुजारी एक लय में जब आरती करते हैं तो भव्य नजारा होता है। शंखनाद, घंटों की गूंज और वेद मंत्रों की ध्वनि श्रद्धालुओं के मन में गहराई तक उतर जाती है।अब मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार चाहती है कि उज्जैन की क्षिप्रा आरती (shipra river in ujjain) भी इसी तरह का भव्य अनुभव दे।  तकनीक से सजेगी क्षिप्रा आरती एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट में कहा गया है कि आरती में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम होना चाहिए। सरकार ने एजेंसियों से ऐसे सुझाव मांगे हैं।जिनमें AI आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग, सिंक्न्रोनाइज्ड लाइटिंग, साउंड और विजुअल स्टोरीटेलिंग, होलोग्राम और AR/VR अनुभव और आध्यात्मिक संगीत संयोजन जैसी तकनीकें शामिल होंगी। इन तकनीकों की मदद से घाटों पर आरती का अनुभव केवल धार्मिक न रहकर दिव्य दृश्यात्मक आयोजन बन जाएगा। श्रद्धालु दीपों की रोशनी के साथ मां क्षिप्रा की कथा, उज्जैन के इतिहास और महाकाल की महिमा को लाइट एण्ड साउंड श्खो की मदद से अनुभव कर सकेंगे।  कई घाटों पर एक साथ आरती की तैयारी फिलहाल क्षिप्रा नदी की आरती केवल रामघाट तक सीमित है और ज्यादातर निजी समूहों द्वारा कराई जाती है।अब सरकार की योजना है कि कई घाटों को जोड़ा जाए और एक साथ सामूहिक आरती का आयोजन हो। इसका प्रारूप बनारस के मल्टी-घाट मॉडल जैसा होगा। जहां एक ही समय पर अलग-अलग घाटों पर आरती होती है, लेकिन उनकी ध्वनि और लय एक होती है।

VIP दर्शन पर नई व्यवस्था: महाकाल मंदिर में लाइव मॉनिटरिंग से नजर होगी हर खास मेहमान और आम श्रद्धालु पर

उज्जैन  उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में अब प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है। मंदिर में वीआईपी श्रद्धालुओं के दर्शन के दौरान रियल टाइम में उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। यह व्यवस्था मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के निर्देशन में लागू की गई है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं के अनुभव को और बेहतर बनाना है। इस नई व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों, न्यायिक अधिकारियों, नेताओं, अभिनेताओं और मीडिया से जुड़े व्यक्तियों के लिए विशेष प्रोटोकॉल दर्शन की प्रणाली को तकनीकी रूप से सुदृढ़ किया गया है। जब वीआईपी श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं, तो मंदिर के शंख द्वार पर तैनात कर्मचारी उनकी जानकारी को गूगल डॉक्स पर दर्ज करते हैं। यह जानकारी सीधे मंदिर के प्रशासक और सहायक प्रशासक के मोबाइल पर लाइव अपडेट होती है, जिससे सभी गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सके। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के निर्देशन में यह नई व्यवस्था लागू की गई है। इसमें जनप्रतिनिधियों, न्यायिक अधिकारियों, नेताओं, अभिनेताओं और मीडिया से जुड़े उन लोगों के लिए विशेष प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत किया गया है, जो पूर्व सूचना या अनुशंसा के आधार पर दर्शन के लिए आते हैं। जब कोई वीआईपी श्रद्धालु दर्शन के लिए आता है, तो मंदिर के शंख द्वार पर तैनात दो कर्मचारी कंप्यूटर पर उसकी जानकारी गूगल डॉक्स में एंटर करते हैं। ये जानकारी सीधे मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक और सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के मोबाइल पर लाइव होती है। कौन आया, कब आया सब कुछ रिकॉर्ड में     श्रद्धालु कब मंदिर पहुंचे     किस गेट से एंट्री की     कितने समय में दर्शन किए     कितने लोग साथ आए     किसने प्रोटोकॉल दर्शन के लिए अनुरोध किया     सभी नामित व्यक्तियों ने दर्शन किया या अतिरिक्त लोग शामिल थे इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि वीआईपी को रिसीव किसने किया और उनके प्रोटोकॉल दर्शन की प्रक्रिया में कौन-कौन कर्मचारी शामिल रहा। तीन स्तर पर चेकिंग और मोबाइल पर फीड प्रोटोकॉल पॉइंट्स की जानकारी तीन स्थानों पर चेक की जा रही है और इन तीनों जगह की लाइव फीड अधिकारियों के मोबाइल पर उपलब्ध हो रही है। सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के अनुसार, दिनभर में प्रोटोकॉल दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, उन्हें नंदी हॉल व जलद्वार तक दर्शन की व्यवस्था और पूरी गतिविधि की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। यह तकनीकी व्यवस्था अक्टूबर के पहले हफ्ते में शुरू की गई है और इसके प्रभावी नतीजे भी सामने आ रहे हैं। जानिए इस नई व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी? महाकालेश्वर मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इनमें से कई श्रद्धालु प्रोटोकॉल व्यवस्था के तहत दर्शन करते हैं। इस व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, पुलिस, न्यायिक अधिकारियों आदि को विशेष अनुमति दी जाती है। इसके लिए प्रति व्यक्ति 250 रुपए मंदिर में दान स्वरूप जमा करना अनिवार्य है। हालांकि, बीते साल में इस व्यवस्था में कई बार गड़बड़ियां सामने आईं हैं। मंदिर समिति द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि कई बार अधिक संख्या में श्रद्धालु दर्शाए गए और उनके माध्यम से अवैध रूप से एंट्री कराई गई। साथ ही, रुपयों के लेन-देन के आरोप भी मंदिर कर्मचारियों पर लगे हैं। इन्हीं अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए अब मंदिर समिति ने प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और अवैध वसूली पर रोक लगाना है। 10 माह पहले पकड़ा गया था अवैध वसूली का रैकेट करीब 10 महीने पहले महाकाल मंदिर में वीआईपी और प्रोटोकॉल दर्शन के नाम पर अवैध वसूली का बड़ा मामला सामने आया था। इसमें उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं से 1100 से 2000 रुपए तक वसूले जा रहे थे। जांच में सामने आया कि इस ठगी में मंदिर के कुछ कर्मचारी, पुरोहित और सुरक्षा गार्ड शामिल थे। मंदिर समिति ने इस मामले में करीब 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें से 6 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था। ऐसे होता था घोटाला     महाकाल मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन के तहत न्यायिक अधिकारियों, मीडिया कर्मियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य वीआईपी श्रद्धालुओं को नंदी हॉल तक जाने की अनुमति दी जाती है। आम श्रद्धालु भी 250 रुपए की रसीद के माध्यम से बिना लंबी कतार के दर्शन कर सकते हैं।     इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए कुछ कर्मचारी श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन और जल अर्पण का झांसा देकर पुजारियों और पुरोहितों से मिलवाते थे। इसके बाद प्रत्येक श्रद्धालु से 1100 से 2000 रुपए तक की अवैध वसूली की जाती थी।     यह राशि मंदिर समिति के खाते में जानी चाहिए थी, उसे कर्मचारियों ने खुद हड़प लिया। इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद मंदिर समिति ने सख्त कदम उठाते हुए अब संपूर्ण प्रोटोकॉल व्यवस्था को डिजिटल और ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है।

महाकाल मंदिर में डिजिटल बदलाव, प्रोटोकॉल दर्शनार्थियों को मोबाइल लिंक से मिलेगी दर्शन की सुविधा

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रोटोकॉल से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए नई ऑनलाइन व्यवस्था जल्द शुरू होने जा रही है। दर्शनार्थियों को पारंपरिक टोकन नंबर लेने की जरूरत नहीं होगी। मंदिर प्रबंध समिति प्रोटोकॉल दर्शनार्थी के मोबाइल पर लिंक भेजगी, जिसके माध्यम से वे दर्शन के लिए स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। नई व्यवस्था भस्म आरती की बुकिंग प्रक्रिया की तर्ज पर होगी, जिसका उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और श्रद्धालुओं के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाना है। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मिलेगी लिंक प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया नई व्यवस्था के तहत, प्रोटोकॉल के माध्यम से दर्शन करने के इच्छुक श्रद्धालुओं को विवरण दर्ज कराना होगा, जिसके बाद उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर लिंक प्राप्त होगी। लिंक पर क्लिक करके श्रद्धालु 250 रुपए का निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। भुगतान सफल होने पर, उन्हें दर्शन के लिए तिथि और समय स्लॉट आवंटित किया जाएगा, जिसकी जानकारी भी उन्हें मोबाइल पर प्राप्त होगी। मंदिर समिति के अनुसार, इस कदम से प्रोटोकॉल दर्शन प्रणाली में हो रही अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। पहले यह थी व्यवस्था अब तक प्रोटोकॉल के जरिए नंदी हॉल से दर्शन के लिए प्रोटोकॉल अधिकारी के मोबाइल पर सभी के नाम और फोन नंबर देना होते थे। अधिकारी उक्त नंबर पर एक टोकन नंबर भेजते थे। जब श्रद्धालु दर्शन करने मंदिर पहुंचते, तो पहले प्रोटोकॉल ऑफिस जाकर उन्हें प्रति व्यक्ति 250 की रसीद कटाना होती थी, लेकिन कुछ दिनों से टोकन प्रणाली में शिकायतें मिल रही थीं, जिनसे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठते थे। नई लिंक-आधारित प्रणाली से प्रत्येक बुकिंग का डिजिटल रिकॉर्ड रहेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी। अब भस्म आरती की तरह होगी दर्शन व्यवस्था महाकाल मंदिर में जिस तरह से भस्म आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था है, जिसमें भक्तों को उनके मोबाइल पर पुष्टिकरण और लिंक प्राप्त होती है। इसी सफलता को देखते हुए अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए भी यही तकनीक सुविधा अपनाई जा रही है। इस नई व्यवस्था से न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि मंदिर प्रबंधन के लिए भी दर्शनार्थियों की संख्या का प्रबंधन करना अधिक आसान हो जाएगा।

हाईकोर्ट का आदेश: महाकाल मंदिर में प्रवेश का फैसला कलेक्टर करेंगे, पुरानी व्यवस्था बहाल

उज्जैन  श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं की एंट्री पर रोक और वीआईपी प्रवेश की अनुमति के खिलाफ दायर याचिका पर कोर्ट का फैसला आ गया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने फैसला सुनाते हुए कलेक्टर के आदेश को सही माना है और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. यानी आम भक्तों को गर्भगृह में अभी प्रवेश नहीं मिलेगा और निर्णय लेने का अधिकार कलेक्टर के पास ही रहेगा. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह तय करने का अधिकार कलेक्टर के पास ही रहेगा। फिलहाल यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। इंदौर के वकील दर्पण अवस्थी ने जनहित याचिका लगाई थी। गुरुवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। सोमवार को फैसला सुनाया। कोर्ट के निर्णय के अनुसार, जब तक कोई नया आदेश नहीं आता, गर्भगृह में प्रवेश व्यवस्था पूर्ववत बनी रहेगी, यानी आम भक्त गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकेंगे और यह अधिकार केवल कलेक्टर के विवेक पर आधारित रहेगा। याचिका में व्यवस्था को बताया था भेदभावपूर्ण 18 अगस्त को इंदौर निवासी याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। एडवोकेट शास्त्री ने तर्क दिया था कि दूर-दराज से आने वाले आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता, जबकि प्रभावशाली लोगों को विशेष अनुमति मिल जाती है। यह व्यवस्था भेदभावपूर्ण और अनुचित है। वीआईपी कल्चर के खिलाफ दायर की गई थी याचिका दरअसल, इस तथाकथित 'वीआईपी कल्चर' को चुनौती देते हुए इंदौर के निवासी दर्पण अवस्थी ने 18 अगस्त को अपने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि देशभर से लाखों भक्त उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें केवल बाहर से ही दर्शन करना पड़ता है. वहीं वीआईपी लोगों को सीधे गर्भगृह में एंट्री मिल जाती है और वो परिवार सहित वहां जाकर पूजा-अर्चन करते हैं. याचिकाकर्ता ने इसे आम भक्तों के साथ भेदवाभ और अन्याय बताया था. वर्तमान व्यवस्था को अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया हाईकोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने एक-दो दिन में रिव्यू पिटीशन लगाने की बात कही है। उनका कहना है कि यह मामला महाकाल के लाखों आम भक्तों का है जोकि दूर-दराज से यहां आते हैं। कोर्ट में तर्क देते हुए अधिवक्ता शास्त्री ने गर्भगृह में प्रवेश की वर्तमान व्यवस्था को अनुचित और भेदभावपूर्ण बताया।  हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत बताकर रद्द की याचिका    हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सोमवार को इस याचिका पर फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने ये कहते हुए इस याचिका को रद्द कर दिया कि याचिकाकर्ता ने अपनी व्यक्तिगत समस्या को लेकर याचिका लगाई गई है. कोर्ट ने कहा, "मंदिर के गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलना चाहिए और किसे नहीं मिलना चाहिए ये उज्जैन कलेक्टर के विवेकाधिकार में है. इसपर कलेक्टर और मंदिर प्रशासन ही अंतिम फैसला लेंगे." यानी पहले जैसे व्यवस्था थी वही जारी रहेगी. इसका मतलब है कि अभी आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं याचिकाकर्ता इंदौर बैंच द्वारा याचिका खारिज होने पर तर्पण अवस्थी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करने की तैयारी में हैं. याचिकाकर्ता के वकील चर्चित शास्त्री ने बताया, "हाईकोर्ट ने याचिका को व्यक्ति विशेष का मामला बताकर खारिज कर दिया. जबकि ये व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है. ये याचिका उन सभी आम भक्तों के लिए थी जिन्हें मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिलता, जबकि वीआईपी, नेता पुत्रों को बड़ी आसानी से प्रवेश मिल जाता है. कलेक्टर द्वारा भक्तों से भेदभाव किया जाता है. हम फैसला का स्वागत करते हैं, लेकिन हम इसको लेकर सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे."  2023 से गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक बता दें कि अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने भी याचिका का समर्थन किया था और कोर्ट से कहा था कि गर्भगृह दर्शन के लिए नीति बनाई जाए. महासंघ ने सुझाव दिया था कि चाहे शुल्क निर्धारित किया जाए या समय, लेकिन आम भक्तों को भी बाबा महाकाल के समीप जाने का अवसर मिलना चाहिए. महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं के प्रवेश पर 4 जुलाई 2023 से प्रतिबंध लगा हुआ है. हाल ही में कई नेता पुत्रों द्वारा जबरदस्ती बैरिकेडिंग फांदकर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने के मामले भी सामने आए हैं.

उज्जैन महाकाल मंदिर में शिव का मुखौटा गिरा, ज्योतिषाचार्य बोले- अप्राकृतिक घटना

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दो दिन पहले 18 अगस्त सोमवार को एक अनोखी घटना घटित हुई । यहां रोजाना की तरह रात्रि 8:00 बजे शिवलिंग पर श्रृंगार किया जा रहा था। शिवलिंग पर भांग से भगवान शिव का मुखौटा बनाया गया । इस दौरान बड़ी मात्रा में भांग लगाई गई। इसके तत्काल बाद आरती शुरू ही होने ही वाली थी कि भांग का श्रृंगार टूटकर नीचे गिर गया। यहां शिव के मुखौटे से नाक, होंठ और एक आंख टूट कर नीचे गिर गई। कुछ ही क्षण में मंदिर के गर्भगृह में मौजूद पंडे पुजारी ने तत्काल फिर से मुखौटा बनाया और आरती की। यह पूरी घटना मंदिर में लगे सीसीटीवी में कैद हुई जो कि वायरल हो गई। खड़े हो रहे हैं सवाल इस घटना के बाद महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और मंदिर के पंडे पुजारियों पर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना को लेकर ज्योतिष आचार्य और धर्म के ज्ञाता भी अपना अलग-अलग मत दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई निर्देश नियमों की बात करें तो वर्ष 2020 में महाकाल शिवलिंग क्षरण रोकने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर समिति को निर्देश दिए थे कि शिवलिंग पर तय मात्रा में पंचामृत चढ़ाया जाए। इसके अलावा भांग और अन्य सामग्रियों के लिए भी निर्देशित किया था । बावजूद इसके वर्तमान समय में निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। शिवलिंग पर तय मात्रा से अधिक भांग लगाई जा रही है। यही कारण है कि मुखौटा टूटकर गिर गया। अप्राकृतिक घटना के संकेत इस घटना को लेकर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य अमर त्रिवेदी का कहना है कि यह एक अप्राकृतिक घटना का संकेत है। इस घटना के पीछे दो अलग-अलग मत है। देवता जिस भी सामग्री को पसंद करते हैं, उसे वह स्वीकार करते हैं और यदि किसी सामग्री में त्रुटि या श्रद्धा ना हो या अच्छी मानसिकता से ना बनाई गई हो या उसमें धर्म का प्रभाव ना हो तो वे सामग्री को त्याग देते हैं। ये हैं वैज्ञानिक कारण ज्योतिषाचार्य के अनुसार वैज्ञानिकता की बात करें तो पत्थरों की अपनी आद्रता होती है। पत्थरों में आंतरिक आद्रता और आंतरिक उष्णता रहती है। जब बाहरी आद्रता व उष्णता वाली भांग पत्थर पर लगाई जाती है तो कभी-कभी उसके गिरने की संभावना बनती है। यहां एक प्रकार से ऋतु परिवर्तन के संकेत भी हैं। भविष्य में बाढ़ और जल की स्थिति दिखेगी। आप्राकृतिक घटना के भी संकेत हैं। शिवलिंग के श्रृंगार का जिक्र नहीं धर्म के ज्ञाता, महर्षि पाणिनि वेद विद्या संस्थान के पूर्व कुलपति और पूर्व संभागायुक्त डॉ मोहन गुप्त ने इस घटना को लेकर कहा कि हिंदू धर्म में शिवलिंग पर भांग के श्रृंगार का किसी भी शास्त्र में कोई उल्लेख नहीं मिलता है। शुरू से इस बात का विरोध हुआ है। महाकाल के शिवलिंग पर भांग का श्रृंगार नहीं किया जाना चाहिए। शिव पुराण और लिंग पुराण में भी कहीं उल्लेख नहीं है। ऐसी कोई भी परंपरा नहीं रही है। भांग के श्रृंगार से शिवलिंग का क्षरण होता है । कई घंटे तक भांग का शिवलिंग पर लगे रहना क्षरण पैदा करता है। पंडित-पुजारी नहीं मान रहे बात शास्त्र का आधार पंडित पुजारी नहीं मान रहे हैं । अब श्रृंगार अपने आप गिर गया है। यह संकेत है कि खुद महाकाल इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। भांग का श्रंगार उचित नहीं है इसे बंद किया जाना चाहिए। अब प्रशासन और पंडित पुजारी को सोचना चाहिए। यह उचित नहीं है।  

श्रावण में उमड़ी श्रद्धा, तीन बजे खुलते ही महाकाल मंदिर में गूंजा ‘हर हर महादेव’

उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही शुक्रवार से विशेष दर्शन व्यवस्था की शुरुआत हो गई। आज रात तीन बजे मंदिर के पट खुले और भस्म आरती की गई। इस दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़े। मंदिर प्रशासन ने महापर्व को लेकर विशेष तैयारियां की थीं और आकर्षक विद्युत रोशनी से मंदिर को सजाया गया था। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज श्रावण माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुक्रवार की सुबह 3 बजे हुई भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का पंचामृत पूजन-अभिषेक कर शृंगार किया गया। शृंगार के बाद बाबा महाकाल को भस्म रमाई गई। इस दौरान हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शनों का लाभ लिया, जिसके बाद जय श्री महाकाल के उद्घोष से मंदिर परिसर गूंज उठा। कालों के काल विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर मे आज श्रावण माह कृष्ण पक्ष की प्रथम पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती के लिए सुबह 3 बजे मंदिर के पट खुलते ही पण्डे पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी भगवान की प्रतिमाओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर फलों के रस से बने पंचामृत को अर्पित कर किया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल को फूलों की माला धारण करवाई गई। आज के शृंगार की विशेष बात यह रही कि बाबा महाकाल के मस्तक पर त्रिपुंड, त्रिनेत्र लगाकर शृंगारित किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल को फूलों की माला भी अर्पित की गई। साथ ही निराले स्वरूप मे नवीन मुकुट से शृंगारित किया गया। जिसके बाद बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग को महानिर्वाणी अखाड़े के द्वारा भस्म रमाई गई और फिर कपूर आरती कर भोग भी लगाया गया। भस्म आरती में बड़ी संख्या मे श्रद्धालु पहुंचे, जिन्होंने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जय श्री महाकाल का उद्घोष करने लगे। चलित भस्म आरती भी हुई मध्यप्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन के महाकाल मंदिर में आने वाले हर श्रद्धालु को भस्म आरती के दर्शन कराने के उद्देश्य से एक बार फिर मंदिर में चलित भस्म आरती की व्यवस्था शुरू की गई। आज भस्म आरती में चलायमान दर्शन व्यवस्था रही। आज श्रद्धालुओं ने बिना किसी अनुमति के चलते हुए भगवान महाकाल के दर्शन कर किए। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए कार्तिकेय मंडपम में तीन लाइन चलाकर भक्तों को भस्म आरती के दर्शन कराने की व्यवस्था की।