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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महाकाल मंदिर में तैयार हो रहा हीट प्रूफ पाथ-वे

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में गर्मी को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हीट प्रूफ पाथवे का निर्माण कराया गया है। इस पर चलने से श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे।प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया मंदिर समिति अध्यक्ष कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के निर्देश पर ग्रीष्म ऋतु में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसी क्रम में मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर (लगभग 13 हजार स्क्वेयर फीट में ) हीट प्रूफ पाथ-वे (सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट) का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक बनाया जा रहा है। इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे तथा वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे। दर्शन हेतु प्रवेश एवं निर्गम मार्ग पर यह व्यवस्था विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे श्रद्धालु गर्मी के बावजूद सुरक्षित एवं आरामदायक तरीके से भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति ने लिया फैसला बाबा महाकाल के दर्शन करने रोजाना 1 लाख से ज्यादा श्रदालु आते हैं. इन्हीं के साथ वीवीआईपी, राजनेता, अभिनेता, व क्रिकेटर भी बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेकने पहुंचते हैं. उज्जैन व आसपास क्षेत्र में गर्मी भी अपना तेवर दिखा रही है. जिससे महाकाल मंदिर में आने वाले श्रदालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा में श्रद्धालुओं की सुविधान का ध्यान में रखते हुए महाकाल प्रबंधन समिति ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।  महाकाल मंदिर में बनाया जा रहा हीट प्रूफ पाथ-वे जिसमें महाकाल लोक में शेड लगाने व हीट प्रूफ पाथ-वे बनाया जा रहा है. प्रंबधन समिति ने ठंडे पानी, मेटिंग व कूलर की व्यवस्था तो पहल ही कर रखी है. साथ ही गर्मी से बचने के लिए स्प्रिंगर भी लगाए गए हैं. सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि "श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर व अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह, प्रशासक व अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक द्वारा दिए गए निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं।  कहां से कहां तक बन रहा पाथ वे इसी क्रम में मंदिर परिसर व महाकाल महालोक में दर्शन पथ पर लगभग 13 हजार स्क्वायर फीट में हीट प्रूफ पाथ-वे सोलर रिफ्लेक्टिव पेंट का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह हीट प्रूफ पाथ-वे नीलकंठ से पंचमुखी हनुमान, मानसरोवर से होते हुए शंख द्वार एवं बड़ा गणेश मंदिर तक किया जा रहा है. इस हीट प्रूफ पाथ-वे के निर्माण से तपती धूप में भी श्रद्धालुओं के पैर नहीं जलेंगे. वे बिना किसी असुविधा के सहजता से दर्शन पथ पर आवागमन कर सकेंगे।  जलकुंभी निकालने व उसके निपटान के लिए उठाया कदम  श्री महाकालेश्वर मंदिर के पीछे स्थित पौराणिक और धार्मिक महत्व के रुद्र सागर को स्वच्छ रखने के लिए उज्जैन नगर निगम ने एक बार फिर कवायद शुरू की है। निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा रुद्र सागर (बड़ा एवं छोटा) से जलकुंभी निकालने और उसके निपटान के लिए वार्षिक सफाई का टेंडर जारी किया गया है। अनुमानित लागत 14 लाख 55 हजार रुपये तय की है। कहा है कि यह अनुबंध एक वर्ष के लिए होगा। रुद्र सागर उज्जैन के उन पौराणिक सप्त सागरों में शामिल है, जिनका शास्त्रों में विशेष उल्लेख है। इसके केंद्र में सम्राट विक्रमादित्य की अपने नौ रत्नों के साथ विशाल प्रतिमा स्थापित है, जो उज्जैन के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। सागर की दीवारों पर सम्राट विक्रमादित्य काल के प्रतीक चिन्ह और 32 पुतलियां इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती हैं। प्रशासन का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व है कि महाकाल मंदिर के इतने करीब स्थित इस जल निकाय को सदैव स्वच्छ रखा जाए। विशेष रूप से 2022 में महाकाल महालोक के निर्माण के बाद यहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। नगर निगम द्वारा अब वार्षिक सफाई का टेंडर जारी करना इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस समस्या का स्थाई समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल टेंडर जारी करने से काम नहीं चलेगा; सफाई की निरंतरता और गुणवत्ता की निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि करोड़ों की लागत से संवारा गया यह पौराणिक सागर अपनी पहचान न खोए। करोड़ों का बजट, फिर भी उपेक्षा का शिकारहैरानी की बात यह है कि बीते डेढ़ दशकों में रुद्र सागर के सुंदरीकरण और सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। 2022 से पहले यह क्षेत्र घोर उपेक्षा का शिकार था। महालोक के निर्माण के बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अनुभव यह रहा है कि रुद्र सागर साल में केवल दो से चार महीने ही साफ रह पाता है। शेष समय यह जलकुंभी की मोटी चादर से ढंका रहता है, जो न केवल जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि आने वाले श्रद्धालुओं के अनुभव को भी खराब करती है।  

प्रबंधन सुधार की दिशा में कदम: महाकाल मंदिर में पांच न्यास गठन को मंजूरी

उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में व्यवस्थाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए पांच नए न्यास बनाए जाएंगे। इनके माध्यम से अन्न क्षेत्र, भक्त निवास, पारमार्थिक गतिविधियों का संचालन, शैक्षणिक तथा चिकित्सा सेवा जैसे प्रकल्प पृथक-पृथक संचालित होंगे। यह निर्णय शनिवार को कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में लिया गया है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि बैठक में प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं व सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें महाकाल महालोक में 11 करोड़ की लागत से फैब्रिकेशन शेड, संध्या एवं शयन आरती के महत्व का प्रचार-प्रसार, क्यूआर कोड आधारित फैल्प बैरियर लगाने, महाकालेश्वर अन्नक्षेत्र में अन्नदान/भोजन की आनलाइन बुकिंग, 80 नई दानपेटियां लगाने, मंदिर समिति के कर्मचारियों को वेतन के साथ महंगाई भत्ता देने और सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था के विस्तारित का निर्णय शामिल है।

महाकाल मंदिर के अन्न क्षेत्र में ऑनलाइन दान की सुविधा, आरती में शामिल होकर प्रसाद चढ़ाने का विकल्प

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी सुविधा शुरू होने जा रही है. अब बाबा के भक्त दुनिया के किसी भी कोने से मंदिर के अन्न क्षेत्र में दान कर सकेंगे. मंदिर समिति पहली बार अन्नदान की पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन करने जा रही है. मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह डिजिटल सेवा संभवतः अगले सोमवार से लागू हो सकती है।  क्या है अन्नक्षेत्र की नई डिजिटल व्यवस्था? अक्सर लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या अपनों की पुण्यतिथि पर अन्नदान करना चाहते हैं. शास्त्रों में अन्नदान को ‘महादान’ कहा गया है. पहले इसके लिए भक्तों को मंदिर आकर रसीद कटवानी पड़ती थी. लेकिन, अब मंदिर समिति ने इसे डिजिटल बना दिया है. अब भक्त महाकाल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसी विशेष दिन को बुक कर सकेंगे. वहां निर्धारित सहायता राशि जमा करके अन्नदान का पुण्य लाभ लिया जा सकता है।  महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की सहायक प्रशासक सिम्मी यादव के अनुसार, मंदिर का विशाल अन्नक्षेत्र पूरी तरह से जन-सहयोग और दान पर टिका है। इस नई डिजिटल पहल से पारदर्शिता बढ़ेगी और दूर-दराज के भक्त भी सेवा कार्य से जुड़ सकेंगे। सोमवार से लागू होगी नई व्यवस्था     मंदिर प्रशासन के अनुसार, ऑनलाइन दान की यह नई व्यवस्था आगामी सोमवार से विधिवत शुरू हो जाएगी।     श्रद्धालु मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट      http://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in पर जाकर "Donation" सेक्शन के माध्यम से आसानी से राशि जमा कर सकते हैं। अन्नक्षेत्र: प्रतिदिन 10,000 श्रद्धालु ग्रहण करते हैं प्रसादी महाकाल मंदिर का अन्नक्षेत्र अपनी सेवा और शुद्धता के लिए जाना जाता है। यहाँ:     प्रतिदिन दो शिफ्ट में भोजन प्रसादी का वितरण होता है।     रोजाना लगभग 10,000 श्रद्धालु नि:शुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं।     पहले केवल ऑफलाइन (मंदिर पहुंचकर) दान की सुविधा होने के कारण कई इच्छुक भक्त इस सेवा का लाभ नहीं उठा पाते थे। भोजन प्रसादी और दान राशि  सेवा का प्रकार    निर्धारित दान राशि दोनों समय के भोजन के लिए    ₹1,10,000 एक समय के भोजन के लिए    ₹51,000 मीठे प्रसाद (मिठाई) के लिए    ₹21,000 साल भर पहले से कर सकेंगे एडवांस बुकिंग इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब श्रद्धालु पूरे वर्ष में किसी भी तारीख के लिए अग्रिम (Advance) बुकिंग कर सकेंगे। लोग अपने जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ या परिजनों की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर पहले से ही भोजन प्रसादी सुरक्षित कर सकते हैं। भगवान को स्वयं लगा सकेंगे भोग डिजिटल दान करने वाले भक्तों के लिए मंदिर समिति ने एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव की भी योजना बनाई है। दानदाताओं को भोग आरती के समय मंदिर में आमंत्रित किया जाएगा और उनके स्वयं के हाथों से भगवान महाकाल को भोग अर्पित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रतिदिन लगता है विशेष भोग बाबा महाकाल को प्रतिदिन सुबह 10 बजे विशेष भोग लगाया जाता है। इसमें शुद्ध घी की रोटियां, दाल-चावल और दो प्रकार की मौसमी सब्जियां शामिल होती हैं। कई श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर मिठाई भी अर्पित करते हैं। भगवान को भोग लगाने के पश्चात ही अन्नक्षेत्र में आम श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी शुरू की जाती है। बाबा को भोग लगाने का विशेष अवसर इस डिजिटल पहल की सबसे बड़ी विशेषता ‘भोग’ से जुड़ी है. सहायक प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि ऑनलाइन दान करने वाले भक्तों को बाबा महाकाल को भोग अर्पित करने का अवसर मिलेगा. दानदाता अपने परिवार के साथ मंदिर आ सकते हैं. मंदिर के कर्मचारी उन्हें बाबा महाकाल के पास लेकर जाएंगे. वहां भक्त अपने हाथों से बाबा को भोग लगा सकेंगे और इस अनूठी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।  दान से चलता अन्न क्षेत्र सिम्मी यादव ने बताया, महाकाल मंदिर का अन्न क्षेत्र पूरी तरह से दानदाताओं के सहयोग से संचालित होता है. यहां प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार श्रद्धालु निशुल्क भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं. भोजन व्यवस्था रोजाना दो अलग-अलग शिफ्ट में चलती है. सहायक प्रशासक के अनुसार, अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को मंदिर के सेवा कार्यों से जोड़ने के उद्देश्य से यह नवाचार किया गया है. जो भक्त किन्हीं कारणों से उज्जैन नहीं आ पाते हैं, वे अब घर बैठे ही अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे. यह डिजिटल माध्यम उनके खास पलों को और भी यादगार बनाएगा। 

एकता कपूर ने किए महाकाल के दर्शन, उज्जैन में दर्शन कर बोलीं – मन को मिली गहरी शांति

उज्जैन उज्जैन महाकाल के दर्शनों के लिए बडी से बडी हस्तियां पहुंचती ही रहती हैं।  इसी कड़ी में प्रसिद्ध टेलीविजन सीरियल निर्माता और फिल्म प्रोड्यूसर एकता कपूर आज अपनी टीम के साथ विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। उन्होंने अपनी आगामी वेब सीरीज ‘लॉकअप’ की सफलता की कामना को लेकर बाबा महाकाल के दरबार में विधिवत पूजन-अर्चन किया। एकता कपूर ने नंदी हॉल से भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए और पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न की। इस दौरान दर्शनों के पश्चात उन्होंने “जय श्री महाकाल” का उद्घोष भी किया, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में गूंज उठा। इस अवसर पर एकता कपूर के साथ फिल्म एवं टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्रियां दीपशिखा नागपाल, नीलम कोठारी, विद्या मालवदे, सीमा किरण सचदेव एवं पूजा भी उपस्थित रहीं। सभी अभिनेत्रियों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और मंदिर की दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा को अनुभव किया। मंदिर में दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं में भी खासा उत्साह देखने को मिला। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से एकता कपूर एवं उनके साथ आई सभी अभिनेत्रियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत एवं सत्कार किया गया। समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें बाबा महाकाल की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया और सुख-समृद्धि की कामना की। दर्शन के बाद एकता कपूर ने कहा कि उज्जैन आकर बाबा महाकाल के दर्शन करना उनके लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। उन्होंने विश्वास जताया कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से उनका नया प्रोजेक्ट दर्शकों का भरपूर प्रेम प्राप्त करेगा। इस धार्मिक यात्रा ने न सिर्फ टीम को मानसिक शांति दी, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा से भी भर दिया।  

‘मंदिर प्रबंधन में दखल नहीं’—महाकाल मंदिर वीआईपी दर्शन मामले में याचिका निरस्त

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी दर्शन के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक मामलों का नियमन न्याय क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और मंदिर प्रबंधन के लोग ही ऐसे मुद्दों पर फैसला करें। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस आर महादेवन और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी को इस संबंध में मंदिर रअथॉरिटी के सामने अपनी बात रखने को कहा। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिए गए अहम तर्क     अदालत के याचिका खारिज करने के बाद याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका वापस लेने क अनुमति मांगी और अपनी बात संबंधित अधिकारियों के सामने रखने की बात कही।     इस याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें पवित्र शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए वीआईपी दर्शन के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था। विष्णु शंकर जैन ने याचिका में कहा कि मंदिर के गर्भगृह में एंट्री के मामले में हर नागरिक के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।     मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं हैं और यह उन लोगों पर निर्भर है, जो शीर्ष पर हैं, कि वे खुद ऐसे मुद्दों पर फैसला करें। उन्होंने कहा, 'VIP एंट्री की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, यह कोर्ट को तय नहीं करना है।' मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि गर्भगृह के अंदर मौलिक अधिकारों को सख्ती से लागू करने से अनजाने परिणाम हो सकते हैं।     मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'अगर हम यह मानते हैं कि अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) गर्भगृह के अंदर लागू होता है, तो लोग अन्य अधिकारों जैसे अनुच्छेद 19 (भाषण की स्वतंत्रता) का भी दावा करेंगे। पहले, आप कहेंगे कि मुझे प्रवेश करने का अधिकार है क्योंकि कोई और प्रवेश कर रहा है; फिर आप कहेंगे कि मुझे यहां मंत्रों का जाप करने का अधिकार है क्योंकि मुझे भाषण का अधिकार है। तब सभी मौलिक अधिकारों का दावा गर्भगृह के अंदर किया जाएगा।'     इस पर विष्णु शंकर जैन ने कहा कि नागरिकों के साथ वीआईपी दर्जे के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। जैन ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति गर्भगृह में प्रवेश कर रहा है, तो यह अक्सर कलेक्टर की सिफारिश के कारण होता है। एक नियमित भक्त को देवता को जल चढ़ाने का वही अधिकार होना चाहिए।' उन्होंने तर्क दिया कि या तो सभी के लिए एंट्री पर पूरी तरह रोक होनी चाहिए या सभी को बराबर मंजूरी मिलनी चाहिए।     इससे पहले उच्च न्यायालय ने कहा था कि वीआईपी किसी भी एक्ट या नियम में परिभाषित नहीं है और इसके बजाय यह मंदिर प्रबंधन समिति और कलेक्टर द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले प्रशासनिक विवेक का मामला है।

भक्ति का अनोखा उत्सव: मनोकामना पूरी होने पर महाकाल को 2.35 किलो चांदी का मुकुट चढ़ाया

उज्जैन   सोमवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में श्री महाकालेश्वर मंदिर में एक भक्त ने बाबा महाकालेश्वर को 2 किलो 350 ग्राम का चांदी का मुकुट चढ़ाया, जिस पर चांद बना हुआ था। गुजरात के जामनगर के रहने वाले भक्त प्रदीप गुप्ता ने अपनी मन्नत पूरी होने के बाद यह मुकुट भेंट किया। उन्होंने बाबा महाकालेश्वर की भस्म आरती में हिस्सा लिया और समारोह के दौरान भगवान महाकाल को चांदी का मुकुट चढ़ाया। मंदिर के पुजारी ने सोमवार को भस्म आरती के दौरान बाबा महाकालेश्वर को यह नया मुकुट पहनाया। भस्म आरती के बाद प्रदीप गुप्ता ने बताया कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और हमने अपनी पिछली यात्रा के दौरान एक मन्नत मांगी थी। बाबा ने उसे सिर्फ तीन महीने में पूरा कर दिया। इसीलिए मैं पूरी टीम के साथ यहां आया हूं, क्योंकि बाबा ने हमारा (विंड पावर) प्रोजेक्ट छह महीने के बजाय तीन महीने में ही पूरा कर दिया। इसलिए हम सभी बाबा का आशीर्वाद लेने और उन्हें यह छोटा सा तोहफा देने आए हैं। मुकुट का वजन 2 किलो 350 ग्राम है।" धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त भस्म आरती में शामिल होते हैं या भाग लेते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें भगवान महाकाल का दिव्य आशीर्वाद मिलता है। मंदिर की परंपराओं के अनुसार, यह अनुष्ठान सुबह-सुबह मंदिर के दरवाज़े खुलने के साथ शुरू होता है, जिसके बाद देवता को पंचामृत से पवित्र स्नान कराया जाता है। पंचामृत दूध, दही, घी, चीनी और शहद का एक पवित्र मिश्रण है। स्नान के बाद, शिवलिंग को भांग और चंदन के लेप से सजाया जाता है, जो पवित्रता और पावनता का प्रतीक है। यह अनुष्ठान अनोखी भस्म आरती और धूप-दीप आरती के साथ जारी रहता है, जिसमें ढोल की लयबद्ध थाप और शंख की गूंजती आवाज़ें शामिल होती हैं। आरती जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक है, जो भगवान शिव की बुराई को नष्ट करने वाले और समय के अवतार के रूप में शाश्वत उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करती है। श्री महाकालेश्वर, जो भारत के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं, हिंदू आध्यात्मिकता में बहुत महत्व रखते हैं। देश भर से लोग साल भर मंदिर में भस्म आरती देखने आते हैं, यह मानते हुए कि इस पवित्र अनुष्ठान में शामिल होने से दिव्य आशीर्वाद, सुरक्षा और इच्छाओं की पूर्ति होती है।

महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं ने खरीदी तीन करोड़ की लड्डू, 12 दिन में 573 क्विंटल बेसन लड्डू की बिक्री

उज्जैन उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में लड्डू प्रसादी को लेकर खास रुझान देखने को मिल रहा है। पौष्टिकता से भरपूर होने के बावजूद रागी अन्न प्रसाद का लड्डू श्रद्धालुओं को अपेक्षाकृत कम पसंद आ रहा है, जबकि बेसन का लड्डू उनकी पहली पसंद बनता जा रहा है। मांग और बिक्री के आंकड़े इस बदलते रुझान को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।   रविवार को हुई बेसन लड्डू की रिकॉर्ड बिक्री रविवार को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान मंदिर समिति के 10 काउंटरों से कुल 58.528 क्विंटल बेसन का लड्डू बिके, जिससे 28 लाख 3 हजार 50 रुपये की आय हुई। वहीं रागी लड्डू की बिक्री मात्र 6.11 क्विंटल रही, जिससे 2 लाख 84 हजार 100 रुपये प्राप्त हुए। आंकड़ों के अनुसार, रागी की तुलना में बेसन लड्डू की मांग लगभग दस गुना अधिक रही।   100 रुपये वाला पैकेट सबसे ज्यादा लोकप्रिय लड्डू प्रसादी की खरीद में श्रद्धालुओं ने अलग-अलग पैकेटों को प्राथमिकता दी। सबसे अधिक मांग 100 रुपये वाले पैकेट की रही, जिसमें बेसन के 18,540 और रागी के 1,215 पैकेट बिके। 50 रुपये वाले पैकेट में बेसन के 9,113 और रागी के 1,540 पैकेट की बिक्री हुई। वहीं 200 रुपये वाले आधा किलो के पैकेट में बेसन के 2,467 और रागी के 428 पैकेट श्रद्धालुओं ने खरीदे। एक दिन में 30 लाख से अधिक का विक्रय मंदिर समिति ने अकेले रविवार को रागी और बेसन दोनों प्रकार के लड्डू प्रसादी से कुल 30 लाख 87 हजार रुपये से अधिक का विक्रय किया। समिति का कहना है कि लड्डू प्रसादी श्रद्धालुओं को ‘नो लॉस, नो प्रॉफिट’ के आधार पर उपलब्ध कराई जाती है, ताकि आस्था के साथ गुणवत्ता भी बनी रहे।   12 दिनों में 643 क्विंटल लड्डू की बिक्री शीतकालीन अवकाश के दौरान 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक के 12 दिनों में मंदिर समिति ने कुल 643.409 क्विंटल लड्डू प्रसादी का विक्रय किया। इस अवधि में 573.118 क्विंटल बेसन लड्डू से 2 करोड़ 73 लाख 93 हजार 600 रुपये और 70.291 क्विंटल रागी लड्डू से 32 लाख 50 हजार 800 रुपये की बिक्री दर्ज की गई।   गुणवत्ता और भविष्य की उम्मीद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि लड्डू निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है। प्रतिदिन खाद्य प्रशासन के निरीक्षक नमूने लेकर जांच करते हैं और शुद्ध सामग्री का ही उपयोग होता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में श्री अन्नप्रसाद यानी रागी लड्डू की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।  

महाकाल मंदिर दर्शन पर विवाद: नुसरत भरूचा के खिलाफ फतवा, मौलाना ने कहा माफी मांगें

उज्जैन  बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा बीते मंगलवार को उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर पहुंची थीं. वह बाबा महाकाल के दर्शन कर भस्म आरती में शामिल हुईं थी. अब नुसरत भरूचा के महाकाल मंदिर पहुंचने पर विवाद खड़ा हो गया है. ऑल इंडिया जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने नुसरत भरूचा के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है. उन्होंने कहा कि, ''दूसरे धर्म की परंपराओं का पालन कर इस्लाम के खिलाफ है.'' नुसरत भरूचा के खिलाफ फतवा जारी नुसरत भरूचा के महाकाल मंदिर जाने पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सवाल उठाए हैं. ऑल इंडिया जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन का कहना है कि, ''नुसरत ने मंदिर में जाकर पूजा पाठ किया, भगवान को जल चढ़ाया, दर्शन किए, चादर ओढ़ी, माथे पर तिलक लगाया. यह तमाम चीजें शरीयत की नजर में गुनाह हैं. उन्होंने शरीयत के उसूलों का उल्लंघन किया है. इसलिए वह तौबा करें और कलमा पढ़ें. इस्लाम इन सब चीजों की इजाजत नहीं देता है.'' इस मामले पर भोपाल के मुफ्ती रईस अहमद कसमी ने कहा कि, ''मुसलमान एक अल्लाह को मानता है. किसी के सामने सजदा करना मुसलमान को जायज नहीं है. एक्ट्रेस नुसरत भरूचा के खिलाफ जो फतवा जारी हुआ है वह सोच समझ कर जारी किया होगा. इस्लाम में इस तरह की कोई जगह नहीं है, जहां मूर्ति पूजा की जाए.'' ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने भरूचा के महाकाल दर्शन करने को इस्लाम के विरुद्ध बताया है। हालांकि उज्जैन के साधु-संतों का कहना है कि भगवान महाकाल सबके हैं और भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति सनातनी, ऐसे में अगर नुसरत के मन में भोले की भक्ति का भाव आता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। BJP बोली-संविधान ने फ्रीडम दिया है नुसरत भरूचा के खिलाफ जारी फतवे पर बीजेपी प्रवक्ता डॉ. वाणी अहलुवालिया का रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने कहा कि, ''संविधान ने हमको फ्रीडम दिया है कि हम कहीं भी आ जा सकते हैं. यह समाज की सोच है, परम परमेश्वर ने एक ही रास्ता बनाया है तो वह रास्ता भी एक ही है, कोई भी कही जा सकता है, यह उसका अपना अधिकार है. इसमें किसी भी तरह के मजहब और जाति के नाम पर फतवा जारी करना ठीक नहीं है.'' यह बोले जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद महाराज जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर शैलेशानंद महाराज ने कहा कि भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति सनातनी है। अगर हम 1500 साल पीछे जाएंगे, तो पाएंगे की उस समय तो केवल सनातन वैदिक हिंदू धर्म ही था। इसलिए आज कोई अपने आप को किसी भी धर्म का कहे, लेकिन वह है तो सानातनी। अभिनेत्री नुसरत भरूचा के मन में भी शिव भक्ति का भाव इसीलिए आया है। वैसे भी भगवान महाकाल सबके हैं उनका दर्शन करने किसी भी जाति, धर्म का व्यक्ति आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है। नुसरत भरूचा अगर महाकाल दर्शन करने आती हैं, तो इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अगर कोई विरोध करता है, तो यह संविधान का अपमान है।  सभी धर्मों का सम्मान करती है कांग्रेस कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हाफिज का कहना है कि, ''संविधान ने हमको आजादी दी है, हम कहीं भी आ जा सकते हैं. किसी भी धर्म को मान सकते हैं, इसमें कांग्रेस पार्टी किसी भी तरह का कोई हस्तक्षेप करना नहीं चाहती है. रही नुसरत भरूचा के खिलाफ फतवा जारी करने की बात तो यह उनका निजी मामला हो सकता है. जिन मुफ्ती साहब ने यह फतवा जारी किया है उनकी क्या सोच है इससे कांग्रेस का कोई लेना-देना नहीं है. हम सभी धर्मों का आदर सम्मान करते हैं.'' नुसरत भरूचा ने किए बाबा महाकाल के दर्शन फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने मंगलवार को महाकाल मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन किए थे. उन्होंने काफी वक्त मंदिर में बिताया था. नंदी हाल में बैठकर हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए उनकी तस्वीरें भी सामने आई थीं. इस दौरान उन्होंने दर्शन व्यवस्था की काफी तारीफ की थी. नुसरत ने हर साल महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन की इच्छा जताई थी. यह नुसरत भरूचा का महाकाल मंदिर में दूसरा दौरा था. इससे पहले भी वह एक बार मंदिर आ चुकी हैं. 

महाकाल महालोक बनने के बाद महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं और दान की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी, 5.5 करोड़ भक्तों ने किए दर्शन

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर साल 2025 मे भी देश-विदेश के आस्थावानों का प्रमुख केंद्र रहा। एक जनवरी 2025 से अब तक 5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इसी के साथ मंदिर में 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान भी आया। करीब 13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट के रूप में प्राप्त हुआ है। कुल मिलाकर यह गत वर्ष की तुलना में अधिक है। बीते वर्ष 92 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए थे। 12 ज्योतिर्लिंग में से एक बाबा महाकाल का धाम लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है। वर्ष 2025 में बाबा महाकाल के धाम में धन वर्षा का हैरान कर देने वाला आंकड़ा सामने आया है। एक अरब रुपये से अधिक का दान मंदिर समिति को वर्ष भर में अलग-अलग माध्यमों से मिला है। मंदिर समिति के अनुसार एक जनवरी 2025 से 15 दिसंबर 2025 तक 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने साल भर में यह दान राशि अलग-अलग माध्यमों से दी है। प्रत्येक वर्ष श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के द्वारा यह आंकड़ा मंदिर समिति द्वारा जारी किया जाता है। महाकाल महालोक बनने के बाद से लगातार दान में भी बढ़ोतरी हुई है। यह सभी दान राशि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुविधा सुगम दर्शन व्यवस्थाओं में उपयोग में ली जाती है। बाबा महाकाल का दरबार मंदिर समिति अध्यक्ष और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया की साल भर में जो सावन का महीना था। उसी में लगभग 30 करोड़ का दान मंदिर समिति को मिला है। जिससे समझ में आता है कि प्रत्येक वर्ष दान राशि मंदिर में बढ़ रही है, क्योंकि पिछले वर्ष सावन के महीने में यह आंकड़ा 21-22 करोड़ का था। ऐसे में साल भर का जो आंकड़ा आया है। वह वाकई हैरान करता है। मंदिर समिति इसी दान राशि से अपनी तमाम व्यवस्थाओं को संचालित करती है। पिछले साल 2024 में जो दान राशि थी, वह लगभग 92 करोड़ रुपये की थी इस बार अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में 15 करोड़ अधिक दान मिला है। यानि इस बार 1 अरब 07 करोड़ 93 लाख है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते 11 महीने 15 दिनों में कुल 107 करोड़ 93 लाख की आय दान पेटी और शीघ्र दर्शन, आभूषणों के माध्यम से हुई है। जिसमें 592.366 किलो चांदी, 1483.621 ग्राम सोना, जिनकी कीमत लगभग 13 करोड़ से अधिक है। साल भर में अभी 2 दिन शेष है, ऐसे में उम्मीद है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा। प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया की 2025 में 1483.621 ग्राम सोना जो 2024 में 1533 ग्राम था, 592.366 ग्राम चांदी 2025 में जो 2024 में 399 किलो थी। यानी इस वर्ष चांदी का दान ज्यादा मिला है। 13 करोड़ से अधिक के आभूषण हैं। ऐसे ही नकद राशि 43 करोड़ 43 लाख, शीघ्र दर्शन से 64 करोड़ 50 लाख की राशि मिली है। महाकाल महालोक बनने के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक बनने और अक्तूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसका लोकार्पण करने के बाद से ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। पहले मंदिर में रोजाना 35 से 40 हजार श्रद्धालु आते थे। श्री महाकाल महालोक के बाद संख्या 80 हजार से एक लाख प्रतिदिन पहुंच गई। पर्व त्योहार जैसे श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि आदि पर ये संख्या दो लाख के पार हो जाती है। अनुमान है कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी। एक नजर इस साल के आंकड़ों पर     5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने किए महाकाल दर्शन।     43 करोड़ रुपये विभिन्न दानपेटियों से भेंट के रूप में प्राप्त हुए।     64 करोड़ रुपये शीघ्र दर्शन व्यवस्था (टिकट) से मंदिर समिति को प्राप्त हुए।     13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट स्वरूप मंदिर को मिला है। क्या शामिल क्या नहीं….? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि 1 अरब से अधिक के दान में शीघ्र दर्शन, दान पेटी, लड्डू प्रसादी, नगद और आभूषणों को जोड़ा गया है। दान राशि में भस्म आरती बुकिंग, अभिषेक पूजन, अन्न क्षेत्र, धर्मशाला बुकिंग, फोटोग्राफी मासिक शुल्क, भांग एवं ध्वज बुकिंग उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय को शामिल नहीं किया गया है।  

महाकाल मंदिर में भक्तों की आस्था और दान बढ़ा, 13 करोड़ रुपये के आभूषण और 1 अरब रुपये से अधिक दान प्राप्त

उज्जैन  उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर लंबे समय से भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। हमेशा से ही यहां भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन जब से महाकाल लोक का निर्माण हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला है। देश-विदेश जाने वाले श्रद्धालु दर्शन तो कर ही रहे हैं दिल खोलकर दान भी दे रहे हैं। पहले मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन 40 से 50 हजार हुआ करती थी। अब ये आंकड़ा डेढ़ से 2 लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच गया है। भक्तों की संख्या बढ़ने के साथ मंदिर में आने वाले दान में भी वृद्धि हुई है। सोना चांदी से लेकर नगदी मंदिर में दान किया जा रहा है। बढ़ते श्रद्धालु और बढ़ता दान अभी तक 11 महीने में 5.50 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। इस दौरान मंदिर समिति को 43 करोड़ 43 लाख रुपए नगद मिला है। वहीं 13 करोड़ रुपए से ज्यादा के सोने चांदी के आभूषण प्राप्त हुए हैं। मंदिर में अलग-अलग जगह पर दान पेटियां लगी हैं, जिनमें से 43 करोड़ 43 लाख की आय हुई है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था से हुई आय 64 करोड़ 50 लाख रुपए है। इस तरह से कुल आय का आंकड़ा 107.93 करोड़ है। यह आंकड़ा 1 जनवरी 2025 से 15 दिसंबर तक का है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु सोना-चांदी के साथ-साथ नगदी भी दान कर रहे हैं। महाकाल मंदिर में बीते 11 महीनों में 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इस दौरान भक्तों ने करीब 13 करोड़ रुपए मूल्य का सोना-चांदी दान किया है, जबकि नकद दान के रूप में 43 करोड़ 43 लाख रुपए मंदिर समिति को प्राप्त हुए हैं। इस वर्ष 1 जनवरी से 15 दिसंबर तक कुल 5.5 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर लगी दान पेटियों से महाकाल मंदिर समिति को 43 करोड़ 43 लाख रुपए का दान प्राप्त हुआ है। वहीं शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर समिति को करीब 64 करोड़ 50 लाख रुपए की आय हुई है। पिछले वर्ष 2024 में भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को कुल 92 करोड़ रुपए की आय हुई थी। इस वर्ष, पिछले साल की तुलना में करीब 15 करोड़ रुपए अधिक दान भगवान महाकाल को प्राप्त हुआ है। दान में क्या मिला महाकाल मंदिर में अब तक मिले दान में 1483.621 ग्राम सोना, 592.366 किलोग्राम चांदी, दान पेटियां से 43 करोड़ 43 लाख रुपए, शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 64 करोड़ 50 लाख रुपए। श्रद्धालुओं ने जो सोने के आभूषण दान किए हैं उनकी कीमत 1 करोड़ 82 लाख और चांदी की कीमत 11 करोड़ 85 लाख के आसपास बताई जा रही है। श्रद्धालुओं ने कुल मिलाकर 13 करोड़ से ज्यादा के आभूषण दान किए हैं। पिछले वर्ष कितना था दान इस वर्ष आए दान की तुलना साल 2024 से करें तो पिछली बार सोना अधिक दान किया गया था। 1 जनवरी 2024 से 13 दिसंबर 2024 तक 399 किलो चांदी और 1533 ग्राम सोना दान में आया था। इस वर्ष सोना चांदी की कीमत में भारी अंतर आया है, जिसका असर दान पर भी हुआ है। एक अरब 7 करोड़ दान पेटी और शीघ्र दर्शन से आय इस बार भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को 11 माह 15 दिन में 107 करोड़ 93 लाख रुपए की आय हुई है। अभी 15 दिन शेष हैं जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के महाकाल मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। महाकाल मंदिर में अन्य स्त्रोताें से होने वाली आय जैसे भस्म आरती बुकिंग,अभिषेक पूजन की आय, अन्न क्षेत्र से आय, धर्मशाला बुकिंग आय,फोटोग्राफी मासिक शुल्क आय, भांग एवं ध्वजा बुकिंग से आय,उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय शामिल नहीं। इस वर्ष अब तक यह दान मिला     सोना 1483.621 ग्राम।     चांदी 592.366 किग्रा।     दान पेटियों से 43 करोड़ 43 लाख रुपए।     शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 64 करोड़ 50 लाख। 13 करोड़ से अधिक के आभूषण दान आए महाकाल मंदिर में एक जनवरी 2025 से लेकर पंद्रह दिसंबर 2025 तक के बीच में श्रद्धालुओं ने 592.366 किग्रा चांदी और 1483.621 ग्राम सोना बाबा महाकाल को दान किया है। दान आए आभूषणों में सोने की कीमत करीब 1 करोड़ 82 लाख रुपए तो चांदी की कीमत 11 करोड़ 85 लाख रुपए के आसपास है। महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने एक वर्ष से भी कम समय में 13 करोड़ रुपए से अधिक के तो सिर्फ आभूषण ही दान कर दिए। पिछले वर्ष की तुलना में 193 किलो चांदी अधिक भक्तों ने वर्ष 2024 में इस वर्ष की तुलना में सोना अधिक दान किया था। इस वर्ष चांदी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक दान में मिली है। साल 2024 में 1 जनवरी से 13 दिसंबर 2024 तक भक्तों ने 399 किलो चांदी और 1533 ग्राम सोना बाबा महाकाल को दान किया था। हालांकि पिछले वर्ष और इस वर्ष सोने और चांदी की कीमत में काफी अंतर आने से बाबा महाकाल को मिलने वाले दान की कीमत में करीब 10 करोड़ रुपए का अंतर आ गया। साल 2024 में 64 किलो आभूषण ऐसे थे जो दानपेटी से निकले थे, जिसमें हीरे की अंगूठी, कीमती घड़ी, डॉलर सहित अन्य देशों की मुद्रा भी शामिल थे। 15 दिसंबर तक 5.50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे वर्ष 2025 खत्म होने को है इससे पहले महाकाल मंदिर से मिले आंकड़ों को देखें तो सामान्य दिनों में मंदिर दर्शन के रोजाना 1.20 लाख श्रद्धालु आ रहे हैं। वीक एंड में डेढ़ से पौने दो लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि एक जनवरी से दिसंबर माह के शुरुआत तक मंदिर में अब तक पांच करोड़ पचास लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चुके है। 25 दिसंबर से 31 जनवरी तक करीब 6 लाख श्रद्धालुओं के मंदिर में पहुंचने की संभावना है। दो … Read more