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मोहन सरकार में मंत्रिमंडल में बदलाव, इन नामों को मिल सकता है मौका!

इंदौर   मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर दो दिन पहले हुई एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर कवायद शुरू हो गई है जिसे मंत्रिमंडल के विस्तार से भी जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार में मंत्रियों का कोरम पूरा हो जाएगा। इसमें बड़ा फेरबदल होने की भी संभावनाएं जताई जा रही है जिसमें नई मंत्री बनाए जाने के साथ कुछ की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार को ढाई साल होने जा रहे हैं। इस बीच मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। वर्तमान में 31 मंत्री हैं, जबकि 35 बनाए जा सकते हैं। चार पदों को भरा जाएगा जिसके साथ कुछ मंत्रियो को मुक्त करके नए बनाए जाने की भी बात सामने आ रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी इस बात को मजबूत यूं भी माना जा रहा है कि दो दिन पहले डॉ. मोहन यादव के निवास पर एक समन्वय समिति की बैठक हुई थी जिसमें संघ के कई बड़े दिग्गज नेता मौजूद थे और माना जाता है कि कोई भी बड़े फैसले से पहले समिति में बात रखी जाती है। इस बात से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिछले दिनों दिल्ली के लगातार दौरे को भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी मानी जा रही है।  रिपोर्ट के मुताबिक ये भी कहानी सामने आ रही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में इंदौर का नाम भी है जिसमें मालिनी गौड़ प्रमुखता से है तो दूसरे पायदान पर मनोज पटेल है। हालांकि विधायक उषा ठाकुर भी खासा प्रयास कर रही हैं जिसके लिए उन्होंने भोपाल-दिल्ली एक कर रखा है। उनके अलावा संभाग से अर्चना चिटनीस का नाम भी है। वहीं भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, बृजेंद्र सिंह यादव और रीति पाठक के नाम भी मंत्री बनने वाले विधायकों की फेहरिस्त में हैं। ये नाम तो मंत्री बनने के दावेदारों के है, लेकिन कुछ नाम ऐसे दिग्गजों के भी हैं जिनके इस्तीफे भी हो सकते हैं। संतुलन बनाने का होगा प्रयास मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का भी प्रयास किया जाएगा। हालांकि निगम मंडल और प्राधिकरणों में जो नियुक्ति हो रही है जिसमें मोहन सरकार व भाजपा का संगठन इस बात का बारीकी से ध्यान रख रहा है। भविष्य में होने वाले चुनाव को लेकर भी अभी से बिसात जमाई जा रही है ताकि सभी वर्गों की नाराजगी को दूर किया जा सके।

डॉ. मोहन यादव का किसानों के बीच अचानक दौरा, चाय पर चर्चा में CM ने पूछा भुगतान और तौल व्यवस्था

महेश्वर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दिन पहले ही कहा था कि वे कभी भी और कहीं भी उपार्जन केंद्रों का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। कुछ ही घंटों बाद मोहन यादव खरगोन में थे। उन्होंने गुरुवार को सुबह अचानक कतरगांव में बनाए गए उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से भी चर्चा की और उनके साथ चाय भी पी। किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (MP CM Mohan Yadav) ने कल यानी 29 अप्रैल को जो कहा था, वैसा ही 30 अप्रैल को किया। उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक दौरा कर सकते हैं। और, हुआ भी यही। डॉ. यादव एक दिन पहले ही 29 अप्रैल को महेश्वर पहुंच गए थे जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था। गुरुवार को सुबह मोहन यादव कतरगांव के उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद किसानों के साथ सीएम का सीधा संवाद भी हुआ। सीएम ने किसानों के साथ चाय भी पी। गेहूं उपार्जन की व्यवस्था के बीच अपने साथ सीएम को पाकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान थी। मोहन यादव ने उपार्जन केंद्र की व्यवस्था करने वाले कर्मचारियों को दिशा-निर्देश भी दिए। महेश्वर विधानसभा के दौरे पर आए सीएम ने रात्रि विश्राम के बाद सुबह हेलीपैड के लिए प्रस्थान किया था। हालांकि, उन्होंने अचानक अपना काफिला बड़वाह मार्ग की ओर मोड़ दिया। सीधे कतरगांव खरीदी केंद्र पहुंच गए। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर वहां मौजूद किसान और कर्मचारी हैरान रह गए। बता दें कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को महेश्वर प्रवास के दौरान संकेत दिए थे कि व्यवस्थाओं को परखने के लिए किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का निरीक्षण कर सकते हैं। उपार्जन केंद्र पर क्या है खास 0-किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था। 0-अब किसान किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। 0-उपार्जन केन्द्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। 0-सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। 0-सरकार ने चमकविहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। 0-सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। 0-क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। 0-बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं मिलेंगी। सीएम ने किसानों से की सीधी बात सीएम ने किसी औपचारिक प्रोटोकॉल का पालन किए बिना किसानों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें भुगतान समय पर मिल रहा है? तौल में गड़बड़ी तो नहीं हो रही। सीएम ने मौजूद कलेक्टर भव्या मित्तल और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को धूप में खड़े न रहना पड़े। उन्होंने ठंडे पानी और बैठने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। निरीक्षण के दौरान महेश्वर विधायक राजकुमार मेव भी उनके साथ थे, जिनसे सीएम ने क्षेत्र की कृषि समस्याओं पर फीडबैक लिया। सीएम ने तौल और भुगतान में पारदर्शिता के निर्देश सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गेहूं की स्लॉट बुकिंग से लेकर तौल और भुगतान तक की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी है। आवश्यकता पड़ने पर इसे और बढ़ाया जाएगा। सीएम ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार 2625 रुपए प्रति क्विंटल (बोनस सहित) की दर से उनके गेहूं का पाई-पाई भुगतान करेगी। निरीक्षण के बाद सीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में वे प्रदेश के किसी भी जिले में अचानक उतरकर केंद्रों की स्थिति का जायजा ले सकते हैं, इसलिए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहना चाहिए। युद्ध के बावजूद बड़ा लक्ष्य सरकार ने इस साल युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। एमपी में अब तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था।

कैबिनेट ने 53 हजार करोड़ की योजनाओं को जारी रखने का लिया फैसला, PWD की 26,311 करोड़ की परियोजनाएं रहेंगी सक्रिय

भोपाल  मोहन कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां और संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2010 को वापस लेने का अनुमोदन किया गया। इसके साथ ही बैठक में खरीफ 2020 में खरीदी गई धान की मिलिंग से शेष बची 7.73 लाख मीट्रिक टन धान के ई-ऑक्शन के निराकरण पर चर्चा कर स्वीकृति दी गई। साथ ही भारतीय वन सेवा के अंतर्गत प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक पद के सृजन को मंजूरी मिली है। कैबिनेट ने कुल 53 हजार करोड़ रुपए की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में कुल 21 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग की 26,311 करोड़ रुपए की पांच परियोजनाओं को जारी रखने पर सहमति बनी है। साथ ही शाजापुर जिले की लखुंदर सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी गई है, जिससे उज्जैन और शाजापुर जिले में 9 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई हो सकेगी। कैबिनेट के अन्य फैसलों में कर्मचारियों और अधिकारियों को कोर्ट के निर्णय के बाद पेंशन व वेतनमान देने, साथ ही सोलहवें वित्त आयोग से कराए जाने वाले कार्यों की मंजूरी भी शामिल है। कैबिनेट में इन प्रस्तावों को मिली मंजूरी     लखुंदर उच्च दाब सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति।     लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में 134 पीजी सीट वृद्धि योजना के अंतर्गत 80 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की कार्योत्तर स्वीकृति।     श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा के अंतर्गत सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार की 174 करोड़ रुपए पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति। लोक निर्माण विभाग की इन योजनाओं को जारी रखने की स्वीकृति     लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मरम्मत और सुधार कार्य समेत अन्य योजनाओं के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि तक काम जारी रखने का प्रस्ताव।     केंद्रीय सड़क अधोसंरचना निधि की योजनाओं को 16वें वित्त आयोग में जारी रखने का प्रस्ताव।     पीडब्ल्यूडी के एफ टाइप से उच्च श्रेणी के शासकीय आवास और गैर आवासीय भवनों की मरम्मत का काम 16वें वित्त आयोग से जारी रखने का प्रस्ताव।     16वें वित्त आयोग के अंतर्गत ही लोक निर्माण विभाग की भू अर्जन मुआवजा संबंधी योजा, भारतीय सड़क कांग्रेस को अनुदान और डिक्रीधन का भुगतान, मुख्य जिला मार्ग, जिला मार्ग तथा अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण का काम जारी रखने का प्रस्ताव।     उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर के समक्ष दायर याचिका शकूर खान विरुद्ध एमपी शासन और अन्य में दायर अवमानना याचिका में शकूर खान को पेंशन देने का प्रस्ताव। इसी तरह संजय कुमार गुप्ता और अन्य 8 रिट याचिका के मामले में अमीन पद का वेतनमान स्वीकृत करने की अनुमति का प्रस्ताव भी हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर मंजूर किया जाएगा। ये प्रस्ताव भी हुए मंजूर     पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2005 में संचालित दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले एमपी के ओबीसी छात्र-छात्राओं के लिए छात्रगृह योजना जारी रखने का प्रस्ताव। इसमें अब 10 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे।     आंगनबाड़ी भवनों में विद्युत व्यवस्था के लिए 38901 आंगवनबाड़ी भवनों को मंजूरी। 80 करोड़ रुपए सरकार ने मंजूर किए।     खरीफ 2020 में खरीदी गई धान की मिलिंग से शेष बची धान 7.73 लाख मीट्रिक टन के ई-ऑक्शन के निराकरण पर चर्चा।     मध्य प्रदेश आतंकवादी और उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 को वापस लेने के प्रस्ताव का अनुमोदन।     भारतीय वन सेवा के अंतर्गत प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक पद के सृजन को मंजूरी।

सीएम डॉ. मोहन ने एमपी में 4 जंगली भैसें रिलीज की, वाइल्ड लाइफ और ईको-सिस्टम पर पड़ेगा बड़ा प्रभाव

और खूबसूरत हुई एमपी की वाइल्ड लाइफ, सीएम डॉ. मोहन ने रिलीज किए 4 जंगली भैसें, ईको-सिस्टम पर होगा इतना असर – बालाघाट जिले के सूपखार-टोपला क्षेत्र में हुआ कार्यक्रम – मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व में छोड़े भैंसे – ईको-सिस्टम के साथ-साथ टूरिज्म पर होगा सकारात्मक असर – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में फिर समृद्ध हो रहे जंगल भोपाल  मध्यप्रदेश के वाइल्ड लाइफ और ईको-सिस्टम के लिए 28 अप्रैल का दिन बेहद खास रहा। आज प्रदेश की धरती यानी कान्हा टाइगर रिजर्व में चार जंगली भैसों की आमद हुई। इनमें एक नर और तीन मादा हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के सूपखार-टोपला क्षेत्र में इन भैसों को रिलीज किया। इन भैसों की आमद से एक तरफ प्रदेश के जंगल समृद्ध होंगे, तो दूसरी तरफ टूरिज्म पर भी सकारात्मक असर होगा। इनके आने से स्थानीय रोजगार भी बढ़ेगा। मध्यप्रदेश सरकार इन भैसों को असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाई है।  इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। 150 साल बाद मध्यप्रदेश की धरती पर, कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बार फिर जंगली भैंसा आया है। यह हमारे पर्यावरण के लिए, पारिस्थितिक तंत्र के लिए अद्भुत अवसर है। हमारी अपनी धरती पर हमारे यहां से गए हुए मेहमान का शुभागमन है। इनके आने से पारिस्थितिक तंत्र मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे ही अवसरों से हमारा जंगल समृद्ध होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वो सारे वन्य प्राणी जो एक-एक करके विलुप्त हो गए थे और यहां से चले गए थे, वो अब मध्यप्रदेश के जंगल में आ रहे हैं।  बढ़ेगा टूरिज्म और रोजगार सीएम डॉ. यादव ने कहा कि इन जानवरों से हमारे जंगलों की शोभा बढ़ेगी। यह आकर्षण का केंद्र भी बनेगा। टूरिज्म पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे हमारा असम के साथ एक नया रिश्ता भी बना है। मैं असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा को भी धन्यवाद देता हूं। पिछली मुलाकात में हमने जंगली भैंसा और गैंडा लाने की बात की थी। आज उस मुलाकात का पहला चरण शुरू हुआ है। 4 जंगली भैंसे हमारे पास आए हैं। इनमें तीन फीमेल और एक मेल है। ये किशोरावस्था से आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए स्वस्थ रहेंगे। ये मां कामाख्या का आशीर्वाद भी हैं।   भावी पीढ़ी को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज हमारा प्रदेश चीता और लेपर्ड स्टेट है। प्रदेश में मगरमच्छ घड़ियाल और भेड़िया भी पर्याप्त संख्या में पाए जाते हैं। प्रदेश अब वल्चर स्टेट यानी गिद्ध स्टेट भी बना है। वन्य प्राणियों के मामले में मध्यप्रदेश का गौरवशाली इतिहास रहा है। प्रदेश अब इन वन्य प्राणियों से दोबारा समृद्ध हो रहा है। कई सौ साल पहले विलुप्त हुए पर अपनी प्राणियों के पुनर्स्थापना से मध्य प्रदेश के समृद्ध वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण का सपना साकार हो रहा है। हमारा यह प्रयास भावी पीढ़ियों को लाभ देगा। लिखा जा रहा नया इतिहास मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकारें अधोसंरचना और जन कल्याण के काम तो करती ही हैं, लेकिन परिस्थिति तंत्र के लिए कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वर्ष 2022 में समूचे एशिया महाद्वीप से गायब हो चुके चीतों को फिर से बसाया गया। हमारे गांधी सागर और श्योपुर के कुनो में चीते आनंद से रह रहे हैं। हमारा नोरादेही अभ्यारण्य भी चीतों के लिए तैयार हो रहा है। अभी कल के दिन भी हमने नारी सशक्तिकरण का एक बड़ा निर्णय करते हुए विधानसभा का विशेषण बुलाया और आज ही हमने जंगल की खूबसूरती बढ़ाने के लिए जंगल के नए मेहमान का स्वागत किया है। कान्हा की धरती हमारे जंगल का नया इतिहास लिखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संदेश: समृद्ध किसान ही बनाएगा विकसित भारत की नींव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश की जनता के नाम संदेश प्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत के निर्माण में निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव “किसान कल्याण वर्ष” में मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में ले जाएंगे नई ऊंचाइयों तक सच्चा वादा और पक्का काम, यही हमारी सरकार का है संकल्प किसानों से जो वादा किया, वह पूरा करके भी दिखाया किसानों की समृद्धि ही मध्यप्रदेश की है असली ताकत अब गेहूं उपार्जन सप्ताह में 6 दिन, स्लॉट बुकिंग को 9 मई तक बढ़ाया हर परिस्थिति में आखिरी दम तक रहेंगे अपने अन्नदाताओं के साथ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सच्चा वादा और पक्का काम, यही हमारी सरकार का संकल्प है। हमने किसानों से जो वादा किया, वह पूरा करके भी दिखाया है। जब हमारे खेतों से लेकर कारखाने तक समृद्धि आएगी, तभी तो हमारे किसान भी समृद्ध और खुशहाल होंगे। मैं प्रदेश के सभी किसान भाइयों-बहनों को आश्वस्त करता हूं कि उनकी मेहनत, पसीना और आपका भविष्य हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसानों की समृद्धि ही मध्यप्रदेश की असली ताकत है। आइए, हम सब मिलकर “किसान कल्याण वर्ष” में मध्यप्रदेश को कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को प्रदेश की जनता के नाम दिये संदेश में कहा कि मैं अपने आपको सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे मध्यप्रदेश की सेवा का अवसर मिला है और उसी सेवा भाव से मैं अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा हूं। जब से मैंने मुख्यमंत्री के रूप में इस महत्वपूर्ण पद की शपथ ली है, तब से पूरा मध्यप्रदेश ही मेरा परिवार है, प्रदेशवासियों का सुख ही मेरा सुख है और उनका दुख ही मेरा दुख है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश तेजी से विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रदेश की तीव्र गति के विकास का मुख्य आधार हमारे प्रिय किसान भाई-बहन हैं। मैं प्रदेश के समस्त अन्नदाताओं को नमन करता हूं। हमारी सरकार किसानों की खुशहाली और उनकी समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। हम न केवल किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए संकल्पित हैं, बल्कि उनके जीवन में सुख और आनंद के सूर्योदय का भी प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाये बिना प्रदेश के सर्वांगीण विकास की कल्पना अधूरी है। हमारी सरकार किसानों के हर सुख-दुख में साथ है। इसी का परिणाम है कि मध्यप्रदेश सरकार निरंतर किसान हितैषी ऐतिहासिक निर्णय ले रही है। आज मैं ऐसे विषय पर संवाद कर रहा हूं, जो हमारे प्रदेश की आत्मा, हमारे अन्नदाता यानी किसानों से जुड़ा हुआ है। मध्यप्रदेश सरकार किसान हितैषी संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है और इसी भावना के साथ इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया गया है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मैं प्रदेशवासियों से यह साझा करना चाहता हूं कि प्रदेश में रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन को देखते हुए हमने केंद्र सरकार से खरीदी की सीमा बढ़ाने का आग्रह किया था। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि किसानों के हित को सर्वोपरि रखते हुए गेहूं उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह 22 लाख मीट्रिक टन की अभूतपूर्व वृद्धि न केवल हमारे किसानों की मेहनत का सम्मान है, बल्कि उनकी आय को सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त करता हूं। अब गेहूं उपार्जन सप्ताह में 6 दिन, स्लॉट बुकिंग को 9 मई तक बढ़ाया मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुझे यह बताते हुए भी अत्यंत प्रसन्नता है कि आज से पूरे प्रदेश के छोटे–बड़े सभी किसान भाइयों से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग पूरी तरह से खोली जा चुकी है। गेहूं उपार्जन अब सप्ताह में 6 दिन होगा और शनिवार को अवकाश नहीं रहेगा। उपार्जन केन्द्रों में समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन निर्बाध रूप से जारी रहेगा। साथ ही 30 अप्रैल तक होने वाली स्लॉट बुकिंग को अब 9 मई तक बढ़ा दिया गया है। किसानों को अब उनकी भूमि के बदले 4 गुना मुआवजा  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान भाइयों को कोई समस्या न हो, यह हमारी सरकार का संकल्प है। राज्य सरकार सदैव किसानों के साथ है। हमारी सरकार ने भू-अर्जन को भी लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब किसानों को उनकी भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा। यह निर्णय किसानों के अधिकारों की रक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह सिर्फ निर्णयों की सूची नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो हमारी सरकार और किसानों के बीच मजबूत हो रही है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, फसल विविधीकरण को बढ़ावा, आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रसार इन सभी क्षेत्रों में हम निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने दलहन, उड़द और तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उड़द को तय समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा और किसानों को तय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त खरीदी गई उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सोयाबीन की सफलता के बाद सरसों पर भी भावांतर योजना लागू करने की घोषणा के फलस्वरूप बाजार भाव में वृद्धि हुई और किसानों को सरसों का दाम एमएसपी से भी अधिक मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबको विदित है कि हमारी सरकार इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है, जिसमें किसानों को मात्र पांच रुपये में कृषि पंप का कनेक्‍शन दिया जा रहा है। साथ ही, हमारी योजना है कि अब हमारे किसानों को रात के बदले दिन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिलेगी। कृषक मित्र योजना में 90 प्रतिशत सब्सिडी पर किसान को सोलर सिंचाई … Read more

प्रदेश में सहकार से हो रहा है डेयरी गतिविधियों का विस्तार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बयान

प्रदेश में सहकार से हो रहा है डेयरी गतिविधियों का विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव डेयरी गतिविधियों में 26 हजार गांवों को जोड़ने और प्रतिदिन 52 लाख कि.ग्रा. दुग्ध संकलन का लक्ष्य दुग्ध क्षेत्र में पारदर्शिता और ब्रांड सुदृढ़ीकरण पर होगा विशेष फोकस दुग्ध समितियों में महिला सदस्यता को किया जाए प्रोत्साहित मोबाइल ऐप से होगा दुग्ध संकलन जिला स्तर पर कार्यक्रमों में होगा आदर्श पशुपालकों का सम्मान मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई म.प्र. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां किसानों की आय बढ़ाने में प्रभावी रूप से सहायक है। किसानों की आय दोगुना करने के लिए किसान कल्याण वर्ष में राज्य सरकार डेयरी गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा प्रदेश के दुग्ध संघों को दिए जा रहे सहयोग से दुग्ध संकलन में वृद्धि हुई है और किसानों को भी दूध के बेहतर दाम मिल रहे हैं। सहकार के भाव से डेयरी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है। दुग्ध समितियों में महिला सदस्यता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। डेयरी सहकारी कवरेज के विस्तार और सुदृढ़ीकरण, नई डेयरी प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और पशु चारा संयंत्र के आधुनिकीकरण, डेयरी वैल्यू चैन के डिजीट्लाइजेशन, पारदर्शिता और दुग्ध उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने के लिए समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। डेयरी विकास योजना के अंतर्गत 26 हजार गांवो को जोड़ने, प्रतिदिन दुग्ध संकलन 52 लाख किलोग्राम तक करने का लक्ष्य रख, गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की राज्य स्तरीय संचालन समिति की द्वितीय बैठक में दिए। मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में हुई बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल, वरिष्ठ विधायक तथा वरिष्ठ विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अध्यक्ष नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड मीनेष शाह उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के दुग्ध क्षेत्र में अनुभव का लाभ राजधानी से लेकर ग्राम स्तर तक सुनिश्चित किया जाए। दूध और दुग्ध उत्पादों के बिक्री में सुधार के लिए ब्राण्ड सुदृढ़ीकरण और नई पैकेजिंग डिजाइन कर उत्पादों की पहुंच का अधिक से अधिक विस्तार किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुग्ध उत्पादन में वद्धि और विभिन्न दुग्ध उत्पादों के निर्माण के लिए किसानों को नवाचार करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों तथा प्रदेश के युवाओं को डेयरी टेक्नोलॉजी की नई तकनीकों से परिचित कराने की भी आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदर्श पशुपालकों को सम्मानित करने, दूधारू पशुओं की प्रदर्शनी आयोजित करने और डेयरी के संबंध में सूचना सम्प्रेषण के लिए जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और दुग्ध संघों का कार्यअनुबंध करने के बाद वर्ष 2025-26 में 1752 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया तथा 701 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील किया गया। प्रदेश में प्रतिदिन 9 लाख 67 हजार कि.ग्रा. दुग्ध संकलन किया जा रहा है, साथ ही 153 नवीन बल्क मिल्क कूलर की स्थापना की गई है। दूध और दूध उत्पादों का क्रेडिट पर विक्रय बन्द कर दिया गया है। प्रदेश में दुग्ध संकलन मोबाइल ऐप से प्रारंभ किया जा रहा है, जिसके माध्यम से दुग्ध प्रदायकों को दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सकेगी। क्षेत्र संचालन तथा विपणन कार्य में लगे मैदानी अमले की मॉनीटरिंग के लिए फील्ड फोर्स मॉनीटरिंग ऐप आरंभ किया गया है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में दूध की गुणवत्ता में सुधार, उत्पादन में हानि को कम करने और एक समान उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की गई है। इंदौर में स्थापित 30 मीट्रिक टन क्षमता का दुग्ध चूर्ण संयंत्र आरंभ किया जा चुका है। शिवपुरी में 20 हजार लीटर क्षमता के डेयरी संयंत्र और ग्वालियर डेयरी संयंत्र के सुदृढ़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। पशु आहार संयंत्रों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है। पीपीपी मोड पर भी प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास उमाकांत उमराव, प्रमुख सचिव सहकारिता डी. पी. आहूजा, सहित राज्य सरकार और एनडीडीबी के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रात 9 बजे करेंगे प्रदेशवासियों को संबोधित, महत्वपूर्ण घोषणा की अटकलें तेज

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज यानी 24 अप्रैल की रात 9 बजे सोशल मीडिया पर लाइव रहेंगे। इस दौरान सीएम बेहद अहम विषय को लेकर प्रदेशवासियों से अपनी बात साझा करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रदेशभर में उत्साह और जिज्ञासा का माहौल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं सभी नागरिकों से इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से जुड़ने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए जिससे शासन और जनता के बीच परस्पर विश्वास को मजबूती मिले।   अहम विषय पर करेंगे चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के विकास, जनकल्याण और आने वाले समय की दिशा तय करने में एक अहम पायदान है। उन्होंने प्रदेशवासियों के विश्वास और स्नेह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता की भागीदारी से ही राज्य निरंतर प्रगति की राह पर आगे बढ़ रहा है। सोशल मीडिया अकाउंट पर किया पोस्ट मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट (एक्स) पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि, “प्रिय प्रदेशवासियों, आज रात 9 बजे मैं सोशल मीडिया पर लाइव आकर एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर अपनी बात आप सभी से साझा करूंगा।” मुख्यमंत्री का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के विकास, जनकल्याण और आने वाले समय की दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम उनकी पारदर्शी और संवादात्मक कार्यशैली को दर्शाता है। वे आमजन से जुड़कर उनकी समस्याओं और सुझावों को महत्व देते रहे हैं, जिससे सरकार और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत हुआ है। यह संवाद उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण विस्तार माना जा रहा है। बड़ा ऐलान होने की अटकलें तेज राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का इस तरह से जनता के बीच लाइव आना उनकी पारदर्शी और संवादात्मक कार्यशैली को दर्शाता है। वे आमजन से जुड़कर उनकी समस्याओं और सुझावों को महत्व देते रहे हैं, जिससे सरकार और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत हुआ है। यह संवाद उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण विस्तार माना जा रहा है।  

दसवीं बोर्ड टॉपर कु. प्रतिभा सोलंकी को एक लाख रुपये का पुरस्कार, सीएम डॉ. यादव ने किया ऐलान

दसवीं बोर्ड टॉपर कु. प्रतिभा सोलंकी को प्रोत्साहनस्वरूप मिलेंगे एक लाख रुपये : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने 10वीं बोर्ड में 500 में 499 अंक लाने पर पन्ना की प्रतिभा सिंह को दी बधाई मुख्यमंत्री निवास पर किया सम्मानित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दसवीं बोर्ड की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली होनहार छात्रा पन्ना की कु. प्रतिभा सिंह सोलंकी को माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 500 में से 499 अंक प्राप्त करने पर एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी कु. प्रतिभा और उनके माता-पिता को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी कु. प्रतिभा को सुशासन की प्रतीक लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर माँ की मूर्ति भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट तथा आशीर्वाद प्राप्त करने प्रतिभा, परिजन सहित समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) आईं थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतिभा को आशीर्वाद देते हुए कहा कि 'प्रतिभा जैसी बेटियां प्रदेश की शान हैं। प्रतिभा की सफलता लाखों बेटियों और अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है। बिटिया की उपलब्धि पर पूरे प्रदेश को गर्व है।' मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कु. प्रतिभा और उनके परिजन ने पुष्प-गुच्छ भेंट कर अभिवादन किया।  

एमपी में प्रशासनिक बदलाव, नई जिम्मेदारियों से नवाजे गए अधिकारी – पूरी लिस्ट जानें

भोपाल एमपी मुख्यमंत्री सचिवालय (सीएमओ) में भी नए सिरे से अधिकारियों को विभागों का बंटवारा किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुख्य प्रधान सचिव नीरज मंडलोई को अब समन्वय से जुड़े मामलों, ट्रांसफर संबंधी फाइलों, सिंहस्थ से जुड़ी ए-प्लस नोटशीट और CMO के अधिकारियों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है।साथ ही इंदौर और उज्जैन संभाग से जुड़े मामलों की निगरानी का जिम्मा भी संभालेंगे।     मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के सचिव आलोक कुमार सिंह को सांसदों और विधायकों से जुड़े कार्यों, सरकारी और गैर-सरकारी नियुक्तियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  साथ ही कृषि विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग से जुड़े मामलों की निगरानी भी करेंगे। सचिव टी. इल्याराजा को केंद्र सरकार और दिल्ली से जुड़े मामलों के समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। वे केंद्र के साथ तालमेल और लंबित विषयों पर काम करेंगे। हाल ही में मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्त किए गए कौशलेंद्र विक्रम सिंह को अलग-अलग विभागों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही वे मुख्यमंत्री कार्यालय की विजिलेंस शाखा, सरकार के संकल्प पत्र की निगरानी, मुख्यमंत्री डैशबोर्ड, विधायक डैशबोर्ड और आईटी सेल का काम भी संभालेंगे। मुख्यमंत्री के इन अधिकारियों को भी जिम्मा एमपी के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अजात शत्रु श्रीवास्तव, राजेश हिंगणकर, अपर सचिव मनीष पांडेय, उप सचिव आदित्य कुमार शर्मा, अवर सचिव संदीप अष्ठाना, अवर सचिव आशीष कुमार, श्रीलेखा श्रोतिय, आशुतोष गोस्वामी, केवलराम धुर्वे, विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी आलोक सोनी, आशीष खरे, कविराज मेहरा को भी अलग-अलग जिम्मा सौंपा गया है। ये सीएम के खास -नीरज मंडलोई एसीएस, मुख्यमंत्री: मुख्यमंत्री से जुड़े सभी कामों का दायित्व, इंदौर व उज्जैन के प्रशासनिक कामों का भी जिम्मा। -आलोक सिंह सचिव, मुख्यमंत्री कैबिनेट बैठक, सीएम का भ्रमण कार्यक्रम, नियुक्ति, विधानसभा, सागर-भोपाल, नर्मदापुरम से समन्वय। -डॉ. इलैया राजा टी सचिव, मुख्यमंत्री: केंद्रीय मंत्री-सांसदों के पत्राचार, सीएम का दिल्ली भ्रमण, केंद्र व राज्य के लंबित मामलों में समन्वय। चंद्रशेखर वालिम्बे सचिव, मुख्यमंत्री: सीएम के भ्रमण कार्यक्रम, स्वेच्छानुदान, मुलाकातस संवाद, जबलपुर, रीवा व शहडोल से समन्वय। इन नए अफसरों को भी सौंपी जिम्मेदारियां सीएमओ में आए कौशलेंद्र विक्रम सिंह और सुधीर कोचर को भी जवाबदेही दी है। बता दें, बीते माह ही उनकी पदस्थापना सीएमओ में की गई थी। कौशलेंद्र विक्रम सिंह, सचिव: को सीएम कार्यालय में विजिलेंस शाखा का प्रभारी के साथ ही गंभीर शिकायतों के निराकरण और कार्यवाही प्रतिवेदन का जिम्मा, घोषणा पत्रों की निगरानी, सीएम डैशबोर्ड से जुड़े तमाम पोर्टल, वेबसाइट व आत्मनिर्भर मप्र की निगरानी। सुधीर कोचर, उप सचिव: सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे को सीएमओ में आवंटित कामों में सहयोग करना, मुख्यमंत्री के भ्रमण कार्यक्रमों की तैयारी कराना, सीएम हेल्पलाइन, समाधान ऑनलाइन आदि काम। मुख्यमंत्री के दफ्तर में ये अफसर करेंगे सरकारी योजनाओं की निगरानी सीएम दङतर में गुरुवार को दो दर्जन से अधिक अफसरों को जिचमेदारी बांटी गई। इनमें कुछ पुराने तो कुछ नए अफसरों को भी कार्यभार दिया है। चंद्रमौली शुक्ला, अवर सचिव: निवेश से जुड़े काम, उद्योगपतियों व निवेशकों की मुख्यमंत्री से मुलाकात, निवेश प्रकरणों का निराकरण, निवेश बैठकें, भ्रमण आदि विभागीय काम। अरविंद दुबे, अपर सचिव: प्रगति पोर्टल व राज्य की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा, प्रगति की निगरानी, बड़े प्रोजेक्टों की निगरानी, विभागों के लंबित मामलों को मुख्यमंत्री के सामने रखना। अरुण परमार, अपर सचिव: एसीएस मंडलोई के कामों में सहयोग, ई-ऑफिस से जुड़े काम, विभिन्न विभागों से स्थानांतरण, पदस्थापना से जुड़े प्रकरण, मंत्री परिषद की तैयारियां, मुख्यमंत्री की बैठक के लिए चर्चा के बिंदु प्राप्त करना, मुख्यमंत्री द्वारा ली जाने वाली बैठकों का कार्यवाही विवरण लेकर एसीएस को प्रेषित करना, कले’टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस की तैयारियों से जुड़े काम सौंपे गए। लक्ष्मण सिंह मरकाम, अपर सचिव: तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार सृजन, पर्यटन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ग्रामीण विकास, जनजातीय कल्याण विभाग से जुड़े काम सीएमओ में दिए गए हैं। संदीप केरकेट्टा, उप सचिव: सचिव आलोक सिंह को सौंपे कामों में सहयोग करना। ए-प्लस व ए मॉनिट के आवेदनों को एसीएस के सामने प्रस्तुत करने जैसे काम मुख्यमंत्री के दफतर में दिए गए हैं।  

मध्य प्रदेश के 678 गांवों में हरियाली की लहर, वॉटर प्रोजेक्ट के लिए मोहन सरकार खर्च करेगी बड़े पैमाने पर

छिंदवाड़ा  छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुर्नवास के लिए 969 करोड़ रूपये के विशेष पुर्नवास पैकेज की स्वीकृति भोपाल में हुई मंत्रीमंडल की बैठक में मिल गई है.  हुई मंत्री परिषद की बैठक में छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना में पुर्नवास के लिए स्वीकृत राशि 840 करोड़ 80 लाख रूपये को बढ़ाकर लगभग 969 करोड़ का विशेष पुर्नवास पैकेज स्वीकृत कर दिया गया है।  678 ग्राम पंचायतों की लाखों एकड़ जमीन को मिलेगा पानी छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्पलेक्स परियोजना के अंतर्गत छिंदवाड़ा जिले में संगम 1 बांध, संगम 2 बांध, रामघाट बांध एवं पांढुर्णा जिले में बेलेंसिग रिजर्वायर बनने हैं. पांढुर्णा में कुल 4 बांध बनना है, जिससे छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिलों के 1,90,500 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी. परियोजना से छिंदवाड़ा जिले एवं पांढुर्णा जिले के 678 गांव को लाभ मिलेगा जिसमें से पांढुर्णा जिले की पांढुर्णा तहसील के 129 ग्राम, पांढुर्णा जिले की सौंसर तहसील के 124 ग्राम, छिंदवाड़ा जिले की मोहखेड़ तहसील के 132 ग्राम, बिछुआ तहसील के 76 ग्राम, छिंदवाड़ा तहसील के 7 ग्राम, जुन्नारदेव तहसील के 126 ग्राम, चांद तहसील के 34 और उमरेठ तहसील के 50 ग्राम. इस परियोजना से सिंचाई के अलावा पास के क्षेत्रों के पीने के पानी की समस्या, औद्योगिक उपयोग एवं बिजली उत्पादन के लिए पानी सुरक्षित रखने का प्रावधान है।  इन गांवों के निवासियों को मिलेगा लाभ सांसद बंटी विवेक साहू ने बताया कि "इस परियोजना के तहत तहसील जुन्नारदेव के भावईकलां, भावईखुर्द, बिरजपुरा, दमुआ, हिरदागढ़ छिनढाना, करहैया, करमोहिनी बंधी, खापासुरजु, मांडई, नंदौरा, महेंदावीर, रामनगरी एवं सेमरकुही, तहसील मोहखेड़ के कोहटमाल, पीपलगांव, बोरगांव, कोहटरैय्यत, तिकाड़ी, बीजागोरा, भवारी रैय्यत, संगम, दीप, रहप, धगडियामाल, मेहलारी बाकुल एवं पर्वत घोघरी, तहसील पांढुर्णा के भूली, खड़की, धावड़ीखापा, खेड़ीधानभोयर, मोराडोंगरी, भुयारी एवं नीलकंठ, तहसील सौंसर के हरनबेडी, बरगाबोडी, पलासपानी, गाजनडोह के निवासियों को लाभ मिल सकेगा।  प्रभारी मंत्री द्वारा मनोनीत डूब क्षेत्र पुनर्वास प्रतिनिधि कमलेश ऊइके ने बताया कि "जमीन किसी भी शासकीय काम के लिए अधिग्रहण की जाती थी तो किसानों को काफी नुकसान होता था. मुख्यमंत्री के द्वारा चार गुना मुआवजा का जो निर्णय लिया गया है प्रभावित किसानों को इसका फायदा हो सकेगा. यह भाजपा सरकार की सोच है ताकि किसानों को सुविधाओं के साथ-साथ उनकी जमीन का उचित मुआवजा भी मिल सके।  सांसद ने मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री से की थी मुलाकात सांसद बंटी विवेक साहू ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से मुलाकात के दौरान उन्हें बताया था कि उनके संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा-पांढुर्णा के अंतर्गत बहुउद्देशीय परियोजना छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स परियोजना की स्वीकृति प्राप्त है. इस योजना में जल भराव क्षमता 651.33 मिलियन घन मीटर (मि.घ.मी.) है, जिससे छिंदवाड़ा, जुन्नारदेव, मोहखेड़, बिछुआ, चौरई, उमरेठ, सौंसर एवं पांढुर्णा विकासखण्डों की 1,90,500 हेक्टेयर सिंचाई प्रस्तावित है. इस काम में प्रभावित हो रहे ग्रामीणों द्वारा स्पेशल भुअर्जन एवं पुनर्वास एवं पुर्नव्यवस्थापन पैकेज की मांग की गई है।  छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव एवं मोहखेड़ तहसील के प्रभावित ग्रामों की अधिकांश जनसंख्या जनजातीय समुदाय से है जिस कारण गैर जनजातीय खरीदी ब्रिकी निषेध है. अधिकांश प्रभावित किसानों पर एक हेक्टेयर से कम का रकबा है जिसके बाजार मूल्यों में पिछले कई सालों से कम बढ़ोत्तरी हुई है. पांढुर्णा जिले के सौंसर एवं पांढुर्णा तहसील के डूब क्षेत्र में मुख्यतः कपास नगदी फसल एवं संतरा उद्यानिकी फसल की खेती होती है जिस पर किसान निर्भर है. इस क्षेत्र के डूब से प्रभावित होने के कारण किसानों द्वारा अधिक मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया।  सांसद ने मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री को बताया था कि इस योजना में बाधाएं आ रही हैं, जिसे शासन स्तर पर हल किया जा सकता है. जिसके अंतर्गत परियोजना में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्रस्तावित है जिसके लिए स्पेशल पैकेज की स्वीकृति शासन स्तर से लंबित है. परियोजना से वन भूमि प्रभावित हो रही है जिसके लिए छिंदवाड़ा एवं पांढुर्णा जिले के अलावा अन्य जिलों से भी गैर वन भूमि की आवश्यकता पड़ेगी. वन विभाग छिंदवाड़ा की भूमि के बदले दूसरे जिलों की भूमि को वनों के लिये आवंटित किया जाना प्रस्तावित है।  अधिग्रहण का ग्रामीण कर रहे हैं विरोध सरकार ने जब से बांध बनाने का प्रस्ताव लाया है उसके बाद से ही सभी गांव के ग्रामीण एकजुट होकर बांध बनाने का विरोध कर रहे हैं इसको लेकर कई बार जिला स्तर पर ग्रामीण और आदिवासियों ने बड़ा आंदोलन प्रदर्शन भी किया है. आदिवासी नेता झमक लाल सरेआम ने बताया कि "आदिवासी और ग्रामीणों की आमदनी का मुख्य जरिया उनकी जमीन है और आदिवासी किसानों के पास छोटे-छोटे जमीन के टुकड़े हैं जिससे उनके परिवार का पालन होता है. बांध बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण कर आदिवासियों के जीने का सहारा छीन लिया जाएगा क्योंकि जितनी जमीन का उन्हें मुआवजा मिलेगा उतने में वह जमीन कहीं खरीद नहीं सकेंगे और पुश्तैनी जमीन से उन्हें हटा दिया जाएगा. इसका फायदा बड़े जमींदार और दूसरे गांव को मिलेगा इसलिए वे जमीन देने को तैयार नहीं हैं।