samacharsecretary.com

मोहन यादव पर आरोपों को लेकर BJP का पलटवार, कांग्रेस पर लगाया साजिश रचने का आरोप

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस भ्रम की स्थिति निर्मित कर रही है। प्रदेश की जनता कांग्रेस के षडयंत्र को बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकप्रिय नेता हैं और प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में दिन-रात काम कर रहे हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर जो आरोप लगाया गया, वो पूरी तरह गलत है। कांग्रेस और उनके नेताओं द्वारा भ्रम की स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया जा रहा है। मैं समझता हूं कि इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं बताना चाहता हूं कि हमारे मुख्यमंत्री के द्वारा साल 2023 में जो नामांकन दाखिल किया गया उसके मुताबिक उस वक्त उनके पास 17 एकड़ की जो जमीन थी, वो साल 2026 में भी उतनी ही है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ।" उन्होंने कहा कि एक सिद्धि विनायक कंपनी, जिसका आरोप में जिक्र किया गया, उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून में घटकर मात्र 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साल 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के बेटे वैभव के पास भी 2023 से पहले जो 16 एकड़ जमीन थी, उसमें डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई परिवर्तन नहीं आया। ये सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने से पहले की थी। उनकी बहू शालिनी यादव द्वारा 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई, जो मास्टर प्लान एरिया के बाहर की थी। आरोपों में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है। वो पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई लेना देना नहीं है। उनके रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। उन्होंने कहा कि मेरी जानकारी में यह आया है कि रिश्तेदारों पर भी जो आरोप लगाए गए, उसमें भी दिए गए तथ्य गलत हैं। मुझे बताया गया है कि ये रिश्तेदार भी अपनी बात कहेंगे और कार्रवाई करेंगे। CM मोहन यादव पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने बताया षड्यंत्र मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े आरोपों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इसे पूरी तरह निराधार और राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब ओबीसी वर्ग का मुख्यमंत्री बना और आगे बढ़ा तो यह कांग्रेस को रास नहीं आया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री मोहन पर जो आरोप लगाए गए हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। कांग्रेस और उसके नेताओं के द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है‌। 2023 के बाद जमीन में कोई बढ़ोतरी नहीं उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा 2023 के विधानसभा चुनाव में जो नामांकन दाखिल किया था, उस स्थिति में उनके पास 17 एकड़ जमीन थी। आज उसमें कुछ भी परिवर्तन नहीं हुआ है। उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ की जो जमीन थी, इसमें भी 2026 में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। जिस सिद्धिविनायक कंपनी का उल्लेख किया गया उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून 2026 में घटकर 65 एकड़ रह गई। मुख्यमंत्री ने 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके पुत्र वैभव के पास भी 2023 के पूर्व 16 एकड़ जो जमीन थी, डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया। यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने के पहले थी। पुत्रवधू द्वारा खरीदी गई 10 एकड़जमीन का भी दिया विवरण खंडेलवाल ने आगे कहा कि सीएम की पुत्रवधू शालिनी यादव के द्वारा जरूर 10 एकड़ की कृषि भूमि खरीदी गई है, जो कि विकसित मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर थी। आरोप में जिन रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, वह भी पूरी तरह से गलत है। मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई उसे लेना-देना है। उनके रिश्तेदारों का स्वतंत्र अस्तित्व है और मेरी जानकारी में यह आया है कि वे आरोपों के संबंध में अपना स्टैंड लेंगे और जो कार्रवाई करना होगी, वह करेंगे। प्रदेश के सतत विकास में जुटे सीएम खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के द्वारा प्रदेश के विकास में लगातार काम किया जा रहा है। इस प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने काम किया है फिर वह चाहे किसानों की बात हो या फिर चाहे औद्योगिक विकास की। इस प्रदेश को मध्य प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में ले जाने का काम मुख्यमंत्री द्वारा किया जा रहा है। उनके खिलाफ षड्यंत्र का काम कांग्रेस पार्टी कर रही है। कांग्रेस कर रही षड्यंत्र प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब-जब प्रदेश को ओबीसी मुख्यमंत्री मिला, चाहे उमा भारती हो, शिवराज सिंह चौहान या डॉ. मोहन यादव, उन्हें षड्यंत्र करके कमजोर करने का काम कई लोगों के द्वारा किया गया। इस तरह मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम कांग्रेस के लोग करते हैं। उन्होंने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को जनता के द्वारा जो विकास कार्य किए जा रहे हैं, उसमें पीछे नहीं कर पाए तो इस तरह के षड्यंत्र करके हमारी सरकार और मुख्यमंत्री को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। इसे इस प्रदेश की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेसी पिछड़े वर्ग का नेतृत्व बर्दाश्त नहीं करती प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इस प्रदेश को विकसित बना रहे हैं। चाहे किसानों की बात करें, चाहे उद्योगों के विकास की बात करें, सीएम डॉ. यादव इस प्रदेश को आगे ले जा रहे हैं। उनके खिलाफ कांग्रेस पार्टी षडयंत्र रच रही है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि जब-जब एक पिछड़े वर्ग का मुख्यमंत्री इस प्रदेश को मिला, चाहे उमा भारती हों, चाहे शिवराज सिंह चौहान हों, या मोहन यादव … Read more

MP कैबिनेट विस्तार जल्द! 5 नामों पर मंथन, सिंधिया गुट के इस दिग्गज की एंट्री लगभग तय

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन सरकार अपने मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। दरअसल, हाल ही में सीएम मोहन यादव ने बड़े संकेत दिए हैं जिसके बाद से मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गई है। 20 जुलाई से विधानसभा के  मानसून सत्र से पहले ही नई मोहन टीम के गठन की पूरी संभावना है। सूत्रों की मानें तो 4-6 मंत्री सीएम की रडार पर हैं जिन्हें मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। वहीं खबर है कि 4-5 विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। जिनमें दो महिला विधायकों का जिक्र है। वर्तमान में मोहन कैबिनेट में शामिल होने वाले मंत्रियों की संख्या के गणित की बात करें तो मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के हिसाब से राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरा जा सकता है। इसके साथ ही नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है। सीएम मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रियों के कामकाज की समीक्षी और उनके रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा। गौरतलब है कि इसके लिए उन्होंने खुद विभागों की समीक्षा कर मंत्रियों के कामकाज की पूरी रिपोर्ट ली है। अटकलें है कि मंत्री विजय शाह, वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, पंचायत विभाग की राज्यमंत्री राधा सिंह, संपतिया उइके और कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना की शिकायतों के बाद उनपर गाज गिरना लगभग तय है। तीन सीनियर मंत्रियों के बदले जा सकते हैं विभाग अटकलें है कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान सरकार के दिग्गज मंत्रियों के विभागों में बड़ा बदलाव भी देखने को मिल सकता है। दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल और राकेश सिंह जैसे सीनियर मंत्रियों की कैबिनेट विस्तार के बाद नई भूमिका में देखें जा सकते हैं। इन विधायकों को मिल सकती है एंट्री कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए सांसद से विधायक बनी रीति पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। इनके अलावा सागर से प्रदीप लारिया, पन्ना से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। सिंधिया खेमे से पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।

UCC पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा दावा, बोले- 90% से अधिक नागरिक समान नागरिक संहिता के पक्ष में

समान नागरिक संहिता के पक्ष में हैं 90 प्रतिशत से अधिक नागरिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यूसीसी पर सभी जिलों में हो चुकी हैं बैठकें प्रदेश में गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा मनाया जाएगा 15 से 29 जुलाई तक बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को मिला "इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड" समारोहपूर्वक होगा जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन 25 से 30 जून तक होंगी गतिविधियां प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को प्राप्त हुए 1640 करोड़ रूपए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में समान नागरिक संहितालागू (यूसीसी) करने के लिएसभी जिलों में जन परामर्श बैठकें हो चुकी हैं। सभी जिलों में कार्य शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। राज्य स्तरीय परामर्श 22 जून को भोपाल में हुआ। इसमें सभी आयोगों, विभागों, राजनैतिक दलों और धर्मगुरुओं से पृथक-पृथक बैठकें आयोजित कर मत लिया गया। लगभग 3.49 करोड़ एस.एम.एस यूसीसी के सुझाव आमंत्रित करने के लिए समग्र के हितग्राहियों को भेजें गए। नागरिकों के 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, 90% से भी अधिक नागरिक यूसीसी के पक्ष में हैं। अल्पसंख्यक समुदाय का भी बड़ी संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ है। विधेयक के प्रारूप पर समिति द्वारा विधि विभाग के साथ साझा रूप से कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में यह जानकारी दी। गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा के अंतर्गत सभी स्कूलों में होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में गुरू पूर्णिमा पखवाड़ा दिनांक 15 से 29 जुलाई तक मनाया जा रहा है। इस अवधि में सभी स्कूलों में अलग अलग शैक्षणिक, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और गतिविधियां होंगी। इसमें जनप्रतिनिधि, पालक एवं विषय विशेषज्ञ शामिल होगें। इसमें विद्यार्थियों के विकास की कार्य योजना बनाई जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रत्येक दिवस की कार्य योजना बनाई है, इसमें भाषण, निबंध प्रतियोगिता, संस्कृत श्लोक प्रस्तुति, स्वास्थ्य जागरूकता, वृक्षारोपण, कैरियर मार्गदर्शन इत्यादि विषय शामिल किए गए हैं। इस अवधि में सांदीपनि विद्यालयों में एक दिवसीय गुरू पूर्णिमा उत्सव होगा। इसके अंतर्गत विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान प्रदर्शिनी, नवाचार इत्यादि के कार्यक्रम किए जाएगें। कार्यक्रम में अभिभावक, जनप्रतिनिधिगण और नागरिकों की सहभागिता होगी। बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व की देश-विदेश में विशेष पहचान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रसिद्ध वन्य जीव पर्यटन स्थल बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व को "इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवार्ड्-2026" में "एडिटर्स चॉईस अवार्ड- बेस्ट वाईल्ड लाईफ डेस्टिनेशन" श्रेणी में पुरस्कृत किया गया है। गोवा में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदान किया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, देश-विदेश के पर्यटकों के बीच अपनी समृद्ध जैव-विविधता, बाघों की अच्छी संख्या, प्राकृतिक सौंदर्य और प्रभावी संरक्षण प्रबंधन के लिए विशेष पहचान रखता है। यह अवार्ड प्रदेश सरकार की जैव विविधता के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों का ही परिणाम है। जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन समारोह में पंचायत स्तर तक होंगी गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में 19 मार्च से प्रारंभजल गंगा संवर्धन अभियान का 25 से 30 जून 2026 की अवधि में समारोहपूर्वक समापन होगा। भारत सरकार के जल संचय जन भागीदारी अभियान में मध्यप्रदेश का तीसरा स्थान है। डिण्डौरी, खण्डवा तथा शहडोल देश के प्रथम 10 जिलों में तथा खण्डवा और इंदौर के नगरीय निकाय, देश के प्रथम 10 नगरीय निकायों में शामिल है। प्रदेश में अभियान में जल संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय कार्य हुए है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में समारोहपूर्वक समापन कार्यक्रम आयोजित किया जाए। अभियान अंतर्गत किए गए कार्यों की प्रदर्शनी, भाषण, ग्राम पंचायत में जनभागिता से किए गए कार्यों का प्रेजेंटेशन किया जाए और जल के सदुपयोग की शपथ भी दिलाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का किसान सम्मान निधि के लिए माना आभार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रदेश भ्रमण संबंधी जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदेश की उपलब्धियों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 20 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि अंतरित की गई। प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का प्रदेश के किसानों की ओर से आभार माना।  

मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना की निरंतरता को मंजूरी, 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति

राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5,960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना की निरंतरता को मंजूरी, 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति 225 शासकीय माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल और 300 हाई स्कूल के हायर सेकेण्डरी में उन्नयन को सैद्धांतिक स्वीकृति शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, जनकल्याण और सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए 5 हजार 960 करोड़ रूपये की योजनाओं सहित कई जनहितैषी कार्यों को मंजूरी दी गई। बैठक में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान को गति देते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों तक निरंतर संचालित रखने के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए राज्य में शासकीय माध्यमिक और हाई स्कूलों के उच्च स्तरीय उन्नयन की योजना को सैद्धांतिक सहमति दी गई, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच बढ़ेगी और ड्रॉप आउट दर में कमीं आएगी। इसके अतिरिक्त, किसानों के आर्थिक संबल के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण योजना की नई शर्तों, शुजालपुर (शाजापुर) में नवीन शासकीय विधि महाविद्यालय की स्थापना, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 3 हजार 580 करोड़ रूपये से अधिक की राशि की निरंतरता तथा जनजातीय क्षेत्रों के विद्युतीकरण संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री कन्या विवाह और कल्याणी विवाह सहायता योजना के संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना को 1 अप्रैल 2026 से 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 1,740 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना प्रदेश में 1 अप्रैल 2006 से प्रभावशील है। योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। योजना अंतर्गत गरीब जरूरतमंद, निराश्रित और निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या/विधवा/परित्यक्ता के सामूहिक विवाह में आर्थिक सहायता के रूप में राशि 55 हजार रूपये प्रति कन्या के मान से दी जाती है। योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 1 लाख 72 हजार 905 हितग्राहियों को 989 करोड़ 80 लाख 62 हजार रूपये से अधिक सहायता राशि प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह, योजना महिला सशक्तिकरण की एक अहम योजना है, जिसके अंतर्गत गरीब और जरुरतमंद अभिभावकों की कन्याओं का सामूहिक विवाह सम्पन्न होता है। इस योजना से विवाह की वैधानिक आयु सुनिश्चित हो जाती है। यह योजना महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिये महत्वपूर्ण है। 225 शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल और 300 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन को सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक पहुँच एवं गुणवत्ता में वृद्धि के लिए शासकीय माध्यमिक शाला का हाई स्कूल एवं हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी में उन्नयन की योजना पर सैद्धांतिक स्वीकृति दी। स्वीकृति अनुसार वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक शालाओं का हाई स्कूल तथा 100 हाई स्कूल का हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन किया जाएगा। आगामी 2 वर्षों 2027-28 एवं 2028-29 में भी इसी प्रकार प्रतिवर्ष 75 माध्यमिक एवं 100 हाईस्कूलों के उन्नयन पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। साथ ही विद्यालयों के उन्नयन के लिए अनुमानित व्यय राशि 635 करोड़ 24 लाख रूपये के प्रस्ताव पर सहमति दी। विकसित मध्यप्रदेश@2047 के तहत वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। मापदण्डों के आधार पर जिला स्तर से मैपिंग अनुसार 315 हाई स्कूल एवं 214 हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले जाने की आवश्यकता है। सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में विद्यालयों का उन्नयन नहीं किया जाएगा। सांदीपनि विद्यालय के कैचमेंट एरिया में आने वाले विद्यालयों के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश सांदीपनि विद्यालय में होने पर विद्यालय को अन्य आवश्यकता वाले स्थानों पर युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। उन्नत विद्यालय अपने वर्तमान भवन या अन्य शासकीय भवन में संचालित होंगे। आवश्यकता एवं बजट उपलब्धता के अनुसार अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत किए जाएंगे। वास्तविक रूप से आवश्यक विद्यालयों की संख्या का आंकलन गति शक्ति पोर्टल, जनसंख्या एवं यू-डाइस के आंकड़ों के आधार पर की जायेगी। राज्य में हाई स्कूल का सकल नामांकन दर (जीईआर) 75 प्रतिशत तथा हायर सेकेण्डरी स्तर पर 55 प्रतिशत है। कक्षा 8 से 9 में कक्षांतरण दर 77 प्रतिशत और कक्षा 10 से 11 में 68 प्रतिशत है। विद्यालयों की दूरी अधिक होने होने के कारण विद्यार्थियों का प्रवेश कम होता है या वे नियमित रूप से उपस्थित नहीं रह पाते, जिससे ड्रॉप आउट दर बढ़ती है। इसलिए विद्यार्थियों की पहुँच में विद्यालय उपलब्ध कराकर उच्च नामांकन एवं निरंतरता सुनिश्चित करना इस निर्णय का मूल लक्ष्य है। शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण प्रदाय करने के लिए किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना अंतर्गत किसानों के हित में शर्तों की स्वीकृति दी गई। स्वीकृति अनुसार खरीफ एवं रबी सीजन के लिए पृथक-पृथक देय तिथि (ड्यू डेट) नहीं रखते हुए उसके स्थान पर वार्षिक एकल ऋण सीमा रखी जाएगी, जिसमें नगद एवं वस्तु ऋण की उप-सीमा निर्धारित रहे। योजनान्तर्गत देय तिथि (डयू डेट) कृषकों को स्वीकृत वार्षिक एकल लिमिट से प्रथम ऋण आहरण से 12 माह निर्धारित की जाएगी और अल्पावधि फसल ऋण लेने वाले किसानों को 1.25 प्रतिशत (सामान्य) ब्याज अनुदान तथा निर्धारित ड्यू डेट तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों को 4 प्रतिशत प्रोत्साहन स्वरूप (अतिरिक्त ब्याज अनुदान) राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा। प्रदेश में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों से संबद्ध बहुउददेशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण दिये जाने की योजना वर्ष 2012-13 से निरन्तर लागू है। योजनान्तर्गत खरीफ एवं रबी सीजन की निर्धारित तिथि (ड्यू डेट) तक ऋण की अदायगी करने वाले किसानों से … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्र के लिए जीवन समर्पित करने वाले भारतीय जनसंघ के संस्थापक , श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी तिराहा पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्र प्रथम के प्रति समर्पित प्रखर विचारधारा, देश की अखंडता के लिए उनका दृढ़ संकल्प सदैव प्रेरणा देता रहेगा। देश अनंतकाल तक डॉ.मुखर्जी का ऋणी रहेगा।  

मंगलवार को आदिरंग शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह में पहुंचेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 के समापन समारोह में मंगलवार को होंगे शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान मध्यप्रदेश (एनआईडी एमपी) एवं वन्या, जनजातीय कार्य विभाग, द्वारा एनआईडी मध्यप्रदेश परिसर, अचारपुरा, भोपाल में आयोजित 23 जून मंगलवार को आदिरंग शिल्पकार महोत्सव 2026 समापन समारोह में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महोत्सव के दौरान जनजातीय शिल्पकारों द्वारा विकसित नवाचारपूर्ण उत्पादों एवं डिजाइन हस्तक्षेपों की प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे। साथ ही शिल्पकारों, डिजाइन विशेषज्ञों और प्रतिभागियों से संवाद भी करेंगे। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समारोह में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों तथा डिजाइन आधारित नवाचारों की जानकारी दी जाएगी। पांच दिवसीय महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार भाग लेंगे। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। महोत्सव में आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों एवं छात्र स्वयं सेवकों के सहयोग से बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए हैं। समापन समारोह के अवसर पर इन कार्यशालाओं के दौरान विकसित उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी शाम 5:30 बजे से आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी, जहां आगंतुक उत्पादों को देख सकेंगे। साथ ही, भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों द्वारा प्रदर्शित मूल कलाकृतियां एवं हस्तशिल्प उत्पाद खरीद के लिए उपलब्ध रहेंगे। आदिरंग शिल्पकार महोत्सव जनजातीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक मंच प्रदान करने के साथ शिल्पकारों के लिए नए बाजार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। एनआईडी मध्यप्रदेश और वन्या के संयुक्त प्रयास से आयोजित यह महोत्सव डिजाइन और परंपरा के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।  

CM डॉ. यादव का बड़ा निर्देश: हर जिले में बनेगी हैचरी, मछली पालन को मिलेगा नया बढ़ावा

मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में विकसित की जाए एक हैचरी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मछली पालन के लिए प्रदेश में होगा 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रदेश में मोती उत्पादन को किया जाए प्रोत्साहित मध्यप्रदेश बने मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि एकीकृत मत्स्योघोग नीति : 2026 के कारण प्रदेश में मछली पालन सेक्टर में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ रहा है। प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 9 सौ 38 केज के प्रस्तावों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं। प्रदेश में मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाये, इसके लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेस का अध्ययन कर उनका क्रियान्वयन प्रदेश में सुनिश्चित किया जायें। प्रदेश को मछली उत्पादन में आत्म निर्भर बनाना जरूरी है। अगले ढाई साल में हमें मछली बीज अन्य स्थानों से नहीं खरीदना पड़े, इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर विभाग कार्य करे। हर जिले में एक हेचरी आवश्यक रूप से विकसित की जाये। जिलों में मछली बीज आसानी से मिलने से प्रदेश में मछली उत्पादन में और बढ़ोत्तरी होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मछुआ कल्याण तथा मत्यस्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास राज्य मंत्री नारायण सिंह पवार, मुख्य सचिव अनुराग जैन, विभाग के सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। मछुआ क्रेडिट कार्ड में मध्यप्रदेश, देश में दूसरे स्थान पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बढ़ रहे मछली उत्पादन को दृष्टिगत रखते हुए कोल्ड चेन तथा अन्य आवश्यक इंफ्रास्टक्चर विकसित किया जाये। ब्रांडिंग और निर्यात के लिए आवश्यक नेटवर्किंग को भी प्रोत्साहित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन, जलीय जीवों के संरक्षण के लिए सभी संबंधित विभाग परस्पर समन्वय से कार्य करें। जलीय ईको सिस्टम को विकसित करने और जल सम्पदा पर आधारित पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के लिए भी कार्य योजना बनाई जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत अन्तर्देशीय जल क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। राष्ट्रीय स्तर पर अन्तर्देशीय मत्स्य पालन में सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। 

मोहन कैबिनेट में नए चेहरे, पुराने मंत्रियों पर संकट! 3 सीनियर मंत्रियों के विभाग बदलने की चर्चा

भोपाल  मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में है। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बनने जा रही इस नई कैबिनेट में बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 23 से 30 जून के बीच यह विस्तार हो सकता है। इस बड़े फेरबदल में बेहतर परफॉर्मेंस न देने वाले 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है, जबकि 7 से 8 नए विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। फिलहाल मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट की संख्या 31 है, जबकि 4 पद खाली चल रहे हैं। वरिष्ठ मंत्रियों को मिल सकती है नई जिम्मेदारी सियासी गलियारों में चर्चा है कि मोहन यादव कैबिनेट के कुछ बेहद सीनियर मंत्री मुख्यमंत्री से ज्यादा अपनी वरिष्ठता के कारण असहज महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजा जा सकता है, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन की कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।  इसके अलावा, सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले जनजातीय कल्याण मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकार को फटकार लगा चुका है। विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, राधा सिंह और प्रतिमा बागरी पर भी गाज गिर सकती है। इन नए चेहरों की हो सकती है एंट्री नए चेहरों की बात करें तो सागर से शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी रेस में आगे चल रहा है। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की भी कैबिनेट में वापसी की पूरी उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार केवल मंत्रियों के चेहरे ही नहीं बदलेंगे, बल्कि लगभग सभी मंत्रियों के विभागों में भी भारी फेरबदल किया जाएगा। सीएम बोले- परफॉर्मेंस बनेगा आधार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मंत्रिमंडल फेरबदल का मुख्य आधार मंत्रियों का कामकाज रहेगा। अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंत्रियों व विधायकों के प्रदर्शन की नियमित समीक्षा होती है, जिसमें शीर्ष नेतृत्व के सुझाव भी शामिल रहते हैं। बीजेपी के सामने प्रमुख राजनीतिक समीकरण जानकारों के अनुसार इस फेरबदल के जरिए बीजेपी कई राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरण साधना चाहती है।     बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ाना: क्षेत्र की सीमित हिस्सेदारी से उपजी नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ से नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है।     महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाना: महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए रीती पाठक, अर्चना चिटनीस और मालिनी गौड़ को अवसर मिल सकता है।     ओबीसी समीकरण और 2028 की तैयारी: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी ओबीसी वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।     निकाय चुनाव की तैयारी: अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन सीटों की स्थिति, प्रत्याशी चयन, बूथ प्रबंधन और चुनावी रणनीति पर फीडबैक जुटा रहा है।     सिंधिया खेमे और मूल संगठन में संतुलन: मौजूदा कैबिनेट में सिंधिया समर्थक नेताओं की मजबूत मौजूदगी है। फेरबदल में पार्टी को यह प्रभाव बनाए रखते हुए संगठन के पुराने नेताओं को भी संतुलित प्रतिनिधित्व देना होगा। इन मंत्रियों पर हटने का खतरा समीक्षा रिपोर्ट और विवादों के आधार पर कुछ मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:     विजय शाह: कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के बाद वे आलोचनाओं के केंद्र में रहे। मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और संगठन की नाराजगी भी सामने आई। पूर्व में भी उनके कुछ बयान पार्टी के लिए असहजता का कारण बने थे।     दिलीप अहिरवार: पहली बार विधायक बने अहिरवार को कैबिनेट में जगह मिली थी। हालांकि हालिया समीक्षा में उनके कामकाज को अपेक्षित स्तर का नहीं माना गया, जिससे उनकी स्थिति कमजोर बताई जा रही है।     प्रतिमा बागरी: उनका नाम जाति प्रमाण पत्र संबंधी विवाद में चर्चा में रहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जांच समिति से रिपोर्ट मांगी है। उनके भाई की गिरफ्तारी का मामला भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना।     राधा सिंह: पहली बार विधायक बनीं राधा सिंह के विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। इसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।     एदल सिंह कंषाना : रेत खनन और माफिया को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। विभाग के प्रदर्शन को लेकर हालिया समीक्षा में सवाल उठे हैं। उनके स्टाफ के सदस्य तबादलों के एवज में रिश्वत मांगते के खुफिया कैमरे में कैद हुए। इन मंत्रियों के विभागों में हो सकता है बदलाव     प्रहलाद पटेल: उन्हें संगठन या सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है। राज्य मंत्रिमंडल में बने रहने पर उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त विभाग भी दिए जा सकते हैं।     कैलाश विजयवर्गीय: विभागों में बदलाव संभव है, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका और जिम्मेदारियां क्या होंगी इसे लेकर अभी संशय की स्थिति है।     तुलसीराम सिलावट: विभागीय पुनर्संतुलन के तहत उनके विभाग में बदलाव की संभावना बताई जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार एन के सिंह कहते हैं कि एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव देश के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में हैं, जिन्होंने सपने में भी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। पार्टी ने उन्हें तीसरी या चौथी पंक्ति से उठाकर इतने बड़े पद पर बैठाया है। उनके साथ प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय जैसे दिग्गज नेता काम कर रहे हैं, जो अनुभव और कद में उनसे कहीं ज्यादा हैं। ऐसे में इन नेताओं का असहज होना लाजमी है। यह उस समय का पॉलिटकल कंपल्शन या मजबूरी थी। यह चल रहा था और आगे भी चल सकता है। नए चेहरों की एंट्री: कौन हैं दावेदार? संभावित नए चेहरों में सागर के प्रदीप लारिया प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। बुंदेलखंड से पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी चर्चा में है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम … Read more

सरकार का बड़ा फैसला: 48 लाख लोगों की होगी मुफ्त रजिस्ट्री, कपास पर मंडी शुल्क घटा और सामान्य शुल्क बढ़ा

भोपाल  स्वामित्व योजना में 48 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त में रजिस्ट्री कराने राज्य सरकार ने पंचायत उपकर और पंजीयन शुल्क माफ करने का अध्यादेश जारी कर दिया है। इसके लिए विधानसभा में दोनों ही विभागों से संबंधित मामलों में विधेयक भी सरकार मानसून सत्र के दौरान ला सकती है। इसके साथ ही 9 जून को कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर कपास पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत करने और मंडी में लगने वाले सामान्य शुल्क को एक से 1.50 प्रतिशत करने का नोटिफिकेशन भी सरकार ने जारी कर दिया है। मोहन यादव सरकार ने 2 जून को हुई कैबिनेट बैठक में 'स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026' के अंतर्गत स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क को पूरी तरह माफ करने का फैसला किया है। इससे सरकार पर 3800 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने वाला है। अलग-अलग विभाग न जारी किए नोटिफिकेशन इस निर्णय पर अमल के लिए राज्य सरकार के पंजीयन और पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने अलग-अलग अध्यादेश के नोटिफिकशन जारी कर दिए हैं। पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत उपकर के रूप में ली जाने वाली राशि ऐसे मामलों में माफ किए जाने और पंजीयन विभाग ने पंजीयन व मुद्रांक शुल्क माफ किए जाने का नोटिफिकेशन किया है। नौ जून को हुई कैबिनेट में तय किया गया है कि प्रदेश में स्वामित्व योजना में जिन भू-खण्डधारियों के अधिकार अभिलेख निर्मित किए गए हैं उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए इन अधिकार अभिलेखों का पंजीयन कराया जाए। इसके लिए डीड ऑफ कन्वेयेंस की कमी पूरी करने एवं पंजीयन की कार्यवाही होगी। इसके बाद नागरिक आवश्यकतानुसार गृह निर्माण, व्यवसाय एवं कृषि संक्रियाओं आदि के लिए ऋण प्राप्त कर अपनी आजीविका एवं आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे। आयुक्त भू संसाधन की कमेटी पूरी कराएगी प्रोसेस योजना के क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने, प्रक्रिया निर्धारण, समय-समय पर समीक्षा के लिए आयुक्त भू-संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, आयुक्त कोष एवं लेखा, आयुक्त, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा प्रबंध संचालक एमपीएसईडीसी, सदस्य होंगे एवं आवश्यकतानुसार विषय विशेषज्ञों को संयोजित किया जा सकेगा। योजना के प्रचार-प्रसार, मुद्रण व्यय एवं जन-जागरुकता गतिविधियों के संचालन के लिए राज्य स्तर पर 10 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। योजना का परिपत्र एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण जारी करने के लिए राजस्व विभाग को अधिकृत किया गया है। कपास पर ली जाने वाली मंडी फीस कम करने के आदेश 9 जून को मोहन कैबिनेट ने कपास पर ली जाने मंडी फीस को 1% से घटाकर 0.5% करने का निर्णय लिया था। इसके बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि कपास की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी फीस 0.50 रुपए यानी 50 पैसे होगी। सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय जिनिंग मिलों को मजबूती मिलेगी और रोजगार बढ़ेगा। प्रदेश में लगभग 158 कपास जिनिंग मिलें है, जिनकी प्रोसेसिंग कैपिसिटी लगभग 13 लाख मीट्रिक टन है। महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में रुकेगा पलायन प्रदेश में कपास पर मंडी फीस की दर में कमी किए जाने से जिनिंग मिलों का महाराष्ट्र और अन्य पड़ोसी राज्यों में पलायन रुकेगा। इन्हें प्रदेश में ही व्यवसाय करने को प्राथमिकता दी जाएगी जिससे रोजगार में तथा जीएसटी संग्रहण में वृद्धि होगी। जिनिंग मिलों की इनपुट लागत में कमी आएगी और उनकी आर्थिक व्यवहारिता में वृद्धि होगी। महाराष्ट्र सरकार पहले ही 0.5 प्रतिशत फीस ले रही है जिसके चलते एमपी का जिनिंग मिल कारोबार प्रभावित हो रहा था। नोटिफाइड उपज के हर 100 रुपए पर डेढ़ रुपए लगेगा मंडी शुल्क इसके साथ ही कृषि उपज मंडियों में लगने वाले सामान्य मंडी शुल्क को एक रुपए से बढ़ाकर एक रुपए 50 पैसे किया गया है। इससे 500 करोड़ रुपये की आय होगी। 9 जून को हुए कैबिनेट के फैसले के बाद किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग ने इसका नोटिफिकेशन कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अधिसूचित कृषि उपज की कीमत के हर 100 रुपए पर मंडी टैक्स 1 रुपए के स्थान पर 1.50 रुपए वसूला जाएगा। इस राशि से जिलों में कोल्डस्टोरेज, वेयरहाउस प्रोसेस्ड यूनिट्स एवं लॉजिस्टिक सुविधाओं को प्रोत्साहन मिलेगा। इस शुल्क राशि में से 50 पैसे व्यापार विकास निधि के अंश के रूप में किसानों के कल्याण में उपयोग किया जायेगा। इसमें निराश्रित शुल्क को यथावत् 20 पैसे रखा जाएगा। बाकी आय का उपयोग किसान सड़क निधि एवं कृषि अनुसंधान तथा अधोसंरचना विकास में किया जाएगा।

सिंहस्थ तैयारियों पर खास फोकस, उज्जैन में CM मोहन यादव और मनोहर लाल खट्टर लेंगे बड़ी बैठकें

उज्जैन   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर 19 जून को उज्जैन दौरे पर रहेंगे. इस दौरान केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री खट्टर दो महत्त्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकों में शामिल होंगे. प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में आयोजित इन बैठकों में कई विभागों की समीक्षा हो सकती है।  शाम को शुरू होंगी दो महत्वपूर्ण बैठकें उज्जैन में सीएम व केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति में पहली बैठक शाम 6 बजे होगी. इस बैठक में स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तरीय समीक्षा होगी. वहीं, इसके बाद आयोजित दूसरी बैठक में पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के अंतर्गत प्रदेश में चल रहे कार्यो और विद्युत वितरण व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ 2028 से जुड़े और अन्य विकास कार्यो की भी समीक्षा कर सकते हैं।  प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में होंगी बैठकें मुख्यमंत्री वीर भारत संघ्राहलय, कान्हा डक्ट परियोजना और केंद्र सरकार की सहायता राशि से चलने वाली अन्य योजनाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं।  तैयार होगा उज्जैन व अन्य शहरों के विकास का रोडमैप दरअसल, उज्जैन में होने वाली समीक्षा बैठकें केवल विभागीय समीक्षा तक समिति नहीं रहेगी बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, बिजली सुधार और धार्मिक पर्यटन विकास के रोडमैप को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है. मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री ल मनोहरलाल खट्टर के दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी हो गई हैं, जिससे समीक्षा बैठकों की व्यवस्थाओं में कोई कमी न हो. हालांकि, इन बैठकों के बाद क्या महत्वपूर्ण निणर्य होने है ये देर शाम आधिकारिक बयानों के बाद ही सामने आ पाएगा।  समीक्षा बैठक में इन मुद्दों पर जोर दे सकते हैं सीएम व केंद्रीय मंत्री मध्यप्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार माना जा रहा है पहली बैठक में निम्लिखित मुद्दों पर सरकार का फोकस हो सकता है।      नगरीय निकायों में कचरा संग्रहण और निस्तारण व्यवस्था को और मजबूत करना.     शहरों की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए विशेष अभियान.     कचरे से खाद और ऊर्जा उत्पादन परियोजना को बढ़ावा.     खुले में कचरा फेंकने और प्लास्टिक उपयोग पर सख्ती बढ़ाना.     सिंहस्थ के कार्यों के साथ-साथ उज्जैन सहित धार्मिक और पर्यटन शहरों में विशेष सफाई मॉडल लागू करना.     नगर निगमों की रैंकिंग के आधार पर जवाबदेही तय करना.     बिजली वितरण कम्पनियों के तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम करना.     स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाना.     ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों का उन्नयन.     किसान और घरेलू उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर.     बिजली चोरी रोकने का विशेष अभियान.