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सीएम ने ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन किया, 55 बीघा जमीन पर 110 करोड़ की परियोजना

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े पहले आवासीय ‘ऋषि गालव विश्वविद्यालय’ का भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना से हुई। 55 बीघा में बनेगा परिसर, 5000 छात्रों की क्षमता यह विश्वविद्यालय शिवपुरी लिंक रोड, शीतला माता मार्ग स्थित ग्राम बेला में बनाया जाएगा। लगभग 55 बीघा भूमि पर बनने वाले इस परिसर की अनुमानित लागत 110 करोड़ रुपये है। यहां करीब 5,000 छात्र-छात्राओं के अध्ययन की सुविधा होगी। निर्माण कार्य तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। ‘मध्य भारत शिक्षा समिति’ करेगी संचालन करीब 85 वर्षों से सक्रिय मध्य भारत शिक्षा समिति विश्वविद्यालय का संचालन करेगी। लक्ष्य है कि गुरु पूर्णिमा (18 जुलाई 2027) से शैक्षणिक सत्र शुरू किया जाए। मंच पर प्रमुख अतिथि रहे मौजूद कार्यक्रम में आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी, मध्यभारत प्रांत संघचालक अशोक पांडे, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। नई शिक्षा नीति से जुड़े सपनों पर जोर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद शिक्षा में भारतीय दर्शन को समाहित करने की अपेक्षा थी, जो अब नई शिक्षा नीति के माध्यम से साकार हो रही है। बनने वाले विश्वविद्यालय की विशेषताएं जाने     विश्वविद्यालय की लागत 110 करोड़, तीन साल में तैयार होगा, गुरु पूर्णिमा 18 जुलाई 2027 से सत्र शुरू करने का लक्ष्य तय है।     इसका संचालन मध्य भारत शिक्षा समिति करेगी। आरएसएस का पहला विश्वविद्यालय होगा। संघ से जुड़े शैक्षिक संस्थानों विद्या भारती स्कूल संचालित करती है।     ग्वालियर के बाद प्रदेश में किसी और शहर में आरएसएस विश्वविद्यालय का अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। संघ से जुड़े विद्या भारती की देशभर में पांच नई यूनिवर्सिटी बनाने की योजना विचाराधीन हैं।     चाणक्य यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु कर्नाटक में पहले से खुल चुकी है। पहला बैच 200 छात्रों का शुरू हो चुका है। असम गुवाहाटी- एक और आरएसएस यूनिवर्सिटी पर काम चल रहा है। बाकी तीन यूनिवर्सिटी अभी जगह फाइनल नहीं हुई है। मुख्यमंत्री के साथ प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, जयभान सिंह पवैया, संत कृपाल सिंह, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, अनूप मिश्रा, सांसद भारत सिंह कुशवाह और भाजपा व आरएसएस के कई नेता व पदाधिकारी मौजूद हैं। मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा 55 बीघा भूमि पर करीब 110 करोड़ रुपए की लागत से विश्वविद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन मुख्यमंत्री इसके बाद दोपहर करीब 12.30 बजे मेला मैदान पहुंचकर राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वे वृंदावन ग्राम थीम पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और विभिन्न सरकारी योजनाओं के हितलाभ वितरित करेंगे। सम्मेलन में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन सिंह पटेल, प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे। आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का करेंगे अवलोकन सम्मेलन के बाद मुख्यमंत्री शिवपुरी लिंक रोड स्थित एम्पायर रिसोर्ट में स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके पश्चात अपरान्ह करीब 3.40 बजे गोला का मंदिर क्षेत्र में निर्माणाधीन आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन करेंगे। यहां से वे एयरपोर्ट पहुंचकर वायुमार्ग से भोपाल रवाना होंगे। मुख्यमंत्री का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम       दोपहर 3 बजे शिवपुरी लिंक रोड स्थित एम्पायर रिसोर्ट में स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेंगे।     अपरान्ह 3.40 बजे गोला का मंदिर क्षेत्र में निर्माणाधीन आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का अवलोकन करेंगे।     शाम 4.15 बजे एयरपोर्ट पहुंचकर वायुमार्ग से भोपाल रवाना होंगे।     राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 1938 में ग्वालियर में शुरू हुई थी पहली शाखा     राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्वालियर में पहले प्रचारक नारायण राव तर्ते आये थे। उन्हीं के प्रयासों से अप्रैल 1938 में जीवाजीगंज स्थित पोतनीस की धर्मशाला में नियमित रूप से संघ शाखा प्रारंभ हुई थी। महानगर की पहली शाखा में जाने वाले प्रमुख स्वयंसेवक थे-माधवराव वाघ, श्रीकृष्ण कान्हेरे, माधव केलकर, श्रीधर गोपाल कुंटे, दत्तात्रय कल्याणकर, दिगम्बर सोहनी, नरहरि सोहनी, राव साहब पाटील, कृष्णराव भट्ट, सदाशिवराव भिड़े, श्रीरंग हरि गोखले, बापूनाना परांजपे।

ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: इंदौर में 9-13 जून तक आयोजन

इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित होगा ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी होंगे शामिल दो चरणों में होगा सम्मेलन, कृषि नवाचारों पर होगी वैश्विक चर्चा इंदौर केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के अंतर्गत कृषि कार्य समूह का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 9 से 13 जून तक इंदौर के ग्रेंड शेरेटन होटल में होगा। पांच दिवसीय इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। शहर की स्वच्छता, हरियाली और सुंदरता अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम, पुलिस प्रशासन, पर्यटन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थलों, प्रमुख मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई, आकर्षक सजावट और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, पारंपरिक खान-पान और कृषि नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदेश भ्रमण और कृषि उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट और होटलों पर अंग्रेजी, रूसी, तुर्की सहित विभिन्न भाषाओं के जानकार गाइड तैनात किए जाएं और उन्हें व्यवहार और आतिथ्य का पूर्व प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि मेहमानों का स्वागत पगड़ी, तिलक और फूलमालाओं के साथ भारतीय परंपरा के अनुरूप गर्मजोशी से किया जाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य एवं प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की ब्रांडिंग में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूगांडा, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, कोलम्बिया, इंडोनेशिया सहित कुल 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विश्व के लगभग 68 प्रतिशत किसान इन देशों में निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। बैठक में जानकारी दी गई कि सम्मेलन दो चरणों में आयोजित होगा। प्रथम चरण में 9 से 11 जून तक वरिष्ठ अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में स्मार्ट कृषि, कृषि अनुसंधान, कृषि व्यापार, किसान कल्याण तथा सतत विकास रणनीतियों जैसे विषयों पर तकनीकी चर्चा होगी। इसके बाद 12 एवं 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और नीति संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में कृषि आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी। समीक्षा बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला, श्रीमती मालिनी गौड़, श्रीमती उषा ठाकुर, सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली नई रफ्तार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के किसान हितेषी फैसले से इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर को मिली रफ्तार मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 मई को प्रथम चरण का करेंगे भूमिपूजन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट को गति देने के लिए किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने जमीन देने वाले भू-स्वामियों को मिलने वाली विकसित जमीन का हिस्सा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से किसानों का भरोसा बढ़ा है और वे प्रोजेक्ट में स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली प्रमुख परियोजना है। इस परियोजना में 75 मीटर चौड़ी और 20 किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में सुनियोजित विकास किया जाएगा। परियोजना में 1300 हैक्टेयर से अधिक भूमि शामिल है और इसकी कुल लागत 2360 करोड़ रु. निर्धारित की गई है। इसके माध्यम से उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित होंगी, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती भू-स्वामियों से सहमति के साथ जमीन प्राप्त करना थी, क्योंकि शहर के समीप होने के कारण भूमि का बाजार मूल्य अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस स्थिति को समझते हुए किसानों के हित में बेहतर निर्णय लिया। इससे विकास और किसानों के हितों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस निर्णय के बाद किसानों की भागीदारी में तेजी आई है। योजना में किसानों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन दी जाती है, यानी ऐसी जमीन जिसमें सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हों। अब 60 प्रतिशत विकसित जमीन मिलने से किसानों को भविष्य में अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही वे इस जमीन का उपयोग आवासीय, वाणिज्यिक या अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए कर सकेंगे, जिससे उनकी आय के स्थायी स्रोत बनेंगे। परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा 3 मई को सेक्टर-ए, ग्राम नैनोद, इंदौर में किया जाएगा। प्रथम चरण की लागत 326.51 करोड़ रु. है, जिसके तहत प्रारंभिक अधोसंरचना विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। परियोजना से क्षेत्र में आधुनिक अधोसंरचना विकसित होगी, कनेक्टिविटी मजबूत होगी और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। जिला प्रशासन और एमपीआईडीसी द्वारा भू-स्वामियों से लगातार संवाद स्थापित किया जा रहा है और उन्हें योजना के लाभों की जानकारी दी जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और किसान इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।  

पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

  प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का है आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर आई है सामने राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात स्पष्ट की थी समरांगण सूत्रधार में हर निर्माण में समाहित हों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश के तत्व प्रधानमंत्री मोदी ने प्राचीन ज्ञान-परंपरा को मौजूदा विज्ञान के साथ जोड़ा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल की मीटिंग भी हुई आरंभ पीडब्ल्यूडी और आईआईटी इंदौर के बीच निर्माण तकनीक के विकास पर केंद्रित एमओयू का हुआ आदान-प्रदान लोक निर्माण विभाग ने गृहा संस्था के साथ भी साइन किया एमओयू सेमिनार में ग्रीन बिल्डिंग सामग्री, ऊर्जा दक्षता, प्राकृतिक प्रकाश एवं वेंटिलेशन, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, प्रीडिक्टिव मेंटेनेंस आदि विषयों पर हुआ विचार-विमर्श मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर केंद्रित दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार का किया कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सौभाग्य का विषय है कि सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस जैसे विषय पर भोपाल में राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन को देखते हुए वहां भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग तथा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस, कार्यक्रम के आयोजक हैं। पी.डब्ल्यू.डी. की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम वंदे-मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर आईबीसी इनोग्रल सॉन्ग और लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन किया। उनकी उपस्थिति में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया। हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगति‍की बात समरांगण सूत्रधार में स्पष्ट की थी। हमारे ग्रंथों में कहा गया है 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे' अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है। ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से हमारे घरों को उसी ब्रह्मंडीय संतुलन में वापस लाने की एक प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ यह मानते हैं कि एक भवन में इन सब तत्वों का समावेश आवश्यक है। वर्तमान दौर में जीपीएस एक नई तकनीक है, लेकिन पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। तत्कालीन गणना की सटीकता इससे सिद्ध होती है कि वर्तमान में भी निश्चित तिथियों पर मौसम में बदलाव का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन वास्तुकला की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं का उल्लेख किया। अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है, लेकिन अधोसंरचना विकास में राशि का सदुपयोग हो, इन बिन्दुओं के साथ ही हम ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज अलार्मिंग हो चुकी है, यह मुख्य चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने इस चुनौती का सामना करने में जन-जन की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गुढ़ी पड़वा से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। गंगा दशहरा 25 मई को इसके अंतर्गत प्रदेश में कुएं, बाबड़ियों और सभी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। इसमें अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश में सभी ने जल संरचनाओं पर निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। जल संचयन में डिण्डौरी और खंडवा जिले देश में क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे हैं। सस्टेनेबल फ्यूचर केवल विचार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है : मंत्री सिंह लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए नवाचारों के साथ अधोसंरचना विकास को गति प्रदान कर रहा है। प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वैदिक घड़ी को सराहा है। इस घड़ी के निर्माण का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जाता है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं। लोक निर्माण विभाग ने अपने प्रशिक्षण कैलेंडर में ग्रीन बिल्डिंग तकनीक को शामिल किया है। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है। मंत्री सिंह ने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि मध्यप्रदेश की विविध भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: बरगी क्रूज़ हादसे के दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा

बरगी क्रूज़ दुर्घटना के दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दुर्घटना की जांच करेगी उच्च स्तरीय जांच समिति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा नागरिकों की जान बचाने और सहयोग देने वाले प्रत्येक श्रमिक को दिए जाएंगे 51-51 हजार रूपए बचाव दल के सभी बहादुरों को राज्य सरकार करेगी सम्मानित क्रूज पायलट महेश पटेल, क्रूज हेल्पर छोटेलाल गोंड एवं टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से की समाप्त होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण किया निलंबित रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच की गई संस्थित क्रूज़ संचालन की बनाई जाएगी एसओपी मुख्यमंत्री ने घटनास्थल जाकर पीड़ित परिवारों से की भेंट, संवेदना जताकर दी सांत्वना जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर जिले के बरगी में हुए क्रूज़ दुर्घटना पर गहन शोक व्यक्त कर इसे दुर्भाग्यपूर्ण और अत्यंत पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार प्रत्येक पीड़ित परिवार के साथ है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में लापरवाही करने वाले दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की गई है। क्रूज पायलट महेश पटेल, हेल्पर छोटेलाल गोंड और टिकट काउंटर प्रभारी बृजेन्द्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है। होटल मैकल रिसार्ट और मैनेजर बोट क्लब बरगी सुनील मरावी को लापरवाही के लिये निलंबित कर दिया गया है। साथ ही रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्र को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच संस्थित कर दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुर्घटना के दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जायेगा। पीड़ित परिवारों की सरकार हरसंभव सहायता करने के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने व्यथित मन से कहा कि जिन परिजनों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। कठिन समय में पीड़ितों के परिजन खुद को कतई अकेला न समझें। सरकार की ओर से सहायता राशि दी जा रही है। शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि दु:ख की इस घड़ी उनके साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को जबलपुर के बरगी में घटनास्थल का मौका मुआयना करने और पीड़ित परिवारों से मिलने के बाद स्थानीय मीडिया को संबोधित करते हुए यह बातें कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुर्घटना के हर पहलू की गहनता से जांच के लिये उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जा रही है। समिति में महानिदेशक होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा, सचिव मध्यप्रदेश शासन, आयुक्त जबलपुर संभाग शामिल किए गए हैं। यह समिति तीन बिंदुओं पर दुर्घटना की बारीकी से जांच करेगी, जिसमें दुर्घटना के कारण, क्रूज संचालन के नियम सहित अन्य जरूरी जानकारियां भी जुटाई जाएंगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, जिससे कि भविष्य में इस तरह की दु:खद घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पर्यटन विभाग के माध्यम से क्रूज संचालन से जुड़ी एसओपी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राहत और बचाव कार्य में जुटे श्रमिकों को प्रोत्साहन स्वरूप 51-51 हजार रुपए की पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बचाव दल के सभी बहादुरों को राज्य सरकार सार्वजनिक रूप से सम्मानित करेगी। रेस्क्यू टीम की जीवटता और कर्मठता से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जीवित बचाया जा सका है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। क्रूज बोट को खींचकर किनारे पर लाया गया है। कुछ लोग अभी लापता हैं, जिनकी हरसंभव तरीकों से तेजी से तलाश की जा रही है। जल्द ही सभी को रेस्क्यू कर लिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रूज हादसे में पीड़ित परिवारों के निवास पहुंचकर शोक संवेदनाएं व्यक्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुर्घटना के बारे में बताया कि जबलपुर के बरगी डैम में गुरुवार को हुए दु:खद हादसे में 9 लोगों की असमय मृत्यु हो गई। रेस्क्यू टीम ने तत्परता से कार्रवाई कर 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हादसे से पूरा प्रदेश स्तब्ध है। क्रूज हादसे के दौरान डैम के पास जल जीवन मिशन का कार्य चल रहा था, जिससे तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू हो पाया। सूचना मिलते ही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी और जबलपुर सांसद आशीष दुबे तत्काल घटनास्थल पर पहुंच गए थे। साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तत्परता से यहां राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। उप-मुख्यमंत्री और जबलपुर जिले के प्रभारी जगदीश देवड़ा भी लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना के गोताखोरों की भी मदद ली गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि क्रूज़ में 4 से 5 घंटे तक पानी में फंसे रहे पीड़ित रियाज को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकाल लिया। पीड़ित रियाज को शायद उम्मीद भी नहीं थी कि वे जिंदा रह पाएंगे, लेकिन रेस्क्यू टीम के अथक परिश्रम से आज वे हमारे साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उन्होंने पीड़ित रियाज सहित अन्य पीड़ितों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस मुश्किल दौर में राज्य सरकार सभी परिवारों के साथ है। हमारी संवेदनाएं सभी के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने क्रूज दुर्घटना में जान गंवाने वालों के निकटतम परिजन को 2-2 लाख रूपए और राज्य सरकार ने 4-4 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को मौसम विभाग द्वारा समय-समय दी जाने वाली सूचनाओं और चेतावनियों को पूरी गंभीरता के साथ अमल में लाना चाहिए। मौसम विभाग की चेतावनियां हमें सचेत करती हैं और ऐसी दुर्घटनाओं से बचाती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रूज़ हादसे में दिन-रात काम करने वाले बचाव दल के सभी जवानों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्थानीयजनों और मीडिया बंधुओं के सहयोग की प्रशंसा की।  

80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं उपार्जन के स्लॉट बुक, प्रदेश में लगातार बढ़ रहा आंकड़ा: CM यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में गेहूँ उपार्जन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। किसान भाइयों ने बड़ी संख्या में स्लॉट बुक किए हैं। अब तक 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ उपार्जन के लिए स्टॉल बुक हो चुके है। यह एक सकारात्मक संदेश है। स्टॉल बुकिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के किसानों से गेहूँ उपार्जन करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केन्द्रों पर सभी संभव व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूँ उपार्जन प्रक्रिया में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के लिए आकस्मिक निरीक्षण लगातार चलता रहेगा और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। सभी मंत्री, विधायक और संबंधित अधिकारियों को उपार्जन प्रक्रिया में पूरी सक्रियता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने और किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए निर्देशित किया गया है। 23 मई तक गेहूं खरीदी की बढ़ी तारीख  न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपज बेचने में हो रही परेशानी को देखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 23 मई कर दी है। इसके साथ ही खरीदी केंद्रों की क्षमता और सुविधाओं में भी इजाफा किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि जिन किसानों को अब तक स्लॉट नहीं मिल पाया है, उन्हें अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, ताकि वे अपनी फसल आसानी से बेच सकें। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी समयसीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होने के कारण दोबारा अवधि बढ़ानी पड़ी।  जिलों में बढ़ा रही तौल कांटों की संख्या  मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की है। अब किसान जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। इतना ही नहीं, किसानों को गेहूं की तौल के लिए इंतजार नहीं करना पड़े इसके लिए उपार्जन केन्द्रों में तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। सरकार ने चमक विहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिए बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन ,गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।  विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। सभी जिलों में लघु सीमांत के साथ ही मध्यम एवं बड़े किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। बड़े एवं मध्यम वर्ग के एक लाख 60 हजार किसानों ने स्लॉट बुक कराया है। पूरे प्रदेश में स्लॉ्ट बुकिंग की तारीख 30 अप्रैल 2026 से बढ़ाकर 9 मई तक की गई है। किसानों की सुविधा के लिए खरीदी के लिये प्रत्येक शनिवार को भी स्लॉट बुकिंग एवं उपार्जन का कार्य जारी रहेगा। अभी तक प्रदेश मे समर्थन मूल्य् पर गेहूं उपार्जन के लिये 9.60 लाख किसानों द्वारा 57.75 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी न हो एवं उपज विक्रय के लिए इंतजार न करना पड़े इसके लिये किसानों को जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा के लिए पीने का पानी, बैठने के लिए छायादार स्थान, जन सुविधाएं आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। किसानों के उपज की तौल समय पर हो सके इसके लिये बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं उपार्जन केन्द्र पर उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजन के प्रति संवेदनाएं प्रकट की

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरगी क्रूज दुर्घटना पर जताया दु:ख मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजन के प्रति संवेदनाएं प्रकट की मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बरगी डैम हादसे की जांच के दिए निर्देश बरगी क्रूज दुर्घटना में लोगों को बचाने वालों को स्वतंत्रता दिवस पर किया जाएगा सम्मानित मुख्यमंत्री ने की नागरिकों से बोटिंग के समय लाइफ जैकेट पहनने की अपील भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जबलपुर के बरगी डैम में मौसमी चक्रवात के कारण दु:खद घटना हुई है। सूचना मिलते ही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, एडीजी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ सहित स्थानीय प्रशासन के अधिकारी राहत और बचाव कार्य में पूरी तत्परता के साथ जुट गए। हमारे राहत और बचाव दल ने लगभग 29 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, रेस्क्यू जारी है, अब तक 9 शव बरगी डैम से बाहर निकाले गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्रूज दुर्घटना अत्यंत दु:खद है, राज्य सरकार ने हादसे की जांच के निर्देश दिए हैं। ऐसी दुर्घटना से मन दु:खी है। सभी नागरिकों को बोटिंग के दौरान लाइफ सेविंग जैकेट अवश्य पहननी चाहिए, जिन्होंने लाइफ जैकेट का इस्तेमाल किया, वे सुरक्षित रहे। भविष्य में इस प्रकार के हादसे न हो, इसके लिए पर्यटन विभाग जांच कराई जाएगी। हादसे में जान गंवाने वालों के परिजन के प्रति हमारी पूरी संवेदनाएं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रेस्क्यू टीम ने बहादुरी के साथ अपनी जान की परवाह किए बगैर कई लोगों को सुरक्षित बचाया है , जिन व्यक्तियों ने तत्परता के साथ राहत और बचाव कार्य में हिस्सा लिया, उन सभी बहादुर नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर सम्मानिेत किया जाएगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने की भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में भेंट कर प्रदेश में जारी गेहूँ उपार्जन के संबंध में चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें बताया कि गेहूँ उपार्जन के लिए अब तक 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक हो चुके हैं, स्लॉट बुकिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के किसानों से गेहूँ उपार्जन के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। किसानों की सुविधा के लिए सभी संभव व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वे स्वयं भी उपार्जन प्रक्रिया पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।  

मध्य प्रदेश में श्रमिकों को राहत: CM मोहन ने 600 करोड़ का ट्रांसफर किया, गिग वर्कर्स को भी लाभ

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि श्रमिकों के हित में केन्द्र और राज्य सरकार की अनेक योजनाएं संचालित हैं। अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी संबल योजना का लाभ दिया जा रहा है। इनमें विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता सामग्री पहुंचाने वाले गिग वर्कर्स और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश में 3529 गिक वर्कर्स को पहली बार योजना का लाभ प्रदान करने के लिये विभाग की सराहना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस क्षेत्र के पात्र श्रमिकों को पंजीकृत कर सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करवाना हम सभी का दायित्व है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालयीन बैठक कक्ष से सिंगल क्लिक द्वारा मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना में 27 हजार से अधिक श्रमिक परिवारों के लिए 600 करोड़ रुपए की अनुग्रह सहायता राशि  अंतरित करते हुए ये बातें कहीं। इस अवसर पर श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित थे। राशि अंतरण के अवसर पर प्रदेश के जिलों में स्थित प्रशासनिक अधिकारी, श्रमिक भाई और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग की अनूठी पहल शुरू की गई है। इस व्यवस्था में औद्योगिक संस्थाओं द्वारा श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का कार्य किया जा रहा है। श्रेष्ठ कार्य के लिए प्रतिष्ठानों को श्रम स्टार रेटिंग के माध्यम से आंकलन कर प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे श्रम कानूनों का बेहतर पालन करने वाले औद्योगिक संस्थानों की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। प्रदेश में 554 कारखानों ने स्वेच्छा से श्रम स्टार रेटिंग की व्यवस्था को अपनाया है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रम विभाग, श्रम संगठनों के साथ ही नागरिकों का भी यह दायित्व है कि जिस प्रतिष्ठान से खरीदारी करते हैं, वहां श्रम स्टार रेटिंग की व्यवस्था लागू करने को प्रोत्साहित करें। ऐसे संस्थानों से उत्पाद क्रय करने और सेवाएं लेने को प्राथमिकता भी दी जाए जो श्रमिक भाइयों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार ने 4 नई श्रम संहिताओं का प्रावधान किया है। राज्य सरकार भी इन संहिताओं के अनुरूप नियम तैयार कर लागू करेगी। श्रमिक हित में लागू की गई केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक श्रमिकों को दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबल योजना में श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले 5 जिलों बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर और खरगौन की तरह अन्य जिलों से भी श्रमिकों को अनुग्रह सहायता देने के कार्य में सक्रिय प्रदर्शन की अपेक्षा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव की श्रमिक हितैषी नीतियों में श्रम एवं पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री पटेल ने विश्वास व्यक्त कर श्रमिक कल्याण की प्राथमिकता के लिये आभार माना। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि वर्ष 2018 में श्रमिकों के हित में प्रारंभ हुई योजना से अब तक एक करोड़ 83 लाख श्रमिक जुड़ चुके हैं। अब तक 8 लाख 27 हजार से अधिक प्रकरणों में 7 हजार 720 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता हितग्राहियों को दी जा चुकी है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रमिकों को राशि अंतरित किए जाने के अवसर पर श्रम विभाग के अपर सचिव श्री संजय कुमार को उनके सेवानिवृत्ति दिवस पर भावी जीवन के लिए मंगलकामनाएं दीं। बैठक में सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  आलोक सिंह, श्रम विभाग के सचिव एम. रघुराज सहित अन्य अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को रोल मॉडल बनाने की अपील, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को बनाएं रोल मॉडल : मुख्यमंत्री डॉ.यादव प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम रीवा से सर्वाधिक 24 हजार यात्रियों ने लिया हवाई सेवाओं का लाभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने के प्रयास किए जाएं। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के साथ ही पड़ौसी राज्यों के यात्रियों को भी विमानन सेवाएं लाभान्वित करती हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का महत्व बढ़ाने की दृष्टि से भी ये सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई बैठक में विमानन विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विकसित होने वाले मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के परिसर में हैलीपेड निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। हैली सेवाओं के विस्तार के लिए हैलीपेड निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए संचालित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट में एयरफील्ड का कुल क्षेत्रफल 95 एकड़ है। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार उज्जैन एयरपोर्ट 2700 मीटर लंबाई के रनवे के साथ कुल 4 हजार 100 मीटर लंबाई में विकसित होगा। इसके लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एयरपोर्ट उपयोगी होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट के विकास के सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा के संचालन के संबंध में भी चर्चा हुई। रोजगारपरक एविएशन पाठ्यक्रम का लाभ युवाओं को दिलवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार के साथ दक्ष पायलट और अन्य प्रशिक्षित अमले की आवश्यकता होगी। नई शिक्षा नीति में एविएशन पाठ्यक्रम को रोजगारपरक शिक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा एविएशन कोर्स का लाभ युवाओं को दिलवाने के लिये प्रयास करने के ‍निर्देश दिये। सफल है प्रदेश की विमानन नीति, रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 गत फरवरी 2025 में जारी की गई थी। नीति में विमानन क्षेत्र की समग्र वैल्यू चैन के लिए कई तरह के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश से बनारस और पटना जैसे बड़े नगरों के लिए विमान सेवा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले। प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में नए आयाम जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन नीति की सफलता के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के एयरपोर्ट से नए गंतव्यों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता भी शिड्यूल्ड ऑपरेटर्स को दी जा रही है। मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 की सफलता का ही यह प्रमाण है कि गत छह माह में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है। रीवा से दिल्ली, रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन और रीवा से इंदौर प्रतिदिन फ्लाइट उपलब्ध है। गत चार माह में रीवा से इंदौर की ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत और गत डेढ़ माह में रीवा से रायपुर की ऑक्यूपेंसी 80 प्रतिशत से अधिक है। रीवा- नई दिल्ली फ्लाइट की ऑक्यूपेंसी भी 70 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग श्री संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, सचिव वित्त श्री लोकेश जाटव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।