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1 अप्रैल से दूध महंगा होगा, 4 रुपए की बढ़ोतरी, पेट्रोल-डीजल की किल्लत से बढ़ी महंगाई

धार अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते देश में गैस सिलेंडरों और पेट्रोल-डीजल को लेकर परेशानी झेलनी पड़ रही है. वहीं मध्य प्रदेश के धार जिले में लोगों को बड़ा झटका लगने जा रहा है. धार में आज  1 अप्रैल से दूध के दामों में बढ़ोत्तरी हुई . दुग्ध उत्पादक संघ ने एक-दो रुपए नहीं बल्कि 4 रुपए की वृद्धि दूध के दामों में की गई . जिसके बाद आम उपभोक्ताओं पर इसका आर्थिक प्रभाव पड़ेगा. 60 रुपए का दूध अब 64 रु. में मिलेगा धार में दूध के दाम बढ़ाने को लेकर दुग्ध उत्पादक संघ और दूध विक्रेता की एक संयुक्त बैठक आयोजित की गई थी. जहां सभी की सहमति से दूध की कीमत बढ़ाने का फैसला लिया गया है. जिसके बाद धार में वर्तमान में ₹60 प्रति लीटर बिक रहा दूध अब ₹64 प्रति लीटर हो जाएगा. दुग्ध उत्पादकों का कहना है कि पिछले तीन सालों से दूध के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी, जबकि इस दौरान पशु, आहार सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है. 1 अप्रैल से बढ़ी हुई कीमतों पर दूध दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष प्रताप सिंह ठाकुर ने बताया कि "बढ़ती महंगाई और पशु आहार की लागत में भारी वृद्धि के कारण अब दूध के दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से लागत और बिक्री मूल्य के बीच असंतुलन बना हुआ था, जिसे अब संतुलित करने के लिए यह कदम उठाया गया है." वहीं, दूध विक्रेता संघ के कृष्णकांत सोमानी ने बताया कि "उत्पादकों द्वारा बढ़ाई गई कीमतों को देखते हुए विक्रेताओं ने भी इस निर्णय को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल से सभी विक्रेता बढ़ी हुई दरों पर ही दूध का विक्रय करेंगे." दूध के दूसरे उत्पादों के बढ़ सकते हैं दाम रोजमर्रा की जिंदगी में दूध का उपयोग होता है, ऐसे में दूध के दाम बढ़ने से परिवार के बजट पर असर पड़ेगा. दूध के दाम बढ़ने से इसका असर दूसरी वस्तुओं पर भी होगा, जैसे घी, पनीर और दूध से बने दूसरे उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं. दूध और उससे बनने वाले उत्पादों के मूल्य पर राज्य सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं होता, जिसके कारण अलग-अलग क्षेत्रों में दूध के दामों में भिन्नता देखने को मिलती है. ऐसे में जहां एक ओर बिजली दरों में भी वृद्धि की संभावना जताई जा रही है, वहीं दूध के दाम बढ़ने से आम जनता पर आर्थिक बोझ और बढ़ जाएगा.

आजीविका के लिए संघर्ष करने वाली महिला ने दुग्ध उत्पादन से दो साल में कमाए 67 लाख

आजीविका के लिए संघर्ष करने वाली महिला ने दुग्ध उत्पादन से दो साल में कमाए 67 लाख योगी सरकार की योजना का लाभ पाकर बन गईं सफल उद्यमी मिलिए सोनभद्र की लखपति दीदी से, आज संयुक्त परिवार के 14 लोगों की सम्भाल रहीं जिम्मेदारी एक साहसी महिला की कहानी उन ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा जो आगे बढ़ने का देखती हैं सपना परिवार संभालने के साथ ही बच्चों को उपलब्ध करा रहीं हैं बेहतर शिक्षा  लखनऊ  कभी आजीविका के लिए संघर्ष करने वाली सोनभद्र की विनीता आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही महिला सशक्तीकरण की योजनाओं के सहारे सफलता का नया चेहरा बनकर उभरीं हैं। दुग्ध उत्पादन को आजीविका का आधार बनाकर उन्होंने सिर्फ दो वर्षों में 67 लाख रुपये की कमाई की और यह साबित कर दिया कि सही सरकारी सहयोग, बाजार और मेहनत मिल जाए तो गांव की महिलाएं भी आर्थिक समृद्धि की नई कहानी लिख सकती हैं। काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़कर उन्होंने न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। आज वे परिवार संभालने के साथ ही बच्चों को बेहतर शिक्षा भी उपलब्ध करा रही हैं। पहले निजी डेयरियों पर थी निर्भरता स्नातक तक पढ़ीं विनीता 14 सदस्यीय संयुक्त परिवार की जिम्मेदारी निभा रही थीं। पति अविनाश के साथ मिलकर वे 10-12 पशुओं के जरिए कार्य करती थीं, लेकिन निजी डेयरियों पर निर्भरता के कारण उन्हें समय पर और उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। इससे आय सीमित थी। संघर्ष से निकली उम्मीद की राह दिन-रात मेहनत के बावजूद जब हालात नहीं बदले, तब विनीता ने काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़ने का फैसला किया। इससे उन्हें उचित मूल्य, समय पर भुगतान और प्रशिक्षण की सुविधा मिली। यही वह मोड़ था, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी। दो साल में बनीं ‘लखपति दीदी’ विनीता ने वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया। पशुओं की संख्या बढ़ाई और उत्पादन में बड़ा इजाफा किया। आज उनके पास 40 से अधिक दुधारू पशु हैं और वे ‘लखपति दीदियों’ में शामिल हो चुकी हैं। महज दो वर्षों में 67 लाख रुपये की आय अर्जित कर उन्होंने ग्रामीण महिला सशक्तीकरण का नया उदाहरण पेश किया है। हजारों महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी पूर्वांचल के सात जिलों में 46 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार और सशक्तीकरण से जोड़ रही है। विनीता कहती हैं कि काशी मिल्क और स्वयं सहायता समूह ने मुझे न केवल आर्थिक मजबूती दी, बल्कि जीवन जीने का नया नजरिया भी दिया। योजनाओं का जमीनी असर योगी सरकार की महिला सशक्तीकरण और आजीविका से जुड़ी योजनाओं का असर अब गांवों में साफ दिख रहा है। विनीता जैसी महिलाएं न केवल अपने परिवार को बेहतर जीवन दे रही हैं, बल्कि समाज में बदलाव की अगुआ बन रही हैं। सोनभद्र की विनीता की यह कहानी बताती है कि अगर सही मंच, उचित मूल्य और सरकारी योजनाओं का साथ मिल जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई इबारत लिख सकतीं हैं।

योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं ने बनाया रिकॉर्ड, 10 लाख लीटर रोज कर रहीं दूध का संग्रहण

31 जिलों की महिलाओं ने किया पांच हजार करोड़ का दूध का कारोबार योगी सरकार में ग्रामीण महिलाओं ने बनाया रिकॉर्ड, 10 लाख लीटर रोज कर रहीं दूध का संग्रहण उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन बन रहा तरक्की का आधार स्तंभ प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने की अभूतपूर्व तरक्की लखनऊ उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए दुग्ध उत्पादन और संग्रहण के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। योगी सरकार की योजनाओं और उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश की लाखों महिलाएं आज आर्थिक सशक्तीकरण की मजबूत आधारशिला बन चुकीं हैं। प्रदेश के 31 जिलों में सक्रिय महिला समूहों ने प्रतिदिन करीब 10 लाख लीटर दूध का संग्रहण कर न सिर्फ उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि करीब 5000 करोड़ रुपये का विशाल कारोबार भी किया है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है और महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। छह हजार से अधिक गांवों की महिलाएं इस अभियान से जुड़कर अभूतपूर्व प्रगति कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर ये महिलाएं दुग्ध संग्रहण, प्रोसेसिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ीं यह मॉडल न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि उन्हें उद्यमी के रूप में स्थापित कर रहा है। इससे गांवों में पलायन कम होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। योगी सरकार की योजनाओं, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के सहारे ग्रामीण महिलाओं का यह नेटवर्क आने वाले समय में प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश में राज्य आजीविका मिशन तरक्की का आधार स्तंभ बन रहा है। प्रदेश के छह हजार से ज्यादा गांवों की महिलाओं ने दुग्ध संग्रहण के जरिए अभूतपूर्व तरक्की की है। विभिन्न जिलों में संभाली कमान प्रदेश में विभिन्न महिला संचालित मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां (एमपीसीएल) इस बदलाव की धुरी बनी हुई हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में ‘बलिनी एमपीसीएल’ बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर और महोबा जिलों में कार्यरत है। पूर्वांचल में ‘काशी एमपीसीएल’ बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र और वाराणसी में सक्रिय है। सामर्थ्य एमपीसीएल प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी और कानपुर नगर में महिलाओं को सशक्त बना रही है। गोरखपुर मंडल में ‘श्री बाबा गोरखनाथ कृपा एमपीसीएल’ देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में काम कर रही है। तराई क्षेत्र में ‘सृजन एमपीसीएल’ बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर में नई संभावनाएं गढ़ रही है।

दूध वाले की 60,000 करोड़ की ठगी, मिडिल क्लास को पड़ा भारी, क्या मिलेगा पैसा वापस?

रूपनगर एक दूध बेचने वाला व्यक्ति जिसने 60,000 करोड़ के घोटाले को अंजाम देकर पूरे देश की इकोनॉमी को ही हिला कर रख दिया, जब भी देश में बड़े-बड़े घोटालों की बात आती है तो इस व्यक्ति और स्कैम का नाम भी जरूर आता है. करोड़ों रुपये के इस घोटाले ने निवेशकों की नींद उठा दी. हम बात कर रहे हैं पीएसीएल (PACL) यानी पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड स्कैम को दूध बेचने वाले निर्मल सिंह भंगू ने अंजाम दिया था. ये मामला अब एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है, क्योंकि 20 मार्च 2026 को ED ने बड़ी कार्रवाई की. ED ने पंजाब और दिल्ली में PACL से जुड़ी 126 अचल संपत्तियां जब्त कीं, जिनकी कीमत 5,046.91 करोड़ रुपये है. इस एक्शन के साथ इस केस में कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य बढ़कर 22,656.91 करोड़ रुपये हो गया है. ED का कहना है कि यह एक ही मामले में अब तक की सबसे बड़ी अटैचमेंट है और ये एजेंसी के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई।  इस घोटले की शुरुआत पंजाब के रूपनगर जिले के बेला गांव में रहने वाले निर्मल सिंह भंगू ने की. वह दूध का कारोबार करते था. 1990 के दशक में उन्होंने PACL लिमिटेड शुरू की. कंपनी ने खुद को कृषि भूमि बेचने और विकसित करने वाली फर्म बताया. लोग छोटी-छोटी किस्तों में या कैश में पैसे देते थे, और बदले में कृषि जमीन का प्लॉट मिलने का वादा किया जाता था. कंपनी जिस जमीन में निवेश का दावा करती थी, उसके कोई पुख्ता कागज या सेल डीड निवेशकों को नहीं दिखाए जाते थे. लोगों को सिर्फ एक साधारण रिसीट दी जाती थी, जो असल में ज्यादा भरोसेमंद नहीं होती थी।  10 साल में पैसा 4 गुना करने का वादा कंपनी कहती थी कि वह देश के किसी भी हिस्से में जमीन खरीदेगी, लेकिन निवेशकों को इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि उन्हें फिक्स रिटर्न का लालच दिया जाता था. कंपनी का दावा था कि 5 साल बाद निवेशक चाहें तो पैसा ले सकते हैं या जमीन हासिल कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग सिर्फ रिटर्न पर ही ध्यान देते थे. इतना ही नहीं, 10 साल में पैसा 4 गुना करने का वादा भी किया जाता था, जिसने लोगों को तेजी से आकर्षित किया। पोंजी स्कीम से निवेशकों को लुभाया यह एक पोंजी स्कीम थी और इसे उसी तरीके से चलाया गया. शुरुआत में कंपनी ने कुछ निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा और वे दूसरों को भी जोड़ने लगे. दरअसल, नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जा रहा था. ज्यादा रिटर्न देखकर और लोग इसमें पैसा लगाने लगे. स्कीम को फैलाने के लिए कंपनी ने पिरामिड मॉडल अपनाया, जिसमें हर व्यक्ति को अपने नीचे नए लोगों को जोड़ना होता था. एजेंट्स को मोटा कमीशन दिया जाता था, जिससे वे अपने जान-पहचान के लोगों को इसमें शामिल करते गए. लोगों को आकर्षित करने के लिए कंपनी बड़े-बड़े सेमिनार भी आयोजित करती थी, जहां निवेश के फायदे गिनाए जाते थे।  कंपनी दावा करती थी कि वह 1983 से काम कर रही है, जबकि हकीकत में इसकी शुरुआत 1996 में हुई थी. 1983 में पर्ल्स ग्रुप की एक दूसरी कंपनी PGF शुरू हुई थी, जिसका सहारा लेकर लोगों का भरोसा जीता गया. निवेशकों को यह भी कहा जाता था कि अगर कंपनी बंद हो जाए तो वे अपनी रसीद लेकर कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री (MCA) में जा सकते हैं, क्योंकि कंपनी वहां रजिस्टर्ड है. लेकिन सच्चाई यह थी कि वह रसीद किसी कानूनी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती थी और निवेशकों के लिए बेकार साबित हुई।  एग्रीकल्चरल इनकम का लालच कंपनी ने देश भर में 70 लाख एजेंट्स की मदद ली. ये एजेंट ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में घूम-घूमकर लोगों को लुभाते थे. टैक्स-फ्री “एग्रीकल्चरल इनकम” का लालच दिया जाता था. कुल मिलाकर कंपनी ने 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए, जिसमें से करीब 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को आज तक नहीं लौटाए गए. इस घोटले से प्रभावित लोग 5.5 करोड़ से ज्यादा हैं और इसमें ज्यादातर गांव और मिडिल क्लास के परिवार वाले हैं, जिन्होंने अपनी सारी जमा-पूंजी इसमें लगा दी।  सुप्रीम कोर्ट ने लिया अहम फैसला 1998-99 के दौरान ऐसी कई स्कीमों की शिकायतें मिलने के बाद सेबी ने “कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) रेगुलेशन” लागू किया. इसके तहत कंपनियों को निवेशकों से जुटाए गए पैसे का सही इस्तेमाल करना होता है और उससे मिलने वाला रिटर्न ट्रांसपरेंट तरीके से देना होता है. जांच में सेबी ने पाया कि PACL और PGF इन नियमों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके बाद सेबी ने दोनों कंपनियों को बंद करने और निवेशकों का पैसा लौटाने का निर्देश दिया।  मामला आगे बढ़ने पर सेबी सुप्रीम कोर्ट पहुंची और 25 फरवरी 2013 को कोर्ट ने साफ कहा कि यह कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) है, इसलिए सेबी को जांच और कार्रवाई का अधिकार है. इस दौरान PACL के प्रमोटर्स निवेशकों के पैसों से अपनी संपत्तियां बढ़ाते रहे. कंपनी ने P7 नाम का एक न्यूज चैनल भी शुरू किया, जिससे लोगों का भरोसा बनाए रखा गया. इतना ही नहीं, कंपनी आईपीएल टीम किंग्स इलेवन पंजाब की स्पॉन्सर भी रह चुकी थी और क्रिकेटर ब्रेट ली को ब्रांड एंबेसडर बनाया गया था. लंबे समय तक मामला कोर्ट में चलता रहा, इसी बीच कंपनी ने तेजी से पैसे जुटाए और करीब 5.5 करोड़ लोग इस घोटाले का शिकार हो गए, जिनमें पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के लोग बड़ी संख्या में शामिल थे।  निर्मल सिंह भंगू की गिरफ्तारी 22 अगस्त 2014 को सेबी ने जांच के बाद कंपनी को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया, लेकिन PACL ने इसका पालन नहीं किया. इसके बाद मामला ED के पास गया, जिसने कंपनी के प्रमुख निर्मल सिंह भंगू से पूछताछ शुरू की और उनकी संपत्तियां अटैच करनी शुरू कर दीं. जांच में ऑस्ट्रेलिया में करीब 500 करोड़ रुपये की संपत्ति समेत कई अन्य असेट्स का पता चला, जिसके बाद रिफंड की प्रक्रिया शुरू की गई. 2016 में CBI ने निर्मल सिंह भंगू को गिरफ्तार किया. जांच के दौरान करीब 1300 संदिग्ध बैंक खाते मिले और लगभग 280 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं. साथ … Read more

दुग्ध व्यवसाय से तरक्की में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर

मिल्क प्रोक्योरमेंट से आत्मनिर्भर बनीं प्रदेश की साढ़े तीन लाख महिलाएं दुग्ध व्यवसाय से तरक्की में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी की महिलाओं ने रचा इतिहास उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बनी तरक्की का आधार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं तरक्की की नई इबारत लिख रहीं हैं। प्रदेश में दुग्ध संग्रहण और उससे जुड़े कार्यों के माध्यम से करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं हैं। इतनी बड़ी संख्या के लिहाज से दुग्ध व्यवसाय के क्षेत्र में यूपी देश में नंबर वन है। यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए संभव हुआ है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए तरक्की का मजबूत आधार बनकर उभरा है। योगी सरकार की अभूतपूर्व योजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश नित नए रिकॉर्ड बना रहा है। मिल्क वैल्यू चेन से मिल रहा अब बेहतर मूल्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में दुग्ध मूल्य श्रृंखला (मिल्क वैल्यू चेन) विकसित होने से अब उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है। इसके साथ ही किसानों और महिला समूहों को नियमित एवं पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उनके भरोसे और आय दोनों में वृद्धि हुई है। रोजगार के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दुग्ध व्यवसाय से गांवों में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन हो रहा है। इससे न सिर्फ महिलाओं की आय बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह कार्य अब बड़े आर्थिक मॉडल का रूप ले चुका है। महिलाओं का व्यापक सशक्तीकरण सरकार की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी गई है। इसका परिणाम यह है कि आज ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और परिवार के साथ-साथ समाज में भी अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। प्राथमिकता में ग्रामीण महिलाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण महिलाओं को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में लगातार अभूतपूर्व योजनाओं के जरिए नए रिकॉर्ड बन रहे हैं और महिलाएं विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश में दुग्ध व्यवसाय के माध्यम से महिलाओं का सशक्तीकरण न केवल एक आर्थिक बदलाव है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत नींव बन चुका है। प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर देश के सामने नई दिशा प्रस्तुत कर रहीं हैं।

चाय के रेट बढ़ाए गए, अब LPG संकट से दूध की कीमत भी बढ़ने की आशंका

नई दिल्ली ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है. कई जगह लोगों को लंबी लाइनों में लगकर महंगे दाम पर गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. एलपीजी की बढ़ती कीमतों का असर अब आम लोगों तक पहुंच गया है. चाय बेचने वालों ने भी चाय की कीमत 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये कर दी है. यह संकट सिर्फ रेस्टोरेंट और होटल तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध के कारोबार पर भी इसका असर पड़ रहा है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। पहले गल्फ देशों से 85-90 प्रतिशत एलपीजी आती थी, लेकिन अब आयात पर संकट आ गया है. जिससे घरेलू गैस के साथ-साथ इंडस्ट्रीज को भी मार पड़ रही है. रेस्टोरेंट, होटल पहले से परेशान थे और अब डेयरी वाले भी इसकी मार खा रहे हैं. डेयरी उद्योग में एलपीजी का इस्तेमाल बहुत जरूरी है. दूध को पाश्चराइजेशन (खास तापमान पर गर्म करके बैक्टीरिया मारना) के लिए बड़ी मात्रा में गैस चाहिए. बिना नियमित गैस के दूध जल्दी खराब हो सकता है. छोटे-मध्यम डेयरी प्लांट्स को यह समस्या सबसे ज्यादा झेलनी पड़ रही है. महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कई डेयरी मालिकों ने बताया कि गैस न मिलने से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के काम में रुकावट आ रही है. इससे दूध की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। मुश्किल में पड़ी दूध की पैकेजिंग इस इंडस्ट्री में सबसे बड़ी समस्या पैकेजिंग की है. दूध के प्लास्टिक पैकेट और कार्टन बनाने वाली फैक्टरियां भी एलपीजी पर निर्भर हैं. इन फैक्टरियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही, इसलिए प्रोडक्शन धीमा हो गया है. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, गोवर्धन डेयरी के फाउंडर देवेंद्र शाह ने कहा, “हमारे पास अभी सिर्फ 10 दिन का पैकेजिंग मटेरियल स्टॉक बचा है. अगर सप्लाई जल्द नॉर्मल नहीं हुई तो दूध सप्लाई करना मुश्किल हो जाएगा.” चेंबूर के सुरेश डेयरी के मैनेजर शरीब शेख ने भी चेतावनी दी, “अगले 10 दिनों में स्थिति नहीं सुधरी तो पूरी डेयरी इंडस्ट्री बड़े संकट में फंस सकती है। दूध स्टोर करने की क्षमता कम इसके अलावा मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में बताया गया है कि बॉम्बे मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके सिंह के अनुसार, हाल ही में भैंस के दूध के तीन बड़े ऑर्डर रद्द हुए. छोटी डेयरियों के पास दूध स्टोर करने की क्षमता नहीं है. इसलिए वे गाय और भैंस का दूध कम कीमतों पर बेचने को मजबूर हैं. यह संकट सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है. देश के कई हिस्सों में डेयरी ऑपरेटर्स इसी तरह की शिकायतें कर रहे हैं. होटल और रेस्टोरेंट पहले से दूध के ऑर्डर कम कर रहे हैं. अगर पैकेजिंग रुक गई तो दुकानों पर दूध के पैकेट कम मिलेंगे. इससे आम लोग प्रभावित होंगे, खासकर शहरों में जहां लोग पैकेज्ड मिल्क पर निर्भर हैं. गांवों में जहां ढीला दूध बिकता है, वहां भी प्रोसेसिंग प्रभावित हो सकती है। डेयरी मालिकों की मांग क्या है? डेयरी मालिकों की मांग है कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई प्राथमिकता से बढ़ाई जाए. उनका कहना है कि दूध एक जरूरी चीज है, इसे संकट में नहीं छोड़ना चाहिए. अगर 10 दिन में सुधार नहीं हुआ तो दूध की कीमतें बढ़ सकती हैं या उपलब्धता कम हो सकती है. कुछ जगहों पर किसान बायोगैस जैसे विकल्प अपना रहे हैं, लेकिन बड़े स्तर पर यह मुश्किल है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और 60% एलपीजी आयात करता है. पहले भारत का बड़ा हिस्सा तेल, गैस और एलपीजी सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था. लेकिन ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है. हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कच्चे तेल की सप्लाई कुछ हद तक संभाली है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों के लिए गैस की सप्लाई कम कर दी गई है और होटल-रेस्तरां जैसे कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी में भी कटौती की गई है। यह संकट अस्थायी है, लेकिन इसका असर आम आदमी तक पहुंच रहा है. पहले रेस्टोरेंट में एक्स्ट्रा चार्ज लगे, अब दूध पर खतरा मंडरा रहा है. सरकार को जल्द कदम उठाने होंगे ताकि दूध जैसी बेसिक चीज प्रभावित न हो।

मध्य प्रदेश में दूध उत्पादकों के लिए लाइसेंस अनिवार्य, शुद्धता पर रखी जाएगी कड़ी निगरानी

भोपाल मध्य प्रदेश में घर-घर दूध बेचने वाले दुग्ध उत्पादकों को अब दूसरे दुकानदारों की तरह लाइसेंस लेना होगा. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए भी लाइसेंस का अनिवार्य कर दिया है. इसके चलते प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों को अब खाद्य विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. प्राधिकरण ने दुग्ध उत्पादकों के पंजीयन और लाइसेंस के संबंध में एडवाइजरी जारी कर दी है. यह निर्णय दूध में की जा रही मिलावट पर लगाम लगाने के लिए लिया गया है। हर माह तैयार होगी रिपोर्ट मध्य प्रदेश देश में तीसरा सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य है. प्रदेश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 707 ग्राम प्रतिदिन है. प्रदेश में 225.95 लाख टन का दूध उत्पादन हो रहा है. प्रदेश में लोगों तक सहकारी समितियों के माध्यम से तो दूध पहुंच ही रहा है, साथ ही बड़ी मात्रा में दूध की सप्लाई डेयरी संचालकों द्वारा घर-घर की जा रही है. सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध सप्लाई की गुणवत्ता की जांच तो लगातार हो रही है, लेकिन डेयरी संचालकों द्वारा सप्लाई होने वाले दुग्ध और उनके उत्पाद की जांच के लिए ऐसे सभी संचालकों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों और विक्रेताओं की पहचान हो सकेगी. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध से जुड़ी गतिविधियों की नियमित मासिक रिपोर्ट तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं. यह रिपोर्ट हर माह 31 तारीख तक भेजनी होगी। दुध में मिलावट के लिए बनाई जा रही प्रयोगशाला प्रदेश सरकार द्वारा लोगों को शुद्ध दूध की सप्लाई के लिए राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भी स्थापित की जा रही है. यह प्रयोगशाला भोपाल के मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन में स्थापित की जाएगी. इस प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता से लेकर प्रदेश भर की संस्थाएं दूध और इससे बनने वाले उत्पादों की जांच करा सकेंगे।  यह प्रदेश की पहली राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला होगी. इसमें 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी. इस प्रयोगशाला को एनएबीएल और एफएसएसएआई की मान्यता प्राप्त होगी. इससे प्रदेश में शुद्ध दूध की सप्लाई सुनिश्चित हो सकेगी।

FSSAI की रिपोर्ट ने चौंकाया, दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और पानी मिलाने वाले टॉप डेयरी ब्रांड्स जांच में फेल

भोपाल   भारत, जो दुनिया के कुल दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा उत्पादक देश है, अब 'मिलावटी और असुरक्षित' दूध के केंद्र के रूप में उभर रहा है। हाल ही में 'ट्रस्टीफाइड' (एक स्वतंत्र लैब टेस्टिंग प्रोग्राम) द्वारा की गई जांच ने देश के टॉप डेयरी ब्रांडों के दावों की पोल खोल दी है। बैक्टीरिया का स्तर खतरे के निशान से ऊपर ट्रस्टीफाइड की रिपोर्ट के अनुसार, कई नामी ब्रांडों के दूध के नमूनों में कोलीफॉर्म (Coliform) का स्तर FSSAI की निर्धारित सीमा से 98 गुना अधिक पाया गया। इसके अलावा, 'टोटल प्लेट काउंट' (Total Plate Count) भी सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा था, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। हर तीन में से एक नमूना फेल दूध की शुद्धता को लेकर सरकारी आंकड़े भी डराने वाले हैं। FSSAI द्वारा 2025 में की गई जांच में 38 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए गए। पिछले कुछ वर्षों का रुझान देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक हुई है:     2015-2018: मिलावटी नमूनों की संख्या में 16.64% का इजाफा हुआ।     2022: कुल 798 नमूनों में से आधे मिलावटी पाए गए।     2025: लगभग हर तीसरा नमूना मानकों पर खरा नहीं उतरा। उत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित एफएसएसएआई की 'मिल्क सर्विलांस रिपोर्ट' के अनुसार, मिलावट के मामले में क्षेत्रीय स्तर पर भारी अंतर देखा गया है: क्षेत्र – मानकों में फेल नमूनों का प्रतिशत उत्तर भारत: 47% (सबसे असुरक्षित) पश्चिम भारत: 23% दक्षिण भारत: 18% पूर्वी भारत: 13% क्या मिलाया जा रहा है आपके दूध में? इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन की एक ताजा स्टडी में 330 नमूनों की जांच की गई, जिसमें से 70.6% में गंभीर मिलावट पाई गई। मिलावट के मुख्य कारक इस प्रकार हैं: पानी: 193 नमूनों में मात्रा बढ़ाने के लिए पानी मिलाया गया। डिटर्जेंट (23.9%): झाग बनाने और दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए। यूरिया (9.1%): फैट और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए। स्वास्थ्य पर प्रभाव और सावधानी विशेषज्ञों का कहना है कि कोलीफॉर्म और डिटर्जेंट युक्त दूध पीने से पेट में संक्रमण, किडनी की बीमारी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे दूध खरीदने से पहले ब्रांड की लेटेस्ट लैब रिपोर्ट और FSSAI मार्क की जांच जरूर करें। सोर्स- एफएसएसएआई

हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट

हौसले और मेहनत से पूजा ने रचा सफलता का नया अध्याय, 80 लाख का वार्षिक कारोबार हरजीगढ़ी में 50 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया आधुनिक डेयरी प्रोजेक्ट ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के जरिए पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का बड़े पैमाने पर उत्पादन लखनऊ अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र स्थित कलवारी गांव की पूजा चौधरी ने अपने दृढ़ निश्चय और लगातार मेहनत के दम पर यह कर दिखाया है कि कम संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। विवाह के बाद जब उन्होंने ससुराल में कदम रखा, तब परिवार दूध के छोटे व्यवसाय से जुड़ा हुआ था। पूजा ने इस कार्य को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने और बड़े स्तर पर विकसित करने का निर्णय लिया। इसके चलते पूजा ने साल 2023 में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर 'शिव मिल्क प्रोडक्ट' नाम से एक डेयरी प्लांट की स्थापना की। उनके इस दूरदर्शी कदम से आज उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।  इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध, छाछ सहित कई अन्य उत्पादों को तैयार किया जाता है। इन उत्पादों की आपूर्ति न केवल जिले में की जाती है, बल्कि मथुरा-वृंदावन तक नियमित रूप से की जा रही है। हरजीगढ़ी में 50 लाख के निवेश से शुरू की आधुनिक डेयरी टप्पल क्षेत्र के छोटे से गांव हरजीगढ़ी में आधुनिक तकनीक से लैस ऑटोमेटिक डेयरी प्लांट की स्थापना करना पूजा के लिए आसान नहीं था। लेकिन जब इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी करना संभव है। इसमें पूजा के पति रोहिताश और परिवार ने उनका पूरा सहयोग किया और अपने छोटे से दुग्ध व्यवसाय को नए मुकाम तक पहुंचा दिया। दरअसल वर्ष 2008 में उनके परिवार ने कामधेनु डेयरी योजना का लाभ लेकर दूध का बूथ शुरू किया था। विवाह के बाद पूजा ने कारोबार में अकाउंट संबंधी जिम्मेदारी संभाली और विस्तार की दिशा में कदम आगे बढ़ाया। विभाग में आवेदन, जमीन की उपलब्धता और ऋण स्वीकृति के बाद प्लांट शुरू करने में थोड़ा विलम्ब जरूर हुआ पूजा ने हार नहीं मानी। डेयरी शुरू होने के बाद पूजा ने 35 लोगों को रोजगार दिया और 70 किसानों से दूध आपूर्ति का अनुबंध भी किया। पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का उत्पादन ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के नाम से संचालित इस डेयरी प्लांट में पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध और छाछ सहित अन्य उत्पाद मशीन के जरिये तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की आपूर्ति जिले के अलावा मथुरा-वृंदावन, हाथरस और अन्य कस्बों तक की जा रही है। पूजा के ससुर इस व्यवसाय को और भी बढ़ाना चाहते हैं। आज लगभग 20 डीलर विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। पूजा ने सभी उत्पादों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए उत्पादन और वितरण की एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाई है जिससे उनका यह व्यवसाय तेजी से बढ़ा है और अच्छा मुनाफा भी हुआ है।  महिला उद्यमिता की प्रेरक पहचान बनीं पूजा अक्सर यह धारणा रही है कि विवाह के बाद बहुओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित हो जाती है। आज भी कई स्थानों पर यह सोच कायम है। लेकिन पूजा के साथ ऐसा नहीं हुआ। शादी के बाद उन्हें परिवार का पूरा सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया।  पूजा ने राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक किया। शुरू से उनकी इच्छा व्यवसाय करने की थी। ससुर और पति के प्रोत्साहन से उन्होंने डेयरी प्लांट में निवेश का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित भी किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। आज 35 से अधिक लोग दूध संग्रह कर डेयरी तक पहुंचा रहे हैं। पूजा चौधरी की यह यात्रा ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली हर महिला के लिए प्रेरणास्रोत है, जिन्होंने आत्मनिर्भर बनकर उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त पहचान स्थापित की है।

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के छात्रों को कक्षा 1 से 8 तक मिलेगा फ्री दूध, बड़ी खुशखबरी

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को डॉ. अंबेडकर नगर (महू) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को दूध उपलब्ध कराने का भी एलान किया। सीएम ने बताया कि अगले एकेडमिक सेशन से बच्चों के लिए ये व्यवस्था कर दी जाएगी। सीएम ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि 'हमारी सरकार गरीब, महिला, युवा, किसान सबकी बेहतरी के लिए है। हम तो दूध का उत्पादन बढ़ाने वाले लोग हैं। ऐसे में स्कूल के अंदर, सरकारी स्कूलों में भी कक्षा 1 से लेकर 8 तक बच्चों को अगले सत्र से दूध पिलाने की व्यवस्था सरकार के माध्यम से करने वाले हैं।' बजट में भी हो चुका इसका एलान विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 16 फरवरी को छठवीं बार बजट पेश किया था जिसमें बच्चों को दूध देने की बात कही गई थी। बजट भाषण के दौरान उन्होंने जानकारी दी थी कि बच्चों को टेट्रा पैक में दूध दिया जाएगा। महू-खंडवा रेलवे लाइन जल्द सीएम ने जानकारी दी है कि 'भविष्य की दृष्टि से सर्वसुविधायुक्त 'सांदीपनि विद्यालय' पूरे प्रदेश में बन रहे हैं। आने वाले समय में महू-खंडवा रेलवे लाइन प्रारंभ होने से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और क्षेत्र के विकास को गति भी मिलेगी। राज्य में उद्योग स्थापना को प्रोत्साहित कर निवेशकों को इंडस्ट्री ग्रोथ के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार हर क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।' टेंपल मैनेजमेंट के लिए एकेडमिक कोर्स सीएम ने जानकारी दी है कि 'सरकार ने विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर टेंपल मैनेजमेंट के लिए एकेडमिक कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके जरिए मंदिर प्रबंधन को पेशेवर और रोजगारपरक बनाया जाएगा।' आपको बता दें कि मुख्यमंत्री इंदौर जिले के महू विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत महूगांव में 85 करोड़ रुपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, विधायक सुश्री उषा ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।