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रोजगारोन्मुखी कोर्स डिज़ाइन करें – मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अहम निर्देश

रोजगारोन्मुखी नवीन कोर्स करें डिजाइन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की 47 आईटीटाई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सबसे अधिक नामांकन मध्यप्रदेश में भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रदेश की उपलब्धि अन्य राज्यों से बेहतर है। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स भी डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलवाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिये। बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल उपस्थित रहे। बैठक में जाकनारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयत्न किए हैं। देश में युवाओं की जनसंख्या के दृष्टिगत उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास में मध्यप्रदेश की उपलब्धियां बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लाँग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्रायवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्रायवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।  

केंद्र सरकार की उर्वरक सब्सिडी पहल: अन्नदाताओं को मिलेगी 41 हजार करोड़ की मदद

अन्नदाताओं को उरर्वकों पर सब्सिडी के लिए केंद्र सरकार ने दी 41 हजार करोड़ से अधिक की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी का माना आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) को मंजूरी दी है जो अन्नदाताओं के हित में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय है। खरीब सीजन- 2026 में इससे किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन-2026 के लिए फॉस्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी के लिए 41 हजार 533.81 करोड़ की बजटीय व्यवस्था को स्वीकृति प्रदान की है। यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। गत वर्ष स्वीकृत राशि से यह 4,317 करोड़ रुपए अधिक है। वैश्विक चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के रुझानों के बावजूद केंद्र सरकार ने किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित किया है कि उर्वरक रियायती, किफायती एवं उचित दरों पर उपलब्ध हों और उन पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। मध्यप्रदेश में किसान-कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय कृषि लागत को संतुलित कर किसानों की आय और उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करेगा। मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 कृषि और कृषक कल्याण वर्ष है। इस नाते ऐसे निर्णय मध्यप्रदेश के अन्नदाताओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं। मध्यप्रदेश सरकार किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। किसानों को नई तकनीक से अवगत करवाने के लिए उन्नत कृषि महोत्सव भी आयोजित किए जा रहे हैं। कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को शिक्षित जागरूक बनाने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान हितैषी इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय मंत्रीमंडल का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।  

कृषि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज-सुगम व्यवस्था की जाए सुनिश्चित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए सहज-सुगम व्यवस्था की जाए सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण व्यवस्था पर रखी जाएगी नजर गेहूँ उपार्जन व्यवस्था में सामाजिक और सेवा भारती संस्थाएं भी करें सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं से किया वर्चुअल संवाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में 9 अप्रैल से गेहूँ खरीदी आरंभ हो रही है। उन्होंने सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज-सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश सभी कलेक्टर्स और एसडीएम को दिए गए हैं। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की व्यवस्था की जा रही है। गेहूँ उपार्जन जैसी महत्वपूर्ण और व्यापक गतिविधि में सामाजिक और सेवाभावी संस्थाएं भी सहयोग करें। प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर फैसले लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार किसान और स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल संवाद के दौरान व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था है। गेहूँ की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना बड़ी चुनौती थी, हम इसे 2700 रूपये प्रति क्विंटल तक ले जाएंगे। किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलवाना हमारी प्रतिबद्धता है। हम जनता की सेवा करना चाहते हैं, इसी उद्देश्य से उपार्जन केंद्रों पर गेहूँ खरीदी की बेहतर व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किये जा रहे हैं, जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जाएगी। उपार्जन केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के द्वारा भी किसानों को व्यवस्था के संबंध में जानकारियां देने के निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 2026 से किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। उपार्जन केन्द्रों पर आने वाले किसानों को उनके कल्याण तथा हित से जुड़ी शासन की योजनाओं से भी अवगत कराया जाए।  

सीएम मोहन यादव का एलान: प्रदेश के मजरे, टोले और सांदीपनि स्कूल जल्द सड़कों से जुड़ेंगे

भोपाल  जल्द ही प्रदेश के मजरे, टोले ओर सांदीपनि स्कूल सड़कों से जुड़ेंगे। इन्हें आपस में जोड़ने के लिए 7 हजार 135 सडकें बनाई जाएंगी। यह काम सुगम संपर्कता परियोजना के तहत किए जाएंगे। सड़क निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाएगा। सिपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग अब सिर्फ डीपीआर तैयार करने के लिए ही नहीं किया जाएगा, बल्कि इससे सड़क के साथ पुल-पुलियों की स्थिति की निगरानी करने में भी मदद ली जाएगी। सीएम ने की समीक्षा एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने उक्त परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में संबंधित अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए गए कि गांव-गांव के विकास के लिए सड़कों की इस परियोजना का काम तेजी से किया जाए। जहां आबादी 100 से पार, वहीं बिछेगी सड़क इस परियोजना की खासियत ये है कि इसके तहत 100 से अधिक आबादी वाले मजरों-टोलों को सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। ये सड़कें वीबी-जीराम-जी योजना के अंतर्गत बनावाई जाएंगी। 7000 से ज्यादा सड़कों का नेटवर्क तैयार करने वाले इस काम पर 1000 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। सुगम संपर्कता परियोजना के तहत शुरू किए जाने वाले इस काम के लिए प्रदेश की प्रत्येक जनपद पंचायत तीन करोड़ तक की स्वीकृति दे सकेंगी। यह भी होगा -पूर्व में बनी सड़कों की रिम्स पोर्टल के माध्यम से जियो-इंवेंट्री की जा रही है। इससे नई सड़कों के चयन में दोहराव की स्थिति नहीं बनेगी। जियो इंवेंट्री में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, पीएमजीएसवाय, मुख्य जिला सड़क और संपर्कता एप से चयनित सड़कें शामिल हैं।  -निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों की जियो इंवेंट्री का कार्य पूरा कर लिया है। इसके साथ ही 9 जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक सर्वे कार्य पूर्ण कर लिया गया है। रतलाम, जबलपुर, आगर-मालवा, मंदसौर और पन्ना उक्त काम में आगे है। ऐसे समझें पूरा प्लान कुल सड़कें- 7,135 बजट- करीब 1000 करोड़ रुपए कवरेज- 100+ आबादी वाले सभी मजरे-टोले योजना- वीबी-जीराम-जी योजना के तहत होना है निर्माण तकनीक- ड्रोन से मॉनिटरिंग, सिपरी सॉफ्टवेयर से निगरानी मंजूरी का अधिकार- हर जनपद पंचायत को 3 करोड़ रुपए तक की स्वीकृति प्रगति रिपोर्ट कुल चिह्नित सड़कें- 33,655 जियो इंवेंट्री पूरी- 17,437 80% से ज्यादा सर्वे वाले जिले रतलाम जबलपुर आगर-मालवा मंदसौर पन्ना क्या बदलेगा? -अब हर गांव अपने नजदीकी शहरों से जुड़ेगा -बच्चों के लिए पक्की सड़क बनीं तो स्कूल जाना आसान होगा -मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचना आसाना होगा -किसानों को मंडी तक बेहतर कनेक्टिविटी -बरसात में कटने और कीचड़ में बदलने वाली सड़कें अब पक्की होंगी  

वृंदावन में संत के पैर छुए भागवत, बोले- संघ भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए डंडा लेकर खड़ा रहेगा

मथुरा  संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। संघ प्रमुख ने कहा- समाज को गो-भक्त बनाया जाए, तो गो-हत्या अपने आप रुक जाएगी। जो लोग आज सत्ता में हैं, उनके मन में भी यह बात है। वे करना चाहते हैं, लेकिन कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है। गो-जागृति को मजबूत करना होगा। जब जनभावना तैयार हो जाएगी, तो व्यवस्था को भी उसे मानना पड़ेगा। कृष्ण भक्त संत मलूक दास का जन्म कौशांबी में खत्री परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया। यहां उन्होंने यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया बनाई, जिसे मलूक पीठ के नाम से जाना जाता है। संत का गोलोक गमन (मृत्यु) वृंदावन में हुआ, जहां उनकी समाधि बनी हुई है। संत मलूक दास का अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए, सबके दाता राम दोहा सबसे मशहूर हुआ। इसका अर्थ है कि अजगर किसी की नौकरी नहीं करता, पक्षी काम नहीं करता, लेकिन भगवान पर विश्वास हो तो राम जी सबका भला करते हैं।

कैबिनेट निर्णय: ST छात्रों को ₹10 हजार की सहायता, उज्जैन से एयरबस विमानों का संचालन शुरू होगा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्री परिषद की बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। जन कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए 16,720 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (FTRI) की स्थापना की स्वीकृति दी गई। वाणिज्यिक कर विभाग की 8 योजनाओं के लिए 2030-2031 तक 2,952 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया है। इसके अलावा चना एवं मसूर फसल के आगामी तीन वर्षों में उपार्जन के लिए 3,174 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। पीएम श्री विद्यालय योजना के लिए 940 करोड़ मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में वन क्षेत्रों में पुनरुत्पादन, पुनर्स्थापना एवं संरक्षण के लिए 5,215 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 3039 करोड़ रुपये की स्वीकृति की गई है। पीएम श्री विद्यालय योजना के लिए 940 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। छात्रगृह योजना में प्रतिमाह 10 हजार रुपये इसके अलावा, कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पुस्तकें प्रदान करने के लिए 693 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रगृह योजना में प्रतिमाह 10 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। योजनांतर्गत प्रति वर्ष 100 नवीन विद्यार्थियों एवं पूर्व से अध्ययनरत विद्यार्थी लाभांवित होंगे। इसमें 50 नवीन स्नातक, 50 नवीन स्नातकोत्तर और 50 पूर्व से अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए एक वर्ष के मान से 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उज्जैन में भूमि अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ उज्जैन में शासकीय हवाई पट्टी में एयरबस विमानों के संचालन के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 590 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि उज्जैन देश-विदेश में धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जहां 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक ज्योर्तिलिंग महाकालेश्वर एवं सांदिपनी आश्रम स्थित है तथा सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन भी होता है, जिससे यहां पर काफी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को दूरस्थ क्षेत्रों से आवागमन होता रहता है। विक्रम उ‌द्योगपुरी एवं अन्य औ‌द्योगिक क्षेत्रों के कारण औ‌द्योगिक गतिविधियों में तेजी से वृ‌द्धि हो रही है। इसके अतिरिक्त उज्जैन कृषि एवं सेवा क्षेत्र की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण एवं विकासशील नगर है। इसलिए उज्जैन में हवाईपट्टी का उन्नयन/विस्तार आवश्यक है। मंदसौर की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 88.41 करोड़ मंदसौर जिले की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 88.41 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील के 12 ग्रामों में 3500 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा का लाभ होगा। मंत्रि परिषद द्वारा निर्णय लिया गया कि वित्तीय प्रशासन एवं प्रबंधन से संबंधित सभी स्तरों के कार्मिकों को केंद्रीकृत एवं मानकीकृत प्रशिक्षण प्रदान करने हेतु वित्तीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान (FTRI) की स्थापना आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासनिक एवं प्रबंधन अकादमी, भोपाल के परिसर में की जाएगी। संस्थान का उद्देश्य वित्तीय प्रशासन एवं प्रबंधन से संबंधित सभी स्तरों के कार्मिकों को केंद्रीकृत एवं मानकीकृत प्रशिक्षण प्रदान करना होगा, जिससे विभागीय कार्यकुशलता, वित्तीय अनुशासन तथा पारदर्शिता में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश में वर्तमान में संचालित सात लेखा प्रशिक्षण शालाओं का चरणबद्ध एकीकरण कर राज्य स्तरीय एकीकृत प्रशिक्षण व्यवस्था स्थापित की जायेगी। संस्थान हेतु पद सृजन पर राज्य शासन पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं होगा। तीन वर्षों 2026-27, 2027-28, 2028-29 में स्थापना और संचालन के लिए वित्तीय लागत 26 करोड़ रुपये आएगी। राजस्व व्यय संबंधी 8 योजनाओं के लिए 2951.86 करोड़ वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत राजस्व व्यय संबंधी संचालित 8 योजनाओं के लिए 2030-2031 तक निरन्तरता और 2951.86 करोड़ रुपये का अनुमोदन दिया गया है। इसमें मप्र नगरीय अधोसंरचना विकास निधि का वर्ष 2026-2027 से 2030-2031 तक निरन्तरता और 1317.62 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया है। सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, आबकारी सामग्री की खरीद, विभागीय दुकानों का संचालन एवं कार्यालय भवनों के निर्माण से संबंधित कार्यों के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 120.98 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया। स्टाम्पों की लागत के लिए व्यय राशि रुपये 806 करोड़ रुपये तथा मुख्यालय स्थापना व्यय एवं जिला कार्यपालिका स्थापना के लिए 1428 करोड़ रुपये का अनुमोदन दिया गया। मंत्री परिषद द्वारा केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत कार्य योजनाओं के प्रावधानों के अनुसार वन क्षेत्रो में पुनरुत्पादन, पुनर्स्थापना एवं संरक्षण कार्यवृत्तों में उपचार कार्य के लिए 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक कुल 5 वर्षों के लिए 5215 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत प्रथम वर्ष उपचार कार्यों के साथ-साथ विगत वर्षों में कराए गए कार्यों का रखरखाव भी सम्मिलित है। अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 3039 करोड़ आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत अशासकीय विद्यालयों को ट्यूशन फीस की प्रतिपूर्ति के लिए 3039 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम अनुसार गैर अनुदान प्राप्त अशासकीय स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के एवज में फीस प्रतिपूर्ति योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक 3039 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।  

सफलता की कहानी: ई-स्कूटर अनुदान योजना से दमोह की सायरा बी बनीं आत्मनिर्भर

सफलता की कहानी- ई-स्कूटर अनुदान योजना से दमोह की सायरा बी बनीं आत्मनिर्भर दमोह श्रम विभाग द्वारा संचालित ई-स्कूटर अनुदान योजना 2024 श्रमिकों के जीवन में परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। दमोह में गत दिनों महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रमिक महिला सायरा बी को ई-स्कूटर की चाबी प्रदान की। अब उनका जीवन रोज के कामकाज के लिये किसी सहारे का मोहताज नहीं रहा। भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, भोपाल द्वारा संचालित इस योजना में सायरा बी को 40 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इस सहयोग से अब उनके लिए आवागमन आसान हो गया है, जिससे उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक सुधार आया है। ई-स्कूटर अनुदान योजना विशेष रूप से श्रमिक परिवारों, खासकर महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इससे न केवल उनकी दैनिक जीवन की कठिनाइयाँ कम हो रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी मजबूत पहचान भी स्थापित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देती हैं और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करती हैं। 'ई-स्कूटर अनुदान योजना-2024' श्रमिकों के जीवन में सुविधा, आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय जोड़ रही है। यह पहल ‘श्रमिक सशक्त, समृद्ध देश, विकसित मध्यप्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।  

एनएसजी भारत का अभेद्य कवच, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- हम हर हाल में सुरक्षित

एनएसजी भारत का अभेद्य कवच, इनसे हैं हम हर हाल में सुरक्षित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हमारे भरोसे की गारंटी है एनएसजी काउंटर टेररिस्ट ग्रुप के आधुनिकीकरण के लिए 200 करोड़ रूपए की डीपीआर तैयार सरकार जल्द ही इस दिशा में आगे बढ़ेगी भोपाल के पास तूमड़ा में खुलेगा आकस्मिक आपदा प्रबंधन के लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण केन्द्र लाल परेड मैदान में हुआ नेशनल सिक्योरिटी गार्ड शो मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का शुभारंभ एक माह तक चलेगा एनएसजी एवं म.प्र. पुलिस का यह साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यद्यपि हमारी संस्कृति हमें सबके सुख की कामना करना सिखाती है, पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में दुनिया यह भी जान गई है कि यदि कोई हमें छेड़ेगा, तो हम उसे नहीं छोड़ेंगे। जो जिस भाषा में समझें, उसे उसी भाषा में समझाना जरूरी है।अतिवादी ताकतें देश के विकास में बड़ी बाधक हैं। हमें ऐसी ताकतों से पूरी मजबूती से निपटना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (नेशनल सिक्युरिटी गार्ड) भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच है। एनएसजी के कारण ही हमारी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुदृढ़ है। देश में बीते काल में हुई किसी भी प्रकार की अतिवादी, अप्रिय घटनाओं एवं असामान्य परिस्थितियों में एनएसजी गार्ड की पूरी मुस्तैदी से मौजूदगी ने हमें यह एहसास कराया है कि एनएसजी है तो हम हर हाल में सुरक्षित हैं। एनएसजी देश की सीमा के भीतर नागरिक सुरक्षा की पक्की गारंटी की तरह है। उन्होंने कहा कि एनएसजी के जवान अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र की रक्षा में तत्पर रहते हैं। यह बल अपनी पेशेवर क्षमता, अनुशासन और तकनीकी दक्षता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी-शो में सहभागिता कर एनएसजी द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों के लिए आयोजित समग्र क्षमता निर्माण प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के साझा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लाल परेड मैदान में आयोजित एनएसजी शो देखा और कमांडो के प्रदर्शन की सराहना की। शो के दौरान एनएसजी जवानों ने मॉक टेररिस्ट अटैक का रीयलस्टिक सीन क्रिएट कर इस तरह के अटैक्स को काउंटर कर पूरी क्षमता से निपटने के लिए एनएसजी द्वारा अपनाई जाने वाली पूरी प्रकिया एवं कार्यवाही का सजीव प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह शो पुरुषार्थ और साहस से पराक्रम की पराकाष्ठा के प्रदर्शन का परिचायक है। इस प्रशिक्षण प्रदर्शन में जवानों ने हवा में उड़ते हुए जो करतब दिखाए हैं, वे सच में अद्भुत है। एनएसजी जवान हमारी सुरक्षा व्यवस्था की धुरी हैं। जल, थल, नभ हर तरह से देश पर किसी भी तरह की चुनौतियां और कठिनाइयां आ सकती हैं, इनसे निपटने की तैयारियों के लिए यह प्रशिक्षण और पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण कार्यक्रम सह एनएसजी शो के शुभारंभ अवसर पर पुलिस बैंड द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी प्रकार के टेररिस्ट अटैक से निपटने के लिए हम अपने सुरक्षा बलों, एटीएस और सीटीजी को और अधिक मजबूत करेंगे। सीटीजी के आधुनिकीकरण के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। जल्द ही हम इस दिशा में आगे बढ़ने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि टेररिस्ट अटैक को पूरी दक्षता से काउंटर करने सभी जरूरी प्रशिक्षण के लिए हमारी सरकार भोपाल जिले की हुजुर तहसील के ग्राम तूमड़ा में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केन्द्र खोलेगी। इस सेंटर के जरिए हम अपने सुरक्षा बलों को किसी भी प्रकार की आकस्मिक आपदा एवं अतिवादी ताकतों से निपटने के लिए पूरी क्षमता से तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में है, इसलिए यह सेंटर देश की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमारे जवान अपने हथियार और बुद्धिमत्ता से सभी प्रकार के संकटों से निपटने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागरिकों की सेवा और सुरक्षा के लिए हमारी सरकार हर समय तत्पर है। हमारी एटीएस आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी है। इनकी मदद के लिए तैयार की गई काउंटर टेररिस्ट ग्रुप (सीटीजी) हमारी असॉल्ट यूनिट, आधुनिक हथियारों और मॉडर्न टेक्निक से लैस है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को अपने सशस्त्र बलों पर बेहद गर्व है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया में भारत की अलग पहचान बन रही है। वर्ष 1984 में एनएसजी की स्थापना हुई। एक समय था जब हमारे देश के प्रधानमंत्री भी अपने घर में सुरक्षित नहीं हुआ करते थे। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की माला पहनाते हुए हत्या कर दी गई। एनएसजी का स्लोगन 'सर्वत्र सर्वोत्तम सुरक्षा' है, जो विजय भाव की अनुभूति कराता है। एनएसजी जवानों का शौर्य और निष्ठा बेजोड़ है। जब भी देश में कोई संकट आता है। हमारे एनएसजी जवान (ब्लैक कैट कमांडोज़) देशवासियों को पूरी सुरक्षा देते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अब हमारी सेना देश के दुश्मनों को उनके घर में घुसकर मारने का माद्दा रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों ने अपने पराक्रम से आज हमें यह भरोसा दिलाया है। यहां मध्यप्रदेश पुलिस के साथ एटीएस, सीटीजी के प्रशिक्षण की शुरुआत हुई है। आज के विकासशील दौर में आतंकवाद, नक्सलवाद बहुत घातक है। इनसे लड़ने के लिए बलों को हर तरह के प्रशिक्षण की आवश्यकता है। देश ने 35 साल पुरानी एक बड़ी समस्या (नक्सलवाद) को खत्म कर दिया है। हमारा मध्यप्रदेश आज पूरी तरह नक्सलमुक्त हो चुका है। इसमें हमारे सशस्त्र बलों का बड़ा योगदान है। सुरक्षा बलों के कारण ही भारत दुनिया के सबसे सशक्त तीन देशों की कतार में शामिल हुआ है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि एनएसजी और म.प्र. पुलिस का यह साझा प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 अप्रैल से 4 मई 2026 तक करीब एक माह चलेगा। इस दौरान काउंटर अटैक सहित करीब 8 प्रमुख विषयों पर जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दौरान पुलिस जवान काउंटर/टेररिस्ट अटैक से निपटने की ट्रेनिंग लेंगे और अपने कला, कौशल और टेक्निक को बेहतर से बेहतर बनाएंगे। हम नई चुनौतियों को लेकर तैयार हो रहे हैं। हमारी एटीएस और एसटीएफ पूरी क्षमता से काम कर रही … Read more

नया फोर लेन बायपास दो राज्यों के बीच सांस्कृतिक कड़ी बनेगा: मुख्यमंत्री डॉ यादव

दो राज्यों को सांस्कृतिक डोर से जोड़ेगा नया फोर लेन बायपास : मुख्यमंत्री डॉ यादव मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी एवं केन्द्रीय मंत्री गडकरी का जताया आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को दिन-प्रतिदिन नई-नई सौगात देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा रविवार को मध्यप्रदेश (ज़िला निवाड़ी) और उत्तर प्रदेश (ज़िला झाँसी) राज्यों में, झांसी के लिए 15.5 किमी लंबाई के 4-लेन वाले दक्षिणी बाईपास के निर्माण और बंगाय खास से ओरछा तिगेला तक राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और राष्ट्रीय राजमार्ग-39 को जोड़ने वाली लिंक रोड के लिए 631.73 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। यह बायपास और लिंक रोड दो बड़े प्रदेशों के नागरिकों को एक सांस्कृतिक डोर से हमेशा के लिए जोड़ देगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर), राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर), राष्ट्रीय राजमार्ग-39, राष्ट्रीय राजमार्ग-539, राष्ट्रीय राजमार्ग-552 इन पाँच राजमार्गों के जंक्शन पर स्थित है, जिसके कारण शहर के भीड़भाड़ वाले मुख्य इलाके से होकर गुज़रने वाले ट्रैफिक में भारी बढ़ोतरी होती है। झांसी में एक नया औद्योगिक शहर (BIDA) भी बसाया जा रहा है, जहां भारी माल ढुलाई की ज़रूरत होगी। उन्होंने कहा कि दक्षिणी बाईपास झांसी के आस-पास से गुज़रने वाले शहरों के बीच के ट्रैफिक के लिए एक निर्बाध रास्ता बनाएगा, जिससे शहर के अंदर यात्रा का समय कम होगा और शहर में ट्रैफिक का दबाव घटेगा। इससे प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के बीच, झांसी से होकर गुज़रने वाले पाँच राष्ट्रीय राजमार्गों के रास्ते माल की आवाजाही में लगने वाला समय भी कम होगा। यह बाईपास ओरछा तिगेला पर खत्म होता है, जो UNESCO की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल है और जहाँ जहाँगीर महल, राम राजा मंदिर और बेतवा वन्यजीव अभयारण्य स्थित हैं। हाईवे तक बेहतर पहुंच से इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास को भी गति मिलेगी।  

पहले छोटे किसानों का खरीदा जाएगा गेहूं, फिर मध्यम एवं बड़े किसानों से होगी खरीदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले छोटे किसानों का खरीदा जाएगा गेहूं, फिर मध्यम एवं बड़े किसानों से होगी खरीदी प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं केन्द्र एवं जूट कमिश्नर के साथ ही बारदाना प्रदाय एजेंसियों से लगातार सम्पर्क में है राज्य सरकार उपार्जन व्यवस्था की निगरानी के लिए बनाएं राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार हर घड़ी किसानों के साथ है। प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जायेगा। उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाएं कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन कार्य के संबंध में सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह के सदस्य एवं कृषक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार से बारदाने की समस्या नहीं आने दी जाएगी। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है। उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। मुख्यमंत्री ने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले गहन निरीक्षण करा लिया जाए, जिससे किसानों में किसी भी तरह का संशय न रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार किया जाये। सभी मंडियों को वैश्विक जरुरतों के मुताबिक अपग्रेड कर इन्हें वर्ल्ड क्लास मंडी की तरह तैयार किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी केन्द्र में किसानों/ट्रेक्टर-ट्राली की लंबी-लंबी कतारें न लगें, सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। 10 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगी गेहूं खरीदी अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है। उन्होंने बतायाकि जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए आगामी मंगलवार, 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। शुक्रवार, 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। उन्होंने बताया कि इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होना अनुमानित है। इसके लिए 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी आरंभ करने के लिए आवश्यक बारदान का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केन्द्र सरकार की ओर से लिमिट भी तय कर दी गई है। राज्य सरकार को केन्द्र से हर जरूरी सहयोग भी मिल रहा है। जूट कमिश्नर कार्यालय सहित अन्य बारदाना प्रदायकर्ताओं से भी बारदान सामग्री प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति के निर्देश पर अतिरिक्त बारदान खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, प्रदेशाध्यक्ष एवं वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल सहित कृषक प्रतिनिधि और खाद्य, सहकारिता एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।