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मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के छात्रों को कक्षा 1 से 8 तक मिलेगा फ्री दूध, बड़ी खुशखबरी

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को डॉ. अंबेडकर नगर (महू) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को दूध उपलब्ध कराने का भी एलान किया। सीएम ने बताया कि अगले एकेडमिक सेशन से बच्चों के लिए ये व्यवस्था कर दी जाएगी। सीएम ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि 'हमारी सरकार गरीब, महिला, युवा, किसान सबकी बेहतरी के लिए है। हम तो दूध का उत्पादन बढ़ाने वाले लोग हैं। ऐसे में स्कूल के अंदर, सरकारी स्कूलों में भी कक्षा 1 से लेकर 8 तक बच्चों को अगले सत्र से दूध पिलाने की व्यवस्था सरकार के माध्यम से करने वाले हैं।' बजट में भी हो चुका इसका एलान विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 16 फरवरी को छठवीं बार बजट पेश किया था जिसमें बच्चों को दूध देने की बात कही गई थी। बजट भाषण के दौरान उन्होंने जानकारी दी थी कि बच्चों को टेट्रा पैक में दूध दिया जाएगा। महू-खंडवा रेलवे लाइन जल्द सीएम ने जानकारी दी है कि 'भविष्य की दृष्टि से सर्वसुविधायुक्त 'सांदीपनि विद्यालय' पूरे प्रदेश में बन रहे हैं। आने वाले समय में महू-खंडवा रेलवे लाइन प्रारंभ होने से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और क्षेत्र के विकास को गति भी मिलेगी। राज्य में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहित कर निवेशकों को इंडस्ट्री ग्रोथ के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार हर क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।' टेंपल मैनेजमेंट के लिए एकेडमिक कोर्स सीएम ने जानकारी दी है कि 'सरकार ने विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर टेंपल मैनेजमेंट के लिए एकेडमिक कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके जरिए मंदिर प्रबंधन को पेशेवर और रोजगारपरक बनाया जाएगा।' आपको बता दें कि मुख्यमंत्री इंदौर जिले के महू विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत महूगांव में 85 करोड़ रुपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, विधायक सुश्री उषा ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू: 9वीं से 12वीं तक बच्चों को प्रतिदिन 200 ग्राम दूध मिलेगा

चंडीगढ़ देसां म्ह देस हरियाणा, जित दूध-दही का खाना यह कहावत हरियाणा की खानपान संस्कृति और पौष्टिकता को दर्शाती है। हरियाणा में पहली बार सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के प्रति बच्चे को 200 ग्राम दूध सप्ताह में चार दिन मिलेगा। इसके अतिरिक्त एक मिल्कबार या पिन्नी भी शामिल की जाएगी। देश के भविष्य बच्चों के स्वास्थ्य के हितकारी कदम उठाने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी के बाद यह लाभकारी योजना सरकारी स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू हो जाएगी।  मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के मार्गदर्शन में योजना को अमलीजामा पहनाने का ब्योरा तैयार किया गया है। अब योजना को बच्चों तक पहुंचाने के लिए आखिरी मंजूरी सीएम नायब सिंह सैनी ने दे दी है। मिड-डे-मील के तहत सरकारी स्कूलों में पोषण पदार्थ बच्चों को देने की व्यवस्था आठवीं कक्षा तक लागू है। 6.20 लाख बच्चों को मिलेगा लाभ प्रदेशभर में तकरीबन 14,300 सरकारी स्कूल संचालित है। वर्तमान में 9वीं से 12वीं कक्षा तक तकरीबन 6.20 लाख विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में इस योजना का लाभ सभी बच्चों को मिलेगा। हालांकि, आगामी शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की संख्या में कमी या वृद्धि होने के मद्देनजर योजना को लागू करने की तैयारी की गई है। 35 से 40 करोड़ रुपये की सालाना लागत शिक्षा विभाग के अनुसार इस योजना को लागू करने के लिए पैक्ड दूध की खरीद की जाएगी। इसके लिए खाद्य व आपूर्ति विभाग के साथ एमओयू साइन किया जाएगा। ताकि दूध की आपूर्ति की जिम्मेदारी विभाग की ओर से निर्धारित की जा सके। साथ ही स्कूल स्तर पर सप्ताह में चार दिन तक बच्चों को दूध के वितरण की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से तय की जाएगी। बढ़ती उम्र में दूध के अनेक फायदे सप्ताह में चार दिन तक किसी बच्चे को 200 ग्राम (लगभग एक गिलास) दूध देने से कई महत्वपूर्ण फायदे मिल सकते हैं, खासकर बढ़ती उम्र में यह और भी आवश्यक है। यदि किसी बच्चे को दूध से एलर्जी या पाचन समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। दूध में कैल्शियम और विटामिन डी होता है जो हड्डियों की मजबूती और सही लंबाई बढ़ाने में मदद करता है। प्रोटीन, विटामिन-बी और अच्छे फैट्स बच्चों की याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक विकास में सहायक होते हैं। दूध से मिलने वाला प्रोटीन मांसपेशियों के विकास और रोजमर्रा की ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। वहीं, दूध में मौजूद पोषक तत्व बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाते हैं जिससे वे जल्द बीमार नहीं पड़ते और नियमित दूध से जरूरी पोषण मिलता है जिससे कमजोरी व पोषण की कमी कम होती है। -डॉ. सनी मेहता, जीएमएसएच-16, चंडीगढ़।

प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों की शुद्धता जांचने के लिए बनाई गई हाईटेक डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला

भोपाल  दूध और दूध से जुड़े डेयरी प्रोडक्ट्स की शुद्धता जांचने के लिए प्रदेश में पहली बार हाईटेक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना की जा रही है। केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट परियोजना द्वारा स्वीकृत यह लैब राज्य की पहली प्रयोगशाला होगी, जहां दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच हो सकेगी। भारत सरकार ने दिया 12.40 करोड़ का अनुदान प्रयोगशाला के निर्माण के लिए भारत सरकार ने 12.40 करोड़ का अनुदान दिया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, शेष की खरीदी प्रक्रिया जारी है। MP की इस हाइटेक प्रयोगशाला में दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटि‚स, हेवी मेटल्स जैसी कई जांच हो सकेंगी। राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता भी दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि आपके घर में आने वाले दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, जहां आम उपभोक्ता के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित प्रयोगशाला के निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स एवं ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही दूध एवं दुग्ध पदार्थों के परीक्षण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 100 से अधिक मानकों पर होगा परीक्षण राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आम उपभोक्ता और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस प्रयोगशाला की सुविधा आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देश की विभिन्न खाद्य उत्पादक संस्थाओं को भी उपलब्ध होगी। इसके स्थापित होने से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, शुद्धता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। देशभर की संस्थाओं को मिलेगा लाभ मिलावट की आशंका पर शुद्धता जांचने के लिए लैब का इस्तेमाल आम आदमी से लेकर देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं कर सकेंगी। यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के वियीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी।

राजस्थान में 2 रुपए घटे सरस दूध के भाव

जयपुर. सवाई माधोपुर एवं करौली जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरस दूध की कीमतों में कमी की घोषणा की है। संघ के प्रबंध संचालक सुरेश कुमार सेन ने बताया कि दुग्ध क्रय दरों में कमी होने के कारण यह निर्णय किया है। अब सरस गोल्ड दूध का एक लीटर पैक 68 रुपए में और टीएम दूध का एक लीटर पैक 52 रुपए में उपलब्ध होगा। पहले इनकी कीमत क्रमशः 70 रुपए और 54 रुपए थी। नई दरें 13 जनवरी से लागू होंगी और उपभोक्ता सरस बूथ व शॉप एजेंसियों से दूध प्राप्त कर सकेंगे। गुणवत्ता पर विशेष जोर संघ ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में कमी के बावजूद दूध की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं तक शुद्ध और पौष्टिक दूध पहुंचाना ही संघ का उद्देश्य है। दूध की कीमतों में कमी से आमजन को सीधी राहत मिलेगी। रोजाना सरस दूध का उपयोग करने वाले परिवारों के लिए यह निर्णय आर्थिक दृष्टि से सहायक साबित होगा। संघ के अनुसार उपभोक्ताओं को उचित दर पर गुणवत्तायुक्त दूध उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। साथ ही किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की दरों में आई कमी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

सिर्फ चुटकीभर हल्दी और दूध! जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे जो सर्दियों में रखेंगे आपको फिट

अक्सर कुछ लोग स्वाद के चक्कर में हल्दी वाला दूध पीने से कतराते हैं, लेकिन अगर आप इसके जादुई फायदों को जान लेंगे, तो आज रात से ही इसे पीना शुरू कर देंगे। आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण कि क्यों चुटकीभर हल्दी आपकी सेहत बदल सकती है। जोड़ों के दर्द का रामबाण इलाज सर्दियों में अक्सर पुराने दर्द फिर से उभर आते हैं, खासकर घुटनों और जोड़ों का दर्द। हल्दी में प्राकृतिक रूप से 'एंटी-इंफ्लेमेटरी' गुण होते हैं, यानी यह शरीर की सूजन और दर्द को कम करने में मदद करती है। रोज रात को गर्म दूध में हल्दी मिलाकर पीने से यह एक नेचुरल पेनकिलर का काम करती है और आपकी हड्डियों को मजबूती देती है। सर्दी-जुकाम और खांसी की छुट्टी बदलते मौसम में इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम जल्दी पकड़ लेता है। हल्दी वाला दूध शरीर में गर्मी पैदा करता है और कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके एंटी-बैक्टीरियल गुण गले की खराश और सीने की जकड़न से तुरंत राहत दिलाते हैं। यह आपको अंदर से इतना मजबूत बना देता है कि छोटी-मोटी बीमारियां पास भी नहीं आतीं। नींद की गोली से बेहतर है यह उपाय क्या आप रात भर करवटें बदलते रहते हैं और नींद नहीं आती? तो दवाइयां लेने के बजाय आज रात हल्दी वाला दूध पीकर देखें। जी हां, दूध में ट्रिप्टोफैन और हल्दी में मौजूद तत्व दिमाग को शांत करते हैं और तनाव को कम करते हैं। इसे पीने के कुछ ही देर बाद आपको गहरी और सुकून भरी नींद आ जाएगी। चेहरे पर आएगा कुदरती निखार महंगी क्रीम लगाने से बेहतर है कि आप अपने शरीर को अंदर से साफ करें। हल्दी एक बेहतरीन 'ब्लड प्यूरीफायर' है। यह खून से विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है, जिससे कील-मुंहासे कम होते हैं। लगातार इसके सेवन से त्वचा में एक अलग ही चमक आ जाती है, जो किसी भी मेकअप से ज्यादा सुंदर लगती है। पेट रहेगा फिट, तो आप रहेंगे हिट सर्दियों में हम अक्सर तला-भुना खाना खा लेते हैं, जिससे पाचन गड़बड़ा जाता है। हल्दी वाला दूध पाचन तंत्र को सुधारने में मदद करता है। यह पेट में गैस और अपच जैसी समस्याओं को रोकता है। इतना ही नहीं, यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है, जिससे सर्दियों में वजन बढ़ने का डर भी कम हो जाता है। सेहतमंद रहने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है, बस रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाएं और पी लें। यह छोटी-सी आदत आपको सर्दियों में बीमारियों और दर्द से दूर रखेगी।

विशेष आर्टिकल- नंद बाबा दुग्ध मिशन: यूपी में डेयरी क्रांति, किसानों की आय बढ़ी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनी आत्मनिर्भर

लखनऊ नंद बाबा दुग्ध मिशन (Nand Baba Dugdh Mission) उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 6 जून 2023 को लॉन्च किया गया। यह मिशन भगवान कृष्ण (नंद बाबा) के नाम पर नामित है, जो गौ-पालन की सांस्कृतिक परंपरा को आर्थिक शक्ति से जोड़ता है। ₹1000 करोड़ की लागत से 5 वर्षीय (2023-2028) यह योजना दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय दोगुनी करने और देसी गायों के संरक्षण पर केंद्रित है। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा अनावरणित, यह हर गांव में दुग्ध सहकारी समितियां गठित कर दूध का उचित मूल्य सुनिश्चित करती है। UP Dairy Policy 2022 के साथ एकीकृत, मिशन ने 2025 तक 4,922 नई समितियां स्थापित कीं, दूध उत्पादन 38.78 मिलियन टन (देश का 16%) पहुंचाया। मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना जैसे उप-योजनाओं से ₹11.80 लाख तक सब्सिडी मिल रही है, जो ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है। यह PM मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का हिस्सा है। मिशन का उद्देश्य: दुग्ध उत्पादन से आत्मनिर्भरता तक मिशन का मुख्य लक्ष्य दुग्ध उत्पादकों को गांव स्तर पर उचित मूल्य प्रदान करना और देसी नस्लों (साहीवाल, गिर, थार पारकर) को प्रोत्साहित करना है। प्रमुख उद्देश्य: •    आय वृद्धि: किसानों की मासिक आय ₹5,000 से बढ़ाकर ₹50,000+ करना। •    संरक्षण: देसी गायों की संख्या बढ़ाना, स्ट्रे कैटल प्रबंधन। •    रोजगार: 1 करोड़+ ग्रामीण नौकरियां (विजन 2047)। •    मार्केटिंग: UP Mart लिंकेज से निर्यात बढ़ावा। •    महिला फोकस: SHG के माध्यम 41,000+ महिलाओं को जोड़ना। मिशन की प्रमुख योजनाएं: विस्तृत संरचना मिशन के तहत 4 मुख्य उप-योजनाएं संचालित हैं, जो FPOs, सहकारी संस्थाओं और निजी उद्यमियों को लाभ पहुंचाती हैं: योजना का नाम    विवरण    लाभ/सब्सिडी    लक्ष्य (2025-26) नंदिनी कृषक समृद्धि योजना    10 दुधारू देसी गायों की इकाई स्थापना; प्रशिक्षण और फीड सहायता।    ₹11.80 लाख तक (50% अनुदान, कुल लागत ₹23.60 लाख)    600 इकाइयां (प्रदेश स्तर) मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना    2 दुधारू देसी गायों पर फोकस; चारा/आहार इकाई स्थापना।    ₹80,000 तक अनुदान (2 गायों के लिए)    2,100 इकाइयां (75 जिलों में) मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना    8-12 लीटर दूध वाली गाय: ₹10,000; 12+ लीटर: ₹15,000 प्रोत्साहन।    ₹10,000-₹15,000/गाय    11,000+ देसी गायें प्रारंभिक दुग्ध सहकारी समिति गठन    गांव स्तर पर समितियां; डिजिटल भुगतान और बाजार लिंकेज।    5% ब्याज सब्सिडी (₹1 करोड़ तक)    8,600+ समितियां (नई 4,922) आवेदन प्रक्रिया: •    ऑनलाइन पोर्टल: nandbabadugdhmission.up.gov.in पर रजिस्ट्रेशन। •    दस्तावेज: आधार, बैंक पासबुक, भूमि प्रमाण-पत्र। •    चयन: ई-लॉटरी + जिला समिति सत्यापन (अंतिम तिथि: 23 अगस्त 2025 मिनी नंदिनी के लिए)। •    हेल्पलाइन: 1800-XXX-XXXX (जल्द शुरू)। प्रभाव: 2025 तक ₹36 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव, NPA 2.5% से कम, मार्केट साइज ₹1,837 अरब (CAGR 14%)। प्रेरक उदाहरण: मिशन से जीवन परिवर्तन 1.    झांसी की बालिनी SHG (महिला समूह): नंदिनी योजना से 10 गायों की इकाई। ₹150 करोड़ टर्नओवर, 41,000 महिलाएं लाभान्वित। "मिशन ने हमें आत्मनिर्भर बनाया।" 2.    चंदौली के रामू यादव (स्वदेशी गौ-संवर्धन): 2 गायों पर ₹80,000 अनुदान। मासिक आय ₹50,000, पलायन रुका। 3.    गाजियाबाद के पशुपालक (प्रगतिशील योजना): 12 लीटर वाली गाय पर ₹15,000। 11,000 देसी गायें जिले में, आय दोगुनी। योगी आदित्यनाथ की दृष्टि: मिशन पर प्रेरक उद्धरण CM योगी ने मिशन को 'गौ-रक्षा की आर्थिक क्रांति' बताया: •    लॉन्च समारोह (6 जून 2023): "नंद बाबा मिशन से किसानों की आय दोगुनी होगी। ₹1000 करोड़ से देसी गायें संरक्षित, ग्रामीण UP आत्मनिर्भर बनेगा।" •    बजट समीक्षा 2025: "मिशन से 1 करोड़ नौकरियां। स्वदेशी गौ-संवर्धन से सांस्कृतिक धरोहर आर्थिक शक्ति बनेगी।" •    NDDB MoU (जून 2025): "नंद बाबा + डेयरी पॉलिसी से UP दूध उत्पादन में नंबर-1। महिलाओं को प्राथमिकता।" •    X पर योगी जी: #NandBabaMission – "एक गाय, एक परिवार की समृद्धि!" निष्कर्ष: नंद बाबा – UP का दुग्ध भविष्य नंद बाबा दुग्ध मिशन ने देसी गायों को आर्थिक इंजन बनाया, जहां ₹11.80 लाख सब्सिडी से लाखों किसान सशक्त हो रहे हैं। योगी सरकार का यह प्रयास विकसित भारत-2047 का आधार बनेगा। आवेदन करें, आत्मनिर्भर बनें! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना

मध्य प्रदेश कृषि में अव्वल: टमाटर में पहला, मटर में दूसरा स्थान; दुग्ध उत्पादन 20% बढ़ाने का लक्ष्य कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना मध्य प्रदेश ने बनाई अलग पहचान: टमाटर व मटर उत्पादन में शानदार प्रदर्शन, दुग्ध उत्पादन में 20% बढ़ोतरी का लक्ष्य भोपाल  कृषि के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की देशभर में अलग पहचान है। लगातार सात कृषि कर्मण अवार्ड जीतने वाला न केवल यह पहला राज्य है, बल्कि कोरोना महामारी के समय रिकॉर्ड 128 लाख टन गेहूं का उपार्जन करके पंजाब को भी पीछे छोड़ चुका है। टमाटर में पहला और मटर के उत्पादन में मप्र का देश में दूसरा स्थान है, तो दालों के उत्पादन में प्रथम स्थान, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। अब किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों में देखें, तो मध्य प्रदेश टमाटर और मटर उत्पादन में लगातार प्रगति कर रहा है। टमाटर के बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। 2024-25 में 1,27,740 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई, जिससे 36 लाख 94 हजार 702 टन उत्पादन हुआ। यही स्थिति मटर को लेकर भी है। अन्य प्रमुख उद्यानिकी उत्पादों में संतरे, धनिया, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश का पहला स्थान है। इसी तरह दुग्ध उत्पादन और गोपालन को लेकर भी सरकार काम कर रही है। गोशालाओं को चारा के लिए 40 रुपये तक अनुदान देने का प्रविधान किया गया है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति लीटर पांच रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। दुग्ध उत्पादन 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए नस्ल सुधार का कार्यक्रम छेड़ा गया है। वहीं, पशुओं की टैगिंग भी की जा रही है। सहकारी समितियों का क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है, तो संयंत्रों को आधुनिक बनाने की पहल भी की गई है। बासमती को जीआई टैग दिलाने का प्रयास इधर, बासमती धान को बासमती की पहचान दिलाने के लिए जीआइ टैग दिलाने के प्रयास लंबे समय से किए जा रहे हैं। इसको लेकर कानूनी लड़ चल रही है। जीआइ टैग नहीं मिलने के कारण व्यापारी प्रदेश से बासमती सामान्य धान की तरह लेकर जाते हैं, तो बासमती के नाम से बेचते हैं। इसके कारण किसानों को जो लाभ मिलना चाहिए वह नहीं मिलता है। प्राकृतिक खेती पर जोर प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के अति उपयोग के कारण भूमि की मृदा शक्ति प्रभावित हो रही है। भविष्य के खतरे को भांपते हुए सरकार का जोर इस बात पर है कि किसान प्राकृतिक खेती करें, ताकि भूमि की मृदा शक्ति बनी रहे। इसके साथ ही पराली (नरवाई) जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक ओर जहां कड़ाई की जा रही है तो दूसरी ओर नरवाई को भूमि में ही मिलने के उपकरणों पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर से भी इसे जोड़ा गया है।  

इंदौर पुलिस ने पकड़ा फर्जी घी का बड़ा कारोबार, 600 लीटर नकली घी बरामद

 इंदौर  प्रदेश भर में मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में इंदौर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने भारी मात्रा में मिलावटी घी जब्त किया है, जिसे नामी ब्रांड के पैकेट में पैक किया जा रहा था। पल्हर नगर में घर पर छापा खाद्य विभाग की टीम ने पल्हर नगर स्थित 60 फीट रोड पर एक मकान पर छापा मारा। यह मकान गिरिराज गुप्ता का है, जो मल्हारगंज क्षेत्र में प्रभुश्री ट्रेडर्स के नाम से दुकान संचालित करता है। निरीक्षण के दौरान इस मकान से मिलावट का बड़ा जखीरा बरामद हुआ। नामी ब्रांड के रैपर में 'नकली घी' अधिकारियों को मौके से बड़ी मात्रा में वनस्पति तेल, एसेंस और तैयार घी मिला। चिंता की बात यह है कि मौके से सांची, अमूल, नोवा और मालवा जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के रैपर और आउटर कवर भी बड़ी संख्या में पाए गए। आरोपी इन रैपर का इस्तेमाल वनस्पति तेल और एसेंस से बनाए गए मिलावटी घी को पैक करने के लिए करता था। 600 लीटर घी-तेल जब्त, 6 सैंपल भेजे खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मौके से घी, तेल और एसेंस समेत कुल 6 नमूने जांच के लिए हैं। खाद्य अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि कार्रवाई में कुल 27 डिब्बे वनस्पति, 13 डिब्बे तेल, 3 डिब्बे घी, 5 बोतल एसेंस और लगभग 350 रैपर जब्त किए गए हैं। * उक्त संस्थान से लगभग 600 लीटर घी और तेल जब्त किया गया है। * निर्माता का परिसर बंद करा दिया गया है। * सभी नमूनों को विस्तृत जांच के लिए राज्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजा जा रहा है। * संबंधित कंपनियों (अमूल, सांची आदि) को भी सूचित किया जा रहा है, ताकि वे भी अपने स्तर पर वैधानिक कार्रवाई कर सकें। मिलावटखोरी बर्दाश्त नहीं: कलेक्टर कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को शुद्ध एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी के विरुद्ध इस तरह की सख्त कार्रवाई भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगी। 

प्रदेश में 2 अक्टूबर को होने वाली ग्राम सभाओं से प्रारंभ होगा दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान

पशुपालक दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान का लें पूरा लाभ : पशुपालन एवं डेयरी मंत्री  पटेल प्रदेश में 2 अक्टूबर को होने वाली ग्राम सभाओं से प्रारंभ होगा दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुरूप प्रदेश के किसानों की पशुपालन के माध्यम से आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य से प्रदेश में 2 अक्टूबर से "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान'' प्रारंभ होगा। अभियान के अंतर्गत गाँव-गाँव पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा और उन्हें पशुओं में नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य एवं पोषण के संबंध में जागरूक किये जाने का आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जायेगा। पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल ने कहा है कि पशुपालक किसान बंधु इस अभियान का पूरा-पूरा लाभ लें. अभियान के अंतर्गत जब पशु चिकित्सा अधिकारी/मैत्री उनके घर आएं, तब पशुपालन के संबंध में उनकी जो भी समस्या हो उन्हें बताएं और समाधान प्राप्त करें। प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान" 3 चरणों में चलाया जायेगा। इसकी शुरूआत 2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं से की जायेगी। अभियान का प्रथम चरण 9 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान में 10 या 10 से अधिक गो-वंश रखने वाले पशुपालकों से व्यक्तिश: सम्पर्क किया जायेगा। सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी/मैत्री द्वारा पशुपालकों से गृह भेंट की जायेगी और उन्हें पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं नस्ल सुधार के संबंध में जागरूक किया जायेगा। साथ ही पशुओं में टैग लगाने संबंधी जानकारी भी एकत्र की जायेगी। इस कार्य के लिये मैत्री को प्रति पशुपालक 5 रुपये का मानदेय भी दिया जायेगा। "दुग्ध समृद्धि सम्पर्क अभियान" के द्वितीय चरण में 5 या अधिक गो-वंश रखने वाले पशुपालकों और तीसरे चरण में 5 या कम गो-वंश रखने वाले पशुपालकों से सम्पर्क किया जायेगा। अभियान का उद्देश्य गोवंश का समुचित पालन पोषण और दुग्ध उत्पादन को अधिक से अधिक बढ़ाना है।  

नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की प्रतीक बनी रेनू ने महिला सशक्तीकरण को दी नई ऊंचाई

मिशन शक्ति- 4 रेनू देवी ने दूध व्यवसाय से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी  नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की प्रतीक बनी रेनू ने महिला सशक्तीकरण को दी नई ऊंचाई  रेनू देवी साथ स्वरोजगार से जुड़कर 70 से अधिक महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर लखनऊ ग्राम धर्मपुर, ब्लॉक रुद्रपुर, जिला देवरिया की रेनू देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन शक्ति अभियान के तहत नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की अनुपम मिसाल पेश की है। एक साधारण गृहिणी से ‘लखपति दीदी’ बनने तक का उनका सफर उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर संस्था (MPP) के सहयोग से संभव हुआ। आज रेनू न केवल अपनी आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर रही हैं, बल्कि अपने गाँव की 69 महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं, जो मिशन शक्ति के तहत महिला सशक्तीकरण की नई कहानी लिख रही हैं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस मुहिम ने रेनू जैसे लाखों ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का आधार दिया है। रेनू देवी का सफर तब शुरू हुआ जब वे चमेली स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, जहाँ उन्हें सामूहिकता और बचत का पहला सबक मिला। हालांकि, समूह से होने वाली आय परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इस बीच, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर संस्था के दूध संकलन केंद्र (MPP) की स्थापना हुई। संस्था की बैठकों में जब रेनू ने सुना कि दूध की गुणवत्ता के लिए उचित मूल्य, व्यवस्थित संग्रह और सीधा बैंक भुगतान मिलेगा, तो उन्हें आत्मनिर्भरता का नया रास्ता दिखाई दिया। रेनू बताती हैं कि मैंने सोचा, यह मेरे लिए सम्मानजनक आजीविका और बचत का जरिया हो सकता है। संस्था से जुड़ने से पहले रेनू के पास सिर्फ 2 गाय थीं, जिनसे 4 लीटर दूध प्रतिदिन मिलता था, जो घरेलू उपयोग में चला जाता था। 7 दिसंबर 2023 को संस्था की सदस्य बनने के बाद उन्हें गुणवत्ता प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिला। इस सहायता से प्रेरित होकर उन्होंने 3 और गायें खरीदीं और अब उनके पास 5 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 25 लीटर दूध प्राप्त होता है। यह दूध वे दूध संकलन केंद्र (MPP) पर जमा करती हैं। उनकी मेहनत रंग लाई और अब तक उन्होंने 4.50 लाख रुपये से अधिक का सालाना व्यवसाय कर रही हैं। औसत मासिक आय 44 हजार रुपये से अधिक है। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में आती है, जिससे वे नियमित बचत कर रही हैं। रेनू बताती हैं कि योगी सरकार की योजनाओं ने उनकी जिंदगी को नई दिशा दी। वे अपने तीन बच्चों को बेहतर स्कूलों में पढ़ा रही हैं और परिवार के अन्य सदस्यों की आर्थिक मदद कर रही हैं। कहती हैं कि संस्था का सहयोग और समय पर भुगतान ने मुझे आत्मविश्वास दिया। अब मैं सिर्फ अपनी नहीं, अपने गाँव की महिलाओं की प्रेरणा बनना चाहती हूं। उनकी प्रेरणा से अब तक 69 महिलाएं संस्था से जुड़ चुकी हैं, जो उनके मार्गदर्शन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन शक्ति अभियान ने रेनू जैसी हजारों महिलाओं की जिंदगी को पूरी तरह से बदल दिया है। सीएम योगी की दूरदर्शी नीतियों ने रेनू जैसे ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान के साथ आर्थिक स्वावलंबन का अवसर दिया है। आज वे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के चेहरे के रूप में उभरी हैं, जो न केवल खुद को, बल्कि पूरे समाज को सशक्त कर रही हैं। मिशन शक्ति के तहत महिला बीट पुलिस अधिकारियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने ग्रामीण महिलाओं को सुरक्षा का आश्वासन दिया, जबकि आजीविका मिशन ने उन्हें आर्थिक आजादी प्रदान की। रेनू की मेहनत और सरकार के सहयोग ने उन्हें लखपति दीदी बना दिया, जो अब गाँव की अन्य महिलाओं के लिए रोल मॉडल हैं।