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ठंड में राहत की पहल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क के रैन बसेरे का लिया जायजा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क स्थित रैन बसेरे का निरीक्षण जरूरतमंदों और महिलाओं को पिलाई गर्मागर्म चाय, ठंड से बचने के लिए दिये कंबल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की रात भोपाल के तलैया स्थित यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क रैन बसेरे का आकस्मिक निरीक्षण किया। उन्होंने रैन बसेरे में गरीबों, जरूरतमंद, बेसहारा और यहां रात्रि विश्राम करने आए राहगीरों से आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सबके हालचाल और दु:ख-दर्द जाने एवं सभी को अपने हाथों से गर्मागर्म चाय पिलाकर सर्दी से बचाव के लिए गर्म कंबल भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रैन बसेरा जाते समय सबसे पहले पुलिस मुख्यालय के सामने लाल परेड ग्राउंड के गेट नम्बर 4 शौर्य द्वार में उपस्थित महिलाओं और बुर्जुगों से बात की, उनकी कुशलक्षेम जानी और सभी को कंबल वितरित किए। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव तलैया स्थित काली मंदिर पहुंचे और वहां बड़ी संख्या में उपस्थित सभी गरीबों और जरूरतमंदों को भी कंबल वितरित किए। मुख्यमंत्री द्वारा पूछने पर एक जरूरतमंद ने बताया कि वह सब्जी बेचने भोपाल आए थे, सर्दी भी तेज है और रात भी हो गई है, तो अब वे इसी मंदिर परिसर में रात बिताएंगे। कुछ ने बताया कि वे किसी जरूरी काम से आए थे, सिर्फ रात बिताने के लिए उन्होंने काली मंदिर परिसर में शरण ली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यादगार-ए-शाहजहांनी पार्क स्थित रैन बसेरा पहुंचे। उन्होंने रैन बसेरे में मौजूद सभी विश्रामकर्ताओं से आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा यहां कोई परेशानी तो नहीं है।विश्रामकर्ताओं ने कहा कि उन्हें यहां कोई भी परेशानी नहीं है। खाने और सोने की पूरी व्यवस्था है, ठंड से बचने के लिए यहां हीटर भी है। मुख्यमंत्री ने सभी से उनके यहां आकर रूकने की वजह पूछी। बताया गया कि ज्यादातर राहगीर आगे के सफर के लिए यहां रात बिताने रूके हैं। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव रैन बसेरे में विश्राम के लिए आए सुबोध जोसेफ के पास पहुंचे। उससे बात की, तो सुबोध ने बताया कि उसकी कमर में भारी दर्द है। इलाज की जरूरत है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर और निगमायुक्त भोपाल को सुबोध का समुचित इलाज कराने और उसकी हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने रैन बसेरे में उपस्थित सभी राहगीरों को अपने हाथों से गर्मागर्म चाय पिलाई और सभी को कंबल भी प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने शहर के सभी रैन बसेरों और आश्रय गृहों में बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं करने के निर्देश कलेक्टर और निगमायुक्त को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्रामकर्ताओं से कहा कि सरकार गरीबों, जरूरतमंदों और महिलाओं के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। किसी भी गरीब को सरकार की योजनाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। तेज सर्दी के इस मौसम में कंबल वितरण से जरूरतमंदों को बड़ी राहत मिली। मुख्यमंत्री ने स्वयं राहगीरों से संवाद किया और उनकी समस्याओं की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के वंचित वर्गों के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है। सरकार किसी भी व्यक्ति को बेसहारा नहीं रहने देगी। गरीब कल्याण मिशन के तहत समाज के कमजोर तबकों को समर्थ बनाने के लिए हम हर कदम उठा रहे हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है। ठंड के मौसम में किसी को भी परेशानी का सामना न करना पड़े, यही हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सभी जरुरतमंदों को कंबल एवं गर्म कपड़े देकर सर्दी से जितना अधिक हो सके, बचने की अपील की। गरीबों, जरूरतमंदों, बेसहारा और राहगीरों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस आत्मीयता और संवेदनशीलता की सराहना करते हुए उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त कर आशीष भी दिया। इस दौरान भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति, कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, नगर निगम कमिश्नर श्रीमती संस्कृति जैन, क्षेत्रीय पार्षद सहित जनप्रतिनिधि एवं जिलाधिकारी भी उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का दावा: खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों से मध्यप्रदेश बना देश में अग्रणी

खनन क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों से मध्यप्रदेश बना देश में अग्रणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार ने खनन एवं खनिज क्षेत्र में जो व्यापक और दूरदर्शी सुधार किये हैं, उनका लाभ लेकर मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खान एवं खनिज विकास (एमएमडीआर) संशोधन अधिनियम, 2025 और इससे जुड़े नियमों में किए गए बदलावों से खनिज अन्वेषण, नीलामी, निवेश और स्थानीय विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने कहा कि वर्ष-2025 में मध्यप्रदेश 32 खनिज ब्लॉकों की नीलामी करा कर देश में अव्वल रहा है। केन्द्र सरकार के संशोधित कानून के तहत राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास का विस्तार कर राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण एवं विकास न्यास (एनएमईडीटी) बनाया गया है। इससे खनिज अन्वेषण एवं विकास के लिए संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे और मध्यप्रदेश जैसे खनिज-समृद्ध राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार आधारित खनन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में किए गए ये सुधार मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर, औद्योगिक रूप से सशक्त और विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होंगे और विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में प्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खनिज नीलामी में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी खनिज नीलामी में वर्ष 2025 में देशभर में नीलाम किए गए 141 खनिज ब्लॉकों में से 32खनिज ब्लॉकों की नीलामी मध्यप्रदेश में हुई, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की पारदर्शी नीतियों, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। चूना पत्थर, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे प्रमुख खनिजों की नीलामी से सीमेंट, स्टील और संबद्ध उद्योगों को मजबूती मिली है। जिला खनिज फाउंडेशन से खनन प्रभावित क्षेत्रों का कायाकल्प देशभर में जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के अंतर्गत अब तक 1.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की गई है। देश में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। इस निधि से प्रदेश के खनन प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जनकल्याण कार्य किए जा रहे हैं। डीएमएफ निधि से प्रदेश के खनन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, स्कूलों और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना, पेयजल एवं स्वच्छता, सड़क एवं अन्य आधारभूत संरचना तथा आजीविका संवर्धन से जुड़े हजारों कार्य किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन से नए अवसर राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमम) के माध्यम से महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इस मिशन से मध्यप्रदेश में अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और अनुसंधान के क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। यह मिशन इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के क्षेत्रों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश, रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा खनन नियमों के सरलीकरण, खनिज एक्सचेंज की व्यवस्था और नीलामी प्रक्रिया को तेज़ किए जाने से मध्यप्रदेश में निजी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। इससे राज्य के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहे हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा ऐलान: अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से चंबल क्षेत्र में तेज़ी से होगा विकास

अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से चंबल क्षेत्र के विकास को मिलेगी गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परियोजना के संबंध में दिए दिशा-निर्देश भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि क्षेत्रीय विकास में सड़कों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना से प्रदेश के चंबल क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। इस मार्ग से मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले, राजस्थान से निकल रहे दिल्ली-वड़ोदरा एक्सप्रेस-वे और उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ हाईवे से जुड़ेंगे। इससे क्षेत्र की कोटा, मुंबई, कानपुर, लखनऊ, आगरा और दिल्ली से कनेक्टिविटी बढ़ेगी तथा यात्रा का समय कम होगा। परिणामस्वरूप क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार-व्यवसाय, पर्यटन और आवागमन को प्रोत्साहन मिलेगा। किसानों और क्षेत्रीय निवासियों की सहमति और संतुष्टि अनुसार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कर परियोजना को जल्द से जल्द पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश अटल प्रोग्रेस-वे परियोजना की मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पेंच राष्ट्रीय उद्यान-कान्हा टाइगर रिजर्व-बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पन्ना राष्ट्रीय उद्यान को जोड़ने वाले मार्ग को टाइगर टूरिज्म कॉरीडोर के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 625 कि.मी. लंबे इस मार्ग से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशानुसार वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी। बैठक में अटल एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित दो प्लान का तुलनात्मक प्रस्तुतिकरण किया गया। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल और प्रमुख सचिव लोक निर्माण सुखबीर सिंह उपस्थित थे।  

ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक इंटेलिजेंस से डिजिटल गवर्नेंस होगा पारदर्शी, सक्षम और फ्यूचर-रेडी

ड्रोन एवं जियोस्पेशियल इकोसिस्टम में मध्यप्रदेश बना अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ड्रोन-आधारित भू-स्थानिक इंटेलिजेंस से डिजिटल गवर्नेंस होगा पारदर्शी, सक्षम और फ्यूचर-रेडी प्रदेश में हुआ देश की राज्य स्तरीय ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी का शुभारंभ भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में देश की पहली राज्य-स्तरीय ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी (डीडीआर) शुरू की गई है। इससे मध्यप्रदेश भारत के ड्रोन एवं भू-स्थानिक इकोसिस्टम में अग्रणी राज्य बन गया है। यह पहल प्रदेश में गवर्नेंस को पूर्णतः डिजिटल बनाने की राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह तकनीक शासन की प्रक्रियाओं को सुगम, सुदृढ़ और पारदर्शी बनाती है। विभागों के बीच ड्रोन-आधारित इंटेलिजेंस को संस्थागत रूप देकर प्रदेश एक अधिक कनेक्टेड, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार प्रशासनिक ढांचे की ओर तेजी से अग्रसर है। डीडीआर का शुभारंभ ‘एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0’ के अवसर पर किया गया था। इसे राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 तथा डीजीसीए के यूएएस नियम 2021 के अनुरूप विकसित किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) द्वारा विकसित यह रिपोज़िटरी फ्यूचर-रेडी डिजिटल गवर्नेस की एक सुदृढ़ आधारशिला सिद्ध होगी। मध्यप्रदेश में ड्रोन तकनीक का प्रभावी एवं व्यापक उपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में भूमि सर्वेक्षण, कृषि प्रबंधन, सिंचाई परियोजनाओं, खनन पट्टों की निगरानी, आधारभूत संरचना निर्माण, पर्यावरणीय मूल्यांकन, नगरीय नियोजन तथा आपदा प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ड्रोन सर्वेक्षण किए जा रहे हैं।अब तक ड्रोन सर्वेक्षणों से प्राप्त डेटा विभिन्न विभागों में अलग-अलग संकलित होता रहा, जिससे कई स्थानों पर सर्वेक्षणों की पुनरावृत्ति,अपूर्ण डेटा एकत्र होने और कई महत्वपूर्ण इमेजरी व भू-स्थानिक जानकारियों को सुरक्षित रखने की चुनौती सामने आई। ड्रोन डेटा रिपोज़िटरीः एकीकृत, सुरक्षित और पारस्परिक रूप से सक्षम भू-स्थानिक प्लेटफॉर्म डीडीआर एक केंद्रीकृत, क्लाउड-आधारित, सुरक्षित और इंटर-ऑपरेबल डिजिटल अवसंरचना है। इससे भू-स्थानिक प्रशासन के भविष्य का आधार तैयार होता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले ड्रोन डेटा संग्रहित किए जा रहे हैं। इस डेटाबेस में उच्च-रिज़ॉल्यूशन ऑर्थोमोज़ाइक, 3D टेरेन मॉडल, लिडार स्कैन, वीडियो इमेजरी, लिगेसी बेसलाइन डेटा और बहु-विभागीय सर्वेक्षण रिकॉर्ड शामिल किये जाते हैं। हर डेटा फ़ाइल को सटीक लैटिट्यूड-लाँगीट्यूड मेटाडाटा, सर्चेबल की-वर्ड, मानकीकृत तकनीकी फॉर्मेट और स्वचालित वर्गीकरण के साथ रिपोज़िटरी में संरक्षित किया जाता है। इस डेटा से सभी अधिकारी खोज, तुलना और विश्लेषण कर सकते हैं। डेटा दोहराव में कमी और दक्षता में वृद्धि प्रदेश में पहली बार सभी विभागों के ड्रोन सर्वे डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर समेकित किया है। इसके परिणामस्वरूप ड्रोन सर्वेक्षणों के दोहराव में 30-50% तक कमी आई है। डेटा पारदर्शिता में वृद्धि, विभागीय सहयोग में सुधार,फील्ड-वेरिफिकेशन में सटीकता और निर्णय लेने की गति में अत्यधिक बढ़ोतरी संभव हुई है। अब विभाग स्थान, परियोजना, मेटाडाटा, विषय या उद्देश्य के आधार पर आसानी से आवश्यक भू- स्थानिक डेटा खोज सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण डीडीआर की तकनीकी संरचना अत्याधुनिक है। इससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग, लिगेसी डेटा की तुलनात्मक समीक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित भू-स्थानिक विश्लेषण, स्वचालित कैटलॉगिंग, टाइम-लैप्स परियोजना निगरानी, भविष्य-अनुमान मॉडलिंग और मल्टी-डिपार्टमेंट डेटा इंटीग्रेशन सुगम हुआ है। परिणामस्वरूप डेटा अधिग्रहण का समय सप्ताह से घटकर दिनों में आ गया है। योजनाओं का मूल्यांकन अधिक विश्वसनीय और नीति-निर्माण अधिक तथ्य परक, त्वरित और प्रभावी हुआ है। डीडीआर से व्यापक लाभ भू-अभिलेख एवं राजस्व विभाग में भूखंड सीमांकन में उच्च सटीकता, किरायेदारी एवं कब्जा सत्यापन, अतिक्रमण की पहचान और भूमि विवादों का त्वरित निराकरण संभव हुआ है। आधारभूत संरचना एवं निर्माण परियोजनाओं-सड़कों, पुलों, नहरों, सोलर पार्कस एवं सार्वजनिक निर्माण कार्यों की टाइम-लैप्स निगरानी होने लगी है और परियोजनाओं की प्रगति का वैज्ञानिक मूल्यांकन आसान हुआ है। नगरीय प्रशासन एवं शहरी नियोजन के क्षेत्र में उच्च-रिज़ॉल्यूशन 3D मॉडल आधारित ज़ोनिंग, जल, सीवर, परिवहन और उपयोगिता सेवाओं की कुशल योजना बनाने में डीडीआर का उपयोग प्रभावी सिद्ध हुआ है। आपदा प्रबंधन जैसे बाढ़, आग, भू-स्खलन के बाद त्वरित नुकसान आकलन और लिगेसी बेसलाइन डेटा के आधार पर राहत और पुनर्वास की रणनीति बनाना आसान हुआ है। कृषि, सिंचाई, वन एवं पर्यावरण विभाग डीडीआर का उपयोग फसल स्थिति विश्लेषण, कीट-प्रभाव पहचान, माइक्रो- सिंचाई आवश्यकताओं का निर्धारण, वन संरक्षण एवं अवैध कटाई की निगरानी और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन में डीडीआर का उपयोग किया जा रहा है। डीडीआर को राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में कदम प्रदेश सरकार आगामी समय में इस ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी को एक राष्ट्रीय रूप से सुलभ भू-स्थानिक ढांचे में विकसित करेगी।इसके लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अनुसंधान संस्थानों, GIS विशेषज्ञों, स्टार्ट-अप्स और निजी उ‌द्योग सहयोगियों के साथ समन्वय बढ़ाने की योजना है। राज्य का लक्ष्य है कि डीडीआर अनावश्यक ड्रोन सर्वेक्षण को कम करे, अंतर्राज्यीय आपदा प्रबंधन सहयोग को मजबूत बनाए और उच्च-गुणवत्ता वाले भू-स्थानिक डेटा आधारित नीति-निर्माण को सक्षम करे। ड्रोन डेटा रिपोज़िटरी मध्यप्रदेश की डेटा-आधारित गवर्नेस यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम है, इसमें नवाचार, पारदर्शिता और भू-स्थानिक इंटेलिजेंस शासन का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं। एकीकृत और इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म के माध्यम से डेटा डुप्लिकेशन समाप्त होगा। इससे स्मार्ट गवर्नेंस की मजबूत नींव स्थापित होगी।  

इंदौर में हुई मौतों के मामले में CM मोहन यादव की कड़ी प्रतिक्रिया, ‘सीवर पानी वाले बैक्टीरिया’ की जांच जारी

इंदौर  देश के सबसे साफ और स्‍वच्‍छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई. शौचालय मिश्रित पानी पीने के कारण बीमार पड़े लोगों में से 200 अभी भी अस्‍पताल में भर्ती हैं, जबकि 32 आईसीयू में हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया और अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई त्रासदी के मामले में सरकार की पहली बड़ी कार्रवाई है. इस घटना में 29 दिसंबर से लोग बीमार पड़ने लगे थे. स्‍थानीय लोगों ने इसके खिलाफ स्‍थानीय प्रशासन से शिकायत भी की थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने से कई परिवार उजड़ गए. इंदौर के भगिरथपुरा क्षेत्र में पानी की सप्लाई दूषित होने के कारण डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलीं. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी से चार लोगों की मौत हुई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने का आदेश दिया. साथ ही अतिरिक्त नगर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दूसरी तरफ, इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सरकार ने हाई कोर्ट में 40 पन्नों की स्‍टेटस रिपोर्ट पेश की है. सरकार ने अदालत को बताया कि हालात अब नियंत्रण में हैं और नए मामलों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हो रही . साथ ही मिनट-टू-मिनट निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है.  जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी – CM मोहन यादव   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से पैदा हुए संकट को लेकर अधिकारियों की लापरवाही की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य सरकार दूषित पेयजल के कारण इंदौर के भागीरथपुरा में हुई घटना में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कड़े फैसले लिए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस घटना के बाद दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है. इसके साथ ही इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं. इंदौर में हुई मौतों के पीछे 'सीवर पानी वाले' बैक्टीरिया, अब तक क्या पता चला इंदौर में एक ऐसी त्रासदी सामने आई है जो दिल दहला देने वाली है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने कहर बरपाया है, जहां सीवर जैसी गंदगी वाले बैक्टीरिया पानी में घुस गए। इस पानी को पीने से कम से कम 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हजारों लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। सब कुछ शुरू हुआ 25 दिसंबर से, जब लोगों ने पानी में अजीब सी बदबू और गंदगी की शिकायत की। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जांच में पता चला कि मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था, और ऊपर बने एक शौचालय का गंदा पानी सीधे सप्लाई में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि पानी में वो बैक्टीरिया मिले जो आमतौर पर सीवर और मानव अपशिष्ट में पाए जाते हैं। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि शुरुआती टेस्ट में असामान्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, लेकिन पूरी कल्चर रिपोर्ट का इंतजार है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'पिछले कई हफ्तों से समस्या थी, लेकिन 25 दिसंबर को हालात बिगड़ गए। पानी पीते ही पेट में आग सी लगती थी।' इंदौर जल त्रासदी मौतों का बढ़ता आंकड़ा और मरीजों की तादाद आधिकारिक तौर पर मौतें 4 बताई जा रही हैं, लेकिन मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद माना कि उन्हें 10 मौतों की जानकारी है। स्थानीय लोग तो 14 तक का दावा कर रहे हैं। अब तक 2456 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त के शिकार हुए, 162 से अधिक अस्पताल में भर्ती। कई मरीज ICU में हैं, और इलाका लगभग खाली हो चुका है। परिवार वाले अपनों का इलाज कराने अस्पतालों में डेरा डाले हुए हैं। सरकार पर उठे सवाल, NHRC और हाईकोर्ट की सख्ती लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करने का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लिया और मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस थमा दिया। दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने कहा, 'निवासियों ने कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।' इंदौर बेंच ऑफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी सरकार से घटना की पूरी डिटेल्स मांगी हैं। कोर्ट ने साफ पानी की सप्लाई और मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने के आदेश दिए। सीएम की मदद और कार्रवाई मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया। लीकेज ठीक करने, पाइपलाइन साफ करने और नई लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है। दूषित पानी पीने से बीमार पड़े लोगों का क्‍या है हाल सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 294 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इनमें से 93 मरीजों का सफल इलाज कर उन्हें छुट्टी दे दी गई है. बाकी 200 मरीजों में से 32 अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी मरीजों को जरूरी इलाज दिया जा रहा है. जमीनी स्तर पर जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं. इन टीमों का उद्देश्य नए मरीजों की पहचान करना और बीमारी को फैलने से रोकना है. लोगों को ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां मुफ्त बांटी जा रही हैं ताकि लक्षण … Read more

मोहन सरकार का बड़ा फैसला, गेहूं की MSP 2600 रुपये, किसानों को सिर्फ 15 रुपये बोनस

भोपाल  मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के अनुरूप इस साल भी किसानों से 2600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोतरी के कारण राज्य सरकार पर बोनस का आर्थिक बोझ काफी कम हो गया है। इस बार किसानों को बोनस के रूप में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे। बोनस के गणित से समझिए सरकार को राहत पिछले साल गेहूं का समर्थन मूल्य 2,275 रुपये था, जिस पर राज्य सरकार ने 125 रुपये का बोनस देकर 2,400 रुपये में खरीदी की थी। बाद में इसे बढ़ाकर 2,600 रुपये करने का निर्णय लिया गया था, जिससे सरकार पर 175 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भार आया था। लेकिन इस साल केंद्र सरकार ने MSP बढ़ाकर 2,585 रुपये कर दी है। ऐसे में मुख्यमंत्री की 2,600 रुपये की घोषणा को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को अब अपनी जेब से केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलाने होंगे। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को भेज दिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है। फरवरी से पंजीयन और मार्च में खरीदी शुरू प्रदेश में गेहूं उपार्जन के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। फरवरी माह से किसानों का पंजीयन शुरू किया जाएगा और मार्च से खरीदी प्रक्रिया प्रारंभ होगी। पिछले वर्ष करीब 9 लाख किसानों से 77 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदा गया था, और इस बार भी बंपर पैदावार की उम्मीद में सरकार ने व्यवस्थाएं बनाना शुरू कर दिया है। वित्तीय संकट के बीच राज्य की एजेंसियां ही करेंगी खरीदी नागरिक आपूर्ति निगम और मार्कफेड वर्तमान में लगभग 72 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबे हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से सीधी खरीदी का प्रस्ताव दिया था ताकि ब्याज का बोझ कम हो सके, लेकिन केंद्र से अभी तक सहमति नहीं मिली है। ऐसे में पुरानी व्यवस्था के तहत ही राज्य की एजेंसियां गेहूं का उपार्जन करेंगी।  

सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश के विकास की गति अब होगी और भी तेज : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सबकी समृद्धि और खुशहाली ही है सरकार का पारितोषिक वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप मनायेंगे खाचरौद को दी सांदीपनि विद्यालय और नवीन कृषि उपज मंडी की सौगात खाचरौद में बनेगा संयुक्त तहसील कार्यालय और जनपद पंचायत का नया भवन मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 78.61 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन खाचरौद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार प्रदेश के 'समग्र विकास' के संकल्प के साथ काम कर रही है। हमारा मध्यप्रदेश अब विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और कोई भी वर्ग या व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से वंचित न रहे। विकास की बात पर हम सबका सहयोग लेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में विकास की बयार है। विकास की यह गति अब और तेज होगी। आप सबके सेवक के रूप में वे खुद चौबीसों घंटे सातों दिन प्राण-प्रण से सेवा में जुटे हुए हैं। सबका कल्याण ही हमारा लक्ष्य है। नागरिकों की समृद्धि और खुशहाली ही हमारा पारितोषिक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन जिले के खाचरौद में विकास कार्यों के लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद को विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने यहां 78 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत वाले पूर्ण एवं प्रस्तावित 39 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसमें 48 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत के 16 कार्यों का लोकार्पण एवं 30 करोड़ 10 लाख रुपये की लागत वाले 23 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सभी कार्यों से खाचरौद के विकास को एक नई दिशा मिलेगी। यह विकास कार्य खाचरौद के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। सांदीपनि विद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर, बच्चों के बेहतर भविष्य की लिखेंगे नई इबारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाचरौद में 35 करोड़ 40 लाख की लागत से नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय भवन, 11 करोड़ 30 लाख की लागत से नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण सहित अन्य कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद का सांदीपनि विद्यालय आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का प्रतीक बनेगा और विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करायेगा। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में शिक्षा के पवित्र मंदिर के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। यह हमारे बच्चों के बेहतर और सुनहरे भविष्य की नई इबारत लिखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाचरौद के नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण में किसानों की सुविधा के लिए कृषक विश्राम भवन, भोजनालय, पानी की टंकी एवं प्याऊ भी बनाये गए हैं। मुख्यमंत्री ने खाचरौद में 9 करोड़ 10 लाख रुपये लागत से बनने वाले संयुक्त तहसील कार्यालय के नवीन भवन, 5 करोड़ 25 लाख लागत से बनने वाले जनपद पंचायत भवन एवं 6 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत से स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम-2.0) सहित अन्य प्रस्तावित कार्यों का भूमिपूजन भी किया। मुख्यमंत्री ने राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा संचालित खाचरौद के माध्यमिक विद्यालय में 11 स्मार्ट क्लासेस का लोकार्पण भी इस मौके पर किया। खाचरौद में बनेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में बहुतायत से होने वाली हरी मटर को देश-विदेश तक पहुंचाने और अन्य सभी फसलों को भी मार्केट लिंकेज दिलाने के लिए खाचरौद में फूड प्रोसेसिंग पार्क बनाने और खिलाड़ियों के लिए नया स्टेडियम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खाचरौद से रतलाम को डायरेक्ट फोर लेन से जोड़ा जाएगा, जिससे खाचरौद को भी इन्दौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन एरिया की सीधी पहुंच मिल सके। 5 करोड़ की लागत से बनेगा फोरलेन हाई-वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा से खाचरौद से जावरा से उज्जैन होते हुए करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से नया फोरलेन हाई-वे बनाया जा रहा है। इससे पूरे क्षेत्र का चहुंमुखी विकास होगा। उन्होंने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना से मालवा-निमाड़ और चंबल का पूरा क्षेत्र भरपूर सिंचाई की स्थायी सुविधा से लाभान्वित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 5 सालों में हम प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर कृषि रकबे तक पहुंचा देंगे। किसान एवं कृषि से जुड़े उद्यामियों को देंगे नई दिशा और अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 किसानों के कल्याण का साल है। इस दौरान हमारा पूरा फोकस किसानों पर ही रहेगा। इस साल हम कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान देंगे, जिससे किसानों और कृषि से जुड़े उद्यमियों को नई दिशा और अवसर मिलेंगे। गेहूं की खरीदी पर हम किसानों को 175 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दे रहे हैं। हम किसानों की आय बढ़ायेंगे। किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता बनायेंगे। इसके लिए प्रदेश के 32 लाख किसानों को सोलर पम्प उपलब्ध करायेंगे। हर साल 10 लाख किसानों को सोलर पम्प दिए जाएंगे। इससे उन्हें बिजली बिल से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। किसान खुद बिजली उत्पन्न करके खेतों में सिंचाई, छोटा-मोटा व्यवसाय और निजी उपभोग भी कर सकेंगे। साथ ही सरप्लस बिजली बेचकर अतिरिक्त आयार्जन भी वे कर सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए प्रभावी कदम उठा रही है। आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। गरीबों और निराश्रितों का कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और प्रदेश के हर जरूरतमंद को शासन की सेवाएं, सुविधाएं और संबल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि नागदा की विश्व में अपनी अलग ही पहचान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में सांस्कृतिक धारा का अभ्युदय हो रहा है। सिंहस्थ 2028 के लिए हमारी तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में सबसे अच्छे स्कूल बन रहे हैं। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यही समय है, सही समय है। इसी क्रम में आज खाचरौद को भी नया सांदीपनि विद्यालय मिला है। हमारी सरकार विरासत के संरक्षण के मार्ग पर चलते हुए प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय का निर्माण करा रही है। श्रीकृष्ण से जुड़े प्रत्येक स्थल को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। … Read more

MP में सरकारी बसों का शुभारंभ, 20 से ज्यादा शहर जुड़ेंगे नए साल पर ‘सुगम परिवहन’ सेवा से

भोपाल मध्य प्रदेश में जल्द ही 'सरकारी बस' सड़कों पर एक बार फिर दौड़ते नजर आएंगी। मोहन सरकार जल्द ही 'राज्य परिवहन निगम' की तर्ज पर नए सिरे से बस सेवा प्रारंभ करने वाली है। नए साल में प्रदेश की जनता को यह सौगात मिलने वाली है। बता दें कि इसका नया नाम 'सुगम लोक परिवहन सेवा' होगा जो पीपीपी मॉडल पर संचालित होगी। जानकारी अनुसार प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव ने 'सुगम लोक परिवहन सेवा' के जरिए एमपी में सरकारी बसों की वापसी करने जा रहे हैं। सेवा चाहू होने के बाद दूरस्थ्य गांव तक तक सस्ती और लग्जरी यात्रा की सुविधा मिल सकेगी। कैबिनेट में इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। सरकार ने इसके लिए 101 करोड़ की अंशपूंजी को बजट को स्वीकृति दी है। बता दें कि वर्तमान में मध्यप्रदेश के 20 शहरों में सार्वजनिक परिवहन के लिए गठित SPVs में से 16 कंपनियां कार्यरत हैं, जिन्हें अब संभागीय कंपनियों में मर्ज करने का निर्णय लिया गया है। कंपनियों पर नियंत्रण के लिए 'होल्डिंग कंपनी' का गठन प्रदेश में बसों के परिवहन सेवा और व्यवस्था को बेहतर बनाने तथा इसके एकीकृत संचालन के लिए 7 कंपनियों पर दारोमदार होगा। इन सातों कंपनियों पर नियंत्रण के लिए स्टेट लेवल पर 'होल्डिंग कंपनी' का गठन किया जाएगा। यह कंपनी कंपनीज एक्ट—2013 के तहत गठित की जाएगी, साथ ही जिला स्तर पर यात्री परिवहन समितियों के गठन को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली है। बस टर्मिनल व अन्य स्ट्रक्चर PPP मॉडल पर होंगे बता दें कि एमपी में सीएम सुगम लोक परिवहन सेवा के तहत बस स्टेंड, टर्मिनल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। बस संचालन और संधारण भी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत निजी बस ऑपरेटर्स के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि इन सब पर पूरा नियंत्रण सरकारी कंपनी का रहेगा। 

वाटर सप्लाई की निगरानी को लेकर CM डॉ. मोहन की सख्ती, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं सैंकड़ों लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस बीच पूरे प्रदेश में पानी वितरण की मॉनिटरिंग को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सख्त हो गए हैं। सीएम ने सभी नगरीय निकायों में जांच के निर्देश दिए हैं।   हर हाल में भेजनी होगी हर महीने रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रदाय के तहत पानी के शुद्धिकरण की जांच की जाए। लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अफसरों को हर महीने की सैंपल रिपोर्ट हर हाल में स्थानीय निकाय को भेजनी होगी। सीएम ने नगरीय प्रशासन विभाग को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।  मौत का आंकड़ा बढ़कर 14, सरकारी आंकड़ों में 4 मौतें दर्ज  गौरतलब है कि इंदौर में दूषित पानी से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों में अभी भी मौत के आंकड़े 4 हैं। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया था कि चार लोगों की मौत की सरकारी आंकड़े में पुष्टि हुई है। लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।  दूषित पानी में मिला हैजा फैलाने वाला जीवाणु दूषित पानी की रिपोर्ट में हैजा फैलाने वाला घातक जीवाणु मिला है। मरीजों की कल्चर रिपोर्ट में हैजे की आशंका जताई जा रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को हैजे के इलाज के लिए दी जाने वाली डॉक्सीसाइक्लिन नामक दवा दी जा रही है।

युवाओं को किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

परमार्थ और देशभक्ति का भाव हो हम सभी में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव युवाओं को किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान स्वामी जी ने दी है हम सबको नई जीवन दृष्टि राष्ट्रकथा शिविर में विभिन्न प्रांतों से आए युवाओं को किया संबोधित मुख्यमंत्री ने राजकोट के उपलेटा में वैदिक मिशन ट्रस्ट के कार्यक्रम में की सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीव मात्र का समग्र कल्याण ही मानवता का पहला लक्ष्य है। जियो और जीने दो हमारे जीवन का शाश्वत दर्शन है। हमारे यहां नैतिक शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और संस्कारयुक्त जीवन पद्धति की एक लंबी परम्परा रही है। यह हम भारतीयों का स्व-अनुशासन ही है, जिससे भारत आज विश्व की महाशक्ति के रूप में तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम सब उस भारतीय मातृ सत्तात्मक संस्कृति के संवाहक है, जहां माताओं और बहनों को देवी के रूप में पूजा जाता है। हमारे यहां बच्चा-बच्चा भी भारत माता की जय बोलकर राष्ट्रमाता को सम्मान देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को गुजरात के राजकोट जिले के प्रांसला के समीप उपलेटा में वैदिक मिशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित 26वें 'राष्ट्रकथा शिविर' को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिविर में सहभागिता कर ट्रस्ट के गुजरात के प्रमुख व महान विचारक स्वामी धर्मबंधु जी महाराज का आशीर्वाद लिया और कहा कि हम सभी को अपने जीवन में हमेशा अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए। पूज्य स्वामी जी ने हम सबको नई जीवन दृष्टि दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किताबी ज्ञान से व्यवहारिक और वास्तविक ज्ञान बेहतर है और हमारी युवा पीढ़ी को उनकी असीम शक्तियों का भान कराना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि नेकी, परमार्थ और राष्ट्रभक्ति का सहज भाव शरीर में रक्त की तरह हम सभी में प्रवाहमान होना चाहिए। 'वसुधैव कुटुम्बकम' हमारी संस्कृति का जीवोमूल लक्ष्य है और हमें इसी दिशा में और भी मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ धाम भी शामिल है। देश में सनातन संस्कृति की धारा सभी क्षेत्रों में बह रही है। राष्ट्रकथा शिविर में स्वामीजी ने देश के विभिन्न प्रांतों से शामिल हुई युवा शक्ति को राष्ट्र के विकास के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश फिर से विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गुरु की महिमा को देखेंगे तो गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। भारत ने हजारों वर्षों से दुनिया को विश्व बंधुत्व का संदेश दिया है। भारतीय परिवारों में मां का अपना अलग ही स्थान होता है। मां ही हम सभी की पहली गुरु होती हैं। दुनिया में सभी देश अपनी गौरवशाली संस्कृति पर गर्व करते हैं, लेकिन अन्य किसी भी देश में मातृ संस्कृति का आधार देखने को नहीं मिलता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कोविड के समय जब दुनिया की जनता त्राहिमाम कर रही थी, तब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी संकल्प शक्ति के बल पर कठिन समय में महामारी का सामना किया। हमने स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए संयमित जीवन शैली अपनाई और गांव, गली, मोहल्लों, कस्बों को भी सुरक्षित रखते हुए पूरी दुनिया को भी इस इससे उबारा। कोविड वैक्सीन बनाकर भारत ने 40 से अधिक देशों को यह वैक्सीन भेजी और वहां के लोगों की जान भी बचाई। हमें अपनी इसी परोपकारी संस्कृति पर गर्व है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत आज हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है। यह सही है कि किताबी ज्ञान से अंकसूची और मेरिट लिस्ट में पहचान बन सकती है, लेकिन केवल कागजी डिग्री से काम नहीं चलता है। हमारे लिए पढ़ाई केवल नौकरी पाना नहीं है, बल्कि इससे इतर बच्चों का नैतिक और संस्कारयुक्त समग्र विकास करना है। हमारे नागरिकों में स्वाभाविक रूप से स्व-अनुशासन का भाव है। दुनिया के कई देशों में लोगों को नियंत्रित करने के लिए केवल दंड व्यवस्था है, जहां हर 10 में से एक सैनिक या पुलिसकर्मी समाज को कंट्रोल करता है, लेकिन हम ऐसे समाज के लोग हैं कि जहां पुलिस का काम नहीं पड़ता है और 100-100 गांवों को एक ही पुलिसकर्मी संभालता है। उन्होंने कहा कि 145 करोड़ आबादी के इस देश में तीनों सेना और पुलिस मिलाकर सुरक्षाकर्मियों की संख्या मात्र 40 लाख है। हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्रों में से एक हैं। हमारे सैनिक मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में जान की बाजी लगाकर देश और देशवासियों की रक्षा करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बाद अब भारत ही दुनिया का वह तीसरा देश है, जो हर तरीके से अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा करने की क्षमता रखता है। इस शिविर के जरिए भारतीय युवाओं में देशभक्ति का भाव जगाने का जो पुनीत काम किया जा रहा है, जो नि:संदेह स्वागत योग्य और अभिनंदनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अंग्रेजी कैलेंडर के आधार पर साल का पहला दिन है। हमारा नया साल तो गुड़ी पड़वा से शुरू होता है। उन्होंने कहा कि हर जीवित व्यक्ति 24 घंटे में 21 हजार 500 बार सांस लेता है और 1 लाख कोशिकाओं के मरने पर एक दिन का जीवन मिलता है। ऐसे में बाबा महाकाल ने सबको जो जीवन दिया है, वह हमें परमार्थ और मानवता की सेवा में समर्पित करना चाहिए। गुजरात सरकार के उच्च और तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री त्रिकमभाई बिजलभाई छंगा ने कहा कि स्वामीजी का प्रयास हम सबको गर्व से भर देता है। मनुष्य की सेवा ही परम पिता परमेश्वर की सेवा है। ऐसे सभी प्राणी, जिनमें जीवन है, हमें अपनी करूणा, दया, स्नेह, अपनत्व, देखभाल और कल्याण भाव से उनकी सेवा करनी चाहिए। स्वामी जी ने विभिन्न प्रांतों से आए युवाओं को राष्ट्र सेवा की ओर प्रवृत्त किया है। यही सच्ची राष्ट्रसेवा और सच्ची राष्ट्रभक्ति है। कार्यक्रम के आरंभ में पूज्य स्वामीजी द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य सभी अतिथियों का गुजराती पगड़ी (साफा) पहनाकर एवं अंगवस्त्रम ओढ़ाकर आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राष्ट्रकथा शिविर में पुस्तक भी भेंट की गई। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजकोट के उपलेटा में 26वें राष्ट्र कथा शिविर में तटरक्षक बल की प्रदर्शनी … Read more