samacharsecretary.com

सीएम मोहन यादव ने काशी की कचौड़ी-पूरी का लिया लुत्फ, उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीता

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने वाराणसी दौरे के दौरान एक अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने यहां के मशहूर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया, जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। एयरपोर्ट जाते समय सीएम का काफिला अचानक मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर रुक गया। यहां उन्होंने बनारस की प्रसिद्ध कचौड़ी, पूरी-राम भाजी और जलेबी का आनंद लिया। बता दें मुख्यमंत्री  मोहन यादव का काफिला जब वाराणसी में एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर अचानक रुक गए। यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचौड़ी, पूरी-राम भाजी और जलेबी का स्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के हर प्रांत और शहर की अपनी विशिष्ट खान-पान संस्कृति होती है, जो वहां की पहचान को दर्शाती है। स्थानीय स्वाद और पारंपरिक व्यंजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।   लोगों के बीच सहज सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री के इस सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की। कई लोगों ने उनसे संवाद भी किया। लोगों का कहना था कि डॉ. मोहन यादव से मिलकर ये लगा ही नहीं कि वे किसी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।  मेरा सौभाग्य है कि बाबा ने 7 दिन में 2 बार बुलाया सीएम मोहन यादव ने कहा- बाबा विश्वनाथ की कृपा से उन्हें 7 दिन में 2 बार काशी आने का अवसर मिला। यह मेरा सौभाग्य है। शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा है। सीएम ने काशी में आयोजित विक्रमादित्य पर आधारित महानाट्य की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति बेहद अद्भुत है और जो भी काशी आए, वह इसे जरूर देखे। 3 अप्रैल को विक्रमोत्सव 2026 के महानाट्य मंचन का शुभारंभ किया 3 अप्रैल को सीएम योगी और मध्य प्रदेश सीएम मोहन यादव ने विक्रमोत्सव 2026 के महानाट्य मंचन का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने योगी को वैदिक घड़ी भी भेंट की। मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहा- मुख्यमंत्री योगीजी ने जो कहा, वह काफी महत्वपूर्ण है। 3 भाइयों की जोड़ी जगत में विख्यात है। भाइयों के बीच कैसा संबंध होना चाहिए, इसका उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की जोड़ी से मिलता है। उसी प्रकार भर्तृहरि और महाराज विक्रमादित्य की जोड़ी भी उतनी ही प्रसिद्ध है। विक्रमादित्य की परंपरा में महाराज भर्तृहरि नाथ संप्रदाय में प्रतिष्ठित हुए। उनकी दीक्षा की भूमि उज्जैन थी। उनकी साधना की भूमि काशी के निकट चुनार का किला था। कहा जाता है कि चुनार किले का निर्माण भी महाराज भर्तृहरि के नाम से जुड़ा है। जब इस नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति का प्रस्ताव मध्यप्रदेश सरकार के समक्ष आया, तो मेरा पहला सुझाव था कि इसका आयोजन काशी में किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा – ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य सुशासन का अहम संदेश देता है

सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी राज्यों में परस्पर सहयोग को बढ़ाने का कर रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य सुशासन से गढ़ा जा रहा है नया इतिहास सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य प्रतिभाओं का मंच, युवा पीढ़ी को सार्थक संदेश बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल की धरा को जोड़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी वाराणसी में मध्यप्रदेश सरकार का तीन दिवसीय अनूठा आयोजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है। विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया। भेंट की गई वैदिक घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है। समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग … Read more

उत्तर प्रदेश बनेगा विश्व की आध्यात्मिक राजधानी, पर्यटन विभाग ने पेश किया यूपी@2047 का रोडमैप

विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा उत्तर प्रदेश, पर्यटन विभाग ने पेश किया विकसित यूपी@2047 का रोडमैप पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन पर्यटन में वृद्धि के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” के विजन के तहत वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग ने अपना रोडमैप जारी किया है। जिसके तहत विभाग ने वर्ष 2047 तक राज्य को विश्व की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में देश के पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान वर्तमान के लगभग 9.2 प्रतिशत में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी करते हुए वर्ष 2029-30 तक 11 प्रतिशत, वर्ष 2035-36 तक 14 प्रतिशत और वर्ष 2046-47 तक 16 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटकों के लिए कमरों की उपलब्धता को 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित उत्तर प्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग सबसे जरूरी कार्य राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों को और गति प्रदान करेगा। हालांकि इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में प्रदेश के पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का वृहद पैमाने पर सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार किया गया है। साथ ही यूपी पर्यटन नीति-2022 के तहत राज्य में पर्यटन आधारित अवसंरचना होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे का भी तेज गति से विकास किया गया है। इसी क्रम में राज्य के पर्यटकों के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या को वर्तमान में प्रति लाख जनसंख्या पर 30 से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राज्य में विदेशी पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि को वर्तमान की 3 रात्रि से बढ़ाकर वर्ष 2046-47 तक 6 रात्रि तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी करने के किए जाएंगे सभी संभव प्रयास पर्यटकों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि घरेलू पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर चुका है, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी राज्य का चौथा स्थान है, जिसमें बढ़ोतरी करने के सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के मानक के अनुसार राज्य में आने वाला 1 पर्यटक 6 लोगों के लिए आय का सृजन करता है। इस दिशा में वर्ष 2025 में महाकुंभ के भव्य आयोजन में आए रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों के अतिरिक्त राज्य के अन्य पर्यटन स्थलों में 64.9 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटन विभाग पर्यटकों की इस संख्या को वर्ष 2029-30 तक बढ़ाकर 75 करोड़ और वर्ष 2047 तक 100 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासतों की संख्या 20 तक पहुंचाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भौतिक एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिसके तहत वर्तमान में प्रदेश के पास  यूनेस्को से मान्यता प्राप्त 07 विरासतें हैं, जिनकी संख्या वर्ष 2029-30 तक 08,  2035-36 तक 14 और वर्ष 2047 तक 20 पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन राज्य में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सनातन संस्कृति और भारत की प्राचीन सभ्यता के केंद्र काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन के विकास से उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यटन गतिविधियों का विकास हो रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी भी सुनिश्चित हो रही है।

सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन के बीच हुई चर्चा, एमपी में होगा बड़ा प्रशासनिक बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होनेवाला है। कई जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक यानि एसपी बदले जाएंगे। इसकी कवायद तेज हो चुकी है। राज्य के आइएएस-आइपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल के लिए वरिष्ठ स्तर पर बातचीत चल रही है। राज्य के सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा के बाद प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल कर आइएएस-आइपीएस अधिकारियों को नए दायित्व देने की अंदरखाने तैयारी की जा रही है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म हो चुका है और 2026-27 की शुरुआत हो गई है। प्रदेशभर के कलेक्टर-संभागायुक्तों को राजस्व संग्रहण के जो लक्ष्य मिले थे, उसके परिणाम भी सामने आ चुके हैं। एसआइआर की बंदिश तो काफी पहले ही खत्म हो चुकी हैं। प्रशासनिक दक्षता के साथ ही अधिकारियों के काम करने के तरीके व आम जनों से उनके व्यवहार को परखा जा रहा है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी है। सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन ने अच्छे व बुरे बर्ताव के कारण निशाने पर आए कई आइएएस के संबंध में बातचीत की है। निगेटिव रिपोर्ट वाले अधिकारियों को मौजूदा ओहदे से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी देने पर चार दौर की चर्चा पूरी की जा चुकी है।  पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी पुलिस महकमे में भी खासा बदलाव किया जाना है। कई जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं। पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी है। 15 जिलों के एसपी बदल सकते हैं, खंडवा, भिंड, धार, रीवा झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में चर्चा है कि 15 से ज्यादा जिलों के एसपी को इधर से उधर किया जाएगा। इसके अलावा खंडवा, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में तैनात है। ऐसे में इन्हें नई जिम्मेदारी मिलना तय है। साथ ही परफॉर्मेंस पर एसपी को बड़े जिलों की कमान मिल सकती है।

डॉ. मोहन यादव ने बच्चों पर की पुष्प वर्षा, हजारों बच्चों का हुआ प्रदेश के स्कूलों में प्रवेश

भोपाल मध्यप्रदेश के बच्चों के लिए 1 अप्रैल का दिन बेहद खास रहा। एक तरफ उन्हें नि:शुल्क साइकिल मिली, तो दूसरी ओर वे स्कूल जाने के लिए भी प्रेरित हुए। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 'स्कूल चलें हम' राज्य स्तरीय प्रवशोत्सव कार्यक्रम-2026 का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों को निःशुल्क साइकिल का वितरण भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत में सीएम डॉ. यादव ने बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस दौरान बच्चों ने उनके साथ सेल्फी भी ली।   गौरतलब है कि सीएम डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उसके बाद उन्होंने बच्चों पर पुष्प वर्षा की। उन्होंने दोबारा स्कूल जाने का निर्णय लेने वाले बच्चों को किताबें भेंट कीं और उनके माता-पिता का अभिनंदन किया। इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि आज का दिन अद्भुत है। एक साथ हजारों बच्चे स्कूल में प्रवेश कर रहे हैं। जिनका स्कूल दूर है उन्हें साइकिल मिल रही है। आज समय बदल रहा है। कांग्रेस के शासनकाल में संभव नहीं था कि साइकिल मिल जाए। आप भाग्यशाली हैं कि आपको किताबें मिल रही हैं, साइकिल मिल रही है, यूनिफॉर्म के लिए राशि मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समय बदल रहा है, देश बदल रहा है। हमारी सरकार भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है।   नामांकन में बढ़ोत्तरी पर गर्व-मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार और शिक्षा विभाग ने माता-पिता का दिल जीता है। आज ड्रॉप आउट जीरो हो गया है। यह बहुत बड़ी बात है। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि नामांकन में 19.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। यह छोटी बात नहीं। उन्होंने कहा कि शासकीय विद्यालयों में बच्चों की प्रगति 32.4 फीसदी से हुई है। सरकारी स्कूलों पर भरोसा बढ़ रहा है। सांदीपनि स्कूलों और पीएम श्री स्कूलों में बच्चों के लिए सारी सुविधाएं मौजूद हैं। बच्चे सांदीपनि स्कूलों में पढ़ने के लिए प्राइवेट स्कूल तक छोड़ रहे हैं। इन स्कूलों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सारी सुविधाएं हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत किताबों को स्थानीय भाषाओं में आदिवासी क्षेत्रों में वितरित की जा रही हैं। हर बच्चा स्कूल जाने के लिए उत्साहित-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज हर बच्चा स्कूल जाने के लिए उत्साहित है। अनुसूचित जनजाति के लिए 95 हजार क्षमता वाले 1 हजार 913 छात्रावासों का संचालन हो रहा है। अनुसूचित कार्य विभाग के 25 हजार से ज्यादा विद्यालयों में 20 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। हमारी सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। आज हमने 1-6-9वीं क्लास में एडमिशन की प्रक्रिया आसान की है। हमारी सरकार ने करीब एक लाख प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप दिए। हमने इसके लिए बजट में इस बार ढाई सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जो बच्चे स्कूलों में टॉप कर रहे हैं, उन्हें स्कूली दी जा रही है। 55 लाख विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म दिया जा चुका है। 76 हजार से ज्यादा शिक्षकों को नियुक्ति दी है। मेरी शुभकामना है कि हमारे बच्चे हर क्षेत्र में जाएं और नाम रोशन करें।  आज हमारे लिए उत्सव का दिन-स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा आज का दिन स्कूली शिक्षा विभाग के लिए दीपावली का दिन है। आज प्रदेश के बच्चे स्कूलों में प्रवेश कर रहे हैं। हमारा इनरॉलमेंट बढ़ रहा है। मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि आज हमने एक करोड़ बच्चों को इनरॉल किया है। हमारा पूरा विभाग ड्रॉप आउट को रोकने का प्रयास कर रहा है। हमारी सरकार बच्चों की बेहतरी के लिए काम कर रही है। हम किताबों को निशुल्क देने में सफल हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि विकासखंड स्तर पर बुक फेयर लगाए जाएं, जहां शासकीय के साथ निजी स्कूलों के बच्चों को भी पाठ्यपुस्तक निगम की सस्ती किताबों का लाभ मिल सके। मैं बच्चों को स्कूल प्रवेशोत्सव की शुभकामनाएं देता हूं। हम बच्चों का भविष्य सुनहरा बनाने के लिए संकल्पित हैं। जनजातीय कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। शासकीय स्कूलों में बच्चों को मध्यान भोजन, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें, साइकिलें, स्कूटी, लैपटॉप तक वितरित किए जा रहे हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा का 24 घंटे में हुआ प्रभावी पालन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की एक दिन पूर्व की गई घोषणा का 24 घंटे में हुआ पालन 375 करोड़ रुपए की राशि 600 से अधिक एमएसएमई इकाइयों के खातों की अंतरित सोमवार को मुख्यमंत्री ने 250 इकाइयों को किए थे 169.50 करोड़ अंतरित एमएसएमई मंत्री काश्यप ने मुख्यमंत्री की सहृदयता के लिए किया आभार व्यक्त भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एक दिन पूर्व की गई घोषणा का 24 घंटे में पालन हुआ है। वित्त विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई 375 करोड़ रुपए की राशि आज ही एमएसएमई विभाग ने 600 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों के खातों में प्रोत्साहन तथा अनुदान राशि अंतरित भी कर दी है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को मुख्यमंत्री आवास में संपन्न हुए कार्यक्रम में 250 इकाइयों को 169 करोड़ 57 लाख की राशि अंतरित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ यादव ने शेष इकाइयों से वायदा किया था कि उन्हें भी जल्दी ही मदद की जाएगी।एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप ने विभाग और उद्यमियों की ओर से मुख्यमंत्री की सहृदयता के लिए आभार व्यक्त किया है। उल्लेखनीय है कि सर्वाधिक रोजगार सृजन के सशक्त माध्यम एमएसएमई के लिए मुख्यमंत्री डॉ यादव द्वारा प्रदेश में निवेश एवं उद्यम का जाल बिछाने की संभावनाओं में वृद्धि करने के उद्देश्य से एमएसएमई विकास नीति 2025 लागू की है। नीति में निवेशकों को विभिन्न सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने तय किया है कि निवेशकों को स्वीकृत सुविधाओं का समयावधि में वितरण हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। उद्योग आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ यादव के निर्देश एवं विशेष प्रयासों से वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन इकाइयों की लंबित देयताओं के भुगतान के लिए वित्त विभाग द्वारा समुचित बजट आवंटन विभाग को उपलब्ध कराया गया । एमएसएमई इकाइयों को स्वीकृत सुविधाओं के वितरण की निरंतरता में 31 मार्च मंगलवार को 600 से अधिक इकाइयों को राशि रु. 375 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गयी। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन इतनी बड़ी मात्रा में अनुदान राशि वितरण होने पर निवेशकों में उत्साह एवं प्रदेश की नीतियों के प्रति विश्वास और प्रबल हुआ है। एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने एमएसएमई इकाइयों को उनकी स्वीकृत सुविधाओं के समयावधि में वितरण के लिए मुख्यमंत्री का का आभार व्यक्त किया है। एमएसएमई जगत के उद्यमियों एवं संघो द्वारा भी उक्त पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया गया है। उन्होंने कहा है कि शासन की इस पहल से न केवल स्थापित एमएसएमई इकाई निरंतर प्रगति कर रही हैं अपितु देश एवं विदेश के निवेशक भी प्रदेश में नए निवेश के लिए आकर्षित हो रहे हैं।  

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत:CM यादव

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा विश्वनाथ से की प्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना क्रॉउड मैनेजमेंट, दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का किया अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का किया भ्रमण भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें "विरासत के साथ विकास" के मंत्र को आत्मसात करते हुए सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रही हैं। यह न केवल दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि जन-कल्याण के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के भ्रमण के दौरान कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने वाराणसी भ्रमण की शुरूआत देवादिदेव महादेव काशी विश्वनाथ जी के दर्शन और पूजन के साथ किया। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पावन गंगा घाट पहुँचकर पतित पावनी माँ गंगा के दर्शन किए। उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ माँ गंगा का पूजन किया और गंगाजल से आचमन किया। दर्शन और पूजन के बाद उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत है। काशी-महाकाल के बीच व्यवस्थाओं का साझा संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को वाराणसी भ्रमण के दौरान विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के धामों के बीच व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शनार्थियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। सिंहस्थ-2028 के लिए प्रबंधन का रोडमैप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी के अनुभवों को मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रेजेंटेशन से कॉरिडोर में तीर्थयात्री प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल (भीड़ प्रबंधन), दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के प्रबंधन से सीख लेकर हम उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन की उच्चतम और सुगम व्यवस्था देना हमारा लक्ष्य है। प्रेजेंटेशन से तीर्थ स्थल प्रबंधन की एसओपी (SOP) को समझा। इसमें रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वच्छता प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा 'ग्लोबल सनातन' पुस्तक भी भेंट की गई। वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का भव्य मंचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा है। दोनों राज्यों के किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भ्रमण और बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान के साथ अपर मुख्य सचिव राघवेंद्र सिंह, सचिव पर्यटन डॉ. इलैया राजा टी, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, वाराणसी कलेक्टर सत्येंद्र सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ विश्व भूषण मिश्र सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026: योगी मॉडल से ओडीओपी को मिलेगा सशक्त राष्ट्रीय मंच

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026: योगी मॉडल से सशक्त ओडीओपी को मिलेगा राष्ट्रीय मंच वाराणसी में 31 मार्च को होगा सम्मेलन, व्यापार, पर्यटन और एमएसएमई में सहयोग पर फोकस दोनों राज्यों के बीच बढ़ेगा समन्वय, ओडीओपी और जीआई शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल लखनऊ  मध्यप्रदेश शासन द्वारा 31 मार्च को वाराणसी स्थित रामाडा होटल में “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के मध्य व्यापार, शिल्प, ओडीओपी उत्पाद, पर्यटन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री राकेश सचान को सम्मेलन में गरिमामय उपस्थिति हेतु आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन का मुख्य सत्र दोपहर 12:30 बजे से 2:00 बजे के मध्य आयोजित होगा। विशेष रूप से, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों और शिल्प को नई पहचान दी है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए इस सम्मेलन में दोनों राज्यों के ओडीओपी उत्पादों एवं जीआई टैग शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने, पर्यटन के क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाने तथा एमएसएमई सेक्टर में साझा संभावनाओं को विकसित करने पर विशेष बल दिया जाएगा। यह आयोजन न केवल व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ‘योगी मॉडल’ के तहत विकसित उद्यमिता, स्थानीय उत्पादों के सशक्तीकरण और वैश्विक बाजार से जुड़ाव की दिशा में भी एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा। सम्मेलन के माध्यम से दोनों राज्यों के बीच आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने की अपेक्षा है।

राज्यों में सहयोग और सौहार्द का समय है, सीएम मोहन यादव का बयान, काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद लिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। यहां बाबा के दर्शन-पूजन किए। इसके बाद अधिकारियों के साथ चर्चा हुई। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने मंदिर की SOP को समझा। मंदिर के सीईओ ने बताया- हमारे यहां 115 विग्रह है, जिसमें 14 प्रधान महादेव हैं। हमने उनके रुद्राभिषेक और उसके महत्व के बारे में डिजिटल और बुकलेट के माध्यम से समझाने का प्रयास किया है। लोग यहां पर रुद्राभिषेक करते हैं। इससे भीड़ अलग-अलग जगह पर डाइवर्ट हो जाती है। दरअसल, 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ मेला का आयोजन होना है। प्रत्येक 12 साल में शिप्रा नदी के तट पर होने वाले इस आयोजन को लेकर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु जुड़ते हैं। इन्हीं सब तैयारियों को लेकर सीएम यादव काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और मंदिर के एसओपी के बारे में उन्होंने अधिकारियों से जानकारी ली, ताकि इन महत्वपूर्ण जानकारी से सिंहस्थ कुंभ को सफल बनाया जा सके। मोहन यादव ने कहा- प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में आने का मौका मिला है। बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेकर यहां पर दो राज्यों के बीच होने वाले सहयोग सम्मेलन में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा होगी। मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, अधोसंरचना और प्रोत्साहन तंत्र को प्रस्तुत किया जाएगा। एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, राकेश सचान उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री, गिरीश यादव उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या भी मौजूद रहीं।

सीएम ने किया ऐलान: एमपी का ‘एक जिला-एक उत्पाद’ मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर बनेगा उदाहरण, वाराणसी में करेंगे साझा

भोपाल  मुख्यमंत्री  मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) को एक मजबूत आर्थिक मॉडल के रूप में विकसित किया गया है। यह पहल स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के साथ उन्हें बाजार, निर्यात और रोजगार से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इस सशक्त मॉडल को 31 मार्च को वाराणसी में आयोजित सहयोग सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उत्तर प्रदेश के नवाचारों से भी अनुभव साझा किए जाएंगे।  हर जिले की पहचान को मिला आर्थिक विस्तार ओडीओपी के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट और धार का बाघ प्रिंट जैसे उत्पाद अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहे हैं। यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आय के अवसर मिल रहे हैं। ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल ओडीओपी के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्टता को चिन्हित कर उसे उत्पादन, प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता से जोड़ा गया है। मध्यप्रदेश में यह पहल केवल पारंपरिक उत्पादों के संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक समग्र वैल्यू चेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे कारीगरों, किसानों और सूक्ष्म उद्यमियों को स्थायी आर्थिक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। सहयोग सम्मेलन में ओडीओपी से स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का मॉडल साझा किया जायेगा। प्रदेश के हर जिले की विशिष्टता को मिला आर्थिक विस्तार श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, रतलाम का नमकीन, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, सीहोर का बासमती, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, मंडला-डिंडोरी का कोदो-कुटकी, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी जैसे विविध उत्पादों को ODOP के अंतर्गत संगठित कर बाजार से जोड़ा गया है। यह व्यापकता यह दर्शाती है कि प्रदेश के हर हिस्से की आर्थिक क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के ओडीओपी को सिल्वर अवॉर्ड से राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता मध्य प्रदेश के इन समग्र प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मध्यप्रेश के ओडीओपी मॉडल को अवॉर्ड-2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रदेश के कारीगरों, किसानों और उद्यमियों की दक्षता और सरकार द्वारा विकसित सुदृढ़ इकोसिस्टम का परिणाम है। निर्यात, कौशल और बाजार को जोड़ता एकीकृत इकोसिस्टम प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ते हुए कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। ब्रांडिंग, पैकेजिंग, जीआई टैगिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। एमपी यूपी सम्मेलन से उभरेंगे नए अवसर और समन्वय एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं की सहभागिता के साथ ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की दिशा पर केंद्रित रहेगा। इस मंच के माध्यम से मध्यप्रदेश अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह प्रदर्शित करेगा कि ओडीओपी को किस प्रकार व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और निर्यात-आधारित मॉडल के रूप में लागू किया जा सकता है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टि को मिलेगा ठोस विस्तार मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश सम्मेलन से ओडीपी उत्पादों के लिए नए बाजार अवसर विकसित होंगे, निर्यात को गति मिलेगी और कारीगरों तथा उद्यमियों को व्यापक प्लेटफॉर्म प्राप्त होगा। दोनों  राज्यों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान सुदृढ़ होगा, जिससे ओडीओपी को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त आर्थिक मॉडल के रूप में और मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ के अंतर्गत प्रदेश के 50 से अधिक जिलों की विशिष्ट उत्पादकता को चिन्हित कर उसे एक सशक्त आर्थिक ढांचे से जोड़ा गया है। श्योपुर का अमरूद, मुरैना-भिंड की सरसों, ग्वालियर का सैंडस्टोन टाइल्स, अशोकनगर की चंदेरी हैंडलूम, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, धार का बाघ प्रिंट, रतलाम का नमकीन, झाबुआ का कड़कनाथ, बुरहानपुर की जरी-जरदोजी, बड़वानी का केला, खरगोन की मिर्च, इंदौर का आलू, सागर के कृषि उपकरण, मंदसौर का लहसुन, नीमच का धनिया, आगर मालवा-राजगढ़-छिंदवाड़ा का संतरा, टीकमगढ़-निवाड़ी का अदरक, देवास-हरदा का बांस, बैतूल का सागौन, बालाघाट का चिन्नौर चावल, नरसिंहपुर की तुअर दाल, सिवनी का सीताफल, सीधी का कालीन, सतना का टमाटर, शहडोल की हल्दी तथा मंडला, डिंडोरी, सिंगरौली और अनूपपुर का कोदो-कुटकी जैसे विविध उत्पादों को वैल्यू चेन आधारित दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जा रहा है। उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता तक एकीकृत समर्थन के माध्यम से यह पहल स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को स्थायी आय, बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर प्रदान कर रही है, जिससे प्रदेश में संतुलित और समावेशी आर्थिक विकास को नई गति मिल रही है। राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान मध्यप्रदेश के इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। ओडीओपी मॉडल को वर्ष 2024 में सिल्वर अवॉर्ड प्राप्त हुआ, जो प्रदेश के मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम और स्थानीय उत्पादकों की क्षमता को दर्शाता है। निर्यात और बाजार से जुड़ रहा मॉडल प्रदेश में ओडीओपी को निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ा जा रहा है। कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ब्रांडिंग, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स के जरिए इनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा रही है।  एमपी-यूपी सम्मेलन से बढ़ेगा सहयोग वाराणसी में होने वाले एमपी-यूपी सम्मेलन में दोनों राज्यों के मंत्री, अधिकारी और नीति-निर्माता शामिल होंगे। इस दौरान ओडीओपी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा होगी। यह सम्मेलन ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टिकोण को मजबूत करेगा और कारीगरों व उद्यमियों के लिए नए बाजार अवसर खोलेगा। साथ ही दोनों राज्यों के बीच सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से इस मॉडल को और सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।