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डॉ. मोहन यादव के अनुसार केन्द्रीय बजट खुलेगा आर्थिक विकास के नए द्वार

आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट •    डॉ. मोहन यादव  भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में हम विकसित भारत का मिशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, उद्योगों को सरल प्रक्रियाएँ, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई सेक्टर को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्राप्त होंगी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की जो नींव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रखी गई है उसे वर्ष 2026-27 के बजट ने और ज्यादा मजबूत किया है। भारत की अर्थव्यवस्था अब तेजी से नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तत्पर है। युवा शक्ति, नारी शक्ति, किसान शक्ति और उदयमिता के सहयोग से भारत ने आगे बढ़ने जो संकल्प लिया है वह कई अर्थों में अदभुत है। आज जब भारत औदयोगिक निवेश और निर्माण क्षेत्र का हब बनने जा रहा है, उसमें मध्यप्रदेश भी अपनी पूरी शक्ति के साथ योगदान देने के लिए तैयार है। हमने औदयोगिक निवेश के लिये अनूकूल वातावरण तैयार किया, जिससे निरंतर निवेश आ रहा है। नये बजट से पूरे इको-सिस्टम को नई ऊर्जा मिली है। बजट में हरित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया गया है। इससे मध्यप्रदेश को दीर्घकालिक लाभ होने वाला है। कृषक कल्याण और कृषि विकास को मिशन के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया है। इसी प्रकार सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीक के विकास पर बजट में ध्यान केन्द्रित किया गया है। इन तीनों क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को हाई टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। इन क्षेत्रों के लिये नीतियां बनाने का काम पूरा कर लिया है। निवेश आकर्षित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं।  केन्द्रीय बजट गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समर्पित है। यह सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी बजट है। जिस प्रकार मध्यप्रदेश में तेजी से शिक्षा का आधुनिकीकरण हो रहा है, नया बजट युवाओं के कौशल विकास और रोज़गार के लिए व्यापक अवसर लेकर आया है। शिक्षा से रोजगार एवं उदयम स्थायी समिति का गठन और 15 हजार माध्यमिक विदयालयों एवं 500 महाविदयालयों में एपीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना रचनात्मकता को बढ़ावा देगी। पर्यटन क्षेत्र में आईआईएम के सहयोग से 10 हजार गाइड्स के कौशल उन्नयन और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेलों के परिदृश्य में बदलाव लाने का लक्ष्य युवाओं को नई दिशा देगा। महिलाओं के लिये एमएसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10 हजार करोड़ रूपये का आवंटन लाभदायी होगा। युवा भारत के लिये सेवा क्षेत्र का विस्तार संभावनाओं के नये द्वार खोलेगा और रोज़गार और उदयम के अवसर बढ़ेंगे।  महिला उदयमिता को बढ़ावा देने के लिए लखपति दीदी योजना में महिला उदयमियों को क्रेडिट लिंक आजीविका से उद्म स्वामित्व से जोड़ने में मदद मिलेगी। मध्यप्रदेश ने पहले ही इस दिशा में ठोस प्रयास किये हैं।      सिटी ईकॉनामिक रीजन बनाने की नीति मध्यप्रदेश के शहरी विकास के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी। शहरों को संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने में यह सहायक सिद्ध होगी। शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इससे मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे और निवेश अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा। यह निवेश मॉडल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स तथा व्यापारिक सुगमता को व्यापक रूप से मजबूत बनायेगा।  बजट में सामाजिक समावेश पर पूरा ध्यान दिया गया है। आर्थिक विकास की ये पहल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। समावेशी विकास के साथ मानव-पूंजी निर्माण को भी मजबूती मिलेगी। शी-मार्ट्स, दिव्यांगजन कौशल योजना, सभी जिलों में गर्ल्स हॉस्टल और शिक्षा कौशल आधारित पहल से सामाजिक सशक्तिकरण के साथ आर्थिक विकास को समावेशी स्वरूप मिलेगा। इससे मध्यप्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मानव पूंजी का सृजन होगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को विकास के केन्द्र में रखते हुए यह बजट प्रशासनिक सरलीकरण, निवेश-अनुकूल नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और वित्तीय स्थिरता के माध्यम से मध्यप्रदेश को तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की ठोस आधारशिला रखता है। मध्यप्रदेश के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 केवल एक नीति-दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का एक ऐतिहासिक अवसर है, जो मध्यप्रदेश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी।   (लेखक मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन हैं)  

मध्य प्रदेश सरकार फिर लेगी ₹5200 करोड़ का कर्ज, चालू वित्तीय वर्ष में कुल ऋण इतना पहुंचा

  भोपाल मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज लेगी। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 57,100 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका हैं। अब यह लोन 62,300 करोड़ रुपए का हो गया है। एमपी सरकार साल 2026 में दूसरी बार कर्ज ले रही हैं। 7 फरवरी को 5200 करोड़ की राशि मिलेगी। जिसकी पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए 7 साल के लिए ब्याज समेत भुगतान की तारीख 4 फरवरी 2033 तारीख की है। 2000 करोड़ का कर्ज 17 साल के लिए लिया जा रहा है, जो 4 फरवरी 2043 तक के लिए है। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार लगातार कर्ज के बढ़ते बोझ तले दबती जा रही है। राज्य सरकार ने एक बार फिर 5200 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का निर्णय लिया है। यह कर्ज इस वित्तीय वर्ष में दूसरी बार लिया जा रहा है।सरकारी जानकारी के अनुसार, इस कर्ज का भुगतान ब्याज सहित 4 फरवरी 2033 तक किया जाएगा। इसमें से 2000 करोड़ रुपये का कर्ज 17 साल की अवधि के लिए लिया गया है, जिसका भुगतान 4 फरवरी 2043 तक होगा। वहीं, 2000 करोड़ रुपये की तीसरी किस्त 22 साल की अवधि के लिए ली गई है, जिसे ब्याज सहित चुकाया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में कुल कर्ज 62,300 करोड़ तक पहुँचा चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक मध्य प्रदेश सरकार कुल 57,100 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी थी। ताजा 5200 करोड़ रुपये के कर्ज के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 62,300 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। जानिए मोहन सरकार ने कब-कब लिया कर्ज? वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक लिए गए कर्ज का विवरण इस प्रकार है: 7 जनवरी 2026 – 400 करोड़ 30 दिसंबर 2025 – 3500 करोड़ 2 दिसंबर 2025 – 3000 करोड़ 11 नवंबर 2025 – 4000 करोड़ 28 अक्टूबर 2025 – 5200 करोड़ 30 सितंबर 2025 – 3000 करोड़ 23 सितंबर 2025 – 3000 करोड़ 9 सितंबर 2025 – 4000 करोड़ 26 अगस्त 2025 – 4800 करोड़ 5 अगस्त 2025 – 4000 करोड़ 30 जुलाई 2025 – 4300 करोड़ 8 जुलाई 2025 – 4800 करोड़ 4 जून 2025 – 4500 करोड़ 7 मई 2025 – 5000 करोड़ इस तरह लगातार कर्ज लेने के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष के निशाने पर मोहन सरकार मध्य प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों की सही योजना न होने के कारण सरकार बार-बार कर्ज लेने को मजबूर हो रही है।  

MP के शहरों में विकास का बड़ा मौका! केंद्र बजट से बड़े शहरों को मिलेगा खास फंड

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल आज राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट की खूबियां बताएंगे। बीजेपी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा रहेंगे शामिल।  रविवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण द्वारा बजट पेश किए जाने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कह चुके हैं कि केंद्रीय बजट में गरीबों, युवाओं, अन्नदाताओं और महिलाओं पर विशेष फोकस है। इसमें 5 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के विकास और सभी शहरी आर्थिक क्षेत्रों पर 5 साल में 5000 करोड रुपए खर्च करने, छोटे शहरों में तीर्थ स्थल विकसित करने, हर जिले में एक महिला छात्रावास के निर्माण और जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने की व्यवस्था से प्रदेश को बहुत लाभ प्राप्त होगा। क्लिनिकल ट्रायल स्थलों का भी विकास होगा। केंद्रीय बजट में केयर इकोसिस्टम पर विशेष ध्यान देने के प्रावधान किए गए हैं। इससे बुजुर्गों के इलाज के लिए विशेष व्यवस्था होगी। गंभीर बीमारियों की दवाऐं भी सस्ती होंगी, जिससे सभी वर्गों को राहत मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा है कि केंद्रीय बजट में वस्त्र उद्योग सेक्टर में रिफॉर्म पर बल दिया गया है, इससे मध्य प्रदेश को भी लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने मध्य प्रदेश को पीएम मित्र पार्क के रूप में टेक्सटाइल क्षेत्र की बड़ी सौगात दी है, इससे तीन लाख लोगों को रोजगार के अवसर मिलने के साथ ही 6 लाख किसानों को लाभ होगा। इस पार्क से प्रदेश का मालवा निमाड़ अंचल नई उड़ान के लिए तैयार है। बजट में देश में रिसर्च एंड डेवलपमेंट और एआई के अधिक से अधिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया है, इसका आने वाले दिनों में प्रदेश और देश को तरक्की में बड़ा योगदान होगा। दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने बजट के बाद कहा था कि केंद्रीय बजट आने वाले 10 वर्षों में भारत के विकास की दिशा तय करेगा। जिन क्षेत्रों में दुनिया के केवल दो-तीन देशों का दबदबा है, उन रणनीतिक उत्पादों के निर्माण पर बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। बजट में पहली बार अलग मालगाड़ी कॉरिडोर बनाने की बात की गई है, जिससे लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा और व्यापार बढ़ेगा। खण्डेलवाल ने कहा है यह बजट डर से मुक्त टैक्स व्यवस्था की ओर एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह बजट हर वर्ग को राहत देने वाला बजट है।

सीएम यादव का नया कदम, हर सरकारी अस्पताल में ‘गर्भ संस्कार’ कक्ष अनिवार्य, 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज भी होंगे

इंदौर   सीएम मोहन यादव ने प्रदेश के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। यह पहल 'दिव्य संतान प्रकल्प' के तहत 'गर्भ संस्कार' को बढ़ावा देगी। इसका मकसद बच्चों के जन्म से पहले ही उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को मजबूत बनाना है। यह पहल आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष मंत्रालय के सहयोग से लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताए फायदे सीएम यादव ने इंदौर में 'दिव्य संतान प्रकल्प' कार्यक्रम में कहा कि गर्भ संस्कार एक ऐसी प्रक्रिया है जो आने वाली पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि यह आधुनिक विज्ञान और भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का एक मेल है। इसे राष्ट्र निर्माण में एक लंबे समय का निवेश माना जाना चाहिए। अस्पतालों में बनेंगे अलग कमरे मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में राज्य के सरकारी अस्पतालों के डिज़ाइन में गर्भ संस्कार के लिए विशेष कमरे बनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि एलोपैथी के डॉक्टर भी अब व्यापक प्रसव पूर्व देखभाल के फायदों को स्वीकार कर रहे हैं। 13 आयुर्वेदिक कॉलेज खुलेंगे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर जोर देते हुए, यादव ने कहा कि राज्य सामान्य प्रसव को बढ़ावा दे रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जाएंगे। यह आजादी के बाद पहली बार है जब इतने सारे आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जा रहे हैं। इनमें से आठ कॉलेज एक साल के भीतर चालू हो जाएंगे। अभिमन्यु और अष्टावक्र का दिया उदाहरण मुख्यमंत्री ने गर्भ संस्कार की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में अभिमन्यु और अष्टावक्र जैसे उदाहरण हैं। इनसे पता चलता है कि गर्भ में ही मूल्यों, सीखने और संस्कारों को ग्रहण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी ने एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण की प्रभावशीलता को दिखाया है, जहां आयुर्वेद और एलोपैथी एक दूसरे के पूरक थे। उन्होंने पारंपरिक ग्रामीण जीवन शैली, भारतीय रसोई और स्वदेशी आहार के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।

मप्र अपडेट: 10 साल से सेवा देने वाले संविदा कर्मचारी अब होंगे नियमित, मोहन यादव ने किया ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश के ढाई लाख संविदाकर्मियों को बड़ी सौगात दी है. राज्य सरकार ने 10 साल से अधिक अनुभव रखने वाले संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की प्रक्रिया और आगे बढ़ाने जा रही है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह घोषणा मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मंच से की है. यह प्रक्रिया अभी खाली पदों में से 50 फीसदी पदों के लिए जारी है. सीएम ने कहा कि 10 साल से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी तक 50 फीसदी पदों के लिए प्रक्रिया जारी है, इस दिशा में आगे और काम किया जाएगा. कार्यक्रम में संविदाकर्मियों को कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता और सेवा समाप्ति के मामलों में सीसीए नियम लागू करने पर भी सहमति बनी है. संविदाकर्मियों के लिए यह लिए गए निर्णय भोपाल के टीटी नगर दशहरा मैदान में हुए मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मंच के संविदा अधिकारी कर्मचारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि "संविदाकर्मियों की भूमिका हनुमान जी के समान है. उनके श्रम और साझेदारी की मदद से ही शासन प्रशासन की व्यवस्था बनाई गई है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने संविदाकर्मियों से जुड़ी कई मांगों को लेकर बात की. मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 सालों से अधिक अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी 50 प्रतिशत पदों के लिए प्रक्रिया चल रही है, इस दिशा में और काम किया जाएगा. सामान्य प्रशासन विभाग संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी कंडिकाओं का केंद्र और राज्य पोषित परियोजनाओं में लागू किया जाएगा. राज्य शासन के निगम मंडल इसे लागू करेंगे. संविदा नीति-2023 के अंतर्गत सभी विभागों में संविदा कर्मियों के लिए एनपीएस, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा लाभ, अनुकंपा नियुक्ति के लिए केंद्र पोषित-राज्य पोषित समस्त योजनाओं-परियोजनाओं में एक साथ क्रियान्वयन व संविदा कर्मियों के लिए प्रावधान सीसीए रूल 1965, 1966 को पूरी तरह से लागू करने के लिए निर्णय लिया जाएगा. विभागों में पदस्थ संविदा कर्मचारियों की विसंगतियों को दूर करने के लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई समिति द्वारा इस पर विचार किया जाएगा. संविलियन से यह होगा फायदा अनुभवी संविदाकर्मियों को नियमित किए जाने की प्रक्रिया और बढ़ाए जाने से संविदाकर्मियों को बड़ा लाभ होगा. प्रदेश में अभी संविदाकर्मियों की संख्या करीबन ढाई लाख है. इसमें से आधे को नियमित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है. संविलियन होने से वे सरकारी विभाग में स्थायी कर्मचारी बन जाएंगे. इससे आम कर्मचारियों के समान सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा. इसके बाद ऐसे सभी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता मिल सकेगा. अभी संविदा कर्मचारियों को साल में एक बार मूल्य सूंचकांत पर भत्ता दिया जाता है, जो बहुत मामूली होता है. संविदा अधिकारी या कर्मचारियों को नियमित पदों के समकक्ष संविदा पद पर लगातार 10 साल सेवा पूरी कर चुके हैं, उनके लिए विभाग में सीधी भर्ती के तहत अधिकतम 50 पद या रिक्त पदों के 50 फीसदी तक नियुक्तियां आरक्षित रखी जाती हैं. उन्हें भी अन्य अभ्यर्थियों के साथ सीधी भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना पड़ता था और कम से कम 50 फीसदी कटऑफ अंक लाना जरूरी था.

किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों के कल्याण के लिए मिशन मोड में करें काम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों का जीवन संवारना हमारा कर्तव्य, कृषक कल्याण वर्ष का करें प्रभावी क्रियान्वयन किसान रथ निकालें, उड़द और मूंगफली के अधिकाधिक उत्पादन को दें प्रोत्साहन कृषि वर्ष की गतिविधियों की करें नियमित मॉनिटरिंग मंडियों का करें भ्रमण, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर दें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के लिए सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को वीसी से दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हम सबके अन्नदाता हैं, उनके दुख-दर्द की चिंता करना हमारा कर्तव्य है। किसानों का समग्र कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह सरकार के लिए एक मिशन है। सरकार ने वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मोड में कृषक कल्याण वर्ष का बेहद प्रभावकारी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी कमिश्नर्स-कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के दौरान किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। किसान रथ चलाये जाएं। इनका शुभारंभ स्थानीय सांसद/विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से ही कराएं। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में किसानों से विभिन्न स्थानों पर को निरंतर संवाद करें। उन्हें ग्रीष्मकालीन मूंग के स्थान पर अधिकाधिक रकबे/मात्रा में मूंगफली और उड़द की फसल लेने के लिए प्रोत्साहित करें। प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करें। जलवायु, ऊर्जा एवं सतत् कृषि को बढ़ावा देने के लिए ई-विकास पोर्टल एवं किसानों को संतुलित मात्रा में भी उर्वरकों का उपयोग के लिए जागरूक किया जाए। आकांक्षी जिलों में चल रही प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित किया जाए। दलहनी और तिलहनी फसलों का उत्पादन क्षेत्र बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए हर जरूरी प्रयास किए जाएं। कृषि से जुड़े विभागों और इस क्षेत्र में प्रगतिशील स्वयं सेवी संगठनों एवं संस्थाओं के साथ मिलकर किसानों के कल्याण के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष मनाने में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के नेतृत्व में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन एवं डेयरी, मत्स्य पालन, जल संसाधन, सहकारिता, ऊर्जा, राजस्व, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, कुटीर एवं ग्रामोद्योग सहित 15 से अधिक विभाग सक्रिय भूमिका निभायेंगे। पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगाएं रोक, किसानों को जागरूक किया जाए कि वे खेत का भूसा गौशालाओं में पहुंचाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में पराली/नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्ती से अकुंश लगाएं। अपने-अपने जिले का नरवाई प्रबंधन प्लान बनाएं। खेतों से निकलने वाली पराली/भूसे का समुचित उपयोग होना चाहिए। फसलों के अवशेष से गोबर से कंपोजिट बायोगैस संयंत्रों की स्थापना की जाए। सभी कलेक्टर्स यह तय करें कि किसानों द्वारा खेत से निकली पराली और भूसा निकटतम छोटी-बड़ी गौशालाओं में ही पहुंचाया जाए। इससे गौवंश को लाभ मिलेगा। दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए करें समन्वित प्रयास – पशुपालकों के लिए तैयार हो रहा एक ऐप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने सभी कलेक्टर्स से कहा कि वे अपने जिले में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए समन्वित प्रयास करें। पशुपालकों को नस्ल सुधार, पशु पोषण एवं पशु स्वास्थ्य पर ध्यान देने से होने वाले आर्थिक लाभों के बारे में जागरूक करें। मत्स्य बीज उत्पादन के लिए जिला स्तर पर अधिकाधिक मत्स्य प्रक्षेत्र विकसित किए जाएं। हर नगरीय निकाय क्षेत्र में फिश पार्लर स्थापित किए जाएं और यह सुनिश्चित करें कि मछली विक्रेता तय फिश पार्लर/मार्केट में ही मछली बेंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के नगरीय निकायों में फिश पार्लर बनाये जायेंगे। इसके लिए पृथक से राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कलेक्टर्स किसानों से लगातार संवाद करते रहें। कृषक कल्याण वर्ष की तय गतिविधियों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें। रोस्टर तैयार कर कृषि उपज मंडियों का सतत् निरीक्षण करें और कृषि उत्पादों पर विपणन पर विशेष ध्यान देकर इनके मूल्य संवर्धन के लिए पूरी कमर्शियल चेन का निर्माण करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि के लिए विभाग को नवाचार अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को दुग्धोत्पादन बढ़ाने के सभी नए-नए तरीके और उपाय बताएं जाएं। प्रमुख सचिव पशुपालन ने बताया कि पशुपालकों के ज्ञान संवर्धन के लिए एक ऐप तैयार किया जा रहा है। यह ऐप पशुपालकों को बताएगा कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किस प्रकार की गाय/भैंस को कैसा आहार खिलाना चाहिए। इससे पशुपालक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। कृषक कल्याण वर्ष की कार्य योजना पर करें अमल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देशित करते हुए कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के लिये तय की गई कार्य योजना का फील्ड में बेहतर तरीके से अमल किया जाए। इस अवधि में विशेष अभियान चलाया जाए। छोटे-बड़े कार्यक्रम भी किए जाएं। निचले स्तर पर किसानों से सघन सम्पर्क स्थापित किया जाए। सभी हितग्राहियों का सत्यापन एवं सहयोग भी लिया जाए। नए हितग्राहियों का चयन भी इस दौरान किया जाए। प्रचलित सभी योजनाओं, नीति-नियम एवं निर्देशों का सरलीकरण एवं सुधार की कार्यवाही की जाए। विभाग या संस्था की जरूरत के अनुसार नई योजना या कार्यक्रम भी इस दौरान प्रारंभ किए जाएं। विभिन्न प्रकार की नवाचारी गतिविधियां भी की जाएं। कृषि सेक्टर के विकास के लिए नए वित्तीय स्त्रोतों जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी), पुनर्घत्वीकरण एवं कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर फंड) का उपयोग भी किया जाए। केन्द्र सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से अनुदान या मंजूरी पाने के लिए भी कृषक कल्याण वर्ष में विशेष प्रयास किए जाएं। फरवरी में डिण्डोरी में होगा कोदो-कुटकी बोनस वितरण कार्यक्रम, मार्च में होगा राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन मुख्यमंत्री ने कृषक कल्याण वर्ष में होने वाली मासिक गतिविधियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि फरवरी के पहले सप्ताह में डिंडोरी जिले में कोदो-कुटकी का बोनस वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के 16 से अधिक जिलों में कोदो-कुटकी उत्पादन होता है। वर्ष 2025 में 2800 टन कोदो-कुटकी की शासकीय खरीदी की गई है। दूसरे सप्ताह में गुलाब महोत्सव आयोजित होगा। तीसरे सप्ताह में शत-प्रतिशत … Read more

रीवा अपडेट: सीएम मोहन यादव आज करेंगे भैरवनाथ मंदिर का उद्घाटन

 रीवा  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 जनवरी को एक दिवसीय प्रवास पर रीवा आएंगे। इस दौरान वे गूढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में भैरवनाथ मंदिर का लोकार्पण करेंगे। दोपहर 1 बजे मुख्यमंत्री गुड़ के समीप ग्राम खामडीह स्थित भैरवनाथ मंदिर(Bhairavnath Temple) परिसर में आयोजित समारोह में शामिल होंगे। सहमडीह में भैरव बाबा की विशाल एवं प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जो दुर्लभ सयन मुद्रा में है। स्थापत्य कला की दृष्टि से यह प्रतिमा लगभग 10वीं शताब्दी के कल्पुरि काल की मानी जाती है। वर्षों तक यह प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थित थी। शासन की एलएडी योजना के अंतर्गत प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार एवं अन्य निर्माण कार्य कराए गए हैं। भैरव बाबा की विशाल प्रतिमा के चारों ओर दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसकी कुल लागत 1.80 करोड़ रुपए हैं। 17 करोड़ 13 लाख रुपए की लागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव(CM Mohan Yadav) मंदिर पहुंचकर भगवान भैरवनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे तथा ध्वज चढ़ाएंगे। इसके बाद वे जनसभा को संबोधित करेंगे। समारोह में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक नागेंद्र सिंह, दिव्यराज सिंह, सिद्धार्थ तिवारी, नरेंद्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, भाजपा जिला अध्यशा वीरेंद्र गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर रुपए मुख्यमंत्री 17 करोड़ 13 लाख रुपए की लागत से पूर्ण हुए चार निर्माण कार्यों का लोकार्पण करेंगे तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी करेंगे। देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में एक है भैरवनाथ ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध रहा है। विध्य क्षेत्र प्राधीन मंदिरों और किंग और बुंदेलखंड के विभिन्न अवलों में चैव कालीन, राजपूत कालीन तथा कल्चुरि चालीन स्थापत्य के उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्राचीन मूर्तिकला का एक अद्‌भुत और दुर्लभ उदाहरण गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के समीप ग्राम आमडीह में स्थित भैरवनाथ बाबा की विशाल प्रतिमा है। यह प्रतिमा भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। अद्‌भुत शयन मुद्रा में निर्मित निर्मित यह यह प्रतिमा अपनी भव्यता और सौंदर्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। प्रतिमा की लंबाई 8.5 मीटर तथा चौड़ाई 3.7 मीटर है। वर्षों तक यह प्रतिमा विश्य की प्रमुख कैमौर पता माला की गोद में खुले आसमान के नीधे स्थित रही। एलएडी योजना के अंतर्गत हुआ निर्माण शासन की एलएडी योजना के अंतर्गत अब इसके चारों ओर दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर परिसर में सामुदायिक भवन, आठ दुकानें एवं अन्य सहायक निर्माण कार्य भी कराए गए हैं। माना जाता है कि भैरवनाथ की यह विशाल प्रतिमा 10वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य कल्पुरि काल में निर्मित कराई गई थी। शयन मुद्रा में यह प्रतिमा एक ही विशाल पत्थर से बनाई गई है। मूर्ति शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण काले रंग के बलुआ पत्थर से निर्मित यह मूर्ति शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। भैरवनाथ के चेहरे पर रौद्र भाव के साथ असीम शांति का भाव स्पष्ट रूप से झलकता है। चतुर्भुज रूप में अंकित इस प्रतिमा के दाहिने ऊपरी हाथ में सृष्टि के पालन और संहार का प्रतीक त्रिशूल है, जबकि नियाले दाहिने हाथ में ध्यान और भक्ति का प्रतीक रुचाउदक्ष माला सुशोभित है। ऊपरी बाएं हाथ में तीन शीषों वाला सर्प लिपटा हुआ है, जो जितावित कर प्रतीक माना जाता है। बाएं निचले हाथ में बीज और फल दर्साए गए हैं. जो जो उर्वरता और सूजन शक्ति के प्रतीक हैं।

CM का बड़ा फैसला: संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर मिली खुशखबरी

भोपाल  मध्यप्रदेश के लाखों संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राजधानी भोपाल में आयोजित संविदा कर्मचारियों के विशाल महासम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नियमितीकरण को लेकर बड़ा और अहम ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार एक विशेष समिति का गठन करेगी, जो उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। सरकार को संविदा कर्मियों की जरूरत, जैसे श्रीराम को हनुमान की 30 जनवरी को न्यू दशहरा मैदान में आयोजित इस महासम्मेलन में मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अपने संबोधन में उन्होंने संविदा कर्मचारियों की भूमिका को सरकार की रीढ़ बताते हुए कहा सरकार की हर योजना को जमीन पर उतारने में संविदा कर्मचारियों का सबसे बड़ा योगदान है। सरकार को संविदा कर्मियों की उतनी ही आवश्यकता है, जितनी श्रीराम को हनुमान की थी। मुख्यमंत्री के इस बयान पर सम्मेलन स्थल पर मौजूद हजारों कर्मचारियों ने तालियों के साथ स्वागत किया। संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर हुआ महासम्मेलन इस महासम्मेलन का आयोजन संविदा संयुक्त संघर्ष मंच के संयुक्त आवाहन पर किया गया। कार्यक्रम के आयोजकों में प्रदेश संयोजक दिनेश तोमर, डी. के. उपाध्याय, महामंत्री सजल भार्गव,अभय वाजपेई, सुरेन्द्र रघुवंशी, संस्थापक प्रांताध्यक्ष के. के. शर्मा एवं अरविंद यादव शामिल रहे। मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि यह सम्मेलन संविदा कर्मचारियों के वर्षों पुराने संघर्ष को नई दिशा देने का काम करेगा। सभी विभागों से उमड़ा संविदा कर्मियों का सैलाब संविदा संयुक्त मंच के जिला अध्यक्ष कृष्ण कुमार उपाध्याय ने बताया कि महासम्मेलन में प्रदेशभर से हजारों संविदा अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इनमें सर्व शिक्षा अभियान, स्वास्थ्य विभाग, आजीविका मिशन, मनरेगा, महिला एवं बाल विकास, वाटरशेड, कृषि विभाग सहित शासन की लगभग सभी योजनाओं और विभागों के संविदा कर्मी मौजूद रहे। ऐतिहासिक फैसलों की उम्मीद मंच का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों की एकजुटता सरकार को नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और स्थायित्व जैसे मुद्दों पर ऐतिहासिक और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए मजबूर करेगी।

डॉ. यादव ने किया नोहलेश्वर महोत्सव के 5 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे 5 दिवसीय नोहलेश्वर महोत्सव का शुभारंभ नोहलेश्वर महोत्सव होगा भव्य और ऐतिहासिक : राज्य मंत्री  लोधी 11 से 15 फरवरी 2026 तक कला, संस्कृति और साहित्य की ख्यातनाम हस्तियां होंगी शामिल भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सांस्कृतिक रूप से चरमोत्कर्ष पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए बुंदेलखंड के दमोह जिले में नोहटा स्थित नोहलेश्वर मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला नोहलेश्वर महोत्सव इस वर्ष अधिक भव्यता के साथ मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 से 15 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस 5 दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस महोत्सव में कला, संस्कृति, साहित्य एवं भक्ति संगीत जगत की ख्यातनाम हस्तियां अपनी प्रस्तुतियां देंगी।   राज्य मंत्री  लोधी ने बताया कि बुंदेलखंड की धार्मिक आस्था के इस केंद्र पर होने जा रहे नोहलेश्वर महोत्सव में प्रसिद्ध गायक  कैलाश खेर जहां भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे, वहीं भगवान भोलेनाथ के शिव तांडव नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, जय राम नृत्य नाटिका आदि मनभावन प्रस्तुतियां होगी। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में जहां हरिओम पवार, जानी बैरागी जैसे राष्ट्रीय कवि रचनापाठ करेंगे। समापन समारोह में प्रसिद्ध भजन गायिका सु आशा वैष्णव प्रस्तुति देंगी। राज्य मंत्री  लोधी ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा इस समूचे आयोजन को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रहीं हैं। इसमें यहाँ आने वाले प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, स्थानीय प्रशासन भी इस आयोजन को और भव्यता देने के लिए पूरी तरह जुटा हुआ है।  राज्य मंत्री  लोधी ने कहा कि नोहलेश्वर महोत्सव की शुरुआत 2 वर्ष पूर्व की गई थी। इस वर्ष यह महोत्सव अपनी भव्यता और विशेषता के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड अपने गौरवशाली इतिहास और समृद्धशाली परंपराओं के लिए समूचे भारत में अपनी अलग पहचान रखता है। बुंदेलखंड की शौर्य गाथाएं एवं सांस्कृतिक कला कौशल का वर्णन देश के साहित्यकारों, कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बखूबी किया है, यहाँ की पुरातन संस्कृति आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने का कार्य करती है।  राज्य मंत्री  लोधी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि नोहलेश्वर महोत्सव के माध्यम से प्रदेश और देश में बुंदेलखंड की विशेष पहचान बने। राज्य मंत्री  लोधी ने प्रदेश की जनता से इस आयोजन में शामिल होकर बुंदेलखंड की कला संस्कृति से रूबरू होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आपकी आस्था के साथ ही समूचे परिवार के साथ मनोरंजन का केंद्र भी होगा। महोत्सव में हॉट एयर बलून जैसी रोमांचक गतिविधियां भी उपलब्ध होंगी।  

बच्चों की समस्याओं का हल करने वाला छात्र, CM ने साझा किए यादगार किस्से, स्कूल में पसंद थी बायोलॉजी

भोपाल  हमेशा अनुशासन में रहने वाला कक्षा 9 का छात्र हमारे पास अक्सर अन्य बच्चों की समस्याएं लेकर आता था। उसके दोस्तों को भी यदि शिक्षकों तक कोई बात पहुंचानी होती थी, तो वे उसी को आगे करते थे। आज वही छात्र मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री है। उन्होंने कहा कि ‘मैंने स्कूल के दिनों से ही डॉ. मोहन यादव में नेतृत्व क्षमता देखी थी। न तो वे बदमाशी करते थे और न ही शिक्षकों से बचते थे। पढ़ाई के साथ खेलों में भी सक्रिय रहते थे और शिक्षकों के प्रति सम्मान का भाव रखते थे। इन्हीं गुणों ने उन्हें आगे चलकर राज्य की सबसे बड़ी कुर्सी तक पहुंचाया।’ बुधवार को राजधानी भोपाल में प्रदेश स्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता शिक्षक सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी शिक्षिका कोकिला सेन का सम्मान किया। सम्मान समारोह के बाद उनकी शिक्षिका कोकिला सेन ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। स्कूल में ही दिखने लगी थी नेतृत्व क्षमता उज्जैन की शासकीय जीवाजीगंज स्कूल में 1979 से 1981 तक शिक्षिका कोकिला सेन ने फिजिक्स पढ़ाया। वह बताती हैं कि कक्षा 9 से 12 तक मोहन यादव पढ़ाई में गंभीर और व्यवहार में जिम्मेदार छात्र रहे। यदि किसी दोस्त को टीचर तक कोई बात पहुंचानी होती, तो बाकी बच्चे उसी को आगे करते थे। शांत, विनम्र और अनुशासित बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ी कोकिला सेन बताती हैं कि मोहन यादव कभी शोरगुल या शरारत नहीं करते थे। क्लास में समय पर बैठना, ध्यानपूर्वक सुनना और टीचर्स का सम्मान करना उनकी आदतों में शामिल था। वे हंसते हुए कहती हैं कि ऐसे बच्चों को शिक्षक बदलते नहीं, बल्कि प्रोत्साहित करते हैं। स्पोर्ट्स और अन्य गतिविधियों में भी आगे शिक्षिका के अनुसार, डॉ. मोहन यादव केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि खेल और अन्य गतिविधियों में भी हिस्सेदारी करते थे। वे मैदान में भी सक्रिय थे और लैब में भी। यह संतुलन बहुत कम बच्चों में देखने मिलता है। बायोलॉजी थी पसंदीदा विषय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फिजिक्स से ज्यादा रुचि बायोलॉजी में दिखाई। कोकिला सेन बताती हैं कि बायोलॉजी लैब फिजिक्स लैब के बगल में थी, जहां वे अक्सर जाकर मॉडल और प्रैक्टिकल देखते। “फिजिक्स और मैथ्स को बच्चे अकसर ‘डरावना’ विषय मानते हैं, लेकिन मोहन हर विषय को सीखने का प्रयास करते थे।” शिक्षिका ने कहा था- बहुत कुर्सियां इंतजार कर रही हैं कोकिला सेन ने एक रोचक किस्सा बताते हुए कहा कि जब वे शिक्षा मंत्री बने थे, एक कार्यक्रम में मेरी उनसे मुलाकात हुई। उन्होंने कहा मैं शिक्षा मंत्री हूंं। मैंने जवाब दिया कि अभी तो यह शुरुआत है, आगे बहुत कुर्सियां बेटा आपका इंतजार कर रही हैं। आज वह बात सच हो चुकी है। हम लोग बच्चों में जो गुण देखते हैं, वह जीवन भर उनके साथ रहता है। स्कूल के दिनों से लेकर आज तक, शिक्षकों के प्रति सम्मान उनकी आदत का हिस्सा रहा है। कोकिला सेन कहती हैं कि जब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी मुझसे मुलाकात हुई, तो उनका व्यवहार वही था जो स्कूल में था।