samacharsecretary.com

लोक संस्कृति सम्मान के लिए भगोरिया पर्व पर बड़वानी में कृषि कैबिनेट की बैठक, बोले मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोक संस्कृति के सम्मान के प्रकटीकरण के लिए भगोरिया पर्व पर बड़वानी में कृषि कैबिनेट: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बसंत और रंगों के पर्व होली की मंगलकामनाएं देश का फूड बास्केट है मध्यप्रदेश परीक्षा के समय में तनावमुक्त रहें विद्यार्थी मध्य पूर्व की वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति में राज्य सरकार, वहां रह रहे प्रदेश के परिवारों के साथ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को होली पर्व की मंगलकामनाएं देते हुए कहा कि ईश्वर से प्रार्थना की कि बसंत और रंगों का यह उत्सव सभी के लिए शुभ और कल्याणकारी हो। उन्होंने कहा कि आज भगोरिया पर्व का भी आखिरी भगोरिया है। राज्य सरकार वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। पर्व के समय जनजातीय भाई बहनों के साथ रहने और लोक संस्कृति के सम्मान के प्रकटीकरण के लिये पहली कृषि कैबिनेट बड़वानी में सोमवार को आयोजित की गई है। यह प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के विकास के लिए हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में किसानों सहित युवा, महिला, गरीब, सभी के कल्याण के लिए गतिविधियां संचालित हैं। राज्य सरकार ने किसान कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की हैं। फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने के लिए भावांतर योजना में अब सरसों को भी शामिल किया जा रहा है। उड़द प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब किसानों को उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाएगा। मध्यप्रदेश दलहन-तिलहन सहित सभी कृषि उत्पादों में एक प्रकार से देश का फूड बास्केट है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश कृषि और उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में निरंतर उन्नति करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विद्यार्थियों के लिए परीक्षा का समय है, जो उनके लिए विशेष महत्व का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से तनावमुक्त रहते हुए और स्वयं का ध्यान रखते हुए होली पर्व का आनंद लेने और परीक्षा सहित अपने सभी कर्तव्यों का जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यपूर्व की वर्तमान क्षेत्रीय स्थिति के संबंध में कहा कि प्रदेश के कई नागरिक इन देशों में हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में हमारा प्रयास है कि किसी भी नागरिक को कष्ट नहीं हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बतया कि उन्होंने मध्यपूर्व के देशों में रह रहे प्रदेश के कई परिवारों से दूरभाष पर बात की है। राज्य सरकार इन परिवारों के साथ है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने भीलट देव से समृद्धि की कामना, निमाड़-मालवा में श्रद्धा का माहौल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव से सभी की समृद्धि के लिए की कामना लोक देवता भीलट देव के आंगन नागलवाड़ी में है पहली कृषि कैबिनेट भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्रियों ने सोमवार को निमाड़-मालवा के लोक देवता भीलट देव का दर्शन कर प्रदेश के किसानों की सुख समृद्धि की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की। किसान कल्याण वर्ष में बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक के पहले दर्शन लाभ लेने के बाद सतपुड़ा की पहाडी पर विराजित लोक देवता के रमणीय स्थल की सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। भीलट देव निमाड़-मालवा क्षेत्र के आराध्य देव है। आज वे आराध्य के दर्शन के साथ ही कैबिनेट बैठक की शुरूआत करेंगे। कैबिनेट में जो भी निर्णय लिये जायेंगे वे प्रदेशवासियों एवं किसानों के हितार्थ होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि निमाड़वासी बड़े सौभाग्यशाली हैं जो उन्हें मां नर्मदा का आंचल मिला है। मां नर्मदा के जल से ही सिंचाई करके निमाड़ क्षेत्र के किसान समृद्ध एवं प्रगतिशील हो रहे हैं। आज निमाड़ क्षेत्र के किसान कृषि एवं उद्यानिकी की एक से अधिक फसलें लेकर आर्थिक रूप से भी उन्नति कर रहे हैं। मां नर्मदा का जल सूक्ष्म उन्नयन सिंचाई परियोजनाओं से बड़वानी जिले सहित निमाड़ क्षेत्र में किसानों को सिंचाई के लिये मिल रहा है। किसानों की आर्थिक उन्नति से ही प्रदेश की उन्नति होगी प्रदेश की सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है, जिससे किसानों को और अधिक समृद्ध एवं संपन्न बनाया जाए। उन्होंने किसानों से यह अपील भी कि की मृदा की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए किसान भाई रासायनिक खेती के स्थान पर प्राकृतिक खेती को अपनाएं। शुरुआती वर्षों में प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम होगा लेकिन उससे प्रारंभ में मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और फिर धीरे-धीरे उत्पादन की क्षमता भी बढ़ती जाएगी। भीलट देव मंदिर अत्यंत रमणीय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संपूर्ण मंदिर परिसर को देखते हुए कहा कि सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसा हुआ नागलवाड़ी भीलट देव मंदिर अत्यंत रमणीय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण स्थल है। भीलट देव के तपस्या स्थल पर बने मंदिर के जीर्णोद्धार में निमाड़ के संत  सियाराम बाबा का भी अमूल्य योगदान है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद सदस्यों के साथ नागलवाड़ी मंदिर दर्शन के बाद सामूहिक फोटो भी खिंचवाया। निमाड़ के खेत और बाड़ियों में उपजने वाली फसलों की प्रदर्शनी का अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट से पहले निमाड़ के फार्म/खेतो और बाड़ियों में उपजने वाली फसलों का परिसर में आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव को किसानों ने निमाड़ की कृषि पद्धतियों के बारे में अवगत कराया। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित प्रदर्शनी के सम्बंध में बड़वानी कलेक्टर मती जयति सिंह ने प्रस्तुतिकरण भी दिया। अलग-अलग थीम पर आधारित रही प्रदर्शनी कृषि कैबिनेट के मद्देनजर जिला प्रशासन और कृषि कार्यों से जुड़े विभागों ने प्रदर्शनी में अलग-अलग थीम पर अपना प्रस्तुतिकरण किया गया। इनमें प्राकृतिक खेती क्रियान्वयन और प्रभावी मॉडल, वोकल फ़ॉर लोकल, केले का विकास मॉडल, डॉलर चना संपूर्ण मूल्य श्रृंखला, बड़वानी मिर्च प्लास्टर, तिल उभरती हुई विकासशील फसल, गन्ना आर्थिक और प्रभावी मॉडल, मिशन सिकलसेल उन्मूलन कार्यक्रम, नवाचार वन्य ग्राम समृद्धि अभियान थीम पर आधारित थी।  

बड़वानी के पानसेमल और वरला में 2 हजार 67 करोड़ रूपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति

कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बड़वानी के पानसेमल और वरला में 2 हजार 67 करोड़ रूपये लागत की माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति 86 जनजातीय ग्राम होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और नर्मदा नियंत्रण मंडल की बैठक हुई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बड़वानी के नांगलवाड़ी में सोमवार को हुई नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक और नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में 1 हजार 207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत की पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 860 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत की वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में कृषकों का हित और कल्याण शासन की प्राथमिकता है, जिसे ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जा रही हैं। इन माइक्रो उद्वहन परियोजनाओं से बड़वानी जिले के लाभान्वित होने वाले पानसेमल तहसील के 53 ग्राम और वरला तहसील के 33 ग्राम ऊंचाई में स्थित होने, अल्पवर्षा क्षेत्र होने और भूजल स्तर अत्यंत कम होने से सिंचाई सुविधा से वंचित रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की 11 जनवरी 2025 की घोषणा के अनुपालन में पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना और 14 नवंबर 2025 की घोषणा के अनुपालन में वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना की नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 269वीं बैठक में प्रशासकीय स्वीकृति की अनुशंसा की गई, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण मंडल की 86वीं बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई है। पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में उपलब्ध होगी सिंचाई सुविधा पानसेमल माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना के माध्यम से बड़वानी जिले की तहसील पानसेमल में 22 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में लगभग 1,207 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से ग्राम सोंदुल से नर्मदा नदी से 7.20 क्यूमेक (74.65 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा, जिससे 53 जनजातीय ग्राम लाभान्वित होंगे। परियोजना अंतर्गत भूमिगत प्रेशराइज्ड पाइप्ड नहर प्रणाली से पाइपलाइन बिछाकर सिंचाई व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे कृषक सीधे स्प्रिंकलर और ड्रिप इरीगेशन पद्धति से खेतों में सिंचाई कर सकेंगे। परियोजना में कोई डूब क्षेत्र नहीं है। भूमिगत पाइपलाइन, राइजिंग मेन और ग्रैविटी मेन के लिए 48.79 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई भूअर्जन, पंप हाउस और ट्रांसमिशन लाइन निर्माण के लिए 4 हेक्टेयर स्थाई भूअर्जन तथा 18 हेक्टेयर वन भूमि का अर्जन किया जाएगा। परियोजना के तहत 3 पंप हाउस से कुल 339.67 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए 5 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में कुल 34.60 मेगावाट विद्युत की आवश्यकता होगी जिस पर वार्षिक विद्युत व्यय 34 हजार 249 रुपए प्रति हेक्टेयर रहेगा। वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र होगा सिंचित वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना अंतर्गत बड़वानी जिले की तहसील अंजड़ के ग्राम मोहिपुरा से नर्मदा नदी से 4.96 क्यूमेक (51.42 एमसीएम) जल उद्वहन किया जाएगा जिससे तहसील वरला के 33 जनजातीय ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना की कुल लागत 860 करोड़ 53 लाख रुपए प्राक्कलित की गई है, जिसमें 4 पंप हाउस के माध्यम से 390 मीटर तक जल उद्वहन का प्रावधान किया गया है। परियोजना में 30.5 मेगावाट विद्युत आवश्यकता होगी जिस पर 33 हजार 316 रुपए वार्षिक विद्युत व्यय प्रति हेक्टेयर रहेगा। परियोजना के लिए 30 हेक्टेयर वन भूमि, 204.13 हेक्टेयर निजी भूमि का अस्थाई तथा 7.5 हेक्टेयर निजी भूमि का स्थाई भूअर्जन किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव तथा उपाध्यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि पानसेमल और वरला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं से लाभान्वित होने वाले ग्राम जनजातीय बहुल होने के साथ वन से घिरे हुए हैं। इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद बड़वानी जिले में कुल 70 प्रतिशत क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, जो वर्तमान में 60 प्रतिशत है। उन्होंने परियोजनाओं के विभिन्न घटकों का तकनीकी विवरण प्रस्तुत किया। बैठक में 10 नवंबर 2025 को आयोजित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 268वीं बैठक तथा नर्मदा नियंत्रण मंडल की 85वीं बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि भी की गई।  

सीएम मोहन यादव का बड़ा कदम: होली और रमजान पर एमपी में हाई अलर्ट, सख्त सुरक्षा निर्देश

भोपाल  होली और रमजान समेत आगामी त्योहारों को लेकर मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था की तैयारियों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद राजधानी भोपाल समेत प्रदेश भर में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार हाई अलर्ट मोड में है। सीएम मोहन यादव ने प्रदेशभर के अधिकारियों को सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। VC में दिए स्पष्ट और सख्त निर्देश, एमपी को बताया शांति का टापू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई इस समीक्षा बैठक में प्रदेश भर के जिलों के एसपी ऑनलाइन शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी अफसरों को कहा कि मध्य प्रदेश शांति का टापू है, इसकी ये छवि बनाए रखना है। वहीं उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि शांति और सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। त्योहार खुशियों के हों, तनाव के नहीं- सीएम सीएम ने समीक्षा बैठक आयोजित कर वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष निगरानी रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर उन क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया जाए। इसके साथ ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तेज करने और अफवाहों पर तत्काल एक्शन करने और निपटने को कहा है। मोहन यादव ने बैठक में कहा कि त्योहारों का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, समाज को तोड़ना नहीं। प्रशासन प्राथमिकता तय करे कि आम नागरिक सुरक्षित और बेफिक्र होकर त्योहार मनाए। यहां जानें प्रशासन के खास इंतजाम संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च- जिन क्षेत्रों को संवेदनशील माना गया है, जहां पहले तनाव की घटनाएं सामने आई हैं, वहां पुलिस और प्रशासन संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च करेगा। ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी- भीड़भाड़ वाले बाजार, धार्मिक स्थल और जुलूस मार्गों पर ड्रोन कैमरों के साथ ही अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाएं गए हैं। शांति समितियों की बैठक– स्थानीय स्तर पर धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सामंजस्य की अपील की जा रही है। अफवाहों पर तुरंत कार्रवाई के आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम आगि पर भ्रामक जानकारी पोस्ट करने पर, अफवाह फैलाने वालों पर साइबर सेल की नजर रहेगी। प्रशासन का फोकस- प्री एम्प्टिव एक्शन जानकारी के मुताबिक इस बार रणनीति केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एहतियात बरतना है। जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी छोटी घटना को हल्के में न लें। रात के समय गश्त बढ़ाई जाए। जुलूस मार्गों पर जुलूस पूर्व जांच की जाए। राजनीतिक और सामाजिक संदेश सीएम मोहन यादव ने यह भी संकेत दिए हैं कि त्योहारों को लेकर किसी तरह की राजनीति या उकसावों की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो, ताकि आमजन में भरोसा कायम रहे। बता दें कि रमजान के बीच होली पर्व आने से प्रशासन के लिए सौहार्द्र और शांति बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। क्योंकि एक तरफ रंग-गुलाल और जुलूसों का माहौल होता है, तो दूसरी तरफ रोजा और इबादत की पाबंदियों का समय। ऐसे में समय, मार्ग और कार्यक्रमों में समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाता है। जन-जन से अपील अफवाहों पर ध्यान न दें संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी का ध्यान रखते हुए कोई भी पोस्ट शेयर करें सांप्रदायिक सौहार्द्र और शांति बनाए रखें

भिलट देव के दर्शन के बाद सीएम डॉ. मोहन यादव ने की कैबिनेट बैठक की तैयारी, कृषि कैबिनेट होगी अब

बड़वानी  कृषि कल्याण वर्ष के अंतर्गत बड़वानी जिले में आयोजित कैबिनेट बैठक के पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रीगणों के साथ बड़वानी जिले के ग्राम नागलवाड़ी में स्थित मंदिर में भिलट देव के दर्शन कर पूजन-अर्चन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रीगणों के साथ प्रदेशवासियों की सुख एवं समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश की सरकार प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। भिलट देव निमाड़ क्षेत्र के आराध्य देव है, अतः आज वे आराध्य के दर्शन के साथ ही कैबिनेट बैठक की शुरूआत करेंगे। कैबिनेट में जो भी निर्णय लिये जायेंगे वे प्रदेशवासियों एवं किसानों के हितार्थ होंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निमाड़वासी बड़े सौभाग्यशाली हैं जो उन्हें मां नर्मदा का आंचल मिला है। पैगोडा, हट और डोम में किए इंतजाम मां नर्मदा के जल से ही सिंचाई करके निमाड़ क्षेत्र के किसान समृद्ध एवं प्रगतिशील हो रहे हैं। आज निमाड़ क्षेत्र के किसान कृषि एवं उद्यानिकी की एक से अधिक फसलें लेकर आर्थिक रूप से भी उन्नति कर रहे हैं। मां नर्मदा जी का जल सूक्ष्म उन्नयन सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से बड़वानी जिले सहित निमाड़ क्षेत्र में किसानों को सिंचाई हेतु पहुंचाया जा रहा है। किसानों की आर्थिक उन्नति से ही प्रदेश की उन्नति होगी प्रदेश की सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है, ताकि किसानों को और अधिक समृद्ध एवं संपन्न बनाया जाए। उन्होंने किसानों से यह अपील भी कि की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए किसान भाई रासायनिक खेती की बजाय प्राकृतिक खेती को अपनाये शुरुआती वर्षों में प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम होगा लेकिन उससे जहां मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी वहीं धीरे-धीरे उत्पादन की क्षमता भी बढ़ती जाएगी। संपूर्ण मंदिर परिसर को देखते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसा हुआ नांगलवाड़ी भिलट देव मंदिर अत्यंत रमणीय एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण स्थल है। भिलट देव जी की इस तपस्या स्थल पर बने इस विशाल मंदिर के जीर्णोद्धार में निमाड़ के संत श्री सियाराम बाबा का भी अमूल्य योगदान है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रीगणो के साथ नागलवाड़ी मंदिर की स्मृति स्वरूप सामूहिक फोटो भी खिंचवाया। निमाड़ी शैली में सजाया निमाड़ के बड़वानी जिले में पहली बार नागलवाड़ी में सरकार की कृषि कैबिनेट की बैठक होने जा रही हैं। मुख्यमंत्री व कैबिनेट मंत्रियों के स्वागत के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। इसके लिए निमाड़ी लोकरंग के रूप में कैबिनेट स्थल को तैयार किया गया है। नागलवाड़ी मंदिर शिखर के नीचे पार्क में डोम को निमाड़ में घरों की शैली के अनुरूप सजाया गया है। साथ ही खेती किसानी के तौर तरीके के अनुरूप प्रदर्शनी लगाई गई है। निमाड़ के वाद्य यंत्र ढोल मांदल व लोकजीवन के रंगों में इसे सजाया है। मध्य प्रदेश के कैबिनेट व अधिकारियों सहित आने वाले आगंतुकों के लिए निमाड़ के व्यंजनों में निमाड़ के जायका यानी निमाड़ी मिर्च का खास मिश्रण होगा। निमाड़ के व्यंजनों में मुख्य रूप से अमाड़ी की भाजी के साथ मक्के की रोटी होगी।

कृषि कैबिनेट की बैठक नागलवाड़ी में आज, बड़वानी में आदिवासी इलाकों पर होगी पूरी मंत्रिमंडल की फोकस

बड़वानी मध्य प्रदेश सरकार की 'कृषि कैबिनेट' की बैठक आज भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक के दौरान, राज्य सरकार किसानों के हित में अहम फैसले लेगी। अधिकारियों ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के दौरान 'कृषि कैबिनेट' की यह पहली मीटिंग होगी। किसान कल्याण वर्ष को पूरे राज्य में मनाया जा रहा है। सीएम यादव ने 11 जनवरी को यहां एक इवेंट में 'कृषक कल्याण वर्ष' लॉन्च किया था। अधिकारियों ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार के तरफ से किसान कल्याण वर्ष के तहत किसानों को फायदा पहुंचाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं। साथ ही उनकी इनकम दोगुनी करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। किसानों और बुद्धिजीवियों संग होगी बात सरकार की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, "पूरी राज्य कैबिनेट नागलवाड़ी में दिन बिताएगी, जहां एग्रीकल्चर कैबिनेट मीटिंग के अलावा, किसानों और बुद्धिजीवियों के साथ बातचीत होगी। एग्रीकल्चर और ट्राइबल वेलफेयर पर फोकस्ड एक एग्जिबिशन भी लगाई जाएगी।''. 24 फरवरी को विधानसभा सत्र के दौरान सीएम ने इसी घोषणा की थी। यह कैबिनेट प्रदेश की छठी डेस्टिनेशन बैठक है। कैबिनेट में निमाड़ के सात जिलों खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर पर फोकस रहेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंत्रिमंडल के साथ शिखरधाम पहुंचकर बाबा भीलट देव के दर्शन करेंगे। इसके बाद कैबिनेट बैठक होगी, जिसमें 25 से अधिक मंत्रियों के शामिल होंगे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री जनजातीय समुदाय के लोगों से संवाद भी करेंगे। मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल जुलवानिया के भगोरिया हाट में भी शामिल होंगे। रविवार को जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने नागलवाड़ी पहुंचकर बैठक स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने कलेक्टर जयति सिंह से तैयारियों की जानकारी ली। शिखरधाम में बाबा भीलट देव के दर्शन भी किए। भीलट देव मंदिर में पूजा-अर्चना करेगा मंत्रिमंडल करीब 6000 की आबादी वाला नागलवाड़ी एक आदिवासी बहुल गांव है। कृषि कैबिनेट न केवल बड़वानी जिले के लिए बल्कि मध्य प्रदेश के पूरे निमाड़ क्षेत्र के विकास के लिए निर्णायक होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि नागलवाड़ी में 800 साल पुराना प्राचीन भीलट देव मंदिर आदिवासी आस्था में खास महत्व रखता है। कृषि कैबिनेट मीटिंग के बाद पूरा मंत्रिमंडल वहां पूजा-अर्चना करेगी। किसानों से बात करेंगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री मोहन यादव कृषि कैबिनेट मीटिंग के बाद किसानों और जानकारों से बातचीत करेंगे, सरकार की पहल और स्कीमों की जानकारी साझा करेंगे और इलाके के विकास के बारे में उनके विचार और उम्मीदें भी जानेंगे। यादव और उनके मंत्री जुलवानिया में आदिवासी समुदाय द्वारा आयोजित पारंपरिक 'भगोरिया हाट' में भी हिस्सा लेंगे। बड़वानी समेत आदिवासी बहुल जिलों में चल रहा भगोरिया उत्सव सोमवार को मध्य प्रदेश में खत्म हो जाएगा। भगोरिया त्योहार झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी और धार जिलों में आदिवासी समुदाय मनाते हैं। यह त्योहार वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और देश-विदेश से टूरिस्ट को आकर्षित करता है। शिवराज चौहान ने बनाई थी कृषि कैबिनेट अधिकारियों ने कहा कि कैबिनेट मीटिंग के अलावा सभी प्रोग्राम आदिवासी परंपराओं को दिखाएंगे। देश की पहली कृषि कैबिनेट 2011 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बनाई थी, जो अब केंद्रीय कृषि मंत्री हैं।

कृषि को पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़ाकर लाभकारी व्यवसाय बनाएंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

कृषक कल्याण वर्ष-2026 कृषि को पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़ाकर बनाया जायेगा लाभकारी व्यवसाय : मुख्यमंत्री डॉ.यादव म.प्र.को देश के कृषि पॉवर-हाउस के रूप में किया स्थापित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने पिछले दशक में कृषि क्षेत्र में 16 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक विकास दर हासिल कर स्वयं को देश के 'कृषि पॉवर-हाउस' के रूप में स्थापित किया है। फसल उत्पादन, उत्पादकता, दुग्ध और मत्स्य पालन में हुई। इस अभूतपूर्व प्रगति के बाद अब राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य कृषि को पारंपरिक उत्पादन से आगे बढ़ाकर एक 'लाभकारी व्यवसाय' के रूप में परिवर्तित करना है। इस संकल्प के केंद्र में कृषि के उत्पादन और उत्पादकता को तकनीक के माध्यम से बढ़ाते हुए, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग से जोड़ना है। समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश के लिए वर्ष-2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। कृषि और किसानों पर केन्द्रित पूरे वर्ष संचालित होने वाली गतिविधियों से किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कृषि को 'लाभकारी व्यवसाय' बनाने के इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए सरकार कृषि अनुसंधान और मौसम आधारित जोखिम प्रबंधन को एक नई दिशा देने जा रही है। इस संकल्प के अंतर्गत राज्य की विशिष्ट फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करते हुए उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए महत्वपूर्ण अनुसंधान केंद्रों की स्थापना की जा रही है, इसी क्रम में डिंडौरी में स्थापित होने जा रहे 'मध्यप्रदेश राज्य अन्न अनुसंधान केंद्र' के माध्यम से मिलेट्स के उत्पादन एवं पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। इसी कड़ी में, ग्वालियर में सरसों अनुसंधान केंद्र और उज्जैन में चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना कर इन प्रमुख फसलों की गुणवत्ता और पैदावार को बढ़ाने पर विशेष बल दिया जायेगा। 'विदेश अध्ययन भ्रमण योजना' कृषि क्षेत्र में वैश्विक नवाचारों को आत्मसात करने के लिए किसानों और अधिकारियों के लिए 'विदेश अध्ययन भ्रमण योजना' को पुनः प्रारंभ किया जा रहा है, जिससे विश्व की उन्नत तकनीकों को स्थानीय स्तर पर लागू किया जा सके। इसके साथ ही, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खेती के लिए एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जो किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त और मजबूत स्रोत बनेगी। खेती की मौसम पर निर्भरता और उससे जुड़ी अनिश्चितताओं को कम करने के लिए सरकार तकनीक-आधारित जोखिम प्रबंधन पर विशेष निवेश कर रही है। इसके तहत पूरे प्रदेश में 'विंडस' (Weather Information Network Data System) विकसित किया जा रहा है, जो किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान और तात्कालिक कृषि सलाह (एग्री-एडवाइजरी) सीधे उनके मोबाइल पर उपलब्ध कराएगा। यह प्रणाली न केवल प्राकृतिक आपदाओं से फसल को बचाने में मदद करेगी, बल्कि बुवाई और कटाई के समय को वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगी। किसानों को दिया जायेगा पूर्ण सुरक्षा कवच किसानों को पूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से अब मौसम आधारित बीमा योजना का दायरा बढ़ाकर उसमें उद्यानिकी फसलों को भी शामिल किया जा रहा है। अनुसंधान, विविधीकरण और डिजिटल वेदर मैनेजमेंट का यह एकीकृत संगम न केवल कृषि को जोखिम मुक्त बनाएगा, बल्कि 'समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश' के संकल्प को वास्तविकता में बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता के नए सोपान पर खड़ा करेगा। 10-दिशात्मक रणनीति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने व्यापक '10-दिशात्मक रणनीति' तैयार की है। इसके प्रथम आयाम के तहत -अन्न (मिलेट्स), चना और सरसों जैसी फसलों पर गहन शोध और उर्वरकों के अग्रिम भंडारण पर जोर दिया गया है। साथ ही तिलहन भावान्तर व्यापीकरण, उड़द/मूंगफली, गन्ना क्षेत्र विस्तारण, ई-विकास व्यापीकरण, उर्वरक अग्रिम भंडारण, पराली से उर्जा प्रबंधन इत्यादि कार्य सम्मिलित हैं। द्वितीय आयाम फसल विविधीकरण और प्राइस स्टेबिलाइज़ेशन (मूल्य स्थिरीकरण)' पर केंद्रित है, जिससे आलू-प्याज-टमाटर जैसी फसलों के दाम गिरने पर भी किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें। तृतीय आयाम पूरी तरह से "प्राकृतिक मध्यप्रदेश" मिशन को समर्पित है, जहाँ रसायन मुक्त खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। चतुर्थ और पंचम आयाम में संसाधनों के इष्टतम उपयोग, जैसे 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0' और मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन को शामिल किया गया है। कृषि अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने के लिए 10 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट की स्थापना इस अभियान का एक मुख्य आकर्षण है। छठे से आठवें आयाम तक का ध्यान कृषि मंडियों के आधुनिकीकरण, "MP ग्लोबल एग्री ब्रांडिंग" और 'एग्री-हैकाथॉन' जैसे नवाचारों पर है। अंतिम दो आयाम डिजिटल गवर्नेस और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं, जिसमें एआई (AI)-आधारित कृषि परामर्श और क्यूआर कोड (QR Code) आधारित फार्म ट्रेसेबिलिटी शामिल है। संस्थागत सुधार और शैक्षिक पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष 2026 केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करने की पहल है। अनुसंधान केन्द्रों की स्थापना एवं कृषकों का क्षमता संवर्धन इस वर्ष का महत्वपूर्ण घटक होगा। इसी अनुक्रम में सरकार द्वारा कृषि विभाग और मंडी बोर्ड में रिक्त पदों की सीधी भर्ती भी की जाएगी।  

भील समुदाय से निशानेबाजी सीखे थे आजाद, उनके जन्मस्थान पर होगा बड़ा पार्क, CM का ऐलान

आलीराजपुर महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की विरासत को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार उनकी जन्मस्थली भाभरा में एक बड़ा पार्क बनाएगी। इस बात की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  की। आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ में स्थित भाभरा में हुआ था और उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को देश के लिए अपनी जान दे दी थी। महानायक की पुण्यतिथि पर भाभरा में आयोजित 'आजाद स्मृति समारोह' में बोलते हुए, यादव ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद नगर (भाभरा) में उनके नाम पर एक बड़ा पार्क बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद 14 साल की छोटी सी उम्र में स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे और आजादी की लड़ाई में उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। भील समुदाय से सीखी थी निशानेबाजी यादव ने आजाद को एक बेहतरीन निशानेबाज बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना बचपन अलीराजपुर के भील समुदाय के बच्चों के बीच बिताया था और उनसे ही निशानेबाजी की कला भी सीखी थी। यादव ने कहा, ' आजाद की विरासत से जुड़ी जगहों को भी संस्कृति विभाग की मदद से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।' आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को संजोया जा रहा यादव ने कहा, 'राज्य सरकार आदिवासी महापुरुषों की विरासत को बचाने के लिए समर्पित है। खरगोन में टंट्या भील के नाम पर एक यूनिवर्सिटी बनाई गई है। इसी तरह, आजादी की लड़ाई के दूसरे आदिवासी नायकों से जुड़ी जगहों को भी संजोकर रखा जा रहा है।' आलीराजपुर जिले को मिली 171 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात इस दौरान मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल अलीराजपुर जिले में 171 करोड़ रुपए की लागत वाले 49 विकास कार्यों का उद्घाटन और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि जिले में 1,800 करोड़ रुपए की लागत वाले नर्मदा सिंचाई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, और इसके पूरा होने पर 170 गांवों को पानी मिलेगा। उदगढ़ में मशहूर आदिवासी त्योहार भगोरिया में शामिल हुए यादव ने कहा कि इस अनुभव ने उनका दिल खुशी से भर दिया। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि MP सरकार ने भगोरिया को राष्ट्रीय त्योहार के तौर पर मनाने का फैसला किया है। भगोरिया त्योहार होली से ठीक पहले मनाया जाता है, जिसमें हर हफ़्ते मेले लगते हैं जो पश्चिमी मध्य प्रदेश के आदिवासियों के रंगीन त्योहारों को दिखाते हैं। ये मेले अलीराजपुर, झाबुआ, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों में 100 से ज्यादा जगहों पर लगते हैं।

सागर में CM मोहन की 7 बड़ी घोषणाएं, सौगातों का पिटारा खोलकर दिया बड़ा तोहफा

सागर   मुख्यमंत्री सीएम मोहन यादव ने सागर जिले में सौगातों को झड़ी लगा दी। जहां वे  जिले के गढ़ाकोटा में तीन दिवसीय रहस मेला में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने मंच से महज चार मिनट में कई बड़ी घोषणाएं कर सबको चौंका दिया। पूर्व मंत्री व क्षेत्रीय विधायक गोपाल भार्गव की मांगों पर त्वरित निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, खेल, कृषि और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को हरी झंडी दी। 4 मिनट में 7 घोषणाएं: विकास को रफ्तार मुख्यमंत्री ने रहली और गढ़ाकोटा कृषि उपज मंडी के लिए 5-5 करोड़ रुपये तथा शाहपुर उपमंडी के लिए 1 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। रहली–रमखरिया–सिमरिया नायक बहेरिया तक 22 किमी मार्ग को टू-लेन करने के 46 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही शाहपुर-मोकलपुर मार्ग पर फ्लाईओवर निर्माण, रहली व गढ़ाकोटा में मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खोलने और फूड पार्क स्थापित करने की घोषणा ने क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगा दी। मांगों की लंबी सूची, त्वरित निर्णय यह गढ़ाकोटा में मुख्यमंत्री का तीसरा कार्यक्रम था। मंच से विधायक गोपाल भार्गव ने दस से अधिक मांगें रखते हुए क्षेत्र में बेरोजगारी और अधोसंरचना की जरूरतों का मुद्दा उठाया। मांगों की लंबी सूची देखकर मुख्यमंत्री मुस्कराएं, कुछ पल विचार किया और सात प्रमुख मांगों को स्वीकृति दे दी। उन्होंने सांसद-विधायकों की समिति बनाकर व्यवहारिक प्रस्ताव तैयार करने की बात कही, ताकि जो संभव हो उसे प्राथमिकता से पूरा किया जा सके। सामाजिक सुरक्षा: 196 करोड़ की सौगात कार्यक्रम स्थल से ही मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 32 लाख 78 हजार 735 हितग्राहियों के खातों में सिंगल क्लिक से 196.72 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए। इनमें सागर जिले के 2 लाख 688 लाभार्थियों को 12.03 करोड़ रुपये की राशि मिली। यह कदम राज्य सरकार की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली को मजबूत करने और पात्र हितग्राहियों तक पारदर्शी तरीके से सहायता पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्कूली बच्चों को मिलेगा मुफ्त दूध मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़े दुग्ध उत्पादन का उल्लेख करते हुए आठवीं कक्षा तक के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए “मां यशोदा” योजना शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के तहत बच्चों को स्कूल स्तर पर दूध का पैकेट उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा कि जैसे मां यशोदा के स्नेह और पोषण से श्रीकृष्ण सशक्त बने, वैसे ही प्रदेश के बच्चों को भी पोषण देकर स्वस्थ और मजबूत बनाया जाएगा।  

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड का प्लान बदला, अब एलिवेटेड नहीं, जमीन पर ही निर्माण होगा

इंदौर  इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को लेकर किसान विरोध कर रहे थे। किसानों के विरोध को देखते हुए सरकार झुक गई है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जाएगा। किसानों को मिलेगा उचित मुआवजा सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने   इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न गांवों से आए किसान प्रतिनिधियों से चर्चा की है। सरकार के फैसले का किसानों ने आभार जताया है। फोर लेन का हो रहा है निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रुपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जा रहा है। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे। सिंहस्थ को देखते हुए निर्माण मोहन यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि इसे लेकर आसपास के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया था। बड़े पैमाने पर किसान अनिश्चितकालीन धरना पर बैठने वाले थे। इसके बाद किसानों को भोपाल बुलाया गया और उनसे बातचीत के बाद सीएम मोहन यादव ने समस्या का हल निकाला है।