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उपज का सही मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का संदेश – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कृषक कल्याण वर्ष-2026 उपज का एक-एक दाना कीमती, भुगतान में देरी बर्दाश्त नहीं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री की किसान हितैषी नीति से चौरई के 64 किसानों को मिलेंगे लगभग एक करोड़ रुपये सभी मंडियों में समय-सीमा में हो भुगतान, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और मंडी बोर्ड की सक्रियता का परिणाम है कि कृषि उपज मंडी समिति चौरई की अपील पर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा 64 कृषकों को उनके द्वारा विक्रय की गई उपज की राशि 96 लाख 51 हजार 500 रुपये के भुगतान करने के आदेश प्रसारित हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में किसान के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कृषि उपज मंडी समिति चौरई में पंजीकृत अनुज्ञप्तिधारी फर्म ज्ञाताट्रेडर्स, चौरई के द्वारा कृषकों से खरीदी गई अधिसूचित कृषि उपज का भुगतान नहीं करने पर मंडी समिति ने त्वरित कार्रवाई की। न्यायालय तहसीलदार, चौरई द्वारा फर्म से वसूली के लिए आर.आर.सी. जारी कर 96,51,500 रुपये (छियानबे लाख इक्यावन हजार पांच सौ रुपये) की वसूली की गई और राशि मंडी समिति के खाते में जमा कराई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए सिविल कोर्ट/जिला कोर्ट से अनुमति नहीं मिलने पर मंडी समिति की ओर से उच्च न्यायालय जबलपुर में अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दायर की गई। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 30 अप्रैल 2026 को किसान हित में निर्णय पारित कर भुगतान की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "उपज का एक-एक दाना कीमती है। मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता और समय पर भुगतान हमारी प्राथमिकता है।" उन्होंने मंडी बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की सभी मंडी समितियां यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्थिति में किसानों के भुगतान में लापरवाही न हो। खरीदी गई कृषि उपज का भुगतान समय-सीमा में कराया जाए। मंडी बोर्ड द्वारा सभी मंडी सचिवों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं कि किसान हित सर्वोपरि है और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी। माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार किसानों को भुगतान की कार्यवाही मंडी समिति चौरई द्वारा समय-सीमा में की जाएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सपने कभी नहीं रुकते, बस सही मौके का इंतजार करते हैं

सपने कभी रुकते नहीं, बस सही मौके का इंतजार करते हैं और यह वही मौका है सपनों को सच करने का : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीं द्वितीय परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं प्रदेश में 7 मई से शुरू हो रही है कक्षा 10वीं एवं 12वीं बोर्ड की द्वितीय परीक्षा भोपाल प्रदेश सरकार द्वारा एमपी बोर्ड के परी क्षा परिणाम में असफल हुए विधार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए द्वितीय परीक्षा का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुनः परीक्षा देने वाले विधार्थियों को शुभकामना संदेश देते हुए कहा कि प्रिय विद्यार्थियों, आप जानते हैं कि इस साल एमपी बोर्ड की कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम 16 वर्षों में सबसे बेहतर रहा, इसी प्रकार 10वीं के परिणाम भी अच्छे रहे, लेकिन कुछ परीक्षार्थी सफल नहीं हो सके थे। ऐसे बच्चों के लिए मध्यप्रदेश में द्वितीय परीक्षा अवसर की शुरुआत 7 मई से की जा रही है। आप सभी को मेरी ओर से अग्रिम शुभकामनाएं। आप केवल छात्र नहीं, प्रदेश के भविष्य की उज्ज्वल आशा हैं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आप सभी मेरे लिए केवल छात्र नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य की उज्ज्वल आशा हैं। जब आप अपने सपनों के लिए मेहनत करते हैं, तो उसमें केवल आपका नहीं, आपके परिवार का, आपके शिक्षकों का और पूरे प्रदेश का विश्वास जुड़ा होता है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी परिस्थितियां हमारे अनुकूल नहीं होतीं, परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आते, इससे मन थोड़ी देर के लिए ठहर जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि सपने कभी रुकते नहीं, वह बस सही मौके का इंतजार करते हैं और यह वही मौका है। महज योजना नहीं, विद्यार्थियों के सपनों को उड़ान देन का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं हर विद्यार्थी को ये कह रहा हूं कि एक परिणाम आपके पूरे भविष्य की कहानी तय नहीं कर सकता। प्रदेश सरकार की ओर से यह अवसर इसी दिशा में एक विशेष पहल है। ये महज योजना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को फिर से उड़ान देन का संकल्प है। यह उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण है। जो 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में किसी कारणवश अनुत्तीर्ण हो गए या परीक्षा नहीं दे पाए। द्वितीय परीक्षा विद्यार्थियों के लिए एक नई शुरुआत है। एक ऐसा मौका, जहां आप अपनी मेहनत को फिर से साबित कर सकते हैं। अपने आत्मविश्वास को पुनः खड़ा कर सकते हैं और अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच सकते हैं। वहीं अब प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 10वीं और 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षाएं 7 मई से प्रारंभ हो रही हैं। बच्चों के साथ खड़े रहें अभिभावक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि अभिभावकों और शिक्षकों से भी मेरा विनम्र निवेदन है कि इस समय बच्चों के साथ खड़े रहें। उनके मन को समझें, उन्हें सपोर्ट करें क्योंकि कई बार एक विश्वास भरा शब्द ही उन्हें नई ऊर्जा दे देता है, हर विद्यार्थी में अपार क्षमता है। अगर जरूरत है तो केवल उसे पहचानने की, उसे संवारने की और सही दिशा देने की। याद रखिए यह परीक्षा सिर्फ अंक सुधारने का नहीं, बल्कि अपने आत्मविश्वास को फिर से मजबूत करने का अवसर भी है। अंत में मैं आप सभी को परीक्षा के लिए अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। आप प्रदेश का भविष्य हैं। आप सफल होकर अपने सपनों को साकार करें और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करें। आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं। आगे बढ़ें, सफल हों और अपने जीवन में नई ऊंचाइयों को छुएं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: सुशासन का दौर जारी, इसका कोई अंत नहीं

सुशासन का है यह दौर, जिसका ओर है ना छोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नवाचारों के साथ हमने प्रदेश की तरक्की के बनाए हैं नए रास्ते मुख्यमंत्री का निगम-मंडल-बोर्ड एवं विकास प्राधिकरणों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों ने किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जैसी नीयत होती है, वैसी ही बरकत होती है। हमारा प्रदेश आज देश में सुशासन के जरिए लोक कल्याण का पर्याय बन चुका है। लोक कल्याण के अवसर सबको मिलते हैं, लेकिन जो हृदय की गहराईयों से लोगों के कल्याण की सोच रखते हैं, ईश्वर उसकी मदद करते हैं। हमारी सरकार लोक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्ध सोच, कर्मठता, समर्पण और नवाचारों के साथ आगे बढ़ रही है। आज प्रदेश के हर कोने में, हर छोर में सुशासन का दौर है। उन्होंने कहा कि हमने 'विरासत से विकास' की परम्परा को कायम रखते हुए जनहित में अधिकाधिक नवाचार अपनाकर प्रदेश की तरक्की के नए रास्ते बनाये हैं। प्रदेश की जनता की सेवा, कल्याण और सबके जीवन में खुशहाली लाने में हम कोई कसर नहीं रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए विधायकों, जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'सच्चा वादा- पक्का काम' यही हमारी सरकार का मूलमंत्र है। प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और वन पर्यटन बढ़ाने के लिए हम भरपूर प्रयास कर रहे हैं। पर्यटन बढ़ेगा तो प्रदेश में रोजगार बढ़ेंगे और इसका सीधा लाभ हमारे अपने नागरिकों को होगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आयोग-निगम-मंडलों एवं विकास प्राधिकरणों में नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए सभी श्रेष्ठ व्यक्तियों को अवसर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश के विभिन्न निगम-मंडल-बोर्ड एवं विकास प्राधिकरणों के नवनियुक्त अध्यक्ष एवं उपाध्यक्षों ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुए गरिमामय समारोह में अभिनंदन कर आभार जताया। अभिनंदन समारोह में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित थे। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के नवनियुक्त अध्यक्ष रामनिवास रावत, मध्यप्रदेश राज्य सहरिया विकास प्राधिकरण की नवनियुक्त अध्यक्षा श्रीमती गुड्डीबाई आदिवासी, मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. कृष्णपाल सिंह यादव, निगम के उपाध्यक्ष संजीव कांकर, रतलाम विकास प्राधिकरण के नवनियुक्त अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, प्राधिकरण के उपाध्यक्षद्वय गोविंद काकाणी एवं प्रवीण सोनी तथा मध्यप्रदेश राज्य मछुआ कल्याण बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष महेश केवट एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करके उन्हें जनकल्याण का सेवा दायित्व देने के लिए आभार ज्ञापित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रतीक चिन्ह भी दिए गए।  

चुनावी जीत के बाद MP में सियासी गतिविधियां बढ़ीं, जल्द होगा कैबिनेट विस्तार

 भोपाल बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद अब मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. बंगाल, असम और पुडुचेरी में बीजेपी के पक्ष में आए चुनाव परिणामों ने उस प्रक्रिया को फिर से गति देने के संकेत दिए हैं, जो चुनावों के चलते कुछ समय के लिए थम गई थी. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव की अगुवाई वाली सरकार में इस साल कैबिनेट विस्तार और फेरबदल संभव है।  पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रियों के बयानों और बॉडी लैंग्वेज ने संगठन को असहज किया है. सार्वजनिक मतभेद और बयानबाजी ने इन संकेतों को और स्पष्ट किया. इसी को देखते हुए मंत्रियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट अब पार्टी हाईकमान के पास है. मंत्रियों के कामकाज और संगठन के साथ समन्वय की समीक्षा की गई है, और माना जा रहा है कि इन्हीं आधारों पर मंत्रिमंडल में फेरबदल के फैसले लिए जा सकते हैं।  राजनीतिक दृष्टि से यह फेरबदल अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच चुकी है. मोहन सरकार के करीब ढाई साल पूरे हो चुके हैं और अगले ढाई साल चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होंगे. ऐसे में पार्टी किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है और समय रहते संगठन और सरकार के बीच तालमेल मजबूत करना चाहती है।  कराया गया है मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन दरअसल, पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रियों के बयानों और बॉडी लैंग्वेज ने संगठन को असहज किया है. सार्वजनिक मतभेद और बयानबाजी ने इन संकेतों को और स्पष्ट कर दिया था. यही वजह है कि मंत्रियों का परफॉर्मेंस ऑडिट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट अब हाईकमान के पास है. मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन कराया गया है. संगठन ने जो समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए थे, उनकी भी परीक्षा अब इस फेरबदल में होगी. राजनीतिक तौर पर यह फेरबदल बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार अपने कार्यकाल के मध्य बिंदु पर लगभग पहुंच चुकी है यानी मोहन सरकार के ढाई साल पूरे हो चुके हैं. अगले ढाई साल पूरी तरह चुनावी मोड में होंगे. ऐसे में पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही और मान कर चल रही है कि कैबिनेट में फेरबदल या विस्तार का यही सही समय है।  कैबिनेट में विस्तार करने की गुंजाइश अभी बाकी संख्या के लिहाज से भी देखा जाए तो कैबिनेट में विस्तार करने की गुंजाइश अभी बाकी है. फिलहाल मोहन कैबिनेट में 31 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 35 हो सकती है यानी चार नए चेहरों की एंट्री करने की संभावना बाकी है. लेकिन सवाल यह है कि इसके साथ ही क्या मौजूदा मंत्रियों की विदाई होगी या बचे हुए चार खाली मंत्री पदों पर नियुक्तियां होंगी. सवाल इस बात का भी है कि क्या गुजरात की ही तर्ज पर यहां भी तो कहीं पूरी कैबिनेट को नहीं बदल दिया जाएगा? हालांकि इसकी संभावना यहां इसलिए कम है क्योंकि गुजरात के अलावा अन्य किसी राज्य में बीजेपी ने पूरी कैबिनेट को नहीं बदला. इसी साल मार्च में बीजेपी शासित उत्तराखंड में  पूरी कैबिनेट बदलने के बजाय, धामी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 5 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी।  संख्या के लिहाज से भी कैबिनेट विस्तार की गुंजाइश बनी हुई है. फिलहाल मंत्रिमंडल में 31 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 35 हो सकती है. यानी चार नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नए मंत्रियों की एंट्री के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी होगी या सिर्फ खाली पदों को भरा जाएगा. एक सवाल यह भी है कि क्या गुजरात की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी पूरी कैबिनेट बदली जा सकती है।  हालांकि इसकी संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि बीजेपी ने गुजरात के अलावा अन्य राज्यों में ऐसा कदम नहीं उठाया है. हाल ही में उत्तराखंड में भी कैबिनेट विस्तार के तहत नए चेहरों को शामिल किया गया, लेकिन पूरी कैबिनेट नहीं बदली गई. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 5 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी।  मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस भेंट को मंत्रिमंडल विस्तार और संभावित बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनावी नतीजों के बाद संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन साधने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ‘गुजरात मॉडल’ की तर्ज पर बदलाव की चर्चा सूत्रों के अनुसार, मॉडल की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी बड़ा कदम उठाया जा सकता है। गुजरात में पूर्व में सभी मंत्रियों से इस्तीफा लेकर पूरी तरह नया मंत्रिमंडल गठित किया गया था। इसी तरह का प्रयोग मध्यप्रदेश में भी संभव माना जा रहा है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। आधिकारिक ऐलान का इंतजार फिलहाल सरकार की ओर से मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन हालिया राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए आने वाले दिनों में बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

चुनावी जादू: सीएम मोहन ने 7 सीटों पर किया प्रचार, 6 पर मिली जीत; 5 नेताओं को मिली थी जिम्मेदारी

भोपाल  राजनीति में कई बार नारे नहीं, आंकड़े ज्यादा जोर से बोलते हैं. बंगाल चुनाव नतीजों के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर ऐसा ही एक आंकड़ा खास दिलचस्पी से चर्चा में है 7 में से 6. ये वो स्ट्राइक रेट है, जो पश्चिम बंगाल में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चुनावी अभियान से जोड़ा जा रहा है. बंगाल जैसे राज्य में, जहां भाजपा ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया है, डॉ. यादव के प्रचार वाले इलाकों का हिसाब-किताब अब पार्टी के भीतर राजनीतिक महत्व रखता है।  डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल में कुल सात विधानसभा सीटों पर प्रचार किया. इनमें से भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की. यानी बंगाल में उनका स्ट्राइक रेट करीब 86 प्रतिशत रहा. इस गणित का सबसे मजबूत हिस्सा बांकुरा जिले से सामने आया. डॉ. यादव ने यहां पांच विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था और भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल कराने के दौरान भी मौजूद रहे थे. नतीजा यह रहा कि भाजपा ने इन पांचों सीटों पर जीत हासिल की।  बांकुरा में 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट का गणित सलतोरा सीट पर भाजपा की चंदना बाउरी ने टीएमसी उम्मीदवार को 32 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. छातना में सत्यप्रकाश मुखोपाध्याय ने 47 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की. बांकुरा सीट पर नीलाद्रि शेखर दाना ने टीएमसी उम्मीदवार को 54 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित किया. बरजोरा में बिलेश्वर सिन्हा ने 40 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की, जबकि ओंदा सीट पर अमरनाथ शाखा भी विजयी रहे. यानी बांकुरा में आंकड़ा साफ रहा 5 सीटें, 5 जीत, यहां डॉ. मोहन यादव का स्ट्राइक रेट 100 प्रतिशत रहा।  बांकुरा से शुरू किया चुनावी अभियान, जिले की सभी सीटें जीती बीजेपी डॉ. मोहन यादव का बंगाल चुनाव अभियान 2 अप्रैल को बांकुरा जिले से शुरू हुआ। सीएम ने बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन में हिस्सा लिया और संयुक्त जनसभा को संबोधित किया। यही क्लस्टर आगे चलकर भाजपा के लिए सबसे मजबूत साबित हुआ। मेदिनीपुरी में जीते, कमरहाटी में हारे 18 अप्रैल को सीएम ने कोलकाता और मेदिनीपुर में प्रचार किया। सीएम ने कमरहाटी में बीजेपी उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी दिलीप घोष के समर्थन में प्रचार किया। मेदिनीपुरी में तो बीजेपी उम्मीदवार दिलीप घोष 30 हजार के बडे़ अंतर से टीएमसी केंडिडेट को हराकर जीत गए। लेकिन, कमरहाटी में अरुप चौधरी टीएमसी उम्मीदवार से चुनाव हार गए। बीजेपी ने चुनिंदा नेताओं को भेजा बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में चुनिंदा नेताओं को ही भेजा था। सीएम डॉ मोहन यादव के अलावा केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विधायक रामेश्वर शर्मा, मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, राज्यसभा सांसद डॉ उमेश नाथ महाराज को भी भेजा था। तीखे प्रहार और धर्मयुद्ध का आह्वान प्रचार के दौरान डॉ. यादव ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने कहा था, “ममता दीदी बंगालियों का हक बांग्लादेश को देने पर तुली हैं. इसलिए यह केवल चुनाव नहीं, बल्कि धर्मयुद्ध है. इस वातावरण में श्रीराम का मंत्र हम सबको शक्ति दे रहा है।  गढ़ में सेंध और खड़गपुर की बड़ी जीत 18 अप्रैल को डॉ. यादव ने कोलकाता जिले की कमरहाटी विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार अरूप चौधरी और मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा उम्मीदवार दिलीप घोष के समर्थन में भी प्रचार किया था. कमरहाटी सीट को लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. यहां शुरुआती रुझानों में भाजपा उम्मीदवार की बढ़त ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी थी, हालांकि करीबी मुकाबले में अरूप चौधरी करीब 5 हजार वोटों से हार गए. लेकिन खड़गपुर सदर में भाजपा नेता दिलीप घोष ने जीत दर्ज की और टीएमसी उम्मीदवार को 30 हजार से अधिक वोटों से पराजित किया. इस तरह बंगाल का चुनावी समीकरण कुछ यूं रहा बांकुरा में 5 में 5, खड़गपुर सदर में 1 में 1 और कमरहाटी में 1 हार . कुल मिलाकर 7 में 6 सीटें भाजपा के खाते में गईं।  बिहार और हरियाणा में भी चला मोहन यादव का सिक्का प्रतिशत में देखें तो यह आंकड़ा करीब 85.7 प्रतिशत बैठता है. यह लगभग वैसा ही है जैसा बिहार चुनाव में डॉ. यादव के प्रचार वाले क्षेत्रों में देखा गया था. बिहार में उन्होंने 25 विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार किया था, जिनमें से भाजपा ने 21 सीटें जीतीं. वहां उनका स्ट्राइक रेट 84 प्रतिशत रहा था. हरियाणा चुनाव में भी डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने स्टार प्रचारक के रूप में भिवानी, दादरी, तोशाम, झज्जर और बवानी खेड़ा जैसे क्षेत्रों में उतारा था, जहां पार्टी को चार सीटों पर सफलता मिली।  बंगाल नतीजों के बाद बातचीत में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनता ने अन्याय, अत्याचार और कुशासन से मुक्ति के लिए वोट दिया है और एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अब भाजपा के लिए “मास्कॉट” बनते जा रहे हैं, तो उन्होंने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. उन्होंने कहा, “हमारे केवल एक ही मास्कॉट हैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. अब 17 राज्यों में हमारे मुख्यमंत्री होंगे. स्वतंत्रता के बाद के दौर में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।  विपक्ष पर प्रहार और जीत का उत्सव उन्होंने विपक्ष पर भी तीखा निशाना साधा. डॉ. यादव ने कहा, “जैसा बोओगे, वैसा काटोगे. ममता दीदी ने हमारी बहनों का मजाक उड़ाया, सोनिया जी ने भी उनका उपहास किया. पांच पीढ़ियों ने महिलाओं के साथ अन्याय किया, अब जनता ने उस अन्याय का बदला लिया है. बताइए, अगर बंगाल में ‘जय श्रीराम' का नारा नहीं लगेगा, तो फिर कहां लगेगा? अपने अंदाज में उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा की खुशी अब “माउंट एवरेस्ट से भी ऊपर” पहुंच गई है. उन्होंने कहा, “यहां मिठाई से जश्न मनाने की परंपरा है. हम झालमुड़ी भी खाएंगे, कलाकंद भी खाएंगे और मिठाइयां भी खाएंगे। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से ग्रीनको ग्रुप के कार्यकारी निदेशक बंडारू ने की भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ग्रीनको ग्रुप के कार्यकारी निदेशक नरसिम्हा राव बंडारू तथा उपाध्यक्ष नवीन कुमार ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भेंट कर प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी गतिविधियों के बारे में विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है कि ग्रीनको ग्रुप भारत की अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में से एक है। यह ग्रुप शिवपुरी जिले में सौर ऊर्जा संयंत्र और मंदसौर व रतलाम जिलों में पवन ऊर्जा संयंत्र संचालित कर रहा है। नीमच जिले में गांधी सागर के पास 1920 मेगावाट क्षमता के भारत के सबसे बड़े पंप हाइड्रो स्टोरेज प्लांट का निर्माण भी 11 हजार करोड़ रूपए के निवेश से किया जा रहा है। इस परियोजना से लगभग 4 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। ग्रीनको ग्रुप प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा गतिविधियों के विस्तार का इच्छुक है।  

किसान के चेहरे पर खुशी ही हमें सुकून देती है-मुख्यमंत्री डॉ यादव

जो कहा वो किया  मुख्यमंत्री डॉ यादव अचानक पहुंचे उज्जैन और किया उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण  किसान के चेहरे पर खुशी ही हमें सुकून देती है-मुख्यमंत्री डॉ यादव गेहूं, चना ,मसूर तीनों की खरीदी मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा लगातार की जा रही है आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया जाएगा-मुख्यमंत्री डॉ यादव किसानों की उपज की तौल पारदर्शिता से हो और प्रक्रिया में कोई लापरवाही ना हो – मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव  उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने  अचानक उज्जैन पहुंचकर सेवा सहकारी संस्था दताना और सुरजनवासा के ग्राम मानपुरा स्थित उपार्जन केंद्र एग्रो स्टील साइलो पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं का औचक निरीक्षण किया और किसानों से संवाद कर उपार्जन प्रक्रिया की यथास्थिति ली। बिना पूर्व सूचना के मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव का आगमन उपार्जन व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए था।            मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उपार्जन प्रक्रिया पारदर्शिता और सुगमता से संचालित करवाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार द्वारा गेहूं, चना ,मसूर तीनों की खरीदी लगातार की जा रही है। किसान भाईयों की सुविधा के लिए सभी उपार्जन केद्रों पर पीने के पानी की व्यवस्था ,बैठने के लिए छाया की व्यवस्था, अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं और जिले में कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। उन्‍होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गेहूं खरीदी की अंतिम तिथि को भी आगे बढ़ाया जाएगा।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान तौल व्यवस्था, भंडारण, भुगतान प्रक्रिया और उपार्जन केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, किसानों की उपज की तौल पारदर्शिता से हो और उपार्जन का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी भी दी कि उपार्जन प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर कार्यवाही की जाएगी।  मुख्यमंत्री डॉ यादव उपार्जन केंद्र पर निरीक्षण के दौरान पूरी तरह किसानों के रंग में रंगे मुख्यमंत्री डॉ यादव उपार्जन केंद्र पर निरीक्षण के दौरान पूरी तरह किसानों के रंग में रंगे नजर आए।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव का औचक उपार्जन केंद्र पहुंचने पर किसानों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता पर किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके हर सुख-दुख में हमेशा साथ रहते हैं और किसानों का हित सर्वोपरि रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषकों से संवाद किया और ट्रैक्टर ट्राली पर चढ़कर गेहूं की फसल की गुणवत्ता भी देखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान भाइयों से कहा कि कोई भी समस्या आने पर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन सदैव आपके साथ हैं। हमारी सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों की उपज का समय पर विक्रय हो और उसकी राशि उनके खातों में समय सीमा में हस्तांतरित हो।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव से किसान भाइयों ने उपार्जन प्रक्रिया में तौल, बारदाने की उपलब्धता,भुगतान और परिवहन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की। ग्राम दताना मताना निवासी किसान श्री अल्ताफ पटेल ने बताया कि उनकी गेहूं की फसल अच्‍छी हुई है और सरकार के द्वारा की जा रही गेहूं खरीदी के बाद गेहूं के उपज की राशि भी व्यवस्थित रूप से मिल रही हैं। साथ ही बाजार में भी गेहूं के दाम उचित रूप से प्राप्त हो रहे हैं। कृषक श्री पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा जो कार्य किसानों के हित में किए गए हैं उससे हमारी आय में वृद्धि हुई है। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक श्री पटेल से कहां कि आप किसान भाईयों के चेहरे की खुशी ही हमें सुकून देती हैं।            निरीक्षण के दौरान उज्‍जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री रवि सौलंकी और अन्‍य स्‍थानीय जन प्रतिनिधि, संभागायुक्त श्री आशीष सिंह, एडीजीपी श्री राकेश गुप्ता, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अ‍धीक्षक श्री प्रदीप शर्मा एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।

प्रदेश के 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए नई नीति: मोहन यादव सरकार का ऐतिहासिक कदम, एक प्लेटफार्म पर काम

भोपाल मोहन यादव सरकार प्रदेश के दस लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार नीति बनाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सारे विभाग दिव्यांगजनों को लेकर एक प्लेटफार्म पर काम कर सकेंगे। यहां अलग-अलग विभागों के द्वारा अलग-अलग स्कीम के जरिए दिव्यांगजन को लाभ दिया जाता है।  आयुक्त दिव्यांगजन डॉ अजय खेमरिया ने इस नीति को बनाए जाने को लेकर  चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांगजनों के लिए कोई नीति बनाने का काम राज्य सरकार करने जा रही है। अभी अलग-अलग विभाग अलग-अलग स्कीम चलाते हैं। अभी कोई नीति नहीं होने से दिव्यांगजन के लिए समान काम नहीं हो पाता है। अभी दिव्यांगजनों के समग्र विकास के लिए जो काम हो रहे हैं, उसमें एकरूपता की कमी है, इसलिए दिव्यांगजन के लिए नीति बनाने की जरूरत है।खेमरिया ने कहा कि जिस तरह से एमपी के बच्चों के लिए बाल नीति है, महिला नीति है, उसी तरह की दिव्यांगजन नीति भी होना चाहिए। एक्सपर्ट्स, दिव्यांगजनों से करेंगे बात डॉ खेमरिया ने बताया कि नीति तैयार करने के लिए स्टेक होल्डर्स, एक्सपर्ट, हितग्राही से बात करेंगे। साथ ही विदेशों में जाकर वहां की स्थिति देखकर आने वाले, विश्वविद्यालयों में शोध करने वालों से बातचीत कर नीति बनाएंगे। एमपी के बाहर के विषय विशेषज्ञों से भी बात की जाएगी। ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों के साथ आदिवासी बेल्ट के लोगों से भी बात करेंगे। अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जैसे इलाकों में सरकार की योजनाओं की डिलीवरी में किस तरह की दिक्कत होती है, इसकी भी जानकारी ली जाएगी। वहां के दिव्यांग जन से बात की जाएगी। अलग-अलग विभाग के अलग-अलग नार्म्स दिव्यांगजन आयुक्त खेमरिया ने कहा कि अभी दिव्यांगों के लिए सामाजिक न्याय, एमएसएमई, एनआरएलएम, महिला बाल विकास विभाग समेत अन्य विभागों के अलग-अलग काम हैं। अगले छह माह में इसका ड्राफ्ट बना लिया जाएगा और कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर 2026 में ही इसे लागू कराया जाएगा। फरवरी में सीएम को लिखा था पत्र डॉ खेमरिया ने कहा कि नीति बनाने को लेकर फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पत्र लिखा था जिसके लिए मुख्यमंत्री ने अब अधिकृत कर दिया है। इसके अलावा सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को भी पत्र लिखा गया था। इसलिए अब दिव्यांग जन बनाने के लिए सुझाव लेने और प्रस्ताव मंगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए ऐसे लोगों से भी संपर्क किया जाएगा जो दिव्यांगजन के लिए काम करते हैं। जो दिव्यांग हैं, उनसे भी सुझाव लिए जाएंगे ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए नीति में वास्तविक प्रयास किए जा सकें। इसके पहले कोई नीति नहीं है। अलग-अलग विभागों ने अपने हिसाब से दिव्यांगजन के लिए अलग रोस्टर, प्रावधान तय कर रखें हैं लेकिन विभागों की दिव्यांगजन को लेकर कोई नीति नहीं है। अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद इसके लिए नई नीति बनाकर उसे सभी विभागों में लागू कराया जाएगा। नीति के लिए इनसे भी चर्चा करने के निर्देश डॉ अजय खेमरिया को 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से एमपी में दिव्यांगजन अधिनियम 2016 राज्य निधि, निराश्रित निधि, के साथ योजनाओं, पुनर्वास और कल्याण से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल करते हुए दिव्यांगजन नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। शासन की ओर से कहा गया है कि विभिन्न विभागों, शासकीय और अर्द्धशासकीय संस्थाओं, एक्सपर्ट्स, संबंधित सिविल सोसायटी के सदस्यों, प्रख्यात खिलाड़ियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं से चर्चा कर नीति के मसौदे के निर्माण और उसे अंतिम रूप देने का काम किया जाए। तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की नीति का करेंगे अध्ययन     इस नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।     अभी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग अपनी-अपनी योजनाओं में दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।     प्रदेश में 2011 की जनगणना और यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) के आधार पर करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं।     आगामी जनगणना में दिव्यांगों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है, क्योंकि पहले जहां सात श्रेणियों के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे, वहीं अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा।     नीति में यह भी प्रस्ताव रहेगा कि 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह स्थापित किए जाएं।  

दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद की बैठक लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 38 हजार 555 करोड़ रूपये की स्वीकृति व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का निर्णय "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रूपये की स्वीकृति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्यों के लिए 1295.52 करोड़ रूपये की स्वीकृति आंगनवाड़ी केन्द्रों और समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य के लिए 2,412 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण के लिए विभिन्न विभागों की 38 हजार 555 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का ऐतिहासिक निर्णय भी लिया है। यह निर्णय प्रदेश के बुनियादी ढांचे, कृषि आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से लिए गए हैं। बैठक के प्रमुख निर्णयों में 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-2031) के लिए सड़क निर्माण, ग्रामीण मार्गों के उन्नयन और शासकीय आवासों के रखरखाव के लिए सर्वाधिक 32 हजार 405 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" को मंजूरी दी गई, इसमें आगामी 5 वर्षों में 2,442.04 करोड़ रुपये व्यय कर दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास के अंतर्गत नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण और 'मिशन वात्सल्य' के सुचारू संचालन के लिए 2,412 करोड़ रुपये तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 1,295 करोड़ 52 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रि-परिषद ने 'राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड' के गठन का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जो व्यापारियों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और सरकार के साथ सीधे संवाद का सशक्त माध्यम बनेगा। यह पहल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" की आगामी 5 वर्षों 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 2442 करोड़ 04 लाख रूपये की स्वीकृति दी। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलहन फसलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन में से दलहन फसल को पृथक कर "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" 11 अक्टूबर 2025 को प्रारंभ किया गया। भारत सरकार ने केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में नए मिशन "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" को मंजूरी दी है। मिशन का उददेश्य दलहनी फसलों के उत्पादन वृद्धि एवं क्षेत्रफल का विस्तार करना, किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल उन्नत बीजों का उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाना, कटाई के बाद प्रसंस्करण, भंडारण एवं प्रबंधन तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। योजना में प्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" क्रियान्वयन से प्रजनक बीज, बीज उत्पादन, बीज वितरण, प्रदर्शन और ट्रेनिंग होगी। साथ ही पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाई) इकाई विकसित होने से कृषक लाभान्वित होगें तथा दलहनी फसलों के क्षेत्रफल में विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उत्पादन में वृद्धि होगी। सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32,405 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सड़क एवं सेतु के संधारण से संबंधित योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 6 हजार 150 करोड़ रूपये का अनुमोदन दिया गया है। इसी तरह 'एफ' टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों के अनुरक्षण के लिए 1 हजार 345 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के लिए 24 हजार 300 करोड़ रूपये का अनुमोदन सहित सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों से जुड़ी योजना की 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 की निरंतरता के लिए 610 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए। इलेक्ट्रॅानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अंतर्गत इलेक्ट्रॅानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य से संबंधित योजनाओं की निरंतरता और संचालन के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अनुसार आरसीबीसी , डीईजीएस और एनआईसी आदि केन्द्रों के आगामी पांच वर्षों 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालन के लिए 244 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। ई-दक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत राज्य के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्रि-परिषद द्वारा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए प्रदेश में इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना (EMC 2.0) के लिए 225 करोड़ 32 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी। इसके अंतर्गत भोपाल के बांदीखेड़ी में 209.47 एकड़ क्षेत्र में क्लस्टर की स्थापना की जायेगी। साथ ही सूचना प्रौ‌द्योगिकी निवेश प्रोत्साहन संबंधी योजना की निरंतरता के लिए 300 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा राज्य को आईटी एवं आईटीईएस सेवाओं के लिए आकर्षक गंत्वय के रूप में स्थापित करने के लिए पूंजीगत अनुदान कर संबंधी रियायतें, प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास तथा आईटी पार्क/ईएमसी (इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स) की स्थापना को बढ़ावा दिये जाने संबंधी कार्य किया जायेगा। इसका संचालन एमपीएसईडीसी के माध्यम से होगा। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क की स्थापना (स्वान) और संचालन संबंधी योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 526 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का उद्देश्य राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर सभी शासकीय कार्यालयों को आपस में जोड़कर सुगम … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आश्वासन: मझगांय और रुंज परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों के हितों की सुरक्षा होगी

मझगांय एवं रुंज मध्यम सिंचाई परियोजनाएं प्रभावित ग्रामीणों के हितों का रखा जाएगा पूरा ध्यान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 86 गांवों की 27510 हैक्टेयर भूमि में होगी सिंचाई 45 हजार किसान परिवार होंगे लाभान्वित प्रभावितों के मुद्दों के निराकरण के लिए राज्य स्तरीय समिति गठित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पन्ना जिले में निर्माणाधीन मझगांय एवं रुंज मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित होने वाले ग्रामीणजनों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। ये दोनों परियोजनाएं क्षेत्र के लिए वरदान साबित होंगी। इन परियोजनाओं के पूर्ण हो जाने पर पन्ना जिले के अजयगढ़ विकासखंड के 86 गांवों 27510 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लाभ मिलेगा। साथ ही पेयजल एवं औद्योगिक प्रयोजन के लिए लगभग 39.56 मिलियन घन मीटर पानी प्राप्त होगा। इससे क्षेत्र के लगभग 45 हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। इन परियोजनाओं के डूब से प्रभावितों से चर्चा कर विस्थापन, भू-अर्जन एवं परिसंपत्तियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के निराकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है, जो उनके विभिन्न मुद्दों पर प्रभावितों से चर्चा करेगी और उनके हित में शासन को प्रतिवेदन देगी। गठित समिति में :- 1. अध्यक्ष – संभाग आयुक्त सागर संभाग 2. सदस्य – प्रमुख अभियंता जल संसाधन, भोपाल 3. सदस्य – मुख्य अभियंता धसान-केन कछार जल संसाधन, सागर हैं। समिति आगामी 5 दिनों में प्रभावितों से विस्थापन, भू-अर्जन एवं परिसंपत्तियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जाँच कर एवं विस्थापितों से चर्चा उपरांत वस्तु स्थितिपरक प्रतिवेदन शासन को सौंपेगी। उल्लेखनीय है कि पन्ना जिले में इस परियोजना का कार्य निर्माण के अंतिम चरण में है। वर्तमान में इसके नाला क्लोजर का कार्य किया जा रहा है, जिसे वर्षा काल के पहले पूर्ण किया जाना है। मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना मझगांय मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के प्रभावित ग्राम मझगांय, बालूपुर, बनहरीकला, कुंवरपुर, हनुमतपुर, बरियारपुर भूमियान, डुंगरहो एवं सब्दुआ हैं। उक्त प्रभावित ग्रामों के 21 मूल एवं पूरक अवार्ड पारित किए गए हैं, जिसमें 1657 खातेदारों को भुगतान योग्य कुल 1 अरब 91 करोड़ 86 लाख 80 हजार 929 रूपए की राशि स्वीकृत कर मुआवजा वितरित किया जा चुका है। मात्र विवादित खातेदारों की राशि वितरण हेतु शेष है। इस परियोजना के तहत पुनर्वास एवं पुनर्व्यस्थापन अंतर्गत प्रभावित ग्राम मझगांय, बालूपुर, बनहरीकला, कुंवरपुर एवं हनुमतपुर हैं। उक्त प्रभावित ग्रामों के विस्थापन हेतु अपर सचिव जल संसाधन विभाग द्वारा निर्धारित 1 जुलाई 2018 कट ऑफ दिनांक से प्रारंभिक सूची अनुसार कुल 1935 परिवारों का चयन कर पात्र 660 परिवारों को एकमुश्त पुनर्वास अनुदान राशि 5 लाख प्रति परिवार के मान से 33 करोड़ रूपए मात्र स्वीकृत कर पूर्ण भुगतान किया जा चुका है। शेष परिवारों के पात्रता एवं अपात्रता की जांच एवं दस्तावेज एकत्रित किए जा रहे हैं। रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत भूमि एवं उस पर स्थित परिसंपत्तियों के प्रभावित ग्राम विश्रामगंज एवं भुजबई हैं। उक्त प्रभावित ग्रामों के मूल एवं पूरक अवार्ड पारित किए गए हैं, जिसमें कुल 710 खातेदारों को भुगतान योग्य 44 करोड़ 23 लाख 58 हजार 951 रूपए मात्र की राशि स्वीकृत कर 43 करोड़ 86 लाख 63 हजार 205 रूपए राशि का वितरण किया जा चुका है, 36 लाख 95 हजार 746 रूपए मात्र का भुगतान शेष है। रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन के तहत प्रभावित ग्राम विश्रामगंज है। प्रभावित ग्राम के विस्थापन हेतु शासन द्वारा निर्धारित 5 अक्टूबर 2018 कट ऑफ दिनांक से प्रारंभिक सूची अनुसार 670 परिवारों का चयन कर पात्र 670 परिवारों को एकमुश्त पुर्नवास अनुदान राशि 5 लाख प्रति परिवार के मान से 33 करोड़ 50 लाख रूपए राशि की स्वीकृति उपरांत पूर्ण भुगतान किया जा चुका है।