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पेंशनरों के खाते में बढ़ेगा लाभ, डॉ मोहन यादव ने महंगाई भत्ता 2% बढ़ाने का ऐलान किया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में कोई कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के पेंशनरों की महंगाई राहत में दो प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना का अनुसमर्थन किया गया। इसमें यह प्रविधान किया गया है कि यदि मंडी में कृषक की उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर बिकती है तो फिर सरकार उसे अंतर की राशि का भुगतान करेगी। मोटे अनाज को प्रोत्साहित करने के लिए श्रीअन्न फेडरेशन बनाने का निर्णय लिया गया। यह किसानों को न केवल मोटा अनाज की खेती के लिए प्रेरित करेगा बल्कि उपज की बिक्री, ब्रांडिंग के लिए भी काम करेगा।  मोहन कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर लगी मुहर     रेशम समृद्धि योजना अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ लागत मूल्य में वृद्धि की गई है। साथ ही किसानों की अंश राशि को कम कर दिया गया है, ताकि आम किसान भी इससे जुड़ सकें।     प्रदेश में कोदो और कुटकी की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसका उचित मूल्य किसानों को मिले इसके लिए कोदो का मूल्य ₹3500 प्रति क्विंटल और कुटकी का मूल्य ₹2500 प्रति क्विंटल तय किया गया है।     रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत कोदो, कुटकी उत्पादक जिले जबलपुर कटनी मंडला डिंडौरी छिंदवाड़ा शहडोल अनूपपुर उमरिया रीवा सीधी और सिंगरौली के किसानों से कोदो कुटकी का उपार्जन किया जाएगा।     7वें वेतन आयोग के तहत आने वाले पेंशनरों की महंगाई राहत में दो प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है,जिसके बाद डीआर दर 53 फीसदी से बढ़कर 55 प्रतिशत हो गई है। इसके लिए 170 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इससे साढ़े चार लाख से अधिक पेंशनर्स लाभान्वित होंगे।छठे वेतन आयोग के तहत आने वाले पेंशनर्स के डीए में भी वृद्धि की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति मिलने के बाद वित्त विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया था।     सोयाबीन उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए कैबिनेट द्वारा भावान्तर योजना को मंजूरी दी गई है। सोयाबीन का एमएसपी 5328 रुपए है।यह राशि सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी।     सूक्ष्म-लघु उद्योग के लिए 105 करोड़ स्वीकृत किए है। यह राशि उत्पादकों की क्वालिटी सुधारने, देश में मार्केट की स्थिति, एक्सपोर्ट पर खर्च करेंगे।  प्रदेश में लागू करने की सैद्धांतिक सहमति दी गई है। राज्य सरकार अपनी ओर से 30 करोड़ रुपये लगाएगी।     सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना अंतर्गत पात्र छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उनके आवास का किराया प्रतिमाह ₹1000 सरकार देगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आज के कार्यक्रम     सीएम डॉ मोहन यादव सुबह 11 बजे मंत्रालय पहुंचेंगे, जहां कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे।     दोपहर 1 बजे बीजेपी कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में शामिल होंगे।     2 बजे रविंद्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय स्वच्छता सम्मान समारोह कार्यक्रम     3 बजे समन्वय भवन में आयोजित आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान कार्यक्रम में शामिल होंगे।     3:30 बजे देवास के लिए रवाना । संदीपनी उच्चतम माध्यमिक विद्यालय का लोकार्पण, नेमवार में सामूह जलप्रदाय योजना का शुभारंभ समेत विकास कार्यों का लोकार्पण भूमिपूजन।     शाम 6:05 बजे देवास से भोपाल लौटेंगे।     रात 8:30 सीएम हाउस में वीसी माध्यम से खंडवा में आयोजित राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान अलंकरण समारोह में शामिल होंगे। कोदो-कुटकी के लिए समर्थन मूल्य तय राज्य सरकार ने कोदो-कुटकी की खरीद के लिए दाम तय किए हैं। कुटकी 3500 प्रति क्विंटल और कोदो का दाम 2500 प्रति क्विंटल तय किया गया है। ये दोनों ही फसलें मिलेट्स की श्रेणी में आती हैं और प्रदेश के 11 जिलों में इनकी बड़े पैमाने पर खेती होती है। सरकार ने निर्णय लिया है कि श्री अन्न फेडरेशन कोदो-कुटकी की मार्केटिंग का कार्य करेगा, ताकि उत्पादक किसानों को उचित मूल्य मिल सके। इसके लिए फेडरेशन को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। विद्यार्थियों को 1000 रुपए की सहायता कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदाय के वे विद्यार्थी जो कोचिंग संस्थानों में अध्ययनरत हैं, उन्हें 1000 रुपए तक की सहायता राशि दी जाएगी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है। रेशम समृद्धि योजना को मंजूरी बैठक में रेशम समृद्धि योजना को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत राज्य में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने और बुनकरों को आर्थिक सशक्तिकरण का मौका मिलेगा। MSME को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन कैबिनेट ने MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) को प्रोत्साहन देने के लिए ₹105 करोड़ की मंजूरी दी है। इसमें 30% राशि राज्य सरकार की ओर से और शेष राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होगी। यह राशि उद्योगों के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और रोजगार सृजन में मदद करेगी। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को लाभ, युवाओं को अवसर और उद्यमियों को प्रोत्साहन मिले।    

विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाएं अधिक से अधिक रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय कोर्सेस : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विश्वस्तरीय बनें उच्च शिक्षा के सभी संस्थान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाएं अधिक से अधिक रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय कोर्सेस अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में अगले सत्र से प्रारंभ करें कृषि संकाय विश्वविद्यालयों में रोजगारपरक विषय प्रारंभ करने संबंधी बैठक में दिए निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की उच्च शिक्षा गतिविधियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी कैंपस एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय बनाए जाएं। यह सभी संस्थान आईआईटी, आईआईएम और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की तर्ज पर विकसित किए जाएं। सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय विषय एवं कोर्सेस प्रारंभ किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग और प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रोजगारपरक नवीन विषय प्रारंभ करने के संबंध में आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में उच्च शिक्षा, आयुष, तकनीकी शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री  नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन, प्रमुख सचिव पशुपालन  उमाकांत उमराव, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  संदीप यादव, प्रमुख सचिव खेल एवं युवक कल्याण  मनीष सिंह सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, उच्च शिक्षाविद् एवं विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में अगले सत्र से कृषि संकाय और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में बीटेक में डेयरी टेक्नॉलाजी का पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। विद्यार्थियों में इन कोर्सेस का प्रचार करें जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थी इस विषय की पढ़ाई के लिए आगे आएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विमानन क्षेत्र में बड़ा स्कोप है, इसलिए विश्वविद्यालयों में इसके पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का भी समग्र अध्ययन कराया जाए। इसके लिए इस विश्वविद्यालय को आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय बनाने पर भी गंभीरता से विचार कर निर्णय के लिए रखा जाए। उन्होंने कहा कि पाणिनी विश्वविद्यालय को आयुर्वेद विश्वविद्यालय बनाने से इस विश्वविद्यालय का परिधि क्षेत्र बढ़ेगा और प्रदेश के करीब 50 से अधिक आयुर्वेदिक महाविद्यालय इसके दायरे में आ जाएंगे। यह एक बड़ा कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिये कि विश्वविद्यालयों में सभी प्रकार की भर्तियों को टाईम-फ्रेम में लाएं और जल्द से जल्द सभी प्रकार की भर्तियां एवं नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएं। इस पर अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। वर्तमान में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 364 पद भरे हुए हैं और इन्हीं श्रेणी के 1585 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रचलित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्सिंग एवं पैरामेडिकल महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी ली। अपर मख्य सचिव  राजन ने बताया कि सत्र 2025-26 में नर्सिंग कॉउंसिल द्वारा प्रवेश प्रकिया आरम्भ कर दी गई है। पैरामेडिकल कॉउंसिल द्वारा सत्र 2025-26 की मान्यता संबंधी प्रक्रिया एक माह में प्रारम्भ करने की बात कही गई है। नर्सिंग एवं पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को एनओसी उच्च शिक्षा विभाग के संचालनालय स्तर पर एवं मान्यता क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए ग्राम कल्याणपुरा में 70 एकड़ भूमि उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवंटित की जा चुकी है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा जिला अस्पताल झाबुआ में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हास्पिटल के रूप में अनुमति देने के लिए आवेदन कर दिया गया है। सभी विश्वविद्यालय अगले पांच साल का रोड-मैप तैयार करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरूओं को निर्देशित किया कि वे सभी अपने विश्वविद्यालयों का अगले पांच साल का रोड-मैप तैयार करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी कुलगुरू अपने विश्वविद्यालयों में कृषि, उद्यानिकी, फ्लोरीकल्चर, टूरिज्म, माइनिंग, विमानन, दुग्ध उत्पादन के प्रोत्साहन के लिए पशुपालन (एनिमल हस्बेंड्री) जैसे रोजगारपरक विषय एवं डिग्री पाठ्यक्रम प्रारंभ करें। उन्होंने कहा विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को ज्ञान देने के अलावा उनकी उद्यमशीलता को भी प्रोत्साहित करें। कृषि विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रवृत करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय यह बताएं कि उन्होंने कितने रोजगारपरक विषय खोले हैं, उनमें कितने विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया और विश्वविद्यालयों ने अपने स्तर पर कितने विद्यार्थियों को रोजगार/प्लेसमेंट उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपने-अपने क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक प्रक्षेत्रों की जरूरतों को समझें और उनकी जरूरत के अनुसार अपने यहां नए-नए एडवांस कोर्सेस प्रारंभ करें। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर ही अध्ययन के साथ-साथ रोजगार भी मिल सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी कैंपस एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय बनाए जाएं। यह सभी संस्थान आईआईटी, आईआईएम और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों की तर्ज पर विकसित किए जाएं। सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में रोजगारपरक एवं बहुउद्देश्यीय विषय एवं कोर्सेस प्रारंभ किए जाएं। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने बताया कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में बीबीए एविएशन का तीन वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसमें करीब 30 बच्चों ने प्रवेश लिया है। इसके अतिरिक्त बीएसी एविएशन पाठ्यक्रम बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन और चित्रकूट विश्वविद्यालय, चित्रकूट में प्रारंभ किया गया है। अपर मुख्य सचिव  राजन ने बताया कि प्रदेश के सभी शासकीय महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में 384 शोध केंद्र संचालित हैं। सौ नए शोध केंद्रो की स्थापना की जानी है। सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ की स्थापना कर दी गई है। शासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का भ्रमण कराने की योजना को महाविद्यालयों के वार्षिक कैलेण्डर में नियमित गतिविधि के रूप में शामिल कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नैक की तर्ज पर राज्य स्तरीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (सैक) का गठन हो गया है। वर्तमान वित्त वर्ष से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं शासकीय स्वशासी महाविद्यालयों में उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन का कार्य प्रारंभ कराया जा रहा है। विश्वविद्यालयों में सभी रिक्त पदों पर भर्ती एवं … Read more

मोहन सरकार का दिवाली गिफ्ट संभव! मप्र में बढ़ सकता है डीए-डीआर, केंद्र से 3% पीछे

भोपाल  केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाने के फैसले के बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं। प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दीपावली से पहले समान लाभ देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार के पहले बोनस और फेस्टिवल एडवांस में बढ़ोतरी की घोषणा की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ खुशियां मना सकें। 3% डीए-डीआर और बोनस की मांग मध्यप्रदेश के कर्मचारियों ने दीपावली से पहले 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीए-डीआर) देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बोनस और फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि त्योहारी सीजन में खर्च बढ़ जाता है, इसलिए सरकार को समय रहते राहत प्रदान करनी चाहिए।तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा- दीपावली पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को बोनस के साथ 3% डीए और डीआर देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारी और पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। प्रदेश में मिल रहा 55% डीए, केंद्र में बढ़कर हुआ 58% वर्तमान में मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डीए अब 3% बढ़कर 58% हो गया है। राज्य के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2025 से ड्यू है, जिसे अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें हमेशा केंद्र के बाद देरी से डीए वृद्धि मिलती है। 29 साल से बंद है बोनस कर्मचारी संगठनों ने याद दिलाया कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है। उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में दिया जाता था। केंद्र सरकार और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस देती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा वर्षों से बंद है।कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार कहती है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना उनकी ‘कथनी और करनी’ में फर्क दिखाता है। 10 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स होंगे प्रभावित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा 55% डीए वर्तमान में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 58% डीए प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के कर्मचारियों का जुलाई 2025 से डीए ड्यू है। 29 साल से बंद बोनस देने की मांग कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है, जबकि उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में मिलता था। केंद्र और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस दे रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। यह फिर से शुरू किया जाना चाहिए। संगठनों ने कहा कि सरकार एक ओर दावा करती है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना “कथनी और करनी में अंतर” दर्शाता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दीपावली से पहले कर्मचारियों को राहत देने का फैसला लेकर त्योहार की खुशियां दो गुनी करेंगे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों को दीपावली के पहले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य के कर्मचारी भी मोहन सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहा है कि एमपी में काम कर रहे कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देकर बोनस दिया जाए ताकि कर्मचारी त्यौहार खुशियों के साथ मना सकें। इसके साथ ही फेस्टिवल एडवांस भी बढ़ी हुई राशि के साथ देने की मांग की जा रही है। उधर माना जा रहा है कि जल्दी ही राज्य सरकार भी कर्मचारियों के लिए डीए देने का ऐलान कर सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जिस प्रकार से केंद्र एवं रेलवे द्वारा दीपावली के अवसर पर बोनस एवं 3% महंगाई भत्ता, महंगाई राहत एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों को प्रदान कर दी गई है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार भी दीपावली के त्योहार पर कर्मचारियों को आर्थिक रूप से खुशियां दे। प्रदेश में वर्ष 1996 से बोनस बंद है। वर्ष 1996 तक 1079 रुपए बोनस के रूप में कर्मचारियों को प्राप्त होते थे। वर्तमान में प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आज भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है वहीं मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को बोनस से वंचित कर दिया गया है। संगठनों के अनुसार एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा कहा जाता है कि केंद्र के समान कर्मचारियों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी वहीं बोनस न देना कथनी और करनी में अंतर बताता है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्चा बढ़ जाता है। इसकी भरपाई के लिए सरकार को बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए जिसका फायदा प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। इसी तरह कर्मचारी नेता जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दिवाली के पहले महंगाई भत्ते की किस्त देने की मांग की है। जुलाई 2025 से 3% महंगाई भत्ता बढ़ाने पर इतना मिलेगा लाभ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी -1395 से 1620 तृतीय श्रेणी कर्मचारी -1755 से 4419 द्वितीय श्रेणी अधिकारी – 5049 से 6048 प्रथम श्रेणी अधिकारी -7191 से 12690 तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ने पर महीने का इतना हो जाएगा वेतन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेतन मान – 55 %भत्ता – 58% भत्ता 15500-– 24025 24490 16100— 16985—25438 … Read more

देश में प्राचीन काल से रही है न्याय देने की परम्परा: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

न्याय पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश में प्राचीन काल से रही है न्याय देने की परम्परा समानता, पारदर्शिता, विनम्रता और सबको समय पर न्याय दिलाना ही है न्यायपालिका की मूल आत्मा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर में किया विधि विशेषज्ञों की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ उच्चतम न्यायलय के न्यायमूर्तिगणों और विधि-विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि न्याय पाना देश के हर नागरिक का मौलिक, बुनियादी, मानवीय, नागरिक और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि भारत की संघीय शासन व्यवस्था का आधार ही सबके जीवन, भोजन और स्वास्थ्य के अधिकारों की समान रूप से न्यायपूर्ण रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि लोक कल्याणकारी राज्य का पहला दायित्व है कि देश का कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे। न्याय और सुशासन न केवल राष्ट्र और समाज को मजबूत करते हैं, बल्कि शासन व्यवस्था को जवाबदेह भी बनाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का नया दौर न्याय का पथ गौरवान्वित करने वाला है। उच्चतम न्यायालय द्वारा बीते कुछ सालों में दिए गए कई निर्णयों ने देश को नई दिशा दी है। इससे न्याय व्यवस्था पर हमारी आस्था को और बल मिला है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि युग बदले, दौर बदले, परंतु न्याय की आत्मा हमेशा वही रहेगी। समानता, पारदर्शिता, विनम्रता और सबको समय पर न्याय दिलाना ही न्यायपालिका की मूल आत्मा रही है और आगे भी रहेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा है हमारे देश में न्याय की प्राचीन परंपरा रही है। न्याय देने की स्थापित व्यवस्था को और बेहतर बनाना हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब तो न्याय की देवी की आंखों की पट्ठी भी खोल दी गई है। इसका आशय यह है कि अब न्याय की देवी खुली आंखों से न्याय कर सकेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में आयोजित "इवोल्विंग होराइजन्स: नेविगेटिंग कॉम्प्लेक्सिटी एंड इनोवेशन इन कमर्शियल एंड आर्बिट्रेशन लॉ इन द डिजिटल वर्ल्ड" विषय पर आयोजित विधि विशेषज्ञों की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस) के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उच्चतम न्यायलय के न्यायमूर्तिगणों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर इस संगोष्ठी का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए इंदौर पधारे उच्चतम न्यायालय के सभी सम्मानीय न्यायमूर्तियों और देश-विदेश से आए विधि विशेषज्ञों, न्यायविदों तथा विद्यार्थियों का आभार जताते हुए कहा कि देश के सबसे स्वच्छतम शहर में न्याय प्रणाली के मंथन पर ऐसी विद्वत सभाओं का आयोजन हमें नई उम्मीद देता है, साथ ही और बेहतर करने की प्रेरणा भी देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार न्याय प्रणाली को और अधिक सुलभ, सरल और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर कदम उठा रही है। राज्य में प्रादेशिक और जिला स्तर के न्यायालयों की सुदृढ़ स्थापना के साथ-साथ मध्यप्रदेश में ग्राम न्यायालयों की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय न्याय परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। हम सम्राट वीर विक्रमादित्य को कैसे भूल सकते हैं, जिन्होंने अपने बाल्यकाल से ही तत्समय भारत देश में न्याय और सुशासन की व्यवस्था का सूत्रपात किया था। हम उन्हीं के बताए मार्ग पर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में कानून के क्षेत्र में अनेक नवाचार हो रहे हैं, जिससे नागरिकों को अधिक अधिकार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ दायित्वों का पालन भी आवश्यक है उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली जितनी सहज और सरल होगी, नागरिक को उतनी ही जल्दी न्याय मिलेगा। हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक नागरिक को सुगमता से न्याय मिले और उसकी आस्था न्यायिक व्यवस्था पर सदैव बनी रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष ज़ोर देकर कहा कि आज के तेज़ी से विकसित होते तकनीकी युग में, न्यायपालिका को निरंतर मूल्यांकन और अनुकूलन उपायों पर काम करना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि न्याय प्रदान करना नवाचार में बाधा डाले बिना निष्पक्ष और पारदर्शी बना रहे। इससे भारत की अर्थव्यवस्था का विकास हो सके और साथ ही व्यापार करने में आसानी भी सुनिश्चित हो। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी ने कहा कि न्यायपालिका का लक्ष्य कानून का पुनर्निर्माण करना नहीं है, बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के विचार को सीमित किए बिना निष्पक्षता की सीमाओं का विस्तार करना है। उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक अर्थव्यवस्था में, डेटा पर नियंत्रण केवल फर्मों या कंपनियों के स्वामित्व से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है, और इसलिए, आर्थिक विकास को बाधित किए बिना पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कानूनी पेशा तकनीकी प्रगति का अपवाद नहीं रह सकता। प्रौद्योगिकी-संचालित और स्वचालित अनुबंधों के उदय के साथ, न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तकनीकी विकास के कारण न्याय से समझौता न हो और इन प्रगति के साथ विकसित होना चाहिए। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  राजेश बिंदल ने कहा कि जैसे-जैसे व्यापार का विस्तार होता है, विवाद स्वाभाविक रूप से बढ़ते हैं और इसका समाधान न्यायपालिका में ही निहित है। चूँकि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, इसलिए हमारी मानसिकता में बदलाव लाने और सभी हितधारकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपयोगी तो है, लेकिन यह पेटेंट और पंजीकरण जैसे क्षेत्रों में नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करता है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  अरविंद कुमार ने कहा कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का केवल एक भागीदार ही नहीं, बल्कि एक निर्माता भी है। न्याय से समझौता किए बिना, व्यापार में सुगमता और नवाचार को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने न्यायनिर्णयन से सहयोग और मध्यस्थता से नवाचार की ओर बदलाव पर ज़ोर दिया और कानूनी बिरादरी के लिए तदनुसार अनुकूलन की आवश्यकता पर बल दिया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  संजीव सचदेवा ने "विकसित होते क्षितिज: डिजिटल दुनिया में वाणिज्यिक और मध्यस्थता कानून में जटिलता और नवाचार को नेविगेट करना" विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधिपति न्यायमूर्ति  जे.के. माहेश्वरी, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण और अन्य न्यायाधीशगणों और विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत … Read more

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना से बदलेगी किसानी की तस्वीर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री  मोदी ने इंदौर में 30 लाख टन क्षमता के अत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण संयंत्र का शुभारंभ किया प्रधानमंत्री  मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माना आभार इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पी एम कृषि धन-धान्य कृषि योजना कृषि विकास के क्षेत्र में नया अध्याय लिखेगी। मुख्यमंत्री डॉ यादव शनिवार को इंदौर से केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा दिल्ली में आयोजित 'अन्नदाताओं का सम्मान, समृद्ध राष्ट्र का निर्माण" कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने संबोधित किया और इंदौर में 30 लाख टन क्षमता के अत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण संयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया। प्रधानमंत्री  मोदी ने इंदौर, ग्वालियर सहित अन्य सहकारी संघों को पैक्स से जोड़े जाने को भी ऐतिहासिक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री  मोदी का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  मोदी के संबोधन का ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर इंदौर से वर्चुअली श्रवण किया। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री  लखन पटेल, विधायकगण  मधु वर्मा,  रमेश मेंदोला,  मनोज पटेल, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर  शिवम वर्मा, मध्यप्रदेश दुग्ध महासंघ के एमडी डॉ. संजय गोवानी सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देशभर के किसानों के लिए दो बड़ी योजना – प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्म-निर्भरता मिशन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना देश के कृषि विकास और इससे जुड़े सेक्टर्स में आमूल-चूल परिवर्तन लाने की दिशा में एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि देश में अब तक 10 हजार एफपीओ के अंतर्गत 50 लाख किसान सदस्यता ले चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण कृषि मिशन में एक लाख किसानों का प्रमाणन, 4275 मैत्रीय का प्रमाणन, कंप्युटराइजेशन में 10 हजार से अधिक बहुउद्देशीय पैक्स को मंजूरी, डेयरी, मत्यपालन, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण जैसे कई प्रकार के कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  मोदी ने मध्यप्रदेश के इंदौर में 30लाख टन की क्षमता और 79 करोड़ रुपये की लागत वाले आत्याधुनिक दुग्ध चूर्ण सयंत्र का वर्चुअली शुभारंभ भी किया है। साथ ही प्रदेश के इंदौर और ग्वालियर सहकारी संघों को पैक्स से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को दी गई इन सौगातों के लिए प्रधानमंत्री  मोदी का आभार माना। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से जहां कम उपज वाले देश के 100 जिलों में पैदावार बढ़ाने के प्रयासों को बल मिलेगा, वहीं दालों के उत्पादन में भी तेजी आएगी। इस विशेष कार्यक्रम में कृषि और इससे जुड़े सेक्टर्स की करीब 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं शामिल हैं। इनसे न केवल देश के किसान भाई-बहनों के जीवन में नई खुशहाली आएगी, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प भी और मजबूत होगा। वर्चुअल कार्यक्रम की समाप्ति के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव का इंदौर जिले के किसानों द्वारा आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया गया।  

MP ट्रैवल मार्ट 2025 का आगाज़ आज, पर्यटन और सिनेमा जगत की हस्तियों का लगेगा जमावड़ा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2025 का शुभारंभ करेंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास राज्यमंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी करेंगे। मुख्यमंत्री शुभारंभ से पहले विशिष्ट आमंत्रित डेलीगेट के साथ वन-ऑन-वन मीटिंग्स में पर्यटन निवेश और सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श करेंगे। इसी अवसर पर भारत भवन में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में पर्यटन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। इस समझौते का उद्देश्य राज्य में एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारकों के आसपास पर्यटन अधोसंरचना और सुविधाओं का विकास करना है। कार्यक्रम में इंडियन एसोसिएशन फॉर टूर ऑपरेटर्स (आईएटीओ) के प्रेसिडेंट रवि गोसाईं, अभिनेता रघुवीर यादव, हर्षिल टूर एण्ड ट्रेवल्स के प्रवीण शाह, आईएचसीएल के प्रवीण चंदेर कुमार और क्यूरियस जर्नी की मिशेल इमेलमेन सहित 700 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। इसमें 27 देशों के 100 से अधिक विदेशी टूर ऑपरेटर, 150 घरेलू टूर ऑपरेटर और 355 सेलर्स उपस्थित होंगे। मुख्यमंत्री इस अवसर पर रायसेन जिले में गोल्फ कोर्स और खंडवा जिले में वेलनेस रिसॉर्ट के लिए निवेशक विनायक कालानी को लैटर ऑफ अवॉर्ड देंगे। इसके अलावा कर्ली टेल्स, बालाजी टेलीफिल्म और अतावी बर्ड फाउंडेशन के साथ पर्यटन क्षेत्र में सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। मध्यप्रदेश फिल्म पर्यटन नीति के प्रभाव आकलन रिपोर्ट का विमोचन भी इस कार्यक्रम में किया जाएगा। मध्य प्रदेश में हनुवंतिया, मांडू और तामिया में टेंट सिटी की स्थापना के लिए लेटर ऑफ अवॉर्ड दिए जाएंगे। ओरछा में टेंट सिटी के संचालन के लिए आगमन संस्था को और हेलीकॉप्टर सेवा के लिए जेट सर्व एविएशन प्रालि व ट्रांस भारत एविएशन प्रालि को लेटर ऑफ अवॉर्ड प्रदान किया जाएगा। फैम ट्रिप्स के माध्यम से देश-विदेश से आए 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने खजुराहो, पन्ना, ओरछा, भीमबेटका, मढ़ई, पचमढ़ी, इंदौर, महेश्वर, मांडू, उज्जैन, जबलपुर, कान्हा, पेंच और भोपाल के पर्यटन स्थलों का अनुभव किया। इन यात्राओं में प्रतिनिधियों ने स्थानीय जीवनशैली, लोककला, हस्तशिल्प और ग्रामीण परिवेश से जुड़कर 'अतुल्य मध्य प्रदेश' की असली आत्मा का अनुभव किया। इस भव्य आयोजन से मध्य प्रदेश पर्यटन के प्रचार-प्रसार को नई गति मिलेगी और राज्य में निवेश के अवसरों में वृद्धि होगी। 

मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की नवीन नाम पट्टिका का अनावरण किया

विक्रम विश्वविद्यालय को सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के रूप में नई पहचान मिली है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की नवीन नाम पट्टिका का अनावरण किया उज्जैन नगरी आदिकाल सें ही सांस्कृतिक, धर्म के साथ शिक्षा का केंद्र रही हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्वर्ण जयंती सभागार में शुक्रवार को विश्वविद्यालय के आधारशिला दिवस के अवसर पर “नवीन नाम पट्टिका अनावरण समारोह” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन केवल एक विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन का नहीं, बल्कि उज्जैन और संपूर्ण मध्यप्रदेश के गौरव के पुनर्जागरण का दिन है। ‘विक्रम विश्वविद्यालय’ अब ‘सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ के रूप में नई पहचान लेकर, अपने गौरवशाली इतिहास की नई यात्रा शुरू कर रहा है। यह क्षण हम सभी के लिए गर्व और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन सदैव भारत की सांस्कृतिक राजधानी रही है। यह वह धरा है, जहाँ से ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म और संस्कृति का प्रकाश पूरे विश्व में फैला। यह वही नगरी है जहाँ भगवान कृष्ण ने शिक्षा प्राप्त की, जहां। महाकाल का आशीर्वाद हर कण में विद्यमान है और जहां विक्रमादित्य जैसे महान सम्राट ने धर्म, न्याय और ज्ञान की प्रतिष्ठा स्थापित की। उन्होंने आगे कहा मैं स्वयं इस विश्वविद्यालय का विद्यार्थी रहा हूँ। छात्र जीवन की अनेक स्मृतियां आज ताज़ा हो गई हैं। यह संस्था केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि मेरे जीवन की प्रेरणा रही है। इस विश्वविद्यालय ने मुझे सामाजिक सेवा, नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन का मार्ग दिखाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रम विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तन केवल शब्दों का बदलाव नहीं है बल्कि यह उस पहचान की पुनर्स्थापना भी है जो कभी उज्जैन की धरती की शान हुआ करती थीं। ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का नाम हमारी परंपरा, संस्कृति और राष्ट्र गौरव का प्रतीक है। इस नाम के साथ विश्वविद्यालय नई ऊर्जा, नई सोच और नई दिशा में अग्रसर होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यह विश्वविद्यालय शोध, नवाचार और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। 175 से अधिक महाविद्यालयों से संबद्ध यह संस्थान हजारों विद्यार्थियों को ज्ञान का प्रकाश दे रहा है। यह देखकर गर्व होता है कि इस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश-विदेश में अपने कार्य से नाम रोशन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं जो वीरता, दान, नीति, और न्याय के प्रतीक होते हैं। विक्रमादित्य न केवल उज्जैन की पहचान थे बल्कि भारत की आत्मा का स्वरूप थे। आज जब यह विश्वविद्यालय उनके नाम से जुड़ रहा है तो यह केवल संस्थान का नहीं बल्कि समूचे प्रदेश का सम्मान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने देश को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अग्रसर किया है। जिस प्रकार विक्रमादित्य ने अपने युग में न्याय और नीति की परंपरा स्थापित की थी, उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने आधुनिक भारत में विकास, आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान का युग प्रारंभ किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोविड काल की चुनौतियों का स्मरण करते हुए कहा कि कठिन समय में भी भारत ने साहस और एकता से कार्य किया। हमारे डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और आम नागरिक सबने मिलकर देश को बचाया। यही वह भावना है जो हमें विक्रमादित्य के युग से जोड़ती है कर्तव्य, समर्पण और धैर्य की भावना। उन्होंने कहा आज जब हम ‘सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ के रूप में नई पहचान की ओर बढ़ रहे हैं, यह केवल एक संस्था का रूपांतरण नहीं बल्कि उज्जैन के उस स्वर्णिम अध्याय का पुनर्लेखन है जो शिक्षा, संस्कृति और अध्यात्म के त्रिवेणी संगम पर आधारित है। मैं इस विश्वविद्यालय के प्रत्येक छात्र, शिक्षक और कर्मचारी को इस ऐतिहासिक अवसर की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा जैसे करवा चौथ का चाँद सौभाग्य का प्रतीक होता है, वैसे ही का यह दिन इस विश्वविद्यालय के लिए सौभाग्य और नए युग की शुरुआत का प्रतीक बनेगा। यह विश्वविद्यालय महाकाल की नगरी की ऊर्जा से प्रेरित होकर शिक्षा, शोध, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में देश का अग्रणी संस्थान बने यही मेरी कामना है। पूर्व विधायक महंत  राजेंद्र भारती ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय नाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस विश्वविद्यालय को अद्भुत सौगात हैं। उन्होंने अपने छात्र राजनीति की यादें साझा की और बताया कि उनके और मुख्यमंत्री द्वारा किस प्रकार इस विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की जाती थीं। इस अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सम्मान स्मृति चिन्ह एवं फल भेंट कर किया। साथ ही उज्जैन नगर निगम सभापति मती कलावती यादव, नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, एवं सत्येन्द्र कुमार मिश्रा का भी सम्मान किया गया। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि यह दिन विश्वविद्यालय के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने वाला है। विक्रम विश्वविद्यालय से सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय’ बनने का यह क्षण केवल नाम परिवर्तन नही बल्कि हमारी पहचान और गौरव की पुनर्स्थापना है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और न्याय के प्रतीक हैं। उनके नाम से विश्वविद्यालय का जुड़ना हमारे लिए प्रेरणादायक और गर्व का विषय है। यह कदम उज्जैन की उस प्राचीन ज्ञानधारा को पुनर्जीवित करेगा जिसने भारत को शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बनाया। कुलगुरु प्रो. भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वयं इस विश्वविद्यालय के गौरवशाली पूर्व छात्र रहे हैं। उनका विश्वविद्यालय के प्रति यह भावनात्मक जुड़ाव आज उसे नई पहचान दे रहा है। यह विश्वविद्यालय अब शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और नवाचार का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय की नवीन नाम पट्टिका के अनावरण के बाद विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित डॉ. राजेश गुप्ता एवं डी.डी. बेदिया की डिजिटल मार्केटिंग, तिलक राज सिंह सोलंकी की राजा रवि वर्मा: एक भारतीय चित्रकार, रमण सोलंकी की आलेख पुरातन की ओर, गीता नायक की नूतन प्रवाह, मिती शर्मा की ए स्पेक्ट्रम ऑफ इंडिया, तथा डॉ. रवीन्द्र पस्तोर, प्रो. आशीष वर्मा, डॉ. हितेन्द्र त्रिवेदी की Planning for the Largest Human Gathering on … Read more

देश का मान बढ़ाने वाले युवाओं को CM डॉ यादव ने दी बधाई

युवाओं ने हमारे देश का नाम गौरवांवित किया : मुख्यमंत्री डॉ यादव तीन दिवसीय यंग थिंकर्स कॉन्फ्लूएंस का उद्घाटन प्राचीन संस्कृति के अच्छे कामों से युवा लें प्रेरणा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को उज्जैन के अवंतिका विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय यूंथ थिंकर्स कॉन्फ्लूएंस कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि आज की युवाशक्ति इस राष्ट्र को ऐसे स्थान पर ले जाकर खड़ा करेगी, जिससे भारत विश्वगुरु बनकर रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी आज युवाओं के सबसे बडे प्रेरणा स्त्रोत है। उनसे प्रेरणा लेकर युवा एक नई सोच के साथ आगे बढ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा किसी देश की वह शक्ति होता है जो उसके इतिहास को लिखने के लिए सबसे आगे खड़ा होता है। भारत के इतिहास में अंग्रेजों के काल में खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह ,सुभाषचंद्र बोस जैसे देशभक्त क्रांतिकारियों ने देश में जो हलचल पैदा की उससे देश के इतिहास में स्वर्णिम काल स्थापित हुआ है। हमारे प्राचीन काल में सम्राट विक्रमादित्य चंद्रगुप्त मौर्य, समुद्र गुप्त जैसे अनेक योद्धाओं ने देश के बाहरी आक्रमणों से देश की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा जारी की गई र्स्टाटअप पालिसी भी इसी का एक बेहतरीन उदाहरण है। हमारे प्रधानमंत्री भी युवाओं की तरह आज लगातार नवाचार कर रहे है। प्राचीन समय से भारत का इतिहास युवाओं का इतिहास रहा है जिसमें वह अपने पूर्वजों के अनुभवों का लाभ लेकर नई सोच के साथ इतिहास को गढते है और देश को आगे बढ़ाते है साथ ही राष्ट्र गौरव का गौरव भी बढ़ाते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के अनेक युवाओं ने हमारे देश का नाम गौरवान्वित किया हैं। हमारे युवाओं में दृढ इच्छाशक्ति की कमी नही हैं। प्राचीन संस्कृति में बहुत अच्छे काम हुए हैं। युवाओं को इससे प्रेरणा लेना चाहिए। युवा देश का नाम दुनिया में आगे बढ़ाते रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उदाहरण देते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आइआरएस की परीक्षा उत्तीर्ण कर देश का नाम गौरांवित किया। उन्होंने आइआरएस जैसी नौकरी को त्यागकर देश की आजादी में बढ़ चढकर हिस्सा लिया था। राष्ट्रीय अवार्ड प्राप्त फिल्म निर्देशक  विवेक अग्निहोत्री ने कहा कि मालवा अंचल पर भी फिल्म का निर्माण किया जा सकता है। इस बात पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जयिनी के सम्राट राजा विक्रमादित्य, राजा भोज पर फिल्में बनाई जा सकती है।कार्यक्रम के प्रारंभ में  आशुतोष सिंह ठाकुर ने स्वागत भाषण देते हुए कॉन्फ्लूएंस के कार्यक्रम की जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने द ब्लड रिपब्लिक आफ बंगाल, फ्रेक्टल मंडला-ए हिस्ट्री आफ एन्शियंट इंडिया, संस्कृति सिन्थेसिस, फ्राम गॉड्स टू द गाड, स्वयंबोधा एंड शत्रुबोधा एवं बच्चे आपके संस्कार किसके? नाम की पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने नवीन आकृति भवन का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में  दीपक शर्मा, अवंतिका विश्वविद्यालय के कुलगुरु  नितिन राणे आदि उपस्थित थे।  

लाड़ली बहनों को दीपावली के पहले मिलेगी राशि : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

हर एक किसान के साथ खड़ी है सरकार, एक-एक खेत का किया जा रहा है सर्वे लाड़ली बहनों को दीपावली के पहले मिलेगी राशि : मुख्यमंत्री डॉ.यादव  133 करोड 80 लाख रुपए के विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की उन्हेल क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएं भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ है, आपदा ग्रस्त प्रत्येक किसान को मदद दी जाएगी। विपत्ति में आए हर एक किसान को राहत राशि मिलेगी और एक-एक खेत का सर्वे किया गया है। सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावांतर योजना का लाभ भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 133 करोड 80 लाख रुपए की लागत के निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण किया। इनमें 127. 63 करोड रुपए लागत के 23 किलोमीटर से अधिक लंबाई के इंगोरिया से उन्हेल टू लेन मार्ग निर्माण का भूमि-पूजन सम्मिलित है। साथ ही 1.26 करोड़ के नवीन नगर परिषद कार्यालय भवन निर्माण एवं 2.17 करोड़ के चिड़ी से रावदिया मार्ग निर्माण का भूमि पूजन तथा 2.74 करोड रुपए के करनावद विद्युत उपकेंद्र निर्माण का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हेल क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई, जिनमें उन्हेल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन, रामगढ़ बिहारिया मार्ग पर नारायण धाम को जोड़ने के लिए पुल का निर्माण तथा उन्हेल में विश्रामगृह का निर्माण सम्मिलित है। उन्हेल में इमली तथा मावा उद्योग से जुड़े हुए व्यक्तियों एवं उनके व्यापार विकास के लिए भी कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हेल-इंगोरिया टू लेन मार्ग निर्माण के लिए नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हेल क्षेत्र का विकास लगातार किया जा रहा हैं। गंभीर नदी परियोजना का लाभ भी उन्हेल क्षेत्र के नागरिकों तथा किसानों को मिलेगा। राज्य शासन द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के हित में भावांतर योजना लागू की गई है। किसानों को घर बैठे योजना का लाभ दिया जाएगा। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित फसलों के मामले में प्रभावित किसानों को राहत राशि दी जा रही है। जैसे-जैसे जिला कलेक्टरों से रिपोर्ट प्राप्त होती जा रही है, वहां के किसानों को राहत राशि का वितरण किया जा रहा है। किसानों को सम्मान निधि मिल रही है। बहनों को लाडली बहना योजना के तहत सहायता राशि दी जा रही है। यह राशि दीपावली के पूर्व उपलब्ध कराएंगे। गोपालन गौशाला योजना अंतर्गत 25 देसी गायों के पालन पर 40 लाख रुपए के प्रोजेक्ट में अधिकतम 10 लाख रुपए अनुदान शासन देगा। प्रदेश में गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास के सराहनीय कार्य लगातार किए जा रहे हैं। प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण पथ का विकास किया जा रहा है। ओरछा में आगामी 15 अक्टूबर को 100 करोड रुपए से ज्यादा लागत के कार्यों की शुरुआत की जा रही है। प्रदेश के चित्रकूट का भी विकास किया जा रहा है। सांसद श्री अनिल फिरोजिया ने कहा कि प्रदेश में किसान हितैषी मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा किसानों के हित में भावांतर योजना लागू की गई है, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। सरकार सदैव किसानों के साथ है। आपदा प्रभावित प्रत्येक किसान को शासन द्वारा मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही बीमा दावा राशि भी दिलाई जाएगी। विधायक श्री सतीश मालवीय ने कहा कि क्षेत्र को लगातार विकास की सौगात मिल रही है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। किसान हितैषी कार्यों के लिए क्षेत्रीय किसानों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को हल भेंट किया गया।  

दिव्यांगजन विशेष क्षमताओं के धनी हैं: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रेरणादायक संदेश

दिव्यांगजन अपने आप को कम न आंके, परमात्मा ने आपको विशिष्ट शक्तियां प्रदान की है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 146 दिव्यांगजनों को किए सहायक उपकरण वितरण तराना, माकडोन, उन्हेल, नागदा, खाचरौद और बड़नगर को शव वाहन वितरित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को कालिदास अकादमी परिसर में दिव्यांगजनों के लिए आयोजित उपकरण वितरण शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगजन अपने आप को कम न आंके परमात्मा ने आपको विशिष्ट शक्तियां प्रदान की हैं। महर्षि अष्टावक्र भी दिव्यांग थे लेकिन शास्त्रार्थ में उन्हें कोई भी पराजित नहीं कर सकता था वे अत्यंत विद्वान थे। ईश्वर यदि हमें कोई कमजोरी देता है तो साथ ही विशिष्ट शक्ति भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सेवा सप्ताह के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उपकरण वितरित किए जा रहे हैं। यह मानव सेवा भी है और एक प्रकार का आत्मिक सुख भी। सभी उपकरणों का अपने आप में बहुत महत्व होता है। श्रवण यंत्र का उपयोग करने के बाद श्रवण शक्ति का आभास होता है। इससे अत्यंत सुखद अनुभव होता है। हमारा शरीर ब्रह्मांड का स्वरुप है। नर सेवा भी वास्तविक अर्थों में ईश्वर की सेवा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन विशिष्ट शक्तियों को पहचानें, कठोर परिश्रम करें और जीवन में सफलता प्राप्त करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी दिव्यांगजनों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने दिव्यांगजनों को स्कूटी, स्पेशलाईज्ड ट्राइसिकल, वाकिंग स्टीक्स वितरित की। उन्होंने कहा कि मोटराइज्ड व्हीलचेयर और स्कूटी मिलने से दिव्यांग भाइयों और बहनों को रोजगार में सहायता होगी और उनके दैनिक जीवन में कार्य करने में सरलता आयेगी। इस अवसर पर सांसद  अनिल फिरोजिया ने कहा कि किसानों के हित के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर फसल क्षति पर राहत राशि दी जा रही हैं और कृषकों को फसल का उचित भाव दिलाने के लिए भावांतर योजना की भी शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व.  भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति और सामाजिक शोध संस्थान द्वारा आयोजित सेवा कार्यक्रम में 146 दिव्यांग हितग्राहियों को 1 करोड़ 25 लाख रुपए की राशि से इलेक्ट्रिक स्कूटर, कान की मशीन, वॉकिंग स्टीक, व्हीलचेयर आदि उपकरण वितरण किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मानव सेवा के लिए जिले की 6 नगर परिषदों माकडोन, उन्हेल, नागदा, खाचरौद, तराना और बड़नगर को शव वाहन भी वितरण किये। इलेक्ट्रिक स्कूटर चालकों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर की। कार्यक्रम का आभार  सुदर्शन ने माना। इस अवसर पर विधायक  सतीश मालवीय, नगर निगम सभापति मती कलावती यादव,  संजय अग्रवाल,  राजेंद्र भारती और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।